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‘आपकी सरकार–आपके द्वार’ की शुरुआत आज , मुख्यमंत्री हेमंत करेंगे कार्यक्रम का शुभारंभ

रांची आज से झारखंड में 'आपकी सरकार-आपके द्वार' कार्यक्रम की शुरुआत हो रही है जो कि 15 दिसंबर तक चलेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पलामू से ‘आपकी सरकार-आपके द्वार’ कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। इसके चलते रांची जिले के सभी 305 पंचायतों और नगर निगम क्षेत्र के 53 वार्डों में कल से शिविर लगने शुरू हो जाएंगे। यहां आम जनता की समस्याओं को सुना और निपटाया जाएगा। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर प्रत्येक पंचायत स्तर पर शिविरों का आयोजन योजनाबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसमें सरकारी योजनाओं से संबंधित आवेदन लिए जाएंगे और पात्र लाभुकों को सीधे लाभ पहुंचाने की कोशिश होगी। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, मंजूनाथ भजंत्री संबंधित सभी पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अधिक से अधिक लोगों को इस कार्यक्रम से जोड़ें और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। उपायुक्त ने कहा कि पंचायत और गांव स्तर पर शिकायतों के त्वरित निष्पादन और योजनाओं से नए लाभुकों को जोड़ना प्रशासन की प्राथमिकता है। उपायुक्त ने रांची जिले के सभी लोगों से अपील की है कि वे अपने नजदीकी शिविरों में पहुंचे और आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, बैंक पासबुक या अन्य पहचान पत्र आदि साथ लेकर आएं, ताकि उन्हें योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। साथ ही नोडल अधिकारियों को प्रतिदिन अपने-अपने केंद्रों पर उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। आज इन पंचायतों और वार्डों में होगा शिविर चतरा पंचायत-अनगड़ा, खुखरा पंचायत -बेड़ो, कांची पंचायत-बुण्डू, छापर पंचायत-बुढ़मू, पंडरी पंचायत-चान्हो, गड़गांव पंचायत-ईटकी, उरुगुटू एवं उपरकोनकी-कांके, हुल्सु पंचायत-लापुंग, बंझीला पंचायत-मांडर, नारो पंचायत-नगड़ी, हरदाग पंचायत-नामकुम, जयडीहा पंचायत-ओरमांझी, राहे पंचायत-राहे, तारुप पंचायत-रातू, हलमाद पंचायत-सिल्ली, बारेन्दा पंचायत-सोनाहातू, अमलेशा पंचायत-तमाड़, वार्ड-1 (सीएमपीडीआई स्कूल के सामने), वार्ड-2 (एदलहातू जोगो पहाड़)

अब हरियाणा में TB की जांच होगी और आसान, सरकार ने की 6 करोड़ की अत्याधुनिक मशीनों की खरीद

चंडीगढ़ गांवों और दूरदराज क्षेत्रों में स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में टीबी टेस्ट के परिणाम के लिए अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हरियाणा सरकार ने पहली बार छह करोड़ रुपये की लागत से 40 टू नेट मशीनों की खरीद को मंजूरी दे दी है। पहले केंद्र सरकार की ओर से यह मशीनें उपलब्ध करवाई जाती थी। इन मशीनों को सीएचसी और पीएचसी में उपलब्ध करवाया जाएगा। ये मशीनें टीबी के संदिग्ध मरीजों की गुणवत्तापूर्ण और त्वरित जांच करने में अहम म भूमिका निभाती हैं। मात्र एक से डेढ़ घंटे में पता चल सकेगा कि मरीज को टीबी है या नहीं। स्टेट टीबी अधिकारी राजेश राजू ने बताया कि टीबी के गंभीर रोगियों का पता लगाने में टू नेट मशीन बेहद उपयोगी हैं। इसके जरिए कम समय में जांच के बेहद विश्वसनीय नतीजे प्राप्त किए जा सकते हैं। इस मशीन से टीबी के गंभीर मामलों का पता लगाना बेहद आसान होता है। इसका मकसद हरियाणा के ग्रामीण और दूरदराज 2018 के क्षेत्रों तक जांच सुविधा का विस्तार करना है। मशीनों के आने से जो इलाके हमारी जद से बच रहे थे अब उन पर फोकस किया जा सकेगा। समय पर रोग की पहचान होने से टीबी के संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी। टू नेट मशीन में एमडीआर रोगियों यानी मल्टीपल ड्रग रेजिस्टेंस मरीजों की भी जांच हो सकेगी जनवरी से अक्तूबर तक हरियाणा में 79,000 नए मरीजों की पहचान की गई है। इस समयावधि में करीब नौ लाख टेस्ट किए गए हैं। इस दौरान 78,000 से अधिक मरीजों को सफलतापूर्वक टीबी मुक्त किया भी जा चुका है। टीबी अधिकारी का कहना है कि ज्यादा टेस्ट होने पर मरीजों की संख्या भी बढ़ना तय है। उन्होंने बताया कि ज्यादा टेस्ट करने का मकसद टीबी के प्रसार को रोकना है। एक अनुमान के मुताबिक एक टीबी मरीज साल में दस से 15 लोगों को संक्रमित करता है। ऐसे में यदि समव पर उसकी जांच कर इलाज शुरू कर दिया जाए तो टीबी को रोका जा सकता है। इसलिए हरियाणा में ज्यादा टेस्ट किए जा रहे हैं।

