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लाभार्थियों के लिए खबर: पीएम किसान योजना की अगली किस्त जल्द आएगी, फटाफट करें ये जरूरी काम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केन्द्र सरकार की एक बड़ी योजना है, जिसके तहत 9.70 करोड़ किसानों को सालाना 6,000 रूपए दिए जाते है । यह राशि हर 4 माह में 3 समान किस्तों में 2-2 हजार के रूप में दी जाती है। यह पैसा डीबीटी ट्रांसफर के जरिए सीधे किसानों के खाते में भेजा जाता है। यह लाभ उन किसानों को मिलता है, जिनके पास 2 हेक्टेयर तक जमीन है और जो भारत के नागरिक है।अबतक 20 किस्तें जारी हो चुकी है और अब किसानों को 21वीं किस्त का इंतजार है। ध्यान रहे अगली किस्त का लाभ केवल उन किसानों को मिलेगा जिन्होंने ई केवाईसी, भू-सत्यापन, फॉर्मर रजिस्ट्री और मोबाईल आधार से लिंक करवा लिया है और जिनका बैंक खाते में डीबीटी ऑप्शन ऑन है।किसी भी प्रकर की समस्या आने पर किसान ईमेल आईडी pmkisan-ict@gov.in ,हेल्पलाइन नंबर- 155261 या 1800115526 (Toll Free) या फिर 011-23381092 पर संपर्क कर सकते है। नवंबर में जारी होगी पीएम किसान की 21वीं किस्त? पीएम किसान योजना के नियमानुसार, पहली किस्त अप्रैल-जुलाई के बीच , दूसरी किस्त अगस्त से नवंबर के बीच और तीसरी किस्त दिसंबर से मार्च के बीच जारी की जाती है, ऐसे में 4 महीने के हिसाब से देखें तो नवंबर में अगली किस्त का समय पूरा होगा, हालांकि अभी फाइनल डेट को लेकर कोई अधिकारिक बयान या अपडेट सामने नहीं आया है। संभावना है कि बिहार चुनाव के नतीजों के बाद नवंबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में किस्त की राशि जारी की जा सकती है। बता दे कि अबतक बाढ़ प्रभावित 4 राज्यों पंजाब, उत्तराखंड जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के किसानों के खाते में 21वीं किस्त के 2000-2000 रुपए भेज दिए गए है, अन्य को भी जल्द भेजे जाएंगे। PM KISAN: Rs 2000 चाहिए तो फटाफट पूरे कर लें ये 5 काम     कैसे करें eKYC : सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in पर जाएं। किसान कॉर्नर” अनुभाग पर जाएं और “ई-केवाईसी” विकल्प पर क्लिक करें। अपना आधार नंबर और पंजीकृत मोबाइल नंबर दर्ज करें। सत्यापन के बाद मोबाइल नंबर पर एक OTP भेजा जाएगा। OTP दर्ज करें और ईकेवायसी हो जाएगा।     कैसे करें मोबाईल आधार से लिंक: यदि उनके मोबाइल नंबर से आधार नंबर नहीं लिंक है और फिंगर नहीं लग रहा है, तो वह प्ले स्टोर पर जाकर पीएम किसान सामान निधि ऐप को डाउनलोड करके फेस के माध्यम से eKYC कर सकते हैं।     कैसे होगा भूमि सत्यापन: निकटतम कृषि विभाग के कार्यालय में जाएं और आवश्यक आवेदन फॉर्म प्राप्त कर निर्देशानुसार आवश्यक दस्तावेज़ जमा करें।इसमें आपकी पीएम किसान रजिस्ट्रेशन नंबर, खेत के संबंधित दस्तावेज़ (खसरा / खतौनी) आदि शामिल हो सकते हैं। आवेदन और दस्तावेज़ों की समीक्षा के बाद आपका चयन किया जाएगा।अगर आपका आवेदन स्वीकृत होता है, तो आपको लैंड सीडिंग कर दिया जाएगा।     कैसे करें बैंक सीडिंग: किसान को अपने खाते पर एनपीसीआई करवाना होगा।एनपीसीआई लिंक करने के लिए बैंक पासबुक और आधार कार्ड लेकर अपने नजदीकी बैंक शाखा पर संपर्क कर सकते हैं।     कैसे करें फॉर्मर रजिस्ट्री :अधिकारिक वेबसाइट http://www.upfr.agristack.gov.in पर जाएं। मोबाइल नंबर व आधार नंबर डालें और ओटीपी से वेरिफिकेशन करें। इसके बाद अपनी जमीन और बैंक अकाउंट की डिटेल दर्ज करें। जानकारी सबमिट करें और रजिस्ट्री नंबर प्राप्त करें। PM Kisan : लिस्ट में कैसे चेक करें अपना नाम     प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं।     इसके बाद farmer corner पर क्लिक करें,फॉर्मर कॉर्नर पर क्लिक करने के बाद एक नया पेज खुल जाएगा।     यहां beneficiary list के विकल्प का चयन करें। इसके बाद एक फॉर्म खुलेगा।     इसमें पहले राज्‍य, फिर जिला, ब्‍लॉक और गांव का नाम चुनें।     सभी जानकारी को भरने के बाद get report पर क्लिक करें।     इस प्रक्रिया को पूरी करते ही आपके सामने आपके गांव के पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की लिस्‍ट खुल जाएगी।     लिस्‍ट में अगर आपका नाम है, तो आपके खाते में भी पैसे आएंगे।

