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भोपाल समेत पूरे क्षेत्र में अब तक 4.45 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित

भोपाल  केन्द्र सरकार की रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) योजना के अंतर्गत मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने का काम त्वरित गति से चल रहा है। जहां स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, वहां पर समय पर बिलिंग तथा रीडिंग हो रही है। साथ ही दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट भी मिलनी शुरू हो गई है। कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के जिलों में अब तक 4 लाख 45 हजार 644 स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें सर्वाधिक भोपाल शहर वृत्त में 2 लाख, 52 हजार 772 स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। कंपनी ने कहा है कि स्मार्ट मीटर लगने से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं, सटीक बिलिंग और ऊर्जा दक्षता में सुधार हो रहा है। स्मार्ट मीटर लगाने का काम समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए कंपनी की टीमें लगातार कार्य में जुटी हुई हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्मार्ट मीटर के फायदे बताते हुए कहा है कि स्मार्ट मीटर से रियल टाइम डेटा प्राप्त किया जा सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को सटीक और समय पर बिलिंग सुनिश्चित की जा रही है। कंपनी ने बताया कि जहां-जहां भी स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं वहां पर बिलिंग तथा रीडिंग निर्धारित समय पर हो रही है, इससे सभी उपभोक्ता संतुष्ट हैं। नए टैरिफ आर्डर के अनुसार स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को अब खपत के आधार पर दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है। अक्टूबर माह का बिल जो कि नवंबर माह में जारी हुआ है, उसमें दिन के टैरिफ में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपयोग की गई विद्युत के दौरान बनी यूनिट पर छूट अलग कॉलम में अंकित की गई है।  

रामनगरी अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव की तैयारी, होटल-हाउसिंग पूरी तरह भरी और श्रद्धालुओं का उमड़ता हुजूम

 अयोध्या उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान श्रीराम की पावन नगरी इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के रंग में पूरी तरह रंगी हुई है. श्रीराम मंदिर के शिखर पर होने वाले ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह ने पूरे शहर को एक भव्य उत्सव स्थल में बदल दिया है. इस आयोजन को लेकर अयोध्या में देशभर से श्रद्धालुओं, संतों और विशिष्ट अतिथियों का आगमन लगातार जारी है, जिसके कारण शहर के सभी होटल, गेस्ट हाउस, धर्मशालाएं और होमस्टे पूरी तरह हाउसफुल हो चुके हैं. 20 नवंबर से 30 नवंबर तक एक भी कमरा खाली नहीं स्थानीय होटल संचालकों के अनुसार, 20 नवंबर से 30 नवंबर तक अयोध्या में एक भी कमरा खाली नहीं है. चाहे दो या तीन सितारा होटल हों या लग्जरी होम स्टे हर जगह ‘हाउसफुल’ का बोर्ड टंगा हुआ है. यहां तक कि मंदिर क्षेत्र से दूर के इलाकों में भी कमरे महीनों पहले बुक हो चुके हैं. राम मंदिर का गेट नंबर 11, जिसे विशेष रूप से वीवीआईपी प्रवेश द्वार के रूप में तैयार किया गया है और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. गुलाबी पत्थरों से सजे इस द्वार को दीपोत्सव के दौरान 'आदि शंकराचार्य द्वार' नाम दिया गया था. इसी मार्ग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश-विदेश के विशिष्ट अतिथि मंदिर में प्रवेश करेंगे. 