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पेंच में बना दुनिया का सबसे बड़ा बाघ स्टैच्यू, मोगली लैंड को पीछे छोड़ा मध्य प्रदेश में अनावरण: पेंच टाइगर रिजर्व में दुनिया की हाईएस्ट टाइगर प्रतिमा

सिवनी  मध्य प्रदेश के सिवनी पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन में कबाड़ के जुगाड़ से दुनिया का सबसे बड़ा बाघ का स्टेच्यू बनाया है. जिसका अनावरण बुधवार को मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने किया है. पेंच टाइगर रिजर्व का दावा है कि अब तक सबसे बड़ी बाघ की मूर्ति अमेरिका के जॉर्जिया प्रांत में थी लेकिन अब उससे बड़ी प्रतिमा कबाड़ के जुगाड़ से पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन के द्वारा तैयार करवाई गई है. अमेरिका को पछाड़कर बनाया सबसे बड़ा बाघ का स्टेच्यू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिवनी में आयोजित कार्यक्रम में सिंगल क्लिक से पेंच टाइगर रिजर्व के खवासा पर्यटन गेट पर लोहे के कबाड़ से बनाई गई 40 फीट लंबी, 8 फीट चौड़ी और 17.5 फीट ऊंची बाघ की मूर्ति का अनावरण किया. पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार ने बताया कि ''इंटरनेट में उपलब्ध वर्ल्ड रिकार्ड एकेडमी के अनुसार दुनिया में सबसे बड़ी बाघ की मूर्ति अब तक अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में है, जो 8 फिट ऊंची और 14 फिट लंबी है. जबकि इस लिहाज से अब सबसे बड़ी आकृति का तमगा हमारे पास है.'' मिशन लाइफ के तीन सूत्रों पर बनाई गई आकृति पेंच टाइगर रिजर्व के उपसंचालक रजनीश कुमार ने बताया कि, ''मिशन लाइफ के अंतर्गत पीएम द्वारा तीन आर (3R) सूत्रों, रिड्यूस (Reduce), रियूस (Ruse) एवं रिसाईकल (Recycle) के भावना के अंतर्गत पेंच टाइगर रिजर्व में लोहे के स्क्रैप मटेरियल से दुनिया की सबसे बड़ी बाघ प्रतिमा का निर्माण किया गया है. जनवरी में लोहे के अनुपयोगी सामग्रियों जैसे पुरानी साइकिल, पाइप, जंग लगी लोहे की चादरें जैसी कई सामग्रियों से प्रतिमा का निर्माण प्रारम्भ किया गया था. मेक इन इंडिया के लोगों से मिली थी प्रेरणा पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि, ''प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया का प्रतीक चिन्ह एक शेर को बनाया था और वह सिंह भी लोहे के कबाड़ से बना डिजाइन था. उसी से प्रेरणा लेकर लोहे के स्‍क्रैप मटेरियल के इस बाघ की कलाकृति बनाने का प्लान किया गया था.'' सामूहिक प्रयासों की मिसाल है मूर्ति पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन का कहना है कि, जो कभी कबाड़ था, आज वही 40 फीट का बल, 17.5 फीट की गरिमा और 8 फीट के गर्व के रूप में खड़ा है. खवासा गेट पर स्थानीय कलाकारों के साथ ऋषभ कश्यप के नेतृत्व में और वनकर्मियों के सहयोग से तैयार, कबाड़ से निर्मित विशाल बाघ मात्र एक मूर्ति नहीं, यह सामूहिक प्रयास की शक्ति का प्रतीक है. जिस प्रकार लोहे के छोटे-छोटे टुकड़ों ने मिलकर इस विशाल बाघ को आकार दिया, उसी प्रकार स्थानीय समुदायों, वन विभाग के कर्मचारियों, अधिकारियों और नागरिकों के छोटे-छोटे प्रयास मिलकर ही संरक्षण की महान कहानी रचते हैं. 12 नवम्बर को मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अनावरित यह अद्भुत सृजन हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के लिए सच्चे मन से उठाया गया एक छोटा कदम भी आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी विरासत बन सकता है.

