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रेलवे का सख्त नियम: इलेक्ट्रिक केतली ले गए तो लगेगा जुर्माना, होगी कड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली भारत में रोज लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं और कुछ यात्री अपनी सुविधाओं के लिए अजीब-ओ-गरीब चीजें साथ लेकर आते हैं। हाल ही में एक महिला यात्री कोच में इलेक्ट्रिक केतली लगाकर मैगी बनाती दिखी, जिसके बाद रेलवे ने कार्रवाई की। यह पहली घटना नहीं है, लेकिन इसे गंभीरता से लिया गया है क्योंकि ट्रेन कोई निजी जगह नहीं बल्कि पब्लिक सर्विस है। ट्रेन में हाई-वॉटेज उपकरण क्यों खतरनाक हैं? भारतीय रेलवे ने तय किया है कि यात्रियों को कोच में केवल मोबाइल, लैपटॉप या पावर बैंक जैसे लो-वॉटेज डिवाइस इस्तेमाल करने की अनुमति है। ट्रेन की पावर सप्लाई घरेलू सिस्टम जैसी नहीं होती, इसका लोड फिक्स होता है और कोच की वायरिंग उसी हिसाब से बनी होती है। इलेक्ट्रिक केतली, इंडक्शन, हीटर या अन्य हाई-वॉटेज उपकरण ज्यादा लोड खींचते हैं। इससे ओवरलोडिंग, शॉर्ट सर्किट, धुआं फैलना और आग जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कोच में सैंकड़ों लोग सफर कर रहे होते हैं, इसलिए रेलवे इसे गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में देखता है। जुर्माना और सजा रेलवे एक्ट के सेक्शन 153 के तहत किसी भी हाई-वॉटेज उपकरण का उपयोग करने पर जुर्माना और छह महीने तक की सजा हो सकती है। अगर इस हरकत से कोच में आग या धुआं फैलता है, तो सेक्शन 154 लागू होता है, जिसमें जुर्माना और दो साल तक की सजा का प्रावधान है। रेलवे का संदेश साफ है: ट्रेन में केवल सुरक्षित उपकरण ही इस्तेमाल करें। किसी भी नियम का उल्लंघन यात्रियों और ट्रेन की सुरक्षा दोनों के लिए खतरा है।

25 नवंबर के बाद झारखंड में ठंड का जोर, सनसनाती हवाएं करेंगी कंपकंपा

रांची झारखंड में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। 25 नवंबर से राज्य में कनकनी बढ़ेगी जिससे लोगों को हाल बेहाल होगा। मौसम विभाग के मुताबिक 25 नवंबर से तापमान में गिरावट होगी। मौसम विभाग के मुताबिक झारखंड में कई इलाकों में आंशिक बादल और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी की संभावना बनी है। हालांकि इसकी संभावना बहुत कम है। अगले 2-3 दिनों तक यही स्थिति बनी रहने की उम्मीद है। इसके बाद 25 नवंबर से तापमान में गिरावट होगी जिससे ठंड बढ़ेगी। तापमान गिरने के साथ ही सनसनाती हवाएं एक बार फिर ठिठुरन बढ़ाएंगी। इस अचानक आने वाले ठंड के अटैक को देखते हुए खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को अपना विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। मौसम विभाग ने अपील की है कि वे मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखें और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए तैयार रहें। फिलहाल, राज्य में किसी बड़े अलर्ट की आवश्यकता नहीं बताई गई है।  

