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राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों में, शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर दें जोर : उच्च शिक्षा मंत्री परमार

स्काउट-गाइड को बनाएं आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी : उच्च शिक्षा मंत्री  परमार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों में, शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर दें जोर : उच्च शिक्षा मंत्री  परमार भारत स्काउट्स एवं गाइड्स मध्यप्रदेश के राज्य परिषद की बैठक हुई भोपाल  स्काउट-गाइड अपनी सेवा के माध्यम से विशेष पहचान बनाये हुए है और स्काउटिंग की सेवा भावना जन-जन तक फैली हुई है, यह गौरव की बात है। स्काउटिंग का यह सेवा भाव हमें सेवा ही धर्म है; का संदेश देता है और इस भाव को हम अपने भीतर भी उतारे यह एक बडी साधना है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने भारत स्काउट्स एवं गाइड्स मध्यप्रदेश के राज्य मुख्यालय में आयोजित राज्य परिषद की बैठक में कही। मंत्री  परमार ने कहा कि भारत स्काउट एवं गाइड म.प्र. इतने वर्षों से सतत् सेवा भाव से कार्य कर रहा है और सेवा ही धर्म है, इस संकल्प को पूरा भी कर रहा है।  परमार ने कहा कि हमें भारत स्काउट एवं गाइड म.प्र. की गतिविधियों को और अधिक विस्तृत करने पर जोर देना होगा और आमदनी के साधन भी बढ़ाने के लिए प्रयास करना होगा जिससे संगठन नियमित रूप से चल सके और स्काउट-गाइड आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बन सके। उच्च शिक्षा मंत्री  परमार की अध्यक्षता में बुधवार को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स मध्यप्रदेश के भोपाल स्थित राज्य मुख्यालय के सभागार में, राज्य परिषद की बैठक हुई। मंत्री  परमार ने स्काउट्स एवं गाइड्स की विविध गतिविधियों की समीक्षा की एवं विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री  परमार ने समस्त जिला स्काउट्स एवं गाइड्स के सीए ऑडिट कराने के निर्देश दिए और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निजी विद्यालयों द्वारा स्काउट्स एवं गाइड्स के पंजीयन शुल्क जमा करवाया जाना सुनिश्चित करने को कहा।  