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भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका वनडे मुकाबला 30 नवंबर को, रांची में टिकटों की धूम

 रांची  झारखंड की राजधानी के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम (IND vs SA ODI JSCA Stadium) में 30 नवंबर को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच होने वाले एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (ODI) मैच को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। स्टेडियम को आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतकर्ता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।   जेएससीए अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव ने बताया कि आयोजन को यादगार बनाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। दोनों टीमें 27 नवंबर को चाटर्ड प्लेन से रांची पहुंचेगी। एयरपोर्ट से खिलाड़ियों को सीधे होटल ले जाया जाएगा। सुरक्षा के लिए विशेष रूट और अतिरिक्त जवानों की तैनाती की जाएगी। वहीं 21 नवंबर यानी आज से टिकट जेनीईिटकट साइट पर ऑनलाइन टिकट  मिलना शुरू होगा और 25 नवंबर से सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक स्टेडियम टिकट काउंटर पर ऑफलाइन टिकट बिक्री शुरू होगी। दर्शकों से समय पर पहुंचने की अपील की गई है। किसी भी उम्र के बच्चे को प्रवेश के लिए अलग टिकट लेना अनिवार्य होगा। जेएससीए ने टिकटों की कीमत भी जारी कर दी है। वींग एक के लोअर टियर के लिए 1600 रुपए देने होंगे, वहीं अपर टियर के लिए 1300 रुपए का भुगतान करना होंंगा। इसके अलावा विंग बी के लिए टिकटों की कीमत लोअर टियर में 2200 रुपए  जबकि अपर टियर में 1700 रुपए जबकि  विंग डी में लोअर टियर की कीमट 2200 रुपए, स्पाइस बॉक्स के लिए 1700 रुपए, जबकि ईस्ट-वेस्ट हिल के लिए 1200 रुपए देने होंगे। इसके अलावा विंग सी के अपर टियर के लिए 1300 रुपए, जबकि लोअर टियर के लिए 1600 रुपए अदा करने होंगे।   एक टिकट पर सिर्फ एक बार प्रवेश    वहीं दर्शकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए है। पानी की बोतल छोड़कर कोई भी खाद्य पदार्थ स्टेडियम में ले जाना प्रतिबंधित है। एक टिकट पर सिर्फ एक बार प्रवेश मिलेगा। छोटे बच्चों को गोद में लाने की अनुमति नहीं – हर बच्चे का टिकट जरूरी। टिकट पर लिखे ईस्ट, वेस्ट, नॉर्थ, साउथ विंग के अनुसार ही संबंधित कतार में खड़ा होना होगा।गलत विंग की कतार में खड़े होने पर प्रवेश नहीं मिलेगा।करीब 39,000 दर्शकों की क्षमता वाले स्टेडियम में भीड़ को सुचारू तरीके से संभालने के लिए अतिरिक्त गेट, पुलिस बल और वॉलंटियर्स लगाए जाएंगे। स्टेडियम को आकर्षक रोशनी और सजावट से संवारने का काम भी तेजी से चल रहा है। रांची में इस हाई-वोल्टेज मुकाबले को लेकर क्रिकेट प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह है। जेएससीए का कहना है कि जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए मैच को पूरी तरह सफल बनाने की तैयारी जारी है।

परिवहन में बड़ी क्रांति: हरियाणा में 500 नई इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत, जानें किसे होगा लाभ

चंडीगड़  हरियाणा सरकार राज्य में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना लागू करने जा रही है। यह योजना एआई फॉर रेजिलिएंट जॉब्स, अर्बन एयर क्वालिटी एंड नेक्स्ट जेनरेशन स्किल कार्यक्रम के तहत चलाई जाएगी। विश्व बैंक ने इसके लिए 3,500 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। परियोजना वर्ष 2026 से शुरू होकर पांच वर्षों तक संचालित होगी। एनसीआर में 200 ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित होंगे प्रोजेक्ट के तहत एनसीआर क्षेत्र में 200 ई-चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे, जिन्हें निजी एजेंसियों की सहभागिता से विकसित किया जाएगा। परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए प्रथम चरण में गुरुग्राम में 200, सोनीपत में 100 और फरीदाबाद में 200 नई ई-बसें चलाई जाएंगी। ई-ऑटो खरीददारों को मिलेगा प्रोत्साहन  स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार 10,000 ई-ऑटो खरीदने वालों को 15,000 से 35,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान करेगी। वहीं, राज्य में मौजूद 17 लाख पुराने एवं प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। इनकी पहचान के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) स्थापित किए जाएंगे, जिन पर लगभग 210 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण की कड़ी व्यवस्था औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 300 इकाइयों में कंटीन्यूस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (CEMS) लगाए जाएंगे, जिससे रियल-टाइम डेटा उपलब्ध होगा। इसके साथ ही अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले बॉयलरों को स्वच्छ ईंधन आधारित तकनीकों में बदलने की भी योजना है। यह परियोजना हरियाणा में वायु गुणवत्ता सुधारने, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

