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भावांतर योजना के तहत सोयाबीन उत्पादक किसानों को सीएम देंगे मदद, 233 करोड़ का भुगतान जल्द

भोपाल  मध्य प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी। आज 13 नवम्‍बर गुरुवार को सीएम डॉ. मोहन यादव भावांतर योजना (Bhavantar Yojana) के तहत प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक 1.33 लाख किसानों के खातों में राशि भेजेंगे। बता दें कि देवास में भावांतर योजना का राज्य स्तरीय उत्सव कार्यक्रम होने जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सीएम मोहन यादव 233 करोड़ रुपए की भावांतर राशि का अंतरण करेंगे। इसके अलावा देवास जिले के 183 करोड़ 25 लाख रुपए की लागत के 8 विकास कार्यों का भूमि-पूजन भी सीएम करेंगे। थोड़ी देर में देवास पहुंचेंगे सीएम सीएम मोहन यादव थोड़ी देर में देवास पहुंचेंगे। इससे पहले वे सीएम हाउस में वीडियो कॉन्फ्रेंस लेंगे। फिर 11.50 बजे देवास पहुंचेंगे। इस कार्यक्रम के बाद वे दोपहर 01.35 बजे देवास से इंदौर के लिए रवाना हो जाएंगे। यहां वे टेक्नो ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में शामिल होंगे। यहां जानें भावांतर योजना का मॉडल रेट, कितने मिलेंगे पैसे भावांतर योजना 2025 (bhavantar yojana) के अंतर्गत सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए बुधवार 12 नवंबर को 4077 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है, जिन्होंने सोयाबीन को उपज मंडियों में विक्रय किया है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी है। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को जारी किया गया था, यह 4020 रुपए प्रतिक्विंटल था। फिर 8 नवंबर को यह 4033 रुपए किया गया, 9 और 10 नवंबर को यह 3 रुपए बढ़कर 4036 रुपए प्रतिक्विंटल हो गया। वहीं 11 नवंबर को मॉडल रेट 4056 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया। अब तक 9.36 किसानों का रजिस्ट्रेशन मध्य प्रदेश में सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए शुरू की गई भावांतर योजना के तहत 3 से 17 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया संपन्न की गई। इस दौरान प्रदेश के 9.36 पात्र किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया। प्रदेश के उज्जैन, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, देवास, सागर समेत 7 जिलों से 50-50 हजार किसानों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। इसी तरह 21 जिलों से 10-10 हजार से अधिक किसान इस योजना का लाभ लेने रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। ऐसे समझें क्या है भावांतर योजना का गणित प्रदेश में 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक सोयाबीन की विक्रय करने की अवधि तय की गई है। यदि किसानों की सोयाबीन एमएसपी से कम कीमत पर बिकती है, तो किसानों को होने वाले घाटे की भरपाई मध्य प्रदेश सरकार भावांतर योजना के माध्यम से करेगी। फसल के विक्रय मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP के अंतर की राशि सीधे राज्य सरकार देगी। हेल्प लाइन नंबर जारी, परेशानी या समस्या हो तो यहां कर सकेंगे बात भावांतर योजना को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने के लिए किसानों, व्यापारी संगठनों, मंडी बोर्ड, मंडी समितियों के अधिकारियों की सुविधा के लिए भावांतर हेल्पलाइन कॉल सेंटर भी शुरू किया गया है। यह सेंटर सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक निरंतर कार्य करेगा। योजना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी लेने या समस्या पर बात इस नंबर 0755-2704555 पर की जा सकेगी।

एआई बना कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन का माध्यम, छोटे किसानों की उन्नति को दे रहा गति