अध्ययन में चौंकाने वाली बात, क्यों बढ़ा रहा मोटापा, जाने

नई दिल्ली अधिक वजन और मोटापे को स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता रहा है, सभी उम्र के लोग इसका शिकार हो रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि गड़बड़ खानपान, तनाव, व्यस्त दिनचर्या और शारीरिक रूप से कम मेहनत करना मोटापे को बढ़ाने वाली मुख्य वजहें हैं। मोटापा न केवल शरीर के लुक को खराब करता है बल्कि डायबिटीज, हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर जैसी समस्याओं के खतरे को भी कई गुना बढ़ा देता है। अध्ययनकर्ता कहते हैं, लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी तो बढ़ते वजन का प्रमुख कारण है ही, इसके साथ कुछ अन्य स्थितियों के बारे में भी पता चला है जो बड़ा जोखिम कारक हो सकती हैं। हालिया अध्ययन से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भी वजन बढ़ने की समस्या बढ़ती जा रही है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। अगर आपने भी हाल के वर्षों में कुछ किलो वजन बढ़ा लिया है, तो संभव है कि ये जलवायु परिवर्तन का भी परिणाम हो सकता है। कार्बन डाइऑक्साइड का खाद्य पदार्थों पर असर नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने एक हालिया शोध में पाया है कि वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का बढ़ता स्तर चावल और जौ जैसी महत्वपूर्ण फसलों को अधिक कैलोरी और कम पौष्टिकता वाला बना रहा है। CO2 प्रकाश संश्लेषण को बढ़ाकर कैलोरी बढ़ाता है, जिससे फसलों में शर्करा और स्टार्च की मात्रा पहले की तुलना में बढ़ रही है। इतना ही नहीं इसके कारण प्रोटीन और पोषक तत्वों की मात्रा भी अनाजों से कम होती देखी गई है जिसके चलते आप जो भोजन आप खाते हैं वो हाई कैलोरी और लो न्यूट्रिशन वाले हो जाते हैं, जो सीधे तौर पर वजन बढ़ाने वाले हो सकते हैं। नीदरलैंड्स की लेडेन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की टीम ने लोकप्रिय खाद्य पदार्थों के पौधों में 'व्यापक रूप से पोषक तत्वों में परिवर्तन' की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों ने कहा, 'भले ही खाद्य सुरक्षा पर्याप्त रहे, पर इनमें मौजूद पोषक तत्व सुरक्षा खतरे में है। भोजन अधिक कैलोरी वाला और कम पौष्टिक होता जा रहा है। नतीजतन, जलवायु परिवर्तन के कारण इंसानों में मोटापा, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणलाी और क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। अध्ययन में क्या पता चला? जलवायु परिवर्तन का भोजन पर होने वाले असर और इसके स्वास्थ्य संबंधित दुष्प्रभावों को समझने के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने उन रिपोर्ट्स का विश्लेषण किया जिनमें  फसलें अलग-अलग CO2 लेवल पर उगाई गई थीं। इसमें कुल 43 खाने लायक फसलों जैसे चावल, जौ, आलू, टमाटर, गेहूं, सोयाबीन, मूंगफली पर अध्ययन किया गया। विशेषज्ञों ने पाया कि जिन स्थानों पर CO2 का स्तर अधिक था वहां की फसलों के पोषक तत्वों पर बुरा असर पड़ा। ऐसे फसलों में आमतौर पर जिंक, आयरन और प्रोटीन जैसे जरूरी न्यूट्रिएंट्स में  4.4% तक की कमी, जबकि कुछ में 38% तक की कमी देखी गई। चने में पाए जाने वाले जिंक पर सबसे ज्यादा असर देखा गया  जबकि गेहूं और चावल भी इससे प्रभावित होती हैं। मोटापे का बढ़ता संकट टीम ने चेतावनी दी है कि चावल दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी के लिए मुख्य खाद्य पदार्थ है और बाकी लोग गेहूं पर निर्भर हैं। इन दोनों में प्रोटीन, जिंक और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्वों में काफी कमी दिखती है। साथ ही, हर सैंपल में कैलोरी की मात्रा बढ़ रही है, जिससे पता चलता है कि इनके सेवन से पहले की तुलना में लोगों में मोटापे का स्तर भी बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों ने कहा, अगर इस दिशा में सुधार के उपाय न किए गए तो खाद्य पदार्थ भी सुरक्षित नहीं रह जाएंगे और हम कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।

हवा में ज़हर! प्रदूषण बढ़ा रहा गंभीर बीमारियों का खतरा, डॉक्टर ने बताए शुरुआती संकेत