चार नए लेबर कोड लागू, श्रमिकों को मिली ग्रेच्युटी, फ्री हेल्थ चेकअप और अन्य लाभ

नई दिल्ली:  देश में नए श्रम कानून (Labour laws) लागू हो गए. इसे लेबर सिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव बताया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने चार नई श्रम संहिताओं को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है. सरकार का दावा है कि ये सिर्फ कानूनी अपडेट नहीं, बल्कि भारत के 40 करोड़ से ज्यादा कामगारों के जीवन में एक ऐतिहासिक क्रांति है. नई श्रम संहिताएं सबसे पहले हर वर्कर को टाइम पर मिनिमम वेतन की गारंटी देती हैं. अब देरी, मनमानी और शोषण की गुंजाइश खत्म होगी. युवाओं के लिए जॉब में नियुक्ति पत्र अनिवार्य कर दिया गया है ताकि नौकरी शुरू होते ही उनका अधिकार पक्का हो. महिलाओं के लिए Equal Pay का साफ नियम लागू होगा, जिससे कार्यस्थलों पर जेंडर बेस्ड भेदभाव पर लगाम लगेगी. सोशल सिक्योरिटी के दायरे में 40 करोड़ वर्कर्स आने से देश की कार्यशक्ति पहली बार इस पैमाने पर सुरक्षित होगी. फिक्स टर्म एम्प्लॉईस को सिर्फ एक साल की नौकरी के बाद ग्रेच्युटी का हक दिया गया है. यह बदलाव उन लाखों वर्कर्स के लिए राहत है जो कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं और स्थायी कर्मचारियों जैसी सुरक्षा नहीं पाते. 40 साल से ऊपर के हर वर्कर का सालाना फ्री हेल्थ चेक-अप अनिवार्य किया गया है. इसे सरकार वर्कफोर्स की दीर्घकालिक सेहत में निवेश मान रही है. ओवरटाइम करने वालों के लिए अब डबल वेतन का प्रावधान है, जिससे शोषण की आशंका खत्म होगी और अतिरिक्त मेहनत का सही मूल्य मिलेगा. New Labour Code 2025 : नई श्रम संहिताओं की खास बातें     सभी वर्कर्स को टाइम पर मिनिमम वेतन की गारंटी अब किसी भी कंपनी या नियोक्ता के लिए वेतन रोकना या देरी करना आसान नहीं रहेगा.     हर युवा को नियुक्ति पत्र अनिवार्य अब जॉइन करते ही Appointment Letter मिलेगा. जॉब सिक्योरिटी और क्लियर टर्म्स दोनों सुनिश्चित.     महिलाओं को Equal Pay और समान सम्मान जेंडर के आधार पर वेतन असमानता खत्म. सभी पदों पर बराबरी का अधिकार.     40 करोड़ कामगारों को सोशल सिक्योरिटी कवरेज देश की आधी से ज्यादा वर्कफोर्स पहली बार इतने बड़े सुरक्षा दायरे में.     फिक्स टर्म एम्प्लॉई को सिर्फ 1 साल बाद ग्रेच्युटी अब कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स भी 

