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जस्टिस सूर्यकांत का शपथ ग्रहण होगा ऐतिहासिक, अंतरराष्ट्रीय जज करेंगे समारोह में भाग

नई दिल्ली भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक अभूतपूर्व और कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षण देखने को मिलेगा। दरअसल सोमवार, 24 नवंबर को राष्ट्रपति भवन में होने वाले मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह में दुनिया के कई देशों के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जज शामिल होंगे। बार एंड बेंच से बातचीत में तैयारियों से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर विदेशी न्यायिक प्रतिनिधि भारत के किसी मुख्य न्यायाधीश के शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित होंगे। 53वें मुख्य न्यायाधीश बनेंगे न्यायमूर्ति सूर्यकांत न्यायमूर्ति सूर्यकांत अपने लंबे और महत्वपूर्ण न्यायिक करियर के बाद भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। उनका कार्यकाल कई अहम संवैधानिक फैसलों, न्यायिक संस्थानों में सुधार और कानूनी सहायता व्यवस्था को मजबूत बनाने की पहलों के लिए जाना जाता है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट जज बनने से पहले वे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे। कूटनीतिक महत्व वाला आयोजन भारत सरकार ने विदेशी न्यायिक गणमान्य व्यक्तियों की पूरी सूची जारी की है। इनमें भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस, नेपाल, श्रीलंका और ब्राजील के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और उनके परिवारजन शामिल हैं। यह उपस्थिति न केवल भारतीय न्यायपालिका की वैश्विक प्रतिष्ठा को दिखाती है बल्कि भारत के न्यायिक और कूटनीतिक संबंधों में बढ़ती निकटता का संकेत भी देती ह विदेशी न्यायिक प्रतिनिधियों की सूची भूटान     जस्टिस ल्योनपो नोरबू शेरिंग, भूटान के चीफ जस्टिस;     ल्हादेन लोटे, भूटान के चीफ जस्टिस की पत्नी केन्या     जस्टिस मार्था कूमे, केन्या के सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस और प्रेसिडेंट     जस्टिस सुसान न्जोकी न्दुंगु, केन्या की सुप्रीम कोर्ट जज। मलेशिया     जस्टिस तन श्री दातुक नलिनी पथमनाथन, फेडरल कोर्ट ऑफ मलेशिया की जज     पशुपति शिवप्रगसम, फेडरल कोर्ट ऑफ मलेशिया के जज के पति मॉरीशस     जस्टिस बीबी रेहाना मुंगली-गुलबुल, मॉरिशस की चीफ जस्टिस     रेबेका हन्ना बीबी गुलबुल, मॉरिशस के चीफ जस्टिस की बेटी नेपाल     जस्टिस प्रकाश मान सिंह राउत, नेपाल के चीफ जस्टिस     जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, जज, नेपाल सुप्रीम कोर्ट     अशोक बहादुर मल्ला, जस्टिस सपना प्रधान मल्ला के पति     अनिल कुमार सिन्हा, नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और अभी नेपाल सरकार में कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्री     उर्सिला सिन्हा, अनिल कुमार सिन्हा की पत्नी। श्रीलंका     जस्टिस पी पद्मन सुरसेना, श्रीलंका के चीफ जस्टिस     सेपालिका सुरसेना, श्रीलंका के चीफ जस्टिस की पत्नी     जस्टिस एस. थुरैराजा, PC, जज, सुप्रीम कोर्ट ऑफ श्रीलंका     शशिकला थुरैराजा, जस्टिस एस. थुरैराजा की पत्नी     जस्टिस अहमद नवाज, जज, सुप्रीम कोर्ट ऑफ श्रीलंका     रिजान मोहम्मद धलिप नवाजा, जस्टिस अहमद नवाजा की पत्नी ब्राजील     एंटोनियो हरमन बेंजामिन, नेशनल हाई कोर्ट ऑफ ब्राजील- सुपीरियर ट्रिब्यूनल डे जस्टिसा के मिनिस्टर न्यायपालिका के वैश्विक सहयोग का संकेत विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति भारतीय न्यायपालिका में बढ़ते विश्वास और न्यायिक आदान–प्रदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आयोजन भविष्य में न्यायिक सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान और आपसी व्यवहारिक समझ को भी मजबूत कर सकता है। सोमवार का यह आयोजन भारतीय न्यायपालिका के लिए न केवल ऐतिहासिक बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

अयोध्या में ध्वजारोहण समारोह के लिए काशी से विशेष प्रतिनिधिमंडल रवाना, आयोजन की तैयारियाँ अंतिम चरण में

