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जेजेपी स्थापना दिवस की तैयारियां तेज, जुलाना में जुटेगी पार्टी की ताकत

चंडीगढ़  7 दिसंबर को जुलाना में होने वाले स्थापना दिवस कार्यक्रम को लेकर जननायक जनता पार्टी तैयारियों में जुट गई है। जेजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय सिंह चौटाला ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बृज शर्मा को कार्यक्रम के आयोजक की कमान सौंपते हुए कई महत्वपूर्ण समितियों का गठन किया है और प्रदेश, जिला और हलका स्तर पर वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी हैं। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, पूर्व विधायक अमरजीत ढांडा, जोरा सिंह, रजनी मलिक, धर्मपाल प्रजापत और कृष्ण राठी को कार्यक्रम समन्वय समिति में शामिल किया गया हैं। वहीं कार्यक्रम आयोजक समिति में वरिष्ठ नेता डॉ केसी बांगड़, मुकेश सेठी, राहुल शर्मा, दलबीर धनखड़, अश्विनी वर्मा और दीपकमल सहारण को जिम्मेदारी दी हैं। जेजेपी ने स्थापना दिवस कार्यक्रम की तैयारियों के लिए हिसार और जींद जिले में दुष्यंत चौटाला, पानीपत में बृज शर्मा, भिवानी में दिग्विजय सिंह चौटाला और राव अभिमन्यु को जिला प्रभारी बनाया हैं। दादरी में पूर्व चेयरमैन राजेंद्र लितानी, झज्जर में पूर्व विधायक राजदीप फौगाट और कर्नल सुखविंदर राठी, कुरुक्षेत्र में मोहसिन चौधरी, अंबाला में प्रो रणधीर चीका, फरीदाबाद में ऋषिराज राणा, फतेहाबाद में स. सर्वजीत मसीतां और एडवोकेट सुरेंद्र भागीराम को जिला प्रभारी की कमान सौंपी गई हैं। इसी तरह गुरुग्राम जिले में दिनेश डागर, कैथल में रोशन ढांडा, करनाल में कृष्ण राठी, महेंद्रगढ़ में राकेश जाखड़, नूंह में रविंद्र सांगवान और राजेश भारद्वाज, पंचकुला में सुरजीत सौंढा और किरण पूनिया को जिला प्रभारी बनाया गया हैं। इनके अलावा पलवल में तेजपाल डागर और रविंद्र सांगवान, रेवाड़ी में नरेश द्वारका, रोहतक में सुमित राणा, सिरसा में कुलजीत कुलड़िया, सोनीपत में देवेंद्र कादियान, यमुनानगर में मोहसिन चौधरी और किरण पूनिया जिला प्रभारी होंगे।  वहीं विधानसभा क्षेत्रों में जेजेपी ने असंध हलके में बृज शर्मा, बाढड़ा में पूर्व विधायक नैना सिंह चौटाला, नरवाना में पूर्व विधायक रमेश खटक, बरोदा में दिग्विजय सिंह चौटाला, उकलाना में राजेंद्र लितानी और अनिल बालकिया, जुलाना में धर्मबीर सिहाग को हलका प्रभारी बनाया गया हैं। जींद हलके में राजेश सैनी, सफीदों में प्रो रणधीर चीका, उचाना में ओपी लाठर और अनिल जंधेड़ी, गोहाना में कुलदीप मलिक, इसराना में कृष्ण राठी, कलायत में रोशन ढांडा, नारनौंद में अमित बूरा, बरवाला में करण सिंह देपल, हांसी में अजीत ओडीएम, बवानी खेड़ा में जगदीश सिहाग, नलवा में सज्जन बलाली, महम में उपेंद्र कादियान, बेरी में रविंद्र सांगवान को हलका प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। वहीं दादरी हलके में कर्नल सुखविंदर राठी, पिहोवा में धूप सिंह माजरा, खरखौदा में राज सिंह दहिया, किलोई में सुमित राणा, बहादुरगढ़ में संजय दलाल, पूंडरी में रमेश सिद्धपुर, बादली में राव अभिमन्यु, कलानौर में रविंद्र पटौदी और भूपेंद्र बोंद, झज्जर में नरेश द्वारका और नीलोखेड़ी में रणदीप कौल हलका प्रभारी होंगे।  

