samacharsecretary.com

नवंबर में जमने लगी सर्दी! झारखंड में शाम के बाद सुनसान सड़कें

रांची झारखंड में इस नवंबर माह की शुरुआत में मौसम का अचानक बदलाव देखने को मिला है। रांची और आसपास के इलाकों में पहले दोपहर में गर्मी का अहसास था, लेकिन अब अचानक ठंडी हवाओं ने ठंड की मार बढ़ा दी है। सड़कों पर शाम के बाद छा जाता है सन्नाटा राज्य के कई जिलों में केवल कुछ ही दिनों में न्यूनतम तापमान में पांच से छह डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सर्दी काफी बढ़ गई है। रांची में पहले हफ्ते तक लोग बिना स्वेटर, हल्के कपड़े पहनकर सैर करते थे, लेकिन दूसरे हफ्ते आते- आते तापमान में इतनी गिरावट आई है कि लोगों को गर्म कपड़े पहनने पड़ रहे हैं। खासकर सुबह और शाम के समय ठंड का प्रभाव ज्यादा महसूस किया जा रहा है। गुमला जिले में हालात ज्यादा गंभीर हैं। यहां की सड़कों पर शाम के बाद सन्नाटा छा जाता है और लोग घरों के बाहर अलाव के पास जुटकर ठंड से बचने की कोशिश करते देखे जाते हैं। गुमला का न्यूनतम तापमान अब मात्र 8.5 डिग्री तक पहुंच गया है, जबकि कोडरमा, रामगढ़, और गढ़वा जैसे जिलों में भी तापमान 9 डिग्री के करीब पहुंच चुका है। शाम-सुबह की धूप के बावजूद ठंडी हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। ठंडी हवाओं ने लोगों की बढ़ाई परेशानी मौसम विभाग ने इस ठंड के लिए हिमालय क्षेत्र से आने वाली ठंडी हवाओं को जिम्मेदार बताया है, जो सबसे पहले राज्य के उत्तर-पश्चिमी जिलों को प्रभावित करती हैं। विभाग ने कोडरमा, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, रांची, रामगढ़, पलामू और सिमडेगा के लिए अगले पांच दिनों तक सर्दी का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में न्यूनतम तापमान 9 से 10 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। ठंड के बढ़ने के कारण लोगों में सर्दी-जुकाम, बुखार जैसी हल्की बीमारियों के लक्षण भी बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से सर्दी से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।  

पत्नी के नाम पर खुलवाएं ये डाकघर स्कीम, गारंटीड रिटर्न से होगी मोटी कमाई

पंजाब  अपने पैसे सुरक्षित तरीके से बढ़ाने और भविष्य के लिए योजना बनाने का सबसे आसान तरीका डाकघर की स्कीमें हैं। बेटी की शादी, माता-पिता की पेंशन या रिटायरमेंट के लिए बचत करना हो, PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) स्कीम लंबे समय के निवेश के लिए एक भरोसेमंद विकल्प है। शादीशुदा लोग अपने और अपनी पत्नी के नाम अलग-अलग खाते खोल सकते हैं और इसमें टैक्स में भी छूट मिलती है। क्या है PPF स्कीम: PPF एक लॉन्ग टर्म सेविंग स्कीम है जिसमें कोई भी भारतीय नागरिक सालाना ₹500 से लेकर ₹1.5 लाख तक निवेश कर सकता है। यह योजना उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो कम जोखिम के साथ टैक्स में छूट और गारंटीड ब्याज पाना चाहते हैं। ब्याज दर और फायदा PPF योजना पर वर्तमान में 7.1% वार्षिक ब्याज मिल रहा है, जो कंपाउंडिंग के साथ बढ़ता है। सरकारी समर्थित होने के कारण यह गारंटीड रिटर्न देती है और इस पर प्राप्त ब्याज टैक्स फ्री होता है। उदाहरण के लिए, 15 साल की अवधि के बाद ₹10.80 लाख का निवेश लगभग ₹19.52 लाख में बदल सकता है। 18 साल या अधिक उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक PPF खाता खोल सकता है। मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति का खाता उसके अभिभावक के नाम खोला जा सकता है। देशभर में किसी व्यक्ति के नाम केवल एक PPF खाता खोला जा सकता है। निवेश की राशि: एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1,50,000 रुपये जमा किए जा सकते हैं। यह राशि एकमुश्त या किश्तों में जमा की जा सकती है। निवेश की गई राशि आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट के लिए योग्य है। PPF खाता 15 साल में परिपक्व होता है। आप आवेदन देकर इस अवधि को हर बार 5 साल तक बढ़ा सकते हैं, अधिकतम 50 साल तक।   कैसे बनाएं बड़ा फंड: अगर आप और आपकी पत्नी हर महीने 5000 रुपये जमा करें, तो 20 साल बाद आपका फंड लगभग ₹26.63 लाख बन सकता है। इसमें आपकी निवेश राशि 12,00,000 रुपये और ब्याज 14,63,315 रुपये होगा। डाकघर की PPF स्कीम सुरक्षित निवेश, लंबी अवधि के फायदे और टैक्स में बचत का बेहतरीन विकल्प है। यह योजना सरकारी समर्थित होने के कारण पूंजी की सुरक्षा की गारंटी भी देती है, जो इसे लंबी अवधि के निवेश के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनाती है।  