परमार ने शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय गतिविधियों में अधिक से अधिक सहभागिता एवं प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय गतिविधियों में सहभागिता शुल्क, राज्य मुख्यालय द्वारा न लिए जाने को कहा एवं इस आशय के लिये राष्ट्रीय मुख्यालय को भी अवगत करवाने को कहा। मंत्री  परमार ने जिलों में संग्रहित पंजीयन देय राशि को राज्य मुख्यालय में शीघ्र अति शीघ्र जमा कराए जाने के लिए भी निर्देशित किया। मंत्री  परमार ने स्काउट्स एवं गाइड्स के सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों एवं गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ और व्यापक करने के साथ, समस्त गतिविधियों एवं आवश्यकताओं की निर्देशिका (फोल्डर) तैयार करने को कहा। स्काउट्स एवं गाइड्स को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सामूहिक समन्वय एवं सतत् प्रयास करने के लिए भी कहा। मंत्री  परमार ने कहा कि स्काउट्स एवं गाइड्स जिला स्तर तक आत्मनिर्भर बनाए जाने के लिए समुचित प्रयास किए जाएं और आमदनी में वृद्धि के लिए व्यापक कार्ययोजना के साथ क्रियान्वयन करें। मंत्री  परमार ने स्काउट्स एवं गाइड्स द्वारा संचालित निःशुल्क स्वास्थ्य प्रशिक्षण शिविर अन्तर्गत स्वास्थ्य का परीक्षण भी करवाया। मंत्री  परमार ने स्काउट्स एवं गाइड्स की उत्तरप्रदेश के लखनऊ में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जंबूरी के शुभांकर "शार्दू" का विमोचन भी किया। बैठक में सदस्यों द्वारा प्राप्त सुझावों पर व्यापक चर्चा हुई एवं सर्वसम्मति से विद्यार्थियों के हितों से जुड़े विषयों पर आवश्यक निर्णय लिए गए। अंतर्राष्ट्रीय जंबूरी एवं राष्ट्रीय जंबूरी में विद्यार्थियों की सहभागिता को लेकर भी व्यापक विमर्श हुआ। बैठक में, पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। वार्षिक प्रतिवेदन 2024-25 का अनुमोदन, सत्र 2025-26 का वार्षिक कार्यक्रम एवं वार्षिक योजना का अनुमोदन, वास्तविक आय-व्यय 2023-24 पुनरीक्षित 2024-25 एवं प्रस्तावित 2025-26 का बजट अनुमोदन किया गया और सी.ए. ऑडिट प्रतिवेदन 2023-24 भी प्रस्तुत किया गया। राज्य कार्यकारिणी की पिछली बैठक में पारित प्रस्तावों का अनुमोदन, कार्यालयीन प्रस्ताव एवं सदस्यों द्वारा प्राप्त प्रस्तावों पर भी गहन चर्चा की गई। बैठक में पूर्व मंत्री एवं राज्य मुख्य आयुक्त भारत स्काउट एवं गाइड मप्र  पारस चन्द्र जैन, उपाध्यक्ष  प्रकाश चित्तौडा, उपाध्यक्ष  अजय मिश्रा, उपाध्यक्ष  रमेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष  ओम प्रकाश गुप्ता, उपाध्यक्ष मती मीना डागोर, राज्य सचिव  राजेश प्रसाद मिश्रा (से.नि. आई.ए.एस.), राज्य कोषाध्यक्ष  रमेश शर्मा एवं राज्य आयुक्त रोवर  राजीव जैन सहित विभिन्न जिलों के पदाधिकारी एवं सदस्यगण उपस्थित रहे।  

राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2025: मध्य प्रदेश को दो श्रेणियों में सम्मान, CM डॉ. यादव ने जताई खुशी

6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की घोषणा: म.प्र. को दो श्रेणियों में मिले पुरस्कार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाई "जल संचय-जन भागीदारी" में भी अग्रणी स्थान राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु 18 नवंबर को प्रदान करेंगी पुरस्कार भोपाल मध्यप्रदेश ने जल संरक्षण में एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। नई दिल्ली में मंगलवार को जल शक्ति मंत्री  सी. आर. पाटिल ने 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की घोषणा की। मध्यप्रदेश को दो श्रेणियों में सम्मान प्राप्त हुआ। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले को पूर्वी क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ जिले का पुरस्कार मिला है, जबकि खंडवा जिले की ग्राम पंचायत कावेश्वर ने सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु 18 नवंबर 2025 को पुरस्कार प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुरस्कृत जिलों को बधाई दी है। "जल संचय-जन भागीदारी" पहल में भी वेस्टर्न-जोन की श्रेणी एक में पहला पुरस्कार ईस्ट निमाड़ को मिला। श्रेष्ठ 50 शहरी निकायों में गुनाजिले को प्रथम रैंक मिला। ज़िलों में श्रेणी तीन में गुना, बैतूल, धार, देवास, सिवनी और खरगौन का चयन हुआ है। उल्लेखनीय है कि जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने वर्ष 2024 के लिए 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के तहत कुल 46 विजेताओं (संयुक्त विजेताओं सहित) की घोषणा की । ये पुरस्कार 10 श्रेणियों में दिए जा रहे हैं — सर्वश्रेष्ठ राज्य, सर्वश्रेष्ठ जिला, सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत, सर्वश्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय, सर्वश्रेष्ठ स्कूल या कॉलेज, सर्वश्रेष्ठ उद्योग, सर्वश्रेष्ठ जल उपयोक्ता संघ, सर्वश्रेष्ठ संस्था (स्कूल या कॉलेज के अतिरिक्त), सर्वश्रेष्ठ सिविल सोसायटी और जल क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर जल प्रबंधन और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक व्यापक अभियान चला रहा है। इसी उद्देश्य से लोगों में जल के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने और उन्हें जल उपयोग के सर्वोत्तम तौर तरीकों को अपनाने में प्रेरित करने के लिए राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी। वर्ष 2024 के लिए 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार का शुभारंभ 23 अक्टूबर 2024 को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर किया गया था। कुल 751 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनकी समीक्षा और मूल्यांकन विशेषज्ञ समिति द्वारा किया गया। चयनित आवेदनों का परीक्षण केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा किया गया। अंतिम रिपोर्टों के आधार पर वर्ष 2024 के 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के लिए कुल 46 विजेताओं का चयन किया गया। राष्ट्रीय जल पुरस्कार का उद्देश्य देश में व्यक्तियों और संगठनों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की पहचान करना और सरकार के ‘जल समृद्ध भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करना है। ये पुरस्कार जल के महत्व के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें जल के सर्वोत्तम उपयोग के प्रयासों को अपनाने के लिये प्रेरित करते हैं। यह पहल सभी लोगों और संगठनों के लिए जल संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन गतिविधियों में एक मजबूत साझेदारी और जन सहभागिता को और सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करता है। जल संचय जन भागीदारी पहल में भी अग्रणी मप्र जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार : कैच द रेन के अंतर्गत साउथ जोन की श्रेणी एक में पहला पुरस्कार ईस्ट निमाड़ जिले को तथा श्रेष्ठ 50 शहरी निकायों में गुना को, ज़िलों में श्रेणी तीन में दूसरी रैंक में गुना, बैतूल, धार, देवास, सिवनी और खरगौन का चयन हुआ है। इस पहल के अंतर्गत राज्यों को पाँच ज़ोन में बाँटा गया है। जिलों को न्यूनतम 10,000 कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण एवं संचयन संरचनाएँ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों के जिलों के लिए यह लक्ष्य 3,000 संरचनाएँ है, जबकि देशभर के नगर निगमों के लिए यह संख्या 10,000 निर्धारित की गई है। इन संरचनाओं में वर्षा जल संचयन (रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) के अलावा झीलों, तालाबों और बावड़ियों का पुनर्जीवन भी शामिल है। शहरी जल संरक्षण प्रयासों को सशक्त करने के लिए, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने जल शक्ति मंत्रालय के साथ साझेदारी की है। नगरीय निकायों को कम-से-कम 2,000 पुनर्भरण संरचनाएँ बनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस वर्ष कुल 100 पुरस्कारों की घोषणा की गई है, जिनमें तीन सर्वश्रेष्ठ राज्य, 67 जिले, छह नगर निगम, एक नगरीय स्थानीय निकाय, दो सहयोगी मंत्रालय/विभाग, दो उद्योग, तीन गैर-सरकारी संगठन, दो परोपकारी व्यक्ति और 14 नोडल अधिकारी शामिल हैं।  