सोशल मीडिया पर बड़ा बदलाव: 16 से कम उम्र के यूज़र्स के अकाउंट होंगे डिलीट

नई दिल्ली सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। ऑस्ट्रेलिया में 10 दिसंबर से 16 साल से कम उम्र के बच्चे फेसबुक , इंस्टाग्राम , स्नैपचैट, टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। यह फैसला देश के नए ऑनलाइन सेफ्टी नियम के तहत हुआ है। हालांकि, 16 साल के कम आयु वाले बच्चे माता-पिता की सहमति के साथ ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह दुनिया का पहला ऐसा कानून है, जो बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए बनाया गया है। इस नियम का पालन नहीं करने वाली कंपनियों को 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 270 करोड़ रुपये) का जुर्माना लग सकता है। आइये, पूरा मामला जानते हैं। 10 दिसंबर से बंद हो जाएंगे अकाउंट ऑस्ट्रेलिया के ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट के तहत आए इस नियम के अंतर्गत 10 दिसंबर से माता-पिता की सहमति के बिना 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों का सोशल मीडिया अकाउंट बंद कर दिया जाएगा। यह दुनिया का पहला राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध है। इसका मकसद बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान से बचाना है। जिन बच्चों के अकाउंट बंद होने वाले हैं, उन्हें प्लेटफॉर्म पहले एक मैसेज भेज देगा। मैसेज में बच्चों को तीन ऑप्शन दिए जाएंगे। इसमें अपना डेटा डाउनलोड करना, अपनी प्रोफाइल को फ्रीज करना या फिर अकाउंट पूरी तरह से बंद होने देना शामिल होगा। AI की मदद से होगी जांच कंपनियां बच्चों की उम्र का पता लगाने के लिए सीधे आईडी डॉक्यूमेंट मांगने के बजाय AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल करेंगी। AI यूजर्स के ऑनलाइन व्यवहार जैसे कि वे क्या लाइक करते हैं, क्या कमेंट करते हैं और कैसे एंगेज करते हैं के आधार पर उनकी उम्र का अनुमान लगाएगा। अगर किसी यूजर को लगता है कि उसकी उम्र गलत तरीके से कम बताई गई है, तो वह एक सेल्फी के जरिए अपनी उम्र वेरिफाई करवा सकता है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक के लिए एज-एश्योरेंस टेक्नोलॉजी देने वाली Yoti कंपनी का कहना है कि इस नई प्रक्रिया को समझने में यूजर्स को कुछ हफ्ते लग सकते हैं। अन्य देशों में भी आ सकता है नियम ऑस्ट्रेलिया का यह कानून सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यह जरूरी बनाता है कि वे 16 साल से कम उम्र के उन यूजर्स के अकाउंट ब्लॉक या सस्पेंड कर दें, जिनके पास माता-पिता की मंजूरी नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून दुनिया भर के लिए एक मिसाल बनेगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि 2026 तक दूसरे देश भी इसी तरह के कानून अपना सकते हैं।

अटलांटिक महासागर की धारा रुकने से यूरोप में ठंड का कहर, भारत-अफ्रीका पर भी असर

 नई दिल्ली अटलांटिक महासागर की मुख्य समुद्री धारा (Ocean Current) जो यूरोप और कई महाद्वीपों को गर्म रखती है वो खत्म हो रही है. यानी ठंडी हो रही है. इसे आइसलैंड ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बता दिया है. यह धारा अगर रुक गई तो पूरे यूरोप में फिर से हिमयुग आ सकता है. यानी चारों तरफ बर्फ ही बर्फ.  आइसलैंड के जलवायु मंत्री जोहान पाल जोहानसन ने कहा कि यह देश की अस्तित्व के लिए खतरा है. सरकार अब सबसे बुरे हालात के लिए योजना बना रही है. क्योंकि आइसलैंड एकदम नॉर्थ पोल पर ही है. सबसे बुरा असर उसे ही होगा.  अटलांटिक धारा क्या है और क्यों महत्वपूर्ण? अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (AMOC) नाम की यह धारा गर्म पानी को उष्णकटिबंधीय क्षेत्र से आर्कटिक की ओर ले जाती है. इससे यूरोप के सर्दियां हल्की रहती हैं. लेकिन जलवायु परिवर्तन से आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है. ग्रीनलैंड की बर्फीली चादर से ठंडा पानी समुद्र में बह रहा है. वैज्ञानिक कहते हैं कि यह ठंडा पानी धारा को बाधित कर सकता है. अगर AMOC ढह गई, तो उत्तरी यूरोप में सर्दियों का तापमान बहुत गिर जाएगा. बर्फ और बर्फीले तूफान बढ़ जाएंगे. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह धारा पहले भी ढह चुकी है. लगभग 12,000 साल पहले आखिरी बर्फीले युग से पहले यही हुआ था. आइसलैंड की चिंता: पहली बार जलवायु खतरे को सुरक्षा मुद्दा बनाया मंत्री जोहानसन ने कहा कि यह हमारी राष्ट्रीय मजबूती और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है. यह पहली बार है जब किसी खास जलवायु घटना को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सामने अस्तित्व का खतरा बताया गया. अब सभी मंत्रालय सतर्क हैं और जवाब तैयार कर रहे हैं. सरकार शोध, नीतियां और आपदा तैयारी पर काम कर रही है. खतरों में ऊर्जा और भोजन सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और अंतरराष्ट्रीय परिवहन शामिल हैं. जोहानसन ने कहा कि समुद्री बर्फ जहाजों को रोक सकती है. चरम मौसम कृषि और मछली पकड़ने को नुकसान पहुंचा सकता है, जो हमारी अर्थव्यवस्था और भोजन के लिए जरूरी हैं. आइसलैंड इंतजार नहीं कर सकता. वैश्विक प्रभाव: सिर्फ यूरोप नहीं, पूरी दुनिया प्रभावित AMOC के ढहने का असर उत्तरी यूरोप से कहीं आगे जाएगा. अफ्रीका, भारत और दक्षिण अमेरिका के किसानों पर वर्षा पैटर्न बिगड़ सकती है. अंटार्कटिका में गर्मी तेज हो सकती है, जहां बर्फ पहले ही खतरे में है. वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि अगले कुछ दशकों में घटना पूरी हो जाएगी, क्योंकि वैश्विक तापमान बढ़ रहा है. फिनलैंड के मौसम विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक एलेक्सी नुमेलिन ने कहा कि कब होगा, इस पर बहुत शोध हो रहा है. लेकिन समाज पर असर के बारे में कम जानकारी है. जर्मनी के पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट के स्टेफन राह्मस्टॉर्फ ने कहा कि विज्ञान तेजी से बदल रहा है. समय कम है, क्योंकि टिपिंग पॉइंट करीब आ रहा है. अन्य देशों की प्रतिक्रिया: शोध बढ़ा रहे हैं उत्तरी यूरोप के अन्य देश भी सतर्क हैं. आयरलैंड के मौसम विभाग ने प्रधानमंत्री और संसदीय समिति को जानकारी दी है. नॉर्वे का पर्यावरण मंत्रालय नया शोध कर रहा है. ब्रिटेन ने 81 मिलियन पाउंड से ज्यादा शोध के लिए दिए.  नॉर्डिक काउंसिल ने अक्टूबर में 60 विशेषज्ञों के साथ "नॉर्डिक टिपिंग वीक" कार्यशाला की. वे समाज पर असर की सिफारिशें तैयार कर रहे हैं. सोमवार को 30 से ज्यादा विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की बर्फ पिघलने पर चेतावनी दी.  आगे क्या? तत्काल कार्रवाई जरूरी आइसलैंड ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ने और गर्मी तेज होने के बीच जोखिम नहीं ले रहा. सरकार जलवायु अनुकूलन योजनाओं में जोखिमों को शामिल कर रही है. विशेषज्ञ कहते हैं कि समाज को प्रभाव समझने के लिए ज्यादा शोध चाहिए. यह मुद्दा दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि सुरक्षा का सवाल है.