आज शुक्रवार से भोपाल में फजिर की नमाज के साथ 78वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ईंटखेड़ी स्थित घासीपुरा में आज  से शुरू हो रहा 78वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा (Ijtema 2025 Tablighi Jamaat) इस बार तकनीक और परंपरा का अनोखा संगम लेकर आ रहा है। दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम धार्मिक सम्मेलन में पहली बार क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू की गई है। इससे न केवल सेवादारों को अपनी जिम्मेदारी समझने में आसानी होगी, बल्कि आयोजन स्थल की संपूर्ण जानकारी भी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगी। इज्तिमा के प्रवक्ता उमर हफीज बताते हैं कि पहला आधिकारिक इज्तिमा 1947 में हुआ था, इसलिए यह 79वां आलमी इज्तिमा है, लेकिन कोरोना काल में साल 2020 में यह आयोजन नहीं हो सका था, इसलिए यह 78वां आयोजन है। उमर हफीज बताते हैं विदेश से कोई जमात नहीं आती, बल्कि व्यक्तिगत रूप से लोग इस इज्तिमा में शामिल होने आते हैं। पहले उनका पुलिस वेरीफिकेशन होता है। इसके बाद ही समागम में शामिल होने की अनुमति दी जाती है। स्कैन करते ही इज्तिमा का डिजिटल नक्शा खुल जाएगा इज्तिमा स्थल पर तीस हजार से अधिक वालेंटियर को विशेष क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र दिए गए हैं, जिनमें नगर निगम के पांच हजार और 25 हजार स्वयंसेवक शामिल रहेंगे, जो रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और इज्तिमा स्थल जाने वाले प्रमुख मार्गों पर तैनात किए गए हैं। इस कार्ड को स्कैन करते ही मोबाइल पर पूरा इज्तिमा परिसर का डिजिटल नक्शा खुल जाएगा, जिसमें यह जानकारी होगी कि कौन सी जमात किस क्षेत्र में ठहरी है, किस जगह जरूरी सामान, पानी या चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है, सफाई या सुरक्षा से जुड़ी टीमें कहां-कहां तैनात हैं। आयोजन समिति के अनुसार, यह सिस्टम भीड़ प्रबंधन में अहम भूमिका निभाएगा और किसी भी आपात स्थिति में मदद पहुंचाने में समय की बचत होगी। इस सुविधा से लोग परेशान होने से बचेंगे और उन्हें सटीक जानकारी मिल सकेगी। इज्तिमा में 12 लाख से अधिक लोगों के आने संभावना चार दिवसीय यह मजहबी समागम 14 नवंबर आज फजिर की नमाज के साथ आरंभ हुआ  और 17 नवंबर को सामूहिक दुआ के साथ संपन्न होगा। देशभर की जमातों और विदेशों से व्यक्तिगत रूप से आने वाले मुस्लिम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल होंगे। दुआ के आखिरी दिन करीब 12 लाख जमातियों के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। जीरो वेस्ट और ग्रीन थीम के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम इस बार का इज्तिमा ‘जीरो वेस्ट’ थीम पर आधारित है। प्रवक्ता उमर हफीज के अनुसार, प्लास्टिक और डिस्पोजल वस्तुओं पर पूरी तरह प्रतिबंध है। नगर निगम और ग्राम पंचायतों के सहयोग से पूरे आयोजन को ‘ग्रीन एंड क्लीन इज्तिमा’ बनाने की योजना है। कचरा प्रबंधन विशेषज्ञ सैयद इम्तियाज अली ने बताया कि इस बार उत्पन्न होने वाला कचरा 180 मीट्रिक टन से घटाकर 120 मीट्रिक टन तक सीमित रखने का लक्ष्य है। इस समागम में पहली बार इज्तिमा स्थल के आसपास की आठ ग्राम पंचायतें सफाई समेत अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग कर रही है। वहीं दूसरी ओर वुजू में प्रतिदिन खर्च होने वाले 90 लाख लीटर पानी को कम करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। बायोमेडिकल वेस्ट और गंदे पानी का ट्रीटमेंट और रीसाइक्लिंग की जाएगी। इज्तिमा कल से, परिवर्तित रहेंगे कई मार्ग भोपाल से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित ईंटखेड़ी के ग्राम घासीपुरा में 14 से 17 नवंबर तक चार दिनी आलमी तब्लीगी इज्तिमा का आयोजन होगा। इसमें देश के विभिन्न भागों से बडी संख्या में धर्मावलंबी सम्मलित होंगे, जो रेलवे स्टेशन, पुराने शहर के विभिन्न क्षेत्रों से कार्यक्रम स्थल तक पहुचेंगे। अंतिम दिन सामूहिक दुआ में शहर से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। सुबह छह बजे से पुराना शहर से इज्तिमा स्थल की ओर आवागमन करने वाले मार्गों जैसे-मुबारकपुर से पटेल नगर नया बायपास, गांधी नगर से अयोध्यानगर बायपास, रत्नागिरी, लाम्बाखेड़ा से करोंद भोपाल टाकीज, पीरगेट, मोती मस्जिद, रायल मार्केट, लालघाटी चौराहा, नादरा बस स्टैंड, भोपाल मुख्य रेलवे स्टेशन, अल्पना तिराहा, भारत टाकीज, बोगदापुल आदि क्षेत्रों में भारी संख्या में जनसमुदाय एवं वाहनों के सड़कों पर होने से अत्यधिक यातायात दबाव रहेगा। आमजन से अनुरोध है कि पुराने शहर और इज्तिमा स्थल की ओर आने-जाने हेतु अन्य वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन से आवागमन करने का मार्ग भोपाल से एयरपोर्ट जाने वाले वाहन वीआइपी रोड, लालघाटी होकर एयरपोर्ट की ओर आवागमन कर सकेंगे। भोपाल शहर से मुख्य रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले वाहन रोशनपुरा, लिंक रोड -दो, बोर्ड आफिस, चेतक ब्रिज से प्रभात चौराहा, 80 फीट रोड होकर प्लेटफार्म क्रमांक-एक की ओर आवागमन कर सकेंगे। शहर में यात्री बसों का डायवर्सन     सागर, छतरपुर, दमोह, रायसेन, होशंगाबाद, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बैतूल की ओर से आने वाली बसें 11 मील, मिसरोद, आरआरएल तिराहा, हबीबगंज नाका, सांची दुग्ध संघ होते हुए आईएसबीटी बस स्टैंड की ओर आवागमन कर सकेंगे।     विदिशा से आने वाली बसें सूखी सेवानिया, चौपड़ा बायपास, से भानपुर चौराहा भानपुर रोटरी पर समाप्त होंगी।     बैरसिया से आने वाली बसें गोलखेडी से तारासेवनिया, परवलिया, मुबारकपुर बायपास, खजूरी बायपास से बैरागढ़ हलालपुर बस स्टैंड पर समाप्त होंगी।  

भोपाल मेट्रो नवंबर के अंत तक दौड़ेगी, अंतिम जांच में यात्री सुरक्षा और एंट्री-एग्जिट सुधार की समीक्षा

भोपाल  भोपाल की बहुप्रतीक्षित मेट्रो रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो नवंबर के आखिरी सप्ताह तक भोपाल मेट्रो पटरियों पर दौड़ती नजर आ सकती है। दरअसल, दिल्ली से आने वाली कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम अगले सप्ताह भोपाल मेट्रो का तीसरा और अंतिम निरीक्षण करने आने वाली है। यह परीक्षा मेट्रो प्रबंधन के लिए निर्णायक साबित होगी, क्योंकि इस रिपोर्ट के आधार पर ही ‘ओके टू रन’ की मंजूरी दी जाएगी। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भोपाल मेट्रो इस बार सुरक्षा मानकों पर खरी उतरकर राजधानीवासियों को नवंबर के अंत तक मेट्रो की सवारी का तोहफा दे पाएगी या फिर इंतजार और लंबा खिंचेगा। एमपी मेट्रो प्रबंधन एक महीने से सुधार कार्य में जुटा गौरतलब है कि अक्टूबर में मेट्रो संचालन शुरू किया जाना था, लेकिन सीएमआरएस टीम के पिछले निरीक्षण के दौरान मेट्रो प्रबंधन परीक्षा में पास नहीं हो सका। उस समय सुरक्षा संबंधी कई खामियां सामने आई थीं। सूत्रों के अनुसार टीम ने यात्री सुरक्षा, स्टेशन एरिया, एंट्री और एग्जिट से जुड़ी कमियों की ओर ध्यान दिलाया था। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए एमपी मेट्रो प्रबंधन एक महीने से सुधार कार्यों में जुटा हुआ है। अब टीम द्वारा देखा जाएगा कि सुरक्षा मानकों पर मेट्रो प्रबंधन ने कितना सुधार किया है और क्या ट्रेन के संचालन के लिए सभी जरूरी मानक पूरे हो गए हैं या नहीं। बता दें कि एमपी मेट्रो के प्रबंध निदेशक एस. कृष्ण चैतन्य पूरी सक्रियता के साथ प्रायोरिटी कॉरिडोर के सभी मेट्रो स्टेशनों के कार्यों की समीक्षा और निरीक्षण कर रहे हैं।मंगलवार और बुधवार उन्होंने मैदान में उतरकर चल रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और सीएमआरएस से जुड़े बिंदुओं पर विशेष रूप से रिव्यू किया। मैदानी कार्य पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया प्रायोरिटी कॉरिडोर पर नहीं शुरू हुआ मैदानी कार्य सूत्रों की मानें तो प्रायोरिटी कॉरिडोर पर अभी भी मैदानी कार्य पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। सामान्यत: यह काम तब शुरू किए जाते हैं, जब परियोजना के सभी तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े कार्य पूरे हो जाएं। ऐसे में इस बार भी मेट्रो के संचालन की मंजूरी मिल पाएगी या नहीं, यह फिलहाल संशय में है। अक्टूबर में संचालन शुरू नहीं होने पर हुई थी किरकिरी अक्टूबर में समय पर मेट्रो शुरू न होने से एमपी मेट्रो प्रबंधन की काफी किरकिरी हो चुकी है। यही कारण है कि एमडी एस. कृष्ण चैतन्य अब भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं और पूरी तैयारी के साथ सीएमआरएस परीक्षा पास करने पर फोकस कर रहे हैं। इस मामले में भी उन्होंने चुप्पी साध रखी है।

बड़ी संख्या में महिलाओं को लाड़ली बहना योजना से वंचित, दस्तावेजी और बैंक त्रुटियां बनी बाधा

भोपाल   मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत दतिया जिले की 1,44,204 महिलाओं के बैंक खातों में मध्यप्रदेश सरकार ने अक्टूबर माह में 21 करोड़ 25 लाख 29 हजार 200 रुपए की राशि ट्रांसफर की। यह राशि प्रति महिला 1,500 रुपए के मान से दी गई। लेकिन इसी माह जिले की 2,949 लाड़लियों के नाम योजना की सूची से बाहर कर दिए गए। इनमें 452 महिलाओं ने स्वयं आवेदन देकर योजना का लाभ छोडने की इच्छा जताई, 2,196 महिलाए 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर अपात्र हो गई, जबकि 301 महिलाएं मृत पाई गई, जिनके नाम स्वाभाविक रूप से हटाए गए। अगर मृतक महिलाओं को छोडकर शेष 2,648 महिलाएं योजना में बनी रहतीं, तो सरकार को ?39 लाख 72 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता। योजना से वंचित महिलाओं की परेशानी जिले में 50 हजार महिलाएं ऐसी हैं जो लाड़ली बहना योजना में अपना नाम जुड़वाने के लिए प्रयासरत हैं। ये महिलाएं बैंक खाते में त्रुटि, आधार या समग्र आईडी लिंक न होने तथा दस्तावेज सत्यापन में देरी और पात्रता जांच की जटिल प्रक्रिया जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। नहीं जुड़ा पा रही नाम शहर के वार्ड क्रमांक 17 निवासी 48 वर्षीय शारदा देवी ने बताया कि वे पिछले एक साल से योजना में नाम जुड़वाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन दसतावेजों में कोई न कोई त्रुटि होने से नाम नहीं जुड़ पा रहा। ठंडी सडक़ निवासी 42 वर्षीय वैजयंती कुशवाह