प्रदूषण का प्रहार: दिल्ली-एनसीआर का AQI खतरे के स्तर से ऊपर, स्मॉग ने बढ़ाई मुश्किलें

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। आज सुबह कई इलाकों में घना जहरीला स्मॉग छाया रहा। राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत दिल्ली एनसीआर के कई इलाकों में आज सुबह एक्यूआई 400 से ऊपर दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, आज सुबह राजधानी दिल्ली के आनंद विहार में एक्यूआई 416, अशोक विहार में 443, आया नगर में 332, बवाना में 437, बुराड़ी में 418, डीटीयू में 432, द्वारका में 414, आईटीओ में 399, जहांगीरपुरी में 451 दर्ज किया गया है। गाजियाबाद में भी 400 पार पहुंची एक्यूआई गाजियाबाद में भी एक्यूआई 400 के पार पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, लोनी में 448 एक्यूआई दर्ज किया गया है। संजय नगर में 420, वसुंधरा 424 और इंदिरापुर में एक्यूआई 373 दर्ज किया। नोएडा का एक्यूआई भी 400 से ज्यादा नोएडा में भी कई इलाकों में 400 से ज्यादा एक्यूआई पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, सेक्टर 125 में 431, सेक्टर 1 इलाके में 421, सेक्टर 116 में 436 और सेक्टर 62 इलाके में  342 एक्यूआई दर्ज किया गया है। गुरुग्राम में इतना दर्ज किया गया एक्यूआई केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, गुरुग्राम के एनआईएसई ग्वाल पहाड़ी में 365 एक्यूआई दर्ज किया गया है। सेक्टर 51 इलाके में 337, टेरी ग्राम में 238, विकास सदन में 266 एक्यूआई दर्ज किया गया है। फरीदाबाद का एक्यूआई केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, फरीदाबाद के सेक्टर 30 में एक्यूआई 213, न्यू इंडस्ट्रियल टाउन में 297, सेक्टर 16ए में 213, और सेक्टर 11 में 264 दर्ज किया गया।  

मौत के बाद स्पर्म निकासी का चलन बढ़ा, इजराइल में PSR केवल मेडिकल प्रक्रिया नहीं—एक भावनात्मक कहानी