टोयोटा फॉर्च्यूनर ने ऑस्ट्रेलिया को कहा अलविदा, जानें बंद होने की बड़ी वजह

कैनबरा टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (TKM) इन दिनों भारत में अपने दो फ्लैगशिप मॉडल इनोवा और फॉर्च्यूनर की बदौलत लगातार सफलता के सफर पर है। वहीं, पिकअप Hilux की पकड़ उतनी मजबूत नहीं दिखी। जबकि ऑस्ट्रेलिया में यह कहानी पूरी तरह पलट जाती है। वहां Hilux सबसे ज्यादा बिकने वाली टोयोटा कारों में से एक है। जबकि फॉर्च्यूनर का ग्राफ लगातार नीचे जा रहा है। अब इसी गिरावट के चलते टोयोटा ऑस्ट्रेलिया ने फॉर्च्यूनर को बंद करने का बड़ा फैसला ले लिया है। कुछ ऐसी रही बिक्री फॉर्च्यूनर पिछले करीब 11 सालों से ऑस्ट्रेलियाई मार्केट में मौजूद है। बता दें कि जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया में सिर्फ 2,928 यूनिट फॉर्च्यूनर बेचीं। जबकि फोर्ड एवरेस्ट की बिक्री 21,915 यूनिट, Isuzu MU-X की 12,499 यूनिट, और टोयोटा की अपनी लेंड क्रूजर की 23,298 यूनिट रही। इतनी है फॉर्च्यूनर की कीमत ऑस्ट्रेलिया में फॉर्च्यूनर की कीमत AUD 59,000 (लगभग 34 लाख रुपये) से शुरू होकर AUD 72,500 (करीब 42 लाख रुपये) तक जाती है। जबकि Land Cruiser Prado की शुरुआती कीमत AUD 78,550 (करीब 46 लाख रुपये) है। टोयोटा ऑस्ट्रेलिया के सेल्स और मार्केटिंग वाइस प्रेसिडेंट सीन हैंली ने कन्फर्म किया कि कंपनी 2026 तक फॉर्च्यूनर को अपने लाइनअप से हटा देगी। भारत में है काफी पॉपुलर भारत में यह तस्वीर बिल्कुल उलट है। यहां पिकअप ट्रक का कल्चर लगभग न के बराबर है। इसलिए फॉर्च्यूनर की डिमांड लगातार बनी हुई है। यह SUV यहां स्टेटस सिंबल मानी जाती है और लगातार Mahindra Scorpio और MG Gloster जैसी गाड़ियों को बिक्री में पीछे छोड़ती रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि Toyota जल्द ही भारत के लिए नई जनरेशन Fortuner ला सकती है।

भारतीय रेल की गति बढ़ाने की योजना: स्विहैग एजी की तकनीक उज्जैन में लागू हो सकती है

