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‘बॉलीवुड पर लव जिहाद का आरोप’ — हरिद्वार में अनिरुद्धाचार्य का बड़ा वक्तव्य

हरिद्वार  मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं. उन्होंने उन्होंने एक फिल्म का नाम लेते हुए कहा कि भारत में बॉलीवुड लव जिहाद फैला रहा है. इस पर रोक लगाने की आवश्यकता है.संतों ने हमेशा से सनातन की रक्षा की है और आगे भी करेंगे. अनिरुद्धाचार्य ने भारत की शिक्षा व्यवस्था पर भी अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि सीबीएसई बोर्ड का पाठ्यक्रम सही दिशा में है, लेकिन अब ज़रूरी है कि बच्चों को राम और भरत जैसे आदर्श चरित्रों के जीवन मूल्यों की शिक्षा भी दी जाए. भारत में ऐसी शिक्षा का भी होना जरूरी है, जिसमें साइंस के अलावा वैदिक गणित भी पढ़ाया जाता हो. ‘सनातन बोर्ड का गठन जरूरी’ भूपतवाला क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि जैसे अन्य धर्म अपने बच्चों को धार्मिक शिक्षा देते हैं, वैसे ही सनातन धर्म को सुरक्षित रखने के लिए एक सनातन बोर्ड का गठन आवश्यक है. उन्होंने कहा कि तीर्थ स्थलों को पूर्ण रूप से मांस और मदिरा मुक्त बनाना चाहिए और इसके लिए सरकारों से सामूहिक रूप से निवेदन किया जाना चाहिए. कार्यक्रम में ये संत भी रहे शामिल अनिरुद्धाचार्य और देवकीनंदन ठाकुरहरिद्वार के अमेरिकन आश्रम में आयोजित विश्व सनातन महापीठ के कार्यक्रम में शामिल होने आए थे. इसी दौरान उन्होंने उक्त बातें कहीं. इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी, परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद मुनि महाराज सहित कई संत और धर्माचार्य भी उपस्थित रहे. संतों ने देश की शिक्षा प्रणाली पर चर्चा करते हुए सनातन बोर्ड की मांग को दोहराया. इसके साथ ही हरिद्वार को मांस और मदिरा मुक्त किए जाने की भी जोरदार मांग उठाई गई. बाबा हठयोगी और रामविशाल दास महाराज देशभर के धर्माचार्यों और समाजसेवियों के सहयोग से हरिद्वार में विश्व सनातन महापीठ का निर्माण कर रहे हैं. इसके लिए करीब 100 एकड़ भूमि तय की गई है, जहां विश्व सनातन संसद, विभिन्न प्रमुख मंदिरों के प्रतिरूप, विश्वविद्यालय, चिकित्सालय और गौशाला जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इनका उद्देश्य सनातन संस्कृति को वैश्विक स्तर पर मजबूत करना और सनातनियों को एक मंच पर एकजुट करना है.  

ऑफिस में आत्महत्या का प्रयास: महिला अफसर की दर्दनाक कहानी से क्यों दहल उठा सिद्धारमैया का क्षेत्र?