महाकाल नगरी उज्जैन चमकेगी: सिंहस्थ 2028 से पहले 5 बड़े प्रोजेक्ट में होंगे हजारों करोड़ खर्च

उज्जैन  सिंहस्थ 2028 से पूर्व मध्यप्रदेश के उज्जैन की सूरत पूरी तरह बदलने जा रही है. मध्यप्रदेश सरकार का श्रद्धालुओं की सुविधाओ के लिए 5 बड़े कामों पर फोकस है, जिनकी लागत हजारों करोड़ है. सबसे पहला काम मोक्षदायिनी क्षिप्रा शुद्धिकरण (कान्हा डायवर्जन क्लोज डक्ट परियोजना) है, जिससे क्षिप्रा पर कई जगह पुल, पुलिया व सड़क निर्माण के माध्यम से यातायात सुगम बनाया जाएगा. इसके बाद व्यापक स्तर पर सीवरेज पाइप लाइन व ट्रीटमेंट प्लांट, पेयजल परियोजना, अस्पताल, विश्राम भवन आदि पर फोकस होगा. 5 विकास कार्यों पर होगा सबसे ज्यादा फोकस सिंहस्थ 2028 से पहले मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ ऐतिहासिक स्थलों को मजबूती देना व सरकार की प्राथमिकता है. इन प्रमुख पांच विकास कार्यों को कैसे किया जाएगा, इसके लिए कितने बजट की जरूरत होगी और इसकी क्या टाइम लाइन होगी इसे लेकर एक बार फिर प्रशासनिक बैठक का आयोजन किया गया. 20 हजार करोड़ से चमकेगी उज्जयनी नगरी सिंहस्थ महाकुंभ उज्जैन नगरी में वर्ष 2028 में लगने जा रहा है, जिसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है. सरकार का अनुमान है कि उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचेंगे और इसी के हिसाब से पूरा रेडमैप तैयार किया गया है. जनसंपर्क विभाग के अनुसार सिंहस्थ महापर्व 2028 के पहले जिले में लगभग 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि से अलग-अलग प्रकार के विकास कार्य किए जा रहे हैं. 914 करोड़ कान्हा क्लोज डायवर्जन परियोजना पर लगभग 919.94 करोड़ रुपए की लागत से कान्‍हा डायवर्जन क्‍लोज डक्‍ट परियोजना का कार्य क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिए किया जाएगा. इसमें कान्हा नदी के पानी को 18.5 किमी कट/कवर व 12 किमी टनल का निर्माण कर उज्‍जैन शहर की सीमा से बाहर कर गंभीर नदी के डाउन स्‍ट्रीम में प्रवाहि‍त किया जाएगा. यह परियोजना आगामी सितंबर 2027 तक पूर्ण हो जाएगी. निर्माण एजेंसी द्वारा 15 वर्षों का संचालन व रख-रखाव का प्रावधान किया गया है. इसकी कुल लंबाई 30.15 किमी रहेगी. इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद पूरे वर्ष क्षिप्रा नदी में स्‍वच्‍छ जल का प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा. 440 करोड़ की लागत से पुलि-पुलियों का निर्माण सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के लिए 19 नवीन पुलों व आरओबी का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 14 पुल नदी पर व 5 रोड ओवर ब्रिज शामिल हैं. इनकी अनुमानित लागत 440.13 करोड़ रुपए है. पुल निर्माण कार्यों की श्रृंखला में शहर के बहुप्रतीक्षित फ्रीगंज का ब्रिज भी शामिल किया गया है. शहर का सबसे महत्‍वपूर्ण हरिफाटक ब्रिज का चौड़ीकरण काम म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा 371.11 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है. साथ ही सड़कों का चौड़ीकरण, नवीन मार्गों का निर्माण भी इसमें शामिल है. सीवरेज पर 476 करोड़, पेयजल