ने बताया कि घर से बार-बार निकल नहीं पाते। एक साल में करीब चार बार नाम जुड़वाने का प्रयास किया लेकिन जुड़ नहीं पाया। योजना से और भी महिलाओं के नाम हो सकते हैं बाहर लाड़ली बहना योजना की पात्रता जांच अब और सख्त हो रही है। विभागीय समीक्षा के अनुसार, जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष पूरी हो चुकी है या जिनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, उन्हें योजना से बाहर किया जा रहा है। यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से वित्तीय पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे ग्रामीण क्षेत्रों की कई महिलाओं पर सीधा असर पड़ेगा जो अभी भी योजना के सहारे घरेलू खर्च चला रही थीं। अगले कुछ महीनों में यह संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि दिसंबर-जनवरी में पात्रता की नई समीक्षा प्रस्तावित है। जारी है समीक्षा योजना से जुड़ी पात्रता की समीक्षा निरंतर जारी है। 60 वर्ष की आयु या मृत्यु की स्थिति में लाभ स्वतः समाप्त कर दिया जाता है।- अरविंद उपाध्याय, जिला कार्यकम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग दतिया

ध्यान दें! पूजा में फूल धोकर अर्पित करना सही या गलत? भगवान की मान्यता क्या है

हिन्दू धर्म में भगवान की पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. कई लोग भगवान की पूजा में कई प्रकार के फूल के साथ अलग-अलग सामग्री चढ़ाकर भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं. मान्यता के अनुसार यदि किसी देवी या देवता को उसके ​प्रिय पुष्प या पत्र अर्पित किये जाएं, तो वह शीघ्र प्रसन्न होकर मनचाहा वरदान देते हैं. जैसे भगवान श्री विष्णु को तुलसी पत्र और कमल का फूल अर्पित करने से वे शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं, लेकिन क्या आपको फूलों को तोड़ने और ईश्वर को चढ़ाने से जुड़े जरूरी नियम पता हैं? शास्त्रों में पूजा वाले फूल को लेकर कई तरह के नियम होते हैं. इसे तोड़ने से लेकर चढ़ाने तक कई ऐसे नियम हैं, जो बहुत कम लोगों को ही पता होते हैं. एक मन मे सवाल यह भी आता है कि भगवान को चढ़ाने से पहले फूल धोना चाहिए या नही? भगवान को धुले हुए पुष्प चढ़ाना शुभ या अशुभ? भगवान को जब भी कोई वस्तु चढ़ा, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि वह ताज़ा हो. साथ ही भगवान को चढ़ाए जाने वाले फूल कभी भी वासी नहीं होने चाहिए. जल का स्पर्श पाते ही वह जल देवता को अर्पित माना जाता है. साथ ही इन्हें धोकर चढ़ाना बिल्कुल भी सही नहीं होता है. माना जाता है कि अगर फूल धोकर भगवान को चढ़ाया जाता है तो उसकी पवित्रता खत्म हो जाती है. ऐसे में भगवान को अर्पित किए जाने वाले फूल कभी धोने नहीं चाहिए. ऐसी मान्यता है कि अगर फूल को धोया जाता है, तो वो जल देवता को अर्पित हो जाता है. ऐसे में फूल जूठा हो जाता है और फिर इसे किसी ओर देवी या देवता को चढ़ाना गलत है. मान्यता के अनुसार नहा-धोकर साफ हाथ से ही फूल को तोड़ा जाए तो सही होता है. वहीं बाजार से आने वाले फूलों को पूजा प्लेट में सीधे निकाल लेना चाहिए. भगवान को भूलकर भी ना चढ़ाए ऐसे फूल  हिंदू मान्यता के अनुसार कभी भी देवी-देवताओं की पूजा में बासी, कीड़े खाए हुए, टूटे-फूटे, मुरझाए, जमीन पर गिरे और दूसरों से मांगकर नहीं चढ़ाना चाहिए. इसी प्रकार किसी देवी या देवता को चढ़ाए हुए जूठे फूल भी किसी दूसरे देवता को नहीं चढ़ाना चाहिए.