बेंगलुरु कर्नाटक में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के विधानसभा क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत सचिव ने आत्महत्या का प्रयास किया है। बताया जाता है कि वह अपना ट्रांसफर होने की रिपोर्ट से परेशान थी। इस पंचायत अफसर का नाम दिव्या है और वह ग्रेड-1 पंचायत अफसर है। बताया जाता है कि दिव्या ने अपने ऑफिस में पैरासिटामॉल, दर्द निवारक और बुखार के कुल 15 टैबलेट खा लिए। इसके बाद वह अपने ऑफिस में ही गिर गईं। अधिकारियों और पंचायत सदस्यों के मुताबिक पिछले दो साल से वरुणा पंचायत सचिव के तौर पर तैनात थीं। जानकारी के मुताबिक दिव्या उस वक्त परेशान हो गईं, जब एक अन्य ग्राम पंचायत के ग्रेड-1 सचिव के उनकी जगह लेने की खबरें आईं। पंचायत सदस्यों का दावा है कि वह सचिव सीनियर अधिकारियों के साथ मिलकर दिव्या की जगह लेने के लिए लॉबिंग कर रहा था। जानकारी के मुताबिक 20 नवंबर को एग्जीक्यूटिव अफसर ने वरुणा पंचायत ऑफिस में अचानक विजिट की थी। आरोप है कि इस दौरान उसने दिव्या के खिलाफ छह महीने पुरानी शिकायत फिर से खोलने की बात कही थी, जिसमें उनके खिलाफ ठीक से काम न करने की बात कही गई थी। यह जांच पंचायत सदस्यों की मौजूदगी में की गई, जिन्होंने एकजुट होकर दिव्या का बचाव किया था। इन लोगों ने कहा कि दिव्या का काम काफी अच्छा है। साथ ही इतनी पुरानी शिकायत के लंबे अंतराल के बाद फिर से खोलने की मंशा पर भी सवाल उठाया था। वरुणा पंचायत ऑफिस के एक वीडियो में नजर आ रहा है कि दिव्या अपनी कुर्सी पर बेहोशी की हालत में पड़ी हुई है। वहीं, दो महिला कर्मचारी उन्हें होश में लाने और उठाने की कोशिश करती नजर आ रही हैं। इसके बाद अन्य कर्मचारियों ने मिलकर दिव्या को मैसूर के कावेरी अस्पताल पहुंचाया। मामले में वरुणा पुलिस पंचायत अधिकारियों के साथ मिलकर जांच कर रही है। दिव्या ने अभी कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। अनुमान है कि पुलिस दिव्या से अस्पताल में मिलेगी और जानना चाहेगी कि वह शिकायत दर्ज कराना चाहती है या नहीं। फिलहाल इस मामले के चलते मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का विधानसभा क्षेत्र अचानक से काफी चर्चा में आ गया है।  

बस सेवा अचानक बंद: छात्र-कर्मचारी परेशान, विरोध की चेतावनी जारी

नूरपुरबेदी  138 गांवों के केन्द्र बिंदू नूरपुरबेदी बस स्टैंड से रूपनगर के लिए करीब एक सप्ताह से सुबह के समय 2 महत्वपूर्ण सरकारी बसों के न चलने से प्रतिदिन सैकड़ों छात्र, कर्मचारी और अन्य यात्री परेशान हो रहे हैं। शायद जिनकी परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है। उक्त बसों में शामिल पंजाब रोडवेज की सुबह 7.15 बजे और सी.टी.यू. (चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग) की सुबह 7.02 बजे चलने वाली बसों के न आने से सैकड़ों लोगों की सुबह की दिनचर्या बिगड़ गई है।  उक्त बसों के न चलने से सरकारी पास होल्डर विद्यार्थियों को हर दिन लंबा इंतजार करने के बाद आखिर किराया चुकाकर प्राइवेट बसों की सुविधा लेनी पड़ रही है। इस परेशानी की वजह से शिक्षा संस्थानों में स्टूडेंट्स की अटेंडेंस पर असर पड़ रहा है, साथ ही उनकी परीक्षा की तैयारी भी प्रभावित हो रही है। कई स्टूडेंट्स की शिकायत है कि उनके पास न चल पाने से किराया अदा करने पर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। दूसरी तरफ, सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में ड्यूटी पर जाने वाले कर्मचारियों को भी देरी की वजह से काम प्रभावित होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इसके अलावा, किसान परिवारों से जुड़े लोगों और दूसरी जगहों पर काम पर जाने वाले मजदूरों समेत हर तबके के लोगों को उक्त रूट मिस करने की वजह से परेशानी उठानी पड़ रही है।   सरकारी फ्लीट में नई बसें न होने की वजह से कई रूट बंद हो रहे हैं : कन्वीनर गौरव राणा आज मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब मोर्चा कन्वीनर गौरव राणा ने बस स्टैंड नूरपुरबेदी में पहुंचकर प्रभावित हो रहे छात्रों के हक में आवाज उठाई। राणा ने कहा कि जो बसें उम्रदराज हो चुकी है, के स्थान पर नई बसें सरकारी फ्लीट में शामिल नहीं की गई हैं। जिसके कारण नूरपुरबेदी ही नहीं बल्कि पूरे पंजाब में एक-एक करके कई रूट बंद किए जा रहे हैं। सरकार की पॉलिसी पर हमला बोलते हुए कन्वीनर राणा ने कहा कि लोग हर दिन परेशान हो रहे हैं लेकिन सरकार यात्रियों को और सुविधाएं देने का ड्रामा कर रही है।   सोमवार से रूट बहाल न होने पर छात्रों के हक में प्रदर्शन का ऐलान कनवीनर राणा ने डिप्टी कमिश्नर रूपनगर और चीफ सेक्रेटरी पंजाब से तुरंत एक्शन लेने की मांग की और चेतावनी दी कि अगर सोमवार से उक्त रूट बहाल नहीं किए गए तो स्टूडेंट्स के हक में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। बस की खराब हालत के कारण रोडवेज का रूट बंद करना पड़ा है : जी.एम. परमवीर सिंह इस पूरे मामले पर बोलते हुए रूपनगर के पंजाब रोडवेज डिपो के जी.एम. परमवीर सिंह ने कहा कि नूरपुरबेदी से रूपनगर के लिए सुबह करीब 7.15 बजे चलने वाली पंजाब रोडवेज का रूट, 15 साल का सफर तय करने के बाद बस की खराब हालत होने के चलते करीब 7-8 दिनों से बंद करना पड़ा है। जबकि, उन्हें सी.टी.यू. बस के रूट बंद होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह पंजाब सरकार द्वारा 350वां शहीदी दिवस मनाए जाने को लेकर करवाए जा रहे समागमों के प्रबंधों में जुटे हुए हैं। जिसके बाद जल्द ही एक और बस का इंतजाम कर उपरोक्त समस्या को हल किया जाएगा।