उज्जैन  बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन भारतीय रेल की गति बढ़ाने का नया केंद्र बन सकती है। स्विट्जरलैंड की रेल ट्रैक टेक्नोलॉजी कंपनी स्विहैग एजी ने विक्रम उद्योगपुरी में अपनी यूनिट लगाने की मंशा जताई है। यूनिट लगने पर यहां ऐसे मॉडर्न उपकरण तैयार होंगे, जो कई देशों में हाई-स्पीड रेल, हैवी ड्यूटी ट्रेनें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में उपयोग किए जाते हैं। स्विस कंपनी स्विहैग एजी पहले चरण में 70 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव रखा है। विक्रमपुर उद्योगपुरी में 5 एकड़ जमीन मांगी है। हाल ही में कंपनी के सीईओ डेनियल डाहिन्डन, भारत में कंपनी के प्रतिनिधि चेतन शर्मा और हर्ष वाजपेयी ने विक्रम उद्योगपुरी सेकंड फेज का दौरा भी किया। एमपी में स्विस कंपनी आने से नजर आएगा बदलाव ● स्विहैग एजी रेल ट्रैक टेक्नोलॉजी में विश्व की अग्रणी कंपनियों में एक है। यह जर्मनी, ब्रिटेन और अमरीका में उत्पादन केंद्र संचालित करती है। ● कंपनी के उत्पाद रेलवे ट्रैक की सुरक्षा, टिकाऊपन और लागत-कुशलता बढ़ाने में इस्तेमाल होते हैं। ● इसके स्विच कंपोनेंट्स, रेल फास्टनिंग सिस्टम का उपयोग हाई-स्पीड रेल, हैवी-ड्यूटी नेटवर्क और सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों में होता है। ● कंपनी के उत्पाद 40 देशों में उपयोग में हैं। ऐसे में उज्जैन आगे रेल उपकरणों का निर्यातक केंद्र बन सकता है कंपनी की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही स्विहैग इंडिया के लिए उपयुक्त भूमि का निरीक्षण कराया है। कंपनी प्रतिनिधियों को उज्जैनकी विशेषताएं और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में बताया है। कंपनी की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है। -राजेश राठौर, कार्यकारी निदेशक, मप्र औद्योगिक विकास

