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आत्मघाती धमाके की छाया में दहशत: श्रीलंकाई क्रिकेटर्स पर धमकियाँ, बोर्ड ने जारी की चेतावनी — पाकिस्तान दौरा विवादों में

 इस्लामाबाद पाकिस्तान एक बार फिर आतंक के चलते बदनाम हो रहा है. चंद रोज पहले इस्लामाबाद में हुए आत्मघाती हमले के बाद उसकी इंटरनेशनल बेइज्जती हो रही है. वनडे सीरीज खेलने आई श्रीलंकाई टीम ने पाकिस्तान में एक पल भी रहने से इनकार कर दिया है. श्रीलंका के 16 में से आठ खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ के कई सदस्य वापस स्वदेश लौटने को तैयार है. इस बीच श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने वापस लौटने का मन बना चुके खिलाड़ियों को धमकी दी है. श्रीलंका क्रिकेट (SLC) ने मेंस नेशनल टीम के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को सुरक्षा चिंताओं के चलते मौजूदा पाकिस्तान दौरे को छोड़ने पर ‘औपचारिक समीक्षा’ की धमकी दी है. मंगलवार को इस्लामाबाद में आत्मघाती बम विस्फोट हुआ. यहीं पाकिस्तानी टीम भी ठहरी हुई है. श्रीलंका की टीम दहशत में है. हालांकि, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने दावा किया कि सीरीज जारी रहेगी, बस उसका शेड्यूल थोड़ा बदला गया है.  दोनों टीमों के बीच रावलपिंडी में गुरुवार को दूसरा वनडे खेला जाना था, लेकिन अब इसे शुक्रवार तक टाल दिया गया है, जबकि तीसरा मैच अब 15 नवंबर की बजाय 16 नवंबर को इसी मैदान पर खेला जाएगा.  श्रीलंका ने इस सीरीज के लिए 16 सदस्यीय टीम भेजी है और समाचार एजेंसी PTI को सूत्रों ने बताया कि उनमें से कम से कम आठ खिलाड़ी घर लौटना चाहते हैं. श्रीलंका क्रिकेट (SLC) ने खिलाड़ियों की इस मांग को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही उन्हें और टीम के सपोर्ट स्टाफ को दौरा जारी रखने का निर्देश दिया है.  SLC ने बयान में कहा टीम प्रबंधन ने हमें सूचित किया कि पाकिस्तान दौरे पर गई राष्ट्रीय टीम के कई खिलाड़ियों ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए स्वदेश लौटने का अनुरोध किया है. इस पर SLC ने तुरंत खिलाड़ियों से बातचीत की और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी सभी चिंताओं पर PCB और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर गंभीरता से विचार किया जा रहा है ताकि पूरी टीम की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.  एसएलसी ने कहा कि बोर्ड ने खिलाड़ियों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है और टीम को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मैच खेलने का निर्देश दिया है. बोर्ड ने दौरे पर गए स्क्वॉड के किसी भी सदस्य को निर्देशों का उल्लंघन करने पर नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहने के लिए कहा है. बोर्ड के बयान में कहा गया है, ‘अगर कोई खिलाड़ी, खिलाड़ी या सहयोगी स्टाफ का कोई सदस्य एसएलसी के निर्देशों के बावजूद वापस लौटता है तो एक औपचारिक समीक्षा की जाएगी और समीक्षा के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा.’ पाकिस्तान में आत्मघाती धमाका ऐसा समझा जाता है कि दिन भर एसएलसी खिलाड़ियों के स्वदेश लौटने के अनुरोध के खिलाफ अड़ा रहा. श्रीलंका ने निर्धारित तीन एकदिवसीय मैचों में से केवल एक ही खेला है, और इसके तुरंत बाद उसे पाकिस्तान में एक टी-20 त्रिकोणीय श्रृंखला (जिम्बाब्वे दूसरी टीम है) भी खेलनी है. फिर भी खिलाड़ियों के दबाव के कारण एक और बैठक बुलानी पड़ी. श्रीलंका क्रिकेट के बयान में कहा गया है कि बोर्ड ने आशंकाओं को दूर करने के लिए तुरंत काम किया है. एसएलसी ने तुरंत खिलाड़ियों से बात की और उन्हें आश्वासन दिया कि दौरे पर आए हर सदस्य की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और संबंधित अधिकारी कड़ी मेहनत कर रहे हैं. पाकिस्तान की राजधानी में कार धमाका. दौरे के भविष्य को लेकर बुधवार देर रात तक खिलाड़ियों, टीम प्रबंधन, एसएलसी अधिकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों के बीच लंबी बातचीत हुई. यह बातचीत देर रात तक जारी रही और अनिश्चितता के कारण अन्य व्यवस्थाएं ठप्प पड़ गईं, जिसके चलते अब श्रृंखला के बाकी बचे दो वनडे मैचों को एक दिन के लिए टाल दिया गया है. पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने घोषणा की है कि ये मैच 14 और 16 नवंबर को खेले जाएंगे, जबकि पहले ये 13 और 15 नवंबर को होने थे.