उधमपुर में गूँजा आईटीबीपी का जज़्बा, 64वें स्थापना दिवस पर शानदार समारोह

उधमपुर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) ने अपना 64वां स्थापना दिवस बड़े उत्साह और गर्व के साथ मनाया। इस मौके पर 15वीं बटालियन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार उपस्थित रहे, साथ ही जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, नॉर्दर्न कमांडर प्रतीक शर्मा, डीजी जम्मू-कश्मीर नलिन प्रभात और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी शिरकत की। इस दौरान बंदी संजय कुमार ने आईटीबीपी के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी, परेड का निरीक्षण किया और स्थापना दिवस परेड की भव्य झलक देखी। मुख्य अतिथि बंदी संजय कुमार ने अपने संबोधन में आईटीबीपी के सभी जवानों को बधाई दी और उनकी कठिन हिमालयी परिस्थितियों में सेवा की सराहना की। उन्होंने उनकी निष्ठा, समर्पण और देश की सुरक्षा में पेशेवराना योगदान को भी हाईलाइट किया। आईटीबीपी के डीजी प्रवीण कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया और बल की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने आईटीबीपी की सीमा सुरक्षा, आपदा राहत, आंतरिक सुरक्षा, नक्सल ऑपरेशन और पर्वतारोहण व रेस्क्यू ऑपरेशन में योगदान पर जोर दिया। स्थापना दिवस परेड में बल की प्रमुख यूनिटों ने भाग लिया। इसमें महिला कंटिंजेंट, स्की टीम, माउंटेड कॉलम, कमांडो पैराट्रूपर्स, डॉग स्क्वाड और ब्रास बैंड शामिल थे। इसके साथ ही महिला हिम्मवीरों द्वारा सी-एसएसी ड्रिल, ड्रोन डिस्प्ले और मार्शल आर्ट परफॉरमेंस ने कार्यक्रम को और भी रोमांचक बना दिया। इस मौके पर पांच कर्मियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया, जबकि 24 अधिकारियों और जवानों को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक से नवाजा गया। साल के बेहतरीन यूनिट पुरस्कार भी इसी मौके पर दिए गए। 43 बटालियन को बेस्ट बॉर्डर बटालियन, 52 बटालियन को बेस्ट नॉन-बॉर्डर बटालियन, 27 बटालियन को बेस्ट एएनओ यूनिट, 18 बटालियन को बेस्ट क्लीन बटालियन, 25 बटालियन को बेस्ट ग्रीन बटालियन और 13 बटालियन को राजभाषा चालशील्ड ट्रॉफी (2024) से सम्मानित किया गया। अतिरिक्त महानिदेशक जनरल मुकेश सिंह ने धन्यवाद देते हुए मुख्य अतिथि और सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और बल की देश सेवा में अटूट समर्पण की प्रतिबद्धता को दोहराया। गौरतलब है कि आईटीबीपी की स्थापना 1962 में चीन के साथ युद्ध के बाद हुई थी। यह बल 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा की सुरक्षा करता है और दुनिया की सबसे ऊंची और कठिन जगहों पर काम करता है। आईटीबीपी नक्सल विरोधी अभियान, वीआईपी सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और देशभर में आंतरिक सुरक्षा कार्यों में भी अहम भूमिका निभाता है।