राज्यपाल पटेल बोले — स्टेच्यू ऑफ यूनिटी, भारत की एकता का प्रतीक और तीर्थस्थल

स्टेच्यू ऑफ युनिटी भारत की एकता का तीर्थ : राज्यपाल पटेल पहली बार दिल्ली के बाहर एकता नगर गुजरात में आयोजित हुआ भारत पर्व 2025 राज्यपाल ने भारत पर्व के 11वें दिन के समारोह का किया शुभारंभ भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा रोपित बीज को वट वृक्ष के रूप में देखकर हर्ष और गर्व हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्टेच्यू ऑफ युनिटी भारत की एकता का तीर्थ है। पटेल एकता नगर गुजरात में आयोजित भारत पर्व के 11वें दिन 11 नवंबर के कार्यक्रम के शुभारंभ समारोह उपरांत स्टेच्यू ऑफ युनिटी परिसर में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में उपस्थित दर्शकों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और पर्यटन एवं संस्कृति राजयमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी मंचासीन थे। अतिथियों का स्टेच्यू ऑफ युनिटी और भारत भारती के पदाधिकारियों द्वारा स्मृति प्रतीक भेंट कर स्वागत किया गया। राज्यपाल पटेल ने मध्यप्रदेश के प्रथम नागरिक के रूप में राष्ट्रीय एकता के तीर्थ पर हमारे राष्ट्रीय गौरव को नमन करने आए सभी भाई-बहनों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गौरव जिसका आधार लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने रखा उसके प्रतीक स्टेच्यू ऑफ यूनिटी की पावन धरा पर आना हम सभी के लिए तीर्थ के समान है। भारत पर्व, सिर्फ एक सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन मात्र नहीं है; भारत की एकता, अखंडता और आत्मगौरव की भावना को नमन करने का प्रसंग है। इसिलिए भारत पर्व के अभूतपूर्व आयोजन में देश के सभी राज्यों, केन्द्र शासित क्षेत्रों की लोक संस्कृति, खान-पान, वस्त्र-विन्यास आदि के सम्मिलित प्रदर्शन के मंच भारत पर्व में हमारी अनेकता में एकता के भव्य स्वरूप देखने का अभूतपूर्व अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हम सब एक हैं इसी भाव की अभिव्यक्ति के लिए 1 नवंबर से 15 नवंबर तक आयोजित कार्यक्रमों में देश के सभी राज्यों के राज्यपाल भी सम्मिलित हो रहे है। कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन गुजरात के उर्जा, पेट्रोलियम कानून राज्यमंत्री कोशिक विकरिया ने दिया। उन्होंने कहा कि हम सभी के लिए यह गर्व की बात है कि स्टेच्यू ऑफ युनिटी के निर्माण की संकल्पना से जुड़े जिले के पूर्व प्रभारी मंत्री मंगुभाई पटेल मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में हम सब के बीच में उपस्थित हैं। सांस्कृतिक संध्या के कार्यक्रमों की पहली प्रस्तुति मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के लोक नृत्य बधाई हो के साथ हुई। इसके बाद मध्यप्रदेश, मणिपुर, नागालेंड और गुजरात राज्यों के लोक कलाकारों द्वारा कुल 9 प्रस्तुतियाँ दी गई। कार्यक्रम का विशिष्ट आकर्षण मध्यप्रदेश के विकास, इतिहास, कला, शिल्प और विरासत की धरोहरों को शोकेस करने वाली दृश्य-श्रव्य और नृत्य सहित कला के विभिन्न रूपों की मल्टीमीडिया प्रस्तुति रही। राज्यपाल पटेल ने भारत पर्व में लगाई गई विभिन्न राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की इंफोरमेशन स्टॉल, फूड स्टॉल और हस्तशिल्प स्टॉलों का अवलोकन किया। उपस्थित कलाकारों, कारीगर, कर्मचारी और अधिकारियों से चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल ने महेश्वरी साड़ी के स्टॉल के विक्रेता से चर्चा की और फूड स्टॉल पर चंबल के पारंपरिक व्यंजन थोपा और सन्नाटा का रसास्वादन किया। राज्यपाल को बताया गया कि स्टॉल पर आलू बेड़नी, पूड़ी निमोना, मक्के की खीर और कोदो की खीर भी उपलब्ध है। राज्यपाल पटेल ने भारत पर्व के पूर्व एकता नगर स्थित आरोग्य वन सरदार पटेल जियोलोजिकल पार्क, सरदार सरोवर डैम, विद्युत उत्पादन इकाई (रिवर बेड पॉवर हॉउस) और स्टेच्यू ऑफ युनिटी परिसर की प्रदर्शनी, गैलरी और थीम पवेलियन का अवलोकन किया।    