अयोध्या  उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्री रामलला मंदिर में ध्वजारोहण समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं। देश भर से रामभक्त एवं गणमान्य व्यक्ति इस आयोजन में शामिल होंगे, जिसमें काशी से सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर, अपना घर आश्रम के डॉ. के. निरंजन, डोमराजा परिवार के सिकंदर चौधरी, सुनील चौधरी, पवन चौधरी सहित कई लोग इस समारोह में शामिल होंगे। सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर ने  कहा कि काशी की पावन धरती से अयोध्या पहुंचकर इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनना जीवन का एक अद्भुत क्षण होगा। डोमराजा परिवार के सुनील चौधरी ने कहा कि प्रभु श्रीराम में अटूट आस्था रखने वाले समाज के हर वर्ग के लोगों को आमंत्रित किया गया है। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है। श्री रामलला मंदिर में ध्वजारोहण समारोह में काशी तथा आसपास के जिलों से भी कई लोगों को आमंत्रण भेजा गया है। काशी से सभी आमंत्रितजन 24 नवंबर को बस द्वारा अयोध्या के लिए रवाना होंगे। सभी के ठहरने की व्यवस्था कारसेवकपुरम में की गई है। काशी प्रांत के भदोही, मिर्जापुर, जौनपुर, वाराणसी, कौशांबी, प्रयागराज सहित कई जिलों से लोग अयोध्या पहुंचेंगे। 25 नवंबर को ही राम मंदिर में क्यों हो रहा भव्य कार्यक्रम? जानें इसके पीछे की बड़ी वजह प्रभु राम की नगरी अयोध्या में 25 नवंबर को एक ऐतिहासिक कार्य होने जा रहा है, जिसके लिए खास तैयारियां चल रही हैं. अयोध्या में यह पहली बार होगा, जब राम जन्मभूमि परिसर में बने भव्य राम मंदिर में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना 25 नवंबर दिन मंगलवार को करेंगे. हर राम भक्त के मन में यह सवाल है कि आखिर 25 नवंबर को ऐसा क्या है कि इसी दिन यह शुभ घड़ी आई है. इस दिन का क्या महत्व है. 22, 23 अथवा 24 तारीख क्यों नहीं रखा गया.  दरअसल 25 नवंबर का दिन बेहद खास है. धार्मिक दृष्टि से यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन विवाह पंचमी है और इसी दिन त्रेतायुग में प्रभु राम और माता जानकी का विवाह हुआ था. इस दिन किया गया कार्य शुभ माना जाता है. अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि 25 नवंबर का दिन मंगलवार पढ़ रहा है और इस दिन चंद्रमा भी मकर राशि में विद्यमान है. पंडित जी ने दी खास जानकारी उन्होंने बताया कि मंगलवार दिन होने की वजह से हनुमान जी महाराज की भी विशेष कृपा इस दिन पर रहेगी. ऐसी स्थिति में इस दिन कई शुभ योग का निर्माण भी हो रहा है. जिस समय प्रधानमंत्री मोदी दोपहर 11:45 से लेकर 12:29 के बीच राम मंदिर के शिखर पर ध्वज की स्थापना करेंगे, वह मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त है और भगवान राम का जन्म भी दोपहर में अभिजीत मुहूर्त में ही हुआ था. यही वजह है कि यह दिन बेहद खास और ऐतिहासिक दिन है. ज्योतिषाचार्य ने इस शुभ दिन को ऐसे ही नहीं चुना. इसके लिए बहुत अध्ययन किया गया, जिसके बाद इस दिन को सर्वोत्तम दिन माना गया. 25 नवंबर को मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है, जिसे पूरे भारत में विवाह पंचमी के रूप में जाना जाता है. इस पावन तिथि पर त्रेतायुग में भगवान श्री राम और माता जानकी का विवाह भी हुआ था. ध्वज स्थापना अनुष्ठान में वेद सूक्तों के साथ ध्वज का पूजन व दिव्य औषधियों से स्नान के उपरांत समस्त देवों का आह्वान कर उनकी आधान किया जाएगा। इसके उपरांत निर्धारित मुहूर्त में ध्वज आरोहण के लिए मुख्य यजमान को सौंपा जाएगा। अन्तर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के प्रभारी व पुरातत्ववेत्ता डा संजीव कुमार सिंह बताते हैं कि ध्वज स्थापना से पूर्व श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के द्वारा बनाई गयी परिकल्पना समिति ने विभिन्न शास्त्रों का सम्यक अध्ययन कर एक वीडियो प्रजन्टेशन तैयार किया था। इस प्रजन्टेशन को लेकर अलग-अलग संतों एवं विद्वानों से विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप से ध्वज की परिकल्पना को साकार रुप दिया गया। उन्होंने ध्वज के प्रतीक चिह्नों को लेकर बताया कि कोविदार का वृक्ष त्रेतायुग के राजवंश का प्रतीक है। इसके अलावा भगवान राम सूर्यवंशी हैं और सूर्य भी ऊर्जा -प्रकाश व गति का सूचक है जो जीवन को जीवंतता प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि राम मंदिर का ध्वज विजय के साथ धार्मिकता-आध्यात्मिकता और सहनशीलता का प्रतीक है जो कि सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे भवन्तु निरामया का संदेश सम्पूर्ण विश्व को देखा। 5 साल में विशालकाय मंदिर तैयार ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 5 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम के जन्म स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण पूरा हो गया है. 5 अगस्त साल 2020 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के लिए शिलान्यास किया था. उसी के साथ मंदिर निर्माण का कार्य आरंभ हुआ था. 5 वर्ष में एक विशालकाय मंदिर बनकर तैयार हो गया है. उन्होंने कहा कि 25 नवंबर दिन मंगलवार मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की शुभ विवाह के शुभ अवसर पर मंदिर के शिखर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धर्म ध्वज की स्थापना करेंगे. यह अत्यंत शुभता का समय है. संपूर्ण सनातनियों के लिए यह अवसर मंगलकारी है, जीवन में ऐसा अवसर अब कभी नहीं आएगा.