नीतीश सरकार को औवैसी का ऑफर: समर्थन को तैयार, लेकिन पूरी करनी होगी ये शर्त

नई दिल्ली  AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने की बात कही है। हालांकि, इसके लिए उन्हें एक शर्त भी रख दी। अमौर में जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि विकास केवल राजधानी पटना और पर्यटन स्थल राजगीर तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम नीतीश कुमार की सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं, लेकिन सीमांचल क्षेत्र को न्याय मिलना चाहिए। कब तक सब कुछ पटना और राजगीर के इर्द-गिर्द ही केंद्रित रहेगा? सीमांचल नदी कटाव, बड़े पैमाने पर पलायन और भयंकर भ्रष्टाचार से जूझ रहा है। सरकार को इन मुद्दों का समाधान करना होगा।'   बिहार के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा है। यह राज्य के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक है। हर साल कोसी नदी के उफान से यहां बाढ़ आती है। सीमांचल की लगभग 80% आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है। सीमांचल क्षेत्र की 24 विधानसभा सीटों में से ज्यादातर एनडीए के खाते में गईं, जहां गठबंधन ने 14 सीटें जीतीं। बिहार में NDA की भारी जीत के बावजूद ओवैसी की अगुवाई वाली एआईएमआईएम ने इस क्षेत्र में अपनी जमीन बनाए रखी। AIMIM ने 2020 के समान ही इस बार भी 5 सीटें जीतीं। हालांकि 2020 में पार्टी के चार विधायकों ने चुनाव के बाद आरजेडी में चले गए थे। विधायकों पर रखी जाएगी कड़ी नजर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि वे अपनी पार्टी के विधायकों पर कड़ी नजर रखेंगे और जवाबदेही वाला प्लान लागू करेंगे। उन्होंने कहा, 'हमारे पांचों विधायक हफ्ते में दो दिन अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र के कार्यालय में बैठेंगे। मुझे अपनी लाइव व्हाट्सएप लोकेशन के साथ फोटो भेजेंगे। इससे पता चलेगा कि वे वास्तव में वहीं हैं।' ओवैसी ने कहा कि हम यह काम छह महीने के अंदर शुरू करने की कोशिश करेंगे। मैं खुद भी हर 6 महीने में एक बार आने की कोशिश करूंगा। आम लोगों से मुलाकात की जाएगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़नी है। उन्होंने कहा, 'पटना यह जान चुका है कि सीमांचल की जनता पतंक छाप के साथ है और रहेगी। पटना को पैगाम सीमांचल से ही जाएगा।'