Sam Altman का बड़ा कदम: OpenAI रोबोटिक्स में ऐपल के Ex-इंप्लॉइज और ATLAS के साथ

नई दिल्ली OpenAI ने हाल ही में अपना पहला Agentic AI ब्राउजर ATLAS लॉन्च किया. इसके तुरंत बाद गूगल के शेयर गिरे और बताया गया कि 150 बिलियन डॉलर्स का नुकसान हो गया. लेकिन असली कहानी सिर्फ ब्राउजर की नहीं है, बल्कि इससे कहीं आगे की है. OpenAI एक ऐसा मार्केट कैप्चर करने की तैयारी में है जो फिलहाल एग्जिस्ट ही नहीं करता है. Agentic AI अभी भी शुरुआती स्टेज में है, लेकिन सैम ऑल्टमैन अगले कुछ सालों में इस स्पेस को कैप्चर कर लेंगे और गूगल फिर से पिछड़ सकता है.  लगभग 4 साल पहले जब ChatGPT शुरू हुआ था तब हमने आपको बताया था कि कैसे ये कंपनी गूगल को टक्कर देगी और मोनॉपली तोड़ेगी. अभी कमोबेश वैसा हो चुका है. गूगल सर्च में लगाार गिरावट देखी जा रही है और कंपनी को भारी नुकसान भी हो रहा है. लोगों की डिपेंडेंसी गूगल पर कम हो चुकी है,  Agentic AI – कंप्यूटर खुद से करेगा सबकुछ ATLAS ब्राउजर Google Chrome वाले तमाम फीचर्स देता है, लेकिन साथ ही इसमें दिया गया ऐसिस्टेंट आपके कमांड पर खुद से काम करता है. निश्चित तौर पर ये ब्राउजर गूगल क्रोम को टक्कर देगा.  ATLAS लॉन्च के दूसरे दिन ही OpenAI ने ऐलान किया कि उन्होंने Apple Shortcut बनाने वाली टीम को खरीद लिया यानी उनका अधिग्रहण कर लिया. दरअसल जिस टीम ने ऐपल का बड़ा ऑटोमेशन ऐप Shortcut बनाया था अब वो OpenAI के पास है. इस टीम ने सबसे पहले Workflow बनाया था जिसके बाद ऐपल ने इस टीम को खरीदा और उनसे Shortcut ऑटोमेशन बनवाया था.  मैकबुक में ऑटोमेशन का डीप इंटीग्रेशन करती है Sky टीम  ऐपल की वो टीम जिन्होंने 'शॉर्टकट' बनाया था उन्होंने पहले ही ऐपल छोड़ दिया था. यही टीम SKY AI चला रही थी. Sky की टीम AI पावर्ड नैचुरल लैंगवेज इंटरफेस पर काम कर रही थी. दरअसल ये इंटरफेस भी ऐपल के मैक कंप्यूटर्स के लिए है जो डेस्कटॉप पर आपके एजेंट की तरह काम करता है और यूजर्स इसके जरिए कोडिंग से प्लानिंग तक कर सकते हैं.  जैसे ChatGPT जैसा टूल वेब पर काम करता है उसी तरह Sky मैकबुक में नेटिव लेवल पर काम करता है और बिना यूजर के इंटरवेंशन के खुद से टास्क कंपलीट करता है. उदाहरण के तौर पर आप मैकबुक से सिर्फ Sky के जरिए कोई भी टास्क परफॉर्म करा सकते हैं.  खुद से काम करेगा कंप्यूटर  ये पूरा खेल ऑटोमेशन का है. यानी अब तक कंप्यूटर को आप चलाते हैं, लेकिन फ्यूचर में कंप्यूटर खुद से सबकुछ करेगा आपको बस कमांड देना है. क्या कम्प्यूटिंग का मॉडल वाकई बदलने वाला है? तीन दशक तक हमारा रिश्ता कंप्यूटर से एक ही तरह का रहा. हम क्लिक करते हैं, टाइप करते हैं, और सिस्टम उसका जवाब देता है. Open AI उस व्यवस्था को उलटने की कोशिश कर रहा है. जहां इंसान सिर्फ बताता है कि उसे क्या चाहिए, और सिस्टम खुद सबकुछ संभालता है. यह बदलाव जितना तकनीकी है, उतना ही प्रैक्टिकल भी, क्योंकि डिजिटल दुनिया में समय, ध्यान और नेविगेशन से जुड़ी थकान एक प्रॉब्लम बन चुकी है.  ATLAS और SKY मिल करेंगे धमाल  ATLAS ब्राउजर लॉन्च हो ही चुका है और अब SKY की टीम यानी 12 पूर्व ऐपल इंप्लॉइज भी अब OpenAI के पास है. ओपनएआई ने SKY को इसलिए एक्वायर किया है ताकि ChatGPT जैसे टूल्स सिर्फ चैटबॉट न रहें, बल्कि आपका कंप्यूटर एजेंट की तरह सारे काम खुद कर सके. ओपनएआई का मकसद है, AI को आपके OS, ऐप्स, ब्राउज़र और फाइल्स के अंदर गहराई से इंटीग्रेट करना ताकि आप कोई भी टास्क कहें और AI उसे अंजाम दे दे. Sky टीम, जो ऑटोमेशन में एक्सपर्ट है, अब OpenAI के साथ मिलकर अगले जनरेशन का कंप्यूटिंग मॉडल तैयार कर रही है.  रेस में OpenAI के पीछे क्यों दिख रहा Google? AI रेस में कुछ समय तक के लिए गूगल पिछड़ जरूर गया था, लेकिन अब तेजी से कैचअप कर रहा है. हालांकि अब भी देखें तो ऐसा लगता है कि गूगल लगतार दूसरी AI कंपनियां को टक्कर दे रही हैं जिनमे से एक बड़ा नाम Perplexity का भी है. हाल ही में Perplexity ने Comet एजेंटिक ब्राउजर लॉन्च किया था और तुरंत बाद गूगल ने भी क्रोम ब्राउजर में ऐसिस्टेंट दे दिया. अब मार्केट में OpenAI का ATLAS आ गया है और इसका पूरा नुकसान Google Chrome को होगा. क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट ने भी एजेंटिक AI ब्राउजर लॉन्च किया है जो सीधी टक्कर गूगल को ही देगा.  Open AI में माइक्रोसॉफ्ट ने भी काफी निवेश किया है, इसलिए गूगल के लिए ये पूरा डेवेलपमेंट परेशानी का सबब बन सकता है. इसलिए अगर आपका ऐसा लगता है कि गूगल की मोनोपली कोई तोड़ नहीं सकता तो गलत हैं. गूगल की मोनॉपली ऑलरेडी कई टेक कंपनियां तोड़ रही हैं.  दो साल पहले तक कोई ये नहीं सोच रहा था कि गूगल सर्च को कोई टक्कर दे ही नहीं सकता. लेकिन अब सबकुछ बदल चुका है और गूगल सर्च का ट्रैफिक हर दिन गिर रहा है. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि एजेंटिक AI की रेस में गूगल दूसरों से आगे निकलने के लिए क्या बड़ा करता है. 