विराट का अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड, जिसे तोड़ना लारा के 400 रन से भी ज्यादा कठिन

मुंबई  भारत के धाकड़ बल्लेबाज विराट कोहली के नाम पर एक ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है, जिसे शायद ही दुनिया का कोई भी बल्लेबाज तोड़ पाएगा. विराट कोहली का ये वर्ल्ड रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा के एक टेस्ट पारी में बनाए गए 400 रन के महारिकॉर्ड से भी बेहद कठिन है. विराट कोहली के नाम वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में शतकों की फिफ्टी जड़ने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है. विराट कोहली वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में 50 शतक पूरा करने वाले दुनिया के पहले और इकलौते बल्लेबाज हैं. नामुमकिन है विराट का ये वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ना वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में विराट कोहली के नाम अभी तक कुल 51 शतक जड़ने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है. आज के दौर में जब काफी कम संख्या में वनडे इंटरनेशनल मैच खेले जा रहे हैं, ऐसे में विराट कोहली के वनडे शतकों के वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ना नामुमकिन के बराबर है. विराट कोहली को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वनडे बल्लेबाजों में से एक माना जाता है. विराट कोहली भारत के लिए वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हैं. वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में कोहली का रिकॉर्ड विराट कोहली ने भारत के लिए अब तक 305 वनडे मैचों में 57.71 की औसत से 14255 रन बनाए हैं, जिसमें 51 शतक और 75 अर्धशतक शामिल हैं. इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर 183 रन रहा. वनडे में विराट कोहली के नाम 5 विकेट हैं और उनका बेस्ट प्रदर्शन 13 रन देकर 1 विकेट रहा है. विराट कोहली ने 18 अगस्त 2008 को भारत के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था. विराट कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ अपना वनडे इंटरनेशनल में डेब्यू किया था. इंटरनेशनल क्रिकेट में 82 शतक विराट कोहली के नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में 82 शतक जड़ने का रिकॉर्ड दर्ज है. इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक ठोकने के मामले में सचिन तेंदुलकर के बाद विराट कोहली का नाम आता है.सचिन तेंदुलकर ने इंटरनेशनल क्रिकेट में 100 शतक ठोके हैं. सचिन तेंदुलकर ने अपने 22 साल 91 दिन लंबे वनडे इंटरनेशनल करियर में 463 वनडे मैचों की 452 पारियों में 44.83 की बेहतरीन औसत से 18426 रन बनाए हैं. सचिन तेंदुलकर ने इस दौरान 49 शतक और 96 अर्धशतक जमाए हैं. सचिन तेंदुलकर का वनडे इंटरनेशनल करियर में बेस्ट स्कोर नाबाद 200 रन रहा है. 

राज्य के 15 अफसरों को IAS–IPS में प्रमोशन, पांच पुलिस अफसरों का चयन IPS अवॉर्ड के लिए

भोपाल मध्यप्रदेश में राजधानी दिल्ली में हुई डीपीसी (Departmental Promotion Committee) की अहम बैठक में राज्य सेवा के 1997-98 बैच के 15 अधिकारियों के प्रमोशन पर विचार किया गया। इसमें राज्य पुलिस सेवा के पांच अफसरों को IPS अवॉर्ड के लिए चुना गया है। दो वरिष्ठ अफसर अटके जांच के कारण वरिष्ठता सूची में शीर्ष पर आए सीताराम ससत्या और अमृत मीणा के नाम पर प्रारंभिक स्तर पर पेच फंस गया, क्योंकि दोनों पर विभागीय जांच लंबित है। सूत्रों के अनुसार, अमृत मीणा को प्रोविजनल IPS बनाया गया है — यानी दो माह बाद होने वाली अगली डीपीसी तक उन्हें क्लीनचिट लेनी होगी, वरना प्रमोशन स्वतः निरस्त माना जाएगा। वहीं सीताराम ससत्या को प्रोविजनल सूची में भी स्थान नहीं मिला। पहले नोटिफिकेशन निरस्त, अब दोबारा डीपीसी इससे पहले 12 सितंबर को डीपीसी हुई थी, लेकिन नोटिफिकेशन जारी न होने और तकनीकी कारणों से प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद 21 नवंबर को दोबारा डीपीसी की गई, जिसमें प्रमोशन को लेकर अंतिम विचार हुआ। इन अधिकारियों को मिला IPS अवॉर्ड सूत्रों के मुताबिक इस डीपीसी में निम्न अफसरों का नाम IPS अवॉर्ड सूची में शामिल किया गया है: अमृत मीणा (प्रोविजनल) विक्रांत मुराब सुरेंद्र कुमार जैन आशीष खरे राजेश रघुवंशी हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। डीपीसी में शामिल प्रमुख अधिकारी डीपीसी की बैठक में MP मुख्य सचिव अनुराग जैन, एसीएस होम शिव शेखर शुक्ला, डीजीपी कैलाश मकवाना शामिल हुए।