वेदांत केवल भारत के लिए नहीं बल्कि समस्त मानवता के लिए : पद्म आचार्य जोनास मसेट्टी

ब्राज़ील के पद्म जोनास मसेट्टी आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा आयोजित प्रेरणा संवाद में हुए शामिल वेदांत केवल भारत के लिए नहीं बल्कि समस्त मानवता के लिए : पद्म आचार्य जोनास मसेट्टी भारतीय संस्कृति जीवंत संस्कृति है : जोनास मसेट्टी अद्वैत के ज्ञान से ही भविष्य की दिशा बदली जा सकती है : स्वामी शुद्धिदानंद अद्वैत दर्शन मानवता के कल्याण का दर्शन है : स्वामी शुद्धिदानंद आईआईटी इंदौर में ‘भावी विश्व का दर्शन ’ विषय पर हुआ संवाद ब्राजील के जोनास ने जैसे ही. .. जय जय हे महिषासुरमर्दिनि… गाया तो तालियों से गूँज उठा सभागार भोपाल आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा उपनिषदों में निहित अद्वैत सिद्धांत को जन-जन तक पहुँचाने के लिये शंकर व्याख्यानमाला, एकात्म संवाद एवं प्रेरणा संवाद जैसे विविध प्रेरक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाता है। इसी श्रृंखला में बुधवार को भारतीय प्रोधौगिकी संस्थान (IIT) इंदौर में प्रेरणा संवाद हुआ। इसमें ‘भावी विश्व का दर्शन’ विषय पर ब्राज़ील के पद्म आचार्य जोनास मसेट्टी और स्वामी शुद्धिदानंद (अध्यक्ष, अद्वैत आश्रम मायावती) ने संवाद किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक, प्रोफेसर, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। वेदांत और संस्कृति के माध्यम से विश्व को पुनः जोड़ना आवश्यक : जोनास आचार्य जोनास ने युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज की दुनिया में, विशेषकर पाश्चात्य समाज में, लोग धन और सुख की खोज में लगे हैं, पर आत्मिक मूल्य भूल गए हैं। हमारा उद्देश्य वेदांत के ज्ञान को पुनर्जीवित करना और उसे धर्म नहीं, बल्कि मानवता का सार्वभौमिक दर्शन बनाकर प्रस्तुत करना है, जो एक बेहतर व्यक्ति और एक बेहतर समाज का निर्माण करे। भारत अपने उत्सवों, कहानियों, संगीत और कला के माध्यम से संस्कार और अध्यात्म को जन-जन तक पहुँचा सकता है। कल्पना कीजिए, अगर बच्चे उपदेशों से नहीं, बल्कि एनिमेटेड कथाओं और नैतिक कहानियों से मूल्य सीखें, तो यह शिक्षा हृदय में बस जाएगी। वेदांत अलगाव नहीं, एकत्व का दर्शन है। कोई भी अन्य परंपरा इतनी स्पष्टता से यह नहीं कहती कि 'मानवता एक है', जैसा हमारे उपनिषद कहते हैं: “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव।” यह भारत की आत्मा है, और यह केवल भारत के लिए नहीं ,समस्त मानवता के लिए है। हमें विश्व की सभी संस्कृतियों को इस दृष्टि से जोड़ना है। भारतीय संस्कृति एक जीवंत संस्कृति है। यह ज्ञान (साधना), करुणा और समझ की संस्कृति है। अद्वैत का विचार मानवता के लिए सौगात : स्वामी शुद्धिदानंद स्वामी शुद्धिदानंद ने कहा कि अद्वैत का विचार मानवता के लिए सौगात है। 