बल्लेबाजों का बोलबाला: रणजी ट्रॉफी में लगातार टूट रहे रिकॉर्ड्स

नई दिल्ली भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी में पिछले कुछ सीजन से खूब रन बरस रहे हैं. 2025-26 का सीजन भी इसी सिलसिले को आगे बढ़ा रहा है.  मेघालय के बल्लेबाज आकाश कुमार चौधरी ने तो अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ मैदान पर तूफान मचा दिया. आकाश कुमार चौधरी ने अरुणाचल प्रदेश के गेंदबाजों की जमकर खबर ली और लगातार 8 छक्के जड़े. इस दौरान उन्होंने एक ओवर में छह छक्के भी लगाए. आकाश ने सिर्फ 11 गेंदों पर अर्धशतक जड़कर दर्शकों को टी20 जैसा रोमांच दे दिया. आकाश इसी के साथ फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक जड़ने वाले बल्लेबाज बन गए थे. आकाश कुमार चौधरी की यह उपलब्धि न सिर्फ व्यक्तिगत रूप से बड़ी है, बल्कि इसने पूर्वोत्तर राज्यों की टीम्स की क्षमता को भी उजागर किया है, जो अब घरेलू क्रिकेट में तेजी से अपनी पहचान बना रही हैं. आकाश ने 11 गेंदों पर अर्धशतक जड़कर इतिहास रचा ही, देखा जाए तो पिछले कुछ सीजन में भी इसी तरह के कुछ ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स बने. ये रिकॉर्ड्स भी टूटने मुश्किल 2021-22 सीजन में झारखंड की टीम ने नागालैंड के खिलाफ ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था. उस मैच में झारखंड ने 1008 रनों की बढ़त हासिल की थी. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पहली बार किसी टीम ने 1000 से ज्यादा रनों की लीड ली. झारखंड ने मुंबई का रिकॉर्ड तोड़ दिया था, जिसने 1948-49 में महाराष्ट्र के खिलाफ 958 रनों की लीड बनाई थी. इस अविश्वसनीय प्रदर्शन ने दिखाया कि घरेलू स्तर पर भी टीमों में किस हद तक दमखम बढ़ा है. 2021-22 सीजन में एक और रिकॉर्ड बना, जब मुंबई ने उत्तराखंड को 725 रनों से हराकर इतिहास रच दिया. ये फर्स्ट क्लास क्रिकेट में रनों के लिहाज से किसी टीम की सबसे बड़ी जीत रही. मुंबई ने न्यू साउथ वेल्स के रिकॉर्ड को तोड़ दिया. न्यू साउथ वेल्स ने 1929-30 में शेफील्ड शील्ड मैच में क्वींसलैंड के खिलाफ 685 रनों से जीत हासिल की थी. 2023-24 सीजन में हैदराबाद के सलामी बल्लेबाज तन्मय अग्रवाल ने इतिहास रच दिया था. तन्मय अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ सिर्फ 147 गेंदों पर तिहरा शतक जड़ दिया था. यह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में किसी बल्लेबाज की सबसे तेज ट्रिपल सेंचुरी रही. तन्मय अग्रवाल ने साउथ अफ्रीकी क्रिकेटर मार्को मरैस का रिकॉर्ड तोड़ दिया था, जिन्होंने साल 2017 में ईस्टर्न प्रोविंस के खिलाफ 191 गेंदों पर तिहरा शतक जड़ा. तन्मय 181 गेंदों पर 366 रन बनाए थे, जिसमें 34 चौके और 26 छक्के शामिल रहे. किसी फर्स्ट क्लास इनिंग्स में एक बल्लेबाज की ओर से लगाए गए ये सबसे ज्यादा छक्के रहे. 2024-25 सीजन में गोवा के स्नेहल कौथंकर और कश्यप बाकले ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था. स्नेह-कश्यप ने अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ मैच के दौरान गोवा की पहली पारी में तीसरे विकेट के लिए 606 रनों की नाबाद साझेदारी की. यह रणजी ट्रॉफी के इतिहास में सबसे बड़ी साझेदारी रही. दोनों ने साल 2016-17 सीजन में महाराष्ट्र के स्वप्निल सुगले और अंकित बावने के बीच हुई 594 रनों* की साझेदारी को पीछे छोड़ दिया था. स्वप्निल-अंकित ने दिल्ली के खिलाफ ये रिकॉर्ड बनाया था.

अमेरिका को निर्यात में गिरावट, लेकिन भारत का कुल एक्सपोर्ट 6.75% बढ़ा — नए बाजारों में बढ़ी पकड़

 नई दिल्ली  अमेरिका (America) ने भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50 फीसदी का टैरिफ (Tariff) लगाया है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की 'दबाव नीति' के तहत भारत पर एकतरफा 50 फीसदी टैरिफ थोपा गया. लेकिन अब अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने ही इसकी हवा निकाल दी है.  दरअसल, अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) की रिपोर्ट को मानें, तो अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50% तक के टैरिफ लगाने के बावजूद भारत अपने एक्सपोर्ट को बढ़ाने में सफल रहा है. सितंबर महीने में भारत का कुल निर्यात 6.75% बढ़ा, जबकि अमेरिका को भेजे गए सामान में 11.9% की गिरावट दर्ज की आई. यह दर्शाता है कि भारत ने अमेरिका-केंद्रित व्यापार निर्भरता को कम कर दूसरे बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ा ली है. यानी भारत अब केवल अमेरिका के भरोसे नहीं रहने वाला है. दुनिया में भारत का डंका वैश्विक ट्रेड तनाव और महंगाई जैसी चुनौतियों के बीच भी Moody’s Ratings ने भारत की अर्थव्यवस्था के प्रति अपना पॉजीटिव रुख दिखाया है. अपनी 'Global Macro Outlook 2026-27' रिपोर्ट में एजेंसी ने यह अनुमान लगाया है कि भारतीय इकोनॉमी अगले दो वर्षों तक सालाना लगभग 6.5% की विकास दर के साथ बढ़ती रहेगी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत इस अवधि में G-20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रहने की संभावना रखता है.  भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती के पीछे मुख्यतौर पर तीन कारण हैं:  (i) लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश.  (ii) घरेलू उपभोक्ता मांग का मजबूत होना. (iii) एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम.  भारतीय इकोनॉमी में मजबूती के पीछे महंगाई पर काबू और ब्याज दरों में कटौती की अहम भूमिका रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि Reserve Bank of India ने अक्टूबर में रेपो दर स्थिर रखी, जो यह संकेत देता है कि महंगाई नियंत्रित है और अब विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है. इस बीच विदेशी निवेशकों के नजरिये में भी भारत को लेकर सकारात्मक रुख रहा है.  बता दें, जहां मूडीज ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर 6.5 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है, वहीं  वैश्विक जीडीपी में 2026-27 के दौरान सिर्फ 2.5-2.6% तक रहने का अनुमान है. जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाएं करीब 4% की दर तक बढ़ सकती हैं. हालांकि मूडीज की रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि प्राइवेट सेक्टर की निवेश गतिविधि अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुई है. लेकिन घरेलू डिमांड मजबूत है. मूडीज (Moody’s) एक अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है, इसकी रिपोर्ट पर निवेशक भरोसा करते हैं. इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है और यह 1909 में जॉन मूडी द्वारा स्थापित की गई थी.  घरेलू डिमांड, विदेशी निवेश मजबूत मूडीज की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मज़बूत विदेशी पूंजी प्रवाह और पॉजिटिव इन्वेस्टर सेंटीमेंट ने भारत को बाहरी झटकों से निपटने के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है, जिससे लिक्विडिटी बनाए रखने में बड़ी मदद मिली है. हालांकि घरेलू डिमांड अभी भी ग्रोथ का मुख्य इंजन बनी हुई है. मूडीज़ ने कहा है कि निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय अभी भी धीमा है और बड़े पैमाने पर व्यावसायिक निवेश अभी पूरी तरह से नहीं उबर पाया है.   