सीएम योगी की दूरदर्शिता व एआई की तकनीक से बदल रही यूपी के किसानों की तकदीर एआई बना कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन का माध्यम, छोटे किसानों की उन्नति को दे रहा गति -स्मार्ट गवर्नेंस की दिशा में आईसीसीसी और एआई बने नगरीय प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण  -भविष्य-उन्मुख शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में उन्नत तकनीक रख रहा सशक्त उत्तर प्रदेश की आधारशिला महाकुंभ 2025 में एआई ने साबित की उपयोगिता, सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ ही दक्षता व सांस्कृतिक संरक्षण का भी बना माध्यम  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भविष्य आधारित तकनीक को आत्मसात कर एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। यूपी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के माध्यम से शासन तंत्र के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की जा रही है। प्रदेश के छोटे किसानों के उन्नति का भी एआई के माध्यम से नया अध्याय लिखा जा रहा है। यह उपलब्धि योगी सरकार की उस दूरदर्शी नीति का परिणाम है जिसके अंतर्गत परंपरागत क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक को एकीकृत कर ग्रामीण समाज को सशक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।         नवाचार और सहयोग की भावना को प्रोत्साहन देते हुए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उत्तर प्रदेश भारत के पहले एआई आधारित शासन प्रणाली को आत्मसात करने का केंद्र बन रहा है, जिसे विश्व बैंक–गूगल साझेदारी के अंतर्गत आरंभ किया गया। इस ऐतिहासिक पहल ने यह सिद्ध कर दिया कि कैसे एआई अभूतपूर्व स्तर पर सार्वजनिक सेवा प्रदायगी में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। उत्तर प्रदेश बना डिजिटल परिवर्तन का जीवंत उदाहरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी दूरदर्शी नीतियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन व समावेशी विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को परिलक्षित करती हैं। इन प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को एक जीवंत उदाहरण बना दिया है। दृष्टि और नवाचार के सम्मिलन से शासन की परिभाषा कैसे वैश्विक स्तर पर पुनःनिर्धारित की जा सकती है इसका भी यह अनुपम उदाहरण है। एआई आज उत्तर प्रदेश में शासन और सेवा प्रदायगी के प्रत्येक क्षेत्र को नया स्वरूप प्रदान कर रहा है। चाहें वह नगरीय प्रबंधन हो, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि या सांस्कृतिक आयोजन, प्रदेश के प्रमुख नगरों में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्मार्ट गवर्नेंस की रीढ़ बन चुके हैं। ये केंद्र एआई-संचालित विश्लेषण के माध्यम से यातायात प्रबंधन, सुरक्षा निगरानी और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कर रहे हैं। इस तकनीकी एकीकरण से नगरीय जीवन अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और नागरिक-अनुकूल बन गया है। उन्नाव बनेगा अत्याधुनिक तकनीकों के प्रशिक्षण का केन्द्र उत्तर प्रदेश ही वह राज्य है जहाँ भारत का पहला एआई-अग्मेंटेड बहुविषयक विश्वविद्यालय उन्नाव में स्थापित किया जा रहा है। यह संस्थान विद्यार्थियों को एआई, रोबोटिक्स, डेटा साइंस तथा साइबर सुरक्षा जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देगा। साथ ही, यह प्रदेश में चिकित्सा, कृषि और प्रबंधन जैसे विविध विषयों से भी जोड़कर एक भविष्य-उन्मुख कार्यबल तैयार करने का माध्यम बनेगा। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भी एआई ने उपचार की दिशा ही बदल दी है। राज्य के प्रमुख अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से शल्य-चिकित्सा अब अधिक सटीक और सुरक्षित हो गई है। एआई-आधारित डायग्नोस्टिक उपकरणों से रोगों की प्रारंभिक पहचान संभव हो रही है, जिससे प्रदेश के शहरी व ग्रामीण अंचल में नागरिकों को समय पर और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त हो रही हैं। महाकुम्भ 2025 में एआई बना करोड़ों श्रद्धालुओं के कुशल प्रबंधन का माध्यम महाकुंभ 2025 में प्रयागराज ने दुनिया के समक्ष एआई के वास्तविक अनुप्रयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। इस ऐतिहासिक आयोजन में एआई-सक्षम रीयल-टाइम निगरानी, फेशियल रिकग्नीशन और पूर्वानुमान विश्लेषण का उपयोग कर करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को सहज बनाया गया। एआई-संचालित खोया-पाया केंद्र ने मात्र कुछ मिनटों में लापता बच्चों और वृद्धजनों को उनके परिजनों से मिलाया। साथ ही, स्मार्ट लाइटिंग, डिजिटल समन्वय और डेटा-संचालित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को आध्यात्मिक और तकनीकी दोनों दृष्टियों से अद्वितीय बना दिया। इस प्रकार, महाकुंभ 2025 ने यह सिद्ध किया कि परंपरा और प्रौद्योगिकी का संगम विश्व-स्तर पर भारत की नई पहचान बन सकता है। एआई साबित हो रहा किसानों का सच्चा सहायक  कृषि क्षेत्र में एआई आज किसानों का सच्चा सहायक सिद्ध हो रहा है। एआई-संचालित ड्रोन फसलों के स्वास्थ्य की निगरानी करते हैं, सिंचाई की आवश्यकता का आकलन करते हैं और कीटनाशकों के उपयोग को न्यूनतम रखते हैं। इन स्मार्ट कृषि तकनीकों से न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि कृषि को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप भी प्राप्त हुआ है। इससे छोटे किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने का नया आत्मविश्वास मिला है। नगरों से लेकर ग्रामों तक, कक्षाओं से लेकर अस्पतालों तक, उत्तर प्रदेश एआई-आधारित शासन की एक नई परिभाषा रच रहा है। शासन के प्रत्येक क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समाहित कर राज्य न केवल भविष्य का स्वागत कर रहा है, बल्कि नवाचार, दक्षता और नागरिक-केंद्रित शासन के वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है।

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में उत्तर प्रदेश होगा साझीदार राज्य, 343 ओडीओपी स्टॉल एवं 2750 प्रतिभागी लेंगे भाग