भारत को उसी की धरती पर हराना है! केशव महाराज की गरज से बढ़ा रोमांच

 नई दिल्ली  दक्षिण अफ्रीका ने 15 साल से भारत में कोई टेस्ट मैच नहीं जीता है और उसके मुख्य स्पिनर केशव महाराज ने इसे अपने सबसे कठिन दौरों में से एक करार दिया है। उन्होंने कहा कि आगामी श्रृंखला में जीत का इंतजार खत्म करने के लिए वास्तव में उनकी टीम बहुत बेताब है। भारत और दक्षिण अफ्रीका 14 नवंबर से दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला में भिड़ेंगे। श्रृंखला का पहला मैच शुक्रवार से कोलकाता में शुरू होगा जबकि दूसरा मैच गुवाहाटी में खेला जाएगा। महाराज ने ऑनलाइन बातचीत में कहा, ‘हमारी टीम भारत को भारत में हारने के लिए वास्तव में बेताब है। यह संभवतः सबसे कठिन दौरों में से एक है। हमें लगता है कि यह हमारी सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक है। यह खुद को आंकने का एक शानदार मौका होगा। इससे हमें अपनी वास्तविक स्थिति का पता करने का अवसर मिलेगा।’ उन्होंने कहा, ‘हमने उपमहाद्वीप के अन्य हिस्सों में जीत हासिल करना शुरू कर दिया है और वास्तव में भारत में जीत हासिल करने के लिए हमारी टीम के अंदर तीव्र भूख और इच्छा है।’ दक्षिण अफ्रीका ने हाल के वर्षों में टेस्ट क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन उसकी टीम को भारत में अपनी पिछली दो श्रृंखलाओं, 2015 और 2019 में कोई सफलता नहीं मिली। महाराज का यह भी मानना ​​है कि यहां के क्यूरेटर श्रृंखला में स्पिन के अनुकूल पिचें उपलब्ध कराने की संभावना नहीं रखते, जैसा कि हाल ही में पाकिस्तान में हुआ था, जहां दक्षिण अफ्रीका ने पहला मैच हारने के बाद अपने स्पिनरों के शानदार प्रदर्शन से श्रृंखला बराबर कराई थी। इस बाएं हाथ के स्पिनर ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि यहां की परिस्थितियां स्पिनरों के लिए उतनी अनुकूल होंगी जितनी हमने पाकिस्तान में देखी थी। मुझे लगता है कि विकेट अच्छे होंगे जिनसे खेल आगे बढ़ने के साथ स्पिन गेंदबाजों को भी मदद मिलेगी। जैसा कि हम देख रहे हैं भारत को शायद पारंपरिक टेस्ट विकेट अधिक पसंद आएगा।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अगर आपने वेस्टइंडीज़ और भारत के बीच श्रृंखला को देखा है तो आपको पता चलेगा कि उस श्रृंखला के लिए अच्छे विकेट तैयार किए गए थे। मैच चौथे और पांचवें दिन तक चले। इसलिए मेरा मानना ​​है कि विकेट के मामले में दृष्टिकोण बदल रहा है।’ महाराज ने कहा, ‘भारतीय टीम शानदार है और बदलाव के दौर में उसने अच्छी प्रगति की है। मेरा मानना है कि वे अच्छे विकेट पर खेलना पसंद करेंगे जैसा कि हमने वेस्टइंडीज की श्रृंखला के दौरान देखा था।’ उन्होंने कहा, ‘हमने पाकिस्तान में दूसरे टेस्ट मैच में अच्छा प्रदर्शन किया था। हम उसी लय को बरकरार रखने की कोशिश करेंगे। टॉस का परिणाम जो भी हो हम मैच का परिणाम अपने पक्ष में करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।’  