1200 साल पहले जब लोग स्वार्थ की आंधी में लिप्त हो गए थे और मानव मानवता से विमुख हो गया था उस समय आचार्य शंकर का जन्म होता है और उन्होंने संस्कृति में पहले से मौजूद एकात्म के दर्शन से इस समस्या का समाधान किया। पिछले 200 वर्षों में मानवता विभिन्न विचारधाराओं के साथ प्रयोग कर रही है। उन सभी विचारधाराओं के केंद्र में अर्थ का अर्जन है, और जिन देशों में विचार का केंद्र है, वहां पर मनोवैज्ञानिक समस्या सर्वाधिक है। इस विश्वव्यापी समस्या के समाधान के रूप में भारत का अद्वैत दर्शन सामने आता है। एकात्म धाम प्रकल्प प्रेरक है संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए कोई दर्शन यदि खोजा जाए तो वो अद्वैत दर्शन है। वर्तमान का हिंदू धर्म प्राचीन काल का वैदिक धर्म है। वेद मनुष्य के बाहरी और आंतरिक कल्याण का उपदेश देते है। वेद का संदेश है कि हर आत्म में दिव्यता है और इस दिव्यता का अनुभव करके शक्ति, स्वतंत्रता और निर्भयता को मनुष्य ग्रहण कर सकता है। आत्म संयम के अभ्यास से हम मनुष्य में मौजूद दिव्यता का अनुभव कर सकते है। स्वामी विवेकानंद ने इस दर्शन को विश्व पटल पर प्रस्तुत किया। मध्यप्रदेश शासन के एकात्म धाम प्रकल्प से अन्य प्रदेश सरकारों को प्रेरणा लेनी चाहिए। हमें अपने स्वरूप का ज्ञान पाकर विश्व के कल्याण की कामना करनी चाहिए।इस अद्वैत के ज्ञान से ही भविष्य की दिशा बदली जा सकती है और मानवता के उद्धार के लिए कदम बढ़ाए जा सकते है सुप्रसिद्ध गायक राहुल आर. वेल्लाल आचार्य शंकर विरचित स्तोत्रों का किया गायन कार्यक्रम में कर्नाटक के सुप्रसिद्ध गायक राहुल आर. वेल्लाल आचार्य शंकर विरचित स्तोत्रों एवं भक्ति पदों का सुमधुर गायन किया। उन्होंने गणेश पँचरत्नम,शिव पंचाक्षर स्तोत्र, शिवाष्टकम्, भवानी अष्टक भज गोविन्दम,काल भैरवाष्टक का गान किया। राहुल के गायन से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता राहुल आर. वेल्लाल कर्नाटक संगीत के विश्वप्रसिद्ध कलाकार हैं। उन्होंने मात्र चार वर्ष की आयु में संगीत की यात्रा प्रारंभ की। उन्होंने भारत और दस अन्य देशों में प्रस्तुति दी है। हाल ही में अमेरिका के 10 शहरों में उनके संगीत कार्यक्रमों को अभूतपूर्व सराहना मिली। पद्म जोनास मसेट्टी ने भी ब्राजील के लोकगीत के साथ शिव शम्भू -शिव शम्भू का गान किया। आचार्य जोनास मसेट्टी ब्राज़ील में वेदांत का कर रहे प्रचार पद्म आचार्य जोनास लोपेस मसेट्टी वेदांत के प्रतिष्ठित अध्येता एवं शिक्षक हैं। वे स्वामी दयानंद सरस्वती के शिष्य हैं और भारत के कोयंबटूर स्थित आर्ष विद्या गुरुकुलम् में उन्होंने वर्षों तक वेदांत का अध्ययन किया। अध्ययन के पश्चात उन्होंने ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो स्थित पेट्रोपोलिस में विश्व विद्या गुरुकुलम् की स्थापना की, जहाँ से अब तक 2,50,000 से अधिक विद्यार्थियों को वेदांत का अध्ययन कराया जा चुका है। उन्होंने एक सफल मैकेनिकल इंजीनियर का पेशेवर जीवन त्यागकर स्वयं को वेदांत के प्रचार-प्रसार के लिये समर्पित किया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और वेदांत के सेतु-समान प्रवक्ता हैं। उनके योगदान की सराहना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में करते हुए उन्हें “अमेरिका में वैदिक संस्कृति के राजदूत” के रूप में संबोधित किया।  