पर 1113 करोड़ सिंहस्थ मेला क्षेत्र में सीवरेज पाइप लाइन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्‍लान्ट का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जो शहर के अधोसंरचना विकास की दृष्‍टि‍ से अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण रहेगी और इसकी लागत 476.06 क‍रोड़ रुपए रहेगी. शहर की पेयजल परियोजना भी 1113 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही है. इस परियोजना में 150 एमएलडी का वॉटर ट्रीटमेंट प्‍लान्‍ट, 700 किमी से अधिक पाइप लाइन का नेटवर्क और 17 नए जल टैंक बनाए जाएंगे. ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और मंदिर जीर्णोद्धार के लिए 500 करोड़ से ज्यादा ऐति‍हासिक स्थलों का संरक्षण करना जैसे शहर का कोठी पैलेस भवन उसे कुंभ एक्सपीरियंस सेंटर व वीर भारत संग्रहालय बनाना, वीर दुर्गादास सिंह राठौड़ की छत्री पर 52.69 करोड़ की लागत से विकास कार्य, मंदिर के जीर्णोद्धार कर परमार, मराठा शैली का वैभव लौटाना भी इसमें शामिल है. इसपर 500 करोड़ से ज्यादा खर्ज होंगे. अन्य कई परियोजनाओं पर खर्च होंगे हजारों करोड़ सिहंस्‍थ में करोड़ों श्रध्‍दालुओं के आने पर उनके स्वास्थ्य का ध्‍यान रखते हुए 550 बिस्‍तरीय चिकित्‍सालय भवन, 150 सीट्स का चिकित्‍सा महाविद्यालय भवन व छात्रावास निर्माण होगा. इंदौर से उज्‍जैन के बीच 48 किमी एक नई ग्रीन फिल्‍ड सड़क का निर्माण कार्य लागत लगभग 2935 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे

देशभर के जंगलों की होगी समीक्षा, मध्यप्रदेश में टाइगर स्टेट की राह पर All India Tiger Estimation

भोपाल  भारत में बाघों की असली तस्वीर जानने की सबसे बड़ी कवायद एक बार फिर शुरू होने जा रही है। देशभर में अखिल भारतीय बाघ अनुमान 2026 (All India Tiger Estimation 2026) की प्रक्रिया शुरू होने को है। इसमें टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश की भूमिका बेहद अहम रही है, क्योंकि एक बार 1991 में और उसके बाद 2019 और 2022 में ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन में मध्यप्रदेश लगातार दो साल टाइगर स्टेट का तमगा हासिल करने में कामयाब रहा है। इस बार फिर वन विभाग की बड़ी तैयारी है, उम्मीद की जा रही है कि एमपी एक बार फिर टाइगर स्टेट बन सकता है। 15 नवंबर से प्रदेशभर के फॉरेस्ट एरिया में बाघ एस्टिमेशन का काम शुरू हो जाएगा। कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे, इसके अलावा एविडेंस में मल, पगमार्क, खरोंच के निशान, शिकार के अवशेष जैसे साक्ष्य भी शामिल किए जाते हैं। चार चरणों में पूरी होने वाली एस्टिमेशन की ये प्रक्रिया फरवरी 2026 तक पूरी होगी। इसके बाद डेटा कलेक्ट करके फाइनल रिपोर्ट अप्रेल 2026 तक तैयार हो जाएगी। जो जुलाई 2026 तक जारी होगी। टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश की स्थिति कैसी? पिछले बाघ अनुमान 2022 (Tiger Estimation 2022) में मध्य प्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे। जो देश के अन्य राज्यों से भी ज्यादा हैं। यानी हर पांच में से एक बाघ एमपी के जंगलों में मौजूद है। इसी के चलते राज्य को लगातार दूसरी बार 2019 और 2022 में टाइगर स्टेट का दर्जा मिला। इस बार फिर सबकी नजर इसी पर है कि क्या एमपी अपनी टॉप पॉजीशन बनाए रखेगा या किसी अन्य राज्य से मुकाबला होगा? दूसरी बार पेपरलेस यानी M-STRIPES ऐप से किया जा रहा है एस्टिमेशन पिछले ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन में एमपी समेत देशभर के जंगलों में M-STRIPES ऐप के माध्यम से पेपरलेस कार्य किया गया था। इस बार भी वही प्रक्रिया फॉलो की जाएगी। जिम्मेदारों का कहना