अयोध्या: रामलला मंदिर में ध्वजारोहण कल, दर्शन व्यवस्था में किए गए अहम बदलाव

अयोध्या अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम के समय और आम दर्शनार्थियों के प्रवेश को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। यह कार्यक्रम एक विशेष और भव्य आयोजन होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे, जिसके कारण आम भक्तों के लिए दर्शन के समय में बदलाव किया गया है। ध्वज का आकार त्रिकोणीय होगा और यह लगभग 205 फीट की ऊंचाई पर लहराएगा। ध्वज दंड की ऊंचाई 44 फीट है। ध्वज केसरिया रंग का होगा, जिस पर ओम लिखा होगा, और यह पैराशूट फैब्रिक से बना होगा। राम मंदिर में ध्वजारोहण का समय दिन 12 बजे होगा। 11 बजे देश के प्रधानमंत्री मंदिर में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ सभी अतिथियों को सुबह 9 बजे तक आने के लिए कहा गया है। जगद्गुरु रामानंदाचार्य द्वार से सभी अतिथियों का स्वागत किया जाएगा। वहीं अगर आम श्रद्धालुओं की बात की जाए तो उन्हें 25 नवंबर को राम मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। यदि आप भी इन दिनों के दौरान आने की सोच रहे है तो अपने प्लान को स्थगित कर दें। समारोह के दौरान सभी मेहमानों को अंदर 18 मंदिरों के दर्शन करने का मौका मिलेगा। इस दौरान किसी भी तरह की अफरा-तफरा न मचे इसके लिए पूरी तरह व्यवस्था का इतंजाम किया हुआ है।

धरती के गर्भ में संकट! तिब्बत के नीचे दरक रही भारतीय प्लेट, बड़े भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की आशंका