नेशनल लोक अदालत 13 दिसंबर को—बिजली चोरी के मामलों के निपटारे का सुनहरा मौका

भोपाल  नेशनल लोक अदालत 13 दिसंबर 2025 (शनिवार) को आयोजित होगी। लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अन्‍य अनियमितताओं के प्रकरण को समझौते के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के लंबित प्रकरणों एवं विशेष न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों के निराकरण के लिए विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की गई है कि वे अप्रिय कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए अदालत में समझौता करने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय से संपर्क करें। विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के बनाए गए लंबित प्रकरण एवं अदालत में लंबित प्रकरणों का निराकरण के लिये निम्नदाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट तक के गैर घरेलू एवं 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रकरणों में ही छूट दी जाएगी। प्रि-लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्‍येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।  लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्येक छःमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि नेशनल लोक अदालत में छूट कुछ नियम एवं शर्तों के तहत दी जाएगी जो आंकलित सिविल दायित्‍व राशि 10 लाख रूपये तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल ‘‘लोक अदालत‘‘ 13 दिसंबर 2025 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी। 

PF खाताधारकों के लिए खुशखबरी! EPFO ने दी 100% निकासी की मंजूरी, ऐसे करें क्लेम

पटना कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने सदस्यों के लिए भविष्य निधि (पीएफ) की आंशिक निकासी प्रक्रिया को और सरल एवं उदार बनाया है। संगठन ने पूर्व में लागू 13 अलग-अलग प्रावधानों को घटाकर अब तीन मुख्य आवश्यकताओं – शिक्षा, गृह कार्य एवं विशेष परिस्थितियों – में वर्गीकृत किया है। नई व्यवस्था के तहत सदस्य अब अपनी भविष्य निधि शेष राशि (नियोक्ता और कर्मचारी के अंशदान सहित) का 100 प्रतिशत तक उपयोग इन तीनों जरूरतों में कर सकेंगे। शिक्षा से संबंधित निकासी की सीमा को 3 से बढ़ाकर 10 बार, जबकि विवाह के लिए निकासी की सीमा को 3 से बढ़ाकर 5 बार तक कर दिया गया है। इन सभी प्रकार की निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 12 माह निर्धारित की गई है। पहले विशेष परिस्थितियों जैसे प्राकृतिक आपदा, कंपनी बंद होने, तालाबंदी, महामारी या सतत बेरोजगारी की स्थिति में दावे के साथ कारण बताना आवश्यक था। अब कारण बताने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे दावों के निरस्त होने की संभावना कम होगी। संगठन ने यह भी प्रावधान किया है कि सदस्यों के खातों में कम से कम 25 प्रतिशत राशि भविष्य निधि के रूप में सुरक्षित रखी जाए। इसके साथ ही, सम्पूर्ण पीएफ निकासी के न्यूनतम अंतराल को 2 माह से बढ़ाकर 12 माह और पेंशन फंड की निकासी के अंतराल को 2 माह से बढ़ाकर 36 माह कर दिया गया है। पहले सदस्य 2 माह बाद पूरी पेंशन राशि निकाल लेते थे, जिससे नई नौकरी लगने पर सेवा की निरंतरता टूट जाती थी और वे पेंशन लाभ से वंचित रह जाते थे। नई नीति से अब निरंतर सेवा सुनिश्चित होगी और अधिक सदस्य पेंशन के पात्र बन सकेंगे। ईपीएफओ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1 हेमन्त कुमार ने बताया कि इस सुधार से निकासी प्रक्रिया पारदर्शी होगी, दावों का शत प्रतिशत निपटारा सुनिश्चित किया जा सकेगा और सदस्यों की शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आएगी।  

बीमा कंपनियों पर सरकार की कार्रवाई! किसानों को 30 दिन में मिलेगा इंश्योरेंस भुगतान

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) से जुड़ी शिकायतों और विवादों को सुलझाने के लिए तीन नई समितियां गठित की हैं। ये समितियां न केवल बीमा विवादों के निपटारे पर काम करेंगी, बल्कि तकनीकी सहयोग प्रदान करने और वैज्ञानिक आधार पर प्राकृतिक व जैविक फसलों का मूल्य निर्धारण करने का भी दायित्व निभाएंगी। इन तीनों समितियों की अध्यक्षता कृषक एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव करेंगे। राज्य शिकायत निवारण समिति में कुल 10 सदस्य होंगे, जिनमें कृषि निदेशक, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, बैंकर्स समिति के संयोजक, नाबार्ड के मुख्य प्रबंधक, कृषि विभाग के उप जिला अटॉर्नी, संबंधित जिले के उपनिदेशक कृषि और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति द्वारा लिए गए निर्णयों को बीमा कंपनियों को 30 दिनों के भीतर लागू करना अनिवार्य होगा। यदि कोई कंपनी आदेशों का पालन नहीं करती, तो निर्णय की तिथि से प्रति दिन दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह कदम किसानों की शिकायतों के त्वरित समाधान और फसल बीमा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले — भारत की ऋषि परंपरा हमारा गौरव, दद्दा जी से मिलना सौभाग्य की बात