ग्राहकों के फोन नंबर रेस्टोरेंट को देगा Zomato, नई डेटा शेयरिंग पॉलिसी पर विवाद

 नई दिल्ली फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने रेस्टोरेंट उद्योग के साथ चल रही वर्षों पुरानी खींचतान को खत्म करते हुए, ग्राहकों का डेटा (फोन नंबर) रेस्टोरेंट्स के साथ साझा करने का फैसला किया है. इस कदम से ग्राहकों के इनबॉक्स में जल्द ही प्रचार संदेशों (जैसे 'कोड XXX का उपयोग करें और ₹200 की छूट पाएं') की बाढ़ आ सकती है. इस कदम ने डेटा प्राइवेसी और ग्राहक सूचना के संभावित दुरुपयोग को लेकर राजनीतिक और उद्योग विशेषज्ञों के बीच हंगामा खड़ा कर दिया है. Zomato, 5 लाख से ज़्यादा रेस्टोरेंट्स की संयुक्त संस्था, नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (NRAI) के साथ ग्राहकों का डेटा रेस्टोरेंट्स के साथ साझा करने के लिए बातचीत कर रहा है.रिपोर्ट के अनुसार, Zomato के प्रतिद्वंद्वी Swiggy के साथ भी इसी तरह की बातचीत चल रही है. Zomato क्या कर रहा है? वर्तमान में, डिलीवरी प्लेटफॉर्म ग्राहक डेटा को मास्क करते हैं, यानी रेस्टोरेंट्स के पास फोन नंबर या अन्य व्यक्तिगत विवरण की जानकारी नहीं होती है. पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर Zomato ने ग्राहकों को पॉप-अप भेजना शुरू कर दिया है, जिसमें उन्हें मार्केटिंग और प्रचार संदेशों के लिए रेस्टोरेंट्स के साथ अपना फोन नंबर साझा करने की अनुमति मांगी जा रही है. पॉप-अप में स्पष्ट है कि एक बार जानकारी साझा करने के बाद, यूजर इसे वापस नहीं ले सकता. संदेश में लिखा है, "मैं रेस्टोरेंट को प्रमोशनल गतिविधियों के लिए मुझसे संपर्क करने की अनुमति देता हूं." रेस्टोरेंट्स क्यों चाहते हैं डेटा? रेस्टोरेंट्स लंबे समय से यह शिकायत कर रहे थे कि डेटा मास्किंग उन्हें ग्राहकों के साथ सीधे जुड़ने से रोकती है. NRAI ने इस मुद्दे पर Zomato और Swiggy के खिलाफ CCI (भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग) में "प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं" के लिए शिकायत भी दर्ज कराई थी. रेस्टोरेंट्स का कहना है कि यह उन्हें उपभोग पैटर्न को बेहतर ढंग से समझने, मार्केटिंग लागत को सही ढंग से चैनलाइज़ करने और ग्राहकों के लिए सेवाओं को पर्सनलाइज़ करने में मदद करेगा.उदाहरण के लिए, यदि भोजन के ऑर्डर में कोई समस्या हो या वे किसी प्राथमिकता की पुष्टि करना चाहें तो रेस्तरां सीधे उपयोगकर्ता को कॉल कर सकते हैं. गोपनीयता जोखिम और राजनीतिक विरोध इस कदम ने तत्काल एक गोपनीयता विवाद को जन्म दिया है, क्योंकि सोशल मीडिया यूजर्स इसे स्पैम मैसेजेज के लिए गेट खोलने वाला बता रहे हैं.शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'ज़ोमैटो भले ही इसे पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम समझती हो, लेकिन एक ग्राहक के लिए यह डेटा गोपनीयता का उल्लंघन है.  अगर ज़ोमैटो और ऐप्स एकतरफ़ा ऐसा रुख़ अपनाते हैं, तो आईटी पर स्थायी समिति की सदस्य होने के नाते मैं डेटा गोपनीयता क़ानूनों के उल्लंघन की जांच करने का अनुरोध करूंगी.' मिलिंद देवड़ा (राज्यसभा सांसद), ने कहा,  "ज़ोमैटो और स्विगी ग्राहकों के मोबाइल नंबर रेस्टोरेंट के साथ साझा करने की योजना बना रहे हैं. इससे निजता के जोखिम और बेहतर सेवा की आड़ में स्पैम बढ़ने का खतरा है. हमें नए डीपीडीपी नियमों के अनुरूप स्पष्ट और स्पष्ट ऑप्ट-इन दिशानिर्देशों की आवश्यकता है, ताकि उपभोक्ताओं के डेटा का सम्मान किया जा सके." मार्केटिंग विशेषज्ञ और व्यवसायी सुहेल सेठ ने कहा कि ऐसा कदम "पूरी तरह अस्वीकार्य" है. सेठ ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि सरकार इसकी बिल्कुल भी इजाज़त नहीं देगी. आगे चलकर, वे हमारी खान-पान की आदतों को सबके साथ साझा करेंगे!" विवाद के बीच, ज़ोमैटो के सीईओ आदित्य मंगला ने चिंताओं को कम करने की कोशिश की है. उन्होंने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में कहा, "अगर सहमति मिल जाती है, तो रेस्टोरेंट के साथ सिर्फ़ फ़ोन नंबर ही साझा किया जाएगा. कोई और जानकारी साझा नहीं की जाएगी."