तेल अवीव इजराइल पिछले कुछ महीनों से जंग लड़ रहा है. जंग के मैदान में उसके सामने हमास और ईरान हैं. अब तक हजारों इजराइली सैनिक शहीद हो गए हैं. युद्ध में कई मौते हो चुकी हैं. युद्ध के बीच इजराइल में हाल के महीनों में एक अनोखा और भावनात्मक ट्रेंड बढ़ा है. युद्ध में मारे गए सैनिकों की पत्नियां और पार्टनर उनका स्पर्म सुरक्षित रख रही हैं, ताकि भविष्य में उनके बच्चे इस दुनिया में आ सकें. यह तकनीक खासकर उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनी है, जिन्होंने अपने साथी को युद्ध में खो दिया है. ये चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि दिसंबर 2023 में गाजा में मारे गए इजराइली सेना के कैप्टन नेतनएल सिल्लगी की मौत के बाद उनकी पार्टनर लेवी 18 महीने बाद मां बनी हैं. ये इसलिए संभव हो सका, क्योंकि उन्होंने अपने शहीद पति नेतनएल सिल्लगी की मौत के बाद उनका स्पर्म फ्रीज करवाया था. फिर कोर्ट की मंजूरी के बाद 2025 में IVF प्रक्रिया से लेवी ने एक बेटे को जन्म दिया. यह बच्चा अपने पिता की मौत के लगभग 18 महीने बाद पैदा हुआ. आखिर यह किस तकनीक संभव हो सका, आइए जानते हैं…. आखिर क्या है पोस्टमार्टम स्पर्म रिट्रीवल (PSR)? आखिर क्या है पोस्टमार्टम स्पर्म रिट्रीवल (PSR)? डेड बॉडी से स्पर्म निकालने की तकनीक को पोस्टमॉर्टम स्पर्म रिट्रीवल (PSR) कहते हैं. इसमें यह होता है कि डॉक्टर मृतक के टेस्टिकल्स से सुई के जरिए लिविंग स्पर्म निकालते हैं, जिसमें स्पर्म हो. जिंदा स्पर्म को फ्रीज किया जाता है, बाद में IVF (टेस्ट ट्यूब बेबी) के जरिए महिला गर्भधारण करती है. पोस्टमॉर्टम स्पर्म रिट्रीवल प्रोसेस के दौरान डॉक्टर मृत व्यक्ति के शरीर से एक निश्चित समय 48–72 घंटे के भीतर सर्जरी के माध्यम से स्पर्म निकालते हैं. फिर स्पर्म को तरल नाइट्रोजन में फ्रीज कर दिया जाता है. इसके बाद IVF यानी टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया से महिला को प्रेग्नेंट कराया जाता है. यह तकनीक दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में ही कानूनी है. 250 से ज्यादा मृत सैनिकों के स्पर्म कलेक्ट किए जा चुके इजराइल के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 2023 से 2025 के बीच अब तक 250 से ज्यादा मृत सैनिकों के स्पर्म कलेक्ट किए जा चुके हैं. पीएसआर के लिए आए आवेदन में 97 फीसदी रिकवरी सफल भी हुई है. कई परिवार इससे बच्चे पैदा करने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं. कुछ मामलों में कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है, खासकर जब कपल शादीशुदा न हो. परिवार ऐसा क्यों कर रहे हैं? युद्ध में लगातार हो रही मौतों के बीच कई परिवार चाहते हैं कि उनका वंश आगे बढ़े'. बच्चे के रूप में मृत सैनिक की याद जिंदा रहे. महिला को अपने साथी की एक झलक फिर देखने को मिले. इसलिए यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा है. इजराइल में इसे 'लिगेसी बर्थ' कहा जाने लगा है, जहां बच्चा अपने पिता के जाने के बाद पैदा होता है. 

भैरव घाट पर 450 मीटर वायाडक्ट और टनल बन रही, इंदौर–खंडवा रोड पर सफर होगा सुरक्षित और आसान