माघ मेला शुरू, संगम तट पर आस्था का महापर्व; पवित्र स्नान तिथियों की जानकारी

 प्रयागराज संगम तट पर हर वर्ष लगने वाला माघ मेला बेहद खास है. आध्यात्मिक मेलों में से एक माना जाने वाला माघ मेला पूरे एक माह तक चलता है. यह मेला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है. इसे तप, साधना, संयम और जागरण का महापर्व कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि हर वर्ष मकर संक्रांति से लेकर पूरा माघ महीना लाखों श्रद्धालु संगम तट पर आकर स्नान, पूजा और साधना में लीन रहते हैं.  पुराणों में संगम को देवभूमि और पुण्यस्थल बताया गया है, जबकि अक्षयवट, सरस्वती कूप और त्रिवेणी क्षेत्र को प्राचीन काल से तपस्थली माना गया है. इतिहासकारों के अनुसार यह मेला कई हजार वर्षों से निरंतर आयोजित होता आ रहा है. समय के साथ इसकी भव्यता में लगातार बढ़ोतरी हुई है. आइए जानते हैं 2026 में माघ मेला की शुरुआत कब होगी, यह कितने दिनों तक चलेगा और इस दौरान पवित्र स्नान की तिथियां क्या रहेंगी. माघ मेला 2026 कब से कब तक  पंचांग के मुताबिक, माघ मेला की शुरुआत पौष पूर्णिमा के दिन से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलेगी. यानी माघ मेला 3 जनवरी 2026 से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 तक चलेगा. इस दौरान 6 प्रमुख माघ स्नान किए जाएंगे, जिसमें मौनी अमावस्या के स्नान को सबसे प्रमुख स्नान माना जाता है.  पौष पूर्णिमा – 3 जनवरी 2026 मेला का शुभारंभ पौष पूर्णिमा के पवित्र स्नान से होता है. इसी दिन कल्पवास भी प्रारंभ होता है. श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर अपने आध्यात्मिक तप की शुरुआत करते हैं.  मकर संक्रांति – 14 जनवरी 2026 मकर संक्रांति को सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है. इसे अत्यंत पुण्यदायी स्नान तिथि माना गया है. इसी दिन दूसरा शाही माघ स्नान होता है.  लाखों श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाते हैं.  मौनी अमावस्या – 18 जनवरी 2026 मौनी अमावस्या माघ मेला का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्नान पर्व माना जाता है.  मौन साधना, दान और संगम स्नान इस दिन विशेष फलदायी होते हैं.  यह दिन तीसरे प्रमुख स्नान के रूप में मनाया जाएगा.  वसंत पंचमी – 23 जनवरी 2026 बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक वसंत पंचमी को चौथा प्रमुख स्नान आयोजित होगा.  यह दिन सरस्वती पूजा और नए उत्साह का प्रतीक माना जाता है.  माघी पूर्णिमा – 1 फरवरी 2026 यह तारीख कल्पवासियों के लिए विशेष महत्व रखती है. माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान और दान को अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मेला का पांचवां बड़ा स्नान है.  महाशिवरात्रि – 15 फ़रवरी 2026 माघ मेला का समापन महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अंतिम स्नान के साथ होगा. भगवान शिव के ध्यान, उपवास और पूजा के साथ संगम स्नान करने का विशेष महत्व है.

महाशक्तिमान हथियारों की तैयारी: ब्रह्मोस के बाप की 7400 KMPH रफ्तार, Su-30MKI जैसे जेटों से ताकत बढ़ेगी

बेंगलुरु  ऑपरेशन सिंदूर के बाद स्‍ट्रैटजिक पॉलिसी में काफी बदलाव आया है. देसी टेक्‍नोलॉजी की मदद से फाइटर जेट और मिसाइल बनाने की रफ्तार को और तेज कर दिया गया है. भारत अभी भी फाइटर जेट का इंजन घरेलू स्‍तर पर नहीं बना पाता है, लेकिन अब इससे जुड़े प्रोजेक्‍ट पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी की मदद से पांचवीं पीढ़ी का देसी फाइटर जेट डेवलप करने के डिफेंस प्रोजेक्‍ट पर भी काम चल रहा है. भारत स्‍वदेशी एयर डिफेंस सिस्‍टम बनाने में जुटा है, जिसे ‘मिशन सुदर्शन’ का नाम दिया गया है. इसके साथ ही एक और अहम प्रोजेक्‍ट पर भी काम चल रहा है. भारत अल्‍ट्रा मॉडर्न हाइपरसोनिक मिसाइल डेवलप करने में जुटा है. यह मिसाइल मैक-5 या फिर 6 की रफ्तार से टारगेट की ओर मूव करने में सक्षम होगी. इसका मतलब यह हुआ कि हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल 7400 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे भी ज्‍यादा की रफ्तार से दुश्‍मनों पर धावा बोल सकती है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)  ET-LDHCM (Enabling Technologies for Long Duration Hypersonic Cruise Missile) हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल डेवलप करने में जुटा है. इस दिशा में डीआरडीओ को एक बड़ी सफलता मिली है. बता दें कि पाकिस्‍तान में तबाही मचाने वाली ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की स्‍पीड 2300 से 3700 किलोमीटर प्रति घंटे है. भारत ने 2024 में हाइपरसोनिक हथियार तकनीक के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई. DRDO ने ET-LDHCM कार्यक्रम के तहत महत्वपूर्ण प्रगति की पुष्टि की है. यह प्रोजेक्‍ट लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाली हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के लिए मूल तकनीक विकसित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है. रक्षा मंत्रालय की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, DRDO ने एक्टिव-कूल्ड स्क्रैमजेट इंजन का डिजाइन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. यह इंजन वह मुख्य तकनीक है, जो मिसाइल को लंबी दूरी तक हाइपरसोनिक गति (मैक 5 से अधिक) बनाए रखने में सक्षम बनाएगी. हाइपरसोनिक उड़ान के दौरान मिसाइल की बाहरी सतह और इंजन पर अत्यधिक तापमान पैदा होता है. ऐसे में एक्टिव कूलिंग सिस्टम बेहद जरूरी होता है, ताकि मिसाइल क्षतिग्रस्त न हो और अपनी गति बनाए रख सके. इसी कारण स्क्रैमजेट इंजन के एक्टिव-कूल्ड डिजाइन को पूरा होना भारत के लिए एक बड़े तकनीकी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. दुनिया के बहुत कम देशों ने ऐसी तकनीक पर प्रभुत्व हासिल किया है. फाइटर जेट बनेंगे महाशक्तिमान प्रोजेक्‍ट के तहत सिर्फ डिजाइन ही नहीं बल्कि एक सब-स्केल कम्बस्टर प्रोटोटाइप भी तैयार किया गया और उसका रीक्षण किया गया. यह परीक्षण हाई-एनथैल्पी टेस्ट फेसेलिटी में किया गया, जिसमें वास्तविक उड़ान जैसी परिस्थितियां तैयार की गई थीं. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रायल में 60 सेकंड तक स्थिर दहन (स्टेबल कम्बशन) हासिल किया गया, जो अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है. DRDO के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार, इस परीक्षण ने स्क्रैमजेट इंजन की पूरी क्षमता की पुष्टि की है और इससे भविष्य के पूर्ण-स्केल मॉडलों के विकास में मदद मिलेगी. ये उपलब्धियां भारत के पहले हाइपरसोनिक परीक्षण वाहन HSTDV की सफलता के बाद हासिल की गई हैं, जिसने 2020 में मैक 6 की गति प्राप्त की थी. हालांकि, ET-LDHCM प्रोजेक्‍ट उससे अलग है, क्योंकि यह सिर्फ गति पर नहीं बल्कि लंबे समय तक हाइपरसोनिक उड़ान पर केंद्रित है. यह तकनीक सामरिक हमलों से लेकर बड़े सैन्य अभियानों तक कई क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है. भविष्य में इसे लड़ाकू विमानों जैसे Su-30 MKI और आने वाले AMCA के साथ भी जोड़ा जा सकता है. एयर डिफेंस सिस्‍टम का तोड़ चीन और रूस की हाइपरसोनिक क्षमताओं के बीच यह प्रगति भारत की सामरिक क्षमता को काफी मजबूत करेगी. लंबी दूरी तक उड़ने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलें किसी भी दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को भेदने में सक्षम होती हैं और जरूरत पड़ने पर पारंपरिक या परमाणु वारहेड भी ले जा सकती हैं. वायुसेना के लिए इसका एयर-लॉन्च वर्ज़न भारत की गहरी मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा. इस परियोजना को करीब 500 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे यह साफ है कि रक्षा मंत्रालय भविष्य की ऐसी तकनीक पर ध्यान दे रहा है जिसके सैन्य और नागरिकदोनों तरह के उपयोग हो सकते हैं. इससे हाई-स्पीड एविएशन के क्षेत्र में भी बड़े फायदे देखने को मिल सकते हैं. भारत की यह प्रगति आने वाले वर्षों में देश की रक्षा क्षमता में एक नया अध्याय जोड़ने वाली मानी जा रही है.