भगवंत मान का हमला तेज़: जत्थेदार की राजनीतिक नियुक्ति पर उठाए गंभीर सवाल

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बीते गुरुवार कार्यवाहक अकाल तख्त जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति धार्मिक नियमों के अनुसार उचित नहीं है और राजनीतिक रूप से प्रभावित है. सीएम मान ने यह टिप्पणी उस समय की जब जत्थेदार ने कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध को आनंदपुर साहिब में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से सिख मर्यादा का उल्लंघन करने पर कड़ी फटकार लगाई थी. धूरी में एक सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें अकाल तख्त की संस्था का सम्मान है, लेकिन इस समय जत्थेदार राजनीतिक रूप से नियोजित हैं, इसलिए वे निष्पक्ष नहीं रह सकते. जत्थेदार ने मंत्री सोंध से एक सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत स्पष्टीकरण देने को कहा है. गौरतलब है कि मार्च 2025 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने ज्ञानी रघबीर सिंह और ज्ञानी सुल्तान सिंह को हटाकर गर्गज को नियुक्त किया था. पहले भी उन्होंने सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था और मुख्यमंत्री मान की “गोलक” से जुड़ी टिप्पणियों पर उन्हें चेताया था. मुख्यमंत्री मान ने गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहीदी वर्षगांठ के अवसर पर धूरी में 142 गांवों और कस्बों के विकास के लिए 71 करोड़ रुपये के चेक वितरित किए. इतना ही नहीं बल्कि 17 गांवों में 7.57 करोड़ रुपये के 38 विकास कार्यों का उद्घाटन भी किया. मुख्यमंत्री मान ने श्रद्धालुओं से 23 से 25 नवंबर तक आनंदपुर साहिब में होने वाले राज्यव्यापी स्मरणोत्सव में शामिल होने का आग्रह किया.   उन्होंने बताया कि नगर कीर्तन पंजाब के अधिकांश हिस्सों में पहुंच चुके हैं. 25 नवंबर को राज्य स्तरीय रक्तदान शिविर, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान और “सरबत दा भला – एकता” कार्यक्रम आयोजित होंगे. विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री मान ने ये भी कहा कि अकाली नेतृत्व धर्म का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए करता रहा है. उन्होंने कहा कि जब विपक्ष जनता के बीच विश्वसनीयता खो चुका है, तो सरकार की निष्ठा पर सवाल उठाना केवल पाखंड है.  

धान खरीदी तिहार लेकर आया खुशियों और राहत की सौगात

खेम पटेल ने बेचा 86 क्विंटल धान, बोले- मिले पैसों से चुकाएंगे मकान बनाने का कर्ज रायपुर, 15 नवंबर से प्रदेश में शुरू हुआ धान खरीदी तिहार किसानों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया है।कबीरधाम जिले के ग्राम खिरसाली के किसान खेम सिंह पटेल को धान खरीदी के तहत अपनी उपज बेचकर बड़ी आर्थिक राहत मिली है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में कृषक हितैषी नीतियों और पारदर्शी व्यवस्था का परिणाम है कि धान खरीदी प्रक्रिया अब अधिक सरल और सुगम हो चुकी है। जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है। ख़ेम बताते हैं कि ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के चलते खरीदी केंद्रों में भीड़ से छुटकारा मिला और सहजता से 86.40 क्विंटल धान बिना किसी परेशानी के बेच दिया। सरकार द्वारा निर्धारित प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी तथा 31 सौ रूपये प्रति क्विंटल कीमत ने खेम पटेल को उनकी मेहनत का पूरा सम्मान दिया। करीब 5 एकड़ जमीन से मिली इस कमाई ने उनके परिवार की एक बड़ी चिंता दूर कर दी है। खेम पटेल बताते हैं कि पिछले वर्ष परिवार—माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों—के लिए उन्होंने एक पक्का मकान बनवाया था, जिसका कुछ कर्ज शेष था। धान का भुगतान समय पर मिलने से अब वे सबसे पहले अपना मकान का बाकी कर्ज चुकाने जा रहे हैं। खेम पटेल कहते हैं कि पारदर्शी व्यवस्था, सही मूल्य और राशि का त्वरित सीधे बैंक खाते में भुगतान किसानों में भरोसा बढ़ा रहा है। उनके अनुसार सरकार की यह व्यवस्था न केवल किसानों को राहत दे रही है, बल्कि उनकी मेहनत की कमाई का सही सम्मान भी सुनिश्चित कर रही है।

गे-लेस्बियन विवाह से भूकंप की बात कहकर कन्हैया भेलारी हुए ट्रोल, रोहिणी का पुराना बयान फिर चर्चा में