इंदौर मध्य प्रदेश में सड़क परिवहन विभाग विकास के नए-नए आयाम लिख रहा है. निमाड़-मालवा वालों के लिए खुशखबर यह है कि इंदौर-खंडवा रोड का काम पूरा होने जा रहा है. इंदौर इच्छापुर हाईवे का फोर लेन निर्माण कार्य किया जा रहा है. यह निर्माण कार्य 2026 में पूरा हो जाएगा. भैरव घाट में वर्तमान सड़क से अलग टनल और ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है जिससे घुमावदार मोड़ वाले घाट और एक्सीडेंट झोन खत्म हो जाएंगे. नर्मदा नदी पर वायाडक्ट का निर्माण सड़क निर्माण कंपनी मेघा इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट हेड नागेश्वर राव के अनुसार, ''वर्तमान में सड़क निर्माण का कार्य लगातार तेजी से किया जा रहा है. भैरव घाट पर हादसों को देखते हुए सड़क डिजाइन में कई विशेष बातों का ध्यान रखा गया है. जिसमें मुख्य तौर पर यहां नर्मदा नदी पर बने पुल से ऊंचा वायाडक्ट पुल के रूप में तैयार किया गया है. साथ ही भैरव घाट और चोरल घाट में तीन अलग-अलग टनल का निर्माण किया जा रहा है.'' अप्रैल 2026 तक पूरा हो जाएगा कार्य इस वायाडक्ट और टनल के चलते हादसों की संभावना लगभग ना के बराबर होगी. इसे हादसों को ध्यान में रखते हुए ही डिजाइन किया गया है. यह प्रोजेक्ट भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत चल रहा है. सड़क निर्माण से आने वाले समय में लोगों को काफी सुविधा होगी. भैरव घाट में निर्माण कार्य लगभग अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा. वहीं, इसे जून महीने तक यात्रियों के लिए शुरू कर दिया जाएगा. जिन टनल का निर्माण किया जा रहा है उनमें पहली टनल 300 मीटर लंबी, दूसरी टनल 480 में और तीसरी 550 मीटर लंबी है. 450 लंबा वायाडक्ट हो रहा तैयार भैरव घाट में वर्तमान में सड़क पर वाहनों को चढ़ाई करने के दौरान उल्टी तरफ चढ़ना पड़ता है. ऐसे में कई बार हादसों की स्थिति बनी रहती है. वर्तमान में तैयार किया जा रहा वायाडक्ट करीब 450 मी का है. जिसमें अलग-अलग चीजों का ध्यान रखा गया है. यह सड़क इंदौर इच्छापुर हैदराबाद हाईवे के नाम से पहचानी जाती है. करीब 300 किलोमीटर के इस हाइवे पर कंपनी द्वारा पहले हिस्से में काम किया जा रहा है, यह सड़क करीब 80% पूरी हो चुकी है. अप्रैल 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. भैरव घाट पर सड़क हादसों में कई लोगों की मौत इंदौर-खंडवा रोड पर स्थित भैरव घाट को आमतौर पर मौत की सड़क के नाम पर जाना जाता है. आए दिन होने वाले हादसों में यहां कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं. बीते दिनों हुए हादसों में करीब एक दर्जन से अधिक लोग अपनी जान गवां चुके हैं. आने वाले दिनों में इन हादसों पर अब रोकथाम लगने वाली है. सड़क निर्माण कंपनी मेघा इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट हेड नागेश्वर राव के अनुसार वर्तमान में सड़क निर्माण का कार्य लगातार तेजी से किया जा रहा है.

सिंगापुर के साथ MANIT भोपाल कर रहा अभिनव शोध, भविष्य की EV और सोलर टेक्नोलॉजी में आएगा बदलाव

भोपाल  मैनिट भोपाल अब दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी में शामिल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर (NUS) के साथ मिलकर ऐसा हाई-टेक शोध करने जा रहा है, जिसकी बदौलत भारत में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग सिस्टम और सोलर ग्रिड मैनेजमेंट पूरी तरह बदल सकता है। शिक्षा मंत्रालय की SPARC योजना के तहत मैनिट को इसके लिए 1 करोड़ रुपये का मेगा अनुदान मिला है। क्या खास होने वाला है?  भारत में पहली बार EV चार्जिंग का “डिजिटल ट्विन” बनेगा इस परियोजना में EV चार्जिंग सिस्टम का डिजिटल ट्विन मॉडल तैयार किया जाएगा। यानी-चार्जिंग स्टेशन का वर्चुअल क्लोन, जो रियल टाइम में बतायेगा कि लोड कितना है? कितनी गाड़ियां चार्ज हो सकती हैं? कहां ओवरलोडिंग का खतरा है? चार्जिंग को कैसे तेज और सस्ती बनाई जाए? यह टेक्नोलॉजी विदेशों में तो है, भारत में अभी शुरुआत भी नहीं हुई। दो साल की अवधि वाली परियोजना स्वीकृत परियोजना का शीर्षक है इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग के लिए ग्रिड-इंटीग्रेटेड सोलर पीवी सिस्टम के उन्नत प्रबंधन हेतु डेटा फ्यूज़न के साथ डिजिटल ट्विन इंटीग्रेशन। दो साल की अवधि वाली यह परियोजना डिजिटल ट्विन तकनीक, उन्नत डेटा फ्यूजन, स्मार्ट सोलर पीवी सिस्टम और बुद्धिमान ईवी चार्जिंग प्रबंधन जैसे आधुनिक शोध क्षेत्रों पर काम करेगी। मैनिट की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मिलेगा नया आयाम यह अनुदान न सिर्फ मैनिट की वैश्विक शोध प्रतिष्ठा को मजबूत करेगा, बल्कि संस्थान में अंतर्विषयक सहयोग और उन्नत तकनीकों पर शोध को नई दिशा देगा। परियोजना से मिलने वाले परिणाम भविष्य के स्वच्छ, स्मार्ट और सतत ऊर्जा समाधानों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। इस परियोजना से क्या बदल जाएगा? – भारत में EV चार्जिंग होगी तेज, सस्ती और स्मार्ट – सोलर ग्रिड होगा भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए तैयार – शहरी यातायात और ऊर्जा प्रबंधन होगा डिजिटल और स्वचालित – मैनिट की ग्लोबल पहचान नई ऊंचाई पर जाएगी  