कॉकरोच क्यों नहीं होते नष्ट? एटम बम से भी बचने वाले इस जीव के बिना धरती पर क्या खतरे?

नई दिल्‍ली. दुनिया की अधिकांश आबादी कॉकरोच को सिर्फ गंदगी और डर से जोड़कर देखती है. रसोई में अचानक भागते हुए दिखाई देना, खाने में घुस जाना या अलमारी में छिपे मिल जाना. ऐसे में अगर कोई कह दे कि धरती से कॉकरोच का नामोनिशान मिट जाए तो जीवन और भी आसान हो जाएगा. ज्यादातर लोग इस विचार से सहमत भी दिखेंगे लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है. वैज्ञानिक रिसर्च बताती है कि कॉकरोच का गायब होना सिर्फ घरों की सफाई का सवाल नहीं बल्कि पूरी धरती के इको-सिस्‍टम के लिए एक गंभीर चेतावनी होगी. जंगलों की उपज, मिट्टी की गुणवत्ता, खाद्य सीरीज का संतुलन, छोटे जीव-जंतुओं का अस्तित्व. सभी पर गहरी चोट पहुंचेगी. PNAS यानी प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन बताता है कि कॉकरोच के अदर मौजूद ब्लाटाबैक्टीरियम नामक बैक्टीरिया नाइट्रोजन को री-साइकिल कर आवश्यक पोषक तत्वों में बदलता है. यही वजह है कि कॉकरोच बेहद कठिन वातावरण में भी जीवित रहते हैं और उन्हीं जगहों पर इको-सिस्‍टम में संतुलन बनाए रखते हैं, जहां अन्य कीट जीवित नहीं रह सकते. अगर यह प्रजाति खत्म हो जाए तो अनेक प्राकृतिक प्रक्रियाएं रुक जाएंगी, जिनका असर इंसानी जीवन तक पहुंचेगा. एटम बम गिरा तो कुछ नहीं बचा, सिवाय एक जीव के जंगलों की क्लीनिंग मशीन कॉकरोच का एक बड़ा हिस्सा घरों में नहीं बल्कि घने जंगलों में बसता है. वे गिरे हुए पेड़ों, पत्तों, सड़े हुए पौधों और लकड़ी को चबाकर छोटे-छोटे कणों में बदलते हैं. यही प्रक्रिया जंगल की मिट्टी में नाइट्रोजन और अन्य पोषक तत्व वापस भेजती है. अगर कॉकरोच गायब हो जाएं तो जंगल की जमीन पर जैविक कचरे की परतें जमा हो जाएंगी. डिसोल्यूशन यानी विघटन की गति धीमी पड़ जाएगी और मिट्टी की उर्वरता घटने लगेगी. धीरे-धीरे पेड़ों की वृद्धि कमजोर होगी और पूरी वन-व्यवस्था थकान महसूस करने लगेगी. असंख्य जीवों के आहार का आधार एक छोटा सा कीट गायब हो जाए, तो लगता है फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन पारिस्थितिकी तंत्र इन्हीं छोटे-छोटे हिस्सों से टिके होते हैं. छिपकलियां, मेंढक, पक्षी, छोटे स्तनधारी और कई कीट कॉकरोच पर निर्भर रहते हैं. वे एक भरोसेमंद और एक निरंतर उपलब्ध भोजन है. यदि वे अचानक गायब हो जाएं तो— • शिकारियों को वैकल्पिक भोजन ढूंढना पड़ेगा, • प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, • कई छोटे जीव भूख से मरने लगेंगे, • और खाद्य सीरीज में ‘डोमिनो इफेक्ट’ शुरू हो जाएगा. नाइट्रोजन फैक्ट्री यदि यह प्रजाति खत्म हो जाए, तो कई पारिस्थितिक निच खाली रह जाएंगे और विविधता में भारी गिरावट आएगी. कॉकरोच के शरीर में मौजूद Blattabacterium बैक्टीरिया अपशिष्टों को अमीनो एसिड और विटामिन में बदल देता है. यह प्रकृति का अनोखा सहयोगी तंत्र है. यही वजह है कि वे— • कड़े, न्‍यूट्रीशन की कमी में भी जीवित रहते हैं, • उन जगहों को संतुलन में रखते हैं जहां दूसरे कीट नहीं पहुंच पाते. कृषि पर बड़ा असर कॉकरोच खेतों के आसपास भी सड़ी-गली चीजों को तोड़कर मिट्टी में वापस मिलाते हैं. उनके गायब होने पर— • जैविक कचरा