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025, उत्तर प्रदेश की लोकल टू ग्लोबल  की आर्थिक रणनीति का वैश्विक प्रदर्शन भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में उत्तर प्रदेश होगा साझीदार राज्य, 343 ओडीओपी स्टॉल एवं 2750 प्रतिभागी लेंगे भाग  उत्तर प्रदेश अपने युवा स्टार्टअप्स और बढ़ती हुई महिला उद्यमिता का वैश्विक मंच पर करेगा प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच    लखनऊ  44वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 (अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला) का आयोजन इस वर्ष 14 से 27 नवंबर को होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की थीम पर आधारित 44वें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले 2025 का आयोजन भारत मंडपम नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस वर्ष आयोजित किये जा रहे अतंर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के साथ "साझेदार राज्य" के रूप में भाग ले रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश इस अतंर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी “लोकल टू ग्लोबल” की आर्थिक रणनीति को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगा। जिसका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक व्यापर के केंद्र के तौर पर विकसित करना, साथ ही प्रदेश के स्थानीय उत्पादों की पहुंच वैश्विक बाजार तक स्थापित करना है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा इस मेले को राज्य की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना, युवा स्टार्टअप्स और बढ़ती हुई महिला उद्यमिता को प्रदर्शित करने के लिये भी की जाएगी। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश सरकार द्वार इसी वर्ष 25 से 29 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 भी “लोकल से ग्लोबल” की थीम पर आधारित था। भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में उत्तर प्रदेश का पवेलियन राज्य की व्यापारिक प्रगति को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में उत्तर प्रदेश एक साझीदार राज्य के रूप में शामिल हो रहा है, जिसमें राज्य से 2,750 से अधिक प्रदर्शक भागीदारी करेंगे। जो व्यापार मेले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “लोकल टू ग्लोबल” की मुहीम को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करेंगे। इस मेले में 343 स्टॉल ओडीओपी योजना के अंतर्गत स्थापित किए जा रहे हैं। व्यापार मेले में राज्य की ओर से लगाये जा रहे ओडीओपी स्टॉल्स में आगरा का पेठा, भदोही की कार्पेट, मेरठ के खेल सामान, कानपुर के चमड़े के उत्पाद, फिरोजाबाद के ग्लासवेयर और सहारनपुर की लकड़ी की कलाकृतियों जैसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। ये स्टॉल्स न केवल उत्पादों की गुणवत्ता और शिल्पकला को उजागर करेंगे, बल्कि स्थानीय कारीगरों की कहानियों को भी वैश्विक पटल पर प्रस्तुत करेंगे। आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज के साथ पेश किए जा रहे ये उत्पाद अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में प्रवेश करने की क्षमता रखते हैं। मेले के दौरान आयोजित बी टू बी मीटिंग्स में विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने ओडीओपी उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई है, जिससे राज्य के स्थानीय उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में यूपी सरकार विशेष तौर पर राज्य के युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को प्राथमिकता दे रही है। उत्तर प्रदेश से लगभग 150 से अधिक युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमी मेले में अपनी नवोन्मेषी पहल पेश करने के लिये भेजे जाएगें। राज्य की 'स्टार्टअप पॉलिसी 2020' और 'महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना' के तहत प्रशिक्षित ये उद्यमी कृषि-आधारित तकनीक, हर्बल कॉस्मेटिक्स, हैंडलूम प्रोडक्ट्स और ईको-फ्रेंडली सामग्री पर काम करते हैं। ये स्टार्टअप्स न केवल रोजगार सृजन कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को डिजिटल युग से जोड़ रहे हैं। महिला उद्यमियों की भागीदारी सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है—ये महिलाएं गांवों से निकलकर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रही हैं। मेले में उनके लिए विशेष वर्कशॉप्स और नेटवर्किंग सेशन आयोजित किये जाएंगे, जहां वे निवेशकों और खरीदारों से प्रत्यक्ष जुड़ेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'लोकल टू ग्लोबल' रणनीति का मूल आधार निर्यात वृद्धि है। पिछले आठ वर्षों में राज्य ने इस नीति के तहत व्यापार में 132 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹2 लाख करोड़ के निर्यात का लक्ष्य प्राप्त किया है। जो कि राज्य की ओडीओपी, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों जैसी दूरगामी नीतियों का परिणाम हैं। वर्तमान में राज्य में लगभग 12,000 से अधिक स्टार्टअप्स रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 35 फीसदी से अधिक स्टार्ट अप का संचालन महिलाएं करेंगी। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 के दौरान ओडीओपी उत्पादों के लिए विशेष 'ग्लोबल मार्केट एक्सेस' सेमिनार किए जाएगें साथ ही डिजिटल शोरूम भी निर्मित किये जाएगें , जो भविष्य में निर्यात को और बढ़ावा देंगे। साथ ही ओडीओपी उत्पादों को लेकर विदेशी दूतावासों और व्यापार मंडलों के साथ समझौतों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 के माध्यम से उत्तर प्रदेश वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी कर रहा है—जहां राज्य के स्थानीय उत्पाद वैश्विक ब्रांड बनेंगे और ग्रामीण भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप चल रहा विकसित यूपी @2047 महाभियान