थर्ड लाइन कनेक्टिविटी शुरू, एनकेजे यार्ड और कई रूट प्रभावित, 1800 करोड़ में बनेगा लंबा फ्लाईओवर

कटनी  1800 करोड़ की लागत से मध्य प्रदेश के कटनी के झलवारा स्टेशन से न्यू मझगवां फाटक तक रेलवे द्वारा रेल फ्लाईओवर (ग्रेड सेपरेटर) का निर्माण कराया जा रहा है। अप और डाउन ट्रेक में बनाए जा रहे ग्रेड सेपरेटर के करीब 15.85 लंबे अप ट्रैक का कार्य पूरा हो चुका है। इस अपट्रेक को अब बिलासपुर की ओर से आने वाली थर्ड लाइन से जोड़ने का कार्य रेलवे द्वारा शुरु कराया गया है। इसके लिए एनकेजे यार्ड में सी-केबिन के समीप ब्लॉक लेकर प्री-एएनआई वर्क शुरु कर दिया गया है। आगामी दिनों में एनआई वर्क कर कनेक्टिविटी दी जाएगी, जिससे ट्रेनों का आवागमन भी प्रभावित होगा। अब तक हो चुका इतना काम जानकारी के अनुसार, झलवारा से न्यू मझगवां फाटक तक बने ग्रेड सेपरेटर को सिंगरौली की ओर से आने वाले रेलखंड से दो माह पूर्व ही जोड़ा जा चुका है वहीं अब बिलासपुर की ओर से आने वाली ट्रेनों को ग्रेड सेपरेटर से जोड़ने कार्य शुरु किया गया है। वर्तमान में सिर्फ सिंगरौली की ओर से आने वाली ट्रेनें ही इसमें आगे बढ़ पाती है वहीं अब बिलासपुर लाइन जुड़ने से मालगाड़ियां एनकेजे को बाइपास करते हुए सीधे बीना रेलखंड पर रवाना होंगी। इसके लिए यार्ड रिमॉडलिंग भी की जा रही है। नये सिंग्नल सहित अन्य जरूरी कार्य कराए जाएंगे। ऐसे हुआ है ग्रेड सेपरेटर का निर्माण कटनी ग्रेड सेपरेटर परियोजना (Katni Grade Separator project) की कुल लागत लगभग 1800 करोड़ रुपए है। यह ग्रेड सेपरेटर भारत का सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट बनने जा रहा है, जो न केवल संरचनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि रेलवे संचालन में भी नई संभावनाओं के ‌द्वार खोलेगा। परियोजना की कुल लंबाई 33.40 किमी है, जिसमें डाउन ग्रेड सेपरेटर 17.52 किमी और अप ग्रेड सेपरेटर 15.35 किमी शामिल हैं। अप साइड 1570 फाउंडेशन और 264 पियर्स व डाउन साइड 2592 फाउंडेशन और 425 पियर्स का निर्माण कराया गया है। उल्लेखनीय है कि अप्रैल माह में रेलवे ने ग्रेड सेपरेटर के अप ट्रेक में कार्य पूरा होने के बाद कटंगी खुर्द स्टेशन से न्यू मझगवां स्टेशन तक रेलगाड़ी का सफल परिचालन किया था और अब लगातार ग्रेड सेपरेटर से मालगाड़ी दौड़ रही हैं। बरगवां मेमू उमरिया तक जाएगी जानकारी के अनुसार इस ब्लॉक के कारण गाड़ी संख्या 68747/48 बिलासपुर-कटनी-बिलासपुर मेमू व गाड़ी संख्या 61603/04 कटनी-बरगवां-कटनी मेमू का संचालन प्रभावित होगा। ये दोनों ट्रेर्ने 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक कटंगीखुर्द स्टेशन से ही शुरू होंगी और खत्म होंगी। हालांकि इस दौरान यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़ेगा। डाउन ट्रैक पर धीमा कार्य, 2026 तक होगा पूरा एक ओर जहां अप ट्रैक का कार्य पूरा हो चुका है तो वहीं डाउन ट्रैक पर निर्माण एजेंसी का कार्य धीमी गति से चल रहा है। आलम यह है कि 17.52 किमी लंबे इस ट्रेक पर कई स्थानों पर पिलर भी बनकर तैयार नहीं हुए है। बताया जा रहा है कि डाउन ट्रैक का कार्य इस वर्ष पूरा होना मुश्किल है। कटनी-चिरमिरी पैसेंजर निरस्त रहेगी जानकारी के अनुसार ब्लॉक के चलते कटनी-चिरमिरी पैसेंजर को रद्द किया जा रहा है। गाड़ी संख्या 61609 कटनी-चिरमिरी 26 नवंबर से 2 दिसंबर तक व गाड़ी संख्या 61602 चिरमिरी-कटनी मेमू 27 नवंबर से 3 दिसंबर तक निरस्त रहेगी। ग्रेड सेपरेटर परियोजना से यह होंगे फायदे     बीना-कटनी रेल खंड में मालगाड़ियों की संख्या और गति में वृद्धि होगी।     कटनी से बिलासपुर और सिंगरौली के लिए अतिरिक्त रेल लाइन जुड़ जाएगी, जिससे न्यू कटनी, कटनी मुड़वारा जैसे व्यस्त क्षेत्रों को बायपास किया जा सकेगा।