धीमी गति से टूटेगा, • मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी बढ़ेगी, • किसानों को अधिक केमिकल फर्टिलाइजर डालने पड़ेंगे, • और इससे पानी प्रदूषण सहित पर्यावरणीय खतरे बढ़ जाएंगे. इस तरह, रसोई का ‘अनवांटेड कीड़ा’ खेतों की उपज बढ़ाने में चुपचाप मदद करता है. मिट्टी की सेहत बिगड़ेगी, जैव विविधता घटेगी मिट्टी केवल रेत या कंकड़ का मिश्रण नहीं बल्कि जीवित तंत्र है. कॉकरोच— • मृत पौधों को तोड़ते हैं, • मिट्टी में पोषक तत्व घोलते हैं, • और कई छोटे जीवों के लिए भोजन उपलब्ध कराते हैं. उनके गायब होने से कई क्षेत्रों में मिट्टी मृत होने लगेगी, पौधों की वृद्धि रुकेगी और पूरे खाद्य जाल पर असर पड़ेगा. पर्यावरण का अलार्म सिस्टम कई जंगल-निवासी कॉकरोच पर्यावरण में बदलाव का पहला संकेत देते हैं. उनकी संख्या घटे या बढ़े तो वैज्ञानिक अनुमान लगा लेते हैं कि किसी क्षेत्र में क्या गड़बड़ चल रही है. यदि कॉकरोच न रहें, तो वैज्ञानिकों के पास यह जैविक संकेतक ही नहीं बचेगा. कॉकरोच के बिना बीमार पड़ जाएगी पृथ्‍वी सच्‍चाई यह है कि कॉकरोच का गायब होना दुनिया को खत्म नहीं करेगा, लेकिन इसे कमजोर जरूर कर देगा. हम भले ही किचन में कॉकरोच को देखकर उससे नफरत करने लगते हों या फिर उसे मारने के लिए हिट का इस्‍तेमाल करते हों लेकिन सच्‍चाई में यही हमारे जीवन का आधार भी है. यानी जिसे हम एक परेशान करने वाला कीड़ा समझते हैं, वही प्राकृतिक दुनिया की कई अदृश्य मशीनों को चलाए रखता है. धरती पर कई जीव हैं जिनका महत्व हम देखते नहीं, कॉकरोच उनमें सबसे कम आंका जाने वाला नायक है. • जंगलों में विघटन धीमा होगा, • मिट्टी पोषक तत्व खो देगी, • खाद्य सीरीज टूटेंगी, • कृषि पर दबाव बढ़ेगा, • इको-सिस्‍ट का लचीलापन घटेगा. रेडिएशन का असर क्यों नहीं पड़ता? तिलचट्टे रेडिएशन के प्रति इतने सहनशील क्यों हैं, इसका जवाब उनके शरीर की जैविक संरचना में छिपा है. उनका कोशिका विभाजन बहुत धीमा होता है. रेडिएशन का सबसे घातक असर तेजी से विभाजित होने वाली कोशिकाओं पर पड़ता है, जैसे कैंसर सेल्स, आंत की कोशिकाएं, अस्थि मज्जा और बालों की जड़ें. मनुष्य में ये कोशिकाएं हर कुछ घंटे या दिन में विभाजित होती रहती हैं, इसलिए रेडिएशन उन्हें तुरंत नष्ट कर देता है. तिलचट्टे की कोशिकाएं हफ्तों या महीनों में एक बार ही विभाजित होती हैं. वे सिर्फ मोल्टिंग (खाल उतारने) के समय ही तेजी से बढ़ते हैं, जो उनके जीवन में सिर्फ 6-7 बार होता है. जब रेडिएशन आता है, तब उनकी ज्यादातर कोशिकाएं “आराम” की अवस्था में होती हैं. रेडिएशन उन्हें छू भी नहीं पाता. क्यों विकिरण उनके लिए गर्म चाय जैसा LD50 एटम बम विस्फोट की स्थिति में रेडिएशन की वो मात्रा है, जिसमें 50% जीव मर जाते हैं. मनुष्य के लिए 400 -1000 रेड रेडिएशन खतरनाक कुत्ता के लिए 350 रेड रेडिएशन खतरनाक चूहा के लिए 900 रेड में खतरा फल मक्खियों के लिए 64,000 रेड रेडिएशन खतरनाक तिलचट्टा के लिए 90,000 से 1,05,000 रेड खतरनाक हालांकि तिलचट्टे की कुछ प्रजातियां 1,50,000 तक रेडिएशन भी सह लेती हैं. यानी तिलचट्टा इंसान से 100-150 गुना ज्यादा रेडिएशन सह सकता है. हिरोशिमा के केंद्र में लगभग 10,000–20,000 रेड रेडिएशन था. ये इंसान … Read more