24 नवंबर को होगा विशेष कार्यक्रम कारीगर दिन-रात इस द्वार को सजाने-संवारने में लगे हुए हैं क्योंकि अब बस 18 दिन शेष हैं उस ऐतिहासिक क्षण के लिए जब भगवान श्रीराम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराया जाएगा. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि सभी विशेष अतिथियों के ठहरने की व्यवस्थाएं पहले से तय कर दी गई हैं. सभी को होटल, गेस्ट हाउस, होम स्टे और आश्रमों में व्यवस्थित रूप से ठहराया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि 24 नवंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. इसके अलावा किसी अन्य क्षेत्र के लोगों को उस दिन आने से बचने की अपील की गई है, ताकि भीड़ पर नियंत्रण रखा जा सके. अयोध्या प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि अगर वो 24 या 25 नवंबर को आने की योजना बना रहे हैं, तो पहले बुकिंग और ट्रैफिक व्यवस्था की जानकारी अवश्य ले लें, क्योंकि उस दौरान अयोध्या में प्रवेश भी सीमित रहेगा.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान: S-400 खरीद और 50,000 करोड़ का हथियार निर्यात लक्ष्य

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा और आने वाले समय में रूस से और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदेगा. इसी साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 डिफेंस सिस्टम ने अपनी ताकत दिखाई थी. इस डिफेंस सिस्टम के बदले भारत ने पाकिस्तानी क्षेत्र में सैकड़ों किमी भीतर जाकर उसके लड़ाकू विमानों को मार गिराया था. एस-400 की इस सफलता के बाद से इस डिफेंस सिस्टम की दुनिया में चर्चा होने लगी. भारत ने 2018 में रूस के साथ पांच एस-400 डिफेंस सिस्टम की डील की थी. इसमें से तीन सिस्टम भारत को मिल चुके हैं. इस पुरानी डील के दो सिस्टम की डिलिवरी में यूक्रेन युद्ध के कारण देरी हो रही है. इस बीच भारत ने अपने आसमान को और सुरक्षित बनाने के लिए और एस-400 सिस्टम खरीदने की बात कही है. 50 हजार करोड़ के निर्यात का लक्ष्य  राजनाथ सिंह ने रूस से और एस-400 डिफेंस सिस्टम खरीदने की बात कही. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत आज 25000 करोड़ रुपये का एर्म्स एक्सपोर्ट कर रहा है और उसका लक्ष्य इसको बढ़ाकर 50 हजार करोड़ रुपये करने का है. सिंह ने  कहा कि देसी न्यूक्लियर सबमरीन प्रोजेक्ट में थोड़ा समय लग रहा है लेकिन इसमें बहुत अधिक देरी नहीं हुई है. इसमें हम अच्छी प्रगति कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य आने वाले वक्त में हथियारों को लेकर किसी अन्य देश पर निर्भर रहने की नहीं है. हम आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं. उन्होंने एक अन्य सवाल पर कहा कि थिएटराइजेशन की दिशा में अच्छी प्रगति हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन त्रिशूल एक रूटीन एक्सरसाइज है. भारत इस वक्त ऑपरेशन त्रिशूल चला रहा है. नए S-400 पर दिसंबर में डील हो सकती है भारत रूस से कुछ और S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीद सकता है। ऐसे पांच सिस्टम्स की डील पहले ही हुई थी, जिनमें से 3 भारत को मिल चुके हैं। चौथे स्क्वाड्रन की डिलीवरी रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण रुकी हुई है। नई डील इनके अलावा होगी। न्यूज एजेंसी PTI के सोर्स के मुताबिक, दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के समय डील पर बातचीत हो सकती है। भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ 5 अरब डॉलर का समझौता किया था। उस समय अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि इस सौदे को आगे बढ़ाने पर वह CAATSA कानून के तहत भारत पर पाबंदी लगा सकता है। भारत S-500 मिसाइल सिस्टम खरीदने पर भी विचार कर रहा है। S-400 और S-500 दोनों ही