पटना  बेटियों को मायके से दूर रहना चाहिए जैसा बयान देने पर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या से भर पेट बात सुनने वाले बिहार के पत्रकार कन्हैया भेलारी का एक नया वीडियो वायरल हो गया है। इस वीडियो में उनकी पौराणिक सोच का स्तर और नीचे गिरते देखा जा सकता है। यू-ट्यूब चैनल लल्लटॉप के शो में कन्हैया भेलारी यह कहकर सबको चौंका दे रहे हैं कि लड़का का लड़का और लड़की का लड़की से शादी (सेम सेक्स मैरिज, गे मैरिज, लेस्बियन मैरिज, समलैंगिक संबंध) करने के कारण भूंकप आ रहे हैं। चैनल का पत्रकार जब उनको भूकंप के वैज्ञानिक कारण बताता है तो वो और जिद पकड़ लेते हैं और कहते हैं कि एडवांस होने का मतलब ये सब नहीं है।   कन्हैया भेलारी को रोहिणी आचार्या ने टीवी चैनलों पर उनके बयानों को लेकर 18 नवंबर को फोन करके काफी फटकारा था। भेलारी ने किसी चैनल पर कहा था कि बेटियों को शादी के बाद नैहर यानी मायके से दूर रहना चाहिए। बेटियों को शादी, पर्व त्योहार और न्योता पर ही मां-बाप के घर आना चाहिए। बता दें कि चुनाव नतीजों के अगले दिन लालू यादव के परिवार में रोहिणी आचार्या और तेजस्वी यादव के बीच हार के कारणों को लेकर विवाद हुआ था। रोहिणी ने आरोप लगाया था कि संजय यादव का नाम लेने पर उन्हें गाली दी गई और उन पर चप्पल चलाया गया। रोहिणी तब से दिल्ली होते हुए मुंबई में अपनी सास के पास हैं। ताजा वायरल बयान में कन्हैया भेलारी महिला का महिला और पुरुष का पुरुष से समलैंगिक संबंध को गलत बताते हुए कह रहे हैं कि इन्हीं कारणों से भूकंप आता है। भेलारी ने कहा है कि आजकल ऐसा हो गया है कि लड़का दूसरे लड़के से शादी कर लेता है और कोई लड़की किसी लड़की से ही शादी कर लेती है। वो इसे ठीक नहीं मानते। जब उनसे कहा गया कि अगर कोई समलैंगिक संबंध से खुश है तो उनको क्या समस्या है। उनके अपने अधिकार हैं जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने रजामंदी दे दी है। इसे अपराध की श्रेणी से बाहर रखा है। इस पर भेलारी ने अजीबोगरीब जवाब दिया। भेलारी ने कहा कि इसीलिए भूकंप आता है। जब चैनल ने भूकंप का वैज्ञानिक कारण बताया तो भेलारी ने कहा- इसका कोई मतलब है जी। एडवांस होने का यह अर्थ नहीं है। हम इसको नहीं मानते। कन्हैया भेलारी ने एक न्यूज चैनल के डिबेट में कहा था कि ब्याही बेटियों को अपने मायके में कम रहना चाहिए। यहां कुंडली मारकर नहीं बैठना चाहिए। उन्हें किसी खास अवसर पर मायके आना चाहिए और फिर चले जाना चाहिए। बेटियों को पिता परिवार के मसलों में दखल नहीं देना चाहिए। इस पर रोहिणी आचार्या ने उनकी क्लास लगा दी थी और कहा था कि बेटियों के हक में दखल देने का अधिकार आपको किसने दे दिया। रोहिणी ने फोन पर बातचीत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया था।

सरकार बदली, चुनौतियाँ वही: शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर क्या होगा असर?