नवंबर लंग कैंसर अवेयरनेस महीने के रूप में मनाया जाता है। यह मौका है लोगों को याद दिलाने का कि फेफड़ों का कैंसर सिर्फ़ स्मोकिंग करने वालों की बीमारी नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि एयर पॉल्यूशन, सेकंड हैंड स्मोक और जेनेटिक कारणों से गैर-स्मोकर्स में भी इसका खतरा बढ़ता है। शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दें ➤ लंग कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के लगते हैं, जैसे: ➤ लंबे समय तक खांसी ➤ सांस लेने में तकलीफ़ या घरघराहट ➤ बार-बार थकान महसूस होना ➤ सीने या पीठ में दर्द ➤ थूक में खून या बार-बार इन्फेक्शन स्मोकिंग न करने वाले भी सुरक्षित नहीं मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डॉ. अनादि पचौरी और एंड्रोमेडा कैंसर हॉस्पिटल के डॉ. अरुण कुमार गोयल के अनुसार, स्मोकिंग न करने वालों में भी प्रदूषण, सेकंड हैंड स्मोक और जेनेटिक कारणों से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। ये दोनों विशेषज्ञ बताते हैं कि धुएँ में मौजूद हज़ारों केमिकल DNA को नुकसान पहुँचाते हैं और कैंसर का कारण बन सकते हैं। कैसे कम करें जोखिम ➤ स्मोकिंग पूरी तरह छोड़ें। ➤ सेकंड हैंड स्मोकिंग से बचें। ➤ एयर पॉल्यूशन वाले दिनों में मास्क पहनें और घर में एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें। ➤ ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में कम समय बिताएँ। ➤ रेगुलर हेल्थ चेकअप और फ्लू/निमोनिया वैक्सीनेशन कराएँ। ➤ उच्च जोखिम वाले लोग कम डोज़ वाले CT स्कैन के लिए डॉक्टर से संपर्क करें। हेल्दी लाइफस्टाइल और फेफड़ों की सुरक्षा डॉ. पचौरी और डॉ. गोयल के अनुसार, स्वस्थ भोजन और एक्सरसाइज फेफड़ों को मजबूत रखते हैं। ➤ हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, फल और नट्स खाएँ। ➤ जंक फूड और तले-भुने खाने से बचें। ➤ रोजाना 30–45 मिनट एक्सरसाइज करें। ➤ प्राणायाम और गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस फेफड़ों के लिए लाभकारी है। स्मोकिंग छोड़ चुके लोगों के लिए सलाह जो लोग स्मोकिंग छोड़ चुके हैं, उन्हें: ➤ कभी भी दोबारा स्मोकिंग न शुरू करें। ➤ सालाना फेफड़ों की जांच करवाएँ। ➤ 50–80 साल के भारी स्मोकर्स कम डोज़ वाले CT स्कैन कराएँ। ➤ स्वस्थ भोजन और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएँ।  

वेतन से लेकर ओवरटाइम तक सब बदल गया! नया Labour Code लागू, कर्मचारियों के लिए क्या मतलब?