राज्य में अग्नि सुरक्षा होगी मजबूत, 36 नए फायर स्टेशन बनाए जाएंगे

भोपाल   अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से पूरे प्रदेश के नगरीय निकायों में 36 आधुनिक फायर स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके लिए 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर फंड आवंटित किया गया है। फायर स्टेशन बनाने के साथ नई फायर गाड़ियां खरीदी जाएंगी और उपकरण भी आधुनिक तकनीक के होंगे, ताकि आग लगने की घटनाओं पर जल्दी और प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सके। इसके साथ ही सरकार राज्य स्तरीय फायर कंट्रोल रूम भी बनाएगी, जहां से पूरे प्रदेश के सभी फायर स्टेशनों को जोड़ा जाएगा। इससे आगजनी की घटनाओं पर त्वरित निगरानी और समन्वय सुनिश्चित होगा। नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिया है, जिसकी मंजूरी के बाद काम शुरू हो जाएगा।  कहां बनेंगे फायर स्टेशन फायर स्टेशन 8 नगर निगमों – रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, रतलाम, मुरैना, खंडवा, इंदौर और उज्जैन में बनाए जाएंगे। इसके अलावा नए बने जिलों – मऊगंज, पांढुर्रा, मैहर, अनूपपुर, निवाड़ी सहित अन्य जिलों में भी स्टेशन स्थापित होंगे। साथ ही 4 औद्योगिक क्षेत्रों – पीथमपुर (धार), मंडीदीप (रायसेन), बामोर (मुरैना) और मेघनगर (झाबुआ) को भी शामिल किया गया है। दो एकड़ जमीन में बना स्टेशन  हर फायर स्टेशन लगभग 2 एकड़ जमीन में बनेगा। एक स्टेशन पर दो दमकल गाड़ियां रहेंगी। एक बड़ी और एक छोटी। प्रति स्टेशन निर्माण पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें फायर स्टेशन + फायर गाड़ियां    पर 119 करोड़, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पर 20 करोड़, आधुनिक फायर उपकरण पर 178 करोड़, कंट्रोल रूम सुदृढ़ीकरण पर 20 करोड़, अन्य विशेष आवश्यकताएं पर 59 करोड़ खर्च होंगे। यानी कुल 398 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें   75% राशि लगभग 297 करोड़ केंद्र सरकार और 25% राशि करीब 100 करोड़ राज्य सरकार देगी।   

हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य, नहीं लगाई तो घर पहुंचेगा चालान