 नई दिल्ली पृथ्वी की सतह हमेशा हिलती-डुलती रहती है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है. भारत की मुख्य टेक्टॉनिक प्लेट (इंडियन प्लेट) तिब्बत के नीचे दो हिस्सों में फट रही है. इससे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और बड़े भूगर्भीय बदलाव हो सकते हैं. अमेरिका की कोलोराडो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है. अगर यह जल्दी हुआ, तो हिमालय क्षेत्र में लाखों लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है.  क्या हो रहा है? प्लेट टूटने की कहानी पृथ्वी की ऊपरी सतह कई प्लेटों (टेक्टॉनिक प्लेट्स) में बंटी है, जो धीरे-धीरे हिलती हैं. भारत की प्लेट अफ्रीका से अलग होकर उत्तर की ओर बढ़ रही है. अब नई रिसर्च बताती है कि यह प्लेट तिब्बत के नीचे 100 किलोमीटर गहराई पर दो हिस्सों में बंट रही है. ऊपरी हिस्सा हिमालय की ओर धकेल रहा है, जबकि निचला हिस्सा मंगोलिया की ओर खिसक रहा है. नेचर जियोसाइंस जर्नल में छपी इस स्टडी के मुताबिक, यह प्रक्रिया 50 लाख साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन अब तेज हो गई है. वैज्ञानिकों ने सिस्मिक वेव्स (भूकंप की लहरों) का अध्ययन किया, जो दिखाता है कि प्लेट के बीच में एक 'रिफ्ट' (फटाव) बन रहा है. यह फटाव 200-300 किलोमीटर लंबा है. अगर यह बढ़ा, तो तिब्बत का पठार और हिमालय की चोटियां बदल सकती हैं. वैज्ञानिकों की चेतावनी: बड़े खतरे सिर पर मंडरा रहे स्टडी के प्रमुख वैज्ञानिक ब्रैडेन चाउ ने कहा कि यह प्लेट टूटना हिमालय के निर्माण का नया चरण हो सकता है. लेकिन इससे बड़े भूकंप आ सकते हैं, जो 8 या 9 तीव्रता के होंगे. कोलोराडो यूनिवर्सिटी की टीम ने 20 साल के डेटा का विश्लेषण किया. वे कहते हैं कि तिब्बत के नीचे प्लेट का निचला हिस्सा पिघल रहा है, जैसे आइसक्रीम गर्मी में पिघलती है. इससे मैग्मा ऊपर आ सकता है, जो ज्वालामुखी पैदा करेगा. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के डॉ. आरके सिंह कहते हैं कि यह भारत के लिए खतरा है. हिमालय पहले ही भूकंप संवेदनशील है. 2005 का कश्मीर भूकंप (7.6 तीव्रता) इसी प्लेट की वजह से था. अगर फटाव बढ़ा, तो दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों तक झटके महसूस होंगे. स्टडी के अनुसार, यह बदलाव अगले 10-20 लाख साल में होगा, लेकिन छोटे-छोटे भूकंप अब ही बढ़ सकते हैं. टेक्टॉनिक्स प्लेट का खेल टेक्टॉनिक प्लेट्स पृथ्वी की बाहरी परत (क्रस्ट) के टुकड़े हैं, जो मैग्मा पर तैरते हैं. भारत की प्लेट हर साल 5 सेंटीमीटर उत्तर की ओर बढ़ती है. तिब्बत के नीचे यह 'सबडक्शन' (नीचे धंसना) के बजाय 'रिफ्टिंग' (टूटना) कर रही है.      कैसे पता चला? भूकंप की लहरें प्लेट के अंदर से गुजरते हुए बदल जाती हैं. वैज्ञानिकों ने GPS डेटा और सैटेलाइट इमेज से देखा कि तिब्बत ऊंचा हो रहा है.     क्यों हो रहा? प्लेट का दबाव ज्यादा हो गया. ऊपरी हिस्सा हिमालय को ऊंचा कर रहा है (हर साल 5 मिमी), लेकिन निचला हिस्सा फिसल नहीं पा रहा.     क्या होगा? फटाव से नई प्लेट्स बनेंगी, जो हिमालय को और ऊंचा या चपटा कर सकती हैं. यह प्रक्रिया धीमी है, लेकिन असर लंबा चलेगा. संभावित प्रभाव: जीवन पर क्या असर पड़ेगा?     भूकंप का खतरा: हिमालय बेल्ट में 80% दुनिया के बड़े भूकंप आते हैं. भारत, नेपाल, चीन में लाखों घर ढह सकते हैं. 2015 नेपाल भूकंप में 9,000 मौतें हुईं.     ज्वालामुखी और बाढ़: मैग्मा ऊपर आने से नए ज्वालामुखी. ग्लेशियर पिघलने से गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियां बाढ़ लाएंगी.     मानव जीवन: 10 करोड़ से ज्यादा लोग हिमालय क्षेत्र में रहते हैं. दिल्ली-NCR तक झटके. अर्थव्यवस्था को 1 लाख करोड़ का नुकसान.     पर्यावरण: हिमालय की जैव विविधता खतरे में. जलवायु बदलाव तेज होगा. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह प्राकृतिक है, लेकिन हमें तैयार रहना होगा. भूकंपरोधी इमारतें बनाएं. मॉनिटरिंग बढ़ाएं. भारत क्या कर रहा है? तैयारी की दिशा भारत सरकार ने GSI को और फंड दिए हैं. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) अब तिब्बत बॉर्डर पर 50 नए सेंसर लगाएगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि हिमालय हमारा खजाना है, इसे बचाना हमारा कर्तव्य है. चीन के साथ डेटा शेयरिंग पर बात हो रही है, क्योंकि तिब्बत उनका क्षेत्र है. आगे क्या? उम्मीद की किरण वैज्ञानिक कहते हैं, यह बदलाव पृथ्वी का सामान्य चक्र है. लेकिन चेतावनी समय पर मिली है. अगर हम सतर्क रहे, तो नुकसान कम कर सकते हैं. हिमालय की चोटियां कह रही हैं कि मैं बदल रहा हूं, लेकिन मजबूत रहूंगा. दुनिया के वैज्ञानिक अब इस पर नजर रखेंगे.