मॉडर्न मिसाइल सिस्टम हैं। इनका इस्तेमाल एयर डिफेंस और दुश्मन के हवाई हमलों से बचने के लिए किया जाता है। एयर चीफ मार्शल बोले थे- भारत जरूरत के हिसाब से सिस्टम खरीदेगा हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने और S-400 खरीदने के सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था- भारत के पास अभी तीन स्क्वाड्रन इसी ऑपरेशन के साथ S-400 का कॉम्बैट डेब्यू भी हो गया. हलांकि भारत ने रूस से कुल 5 यूनिट्स की डील की थी, लेकिन अब तक केवल तीन स्क्वाड्रन ही भारतीय वायुसेना को मिल पाई हैं. पहली स्क्वाड्रन – दिसंबर 2021 में मिली तो दूसरी स्क्वाड्रन – अप्रैल 2022 में और तीसरी फरवरी 2023 में मिली हैं. ये स्क्वाड्रन क्रमशः आदमपुर (पंजाब), पूर्वी सेक्टर और पश्चिमी सेक्टर में तैनात की गई हैं. सूत्रों के मुताबिक चौथी यूनिट 2026 में और अंतिम पांचवी यूनिट 2027 तक भारत को मिलने की संभावना है. अगर एस-400 की खासियतों की बात करें तो यह 600 किलोमीटर तक दुश्मन की आसमानी गतिविधियों पकड़ने की क्षमता रखता है . साथ ही यह सिस्टम एक साथ 100 से अधिक लक्ष्यों पर नज़र रख सकता है. रूस से और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदेगा भारत, ऑपरेशन सिंदूर में पाक को चटाई थी धूल भारत ने 2018 में इस सौदे पर 39,000 करोड़ रुपये खर्च किए थे. अब एस-400 की बची हुई दो स्क्वाड्रन की तैनाती के बाद भारत की वायु रक्षा क्षमता और भी अभेद्य हो जाएगी. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने दिखाई अपनी ताकत एस-400 एक पावरफुल वेपन सिस्टम है, जो दुश्मन के हमने से बचाव कर उसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए जबरदस्त हमला भी करता है. इस लिहाज से देश के लिये S-400 वेपन सिस्टम काफी जरूरी हो जाता है. भारत ने साल 2018 में चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रूस से लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम S-400 खरीदने का बड़ा निर्णय लिया था. यह फैसला ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी तरह सही साबित हुआ, जब पाकिस्तान के हवाई हमलों को भारत की एस-400 बैटरी ने आसमान में ही नष्ट कर दिया था. भारत के पास अभी तीन स्क्वाड्रन इसी ऑपरेशन के साथ S-400 का कॉम्बैट डेब्यू भी हो गया. हलांकि भारत ने रूस से कुल 5 यूनिट्स की डील की थी, लेकिन अब तक केवल तीन स्क्वाड्रन ही भारतीय वायुसेना को मिल पाई हैं. पहली स्क्वाड्रन – दिसंबर 2021 में मिली तो दूसरी स्क्वाड्रन – अप्रैल 2022 में और तीसरी फरवरी 2023 में मिली हैं. ये स्क्वाड्रन क्रमशः आदमपुर (पंजाब), पूर्वी सेक्टर और पश्चिमी सेक्टर में तैनात की गई हैं. सूत्रों के मुताबिक चौथी यूनिट 2026 में और अंतिम पांचवी यूनिट 2027 तक भारत को मिलने की संभावना है. अगर एस-400 की खासियतों की बात करें तो यह 600 किलोमीटर तक दुश्मन की आसमानी गतिविधियों पकड़ने की क्षमता रखता है . साथ ही यह सिस्टम एक साथ 100 से अधिक लक्ष्यों पर नज़र रख सकता है. 400 किलोमीटर की दूरी तक वार की क्षमता एस-400 की मदद से 400 किलोमीटर की दूरी से ही दुश्मन के एयर एसैट्स को गिराने की क्षमता रखता है. एस-400 बॉम्बर, फाइटर जेट, ड्रोन, अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट और बैलिस्टिक मिसाइल तक को ध्वस्त कर सकता है . इसमें मल्टी-रेंज मिसाइलें तैनात होती हैं. एस-400 की एक रेजिमेंट में 8 लॉन्च व्हीकल होते है . प्रत्येक में 4 मिसाइल ट्यूब यानी 32 मिसाइलों के साथ-साथ कमांड-एंड-कंट्रोल और एडवांस राडार भी होता है. 2018 में भारत ने 39 हजार करोड़ रुपए में किया था डील भारत ने 2018 में … Read 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भारी बारिश के बाद घेपन झील का दायरा 173% बढ़ा, हिमाचल और पड़ोसी क्षेत्रों में खतरा बढ़ा