जबलपुर  मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) न होने पर सीधे ई-चालान जारी किया जाएगा। परिवहन विभाग टोल प्लाजा में लगे सीसीटीवी कैमरों को अपने पोर्टल से लिंक कर रहा है। नई व्यवस्था जनवरी से लागू होने की संभावना है। इसका उद्देश्य है कि सभी वाहनों में एचएसआरपी अनिवार्य रूप से लगाई जाए। क्यों की जा रही सख्ती जानकारी के अनुसार सभी टोल प्लाजा पर 24 घंटे सीसीटीवी चल रहे हैं। इन्हें पोर्टल से जोड़ने पर वाहन का नंबर प्लेट सीधे स्कैन होगा। यदि नंबर प्लेट मानक के अनुरूप नहीं है या वाहन पर एचएसआरपी नहीं लगी है, तो सिस्टम तुरंत ही गाड़ी मालिक को ई-चालान भेज देगा। बता दें कि अप्रेल 2019 से नए बिकने वाले सभी वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य है। पुराने (2019 से पहले रजिस्टर्ड) वाहनों के लिए भी एचएसआरपी लगवाना जरूरी किया गया है। इसके बावजूद इसकी गति धीमी है। दिसंबर तक लगवा लें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों को दिसंबर तक का समय दिया है। इसके बाद बिना एचएसआरपी वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और चालान की राशि भी बढ़ाई जाएगी। ऐसी होगी नई व्यवस्था टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरे परिवहन विभाग के पोर्टल से जुड़े। गाड़ियों के गुजरने के समय हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन किया जाएगा। जिसमें पोर्टल पर तुरंत पूरा रिकॉर्ड खुलकर आ जाएगा। एचएसआरपी न होने या अन्य कमियों पर तत्काल ई-चालान जारी कर दिया जाएगा। 

भारतीय सेना ने खरीदा BvS10 सिंधु ऑल-टेरेन व्हीकल, L&T–BAE के साथ हुआ समझौता

 नई दिल्ली भारतीय सेना ने लंबे इंतजार के बाद एक बड़ा कदम उठाया है. सेना ने लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (L&T) और BAE सिस्टम्स के साथ BvS10 सिंधु नाम के ऑल-टेरेन व्हीकल (AATV) की खरीद के लिए समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. यह अनुबंध 19 नवंबर 2025 को हुआ है. L&T कंपनी BAE सिस्टम्स के साथ मिलकर इनका निर्माण करेगी. यह वाहन विशेष रूप से भारत की जरूरतों के लिए तैयार किया गया है. इसे हिमालय जैसे ऊंचे इलाकों, रेगिस्तान, दलदली जमीन और पानी में चलाने के लिए डिजाइन किया गया है. BvS10 सिंधु BAE सिस्टम्स के मूल BvS10 प्लेटफॉर्म का अपग्रेडेड वर्जन है, जिसे भारत के लिए अनुकूलित किया गया है. अनुबंध की मुख्य बातें L&T कंपनी गुजरात के हजीरा में स्थित अपने आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स में इन वाहनों का निर्माण करेगी. BAE सिस्टम्स हैग्लुंड्स (स्वीडन) कंपनी तकनीकी और डिजाइन सहायता देगी, जो मूल BvS10 की निर्माता है. यह एशिया में BvS10 का पहला बड़ा ऑर्डर है. अनुबंध में कितने वाहनों की संख्या और कीमत का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन यह भारतीय सेना की क्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है. BvS10 सिंधु वाहन की विशेषताएं BvS10 सिंधु एक आर्टिकुलेटेड (दो हिस्सों वाला) ऑल-टेरेन बख्तरबंद वाहन है, जो जमीन, पानी और बर्फ पर चल सकता है. यहां इसकी मुख्य स्पेसिफिकेशन हैं…     इंजन: 5.9 लीटर इन-लाइन सिक्स-सिलेंडर टर्बो डीजल इंजन (कमिंस कंपनी का), जो 250-285 हॉर्सपावर पैदा करता है.     स्पीड: जमीन पर 65 किमी/घंटा तक, पानी में 5 किमी/घंटा.     वजन: करीब 10,500 किलोग्राम (लड़ाई के लिए तैयार).     पेलोड क्षमता: 5-8 टन तक सामान या हथियार ले जा सकता है.     क्षमता: 14 सैनिकों तक बैठा सकता है.     आकार: लंबाई 8 मीटर, चौड़ाई 2.2 मीटर, ऊंचाई 2.5 मीटर.     क्षमताएं: 45 डिग्री की चढ़ाई चढ़ सकता है. 2 मीटर की खाई पार कर सकता है. बर्फ और दलदल में आसानी से चलता है. यह एम्फीबियस है यानी पानी में तैर सकता है. यह वाहन ठंडे मौसम और कठिन इलाकों के लिए बनाया गया है, जो लद्दाख और हिमालय जैसे क्षेत्रों में भारतीय सेना के लिए बहुत उपयोगी होगा. क्यों जरूरी है यह अनुबंध? भारतीय सेना को ऊंचे पहाड़ी इलाकों में सैनिकों और सामान को ले जाने के लिए मजबूत वाहनों की जरूरत है. BvS10 सिंधु जैसे वाहन दुश्मन के हमलों से बचाते हैं. तेजी से मूवमेंट करने में मदद करते हैं. यह मेक इन इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा है, क्योंकि वाहन भारत में ही बनेंगे. इससे रोजगार बढ़ेगा और देश की रक्षा क्षमता मजबूत होगी. L&T पहले भी K9 वज्र-टी जैसे हथियार बना चुकी है, जो हजीरा में ही बनते हैं. BAE सिस्टम्स दुनिया की बड़ी रक्षा कंपनी है, जो कई देशों को ऐसे वाहन सप्लाई करती है. यह अनुबंध भारतीय सेना को और मजबूत बनाएगा. सीमा पर चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा.