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने देश के श्रम कानूनों में दशकों बाद सबसे व्यापक सुधार करते हुए 21 नवंबर से नए लेबर कोड्स लागू कर दिए हैं। सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया है और उनकी जगह चार नए लेबर कोड लागू किए हैं। इसे आत्मनिर्भर भारत रिफार्म का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन नए बदलावों से देश की रोजगार व्यवस्था, उद्योगों का संचालन और कामगारों की सुरक्षा—तीनों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। नए प्रावधानों से लगभग 40 करोड़ कामगारों को पहली बार सोशल सिक्योरिटी कवरेज मिलने जा रहा है, जो भारत के श्रम बाजार में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। पुराने कानून हुए खत्म, नए लेबर कोड में क्या है खास देश में लंबे समय से लागू श्रम कानून 1930 से 1950 के बीच के थे, जिन्हें समय के साथ पुराना और अप्रासंगिक माना जाता रहा। इन पुराने कानूनों में गिग वर्कर्स, प्लेटफार्म वर्कर्स, माइग्रेंट वर्कर्स  जैसे आधुनिक कार्य-प्रकारों की कोई परिभाषा मौजूद नहीं थी। नए लेबर कोड लागू होने के साथ ही ये सभी पुराने 29 कानून अब अप्रभावी हो चुके हैं। हर कर्मचारी को Appointment Letter अनिवार्य नए लेबर कोड के मुताबिक, अब देश में किसी भी कर्मचारी को भर्ती करते समय Appointment Letter देना अनिवार्य होगा। साथ ही देशभर में Minimum Wage का दायरा सभी श्रमिकों पर लागू होगा, जिससे किसी भी कर्मचारी को जीवन-यापन के लायक वेतन सुनिश्चित किया जा सके। समय पर वेतन भुगतान भी अब कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। पहली बार लेबर कोड में Platform Work, Aggregators और सभी Gig Workers को कानूनी पहचान दी गई है। इन कामगारों को अब Social Security Benefits मिलेंगे। इसके लिए Aggregator कंपनियों को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1-2% योगदान करना होगा। नए कोड में फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को भी स्थायी कर्मचारियों जिते अधिकार दिए गए हैं—जैसे छुट्टी, चिकित्सा सुविधाएं और सिर्फ एक साल बाद Gratuity का अधिकार। मीडिया, खदान और डिजिटल वर्कर्स भी सुरक्षा के दायरे में नए नियमों में बागान मजदूर, डिजिटल मीडिया वर्कर्स, ऑडियो-विजुअल कर्मचारी, डबिंग आर्टिस्ट, स्टंट पर्सन, और खदान मजदूरों को भी शामिल किया गया है। खतरनाक उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों की On-Site Safety Monitoring के मानक भी तय किए गए हैं। साथ ही IT, ITES, पोर्ट सेक्टर और Export Industry के कर्मचारियों के लिए 7 तारीख तक वेतन भुगतान का प्रावधान अनिवार्य किया गया है। Labour Dispute समाधान और उद्योगों को बड़ी राहत लेबर कोड में विवादों के तेजी से समाधान के लिए दो सदस्यीय Industrial Tribunal बनाए जाएंगे। कंपनियों के लिए Single Registration, Single License और Single Return System लागू हुआ है, जिससे paperwork काफी कम होगा। 500 से अधिक कर्मचारियों वाली यूनिट्स में सुरक्षा समितियां अनिवार्य होंगी, जबकि छोटी यूनिट्स के लिए अनुपालन का बोझ घटाया गया है। सरकार बोली—नए नियम बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने नए लेबर कोड को “कामगारों के कल्याण के लिए ऐतिहासिक कदम” बताया। उन्होंने कहा कि इससे श्रमिकों की Minimum Wage, Social Security, और Employment Conditions मजबूत होंगे। सरकार का कहना है कि पुराने कानून नई अर्थव्यवस्था और नए रोजगार मॉडल के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे थे, जबकि नए लेबर कोड दोनों—कामगार और उद्योग—को मजबूती देंगे।

28,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: मध्यप्रदेश में जल्द बनेंगी 5 चमचमाती फोर लेन रोड

भोपाल  मध्यप्रदेश में जबलपुर–दमोह और सतना–चित्रकूट सहित 5 प्रमुख सड़कों को फोर लेन बनाने की योजना तैयार की गई है। इस NHAI प्रोजेक्ट के लिए 28 हजार करोड़ रुपये का निवेश तय है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने प्रदेश की पांच प्रमुख सड़कों की डीपीआर तैयार की है। इनमें जबलपुर–दमोह, सतना–चित्रकूट रोड, उज्जैन–झालावाड़, रिंग रोड और ओरछा बायपास शामिल हैं। इसका सीधा असर 10 जिलों के रोज़ाना सफर करने वाले लगभग 7 लाख लोगों पर पड़ेगा। इंदौर और ओरछा जैसे शहरों में अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती थी। फोर लेन बनने से जाम कम होगा। ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और लोगों की यात्रा आसान होगी। वाइल्डलाइफ के लिए स्पेशल कॉरिडोर जहां सड़कें जंगल से गुजरेंगी, वहां साउंडप्रूफ वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाए जाएंगे ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा बनी रहे। 2026 तक इन सड़कों के निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। ठेकेदारों को काम पूरा करने के लिए डेढ़ से दो साल का समय मिलेगा। सभी बायपास फोर लेन होंगे और दोनों तरफ सर्विस लेन होंगी, जिससे सवारी और माल ढुलाई दोनों आसान होंगी। इससे आवागमन सुगम और सुरक्षित होगा तथा सफर कम समय में पूरा हो सकेगा।   एक हजार किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य NHAI ने बताया कि मध्यप्रदेश हाईवे के कुल 1000 किलोमीटर सड़कों पर काम प्रगति पर है। इसमें 500 किलोमीटर का ठेका दिया जा चुका है और बाकी सड़कों की डीपीआर अंतिम चरण में है। इस कदम से 10 जिलों के 7 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इंदौर और ओरछा में जाम और भारी वाहनों की समस्या कम होगी। आगरा–ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम जारी है। यह 88 किलोमीटर लंबा हाईवे है, जिसकी लागत 4613 करोड़ रुपये है।

