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पाकिस्तान में दहशत: पेशावर FC HQ पर दो आत्मघाती धमाके, हमलावरों की अंधाधुंध गोलीबारी

पेशावर पाकिस्तान के पेशावर में पैरामिलिट्री फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) मुख्यालय, पैरा मिलिट्री फोर्सेज का मुख्यालय है. पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों के इस मुख्यालय पर सोमवार की सुबह हमला हो गया. फ्रंटियर कोर के मुख्यालय से दो धमाकों की आवाज सुनी गई. पाकिस्तान के सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर ऑपरेशन शुरू कर दिया है. पाकिस्तान के पेशावर में सोमवार को FC के मुख्यालय पर आत्मघाती हमले में हमलावर समेत तीन लोग मारे गए हैं. मरने वालों में आत्मघाती हमलावर के साथ ही एक अन्य आतंकी भी शामिल बताया जा रहा है.इस हमले में तीन सुरक्षाकर्मियों की भी जान गई है. एक धमाका मेन गेट, और दूसरा एफसी मुख्यालय परिसर के साइकिल स्टैंड के पास  हुआ. अधिकारियों ने इसकी पुष्टि कर दी है. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा पुलिस के महानिरीक्षक (आईजी) जुल्फिकार हमीद ने पाकिस्तानी मीडिया से बात करते हुए कहा है कि दो आत्मघाती विस्फोट हुए. एक विस्फोट मेन गेट पर हुआ. दूसरा धमाका मुख्यालय परिसर में मोटरसाइकिल स्टैंड के पास हुआ. मोटरसाइकिल स्टैंड अर्धसैनिक बलों के मुख्यालय के परिसर में स्थित है. पेशावर हमले की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है. सामने आए सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट दिख रहा है कि मेन गेट के बार एक धमाका होता है और आग की लपटें दिख रही हैं.एक शख्स इसके बाद मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश करता भी नजर आ रहा है. इलाके में अब भी गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई दे रही है. सुरक्षाबलों और हमलावरों के बीच गोलीबारी जारी है.  

दिल्ली–एनसीआर में NCB का बड़ा एक्शन: 262 करोड़ की ड्रग सप्लाई चेन में विदेशी–भारतीय लिंक बेनकाब

 नई दिल्ली  दिल्ली–एनसीआर के बीचों-बीच चल रहे एक हाई-प्रोफाइल सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क की परतें उस वक्त खुलनी शुरू हुईं, जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने दिल्ली के एक फार्महाउस पर रेड मारी. किसी भी रूटीन छापे की तरह शुरू हुए इस ऑपरेशन में ऐसे क्लू मिले जिससे आगे चलकर 200 करोड़ से ज्यादा की ड्रग पकड़ी गई.  अधिकारियों  के मुताबिक यह केस सिर्फ ड्रग पकड़ने का नहीं है बल्कि एक ऐसे अदृश्य नेटवर्क को उजागर करने का है, जिसे विदेशी ऑपरेटर अपने भारतीय ग्राउंड स्टाफ के जरिए रिमोट से कंट्रोल कर रहे थे. और इस नेटवर्क के बीचोबीच खड़ा था एक 25 साल का युवक शेन वारिस जो खुद को कंपनी का सेल्स मैनेजर बताता रहा, लेकिन अंदर से इस पूरे रैकेट का भरोसेमंद रनर मिला. डियो/फोटो बॉस को भेजना अनिवार्य था. पूरी बातचीत ऐसे चलती थी मानो कोई वीडियो गेम का रिमोट कंट्रोलर विदेश से भारत में मौजूद चरित्र को चला रहा हो. अचानक उभरा एक नाम एस्थर किनिमी पूछताछ के दौरान शेन ने एक और नाम खखेला. एस्थर किनिमी, नागालैंड की रहने वाली, दिल्ली में किराए के एक फ्लैट में रहने वाली महिला का. यही एस्थर, शेन के मुताबिक, पहले भी एक कंसाइनमेंट उसे हैंडओवर कर चुकी थी, जिसे बाद में एक पोर्टर राइडर के जरिए आगे भेजा गया था. शेन ने न सिर्फ उसका पता दिया, बल्कि फोन नंबर और उसके नेटवर्क से जुड़े कुछ और संदिग्धों का ज़िक्र भी किया. यह इनपुट NCB के लिए ब्रेकथ्रू मोमेंट था. 20 नवंबर की रात लगभग 11 बजे, NCB की टीम चुपचाप छतरपुर एन्क्लेव फेज-2 पहुँची. चार मंज़िला जैन हाउस की चौथी मंज़िल का एक फ्लैट यही था एस्थर का ठिकाना. दरवाज़ा खुलते ही टीम को कमरे में फैली एक अजीब-सी गंध महसूस हुई. कुछ ही मिनटों में अलमारी, बेडबॉक्स और स्टोर रूम की सर्च शुरू हुई. उसके बाद जो सामने आया उसने टीम को भी कुछ क्षणों के लिए रोक दिया . 328.54 किलो मेथाम्फेटामाइन. इंटरनेशनल मार्केट वैल्यू करीब 262 करोड़ रुपये से भी ज्यादा बैगों में भरी दर्जनों पैकेट्स, हर पैकेट पर विदेशी पैकिंग की सील और कमरे में मौजूद पाउडर के कण. यह बरामदगी दिल्ली–एनसीआर की सबसे बड़ी सिंथेटिक ड्रग पकड़ों में शामिल हो गई. एस्थर को वहीं से गिरफ्तार कर लिया गया. जांच में पता चला कि  ड्रग बनाने वाले लैब्स देश से बाहर थे लॉजिस्टिक्स को देश के अलग-अलग शहरों से कंट्रोल किया जाता था. हर रनर को सिर्फ उसका हिस्सा पता होता था. बताया जा रहा है कि उनकी पेमेंट पूरी तरह डिजिटल और मल्टी-लेयर चैन के जरिये होती थी. शेन और एस्थर जैसे लोग नेटवर्क की फॉरवर्ड यूनिट थे जो सिर्फ हैंडलिंग और मूवमेंट देखते थे. असली ऑपरेटर विदेश में बैठा था. न ही उसका नाम सामने आया और न ही लोकेशन अभी तक स्पष्ट है. लेकिन शेन के फोन से मिले डेटा, कॉल लॉग और क्लाउड बैकअप ने साफ कर दिया कि यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा है.  तीन दिनों तक चला ऑपरेशन, कई राज्यों में भेजे गए अलर्ट NCB ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान तीन दिन में कई लोकेशनों पर रेड कीं. राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, अमरोहा और पंजाब के कुछ पॉइंट्स तक इनपुट भेजे गए. टीम ने स्पष्ट किया है कि  नेटवर्क के कम से कम 7 और लोग सक्रिय भूमिका में हैं.  कुछ लोग कूरियर/राइडर के रूप में इस्तेमाल हुए. कुछ लोग किराए के फ्लैट के इंतजाम करते थे. फंडिंग चैनल अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. विदेशी बॉस कौन है इस पर इन्वेस्टिगेशन जारी है. ड्रग के पैकेट्स की सील से अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह माल कई चरणों में भारत पहुंचा था. और एस्थर का फ्लैट एक स्टोरेज–क्यूम–ट्रांजिट हब के तौर पर इस्तेमाल हो रहा था. NCB की नजर अभी और बड़ी मछलियों पर NCB के अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क सिर्फ सप्लाई–डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल से कहीं ज्यादा संगठित है. जांच अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन अब तक के सुराग बताते हैं कि  भारत के कई शहरों में स्लीपर यूनिट्स मौजूद हैं.