मध्यप्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी पहुंचेगा जल्द, नई हेलीकॉप्टर सेवा से समय कम हुआ

 पचमढ़ी   मध्यप्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी के सैर करने वाले सैलानियों के लिए अच्छी खबर है। अब पचमढ़ी को हवाई सेवा से जोड़ा जा रहा है। सैलानियों को यह नई सौगात 20 नवबर से मिलने लगेगी। इसकी तैयारी लगभग पूरी हो गई है। बस 35 मिनट में पहुंच जाएंगे पचमढ़ी भोपाल से पचमढ़ी के पहुंचने के लिए अभी सड़क मार्ग है। इसमें सैलानियों को 6 से 7 घंटे का समय लगता है। हवाई सेवा शुरू होने से 6 घंटे का सफर महज 35 मिनट में पूरा हो जाएगा। कानूनी दांव पेंच में उलझी पचमढ़ी की हवाई पट्टी पर हेलीकाप्टर उतारने के लिए वीआईपी हेलीपैड को अपडेट कर दिया गया है। हेलिपैड के पास लगाए गए बेरिकेड्स लोक निर्माण विभाग ने हेलीपेड का रंग रोगन कर सुरक्षा के लिए चारों तरफ बेरिकेड्स लगा दिए गए हैं। अभी तक इस हेलीपैड का राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित देशभर से आने वाले अति विशिष्ट अतिथियों को लेकर आने वाले हेलीकॉप्टर लिए इस्तेमाल किया जाता है। अब इस पर सैलानियों को लाने वाले हेलीकॉप्टर को भी उतरा जाएगा। पर्यटन बोर्ड (mp tourism) की हेलीकॉप्टर सेवा शुरु करने के लिए विभागीय तैयारी हो गई है। यहां से वे सतपुडा टाइगर रिजर्व के (एसटीआर) के मढ़ई, नीमधान, चूरना तक सड़क यात्रा कर जा सकते हैं। कार से 4 और बस से 6 घंटे में होता है सफर पूरा भोपाल से पचमढ़ी की दूरी लगभग 211 किलोमीटर है। सड़क से पचमढ़ी आने के लिए सैलानियों को कार, टैक्सी से और यात्री बस से 6 घंटे का सफर करना पड़ता है। हेलीकॉप्टर सुविधा शुरु होने के बाद टूरिस्ट 35 मिनट में पचमढ़ी पहुंच जाएंगे। हेलीकॉप्टर सेवा का किराया निर्धारण होना बाकी भोपाल से पचमढ़ी तक हेलीकॉप्टर में सैलानियों को कितना किराया देना पड़ेगा। इसका निर्धारण होना बाकी है। इसके लिए एमपीटी व्यवस्थाएं कर रहा है। प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों की तरह पचमढ़ी आवागमन करने वाले सैलानियों से निर्धारित किराया लिया जाएगा। पर्यटन में होगा इजाफा भोपाल से पचमढ़ी के हेलीकॉप्टर सेवा शुरु की जा रही है। इसमें सैलानियों से कितना किराया लगेगा। इसका निर्धारण होना बाकी है। इस सुविधा से पचमढ़ी और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के पर्यटन में इजाफा होगा। – एके श्रीवास्तव, संयुक्त संचालक पर्यटन बोर्ड भोपाल