रामनगरी में बड़ा उत्सव: पीएम मोदी करेंगे ध्वजारोहण समारोह में विशेष उपस्थिति

अयोध्या रामनगरी अयोध्या एक बार फिर अपने भव्य और ऐतिहासिक उत्सव के लिए पूरी तरह तैयार है। 25 नवंबर को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह होने वाला है और इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद शामिल होंगे। वे राम मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराएंगे। वहीं, कार्यक्रम को लेकर पूरे मंदिर परिसर और शहर में तैयारियों का उत्साह देखने लायक है। संत समाज में भी इस अवसर को लेकर खासा उत्साह है। कई संतों ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राम मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराया जाना करोड़ों राम भक्तों के लिए गर्व का पल है। उनका मानना है कि पीएम मोदी के प्रयासों से अयोध्या का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव नई ऊंचाई पर पहुंचा है। यहां हुए विकास कार्य लोगों की सोच से परे हैं और लोग बेहद खुश हैं।  जगत गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज ने खास बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या को सिर्फ निखारा ही नहीं, बल्कि इसे त्रेतायुग जैसा स्वरूप दिया है। जो लोग आज अयोध्या आ रहे हैं, उन्हें और जो पहले आते थे, उन्हें इसका अंतर साफ दिखाई दे रहा है। वेदों, पुराणों और शास्त्रों में जैसे अयोध्या का वर्णन है, उसी तरह अब वास्तविक अयोध्या दिख रही है। यह जगह केवल भगवान श्रीराम की जन्मभूमि ही नहीं, बल्कि मानवता और सभ्यता का केंद्र भी है। उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन में हमें भाईचारे, प्रेम, पिता-पुत्र के संबंध और समाज व देश के प्रति जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया। राम मंदिर का भूमि पूजन, शिलान्यास और अब 25 नवंबर को होने वाली धर्मध्वज स्थापना भी प्रधानमंत्री मोदी के हाथों संपन्न हो रही है। इसे लेकर अयोध्यावासी और देश के साधु-संत बहुत उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि इस धर्मध्वज की स्थापना एक तरह से अघोषित रूप में हिंदू राष्ट्र की घोषणा है। हिंदू राष्ट्र का मतलब है रामराज और मानवता की स्थापना। वे बताते हैं कि हिंदुत्व का अर्थ केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण के लिए सोचना है। यही संदेश इस ध्वज स्थापना के माध्यम से दिया जा रहा है। पूरी दुनिया में इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देगा। इससे नफरत का माहौल कम होगा और प्रेम, भाईचारे और मानवता की भावना लोगों में मजबूत होगी। यह सिर्फ अयोध्या या भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में सकारात्मक बदलाव लाएगा। एक अन्य संत ने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जो अयोध्या कई बार आए हैं। यह काबिल-ए-तारीफ है। संत ने आगे कहा कि हम सब खुश हैं कि उनके कार्यकाल में इतने बड़े और महत्वपूर्ण काम हो रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे ही और कई पहल जारी रहेंगी। संत ने बताया कि राम मंदिर का भूमि पूजन पीएम मोदी ने किया, इसका उद्घाटन भी उन्होंने किया और अब 25 नवंबर को धर्मध्वज की स्थापना भी उनके हाथों होगी। लोगों में इसे देखने की बेहद उत्सुकता है और पूरा शहर इस ऐतिहासिक पल का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। एक और संत ने बताया कि यह अवसर बहुत ही हर्ष और उल्लास का है। सिर्फ पूरे भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में इसको लेकर खुशी और उत्साह का माहौल है। संतों के अनुसार, इस मौके पर भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के सुनहरे शिखर पर ध्वज फहराने वाला क्षण हर किसी के लिए गर्व और आनंद का है। पूरे अयोध्या शहर में सजावट और तैयारियां जोरों पर हैं और भक्तों की भीड़ इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए तैयार है। वहीं, इकबाल अंसारी ने कहा कि पीएम मोदी के प्रयासों की वजह से आज अयोध्या इतनी सुंदर बन गई है। उन्होंने बताया कि अयोध्या में हर धर्म और समुदाय के देवता मौजूद हैं और भगवान राम खुद इस शहर की रक्षा कर रहे हैं। अंसारी का कहना है कि पीएम मोदी बहुत ही भाग्यशाली हैं कि मंदिर के ध्वज फहराने का मौका मिल रहा है। इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता। यह शहर गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है।