मतगणना से पहले समस्तीपुर डीएम का स्ट्रांग रूम निरीक्षण, अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश

समस्तीपुर बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 की मतगणना नजदीक आते ही जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। इसी क्रम में बुधवार को जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-डीएम रोशन कुशवाहा और पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह ने समस्तीपुर कॉलेज स्थित वज्रगृह (स्ट्रांग रूम) का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दोनों अधिकारियों ने मतदान के बाद जमा की गई ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की सुरक्षा, व्यवस्था और निगरानी प्रणाली की बारीकी से समीक्षा की। डीएम ने दिए सख्त निर्देश डीएम रोशन कुशवाहा ने स्पष्ट निर्देश दिया कि वज्रगृह की सुरक्षा अभेद्य रहनी चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि मतगणना केंद्र में प्रवेश केवल उन्हीं व्यक्तियों को मिलेगा, जिनके पास निर्वाची पदाधिकारी द्वारा जारी आधिकारिक पहचान पत्र होगा। सुरक्षा जांच के उपरांत केवल निर्वाची पदाधिकारी, नियुक्त मतगणना अभिकर्ता तथा फॉर्म-18 पर अधिकृत व्यक्ति ही काउंटिंग हॉल में प्रवेश कर सकेंगे। उन्होंने यह भी सख्ती से निर्देश दिया कि एक बार अंदर प्रवेश करने वाले कर्मी या अभिकर्ता को बाहर जाने के बाद पुनः प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह व्यवस्था मतगणना प्रक्रिया की शुचिता, पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य की गई है। काउंटिंग हॉल की तैयारियों की समीक्षा निरीक्षण के दौरान डीएम ने काउंटिंग हॉल के अंदर की टेबल व्यवस्था, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा बलों की तैनाती और कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मतगणना प्रक्रिया शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न होनी चाहिए तथा सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी की जाएं। त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मतगणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था त्रिस्तरीय रहेगी। प्रत्येक संवेदनशील बिंदु पर पुलिस बल, अर्धसैनिक बल और दंडाधिकारी की तैनाती की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि पूरी तैयारी के साथ मतगणना को निष्पक्षता और पूर्ण सुरक्षा के बीच सम्पन्न कराया जाएगा।  

पर्यटन में नया आकर्षण: महेश्वर और कुक्षी में बनेंगे हैंडलूम-क्राफ्ट टूरिज्म विलेज, पर्यटक जान सकेंगे पारंपरिक कला