ईपीएफओ में सुधार की तैयारी, सैलरी कैप बढ़ने से लाभार्थियों की संख्या बढ़ेगी

नई दिल्‍ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अनिवार्य PF और पेंशन कंट्रीब्‍यूशन के लिए सैलरी लिमिट बढ़ाकर अपने पात्रता मानदंडों में बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है.  सरल शब्‍दों में कहें तो EPFO वेतन की मौजूदा सीमा (Wage Ceiling) को मौजूदा 15000 रुपये से बढ़ाकर 25000 रुपये करने का प्रस्‍ताव है. पहले यह 6,500 रुपये थी.इस कदम के पीछे का मकसद 1 करोड़ से ज्‍यादा कर्मचारियों को पेंशन और पीएफ की सामाजिक सुरक्षा में लाने का है.  यह तय करती है कि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत कौन स्वतः नामांकित है. मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम नागराजू ने कहा कि यह बहुत बुरी बात है कि 15,000 रुपये से थोड़ा ज़्यादा कमाने वाले इतने सारे लोगों के पास पेंशन कवर नहीं है और बुढ़ापे में उन्हें अपने बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता है. उन्‍होंने पुरानी पेंशन सीमाओं को अपडेट करने पर जोर दिया.  अभी क्‍या है नियम?  मौजूदा नियमों के तहत, केवल 15,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को ही ईपीएफ और ईपीएस के दायरे में लाया जाना चाहिए. इससे थोड़ा भी ज्‍यादा कमाने वाले लोग इससे बाहर निकल सकते हैं और नियोक्ताओं को उन्हें रजिस्‍टर्ड करने की कोई बाध्यता नहीं है. इससे शहरी निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा मामूली वेतन पाने के बावजूद, औपचारिक सेवानिवृत्ति बचत के बिना रह जाता है. 25000 रुपये हो सकती है ये लिमिट रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ईपीएफओ इस सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये कर सकता है और अगले साल की शुरुआत में केंद्रीय न्यासी बोर्ड द्वारा इस मामले पर विचार किए जाने की उम्मीद है. श्रम मंत्रालय के एक डाटा से पता चलता है कि सीमा में ₹10,000 की वृद्धि से एक करोड़ से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफ और ईपीएस कवरेज के अंतर्गत आ सकते हैं. ट्रेड यूनियनें लंबे समय से इस तरह के संशोधन की मांग कर रही हैं, उनका तर्क है कि बढ़ती जीवन-यापन लागत और वेतन स्तरों के बीच मौजूदा सीमा पुरानी हो चुकी है. ईपीएफओ फंड बढ़ेगा कर्मचारियों के लिए, इस बदलाव से मासिक अंशदान बढ़ेगा, ईपीएफ कोष बढ़ेगा और पेंशन भुगतान में सुधार होगा. वर्तमान में, कर्मचारी मूल वेतन का 12% योगदान करते हैं, जो नियोक्ता द्वारा बराबर किया जाता है, जो अपना हिस्सा ईपीएफ और ईपीएस के बीच विभाजित करते हैं. हाई सैलरी बेस से दोनों पक्षों का योगदान बढ़ेगा. नियोक्ताओं के लिए प्रति कर्मचारी लागत बढ़ेगी.

जिहादी प्लान का पर्दाफाश: डॉ. शाहीन ने बनाई ‘स्लीपर सेल’, शामिल थीं लड़कियां

कानपुर  दिल्ली लाल किले के पास हुए धमाके की जांच में नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच एजेंसियों के अनुसार, दिल्ली विस्फोट के बाद पकड़ी गई जैश-ए-मोहम्मद की लेडी विंग कमांडर डॉ. शाहीन ने कानपुर और आसपास के जिलों में टीनएजर लड़कियों को बहला-फुसलाकर अपना नेटवर्क तैयार किया था. इनमें ज्यादातर लड़कियां गरीब परिवारों से थीं, जिन्हें बेहतर जिंदगी और धार्मिक शिक्षा का झांसा देकर अपने ग्रुप में शामिल किया गया था. इतना ही नहीं, इस मामले की जांच कर रही जांच एजेंसी एनआईए के इनपुट पर यूपी एटीएस ने भी शुक्रवार को 10 से ज्यादा डॉक्टरों से पूछताछ की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सब मुख्य आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन और डॉ. आदिल के संपर्क में रहे थे. हालांकि अब तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है. अधिकारियों के अनुसार, जिन जिलों में डॉक्टरों से पूछताछ हुई, उनमें बहराइच, अलीगढ़, नोएडा, सहारनपुर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल और मुजफ्फरनगर शामिल हैं. एटीएस ने एनआईए को सौंप अहम सुबूत मुरादाबाद में तीन डॉक्टरों की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर उन्हें एटीएस मुख्यालय (लखनऊ) बुलाया गया है. ये तीनों दिल्ली धमाके के बाद अपने मोबाइल बंद कर चुके थे, और पिछले महीने फरीदाबाद में उनकी लोकेशन मिली थी, जिसके बाद शक और गहरा गया. वहीं, एटीएस ने डॉ. शाहीन और डॉ. परवेज के घर से मिले कई अहम सुबूत एनआईए को सौंप दिए हैं. एनआईए ने अभी इस मामले में औपचारिक मुकदमा दर्ज नहीं किया है, लेकिन केस प्रॉपर्टी उनकी तहकीकात के लिए ट्रांसफर कर दी गई है. शाहीन ने कानपुर में तैयार किया था महिला स्लीपर सेल नेटवर्क रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच-पड़ताल में यह भी पता चला है कि डॉ. शाहीन ने कानपुर में अपनी महिला विंग का मजबूत नेटवर्क तैयार किया था. इसमें 19 से अधिक महिलाएं शामिल थीं और सभी के मोबाइल पिछले दिनों एक साथ बंद मिले. ये नंबर कानपुर और आसपास के जिलों फतेहपुर, उन्नाव, कन्नौज आदि में बंद हुए थे. एजेंसियों का दावा है कि शाहीन ने इन महिलाओं को कट्टरपंथी विचारधारा और ब्रेनवॉश के जरिए अपने संगठन जमात-उल-मोमिनात में शामिल किया था. उसका लक्ष्य भारत में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं की ‘आतंकी भर्ती’ करना था. शाहीन की गिरफ्तारी के तुरंत बाद बंद हो गए थे नंबर सूत्रों के मुताबिक, शाहीन की गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद ही उसकी महिला विंग के लगभग सभी नंबर अचानक बंद हो गए. एजेंसियों को शक है कि सभी नेनए मोबाइल या नए सिम ले लिए हैं. खुफिया एजेंसियों ने अब टेलिकॉम कंपनियों से 10 नवंबर के बाद बेचे गए नए सिम की पूरी डिटेल मांगी है ताकि संदिग्ध नंबरों को ट्रैक किया जा सके. दिल्ली धमाके में कानपुर के सिम का इस्तेमाल जांच में यह बात भी सामने आई है कि दिल्ली में हुआ विस्फोट कानपुर से खरीदे गए सिम कार्ड से ऑपरेट किया गया था. आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर ने धमाके से ठीक पहले कई नंबरों पर कॉल की थी और फिर फोन बंद कर दिया था. बीटीएस (मोबाइल टावर) डेटा में जिन नंबरों की लोकेशन मिली, उनमें कई कानपुर के हैं. इनकी खरीदारी बेकनगंज क्षेत्र से हुई बताई जा रही है, जिसकी जांच जारी है.