छपरा बिहार में नई सरकार के गठन के बाद मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की उम्मीद लगाए बैठी जनता तब हैरान रह गई, जब मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री जैसे अहम पद फिर से पुराने चेहरों को ही सौंप दिए गए। इसके बाद राज्य की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में वास्तविक सुधार को लेकर कई सवाल तेज हो गए हैं। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल में स्थिरता प्रशासनिक निरंतरता के लिहाज से फायदेमंद हो सकती है, लेकिन जिन विभागों की पिछले कार्यकाल में सबसे ज्यादा आलोचना हुई, जैसे सरकारी अस्पतालों की बदहाली, चिकित्सकों-कर्मियों की कमी, स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति और कमजोर आधारभूत संरचना उनमें बदलाव न होना जनता के मन में संदेह पैदा कर रहा है। स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार को लेकर बढ़ा असंतोष स्थानीय लोगों का कहना है कि सदर अस्पतालों से मरीजों को बिना इलाज रेफर कर देने की पुरानी व्यवस्था अब खत्म होनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की आधारभूत संरचना तो तैयार कर दी गई है, लेकिन डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की भारी कमी आज भी बनी हुई है। विगत वर्षों में स्वास्थ्य विभाग पर कई गंभीर आरोप लगे हैं, अस्पतालों में दवाओं और मशीनों की कमी, पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं का कमजोर होना और बेहतर इलाज के लिए बिहार से बाहर जाने वाले मरीजों की बढ़ती संख्या प्रमुख मुद्दे हैं। ऐसे में पुरानी टीम का ही पुनः जिम्मेदारी संभालना जनता के बीच यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या अबकी बार वाकई बदलाव देखने को मिलेगा। सारण प्रमंडल के सारण, सिवान और गोपालगंज जिलों सहित कई क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं “इलाज” से ज्यादा “रेफर” आधारित व्यवस्था पर निर्भर हैं। सड़क हादसे, गोलीबारी और अन्य आपात मामलों में प्रखंड अस्पतालों से लेकर जिला सदर अस्पताल तक केवल औपचारिकता निभाकर मरीजों को पटना पीएमसीएच या अन्य मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता है। शिक्षा विभाग में भी सुधारों पर सवाल शिक्षा विभाग पर भी सरकार लगातार निशाने पर रही है। शिक्षकों की भारी कमी, स्कूलों में संसाधनों की दयनीय स्थिति और सरकारी स्कूलों के गिरते परिणामों ने चिंता बढ़ाई है। विभाग से जुड़े अधिकारियों व शिक्षक संघों का कहना है कि बिना संरचनात्मक सुधार के केवल घोषणाओं से शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है। हालांकि राज्य सरकार ने दावा किया है कि 2025–30 के कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, और बजट व इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों स्तरों पर बड़े कदम उठाए जाएंगे। क्या बदलेगी बिहार की तस्वीर? अब जनता की नजर इस बात पर है कि क्या पुरानी टीम, नई नीतियों और नई ऊर्जा के साथ सचमुच स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों की जर्जर स्थिति को बदल पाएगी। विशेषकर शिक्षा विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मौजूदा शिक्षा मंत्री को सौंपी गई है। जनता अब सरकारी दावों नहीं, बल्कि जमीनी बदलाव का इंतजार कर रही है।

बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने MP सिविल जज परीक्षा का रिज़ल्ट दोबारा जारी करने को कहा, 191 पद खाली—एक भी ST उम्मीदवार चयनित नहीं