विकसित उत्तर प्रदेश @2047 87.37 लाख से अधिक सुझाव रख रहे 'समर्थ यूपी' की नींव -मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप चल रहा विकसित यूपी @2047 महाभियान -छात्र, शिक्षक, उद्यमी, महिलाएं और किसानों समेत समाज के सभी तबकों से भारी मात्रा में आ रहे सुझाव -ग्रामीण क्षेत्रों से 67.80 लाख व नगरीय क्षेत्रों से 19.57 लाख से अधिक आए सुझाव -जौनपुर, संभल, गाजीपुर, गाजियाबाद व हरदोई से मिले सर्वाधिक फीडबैक -नगर निकायों से लेकर ग्राम पंचायत तक की जा रहीं बैठकें, सम्मेलन व गोष्ठी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप, उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित प्रदेश बनाने के लक्ष्य को लेकर चल रहा “समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: समृद्धि का शताब्दी पर्व महा अभियान” जनभागीदारी के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। प्रदेश के 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्ध जनों द्वारा भ्रमण कर विभिन्न लक्षित समूहों-छात्रों, शिक्षकों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संगठनों, मीडिया एवं आम नागरिकों से संवाद स्थापित किए गए। इस दौरान लोगों से प्रदेश की विकास यात्रा और भविष्य के रोडमैप पर सुझाव लिए गए। अब तक पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर 87.37 लाख से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से 67.80 लाख व नगरीय क्षेत्रों से 19.57 लाख से अधिक आए सुझाव samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक कुल 87,37,432 फीडबैक प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 67,80,358 सुझाव ग्रामीण क्षेत्रों से और 19,57,128 सुझाव नगरीय क्षेत्रों से आए हैं। इनमें 43,49,245 सुझाव आयु वर्ग 31 वर्ष से कम, 39,79,920 सुझाव 31-60 वर्ष के आयु वर्ग, तथा 4,08,276 सुझाव 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से प्राप्त हुए हैं। कृषि, पशुधन, डेयरी, इंडस्ट्री, पर्यटन आदि क्षेत्रों से मिले सर्वाधिक सुझाव इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से भी सुझाव मिले। कृषि क्षेत्र में 23,54,098, पशुधन एवं डेरी में 3,59,686, इंडस्ट्री में 3,46,555, आईटी एवं टेक में 2,59,822, पर्यटन में 2,10,143, ग्रामीण विकास में17,07,348, इन्फ्रा में 80,182, संतुलित विकास में 1,21,404, समाज कल्याण-6,60,665, नगरीय एवं स्वास्थ्य-5,89,658, शिक्षा क्षेत्र में18,82,676 तथा सुरक्षा सम्बंधित क्षे में कुल 1,65,206 सुझाव मिले हैं। जौनपुर, संभल, गाजीपुर, गाजियाबाद व हरदोई से मिले सर्वाधिक फीडबैक फीडबैक में टॉप पांच जनपदों में जौनपुर (818,599), संभल (751,586), गाजीपुर (351,198), गाजियाबाद (256,262) और हरदोई (221,520) शामिल हैं। आमजन ने भी दी अपनी राय – मथुरा से नीलम दुबे जी का सुझाव है कि "उत्तर प्रदेश सरकार औद्योगिक विकास और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। MSME क्षेत्र में खादी एवं ग्रामोद्योग, वस्न उद्योग और हस्तशिल्प क्षेत्र शामिल हैं, जो रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाते हैं। उद्योगों के विकास के लिए प्रमुख पहलेंः प्रधानमंत्री मुद्रा योजना गैर-कॉर्पनी, गैर-कृषि लघु सूक्ष्म उद्यमों को 10 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान करती है, जिससे उद्यमशीलता और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। उद्यम पंजीकरण: MSMES के लिए सरकारी लाभ और योजनाओं का लाभ उठाने के लिए एक सरल ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया है। चैंपियंस पोर्टल: MSMEs को उनकी समस्याओं का समाधान करने और मार्गदर्शन, समर्थन एवं सहायता प्रदान करने के लिए एक मंच है। "क्लस्टर विकास कार्यक्रम: पारंपरिक उद्योगों और हस्तशिल्प के जरिए उद्योगों और उद्यमों की क्षमता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।" – हापुड़ से विनय कुमार मिश्रा के अनुसार "तीर्थ नगरी बृजघाट पौराणिक स्थल है हरिद्वार उत्तराखंड में जाने के पश्चात उत्तर प्रदेश का एकमात्र स्थान बृजघाट है माननीय योगी जी से अनुरोध है गंगा जी का जलस्तर बढ़ता है घटना रहता है यात्री गंगा स्नान हेतु आते हैं अचानक से गहरे जल में जाने के कारण डूब जाते हैं कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है इसके अलावा आने वाले यात्रियों को काफी सारी एस सुविधाओं का सामना करना पड़ता है महीने में 2 मेले लगते हैं पूर्णिमा और एवं अमावस्या हाईवे पर जाम लग जाता है 8-8 घंटे तक जाम रहता है यात्रियों के लिए अच्छे पेयजल एवं शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है बृजघाट की नगर पालिका गढ़मुक्तेश्वर होने के कारण बृजघाट वासियों को भी बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है तीर्थ नगरी बृजघाट से गढ़मुक्तेश्वर 8 किलोमीटर की दूरी पर है ब्रजघाट वाशियो को टोल देकर गढ़मुक्तेश्वर जाना होता है कृपया ध्यान दें।" – बहराइच से भानु प्रताप के अनुसार 'बेसिक शिक्षा को पेपरलेस बनाने के लिए 14 सूत्रीय सुझाव साझा किया गया जो कि निम्नवत है: 1. सभी विद्यालयीय रजिस्टर (हाज़िरी, नामांकन, MDM, अवकाश आदि) गूगल एक्सेल शीट में ऑनलाइन रखें। 2. शिक्षकों को टैबलेट/लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएं। 3. छात्रों का सम्पूर्ण डेटा यूडीआईएसई पर समय से अपलोड किया जाए। 4. विद्यालय स्तर पर व्हाट्सऐप/टेलीग्राम ग्रुप से त्वरित सूचना प्रसारण हो। 5. ई-ऑफिस प्रणाली से आदेश व पत्राचार पेपरलेस हो। 6. परीक्षा परिणाम व प्रगति पत्रक ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएं। 7. QR कोड आधारित उपस्थिति प्रणाली अपनाई जाए। 8. शिक्षकों की डायरी व मासिक रिपोर्ट गूगल फॉर्म से भरी जाए। 9. एमडीएम की दैनिक रिपोर्टिंग मोबाइल ऐप से हो। 10. ई-लाइब्रेरी व ई-कंटेंट को बढ़ावा दिया जाए। 11. सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम व बैठकें ऑनलाइन प्लेटफार्म पर संचालित हो। 12. अभिभावकों को SMS/ एप के माध्यम से सूचना दी जाए। 13. डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणन हो। 14. क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षित डेटा बैकअप रखा जाए।" नगर निकायों से लेकर ग्राम पंचायत तक की जा रहीं बैठकें, सम्मेलन व गोष्ठी इस महाभियान के सम्बन्ध में जनसामान्य को जागरूक एवं सहभागी बनाने हेतु नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न विशेष बैठकें, सम्मेलन एवं गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश के समस्त नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर पंचायत में विशेष बैठकें एवं सम्मेलन/गोष्ठियाँ आयोजित किये जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त अभी तक 65 जिला पंचायतों में सम्मेलन/गोष्ठियों और 62 जिला पंचायतों में विशेष बैठकें एवं 817 क्षेत्र पंचायतों में सम्मेलन/गोष्ठियों और 824 क्षेत्र पंचायतों में विशेष बैठके सम्पन्न हुई हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश की 51,828 ग्राम पंचायतों के स्तर पर भी विशेष बैठकों का सफल आयोजन किया गया है। उल्लेखनीय है कि इन आयोजनों के माध्यम से स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित विभागों के बीच संवाद-सम्पर्क को और अधिक सशक्त किया गया है। मुख्यमंत्री योगी के विजन "समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: समृधि का शताब्दी पर्व महाभियान के अनुरूप प्राप्त सुझावों … Read more