भारत में प्राचीन काल से है ऋषि परंपरा, दद्दा जी से मिलना मेरा सौभाग्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री कटनी में दद्दा जी धाम में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत में प्राचीन ऋषि परंपरा रही है। दद्दा जी ने करोड़ों शिवलिंग निर्माण करवाए। उन्होंने कहा ‍कि दद्दा जी से मिलना मेरे जीवन का सौभाग्य रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सत्संग और भक्ति के माध्यम से समाज को संस्कार दिए। संस्कारों से लोगों के विकार दूर होते हैं और जीवन धन्य हो जाता है। शिव निराकार ब्रह्म हैं। महाकाल की कृपा हम सभी पर है। राज्य सरकार ने भगवान राम और कृष्ण से जुड़े सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कटनी जिले के झिंझरी स्थित दद्दा जी धाम में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण महारुद्राभिषेक में ये बातें कहीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गृहस्थ संत पूज्य पंडित देवप्रभाकर शास्त्री दददा जी के समाधि स्थल पहुंच कर पुष्पांजलि अर्पित कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर कटनी जिला एवं प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं जन-कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पवित्र गीता के विविध पक्षों से विश्व को परिचित कराने के लिए राज्य सरकार लाखों विद्यार्थियों के लिए गीता-ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित करवा रही है। उज्जैन में सिंहस्थ : 2028 के भव्य आयोजन के लिए तैयारियां की जा रही हैं। दद्दाजी का आशीर्वाद हम सभी के साथ है। कटनी के दद्दाजी धाम की प्रतिष्ठा दुनिया में पहुंचेगी। दुनिया सनातन संस्कृति और हमारी तरफ देख रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिरडी सहित अन्य तीर्थ स्थलों की तरह ही कटनी का दददा जी धाम भी भविष्य में देव स्थान के रूप में विख्यात होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान महाकाल और दद्दा जी के आर्शीवाद से हम उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ को भव्यता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति का पवित्र अनुष्ठान चल रहा है। राज्य सरकार भी इस दिशा मे अनेक कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस पवित्र कार्य के लिए संत समाज से मार्गदर्शन करने का आग्रह किया। इसके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंचासीन धर्माचार्यो और साधु-संतों का सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया। विजयराघवगढ़ विधायक  संजय सत्येन्द्र पाठक नें संबोधित करते हुए दददा जी के व्यक्तिव, कृतित्व व जीवन वृतांत पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महोत्सव धर्म, अध्यात्म और भक्ति का अद्भुत संगम है। यहाँ विश्वकल्याण के लिये असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण, महारुद्राभिषेक एवं अमृतमयी कथा का आयोजन हो रहा है। प्रातःकाल शिव आराधना और संध्याकाल हरिकथा एवं भजन संध्या के माध्यम से दद्दा जी धाम में दिव्यता का आलोक व्याप्त है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रदेश के परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री और कटनी जिले के प्रभारी मंत्री  उदय प्रताप सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता सरंक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत, खजुराहो सांसद  विष्णुदत्त शर्मा, विधायक विजयराघवगढ़  संजय सत्येन्द्र पाठक, फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा सहित धर्माचार्य और सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित मोहित मराल गोस्वामी, कथा वाचक पंडित इन्द्रेश उपाध्याय, पंडित अनिरूद्धाचार्य  महाराज सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा समाजसेवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।  