मोबाइल बना मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा, 73% लोग डिजिटल डिपेंडेंसी से पीड़ित

 इंदौर  एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग द्वारा मोबाइल की लत से परेशान 500 लोगों पर किए गए अध्ययन के बेहद परेशान करने वाले निष्कर्ष सामने आए हैं। इसके अनुसार मोबाइल अब सिर्फ एक तकनीकी उपकरण नहीं रह गया, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अध्ययन के अनुसार 73 प्रतिशत लोग मोबाइल की लत यानी डिजिटल डिपेंडेंसी से पीड़ित पाए गए। अत्यधिक मोबाइल उपयोग के कारण लोग बिना एहसास किए मूक अवसाद (साइलेंट डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं। 80 प्रतिशत प्रतिभागियों में हल्का लेकिन लगातार चलने वाला अवसाद देखा गया। औसतन लोग प्रतिदिन सात घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं। यानी साल भर में करीब 1800 घंटे यानी पूरे 75 दिन मोबाइल पर निकल जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल न मिलने पर घबराहट (नोमोफोबिया), नींद में कमी, तनाव बढ़ना और बार-बार फोन चेक करने की मजबूरी जैसे व्यवहारगत लक्षण बढ़ते जा रहे हैं। बच्चों और किशोरों में इसका असर और भी गंभीर है। किशोरों में अवसाद का खतरा बढ़ रहा है और 10–14 वर्ष के बच्चों में दिमागी विकास प्रभावित हो रहा है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकराल रूप ले लेंगी अत्यधिक मोबाइल चलाने के कारण किशोरों में आत्मविश्वास में कमी और वास्तविक जीवन से दूरी बढ़ रही है। चूंकि, यह उम्र सीखने, समझने और सामाजिक कौशल विकसित करने की होती है, ऐसे में अत्यधिक स्क्रीन टाइम उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके लिए स्कूलों में एक मॉडल बनाने की आवश्यकता है। समय रहते यदि मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो जल्द मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकराल रूप ले लेंगी। उपाय     फोन पार्किंग जोन बनाएं     रोजाना मोबाइल उपयोग का समय तय करें।     अनावश्यक एप्स के नोटिफिकेशन बंद कर दें। इससे बार-बार फोन देखने की आदत कम होगी।     इंटरनेट मीडिया एप दिन में 2-3 बार ही खोलें। इनके उपयोग के लिए टाइम लिमिट सेट कर सकते हैं।     रात में सोते समय मोबाइल को अपने बिस्तर से दूर रखें।     दिनभर में कुछ ऐसा समय तय करें, जब मोबाइल से दूर रहेंगे। जैसे खाना खाते समय, पढ़ाई के समय या परिवार के साथ बैठते समय।     खाली समय में मोबाइल के बजाय किताब पढ़ें, संगीत सुनें, वाक पर जाएं।     घर में एक फोन पार्किंग जोन बनाएं, जहां सभी फोन रख दें और बार-बार हाथ में न लें। इन 5 तरीकों से छुड़ाएं बच्चे की फोन लत बच्चों की इन गलतियों को न करें नज़रअंदाज, तुरंत टोके वरना हाथ से निकल जाएगा आपका बच्चा स्क्रीन टाइम करें कंट्रोल  अपने बच्चे के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करने के लिए एक सीमित समय निर्धारित करें. उदाहरण के लिए, आप उन्हें दिन में केवल 1-2 घंटे के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करने की परमिशन दे सकते हैं. स्मार्टफोन-फ्री एरिया बनाएं अपने घर में एक स्मार्टफोन-फ्री एरिया बनाएं. उदाहरण के लिए, आप अपने डाइनिंग या बेडरूम में स्मार्टफोन का उपयोग बिल्कुल न करें.  ऑफलाइन एक्टिविटीज पर ध्यान दीजिए अपने बच्चे के लिए ऑप्शनल एक्टिविटीज का ऑप्शन दीजिए, जो उन्हें स्मार्टफोन से दूर रखें. उदाहरण के लिए, आप उन्हें खेल, बुक रीडिं, या कला बनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं. निगरानी रखें अपने बच्चे के स्मार्टफोन का उपयोग करने पर निगरानी रखें. आप फोन में पैरेंट्ल कंट्रोल एप्लीकेशन इंस्टॉल कर सकते हैं जिससे आपका बच्चा फोन पर क्या देख रहा है, इसको आसानी से ट्रैक कर सकते हैं.  रात में फोन चलाने से रोकें अपने बच्चे के साथ बातचीत करें और उन्हें स्मार्टफोन की लत के बारे में समझाएं. इसके अलावा रात के समय बच्चे को फोन बिल्कुल न दें. इससे बच्चे की आंख और स्किन दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है.  फोन की लत से होने वाले नुकसान      नींद की कमी     अवसाद     चिड़चिड़ापन     ध्यानकेंद्रित करने में परेशानी     आत्मसम्मान की कमी  