दुबई इवेंट में बड़ा फैसला: अमेरिकी पायलट ने नमांश के समर्थन में अपना शो वापस लिया

दुबई        दुबई में एयर शो के दौरान तेजस विमान क्रैश होने के बाद भी शो जारी रखने पर एक अमेरिकी पायलट ने आयोजकों को कड़ी फटकार लगाई है. दुबई एयर शो में हिस्सा ले रहे इस पायलट ने कहा कि उनके लिए ये यकीन करना मुश्किल था कि इस क्रैश के कुछ ही देर बाद वहां सब कुछ नॉर्मल था. कमेंट्री करने वाले शख्स के शब्दों में पहले जैसा ही जोश था, लोग उसी तरह तालियां बजा रहे थे. लेकिन वहां एक हादसा हो चुका था. उन्होंने कहा कि हादसे के बाद शो जारी रखना हैरान करने वाला फैसला था. अमेरिकी वायुसेना के इस पायलट का नाम मेजर टेलर फेमा हिएस्टर है. F-16 से आसमान में कलाबाजी दिखाने वाले अमेरिकी एयरफोर्स के टीम कमांडर ने  इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट लिखकर कहा कि, 'टीम ने पायलट नमांश, उनके साथियों और परिवार के सम्मान में कुछ और लोगों के साथ एयर शो में अपनी आखिरी परफॉर्मेंस कैंसिल करने का फैसला किया है.' घटनास्थल का वर्णन करते हुए उन्होंने लिखा है, "जब उन्होंने आग बुझा दी, और मुझे एयर शो के ऑर्गनाइज़र ने बताया कि फ्लाइंग डिस्प्ले जारी रहेगा, तो मैंने तय किया कि हम इसे कैंसिल कर देंगे. मैं शायद एक या दो घंटे बाद शो साइट पर गया, यह सोचकर कि वहां खाली होगा, लोग चले गए होंगे, लेकिन ऐसा नहीं था."  उन्होंने आगे कहा, "अनाउंनसर अभी भी उत्साह से भरा था, भीड़ ने अगले कई शो रूटीन उत्साह के साथ देखे और जब शो खत्म हुआ तो फिर अनाउंस हुआ- हमारे सभी प्रायोजकों, कलाकारों को बधाई और हम आपसे 2027 में मिलेंगे. विंग कंमाडर नमांश स्याल की मृत्यु के बाद भी एयर शो जारी रखने के लिए उन्होंने आयोजकों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "दुबई एयरशो के आखिरी दिन इंडियन एयर फोर्स के विंग कमांडर नमांश स्याल तेजस से एक्रोबैटिक डेमो करते हुए दुर्घटना का शिकार हो गए और उनकी मृत्यु हो गई. हमारी टीम भी अपने प्लेन के साथ तैयारी कर रही थी. हमें अपना शो करना था." अमेरिकी एयरफोर्स के पायलट का पोस्ट उन्होंने आगे कहा, "हालांकि शो  के आयोजकों ने घटना के बाद भी फ्लाइंग शेड्यूल को जारी रखने का फैसला लिया, हमारी टीम के अलावा कुछ और लोगों ने अपना अंतिम परफॉर्मेंस रद्द करने का फैसला किया, ये उस पायलट, उसके साथी और उसके परिवार के सम्मान में लिया गया फैसला था." शो जारी रखने पर हिएस्टर ने कहा, "उनके लिए यह सोचना अजीब था कि उनकी टीम शो साइट से उनके "बिना" रॉक एंड रोल टेक के बाहर निकल रही है, जबकि अगला परफॉर्मर परफॉर्म करने के लिए खुद को तैयार कर रहा है.  अमेरिकी वायुसेना के पायलट हिएस्टर ने कहा, "शो चलते रहना चाहिए (The show must go on) लोग हमेशा यही कहते हैं. और यह सही हैं. लेकिन बस याद रखें कि आपके जाने के बाद भी कोई यही कहेगा."   नमांश स्याल का अंतिम संस्कार  इस बीच रविवार को विंग कमांडर नमांश स्याल का कांगड़ा स्थित उनके पैतृक गांव में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान नमांश स्याल के पिता जगन्नाथ स्याल ने कहा कि देश ने एक बेहतरीन पायलट खो दिया है और मैंने एक जवान बेटा खो दिया. जगन्नाथ स्याल ने कहा कि उसकी जिंदगी में कभी कोई पल बोरिंग नहीं रहा और उसने हर उस कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया.