जबलपुर  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सिविल जज जूनियर डिवीजन  भर्ती परीक्षा-2022 के परिणाम पर बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) अभ्यर्थियों के चयन पर पुनर्विचार किया जाए। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकल पीठ ने “एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस” की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।  याचिका में भर्ती के नियम 194 में संशोधन को चुनौती दी गई थी। दरअसल, सिविल जज भर्ती-2022 में कुल 199 पदों के लिए विज्ञापन निकला था, जिसमें बैकलॉग के पद भी शामिल थे। इसमें अनारक्षित वर्ग: 48 में से 17 बैकलॉग,  SC: 18 में से 11 बैकलॉग , ST: 121 में से 109 बैकलॉग ,  OBC: 10 में से 1 बैकलॉग है।  वहीं हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मुख्य परीक्षा में एससी उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 45% और एसटी के लिए 40% अंक मानें जाएं. वहीं इंटरव्यू में भी 20 अंकों की बाध्यता में राहत देने के निर्देश दिए गए हैं. कोर्ट का कहना है कि पात्र उम्मीदवारों को मौका देना न्याय की मूल भावना है. अब एक्जाम सेल को जल्द ही नई सूची कोर्ट में पेश करनी होगी. यह फैसला कई परिवारों की उम्मीदें फिर से जगा रहा है. मेन्स और इंटरव्यू के बाद अंतिम रूप से 89 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। हैरानी की बात यह रही कि इन 89 चयनित अभ्यर्थियों में ओबीसी वर्ग के 15 अभ्यर्थी तो शामिल थे, लेकिन SC वर्ग के केवल 3 और ST वर्ग का एक भी अभ्यर्थी जगह नहीं बना पाया। याचिकाकर्ता का कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में बैकलॉग पद होने के बावजूद SC-ST अभ्यर्थियों का इतना कम प्रतिनिधित्व संवैधानिक आरक्षण के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है।  साथ ही नियम 194 में किए गए संशोधन को भी असंवैधानिक बताया गया। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए अंतिम निर्णय तक सुरक्षित रखा है, लेकिन फिलहाल SC-ST अभ्यर्थियों के चयन पर पुनर्विचार करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि कोई अभ्यर्थी योग्य पाया जाता है तो उसे नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए।  दों के खाली रहने को 'अत्यंत गंभीर' बताया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और पुष्पेंद्र शाह ने तर्क दिया कि परीक्षा सेल ने आरक्षण नीति का सही ढंग से पालन नहीं किया। बैकलॉग पदों को अनारक्षित वर्ग को देना, न्यूनतम योग्यता में छूट न देना और साक्षात्कार में कम अंक देना भेदभाव को दर्शाता है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि सिविल जज परीक्षा के परिणामों में 191 पदों के बदले केवल 47 अभ्यर्थियों का चयन व्यवस्था की गंभीर त्रुटि को दर्शाता है। अजजा वर्ग के निर्धारित पदों को भरा ही नहीं जा सका। एक राज्य के तौर पर यह निराशाजनक है। सरकार वंचित वर्ग के उत्थान में पूरी तरह विफल साबित हुई है। हम न्यायपालिका या आरक्षण पर प्रश्न नहीं उठा रहे, किंतु परिणाम बताते हैं कि आरक्षित वर्ग को आज भी सीखने और तैयारियों के संसाधन और अवसर उपलब्ध नहीं हैं। राज्य को इस बात के प्रयास बढ़ाने होंगे, जिसमें वंचित समुदाय को बेहतर अवसर मिल सकें। लगातार हो रहा विरोध सबसे बड़ी चिंता यह रही कि 191 सीटों में से एसटी वर्ग का एक भी उम्मीदवार चयनित नहीं हुआ, जबकि 121 सीटें एसटी वर्ग की खाली रह गईं. एससी वर्ग से भी केवल एक ही अभ्यर्थी का चयन हुआ. कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर माना. वहीं परिणाम आने के बाद दलित, आदिवासी व ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार लगातार विरोध कर रहे थे. अब संशोधित सूची आने से इस विवाद पर बड़ा असर पड़ सकता है और डिजर्विंग उम्मीदवारों को न्याय मिल सकता है. सिलेक्शन नहीं हो पाने की एक वजह यह बताई एडवोकेट मोहर सिंह बताते हैं कि इस बार का एग्जाम काफी कठिन था। कानूनों से ज्यादा सवाल कोर्ट के जजमेंट्स से जुड़े हुए थे। इस कारण अभ्यर्थियों को जवाब देने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वैकल्पिक एग्जाम भी कठिन था, जिसके कारण कम अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा तक पहुंच पाए। मुख्य परीक्षा में भी 50% अंक लाना जरूरी था। अधिकतर स्टूडेंट 50% का आंकड़ा नहीं छू पाए और पहले ही बाहर हो गए। इस तरह का था परीक्षा पैटर्न प्रारंभिक परीक्षा     प्रारूपः वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्यीय प्रश्न)     अवधि: 2 घंटे     कुल अंकः 150 (150 प्रश्न, प्रत्येक 1 अंक का) मुख्य परीक्षा     प्रारूपः वर्णनात्मक (निबंध-आधारित)     अवधिः प्रत्येक पेपर के लिए 3 घंटे     कुल पेपर: 4     कुल अंक: 400 (प्रत्येक पेपर 100 अंकों का) विषय : भारत का संविधान, सिविल प्रक्रिया संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, लेखन कौशल और न्यायालयीन अभ्यास जैसे विषय शामिल थे। अनिवार्यता : सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 200 अंक और अन्य वर्गों के लिए 190 अंक लाना जरूरी। मौखिक साक्षात्कार कुल अक: 50 चयनः अंतिम चयन के लिए मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के कुल अंकों को जोड़ा गया।