लेडी टेररिस्ट की दास्तान: टूटी शादी, खतरनाक रिश्ते और शाहीन का रहस्य

 नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लाल किले के समीप हुए धमाके से एक दिन पहले एजेंसियों ने एक महिला डॉक्टर को पकड़ा था. यह महिला थी डॉक्टर शाहीन शाहिद. जम्मू कश्मीर पुलिस और यूपी एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई में डॉक्टर शाहीन को पकड़ा था. शाहीन का नाम उसी आतंकी नेटवर्क से जुड़ा है, जिस नेटवर्क का नाम दिल्ली ब्लास्ट में आया है. दिल्ली ब्लास्ट में 10 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए थे. लेडी टेररिस्ट डॉक्टर शाहीन शाहिद कौन है, जिसे जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात-उल-मोमिनीन का इंडिया हेड बताया जा रहा है? दरअसल, डॉक्टर शाहीन का नाम फरीदाबाद से दो डॉक्टर्स की गिरफ्तारी के बाद आया था. एजेंसियों के मुताबिक डॉक्टर मुजम्मिल अहमद, डॉक्टर उमर नबी और शाहीन शाहिद, तीनों मेडिकल प्रोफेशन की आड़ में व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क चला रहे थे. शाहीन को मोस्ट वांटेड आतंकी मसूद अजहर के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात-उल मोमिनीन का इंडिया हेड बताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि वह जैश आतंकी मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के निर्देश पर काम कर रही थी. शाहीन की गिरफ्तारी के बाद उसके लखनऊ स्थित घर पर भी जम्मू कश्मीर पुलिस और यूपी एटीएस ने छापेमारी की. इस संयुक्त कार्रवाई में शाहीन के भाई डॉक्टर परवेज अंसारी को भी पकड़ा गया, जो इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं. डॉक्टर शाहीन के लखनऊ वाले घर से कई दस्तावेज, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन भी एजेंसियों ने अपने कब्जे में लिया है. कानपुर में लेक्चरर थी शाहीन डॉक्टर शाहीन कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) में भी लेक्चरर रह चुकी है. शाहीन ने 2006 में बतौर लेक्चरर जीएसवीएम जॉइन किया था. कॉलेज के रिकॉर्ड्स के मुताबिक 2013 में वह बिना अनुमति अवकाश पर चली गई और कॉलेज की ओर से कई नोटिस भेजे जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने 2021 में शाहीन की सेवा समाप्त कर दी थी. जीएसवीएम कॉलेज के लोग बताते हैं कि शाहीन शांत रहती थी. 2013 के बाद से उसने सभी के साथ संपर्क तोड़ लिए थे. महाराष्ट्र के जफर से हुई थी शादी डॉक्टर शाहीन शाहिद की शादी महाराष्ट्र के जफर हयात के साथ हुई थी. हालांकि, यह रिश्ता बहुत लंबा नहीं चला और 2015 में शाहीन का तलाक हो गया. पति से तलाक के बाद शाहीन हरियाणा के फरीदाबाद शिफ्ट हो गई. यहीं वह डॉक्टर मुजम्मिल के संपर्क में आई थी. बाद में वह मसूद अजहर की बहन सादिया के सीधे संपर्क में आ गई थी. शाहीन की कार से राइफल और जिंदा कारतूस भी मिले थे, जिन्हें आतंकी गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है. NIA कर रही विदेशी कॉन्टैक्ट्स की जांच इस केस की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है. NIA डॉक्टर शाहीन शाहिद के अकादमिक रिकॉर्ड के साथ ही सोशल मीडिया कनेक्शन और विदेशी संपर्कों की भी जांच कर रही है. सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि शाहीन शाहिद का पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के साथ सोशल मीडिया के जरिये संपर्क में रही होगी. भारत में कट्टरपंथी महिलाओं का नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश में भी सोशल मीडिया के इस्तेमाल का शक एजेंसियों को है.