देश की पहली क्वालिटी सर्टिफाइड लैब पंडरी IPHL, बलौदाबाजार बनी दूसरी—छत्तीसगढ़ का गौरव

रायपुर  छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जिला अस्पताल पंडरी रायपुर और जिला अस्पताल बलौदाबाजार की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को भारत सरकार के नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस कार्यक्रम (NQAS) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। इनमें पंडरी रायपुर की IPHL देश की प्रथम, जबकि बलौदाबाजार की IPHL देश एवं राज्य की द्वितीय प्रमाणित लैब बनी है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और वैज्ञानिक मानकों पर आधारित लैब सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को प्रमाणित करती है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयासों का यह सीधा परिणाम है कि जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के बीच राज्य की कुल 832 स्वास्थ्य संस्थाओं का राष्ट्रीय मानकों के आधार पर मूल्यांकन और प्रमाणीकरण किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा के दूरस्थ क्षेत्र चिंतागुफा जैसे दुर्गम इलाकों के स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि देश में पहली बार किसी राज्य में लैब्स की इतनी बड़ी और व्यवस्थित श्रृंखला का मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण हुआ है, जिसने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट स्थान दिलाया है। दोनो लैब्स का मूल्यांकन भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा नामित विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ताओं की टीमों ने किया। पंडरी रायपुर की IPHL का मूल्यांकन 10 सितंबर 2025, जबकि बलौदाबाजार की IPHL का मूल्यांकन 11 सितंबर 2025 को किया गया। दोनों टीमों ने लैब की कार्यप्रणाली, मरीज केंद्रित सेवाएँ, गुणवत्ता नियंत्रण, समयबद्ध रिपोर्टिंग और सुरक्षा प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा की। मूल्यांकन उपरांत, पंडरी रायपुर IPHL को 90% और बलौदाबाजार IPHL को 88% स्कोर के साथ प्रमाणन प्राप्त हुआ। यह स्कोर स्वास्थ्य गुणवत्ता के राष्ट्रीय मानकों में उत्कृष्ट श्रेणी में आता है। इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब की अवधारणा का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को एक ही छत के नीचे पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित सभी प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध हों। इससे न केवल जांच की गति और विश्वसनीयता बढ़ती है, बल्कि लोगों को महंगी निजी जांच लैब्स पर अनावश्यक निर्भरता से भी राहत मिलती है। एकीकृत मॉडल होने के कारण, मरीजों को एक ही स्थान पर किफायती और सटीक जांच रिपोर्ट उपलब्ध हो पाती है।