मात्रा 2005 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: 98 किमी फोरलेन के लिए 56 गांवों की भूमि पर प्रभाव

छतरपुर  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लखनऊ तक बनाए जा रहे इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत फोरलेन सड़क का निर्माण किया जा रहा है। छतरपुर जिले में इस कॉरिडोर के लिए नेशनल हाईवे-34 को फोरलेन में बदला जा रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) जिले की बड़ामलहरा तहसील की सांठिया घाटी से लेकर महाराजपुर तहसील के चौका गांव तक पहले चरण में और दूसरे चरण में चौका गांव से कैमाहा बैरियर तक फोरलेन रोड का निर्माण कर रहा है। छतरपुर जिले में इन दोनों चरणों में मिलाकर कुल मिलाकर 98 किमी. के नेशनल हाईवे 34 के हिस्से को फोरलेन किया जा रहा है जिसमें 2005 करोड़ रूपये लागत आ रही है। इन 56 गांवों की भूमि का अधिग्रहण इस परियोजना में छतरपुर जिले की बड़ामलहरा, छतरपुर, बिजावर और नौगांव तहसीलों के अंतर्गत आने वाले कुल 56 गांवों में भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। इनमें बड़ामलहरा तहसील के भिलवार, गोरा, बमनौराखुर्द, घिनौची, रजपुरा, टौरिया, मौली, मेलवार, किवलाई, अरोल, मवई, रानीखेरा जैसे गांव शामिल हैं। वहीं बिजावर तहसील में निवार, मड़देवरा, दरगुवां, गुलगंज, अनगौर जैसे गांवों से जमीन अधिग्रहण हुआ है। छतरपुर तहसील में पलटा, खैरो, मातगुवां, अतरार, रामगढ़ सहित कई गांव इस सूची में हैं जबकि नौगांव विकासखंड के महाराजपुर तहसील में कुर्राहा, ऊजरा, बेदर और गढ़ीमलहरा जैसे गांवों की भूमि ली जा रही है।   भोपाल-लखनऊ के बीच बन रहा इकोनॉमिक कॉरिडोर भोपाल-लखनऊ इकोनॉमिक कॉरिडोर की लंबाई 526 किमी. है और इसका निर्माण 11300 करोड़ रूपये की लागत से किया जा रहा है। अलग अलग चरणों में ये इकॉनोमिक कॉरिडोर बन रहा है। पहले चरण में उत्तर प्रदेश के कानपुर से करबई तक 112 किलोमीटर, दूसरे चरण में करबई से सागर तक 223 किलोमीटर और तीसरे चरण में मध्यप्रदेश के सागर से राजधानी भोपाल तक 150 किलोमीटर का रोड बन रहा है। भोपाल से लखनऊ इकोनॉमिक कॉरिडोर के एमपी के हिस्से में नया प्रयोग भी किया जा सकता है। यहां एरियल डिस्टेंस के आधार पर रोड बनाई जा सकती है जिससे मोड़ यानि घुमावदार रास्ते कम हो जाएंगे और सफर आसान हो जाएगा।