है कि इस बार ऐप को और अपडेट किया गया है। यूजरफ्रेंडली ऐप से कई परेशानियां हल हुई हैं और मुश्किलें आसान। जानें क्या है टाइगर एस्टिमेशन अब तक हम जिसे बाघों की गणना कहते आए हैं, असल में आधुनिक भारत में ये टाइगर काउंटिंग नहीं बल्कि, टाइगर एस्टिमेशन है। टाइगर एस्टिमेशन की प्रक्रिया अब पारंपरिक गिनती से कहीं आगे बढ़ चुकी है। यह सिर्फ कैमरे में दिखे बाघों की संख्या नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश समेत देश के पूरे वन क्षेत्र में मौजूद संभावित आबादी का वैज्ञानिक मूल्यांकन है। इसे ऐसे समझें- एमपी में 9 टाइगर रिजर्व और कॉरिडोर, टेरिटरीज पर नजर राज्य के 9 टाइगर रिजर्व कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, संजय, पन्ना, ओरछा, माधव, भीमगढ़, नौरादेही सभी में गहन निगरानी चलेगी। हर रिजर्व के कोर और बफर जोन में 24 घंटे कैमरे एक्टिव होंगे। पिछली बार की तरह इस बार भी AI बेस्ड कैमरा ट्रैप और जीपीएस डेटा लिंक तकनीक वाले ऐप M-STRIPES से मॉनिटरिंग पहले से कहीं ज्यादा सटीक होगी। वन विभाग के मुताबिक जंगलों से निकल सड़कों पर नजर आ रहे बाघ जहां चुनौती साबित हो सकते हैं, वहीं ये उम्मीद भी दे रहे हैं, कि बाघों की संख्या बढ़ने की संभावना है, एमपी फिर से टाइगर स्टेट बन सकता है। संरक्षण की चुनौती- बढ़ती संख्या, घटता आवास एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाघों की संख्या बढ़ना जितना सुखद है, उतना ही आवास घटने का खतरा भी बढ़ा है। बाघ कॉरिडोर और गांवों की सीमा तक आने लगे हैं। पीसीसीएफ एल. कृष्णमूर्ति कहते हैं कि, 'इससे निपटने के लिए वन विभाग इस बार सह अस्तित्व मॉडल पर जोर दे रहा है। ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। स्थानीय समुदायों को निगरानी, रिपोर्टिंग और इको टूरिज्म से जोड़ा जा रहा है।' अखिल भारतीय टाइगर एस्टिमेशन (AITE) में एमपी की प्राथमिकता क्या? -बाघों की सटिक पहचान और वितरण का नक्शा तैयार करना। -रिजर्व से बाहर बाघों की उपस्थिति को वैज्ञानिक रूप से दर्ज करना। -कोरिडोर नेटवर्क को मजबूत करना ताकि, बाघ सुरक्षित क्षेत्रों में आवागमन कर सकें। -वन विभाग के मुताबिक ये अनुमान प्रक्रिया सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समझने की कोशिश है कि बाघ कहां हैं। कहां जा रहे हैं और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए हमें अब आगे और क्या बदलाव करने की आवश्यकता है। क्या हम सही सही मायनों में जंगलों की सुरक्षा कर पा रहे हैं? इस तकनीक से क्या फायदा हुआ -कागज की गिनती और मानवीय गलती खत्म हुई, अब सब डिजिटल रिकॉर्ड होता है। -हर टीम की गश्त मॉनिटर की जा सकती है, कौन कहां गया, कितना एरिया कवर हुआ, कितना बाकी है? -डेटा की पारदर्शिता और सटीकता बढ़ी है। -बाघों के संरक्षण और सुरक्षा की योजना बनाना आसान हुआ है। क्योंकि अब ठोस वैज्ञानिक डाटा उपलब्ध है। मध्य प्रदेश जो टाइगर स्टेट है, ने इस सिस्टम को सबसे जल्दी अपनाया। राज्य के 9 टाइगर रिजर्व और दो अन्य अभयारण्य के रेंजर्स, कर्मचारियों और अधिकारियों को M-STRiPES पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। अब हर बाघ गिनती और पेट्रोलिंग इसी एप के जरिए की जा रही है। ये नया प्रयोग पिछले टाइगर एस्टिमेशन के लिए शुरू किया गया था। कैसे काम करता है M-STRIPES सिस्टम अब बाघ गिनने का तरीका पूरी तरह से डिजिटल हो गया है। फील्ड में जब वनकर्मी या अधिकारी जाते हैं, तो उनके मोबाइल में M-STRIPES ऐप ऑन रहता है। ये एप जीपीएस की मदद से उनका पूरा रास्ता रिकॉर्ड करता है। यानी कौन सी टीम कहां गई, कितना इलाका कवर किया सब कुछ ट्रैक होता है। जंगल में अगर कहीं बाघ के पगमार्क, मल, शिकार