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मजबूत की अपनी दावेदारी, BJP अध्यक्ष पद की रेस में बढ़त

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी अब तक अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अंतिम फैसला नहीं ले सकी है। हालांकि, अब कहा जा रहा है कि इस पद पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। इसकी बड़ी वजह बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा का शानदार प्रदर्शन है। हालांकि, इसे लेकर पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। भाजपा ने बिहार में प्रधान को चुनाव प्रभारी बनाया था। टेलीग्राफ की रिपोर्ट में सत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि बिहार में यह जीत भाजपा और आरएसएस में अध्यक्ष पद को लेकर जारी खींचतान खत्म करने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा कि संगठन क्षमता और चुनाव प्रबंधन ने उन्हें इस पद की दौड़ में आगे कर कर दिया है। चुनाव से पहले वह लंबे समय तक बिहार में रहे। एक ओर जहां उन्होंने बागियों को नामांकन वापस लेने में मनाया। वहीं, कैडर को भी मजबूत करने में सफलता हासिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी सूत्र बताते हैं कि हरियाणा, महाराष्ट्र और अब बिहार चुनाव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी को मजबूती दी है, जिसपर लोकसभा चुनाव के दौरान मिले झटके के चलते असर पड़ा था। अखबार से बातचीत में एक केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'मोदी जी अब आरएसएस को मनाने में सफल हो सकते हैं कि भाजपा का अध्यक्ष उनकी चॉइस का हो।' एक और नाम था आगे जुलाई में इस पद के लिए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम भी आगे चल रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, जब भाजपा ने यादव और प्रधान का नाम आगे बढ़ाया, तो आरएसएस ने मंजूरी देने से पहले विचार विमर्श की जरूरत बताई थी। कहा जाता है कि प्रधान ने ही ओडिशा विधानसभा चुनाव में भाजपा को बीजू जनता दल से अलग होकर चुनाव लड़ने के लिए मनाया था, जिसके बाद भाजपा राज्य में सत्ता बनाने में सफल हुई। रिपोर्ट में एक भाजपा नेता के हवाले से बताया गया है, 'इससे पहले संकेत मिल रहे थे कि दक्षिण से नेता भाजपा अध्यक्ष बना सकता है। उप राष्ट्रपति पद के लिए सीपी राधाकृष्णन के चुनाव के बाद यह माना जाने लगा है कि पार्टी प्रमुख उत्तर से होगा।' मौजूदा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का तीन साल का कार्यकाल जनवरी 2023 में खत्म हो चुका था, लेकिन लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विस्तार दिया गया।