राज्यपाल पटेल ने एन.जी.ओ. से की अपील — जनजातीय सशक्तिकरण में बढ़ाएँ भागीदारी

जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण प्रयासों में सहभागी बनें एन.जी.ओ. : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट को किया संबोधित भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट का आयोजन जनजातीय विकास और उत्थान प्रयासों की दिशा में सराहनीय पहल है। देशभर के सभी एन.जी.ओ. जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण प्रयासों में सहभागी बनें। राज्यपाल पटेल मंगलवार को भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं जनजातीय गौरव वर्ष के उपलक्ष्य में कुशाभाऊ सभागार में आयोजित ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जनजातीय समुदाय के प्रति विशेष संवेदनशील है। उनके उत्थान के लिए संकल्पित और सक्रिय हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पीएम जनमन योजना अति पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास का अभूतपूर्व प्रयास है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान ग्रामीणों की मैदानी स्तर पर ही समस्याओं के समाधान का अभिनव कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि सभी एन.जी.ओ. जनजातीय कल्याण की योजनाओं को दूरस्थ अंचलो तक पहुँचाने में सक्रिय सहयोग करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आप जब ग्रामीण अंचलों में जांए जो जनजातीय समुदाय के साथ आत्मीय और विनम्र रहें। उनकी समस्याओं को धैर्य के साथ सुनें और त्वरित निवारण करने का प्रयास करें। चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान पर चिंतन करें राज्यपाल पटेल ने देशभर के एन.जी.ओ. का आह्वान किया कि ऑल इंडिया मीट के विचार-विमर्श और सुझावों पर गंभीर चिंतन करें। चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान खोजे। जनजातीय सशक्तिकरण के लिए आवश्यक शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, ट्राईबल गवर्नेंस आदि विभिन्न आयामों को जनजातीय क्षेत्रों की भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने के नवाचार करें। उन्होंने कहा कि सभी एन.जी.ओ. जनजातीय समुदाय को शिक्षा का महत्व जरूर बताएं। उन्हें सिकल सेल एनिमिया सहित अन्य स्वास्थ्य चुनौतियों के प्रति जागरूक करें। राज्यपाल पटेल ने जनजाति समाज के सर्वांगीण विकास के चिंतन पर आधारित ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट के आयोजन के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार का विशेष आभार व्यक्त किया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय समाज में भारत की संस्कृति, पर्यावरण और मानवीय मूल्यों की जड़ें गहराई तक बसी हैं। उनका जीवन दर्शन हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य, आत्मनिर्भरता और सहयोग ही समावेशी विकास का आधार हैं। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट का आयोजन अत्यंत प्रासंगिक और समयानुकूल है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में देश जब आगे बढ़ रहा है, ऐसे में जरूरी है कि जनजातीय समाज की भागीदारी इस यात्रा का अभिन्न हिस्सा बने। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि जनजातीय विकास के लिए शिक्षा का स्वरूप ऐसा हो जो केवल साक्षरता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उसमें जीवन कौशल, स्थानीय ज्ञान और संस्कृति संरक्षण का भी समावेश हो। उन्होंने कहा कि अशासकीय संस्थाएँ, स्थानीय भाषा में पाठ्य सामग्री तैयार करें। डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देकर बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बड़ा योगदान दिया जा सकता है। साथ ही स्वास्थ्य शिक्षा, मातृ-शिशु पोषण, टी.बी., सिकल सेल रोग जागरूकता और स्वास्थ्य शिक्षा को व्यापकता प्रदान करना भी जरूरी है। नीति निर्माण में समर्पित संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका, राज्य सरकार देगी पूरा सहयोग जनजाति कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजाति बहुल क्षेत्रों में काम कर रहे समर्पित अशासकीय संस्थाओं को राज्य सरकार पूरा सहयोग देगी। उनकी विशेषज्ञता का लाभ लेते हुए जनजातीय कल्याण की कार्ययोजनाएं और रणनीतियां बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि जनजातीय विकास की योजनाएं बनाने में जमीनी स्तर के सुझावों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। समर्पित स्वैच्छिक संगठन गहन रूप से सामाजिक आर्थिक संदर्भों में समस्याओं का परीक्षण करते हैं। जनजातीय समुदाय के आचार-व्यवहार को भी करीब से जानते हैं। उन्होंने जनजातीय समुदाय के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे छोटी घटनाओं से सबक लेकर व्यापक जनहितैषी नीतियां बन जाती हैं। डॉ. शाह ने कहा कि सरकार, समुदाय और समर्पित सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर काम करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। उदघाटन सत्र के बाद विशेषज्ञ संस्थाओं के समूहों ने जनजातीय समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, वन अधिकार, शासन, प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर सुझाव दिए। ट्राइफेड की डीजीएम सु प्रीति मैथिल ने आजीविका पर अपने समूह का प्रस्तुतिकरण करते हुए बताया कि वित्तीय समावेश, आजीविका स्कूल, संसाधनों का एटलस, उद्यमिता विकास करने संबंधी सुझाव दिए और राज्य के लिए अपने विचार रखे। जनजातीय समुदाय की शिक्षा और सशक्तिकरण में अशासकीय संगठनों की भूमिका, चुनौतियां एवं मुद्दे, वर्तमान में शिक्षा का स्तर, समग्र शिक्षा में संगठनों की भूमिका पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। रामकृष्ण मिशन मेघालय के स्वामी अनुरागनंदा ने सत्र की अध्यक्षता की। स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट कर्नाटक के प्रवीन कुमार सैयापराजु ने विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि ड्रॉप आउट की चुनौती को नियमित संपर्कों से दूर किया जा सकता है। जनजातीय समुदाय की महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियां, टीकाकरण एवं अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की पहुंच बढ़ाने, टेली मेडिसिन, एमहेल्थ जैसे आधुनिक हस्तक्षेप से स्वास्थ्य सेवा बढ़ाने में अशासकीय संगठनों की भूमिका पर विचार हुआ। विवेकानंद मेडिकल मिशन वायनाड केरल के सुरेश ने सत्र की अध्यक्षता की। डॉ. सलोनी सिडाना एमडी नेशनल हेल्ड मिशन ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय संबंधी कठिनाइयों की चर्चा करते हुए बताया कि भाषा और भौगोलिक दूरी बड़ी समस्या है। ट्राइफेड की डीजीएम सु मैथिल ने जनजाति अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं, और आजीविका बढ़ाने, जनजातीय युवाओं में उद्यमिता बढ़ाने, आजीविका के नए अवसर, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक उद्यमिता को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर स्वैच्छिक संगठनों ने अपने विचार रखे। राजस्थान बाल कल्याण समिति उदयपुर के मुकेश गौर ने सत्र की अध्यक्षता की। मती मीनाक्षी सिंह ट्राइबल सेल राजभवन ने जनजातीय विकास एवं शासन प्रशासन से जुड़े विषयों, राज्य की भूमिका, पंचायत राज संस्थाओं, ग्राम सभा पारंपरिक जनजातीय संस्थाओं जनजाति विकास एजेंसियों की भूमिकाओं पर चर्चा की। शिव गंगा झाबुआ के पद्म महेश शर्मा ने सत्र की अध्यक्षता की। राज्यपाल पटेल ने भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित किया। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह स्वरूप गोंडी पेंटिंग भेंट कर अभिनंदन किया। मंत्री डॉं. कुंवर विजय शाह ने कहा कि राज्य सरकार, एन.जी.ओ. मीट में प्राप्त … Read more