41 हजार से अधिक किसानों से किया गया है धान क्रय

विपणन सत्र 2025-26: 3.58 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीकरण  2.43 लाख मीट्रिक टन से अधिक की हो चुकी धान खरीद   41 हजार से अधिक किसानों से किया गया है धान क्रय  प्रदेश में 4110 क्रय केंद्र किए जा चुके हैं स्थापित  धान (कॉमन)-2369 व (ग्रेड-ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हो रही खरीद  पहली अक्टूबर से पश्चिम उत्तर प्रदेश व पहली नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में शुरू हुई है धान खरीद  लखनऊ  योगी सरकार के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों को 'अन्नदाता किसान' का निरंतर साथ मिल रहा है। विपणन सत्र 2025-26 के अंतर्गत धान खरीद में हो रही वृद्धि इस बात को पुख्ता कर रही है। बुधवार अपराह्न साढ़े तीन बजे तक 41583 किसानों से 2.43 लाख मीट्रिक टन धान खरीद की जा चुकी है। इसके लिए प्रदेश में अब तक 4110 क्रय केंद्र भी स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं पहली सितंबर से अब तक 3,58,372 किसानों ने पंजीकरण करा लिया है।  41 हजार से अधिक किसानों से हुई 2.43 लाख मीट्रिक टन धान की हुई खरीद  खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक 2369 रुपये धान (कॉमन) तथा 2389 रुपये (ग्रेड-ए) प्रति कुंतल की दर से खऱीद हो रही है। बुधवार तक 41,583 किसानों से 2.43 लाख मीट्रिक टन धान खरीद की जा चुकी है। वहीं 3,58,372 किसानों ने अब तक धान बिक्री के लिए पंजीकरण भी करा लिया है। पश्चिम उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी व सीतापुर में पहली अक्टूबर तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के लखनऊ, उन्नाव व रायबरेली मं पहली नवंबर से धान खरीद शुरू हुई थी।  सीएम योगी के निर्देश पर 48 घंटे में किसानों को किया जा रहा भुगतान  सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान किया जा रहा है।  किसानों के आधार लिंक्ड बैंक खाते में सीधे भुगतान किया जाएगा। वहीं बिचौलियों को रोकने व पारदर्शिता बरतते हुए क्रय केंद्रों पर मोटे अनाज की खरीद ई-पॉप (इलेक्ट्रॉनिक प्वॉइंट ऑफ परचेज) डिवाइस के माध्यम से पहले की भांति किसानों का बायोमीट्रिक सत्यापन के जरिए ही होगी। किसान अपनी समस्याएं टोल फ्री नंबर 18001800150 पर जानकारी ले सकते हैं या अपनी समस्या भी बता सकते हैं।  एक नजर  41 हजार से अधिक किसानों से 2.43 लाख मीट्रिक टन धान की हुई खरीद  पहली सितंबर से प्रारंभ हुआ पंजीकरण, अब तक 3,58,372 किसानों ने करा लिया पंजीकरण 2369 रुपये कॉमन तथा 2389 रुपये (ग्रेड-ए) प्रति कुंतल की दर से हो रही खरीद fcs.up.gov.in या UP KISAN MITRA  पर पंजीकरण अनिवार्य, पंजीकृत किसानों से ही हो रही खरीद  टोल फ्री नंबर 18001800150 से सहायता या जानकारी ले सकते हैं किसान

योगी सरकार का लक्ष्य, हर पात्र परिवार तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

उत्तर प्रदेश में जीरो पॉवर्टी अभियान को मिशन मोड में किया जाए 15 नवंबर तक प्रथम चरण और द्वितीय चरण की योजनाओं के सत्यापन की प्रक्रिया 30 नवंबर तक हो पूरी योगी सरकार का लक्ष्य, हर पात्र परिवार तक पहुंचे योजनाओं का लाभ एक माह का विशेष अभियान चलाकर  सभी पात्र लाभार्थियों को किया जाएगा चिन्हित लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश को गरीबी-मुक्त बनाने के अपने संकल्प की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। यूपी में “जीरो पॉवर्टी अभियान” को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी पात्र परिवार को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।      मुख्यमंत्री का कहना है कि इस अभियान का प्रथम चरण सात प्राथमिकता वाली योजनाओं के पूर्ण आच्छादन पर केंद्रित होगा। इनमें राशन कार्ड, दिव्यांगजन पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, पीएम किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) शामिल हैं।      सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 15 नवंबर तक प्रथम चरण की सभी योजनाओं का आच्छादन पूरा कर लिया जाए, जबकि द्वितीय चरण के अंतर्गत आने वाली योजनाओं के सत्यापन की प्रक्रिया 30 नवंबर तक हर हाल में पूरी हो जानी चाहिए।       उन्होंने यह भी कहा कि एक माह का विशेष अभियान चलाकर उन सभी पात्र लाभार्थियों को चिन्हित किया जाए, जो किसी कारणवश अभी तक इन प्राथमिकता वाली योजनाओं से वंचित हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रत्येक पात्र परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना ही जीरो पॉवर्टी अभियान का मूल उद्देश्य है।       मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि चिन्हित परिवारों के प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवेदन सुनिश्चित किए जाएं और साथ ही यह भी देखा जाए कि सभी लाभार्थियों के पूरे परिवार का नाम राशन कार्ड में दर्ज हो।        यूपी सरकार की मंशा है कि इस विशेष अभियान के माध्यम से न केवल गरीब परिवारों को सामाजिक सुरक्षा मिले बल्कि उनकी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति भी सुनिश्चित हो। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और जिलों में अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग हो।