केलांग  हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में घेपन झील का दायरा बेहद अधिक बढ़ गया है. जलवायु परिवर्तन की वजह से लगातार घाटी के ग्लेशियर पिघल रहे हैं और ऐसे में झील का दायरा बढ़ रहा है. घाटी में मौसम में काफी बदलाव आया और पूरा पैटर्न बदला है. जानकारी के अनुसार, लाहौल घाटी के सिस्सू के ऊपर घेपल झील है. यह झील 13583  फीट की ऊंचाई पर स्थित है और बीते 33 साल में  झील का दायरा 173 फीसदी बढ़ गया है.  फिलहाल, करीब 101.30 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली ढाई किलोमीटर लंबी यह झील लाहौल घाटी के लिए गंभीर खतरा बन गई है. नेशनल रिमोट सेंसिग सेंटर ने चेताया है कि यदि यह झील टूटी हिमाचल प्रदेश से लेकर जम्मू और पकिस्तान तक तबाही मचा सकती है. सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय  का केंद्रीय जल आयोग और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्पयुटिंग भी कई दशकों से लाहौल की झील पर अध्ययन कर रहे है. अध्ययन में पता चला है कि झील की लम्बाई 2,464 मीटर और चौड़ाई 625 मीटर है. झील लाहौल घाटी के लिए गंभीर खतरा बन गई है. ग्लेशियर पिघलने से बनी हिमाचल की सबसे बडी इस झील में 35.08 मिलियन क्यूबिक मीटर तक पानी है. झील के बढ़ते आकार और ग्लेशियर के तेजी से पिघलने के कारण अगर पानी का स्तर ऐेसे ही बढ़ता रहा तो इसके टूटने की आशंका बढ जाएगी. ऐसे में झील को संवेदनशील सूची में रखा गया है. क्या कहती हैं डीसी लाहौल स्पीति लाहौल-स्पीति की उपायुक्त किरण बडाना ने बताया कि विशेषज्ञों और तकनीकी टीम ने झील का निरीक्षण किया है. झील में हिमाचल का पहला अर्ली वार्निग सिस्टम स्थापित किया जाएगा. यह सिस्टम सैटेलाइट से काम करेगा और मौसम विभाग और प्रशासन सूचना देगा. गौरतलब है कि अटल टनल से आगे सिस्सू गांव है और इसके ऊपर छह सात घंटे की पैदल यात्रा के बाद घेपन झील आती है. यहां पर ट्रैकर्स भी जाते हैं.

पब्लिक सेक्टर बैंकों ने दिया शानदार रिटर्न, 27% मुनाफे के साथ सुधारों की नई शुरुआत

नई दिल्ली चालू वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में देश के सरकारी के बैंकों (पीएसबी) ने शानदार प्रदर्शन किया है. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व में 12 सरकारी बैंकों ने जुलाई–सितंबर तिमाही में मिलकर 49,456 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है. यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 9% की सालाना वृद्धि को दर्शाता है. एसबीआई बना सबसे बड़ा योगदानकर्ता सभी बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने सबसे अधिक मुनाफा दर्ज करते हुए इस संयुक्त लाभ में 40% का योगदान दिया. बैंक ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 20,160 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 10% अधिक है. एसबीआई का यह प्रदर्शन भारतीय बैंकिंग सेक्टर की स्थिरता और खुदरा ऋण वृद्धि के संकेत देता है. पिछले साल की सितंबर तिमाही यानी FY25 Q2 में सभी 12 सरकारी बैंकों का कुल मुनाफा ₹45,547 करोड़ था. इस बार बैंकों ने ₹3,909 करोड़ ज्यादा कमाए हैं. ऐसे में इन बैंकों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. तो किस बैंक ने की सबसे ज्‍यादा कमाई और किसके शेयर में दिख रहा ज्‍यादा दम, आइए नजर डालते हैं. SBI बना मुनाफे का बादशाह बाजार का सबसे बड़ा खिलाड़ी SBI मुनाफे की रेस में सबसे आगे रहा. इस सरकारी बैंक ने अकेले ही कुल मुनाफे का 40% हिस्सा अपने नाम किया. बैंक ने दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में ₹20,160 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया, जो पिछले साल के मुकाबले 10% ज्यादा है. शेयरों का प्रदर्शन स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयर की वर्तमान कीमत 957.60 रुपये है. 