भोपाल मध्यप्रदेश पर्यटन द्वारा चंदेरी के प्राणपुर की तर्ज पर महेश्वर के पास एक गांव को हैंडलूम टूरिज्म विलेज और कुक्षी को क्राफ्ट टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। खरगोन जिले में स्थित महेश्वर का गांव केरिया खेड़ी महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि धार जिले में स्थित कुक्षी बाग प्रिंट के लिए जाना जाता है। चंदेरी साड़ी की बुनाई पर केंद्रित हैंडलूम टूरिज्म विलेज प्राणपुर की तरह ये दोनों नई परियोजनाएं पारंपरिक वस्त्र कला को बढ़ावा देंगी, पर्यटकों को आकर्षित करेंगी तथा बुनकरों और कारीगरों को खरीदारों से सीधे जुड़ने का एक मंच प्रदान करेंगी। निफ्ट, एनआईडी और अन्य संस्थानों के छात्र और शोधकर्ता बुनाई और रंगाई प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन देख सकेंगे। दोनों परियोजनाओं को लेकर कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। महेश्वर में कार्य जल्द शुरू होने वाला है। इसके बाद कुक्षी में परियोजना की शुरुआत होगी। साड़ी बनते हुए देख सकेंगे पर्यटक महेश्वर से लगभग चार किमी दूर छोटे से गांव केरिया खेड़ी में लगभग सौ परिवार माहेश्वरी साड़ियां, सलवार-सूट और अन्य वस्त्र बुनते हैं। यह गांव महेश्वर से ओंकारेश्वर जाने वाली सड़क से लगभग तीन किमी दूर स्थित है। गांव में एक कैफेटेरिया और एक अनुभव और विक्रय केंद्र बनाया जाएगा। गांव के नागरिक बुनियादी ढांचे में भी सुधार किया जाएगा। परियोजना का क्रियान्वयन कर रहे अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा स्वीकृत और 5.11 करोड़ रुपये की लागत वाली महेश्वर परियोजना पर काम जल्द ही शुरू होगा और अगले साल जून तक पूरा होने की उम्मीद है। केरिया खेड़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने से महेश्वर पर पर्यटकों का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी। मंदिर में दर्शन और नर्मदा नदी में डुबकी लगाने के लिए महेश्वर जाने वाले पर्यटकों का एक वर्ग हथकरघा गांव की ओर जा सकता है, क्योंकि गांव से लगभग दो किमी दूर नर्मदा नदी पर एक घाट है।वस्त्रों की रंगाई का प्रदर्शन होगा धार जिले के तहसील मुख्यालय कुक्षी को क्राफ्ट टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा। कुक्षी में लगभग 1500 बाग कारीगर रहते हैं। यहां भी कस्बे का कायाकल्प किया जाएगा और इसे एक ऐसे स्थान के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां पर्यटक सीधे कारीगरों से बाग प्रिंट के वस्त्र खरीद सकेंगे। इस परियोजना का बजट 20.60 करोड़ रुपये है और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। गांव डाई हाउस के अतिरिक्त कैफेटेरिया, विक्रय और अनुभव केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। बोर्ड ने पहली बार चंदेरी के प्राणपुर में इस अवधारण को आकार दिया और प्राणपुर को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम का पुरस्कार केंद्र सरकार की ओर से मिला। इसी से प्रोत्साहन पाकर महेश्वर और कुक्षी में पर्यटन ग्राम विकसित किए जा रहा हैं। दोनों जगहों के लिए टेंडर हो गए हैं, जल्द ही कार्य शुरू होगा। – डॉ अभय अरविंद बेडेकर, अपर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन बोर्ड

असम से कान्हा पहुंचेंगे जंगली भैंसे, टाइगर के गढ़ में नया वन्यजीव संतुलन बनाने की तैयारी

मंडला   टाइगर्स के लिए विश्वप्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क में नए मेहमान आने वाले हैं. लेकिन इन मेहमानों को हल्के में न लें, ये हैं भारी भरकम आसामी जंगली भैैंसे. जल्द ही असम से मध्य प्रदेश के इस टाइगर रिजर्व में जंगली भैसों की एंट्री होने वाली है, जिसके बाद जंगल का रोमांच और बढ़ने जा रहा है. दुनिया भर के पर्यटक यहां प्रकृति की सुंदरता और बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों के दीदार के लिए पहुचते हैं, वहीं अब भैसों की तादाद भी यहां बढ़ाई जा रही है. कान्हा में अचानक घटी जंगली भैसों की तादाद कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी के अनुसार, '' यहां पहले जंगली भैंसों की उपस्थिति थी, लेकिन समय के साथ उनकी संख्या बहुत कम हो गई. किसी भी प्रजाति की अचानक कमी जंगल पर प्रतिकूल असर डालती है. यही कारण है कि अब असम के राष्ट्रीय उद्यानों से जंगली भैंसों को कान्हा में बसाने की योजना बनाई जा रही है.'' असम से जंगली भैंसे लाने की रूपरेखा तैयार वन विभाग के मुताबिक सुपखार क्षेत्र को जंगली भैंसों के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है. असम से जंगली भैसों को 5 चरणों में कान्हा लाने की तैयारी चल रही है. उच्चाधिकारियों के साथ लगातार परामर्श जारी है और जल्द ही इस दिशा में कदम उठाए जाने की उम्मीद है. इस पहल से न सिर्फ वन्यजीवन को मजबूती मिलेगी बल्कि पर्यटकों के लिए भी कान्हा नेशनल पार्क का अनुभव और समृद्ध होगा. पांच चरणों में होगा ट्रांसलोकेशन योजना के अनुसार, जंगली भैंसों को असम से लाने का काम पांच चरणों में पूरा किया जाएगा. पार्क के सुपखार क्षेत्र को इनके लिए सबसे उपयुक्त चिन्हित किया गया हैृ. इस महत्वपूर्ण परियोजना पर उच्च स्तर पर चर्चा जारी है और जल्द ही इसे अमली जामा पहनाने की उम्मीद है. इस पहल से न सिर्फ पार्क के वन्यजीवन को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटकों को भी एक नए और दुर्लभ वन्यजीव को देखने का अवसर मिल सकेगा. कान्हा में बसेंगे आसामी भैंसे कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया, '' कान्हा में कभी जंगली भैंसों की अपनी आबादी हुआ करती थी और कान्हा नेशनल पार्क से इन्हें बाहर भी भेजा गया था लेकिन समय के साथ ये प्रजाति लगभग विलुप्त हो गई. किसी भी प्रजाति की अनुपस्थिति पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालती है. इसी कमी को दूर करने और जैव विविधता को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है.