पंचक नवंबर में लौट रहा है, इस बार देगा शुभ फल, कारण जानकर रह जाएंगे हैरान

जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है, तो पंचक लगते हैं. पंचक के 5 दिनों को शुभ-मांगलिक कामों के लिए अच्‍छा नहीं माना जाता है. विशेष तौर पर इन 5 दिनों में कोई भी नया काम शुरू नहीं किया जाता है. नवंबर महीने की शुरुआत पंचक से हुई थी और अब एक बार फिर से पंचक लगने जा रहे हैं.  नवंबर 2025 में पंचक  नवंबर महीने में 27 तारीख की दोपहर 02:07 बजे से फिर से पंचक लगने जा रहे हैं. जो कि लग जाएगा और अगले महीने दिसंबर की 01 तारीख को रात को 11:18 बजे खत्म होगा. इस दौरान कुछ काम निषिद्ध रहेंगे, लेकिन ये पंचक कुछ मायनों में बेहद खास भी हैं.  दोष रहित पचंक माने जाते हैं शुभ  ज्योतिष के अनुसार, गुरुवार से शुरू होने वाले पंचक को दोषरहित पंचक कहते हैं. इन पंचक पर कोई अशुभ प्रभाव नहीं होता है, लिहाजा इनमें शुभ कार्य किए जा सकते हैं. इस तरह के पंचक भगवान विष्णु और बृहस्पति देव के होते हैं, इसलिए इनमें पंचक के दौरान की जाने वाली वर्जित गतिविधियों को छोड़कर अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं. सिर्फ ये काम रहेंगे वर्जित  इन पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा करना, गृह निर्माण की शुरुआत, छत डलवाने, चारपाई/पलंग या बिस्‍तर खरीदना, लकड़ी या लकड़ी का सामान खरीदना, ज्‍वलनशील चीजें खरीदना वर्जित रहेगा. ये काम करने से अशुभ फल मिल सकते हैं. इसके अलावा अन्‍य शुभ कार्य नवंबर के दोष रहित पंचकों में किए जा सकेंगे.  पंचक में मृत्‍यु  वहीं पंचक में किसी की मृत्‍यु होने पर उसका अंतिम संस्‍कार खास विधि से किया जाता है, इसमें शव के साथ प्रतीकात्‍मक तौर पर 4 नारियल रख दिए जाते हैं. वरना मान्‍यता है कि पंचक में किसी की मृत्‍यु होने पर परिवार के 5 लोगों पर संकट आता है.  

AI और जलवायु परिवर्तन 2028 तक भारतीय व्यवसायों के लिए प्रमुख जोखिम: रिपोर्ट

नई दिल्ली   भारतीय कंपनियों ने साइबर अटैक और डेटा ब्रीच के रूप में अपने टॉप बिजनेस जोखिम की पहचान की है, जबकि 2028 तक के लिए एआई और क्लाइमेट चेंज को भविष्य का बिजनेस जोखिम बताया है। यह जानकारी बुधवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई।  ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विस फर्म एऑन ने कहा कि प्रतिभाओं को आकर्षित कर उन्हें बनाए रखने की चुनौतियां बनी हुई हैं, जबकि प्रॉपर्टी डैमेज और एक्सचेंज रेट फ्लक्चुएशन एशिया में किसी और जगह की तुलना में भारत में ज्यादा है। एऑन के भारत के सीईओ ऋषि मेहरा ने कहा, "भारतीय व्यवसाय डिजिटल व्यवधान, टैलेंट अडैप्टेबिलिटी और भू-राजनीतिक बदलावों के बीच उल्लेखनीय एजिलिटी का प्रदर्शन कर रहे हैं।77.8 प्रतिशत भारतीय रेस्पॉन्डेंट्स का कहना है कि उन्हें प्रॉपर्टी डैमेज से नुकसान हुआ है, 46.2 प्रतिशत बिजनेस इंटरप्शन और 63.6 प्रतिशत एक्सचेंज रेट फ्लक्चुएशन से प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब आधे रेस्पॉन्डेंट्स के लिए टैलेंट से जुड़ी चुनौतियां और कैश फ्लो/लिक्विडिटी के कारण नुकसान हुआ है। जोखिम प्रबंधन का औपचारिकीकरण तेजी से हो रहा है, जिसमें 70 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स ने डेडिकेटेड रिस्क और इंश्योरेंस टीम को स्थापित किया है। 64.9 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स इंश्योरेबल रिस्क की कुल कॉस्ट को मेजर कर रहे हैं।  92.9 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स के पास साइबर अटैक के लिए योजनाएं और फॉर्मल रिव्यूज हैं। प्रॉपर्टी डैमेज के लिए 90.9 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स के पास योजनाएं हैं। वहीं, 55 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट्स टैलेंट रिटेंशन पर ध्यान दे रहे हैं। आईटी मंत्रालय के डेटा के अनुसार, 400 से अधिक स्टार्टअप्स और 6.5 लाख प्रोफेशनल्स का एक स्किल्ड वर्कफोर्स 20 अरब डॉलर की साइबरसिक्योरिटी इंडस्ट्री को सशक्त बना रहे हैं, जिसके साथ भारत तेजी से एक ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी हब के रूप में उभर रहा है।  सीईआरटी-इन रिसर्च सहयोग, इंटरनेशनल फोरम में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए एक मजबूत और विश्वसनीय साइबर डिफेंस आर्किटेक्चर बना रहा है, जो कि डिजिटल इंडिया विजन से जुड़ा है।