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला का भी हो रहा आधुनिकीकरण

गोरखपुर में विश्व स्तरीय विज्ञान पार्क बना रही योगी सरकार वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला का भी हो रहा आधुनिकीकरण नक्षत्रशाला परिसर में ही ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के नाम पर बन रहा प्रदेश का दूसरा विज्ञान पार्क 15.89 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा विज्ञान पार्क का निर्माण, 46.88 करोड़ रुपये से नक्षत्रशाला का कायाकल्प ऑडोटोरियम में होगा थ्री डी थिएटर, एक्टिविटी लैब और साइंस गैलरी भी होगी तारों की दुनिया की आभासी यात्रा करने के साथ खेल-खेल में विज्ञान सीखेंगे बच्चे गोरखपुर  योगी सरकार गोरखपुर में विश्व स्तरीय ज्ञान विज्ञान पार्क बनवा रही है। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला में ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के नाम पर बन रहे ज्ञान विज्ञान पार्क का निर्माण मार्च 2026 तक पूर्ण होना प्रस्तावित है। यह प्रदेश का दूसरा विज्ञान पार्क होगा। इसके निर्माण पर 15 करोड़ 89 लाख रुपये की लागत आएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशानिर्देश पर 46 करोड़ 88 लाख रुपये की लागत से वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला का आधुनिकीकरण भी कराया जा रहा है। नक्षत्रशाला के कायाकल्प और इसके कैम्पस में ज्ञान विज्ञान पार्क की स्थापना के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्टूबर 2022 में नक्षत्रशाला का दौरा करने के दौरान दिए थे। तब सीएम ने यहां आकर आंशिक सूर्य ग्रहण का नजारा देखा था और नक्षत्रशाला को विश्व स्तरीय स्तर पर अत्याधुनिक बनाने की मंशा जताई थी। उनके निर्देश के बाद डीपीआर बनाकर 5 जुलाई 2024 से नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण और 5 मई 2025 से ज्ञान विज्ञान पार्क के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ। विज्ञान पार्क का कार्य मार्च 2026 तथा नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण का कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना है।  नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण और इसके परिसर में ज्ञान विज्ञान पार्क की स्थापना से विद्यार्थी तारों की दुनिया की आभासी यात्रा कर सकेंगे। खेल-खेल में विज्ञान सीख सकेंगे, गूढ़ रहस्यों को समझ सकेंगे। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के प्रभारी डॉ. महादेव पांडेय के मुताबिक आधुनिकीकरण से नक्षत्रशाला को विश्व स्तरीय बनाया जा रहा है। विज्ञान से संबंधित कई विशिष्ट उपकरण मंगाए जा रहे हैं। थ्री डी प्रोजेक्टर लगाने के साथ ही एम्फी थिएटर बनाया जा रहा है। नक्षत्रशाला में स्पेशल साइंस गैलरी बनाई जा रही है। सबसे खास आकर्षण एक्टिविटी लैब होगी। इस लैब में विद्यार्थी कई प्रायोगिक गतिविधियों में शामिल होकर विज्ञान की बारीकियों को सीख सकेंगे।  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने लिया निर्माणाधीन विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला का जायजा प्रदेश के के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  मंत्री अनिल कुमार ने बुधवार को वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण कार्य एवं निर्माणाधीन विज्ञान पार्क का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नक्षत्रशाला को आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाए। ताकि विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं आम जनमानस को विज्ञान एवं खगोल संबंधी जानकारी सहज रूप से उपलब्ध हो सके। उन्होंने विज्ञान पार्क के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्माण एजेंसी को कार्य की गुणवत्ता एवं समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।  उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पार्क का निर्माण इस प्रकार किया जाए कि यह न केवल गोरखपुर, बल्कि पूरे पूर्वांचल क्षेत्र के लिए विज्ञान शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन सके। उन्होंने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। नक्षत्रशाला एवं विज्ञान पार्क इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

युवा नेतृत्व, अनुशासन और नवाचार का संगम बनेगा 19वां राष्ट्रीय जम्बूरी

61 वर्षों बाद लखनऊ में फिर गूंजेगा राष्ट्रीय जम्बूरी का स्वर युवा नेतृत्व, अनुशासन और नवाचार का संगम बनेगा 19वां राष्ट्रीय जम्बूरी 300 एकड़ की टेंट सिटी में सजेगा स्मार्ट और हरित जम्बूरी मंच 32,000 स्काउट्स और 2,000 विदेशी प्रतिनिधि होंगे सहभागी रोबोटिक्स, डिजिटल स्ट्रीमिंग और तकनीक से परिपूर्ण होगा जम्बूरी स्काउट शिविर सांस्कृतिक संवाद और हरित ऊर्जा का प्रतीक बनेगा लखनऊ जम्बूरी 2025 लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक ऐतिहासिक अवसर की गवाह बनने जा रही है। 61 वर्षों के अंतराल के बाद भारत स्काउट्स और गाइड्स का 19वां राष्ट्रीय जम्बूरी 23 से 29 नवम्बर तक वृंदावन योजना स्थित रक्षा एक्सपो ग्राउंड में आयोजित होगा। यह आयोजन न केवल स्काउटिंग परंपरा का उत्सव है, बल्कि विकसित भारत के युवा नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना का भी प्रतीक बनेगा। लगभग 300 एकड़ क्षेत्र में फैले इस आयोजन में 32,000 से अधिक प्रतिभागी सम्मिलित होंगे, जिनमें देशभर के स्काउट्स के साथ एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 2,000 प्रतिनिधि भी शामिल हैं। जम्बूरी स्थल पर 3,500 टेंट, 100 रसोई, 4 सेंट्रल किचन, और 30,000 सीटों वाला मुख्य एरीना स्टेडियम तैयार किया जा रहा है, जिसमें आधुनिक एलईडी स्क्रीन, डिजिटल कंट्रोल रूम और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन को राज्य की संस्कृति, परंपरा और नवाचार की झलक के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है कुछ समय पूर्व उन्होंने तैयारियों की समीक्षा कर अधिकारियों को निर्देश दिया था कि एक्सपो ग्राउंड में राज्यवार प्रदर्शनियों के साथ ग्लोबल विलेज, 75 वर्ष की स्काउटिंग प्रदर्शनी, एयर अग्निवीर, रोबोटिक्स, सोलर और आर्मी पवेलियन भी लगाए जाएं। जम्बूरी का यह संस्करण तकनीकी दृष्टि से भी ऐतिहासिक रहेगा। पहली बार डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग, आरएफआईडी (RFID)  आधारित स्मार्ट आईडी कार्ड, और व्हाट्सएप कम्युनिकेशन सिस्टम के माध्यम से प्रतिभागियों को रियल-टाइम सूचनाएं मिलेंगी। साथ ही दो दिवसीय ड्रोन शो में सैकड़ों ड्रोन मिलकर स्काउटिंग और युवा सशक्तीकरण की कहानी आकाश में चित्रित करेंगे। युवाओं में नवाचार और नेतृत्व कौशल को प्रोत्साहित करने हेतु आयोजन स्थल पर आईटी एवं एआई हब स्थापित किया जा रहा है। यहां डिजिटल लर्निंग, इनोवेशन, और लीडरशिप से जुड़े वर्कशॉप्स आयोजित होंगे। स्काउट्स को  शिक्षा, रोबोटिक्स, और साइंस एक्सपो के माध्यम से आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के उच्च मानकों को ध्यान में रखते हुए परिसर में 100 बेड का अस्पताल, 16 डिस्पेंसरी, फायर स्टेशन, सीसीटीवी निगरानी तंत्र, और ग्रीन एनर्जी सिस्टम की व्यवस्था की गई है। सम्पूर्ण आयोजन को प्लास्टिक-फ्री, कचरा पृथक्करण और कम्पोस्टिंग आधारित बनाया जा रहा है। लखनऊ जम्बूरी न केवल एक शिविर है, बल्कि यह भारत की युवा शक्ति, सांस्कृतिक विविधता, और सतत विकास के संकल्प का प्रतीक बनेगा। परंपरा, तकनीक और सेवा भावना के इस अद्भुत संगम से यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगा।