ट्रैक पार करते समय हादसे पर रेलवे प्रशासन को जवाबदेह ठहराया, हाई कोर्ट ने रेलवे का दावा खारिज किया

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है "यदि रेलवे ने पटरियों तक अनधिकृत पहुंच को रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए तो क्रॉसिंग करते समय हुई मौत के लिए भी मुआवजा भी देना पड़ेगा." इस प्रकार जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने रेलवे दावा अधिकरण भोपाल के फैसले को निरस्त कर दिया. रेलवे दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती एकलपीठ ने अपने आदेश कहा "बच्चे सहित दो महिलाओं की मौत एक अप्रिय घटना के कारण हुई थी और रेलवे प्रशासन पटरियों तक अनधिकृत पहुंच रोकने तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने वैधानिक कर्तव्य में विफल रहा. लापरवाही या अनधिकृत प्रवेश से रेलवे प्रशासन स्वतः ही दायित्व से मुक्त नहीं हो जाता है." मामले के अनुसार सिंगरौली निवासी राम अवतार सहित दो अन्य की तरफ से दायर अपील में रेलवे दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी. रेलवे ट्रैक पर 3 लोगों की मौत का मामला याचिका में कहा गया "रेलवे ही हादसे के लिए जिम्मेदार है." रेलवे दावा अधिकरण ने माना था "रेलवे मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं है, क्योंकि मृतक ट्रेन में नहीं चढ़े थे. ट्रेन की पटरी में आने के कारण उनकी मौत हुई थी." राम अवतार अपने बेटे राजेश (उम्र 3 साल) का मुंडन कराने 16 अप्रैल 2011 में मैहर ले गए थे. इस दौरान 8-10 लोगों का समूह मैहर गया था. लौटते समय रेलवे स्टेशन में बालक राजेश रेलवे की पटरियों पर आ गया था और उसे बचाने के लिए दो महिलाएं भी पटरी पर आ गईं और तीनों ट्रेन की चपेट में आ गई थीं. रेलवे दावा प्राधिकरण को मुआवजा के निर्देश प्राधिकरण ने सुनवाई के दौरान पाया था "समूह के लोग ट्रेन संख्या 51672 सतना-इटारसी पैसेंजर में नहीं चढे़ थे. लोली बाई, इंद्रमती और राजेश (बालक) की दूसरी पटरी से गुजरती हुई गुजरती ट्रेन की चपेट में आने से हुई." रेलवे ने लिखित बयान के माध्यम से दुर्घटना से इनकार किया और कहा "मृतक रेलवे लाइन पार कर रहे थे, तभी गुजरती ट्रेन की चपेट में आ गये." एकलपीठ ने रेलवे दावा अधिकरण को निर्धारित मुआवआ देने के निर्देश जारी किये हैं. जबलपुर में घोड़ों की मौत के मामले में सुनवाई एक अन्य मामले में हैदराबाद से जबलपुर लाए गए घोड़ों की मौत के मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में हुई. याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया "पिछले माह में कुछ और घोड़ों की मौत हुई, जिसे छुपाया जा रहा है." हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने आरोप को गंभीरता से लेते हुए केयरटेकर सचिन तिवारी को शपथ पत्र पर यह बताने कहा है "वर्तमान में कितने घोड़े बचे हैं और उनका मानसिक व शारीरिक स्टेटस क्या है." युगलपीठ ने यह भी बताने कहा है "घोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं." युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को नियत की है. जबलपुर निवासी पशु प्रेमी सिमरन इस्सर की ओर से याचिका दायर की गई थी. 