एमपी में कर्मचारियों का पेंशन विकल्प पर उदासीन रवैया, संगठन स्तर पर कोई पहल नहीं

भोपाल  भारत सरकार द्वारा लागू एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लेकर मध्य प्रदेश के कर्मचारियों में कोई रुचि नहीं है। किसी भी संगठन ने इसे लेकर पहल नहीं की है। अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों में भी कुछ ने ही इस विकल्प को चुना है। उधर, राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। अब कर्मचारी सरकारी प्रतिभूति में सौ प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं। इस योजना में चार लाख 60 हजार अधिकारी-कर्मचारी हैं। पुरानी पेंशन बहाली की मांग के बीच सरकार ने कर्मचारियों को साधने के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना के साथ-साथ एकीकृत पेंशन योजना का विकल्प कर्मचारियों को दिया है। भारत सरकार की इस योजना को लेकर अधिकारी-कर्मचारी उत्साहित नहीं हैं। प्रदेश में इसे लागू करने के लिए उच्च स्तरीय समिति तो गठित की गई पर इसकी बैठक ही नहीं हुई। दरअसल, अभी योजना को लेकर स्पष्टता नहीं है, जिसके कारण सरकार भी जल्दबाजी में नहीं है। लगातार किए जा रहे हैं संशोधन उधर, राष्ट्रीय पेंशन योजना में लगातार संशोधन किए जा रहे हैं। अब यह प्रविधान किया गया है कि जो कर्मचारी जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं वे सरकारी प्रतिभूति में सौ प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं। वहीं, म्यूचुअल फंड सहित अन्य व्यवस्थाओं में निवेश के लिए अधिकतम सीमा को 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। योजना में कर्मचारी को यह अधिकार दिया गया है वो निवेश के लिए फंड मैनेजर का चयन कर सकते हैं। एक वर्ष में फंड चयन की सुविधा एक बार और निवेश पद्धति में परिवर्तन के लिए दो बार ही रहेगी। क्यों नहीं जुड़ रहे हैं लोग? हालांकि, यूपीएस में लंबी सर्विस ड्यूरेशन, मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन, टाइम से पहले रिटायरमेंट की सिचुएशन में लिमिटेड बेनिफिट्स, और फैमिली पेंशन के लिए लिमिटेड डेफिनिशन को लेकर डिससैटिस्फैक्शन की वजह से, 27 लाख सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज में से सिर्फ करीब 1% ने ही यूपीएस को चुना. सर्विस के दौरान डेथ होने पर मिलने वाले बेनिफिट्स की क्लैरिटी न होने, टैक्सेशन और यूपीएस अपनाने से पहले कॉस्ट वर्सेज बेनिफिट की चिंता से लोग इसे चुनने से बच रहे हैं. क्योंकि एक बार सलेक्ट करने पर इससे बाहर नहीं जाया सकता है. हालांकि, इसके लिए अभी हाल में ही सरकार ने वनटाइम वन वे स्विच का ऑप्शन दिया है, लेकिन उसकी अपनी सीमाएं हैं. UPS के लिए गवर्नमेंट के उठाए कदम जुलाई में, सेंटर ने मार्केट-लिंक्ड एनपीएस के तहत मिलने वाले इनकम टैक्स बेनिफिट्स को यूपीएस तक एक्सटेंड किया, जिसमें रिटायरमेंट पर 60% फंड की टैक्स-फ्री विड्रॉल शामिल है. इसने गवर्नमेंट एम्प्लॉई की डेथ, डिसएबिलिटी या डिसमिसल की सिचुएशन में ओपीएस के बेनिफिट्स को भी इंप्रूव किया. सेंटर ने यूपीएस के तहत एम्प्लॉइज को रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और डेथ ग्रेच्युटी का बेनिफिट भी दिया. इसने एनपीएस से यूपीएस में स्विच करने की डेडलाइन को 30 जून से बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया. पिछले हफ्ते, इसने यूपीएस से एनपीएस में वन-टाइम वन-वे स्विच फैसिलिटी स्टार्ट की. यूपीएस चुनने वाले कर्मचारी इसे रिटायरमेंट से एक साल पहले तक या वॉलंटरी रिटायरमेंट के केस में रिटायरमेंट डेट से तीन महीने पहले तक यूज कर सकते हैं. यूपीएस में फिस्कल इंप्लीकेशन यूपीएस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह गवर्नमेंट फाइनेंस पर गैरजरूरी कॉस्ट का असर न डाले. गारंटी एलिमेंट की वजह से एक्स्ट्रा एक्सपेंडिचर का अनुमान फाइनेंशियल ईयर 26 में सिर्फ 8,500 करोड़ रुपये था, जो टाइम के साथ ग्रैजुअली बढ़ेगा, क्योंकि सैलरी स्केल रिवाइज होते हैं और न्यू पीपल सर्विस में जॉइन करते हैं. हालांकि, कर्मचारियों के नंबर में न्यू एडिशन्स पर जनरल कंट्रोल से एक्सपेंसेस पर कंट्रोल रहने की उम्मीद है. चूंकि, 2036 के बाद लोग यूपीएस के तहत रिटायर होंगे और उनमें से कुछ के साथ-साथ फैमिली पेंशनर्स की भी डेथ हो सकती है. ऐसी स्थिति में उनकी पेंशन कैपिटल अमाउंट कर्मचारी के सक्सेसर्स को रिटर्न नहीं की जाएगी. इससे फ्यूचर में बजट पर ज्यादा डिपेंड हुए बिना पेंशन के लिए गवर्नमेंट के रिसोर्सेज को इंप्रूव करने में हेल्प मिलेगी. हर पे कमीशन के डिसीजन के बाद बेसिक पेंशन को रीसेट नहीं किया जाएगा, जैसा कि ओपीएस में होता था.