अब एक ही योजना से लाभ — आयुष्मान वाले नहीं ले सकेंगे मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान सहायता

भोपाल आयुष्मान भारत योजना के लिए पात्र हितग्राहियों को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान का लाभ नहीं मिलेगा। आयुष्मान योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का उपचार होने के बाद ही आवेदन पर विचार होगा। इसका उद्देश्य स्वेच्छानुदान से अधिकाधिक लोगों को लाभ दिलाना है। इसके लिए आधार नंबर से आयुष्मान की पात्रता और अस्पताल की संबद्धता पता की जा रही है। विशेष परिस्थिति में बीमारी यदि आयुष्मान का पैकेज कवर नहीं है तभी स्वेच्छानुदान से राशि मिल सकेगी। दरअसल, मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के लिए बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन आते थे, जिसमें हितग्राही आयुष्मान योजना के तहत भी उपचार के लिए पात्र हैं।   उन्हें बीमारी की गंभीरता और आर्थिक स्थिति देखते हुए राशि स्वीकृत कर दी जाती थी। ऐसे में शासन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। शासन ने अब तय किया है आयुष्मान योजना से उपचार की सुविधा निजी और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है तो स्वेच्छानुदान से राशि देने का औचित्य नहीं है। मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी ने बताया कि आयुष्मान हितग्राहियों को विशेष परिस्थिति में ही स्वेच्छानुदान दिया जा रहा है, जैसे रोगी को ऐसी बीमारी हो जो आयुष्मान योजना के पैकेज में शामिल नहीं हो या फिर जिस अस्पताल में मरीज भर्ती है वह आयुष्मान योजना में है या नहीं। नहीं होने की स्थिति में स्वेच्छानुदान पर विचार किया जाता है।