रोड एक्सीडेंट पर MP हाई कोर्ट की नाराज़गी, पुलिस को फटकार—ट्रैफिक कौन संभालेगा?

इंदौर   इंदौर में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर हाई कोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए. शहर के एयरपोर्ट रोड पर करीब 2 माह पहले बेलगाम ट्रक ने कई लोगों को कुचल दिया था. इस मामले में दायर याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई चल रही है. हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इंदौर पुलिस कमिश्नर पेश हुए. इस दौरान हाई कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर पर चालानी कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए. मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी. पहले ट्रैफिक रूल्स तुड़वाते हैं, फिर चालानी कार्रवाई हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस संजीव सचदेव और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ द्वारा इस मामले की सुनवाई की जा रही है. सुनवाई के दौरान पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने बताया "ट्रैफिक रूल्स तोड़ने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई की जा रही है." उन्होंने इसका ब्यौरा भी पेश किया. इस पर युगलपीठ ने कहा "आपकी पुलिस द्वारा पहले वाहन चालकों से नियम तुड़वाए गए और उसके बाद उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई." चालान काटने में लगी रहती है ट्रैफिक पुलिस हाई कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से कहा "मुंबई में जाकर देखें, वहां पर बीच चौराहे पर पुलिसकर्मी नजर आता है लेकिन आपके इंदौर में पेड़ के पीछे जवान खड़े रहते हैं और वह ड्यूटी करने के दौरान सिग्नल तोड़ने वालों के चालान बनाने में लगे रहते हैं. आपको 31 दिसंबर तक चालानी कार्रवाई का टारगेट मिलता है. यदि 31 दिसंबर तक निश्चित संख्या में चालानी कार्रवाई नहीं हुई तो चालानी कार्रवाई बड़े स्तर पर की जाती है." इससे पहले भी कलेक्टर, कमिश्नर ,आरटीओ द्वारा कई प्लान बताए गए, उन प्लान में कई तरह की खामियां थी. इस पर कोर्ट ने आपत्ति ली है. भारी वाहनों की मनमानी पर पुलिस ने क्या किया कोर्ट ने इंदौर पुलिस कमिश्नर से पूछा "हादसा होने के बाद भी शहरी क्षेत्र में भारी वाहन घुस रहे हैं. ड्रिंक एंड ड्राइव के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, इस पर पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है." इस पर पुलिस कमिश्नर ने बताया "भारी वाहनों के प्रवेश पर सख्ती जारी है. जरूरी सामान लाने ले जाने वाले वाहनों को अनुमति दी गई है." इंदौर शहर के ट्रैफिक को सुधारने के लिए लगातार वालेंटियर का भी सहयोग लिया जा रहा है. अब 27 नवंबर को एक बार फिर हाई कोर्ट के समक्ष सभी विभागों के अधिकारी उपस्थित होंगे और अभी तक ट्रैफिक सुधारने को लेकर क्या कदम उठाए हैं, इस बारे में जानकारी देंगे. ट्रक ने बरपाया कहर, 2 की मौत, 13 घायल हुए थे इंदौर के एयरपोर्ट रोड पर दो महीने पहले एक ट्रक अनियंत्रित हो गया था और उसने आधा दर्जन से अधिक वाहन चालकों को टक्कर मारी. इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. इस घटना के बाद याचिका इंदौर हाई कोर्ट में हाई कोर्ट बार एसोसिशन के अध्यक्ष रितेश ईरानी द्वारा लगाई गई थी. वकील रितेश ईरानी के अनुसार याचिका पर लगातार सुनवाई चल रही है.