ठंड की दस्तक! मध्य भारत में 4 दिन तक बारिश + ठंडी हवाओं का कहर

राजगढ़  मध्य प्रदेश का राजगढ़ जिला इन दिनों पहाड़ी हिल स्टेशन जैसा नजर आ रहा है। पिछले पांच दिनों से यह प्रदेश का सबसे ठंडा जिला बना हुआ है। बीते दिन शहडोल के बाद राजगढ़ का तापमान सबसे कम दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान 7.6 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 29 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाएं और मौसमी बदलाव इसके पीछे मुख्य कारण हैं। नवंबर की शुरुआत से ही यहां ठंड में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दिनभर चलने वाली ठंडी हवाओं से लोगों को कंपकंपी छूट रही है। इंदौर और भोपाल के साथ सोमवार को राजगढ़ में सबसे ज्यादा ठंड महसूस की गई। आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने की संभावना जताई गई है। बारिश की भी संभावना है। शीतलहर का अलर्ट जारी मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं के कारण पश्चिमी मध्य प्रदेश में ठंड बढ़ गई है। इसका सबसे अधिक असर राजगढ़ में देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले चार दिन राजगढ़, भोपाल और इंदौर में तीव्र शीत लहर की चेतावनी जारी की गई है।   टूटा 25 साल का रिकॉर्ड नवंबर के दूसरे ही सप्ताह में कड़ाके की ठंड से कई शहरों में रिकॉर्ड टूट गए हैं। भोपाल में नवंबर का पिछले 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया। यहां न्यूनतम तापमान 8 डिग्री पहुंच चुका है, जो साल 2015 के बाद सबसे कम है। इंदौर में पारा 7 डिग्री तक जा चुका है। इंदौर में पिछले 25 साल में नवंबर में इतनी सर्दी कभी नहीं पड़ी।   हो सकती है बारिश भोपाल में बारिश की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। बता दें कि नवंबर के महीने में 10 साल में तीन बार बारिश हो चुकी है। साल 1936 में महीने में साढ़े 5 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है।

किसानों का देसी इनोवेशन! कार्बाइड गन बनी फसल की रखवाली का हथियार

रतलाम  मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के किसान सबसे अधिक जंगली सुअर, रोजड़ा, नील गाय आदि से परेशान है। ये पशु देखते ही देखते किसान की पूरी उपज चट कर रहे हैं। ऐसे में अब फसलों की जंगली जानवरों से रखवाली के लिए किसान जुगाड़ से बनाई जाने वाली कार्बाइड गन का उपयोग करने लगे है। इसको पीवीसी पाइप से बनी जुगाड़ गन कहा रहा है। जिसकी वजह से राज्य में कई लोगों की आंखें चली गई और कई लोगों की आंख एवं चेहरे पर गंभीर चोट भी आई थी। इसके बाद राज्य में इस तरह की जुगाड़ वाली गन की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था। मात्र 20 मिनट में तैयार हो रही यह जुगाड़ वाली गन से धमाका कर जंगली जानवर से अपने खेत व खेती की रक्षा किसान कर रहा है। लोगों की आंखें प्रभावित हाल ही के दिनों में दीपावली व इसके बाद भोपाल और राज्य के अनेक जिलों में धमाका करने वाली पीवीसी गन की वजह से बच्चों और वयस्क लोगों की आंखों में चोट लगी है। यहां तक की आंखों की रोशनी चली जाने के मामले सामने आए थे। इसके बाद ही शासन ने जुगाड़ की गन की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।   इसलिए करते किसान इस गन का इस्तेमाल पीवीसी पाइप से बनाई जाने वाली जुगाड़ वाली गन का उपयोग किसान अपने खेतों पर जंगली जानवरों को भगाने के लिए करते हैं। इसमें कार्बाइड को भरते है। कार्बाइड जब पानी के संपर्क में आता है तो उसमें ज्वलनशील और धमाका करने वाली गैस बनती है। गन के पीछे वाले हिस्से वाले में लाइटर द्वारा चिंगारी से इस पीवीसी गन में जोरदार धमाका और चिंगारी निकलती है। किसान बोले- हमें पता है इससे नुकसान होता है संत रविदास चौक के करीब खेत पर पीवीसी पाइप की गन लेकर बैठे किसान समरथ पाटीदार के अनुसार हमें पता है कि इससे नुकसान पहुंचता है, लेकिन करें क्या अपनी आंखों के सामने उपज को उजड़ते होते भी नहीं देख सकते। बिक्री पर भले ही शासन ने रोक लगाई हो लेकिन यह तो 20 मिनट में खेत पर बना रहे है। इसमें प्रयोग किया जाने वाला कार्बाइड हार्डवेयर की दुकान पर मिलता है, सरकार को प्रतिबंध लगाना ही है तो जंगली जानवर को चिडिय़ाघर ले जाकर बंद करें।

भोपाल में आज नेशनल कॉन्क्लेव की शुरुआत, मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे उद्घाटन