16 नवंबर को जबलपुर में सूर्या मैराथन, आर्मी के आयोजन में शामिल हो सकते हैं आम नागरिक भी

जबलपुर   भारतीय सेना जबलपुर में हर साल सूर्या मैराथन का आयोजन करती है. इस साल भी 16 नवंबर को यह मैराथन आयोजित की जा रही है. इसमें लगभग 7500 लोग अब तक रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. इस आयोजन में थल सेनाध्यक्ष अध्यक्ष के पहुंचने की भी उम्मीद है. मुख्यमंत्री मोहन यादव मैराथन में दौड़ने वाले धावकों को हरी झंडी दिखाएंगे. कुल मिलाकर 15 लाख रुपए के इनाम दौड़ने वालों को दिए जाएंगे. जबलपुर में तीसरी साल सूर्या मैराथन जबलपुर में लगातार तीसरी साल सूर्या मैराथन का आयोजन किया जा रहा है. इस आयोजन में पिछले साल 10,000 लोगों ने हिस्सा लिया था. इस साल अभी तक 7500 लोग रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. यह आयोजन भारतीय सेना का मध्य भारत कमान करवाता है. सेना के अधिकारी मेजर जनरल संजय गौतम ने बताया "रजिस्ट्रेशन के आखिरी वक्त तक पिछले साल से भी ज्यादा लोग इस मैराथन में हिस्सा लेंगे. इस मैराथन में जीतने वाले धावकों को कुल मिलाकर 15 लाख रुपए की राशि इनाम के तौर पर दी जा रही है." सबसे बड़ी रेस 21 किमी की, इनाम एक लाख मैराथन में सबसे बड़ा पुरस्कार 21 किलोमीटर की रेस जीतने वाले खिलाड़ी को दिया जाएगा. इसमें एक पुरस्कार स्त्री को और एक पुरुष को दिया जाएगा. मैराथन में अलग-अलग कैटेगरी हैं. सबसे छोटी मैराथन मात्र 3 किलोमीटर की है, जिसमें कभी-कभार दौड़ने वाले लोग भी शामिल हो सकेंगे. अलग-अलग कैटेगरी में कुल मिलाकर 90 लोगों को सम्मानित किया जाएगा. यह रेस कोबरा मैदान से शुरू होगी और यहीं पर खत्म होगी, लेकिन इस बीच में खिलाड़ी जबलपुर शहर के भीतर भी दौड़ेंगे. इसलिए इस आयोजन में सेना ने जबलपुर पुलिस और जिला प्रशासन की मदद भी ली है. देश के किसी भी कोने का व्यक्ति दौड़ सकता है मेजर जनरल संजय गौतम ने बताया "इस रेस को इंडिया रनिंग कैलेंडर में शामिल किया गया है और पूरे देश फिट इंडिया मूवमेंट के जरिए अलग-अलग रेस की जाती हैं. उनकी जानकारी धावकों को होती है इसलिए इस आयोजन में जबलपुर के साथ ही देश के दूसरे इलाकों से भी धावक पहुंच रहे हैं. इस आयोजन में शामिल होने वाले हर खिलाड़ी को ड्रेस दी जाएगी." "ड्रेस का कुछ पैसा भी लिया जा रहा है. इस ड्रेस में एक चिप होगी, जो एक सेंसर से जुड़ी होगी ताकि ओपनिंग पॉइंट और एंड पॉइंट पर इस बात का मेजरमेंट किया जा सके की धावक में कब रेस शुरू की और कब खत्म की." ऑपरेशन सिंदूर को समर्पित मैराथन एक साथ 7500 लोग दौड़ेंगे तो सब की ओपनिंग और एंडिंग टाइम अलग-अलग होंगे. यह आयोजन जबलपुर में 16 नवंबर को सुबह 5:30 बजे शुरू हो जाएगा. मेजर जनरल संजय गौतम ने बताया "इस बार की रेस का उद्देश्य फ्यूल योर स्पिरिट एंड ऑनर देयर करेज रखा गया है. इस बार की रेस ऑपरेशन सिंदूर में वीरता से लड़ने वाले सैनिकों को समर्पित है."