के अवशेष मिलते हैं तो कर्मचारी तुरंत उसी जगह का फोटो लेकर ऐप में अपलोड कर देते हैं, फोटो के साथ उस जगह का लोकेशन और समय अपने आप एप में सेव हो जाता है। दिन के अंत में पूरा डेटा ऑनलाइन सर्वर पर चला जाता है, जहां विशेषज्ञ उसे जांचते हैं, कहां ज्यादा मूवमेंट मिली, किस इलाके में बाघों की मौजूदगी मजबूत है और कहां निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। इस तरह अब कागज, फॉर्म या मैनुअल गिनती की जगह पूरा सिस्टम मोबाइल और जीपीएस पर चलेगा। जिससे न केवल आंकड़े सटिक होंगे, बल्कि मानवीय गलती की गुंजाइश भी लगभग खत्म हो जाएगी।    

डॉ. अभिमन्यु यादव और डॉ. इशिता यादव 30 नवंबर को लेंगे सात फेरे, साथ ही 20 जोड़ों की होगी सामूहिक शादी

उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करने का फैसला लिया है। समारोह 30 नवंबर को उज्जैन के होटल अथर्व में होगा। इसमें 20 जोड़ों की शादी होगी। यहीं डॉ. अभिमन्यु और डॉ. इशिता यादव सात फेरे लगेंगे। मुख्यमंत्री पुत्र अभिमन्यु की सगाई खरगोन के किसान दिनेश यादव की बेटी डॉ. इशिता से 5 माह पहले ही हो चुकी है। सामुदायिक समारोह बनेगा आयोजन सामूहिक विवाह समारोह के बेटे की शादी कर सीएम सामाजिक समरसता और सादगी का संदेश देना चाहते हैं। शादी में दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार, राज्य के मंत्री, वरिष्ठ अफसर व भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हो सकते हैं। कार्यक्रम में पारंपरिक रस्मों के साथ सामाजिक कार्यों के लिए भी पहल की योजना है, जिससे यह सिर्फ एक शादी नहीं, सामुदायिक समारोह बन जाएगा। शादी मुख्यमंत्री आवास में नहीं होगी सीएम मोहन यादव ने खुद ट्वीट करके बताया कि शादी मुख्यमंत्री आवास में नहीं, बल्कि उज्जैन के होटल अथर्व में होगी. इसमें सिर्फ सीमित मेहमानों को बुलाया जाएगा. दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार, राज्य के मंत्री, बड़े अधिकारी और भाजपा के प्रमुख नेता शामिल होंगे. यह आयोजन सिर्फ एक शादी नहीं होगा. इसमें पारंपरिक रस्मों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों की भी पहल होगी. जैसे गरीब कन्याओं की मदद या अन्य समाजसेवा के काम. इससे सामाजिक समरसता का संदेश जाएगा. सीएम यादव सादगी के लिए पहले से मशहूर हैं. उन्होंने अपने बड़े बेटे की शादी भी राजस्थान में बहुत साधारण तरीके से की थी. अब छोटे बेटे की शादी भी उसी तरह सादगी भरी रखी है. इस फैसले से सीएम ने दिखाया कि बड़े पद पर होने के बावजूद वे आम लोगों की तरह जीवन जीते हैं. वे चाहते हैं कि समाज में फिजूलखर्ची कम हो और शादियाँ सादगी से हों. उनकी इस पहल की हर तरफ तारीफ हो रही है. परिवार और पृष्ठभूमि ● डॉ. अभिमन्यु यादव, सीएम के छोटे बेटे। सर्जरी में मास्टर्स कर रहे हैं। ● डॉ. इशिता यादव, खरगोन के किसान दिनेश यादव की बेटी, एमबीबीएस कर चुकी हैं। पीजी कर रही हैं। इशिता, सीएम की बड़ी बेटी डॉ. आकांक्षा की ननद भी हैं।

MP में मखाना उत्पादन को बढ़ावा: 150 हेक्टेयर क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट लागू

भोपाल बिहार की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी मखाना की खेती होगी। प्रदेश के चार जिलों में पायलट प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा। 