राज्यपाल श्री पटेल समापन सत्र के होंगे मुख्य अतिथि स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, प्रशासन पर विशेषज्ञ करेंगे चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनजाति कार्य मंत्रालय, भारत सरकार और मध्यप्रदेश जनजाति कार्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से जनजाति कल्याण के लिए कार्य कर रहे अशासकीय संगठनो की नेशनल कॉन्क्लेव का भोपाल में 12 नवंबर को शुभारंभ करेंगे। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल नेशनल कॉन्क्लेव के समापन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे। जनजाति कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह मुख्य अतिथि होंगे। कॉन्क्लेव का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में किया गया है। इसमें देश के 500 से ज्यादा विषय विशेषज्ञ जनजातीय कल्याण से जुड़े हुए विषयों पर चर्चा करेंगे। नेशनल कॉन्क्लेव में विषय विशेषज्ञ स्वैच्छिक संस्थाओं एवं प्रयासों के माध्यम से जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। जनजाति समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, वन अधिकार, शासन, प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञ अपने-अपने विचार रखेंगे। जनजातीय समुदाय की शिक्षा और सशक्तिकरण में शैक्षिक संगठनों की भूमिका, चुनौतियां एवं मुद्दे, वर्तमान में शिक्षा का स्तर, समग्र शिक्षा में शैक्षिक संगठनों की भूमिका पर विशेष चर्चा होगी। जनजातीय समुदाय की महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियां, टीकाकरण एवं अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमो की पहुंच बढ़ाने, टेली मेडिसिन, एमहेल्थ जैसे आधुनिक हस्तक्षेप से स्वास्थ्य सेवा बढ़ाने में अशासकीय संगठनों की भूमिका पर विचार होगा। कॉन्क्लेव में जनजातीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं, और आजीविका बढ़ाने, जनजातीय युवाओं में उद्यमिता बढ़ाने, आजीविका के नए अवसर, स्वसहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक उद्यमिता को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विचार विमर्श होगा। इसमें स्वैच्छिक संगठनों की भूमिका तय की जाएगी, साथ ही वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों पर भी चर्चा होगी। कॉन्क्लेव में जनजातीय विकास एवं शासन प्रशासन से जुड़े विषयों, राज्य की भूमिका, पंचायत राज संस्थाओं, ग्राम सभा पारंपरिक जनजातीय संस्थाओं जनजाति विकास एजेंसियों की भूमिकाओं पर भी चर्चा होगी।  

दवा बनी जहर: कफ सीरप के बाद मासूमों को किडनी फेलियोर, माता-पिता पर टूटा दुख का पहाड़

छिंदवाड़ा विषाक्त कफ सीरप कोल्ड्रिफ के सेवन से छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल जिले के 24 मासूम बच्चों की किडनी फेल होने और मौत की दुखद घटना के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। नागपुर के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे चार गंभीर बच्चों में से तीन बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। हालांकि, अभी भी एक बच्चा वेदांश मेडिकल कालेज में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। तीन बच्चों को समय रहते बचा लिया गया है। नागपुर के पांच अस्पतालों में बच्चों का इलाज चला, जिसका पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया था।   बच्चों को बचा तो लिया गया है, लेकिन विशेषज्ञ डाक्टरों के अनुसार, उनकी जिंदगी आसान नहीं है। सीरप में मौजूद जहरीले तत्व डायथिलीन ग्लायकाल (DEG) के प्रभाव से बच्चों को लंबे समय तक विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। जिसमें नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) की समस्याएं, कमजोरी आदि शामिल है। बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। डाक्टरों ने बताया है कि ऐसे बच्चों को लंबे समय तक किडनी और न्यूरोलाजी विशेषज्ञों की देखरेख में रहना होगा। कुछ मामलों में भविष्य में डायलिसिस की जरूरत भी पड़ सकती है।  

PM किसान योजना: किस्त आने से पहले होगी नामों की छंटनी, ये किसान होंगे लिस्ट से बाहर