परीक्षा की तारीखों में बड़ा बदलाव: अब 15 दिन बाद होंगे हाफ इयरली एग्जाम

नर्मदापुरम  एसआईआर कार्य (SIR Survey) के कारण अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के समय में बदलाव किया गया है। शासकीय और निजी स्कूलों में 24 नवंबर से होने वाली अर्द्धवार्षिक परीक्षा अब 15 दिन बाद 8 दिसंबर से शुरु होंगी। तब तक एसआइआर का पहला चरण भी खत्म हो जाएगा। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा शासकीय प्राथमिक माध्यमिक वि‌द्यालयों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 24 से 29 नवंबर के बीच होना थी, अब इसे बदल दिया है। राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 8 दिसंबर से शुरु करने का आदेश जारी कर दिया है।  दो सत्रों में होगी परीक्षा दो सत्रों में होंगी परीक्षा अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं दो सत्रों में होंगी। पहला सत्र सुबह 10 से दोपहर 12.30 बजे तक रहेगा। जिसमें कक्षा 6 वीं से 8 वीं तक की परीक्षाएं होंगी। ये 13 दिसंबर को खत्म होंगी। दोपहर 1.30 से शाम चार बजे तक कक्षा 3 से 5 तक की परीक्षाएं होंगी। ये 12 दिसंबर को खत्म होंगी। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधान अनुसार नि:शक्त विद्यार्थियों को निर्देशानुसार अतिरिक्त समय, लेखक की सुविधा दी जाएगी। एसआईआर के कारण बदली गेट- एपीसी एसआईआर के काम के कारण अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के टाइम टेबल में बदलाव किया गया है। 24 नवंबर से शुरु होने वाली परीक्षाएं 8 दिसंबर से शुरू होंगी। नया टाइम टेबल भी राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी कर दिया है। – प्रदीप चौहान, एपीसी कक्षा 3 से 5वीं तक     8 दिसंबर- प्रथम भाषा     9 दिसंबर- गणित     10 दिसंबर- ‌द्वितीय भाषा     11 दिसंबर- विज्ञान     12 दिसंबर- तृतीय भाषा संस्कृत, हिन्दी, उर्दू     13 दिसंबर- सामाजिक विज्ञान

25 नवंबर को बंद रहेंगे दफ्तर– गुरु तेग बहादुर जी के शहादत दिवस पर हरियाणा व चंडीगढ़ में छुट्टी

चंडीगढ़  गुरु तेग बहादुर जी के शहादत दिवस के उपलक्ष्य में चंडीगढ़ प्रशासन और हरियाणा सरकार ने 25 नवंबर 2025 (मंगलवार) को अवकाश घोषित कर दिया है। चंडीगढ़ प्रशासन ने वर्ष 2025 की छुट्टियों की अधिसूचना में संशोधन करते हुए इस दिन को पूर्ण सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, जबकि हरियाणा सरकार ने इसे वैकल्पिक अवकाश के रूप में मानने का फैसला किया है। चंडीगढ़ प्रशासन की नई अधिसूचना के अनुसार प्रशासन के अधीन सभी सरकारी विभाग, बोर्ड, निगम, संस्थान और औद्योगिक प्रतिष्ठान 25 नवंबर को बंद रहेंगे। पहले यह दिन प्रतिबंधित अवकाश की श्रेणी में शामिल था, लेकिन अब इसे सिख इतिहास और धार्मिक महत्व को देखते हुए पूर्ण अवकाश घोषित किया गया है।   उधर, हरियाणा सरकार ने भी श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर 25 नवंबर को राज्य में वैकल्पिक अवकाश घोषित किया है। राज्य सरकार के कर्मचारियों को अपनी सुविधा अनुसार इस अवकाश का लाभ लेने की अनुमति दी गई है। गौरतलब है कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान देश और समाज के लिए धार्मिक स्वतंत्रता, साहस और मानवाधिकारों की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है। उनके शहादत दिवस पर देशभर में श्रद्धांजलि सभाएं, नगर कीर्तन और सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।