स्पिन जाल में फंसेगी टीम इंडिया? पहले टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका की घातक तैयारी

कोलकाता दक्षिण अफ्रीका के बेहतरीन स्पिन आक्रमण के सामने भारत के सितारा बल्लेबाजों के कौशल की असली परीक्षा होगी जब दोनों टीमें दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला के पहले टेस्ट में शुक्रवार से यहां आमने सामने होंगी। भारत को पिछले साल न्यूजीलैंड ने भारत में ही 3.0 से हराया था और कीवी स्पिनरों ऐजाज पटेल, मिचेल सेंटनेर और ग्लेन फिलिप्स ने मिलकर तीन टेस्ट में 36 विकेट चटकाये थे। दक्षिण अफ्रीका का गेंदबाजी आक्रमण इस समय स्पिनरों पर निर्भर है और ऐसे में मेजबान टीम को धीमे गेंदबाजों के खिलाफ अपने प्रदर्शन में सुधार करना होगा। ⁠ मौजूदा विश्व टेस्ट चैम्पियन दक्षिण अफ्रीका आम तौर पर अच्छे तेज गेंदबाजों के लिये जानी जाती रही है लेकिन इस समय उसके पास धुरंधर स्पिनर हैं। पाकिस्तान के खिलाफ हाल ही में उसने श्रृंखला 1.1 से ड्रॉ खेली। इसमें केशव महाराज, साइमन हार्मर और सेनुरान मुथुस्वामी ने 39 में से 35 विकेट लिये। भारत के सहायक कोच रियान टेन डोइशे ने दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजी आक्रमण को ‘उपमहाद्वीप की शैली‘ वाला बताया। उन्होंने कहा, ‘‘उनके पास चार स्पिनर हैं जिनमे से वे तीन को उतार सकते हैं। ऐसा लग रहा है कि हम उपमहाद्वीप की किसी टीम के खिलाफ खेलने वाले हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस पर बात की है। हमने न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला से सबक लिया है।’’ छत्तीस वर्ष के हार्मर 1000 प्रथम श्रेणी विकेट ले चुके हैं और भारत के हालात से अनभिज्ञ नहीं हैं। दस साल पहले हाशिम अमला की कप्तानी में उन्होंने मोहाली और नागपुर में दो टेस्ट खेलकर चेतेश्वर पुजारा, रोहित शर्मा और रिधिमान साहा के विकेट लिये थे। एक दशक बाद भी वह उतने ही चतुर गेंदबाज हैं। उन्होंने रावलपिंडी में पिछले महीने टेस्ट में आठ विकेट चटकाकर दक्षिण अफ्रीका को जीत दिलाई और श्रृंखला ड्रॉ भी कराई। वहीं महाराज आधुनिक क्रिकेट के सबसे सटीक और आक्रामक स्पिनरों में से एक हैं। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों और दक्षिण अफ्रीका के स्पिनरों के बीच मुकाबला रोचक रहने वाला है। भारत के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक और कप्तान शुभमन गिल कई बार पिच का मुआयना कर चुके हैं। बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने आश्वासन दिया है कि यह टर्निंग पिच नहीं होगी। इससे जसप्रीत बुमराह जरूर आहलादित होंगे जो आम तौर पर शुरूआत में मूवमेंट और बाद में रिवर्स स्विंग देने वाली पिच पर भारत के ट्रंपकार्ड साबित हो सकते हैं। भारत दो तेज गेंदबाजों को उतार सकता है और घरेलू हालात की जानकारी होने से आकाश दीप को तरजीह मिल सकती है। पिछले 15 साल में तेज गेंदबाजों ने यहां टेस्ट में 61 प्रतिशत विकेट लिये हैं। शुभमन गिल की कप्तानी में भारत ने इस साल इंग्लैंड में श्रृंखला 2.2 से ड्रॉ खेली लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली हार उसे अभी भी कचोट रही होगी। वेस्टइंडीज की कमजोर टीम को 2.0 से हराने पर उसे डब्ल्यूटीसी चक्र में ज्यादा मदद नहीं मिलेगी। ऋषभ पंत की वापसी और ध्रुव जुरेल के बतौर बल्लेबाज खेलने से भारत का मध्यक्रम संतुलित लग रहा है। न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला में 16 विकेट लेने वाले वॉशिंगटन सुंदर भी उपयोगी साबित होंगे। दूसरा और आखिरी टेस्ट 22 नवंबर से गुवाहाटी में खेला जायेगा। टीमें : भारत : शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल, यशस्वी जायसवाल, साइ सुदर्शन, ऋषभ पंत, ध्रुव जुरेल, रविंद्र जडेजा, वॉशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह, आकाश दीप, मोहम्मद सिराज, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, देवदत्त पडिक्कल दक्षिण अफ्रीका : तेम्बा बावुमा (कप्तान ), एडेन माक्ररम, रियान रिकेलटन, ट्रिस्टन स्टब्स , काइल वेरेने , डेवाल्ड ब्रेविस, जुबैर हमजा, टोनी डि जोर्जी, कोर्बिन बोश, वियान मूल्डर, मार्को यानसेन, केशव महाराज, सेनुरान मुथुस्वामी , कैगिसो रबाडा, साइमन हार्मर मैच का समय : सुबह 9.30 से।