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त अभी जारी नहीं की गई है। केंद्र सरकार ने किसानों में फैल रही अफवाहों और गलतफहमियों को दूर करने के लिए आधिकारिक बयान जारी किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना में कई ऐसे आवेदन थे जो मानदंडों के अनुसार अपात्र थे। इन आवेदनों को अब संदिग्ध के रूप में चिह्नित किया गया है और उनकी जांच की जा रही है। क्यों हटाए गए कुछ नाम? सरकारी अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में ऐसे लोग योजना में पंजीकरण करा चुके हैं, जिनके पास 1 फरवरी 2019 के बाद जमीन मिली थी। कुछ परिवारों के कई सदस्य पति-पत्नी, वरिष्ठ रिश्तेदार या नाबालिग एक साथ लाभ लेने के प्रयास में थे। ऐसे आवेदकों को अस्थायी रूप से अयोग्य घोषित किया गया है। राष्ट्रीय सफाई अभियान के तहत अब तक 35.44 लाख से अधिक नाम सूची से हटा दिए गए हैं। सत्यापन के बाद ही मिलेगा भुगतान सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि हटाए गए नाम स्थायी रूप से निष्कासित नहीं हैं। जल्द ही भौतिक सत्यापन किया जाएगा, जिसके बाद योग्य पाए गए किसानों के नाम सूची में बहाल कर दिए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि केवल वास्तविक किसानों को ही भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। किसानों को अपनी पात्रता की जांच करने के लिए पीएम-किसान की आधिकारिक वेबसाइट (pmkisan.gov.in) पर ‘अपनी स्थिति जानें’ या ‘योग्यता स्थिति’ सेक्शन का उपयोग करने की सलाह दी गई है। यह प्रक्रिया मोबाइल ऐप या किसान मित्र चैटबॉट के जरिए भी पूरी की जा सकती है। 21वीं किस्त पर अपडेट सरकार ने कहा है कि 21वीं किस्त का भुगतान तब तक स्थगित रहेगा जब तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं होती। वार्षिक लाभ राशि 6,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये करने की अटकलें अभी तक आधिकारिक नहीं हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, सत्यापन के बाद करीब 50 लाख किसानों को अपात्र घोषित किया जा सकता है। किसानों के लिए जरूरी कदम केंद्र ने किसानों से आग्रह किया है कि वे अपनी जानकारी तुरंत सत्यापित करें और यदि गलती से उनका नाम सूची से हटा गया है, तो फिर से आवेदन करें। योग्य किसानों को भुगतान में देरी से बचाने के लिए ऑनलाइन या मी-सेवा केंद्रों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।  

परिवारों की खुशियों में इजाफा! बच्चों के लिए 1850 रुपये की स्कीम शुरू, देखें पूरा प्रोसेस

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने राज्य के असहाय एवं बेसहारा बच्चों के लिए नई पेंशन योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत ऐसे बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी जिनकी आयु 21 वर्ष से कम है और जिनके परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपये से कम है। पात्र बच्चों को प्रतिमाह 1850 रुपये की दर से पेंशन दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य उन बच्चों की आर्थिक मदद करना है जो किसी कारणवश अपने माता-पिता या अभिभावक से वंचित हैं। आवश्यक दस्तावेज योजना का लाभ उठाने के लिए ये दस्तावेज आवश्यक हैं:-     बेसहारा होने का प्रमाण पत्र     जन्म प्रमाण पत्र     हरियाणा राज्य में कम से कम 5 वर्ष का निवास प्रमाण पत्र (जैसे फोटोयुक्त वोटर कार्ड, राशन कार्ड आदि)     परिवार पहचान पत्र (Family ID) यदि इनमें से कोई दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है, तो आवेदक 5 वर्ष से अधिक की रिहायश का हलफनामा प्रस्तुत कर सकता है। आवेदन प्रक्रिया इच्छुक एवं पात्र आवेदक केंद्रों पर जाकर आवेदन कर सकते हैं:-     अंत्योदय सरल केंद्र     अटल सेवा केंद्र     कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) आवेदन के समय सभी आवश्यक दस्तावेजों की Self Attested फोटो कॉपी जमा करनी होगी।