श्रीराम मंदिर निर्माण के पश्चात अविस्मणीय बनेगा ध्वजारोहण कार्यक्रम

लोकल टू ग्लोबल मिशन की सबसे बड़ी मिसाल बनेगा अयोध्या का ध्वजारोहण समारोह  श्रीराम मंदिर निर्माण के पश्चात अविस्मणीय बनेगा ध्वजारोहण कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीराम मंदिर के शिखर पर फहराएंगे भगवा ध्वज अयोध्या के लोकल उत्पादों को ग्लोबल बना रहे विदेशी पर्यटक  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या की अर्थव्यवस्था एक बार फिर रफ्तार पकड़ने वाली है। 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराएंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इसकी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। पीएम मोदी के मार्गदर्शन व सीएम योगी के नेतृत्व में रामनगरी नव्यता, दिव्यता व भव्यता के साथ नई आभा बिखेर रहा है। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में न सिर्फ समूचा भारत, बल्कि विदेशी पर्यटकों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। इससे पूरे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई मिल रही है। विदेशी पर्यटक अयोध्या के लोकल उत्पादों को ग्लोबल बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।  अर्थव्यवस्था को मिल रही है नई ऊंचाई अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के पहले से ही सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में हो रहे दीपोत्सव ने साल दर साल नया कीर्तिमान स्थापित किया और देश-विदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या की तरफ आकर्षित किया। अब अयोध्या में होने वाले ध्वजारोहण में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे न केवल स्थानीय व्यापारियों के रोजगार में और वृद्धि होगी, बल्कि लघु उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के व्यापार को भी गति मिलेगी। होटल और लॉज तेजी के साथ बुक हो रहे हैं। अयोध्या में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से रेस्टोरेंट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की आय में भी वृद्धि होनी है। पर्यटक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग के तहत बनने वाली मूर्तियों, बैग, कपड़े और सामानों की बड़ी तादाद में खरीदारी करते हैं। इससे स्थानीय छोटे और मझोले व्यावसायियों को भी बड़ा बाजार मिलता है।  बड़े आयोजनों के समय ट्रांसपोर्ट सेक्टर की भी कमाई में बड़ा उछाल आता है। लाखों की संख्या में तीर्थयात्रियों को भ्रमण करने के लिए ई-रिक्शा, ऑटो, बस, कार और टूरिस्ट बसों की आवश्यकता होती है। ऐसे में टूर-ट्रैवल्स व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय में भी वृद्धि होती है।   उत्तर प्रदेश की आय में अयोध्या का बड़ा योगदान    राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या ने अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं तो इसका श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है, क्योंकि उनके अथक परिश्रम से ही यह संभव हो सका। अयोध्या का विकास सिर्फ सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना का प्रतीक ही नहीं, बल्कि विकास और समृद्धि का भी परिचायक है। राम मंदिर बनने के बाद 2024 में करीब 16.44 करोड़ तीर्थयात्रियों ने रामलला के दर्शन किए, जो अपने आप में रिकॉर्ड है। जनवरी-जून 2025 में अयोध्या में रिकॉर्डतोड़ 23.82 करोड़ से अधिक तीर्थयात्री आ चुके हैं। इसकी वजह से अयोध्या की अर्थव्यवस्था तेजी के साथ बढ़ रही है। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पर्यटकों की संख्या में 40%-50% की तेजी आई है।  स्थानीय हस्तशिल्पकारों की आय में वृद्धि अयोध्या विकास और समृद्धि के लिए देश में रोल मॉडल बन चुकी है। मंदिर पर्यटन के क्षेत्र में अयोध्या ने एक रिकॉर्ड बनाया है। बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के आने से स्थानीय हस्तशिल्पकारों को भी काफी रोजगार मिल रहा है। हथकरघा उद्योग भी फल-फूल रहा है। राम मंदिर निर्माण के बाद स्थानीय हस्तशिल्पकारों की संख्या में 25% से अधिक वृद्धि देखी गई है। इनकी आय भी कई गुना बढ़ गई है। पहले रोजाना इनकी आमदनी 200-300 रुपये थी, अब ये 1000 से 1500 रुपये कमा रहे हैं। विशेष दिनों में तो इनकी कमाई कई गुना बढ़ जाती है। इसी तरह दीपोत्सव के दौरान स्थानीय कारोबारियों के साथ ही निम्न आय वालों (कुम्हार, फूल, नाविक आदि) को भी बड़ी आय हुई। दीपोत्सव के दौरान लाखों पर्यटक अयोध्या आए थे। 90 फीसदी होटल बुक थे। रेस्टोरेंट, प्रसाद की दुकानों, फोटो और मूर्तिकारों ने बड़ा मुनाफा कमाया। अयोध्या में दीपोत्सव के दौरान 5 करोड़ से ज्यादा की आय दर्ज की गई।  तीर्थयात्रा से जुड़े उद्योगों को बड़ा मुनाफा अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद तीर्थयात्रा से जुड़े उ‌द्योगों का वार्षिक कारोबार दिनों दिन बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में केवल आर्थिक विकास ही नहीं हुआ, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तर प्रदेश में मंदिर और उससे जुड़ी गतिविधियों ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में करीब ₹1.25 लाख करोड़ का योगदान किया है। आंकड़ों के मुताबिक 2023 में अयोध्या आने वाले पर्यटकों की संख्या 5.76 करोड़ थी, जो 2024 में बढ़कर 16.44 करोड़ तक पहुंच गई।   ODOP से  अयोध्या के उत्पाद विदेश पहुंचे ODOP के तहत अयोध्या के हथकरघा और अन्य उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं। अयोध्या में पीढ़ियों से पारंपरिक रूप से गुड़ बनाने की प्रक्रिया चली आ रही है । इस जनपद की कुल कृषि योग्य भूमि के 20 % भाग पर गन्ने की खेती होती है । यह जनपद गुड़ और इससे जुड़े अन्य उत्पाद यथा गज़क, लड्डू , चिक्की , गुड़ के लड्डू इत्यादि तैयार करता है । अयोध्या आने वाले पर्यटक गुड़ और उससे जुड़े उत्पाद भी खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं। इससे गन्ना उत्पादकों और गुड़ कारोबारियों को भी लाभ हो रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे उत्सव का शुभारंभ, जनजातीय समाज को समर्पित होगा पूरा सप्ताह