150 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को 75 हजार प्रति हेक्टेयर या लागत का 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। इस योजना के तहत एमपी के 99 कृषकों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि मध्यप्रदेश में भी बिहार की तर्ज पर मखाना की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रदेश के 4 जिलों नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी में मखाना खेती क्षेत्र विस्तार को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। अब मध्य प्रदेश में भी बिहार की तर्ज पर मखाना की खेती की जाएगी। राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से चार जिलों नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी में मखाना उत्पादन को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत प्रदेश में 150 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना खेती विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। मध्य प्रदेश के 4 जिलों से शुरुआत  मध्य प्रदेश के चार जिलों से मखाने की खेती की शुरुआत होने वाली है, उद्यानिकी विभाग ने मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी जिले में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरु करने की योजना बनाई है. उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं, मंत्री का कहना है कि मखाना खेती से किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी और प्रदेश में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा, इसलिए इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है.  कृषकों को सरकार की ओर से 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर या लागत का 40% तक अनुदान मिलेगा। फिलहाल इस योजना के अंतर्गत 99 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि मध्यप्रदेश की जलवायु मखाना उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त है। बिहार में जिस तरह से मखाना खेती ने किसानों की आमदनी बढ़ाई है, उसी मॉडल को अब मध्यप्रदेश में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मखाना उत्पादन छोटे तालाबों और जलाशयों में सिंघाड़े की तरह किया जा सकता है, जिससे जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग होगा। मंत्री कुशवाह ने किसानों से इस योजना से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मखाना बोर्ड का गठन भी किया गया है। मध्यप्रदेश इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण अरविंद दुबे ने बताया कि परियोजना पर लगभग 45 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ बीज, प्रशिक्षण और प्रसंस्करण सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। मखाने की देश और विदेश (अरब देशों व यूरोप) में उच्च मांग को देखते हुए यह योजना प्रदेश के किसानों के लिए नए अवसर लेकर आ सकती है। किसानों को अनुदान भी मिलेगा मखाना खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर या कुल लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान भी सरकार की तरफ से दिया जाएगा. इससे किसानों को नई फसल को अपनाने में मदद मिलेगी, बता दें कि मखाने का उत्पादन सिंघाड़े की तरह छोटे-छोटे तालाबों में किया जाता है, इसी को ध्यान में रखते हुए चारों जिलों में लगभग 150 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना उत्पादन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. इस परियोजना पर करीब 45 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. जिसके लिए सरकार की तरफ से उद्यानिकी विभाग को बजट भी मिलेगा.  किसानों से लिए जा रहे आवेदन  योजना की शुरुआत के बाद प्रदेश के 99 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है, विभाग का कहना है कि सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि मखाना खेती प्रदेश के किसानों के लिए एक नई आजीविका का स्रोत बनेगी और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.