3 महीने में इसके शेयर 19.56 फीसदी बढ़े हैं. वहीं 3 साल में ये 56 फीसदी उछला है. 5 साल में इसने 337 फीसदी का रिटर्न दिया है. Indian Overseas Bank और Central Bank भी चमके चेन्नई स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का भी प्रदर्शन जबरदस्‍त रहा. IOB का मुनाफा 58% बढ़कर ₹1,226 करोड़ पर पहुंच गया. वहीं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का ने 33% की बढ़त के साथ ₹1,213 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया. शेयरों का प्रदर्शन Indian Overseas Bank के शेयर की कीमत अभी 39.55 रुपये है. साल भर का इसका प्रदर्शन अच्‍छा नहीं रहा है. इसने 27 पर्सेंट का नेगेटिव रिटर्न दिया है. जबकि 3 साल में ये 76 फीसदी उछला है. वहीं 5 साल में इसने 289 फीसदी रिटर्न दिया है. इन बैंकों की कमाई घटी सरकारी बैंकों में ज्‍यादातर ने बेहतर प्रदर्शन किया है. हालंकि दो बैंक ऐसे भी रहे, जिनका मुनाफा इस बार घटा है. इनमें Bank of Baroda और Union Bank शामिल हैं. बैंक ऑफ बड़ौदा का मुनाफा 8% गिरकर ₹4,809 करोड़ रह गया, जबकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का मुनाफा 10% घटकर ₹4,249 करोड़ पर आ गया. 6 महीनों में तोड़ा रिकॉर्ड सितंबर 2025 तक के पहले छह महीनों में सभी 12 सरकारी बैंकों का संयुक्त मुनाफा ₹93,674 करोड़ तक पहुंच गया है. यह अब तक का सबसे ज्यादा है और पिछले साल के ₹85,520 करोड़ की तुलना में करीब 10% की बढ़ोतरी दर्शाता है. बाकी बैंकों का प्रदर्शन भी दमदार बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एंड सिंध बैंक ने 23% की बढ़त दर्ज की. जबकि केनरा बैंक ने 19%, पंजाब नेशनल बैंक ने 14% और इंडियन बैंक ने 12% की वृद्धि दर्ज की. वहीं सिंगल डिजिट में बढ़त रिकॉर्ड करने वालों में बैंक ऑफ इंडिया 8% और यूको बैंक 3% पर हैं. शेयरों का प्रदर्शन Bank of Maharashtra के शेयर 58.44 रुपये पर मिल रहे हैं. 3 साल में इसने 154 फीसदी और 5 साल में 424 फीसदी तक का रिटर्न दिया है. पंजाब एंड सिंध बैंक के शेयर की कीमत 31.14 रुपये है. 3 साल में ये 62 फीसदी और 5 साल में 188 फीसदी बढ़ा है. वहीं पंजाब नेशनल बैंक के शेयर की कीमत 123 रुपये है. सालभर में ये 16 पर्सेंट उछला है. 3 साल में इसने 187 फीसदी और 5 साल में 344 फीसदी तक का रिटर्न दिया है. छोटे बैंकों का शानदार प्रदर्शन इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) ने सभी बैंकों में सबसे अधिक 58% की बढ़ोतरी दर्ज की और 1,226 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया. इसके बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 33% की वृद्धि के साथ 1,213 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया. इन बैंकों का बेहतर प्रदर्शन ऋण विस्तार, एनपीए में कमी और बेहतर ब्याज मार्जिन की वजह से संभव हुआ है. कुछ बैंकों के मुनाफे में गिरावट जहां अधिकतर सरकारी बैंकों ने अच्छा प्रदर्शन किया, वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को दूसरी तिमाही में झटका लगा. बैंक ऑफ बड़ौदा का शुद्ध लाभ 8% घटकर 4,809 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 5,238 करोड़ रुपये था. वहीं, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का मुनाफा 10% घटकर 4,249 करोड़ रुपये रह गया. इन बैंकों के मुनाफे में कमी का कारण ऋण लागत में वृद्धि और निवेश पर कम रिटर्न बताया जा रहा है. फिलहाल, सरकारी बैंकों में विदेशी हिस्सेदारी बहुत कम है। यह सबसे ज्यादा केनरा बैंक (11.88 फीसदी) में है, उसके बाद एसबीआई (9.56 फीसदी), बैंक ऑफ बड़ौदा (8.71 