धरती आबा बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती पर जनजाति भागीदारी उत्सव से गूंजेगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे उत्सव का शुभारंभ, जनजातीय समाज को समर्पित होगा पूरा सप्ताह 13 से 18 नवम्बर तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान बनेगा जनजातीय संस्कृति का संगम स्थल देशभर की जनजातियों के लोकनृत्य, लोकगीत और शिल्पकला से सजेगा छह दिवसीय महोत्सव अरुणाचल प्रदेश बनेगा सह-आमंत्रित राज्य, पूर्वोत्तर भारत की झलक पेश करेगा विशेष मंडप 1090 चौराहे से निकलेगी भव्य सांस्कृतिक समागम शोभा यात्रा, जनजातीय रंगों से सजेगी राजधानी मुखौटा प्रदर्शनी, धरती आबा नाटक, माटी कला और जनजातीय व्यंजनों का ‘जेवनार’ बनेंगे उत्सव के आकर्षण शिल्प मेला से लेकर सांस्कृतिक संध्या तक, जनजातीय आत्मगौरव का होगा भव्य उत्सव जनजातीय समाज के उत्थान और आत्मनिर्भरता के लिए संकल्पबद्ध है योगी सरकार प्रधानमंत्री वन धन योजना से जनजातीय समुदायों को मिल रहा आजीविका सृजन का नया आधार प्रदेश के 517 जनजाति बाहुल्य ग्रामों में ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ से आया विकास का नया सवेरा वनाधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत बुक्सा, गोंड, बैगा, थारु और सहरिया जनजातियों को मिला आवास का अधिकार मुख्यमंत्री आवास योजना से अब वनवासी परिवारों के जीवन में आया स्थायित्व और सम्मान एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों और जयप्रकाश नारायण सर्वोदय छात्रावासों से जनजातीय बच्चों को मिल रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लखीमपुर-खीरी, बहराइच, सोनभद्र और ललितपुर में एकलव्य विद्यालय 09 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में जनजातीय छात्र-छात्राओं को मिल रही निःशुल्क शिक्षा, आवास, वस्त्र और पुस्तकें थारु, बुक्सा, भोटिया, जौनसारी और राजी समेत प्रदेश की जनजातियाँ बन रही हैं ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ की नई शक्ति बलरामपुर के इमिलिया कोडर में थारू जनजाति संग्रहालय स्थापित, मीरजापुर, सोनभद्र और महराजगंज में नए संग्रहालयों की स्थापना प्रक्रियाधीन लखनऊ  धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में राजधानी लखनऊ में गुरुवार से 'जनजाति भागीदारी उत्सव' का भव्य शुभारंभ होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्घाटन करेंगे। छह दिवसीय यह महोत्सव 13 से 18 नवंबर तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित होगा, जो देश की विविध जनजातीय संस्कृतियों का अद्वितीय संगम बनेगा। जनजातीय अस्मिता, कला, परंपरा और जीवन मूल्यों का यह उत्सव “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना को नई ऊंचाई देगा। पूरे सप्ताह राजधानी लखनऊ जनजातीय रंगों से सजेगी। 1090 चौराहे से भव्य सांस्कृतिक शोभा यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें देशभर की जनजातियों के लोकनृत्य, पारंपरिक परिधान, मुखौटे और वाद्ययंत्र झांकियों के रूप में दिखाई देंगे। अरुणाचल प्रदेश इस आयोजन का सह-आमंत्रित राज्य होगा और पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करेगा। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के प्रांगण में जनजातीय शिल्प मेला, लोकनृत्य-लोकगीत प्रस्तुतियां, मुखौटा प्रदर्शनी, धरती आबा नाटक और माटी कला प्रदर्शन विशेष आकर्षण रहेंगे। साथ ही, जनजातीय व्यंजनों का “जेवनार” (फूड फेस्ट) भी आगंतुकों को वनवासी समाज की परंपरागत स्वाद संस्कृति से परिचित कराएगा। सुबह 11 बजे से मेला और प्रदर्शनी खुलेंगे, जबकि प्रतिदिन शाम 5 से 9 बजे तक सांस्कृतिक संध्या में देश के 18 राज्यों के 600 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। बता दें कि बीते साढ़े 08 वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जे जनजातीय समाज के समग्र उत्थान को अपनी प्राथमिकता में रखा है। प्रधानमंत्री वन धन योजना के तहत राज्य के जनजातीय समुदायों को आजीविका सृजन का नया आधार मिला है। प्रदेश के 517 जनजाति बाहुल्य ग्रामों में संचालित धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान से विकास और सशक्तिकरण की नई दिशा मिली है। इसी तरह, वनाधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत बुक्सा, गोंड, बैगा, थारु और सहरिया जनजातियों को आवासीय अधिकार प्राप्त हुए हैं, जिससे मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिए वनवासी परिवारों के जीवन में स्थायित्व और सम्मान का नया अध्याय जुड़ा है। शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार ने जनजातीय बालकों के भविष्य को मजबूत आधार दिया है। एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय और जयप्रकाश नारायण सर्वोदय छात्रावासों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नई राह खुली है। लखीमपुर-खीरी, बहराइच, सोनभद्र और ललितपुर में एकलव्य विद्यालय संचालित हैं, जबकि नौ राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में जनजातीय छात्र-छात्राओं को निःशुल्क आवास, वस्त्र, पुस्तकें और शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य की थारु, बुक्सा, भोटिया, जौनसारी और राजी जनजातियाँ आज विकसित उत्तर प्रदेश की नई शक्ति बनकर उभर रही हैं। बलरामपुर के इमिलिया कोडर में थारू जनजाति संग्रहालय स्थापित किया गया है, जबकि मीरजापुर, सोनभद्र और महराजगंज में नए जनजातीय संग्रहालयों की स्थापना प्रक्रिया में है।