जीवन की कठिनाइयों से उबरने में सहारा देंगी प्रेमानंद जी महाराज की सीखें

संत प्रेमानंद जी महाराज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके प्रेरणादायी विचार लाखों लोगों के जीवन में नई रोशनी और सकारात्मक सोच भरते हैं। कठिन समय में जब मन कमजोर पड़ता है और रास्ते कठिन लगते हैं, तब उनके शब्द हौसले और विश्वास का संचार करते हैं। जीवन की राह हमेशा आसान नहीं होती। असफलता, दुख और संघर्ष हर किसी के हिस्से में आते हैं। लेकिन दृढ़ संकल्प, भगवान पर अटूट विश्वास और मेहनत से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। कठिन समय में क्यों जरूरी हैं संतों के विचार? हर व्यक्ति के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब सब कुछ थम-सा जाता है। असफलता, तनाव या रिश्तों की उलझनें मन को कमजोर कर देती हैं। ऐसे क्षणों में संतों के उपदेश और अनुभव हमें न सिर्फ संभालते हैं, बल्कि अंदर से मजबूत भी बनाते हैं। प्रेमानंद जी महाराज के विचार यही सिखाते हैं कि जीवन कितना भी कठिन क्यों न हो, अगर मन में विश्वास है तो हर अंधेरा खत्म हो जाता है। प्रेमानंद जी महाराज के अनमोल विचार अपने कर्म सुधारो और भगवान पर विश्वास रखो, यही जीवन में स्थायी खुशी और सफलता की कुंजी है। जो दूसरों को दुख देकर खुश होते हैं, वे कभी सफल नहीं होते। जो दूसरों के लिए दुःख सहकर सुख देते हैं, वही सच्ची तरक्की पाते हैं। विजयी वही है, जो निरंतर मेहनत करके अपने आप को सुधारता है। अपनी मेहनत से व्यक्ति हीरे की तरह चमकता है। सच्चा प्रेम एक होता है, हजारों नहीं। ना अतीत की चिंता करो, ना भविष्य की। भगवान का स्मरण करो और अपने कर्मों पर ध्यान दो — सब ठीक होगा। हर परिस्थिति में खुश रहना सीखो, और यह कला केवल भगवान से जुड़कर ही संभव है। भविष्य की चिंता मत करो। जो होगा, भगवान की इच्छा से ही होगा। उन पर विश्वास रखो, सब सही होगा। जब सभी साथ छोड़ दें, तब भी भगवान आपका साथ देते हैं। उनका साथ अगर हो तो जीवन की हर बाज़ी आप जीत सकते हो। दुख को सहना सीखो, क्योंकि आज का सुख कल के दुख को सहने की ताकत देता है। रात के बाद सवेरा जरूर आता है, इसलिए उम्मीद कभी मत छोड़ो। जीवन का सार: विश्वास ही सबसे बड़ा बल है संत प्रेमानंद जी महाराज के विचार हमें यह सिखाते हैं कि भगवान पर भरोसा, कर्म में ईमानदारी और मन में शांति — यही सच्चे सुख का मार्ग है। मुश्किल वक्त में अगर मन कमजोर पड़े तो इन शब्दों को याद करें —“रात कितनी भी अंधेरी क्यों न हो, प्रभु का सवेरा जरूर होता है।”

ध्यान दें! अब बधाई मांगने आए किन्नरों को तय रकम ही देनी होगी, हरियाणा में नया नियम लागू

हरियाणा  पानीपत की ग्राम पंचायत पलडी ने विवाह और अन्य खुशी के अवसरों पर किन्नरों को दिए जाने वाली राशि निर्धारित की गई है। पंचायत ने किन्नरों को 1100 रुपये की राशि निर्धारित की है। साथ में पंचायत ने सख्त लहजे से कहा कि अगर किन्नरों ने ग्रामीणों से अधिक पैसे मांगने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पंचायत ने इस निर्णय की जानकारी एसडीएम इसराना नवदीप नैन को जनता समाधान शिविर में दी। एसडीएम ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। ग्राम पंचायत पलड़ी के सरपंच अशोक कुमार, पंच अंजू, प्रवीन कुमारी, मोहिनी, जोगेंद्र और नंबरदार हवा सिंह ने एसडीएम को शिकायत में बताया कि उनके गांव में अधिकांश परिवार मजदूर वर्ग के हैं, जो मेहनत मजदूरी से अपना जीवन यापन करते हैं। शादी और अन्य खुशी के अवसरों पर किन्नर अधिक पैसे वसूल करते हैं। इसलिए पंचायत ने यह निर्णय लिया है कि किन्नरों के लिए 1100 रुपये की राशि तय की गई है।