फीसदी) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (7.86 फीसदी) का स्थान है। बाकी बैंकों में यह 5 फीसदी से भी कम है; और कम से कम तीन बैंकों में तो यह कुछ ही आधार अंक है। सरकारी बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी कितनी रही है? न्यूनतम सीमा 51 फीसदी है, लेकिन कम से कम तीन बैंकों में यह 90 फीसदी से ज्यादा है। एसबीआई में यह 55.5 फीसदी है। बाकी बैंकों में यह 62.93 फीसदी से 89.27 फीसदी के बीच है। क्या सरकार अपनी हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों को बेचेगी? नहीं। मेरा अनुमान है कि सरकारी बैंक पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) और अन्य माध्यमों से नई पूंजी जुटाएंगे। चूंकि ये बैंक मजबूत और लाभ कमाने वाले हैं, इसलिए इनके लिए कई खरीदार होंगे। हालांकि इसे सफल बनाने के लिए सरकार को इन बैंकों के संचालन के तरीके पर पुनर्विचार करना चाहिए। बैंकों में विदेशी हिस्सेदारी की सीमा हटाने से हालात बदलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि बैंकों को व्यावसायिक संस्थाओं की तरह ही माना जाना चाहिए। दूसरे बैंकों ने भी … Read more

सुभाष नगर ROB की डिजाइन में बड़ा बदलाव, 180 डिग्री टर्न और थर्ड लेग पर हो रही समीक्षा

भोपाल  भोपाल के सुभाष नगर रेलवे ओवरब्रिज की 180 डिग्री घुमाव वाली डिजाइन बदलेगी। पीडब्ल्यूडी ब्रिज ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। मालाकार डिजाइन वाले थर्ड लेग पर काफी सवाल उठ रहे थे। इसमें मोती नगर बस्ती के 500 मकान भी बाधक बने हुए थे, जिनके लिए हाईकोर्ट ने स्टे दिया हुआ है। इन सभी दिक्कतों का हल थर्ड लेग री-डिजाइन से निकाला जाएगा। एक सप्ताह में नया प्रस्ताव नई डिजाइन के साथ उच्चाधिकारियों के सामने रखेंगे। थर्ड लेग की डिजाइन पर भी सवाल उठे मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा। थर्ड लेग का बजट अभी 22 करोड़ रुपए है। थर्ड लेग की लंबाई 242 मीटर है। इसे बनाने ठेका एजेंसी तय की हुई है। उसे नई डिजाइन देकर काम शुरू कराया जाएगा। भेल की ओर से ट्रैफिक जिंसी के रास्ते आगे निकालने थर्ड लेग तय की थी। सुभाष ब्रिज थर्ड लेग के लिए फरवरी- मार्च 2025 में काम शुरू करने की योजना बनी। इसके लिए मोती नगर मार्केट और आवासीय क्षेत्रों को नोटिस दिया। इससे ही विवाद बना। प्रशासन ने करीब 150 दुकानें तो तोड़ दी, लेकिन घरों के मामले में हाईकोर्ट का स्टे आ गया। इसे हटवाने प्रशासन कोई ठोस जवाब नहीं दे पाया। थर्ड लेग की डिजाइन पर भी सवाल उठे। अंतत: अब इस विवाद को खत्म करने की कोशिश हो रही है। सुभाष नगर ब्रिज के आसपास बसी मोतीनगर बस्ती। ब्रिज की थर्ड लेग मोती नगर से उठेगी ओर मौजूदा 80 फीट रोड क्रॉस कर खेल मैदान को पार कर मौजूदा ब्रिज से जुड़ेगी। इससे सवाल ये कि जब थर्ड लेग को 80 फीट रोड पार कर पार्क से ही मौजूदा आरओबी को कनेक्ट करना है तो इसके लिए मोती नगर बस्ती या दुकानों को हटाने की जरूरत क्यों? सीधे 80 फीट रोड पर पार्क की तरह सरकारी खाली जमीन से ब्रिज को लेकर कनेक्ट किया जा सकता था? 11 मील तिराहे पर फ्लाइओवर का भूमिपूजन आज भोपाल-इंदौर 11 मील तिराहे पर सिक्सलेन फ्लाइओवर बनेगा। 31 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस ब्रिज के लिए बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, विधायक रामेश्वर शर्मा की उपस्थिति में भूमिपूजन होगा। सुबह 10 बजे होगा। खजूरी स्थित 11 मील तिराहा भोपाल बायपास व भोपाल इंदौर रोड का जंक्शन है। तेज रतार वाहनों की आपसी भिडंत की घटनाएं रोकने के लिए लाइओवर की मांग की जा रही थी। सिक्स लेन लाइओवर की लंबाई 850 मीटर होगी। यह 18 माह में बनेगा। एमपीआरडीसी को इसके निर्माण का जिमा दिया गया है। यहां सर्विस रोड बनेगी।