नए लेबर कोड्स के तहत 5 नहीं, 1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी, समझें राशि कैसे तय होगी

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक बदलाव किया है. 29 श्रम कानूनों को सिमित करके अब सिर्फ 4 नए श्रम कानून (New Labour Codes) लागू किए गए हैं. यह कानून सभी तरह के वर्कर्स (संगठित, असंगठित, गिग वर्कर्स, माइग्रेंट वर्कर्स, प्‍लेटफॉर्म वर्कर्स और महिलाएं) पर लागू होंगे. 4 नए श्रम कानूनों के तहत सैलरी, ग्रेच्‍युटी, सोशल सिक्‍योरिटी, महिलाओं को अधिकार और जॉब गारंटी समेत कई प्रमुख फायदे दिए गए हैं.  सबसे बड़ा बदलाव ग्रेच्‍युटी को लेकर किया गया है. पहले ग्रेच्‍युटी 5 साल की नौकरी पर मिलती थी, लेकिन अब इसमें बड़ा बदलाव करते हुए सिर्फ 1 साल कर दिया गया है. अब कर्मचारियों को सिर्फ 1 साल की नौकरी पर ही ग्रेच्‍युटी का लाभ दिया जाएगा.  किन कर्मचारियों को मिलेगी ग्रेच्‍युटी?  पहले ग्रेच्‍युटी का लाभ 5 साल तक एक ही कंपनी में काम करने वाले पर्मानेंट कर्मचारियों को ही दिया जाता था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है. इसके तहत फिक्‍स्‍ड टर्म कर्मचारियों और कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी लाभ दिया जाएगा. अगर वे 1 साल तक ही नौकरी करके छोड़ देते हैं तो भी इसका लाभ मिलेगा.   है. Gratuity निकालने के लिए- अंतिम सैलरी  x (15/26) x कंपनी में काम किए गए साल, वाला फॉर्मूला अप्‍लाई करना होता है.  फॉर्मूला- ग्रेच्‍युटी = अंतिम सैलरी  x (15/26) x काम किए गए वर्ष 5 साल की नौकरी पर कितनी मिलती है ग्रेच्‍युटी?  मान लीजिए किसी व्‍यक्ति ने एक ही कंपनी में लगातार 5 सालों तक काम किया और उसकी अंतिम सैलरी (Basic Pay+DA) 60 हजार रुपये था. इस  हिसाब से कैलकुलेट करें तो उसकी ग्रेच्‍युटी 1,73,077 रुपये बनेगी.  60,000 x (15/26) x 5  = 1,73,077 रुपये 1 साल की सर्विस पर कितनी बनेगी ग्रेयुटी?  अब मान लीजिए सरकार नए श्रम कानून के तहत ग्रेच्‍युटी कैलकुलेट करने के फॉर्मूले में कोई बदलाव नहीं करती है और 1 साल की नौकरी में अंतिम बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये हो तो ग्रेच्‍युटी कुल इतना होगा.  50,000 x (15/26) x 1  = 28,847 रुपये  क्या होती है ग्रेच्युटी?  Gratuity किसी भी कंपनी की तरफ से अपने कर्मचारियों को एक तरह से उनके काम के बदले दिया जाने वाला तोहफा होता है. यह अभी तक एक संस्‍थान में ही 5 सालों तक लगातार नौकरी करने वाले पर्मानेंट कर्मचारियों को दिया जाता रहा है, लेकिन अब इसमें बदलाव करने 1 साल तक सर्विस करने वाले कर्मचारियों को भी जोड़ दिया गया है. साथ ही ग्रेच्‍युटी का लाभ फिक्‍स्‍ड टर्म कर्मचारियों और कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले कर्मचारियों को भी दिया जाएगा.