सत्ता परिवर्तन पर कांग्रेस में घमासान: शिवकुमार समर्थक सक्रिय, हाईकमान के लिए बढ़ी मुश्किलें

बेंगलुरु कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की मांग अब बगावत की शक्ल लेती नजर आ रही है. डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के समर्थक विधायकों के सीएम बदलने की मांग को लेकर दिल्ली कूच का सिलसिला जारी है. शिवकुमार समर्थक विधायकों के दो बैच पहले से ही दिल्ली में हैं और अब तीसरा बैच भी पहुंच चुका है. दिल्ली पहुंचे शिवकुमार समर्थक विधायकों के तीसरे बैच में छह से आठ विधायक शामिल बताए जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, डीके शिवकुमार के खेमे के विधायक चाहते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व उनसे संबंधित मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करे. यही वजह है कि विधायक दिल्ली में जमे हुए हैं, मुलाकात के लिए समय मांग रहे हैं. पिछले एक हफ्ते में यह तीसरी बार है, जब डीके शिवकुमार के गुट के विधायक दिल्ली पहुंचे हैं. शिवकुमार समर्थक विधायकों के रुख ने बेंगलुरु से दिल्ली तक सियासी तापमान बढ़ा दिया है. शिवकुमार समर्थक विधायक दिल्ली में जमे हुए हैं, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बेंगलुरु में हैं. कांग्रेस अध्यक्ष को बेंगलुरु से दिल्ली लौटना था, लेकिन फिलहाल उन्होंने दिल्ली वापसी का प्लान टाल दिया है और बेंगलुरु में ही रुक गए हैं. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष खड़गे सूबे के वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं. बेंगलुरु में बैठकों का दौर डीके समर्थक विधायकों का दिल्ली कूच, इसे कर्नाटक कांग्रेस के असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है. कर्नाटक में कांग्रेस विधायकों की लामबंदी ने पार्टी नेतृत्व की टेंशन बढ़ा दी है. पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर किसी भी तरह की जल्दबाजी के मूड में नहीं है. कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की कर्नाटक यात्रा से पहले डिनर मीटिंग में नेताओं ने भी यह डिमांड की थी कि नेतृत्व को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. कर्नाटक कांग्रेस में जारी सियासी हलचल को लेकर नेता खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं. डीके शिवकुमार ने भी हाल ही में कहा था कि सभी विधायक मेरे हैं.

Gemini पर सैम अल्टमैन का बयान: क्या गूगल का AI चैटजीपीटी की रफ्तार का मुकाबला कर पाएगा?

नई दिल्ली सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में एक इंटरनल मेमो में स्वीकार किया कि गूगल अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में आगे दिखाई दे रहा है। Gemini 3 मॉडल की सफलता ने डेवलपर्स और क्रिएटर्स के बीच गूगल की लोकप्रियता बढ़ा दी है। हालांकि, ऑल्टमैन ने इस बढ़त को केवल “अस्थायी” बताया और दावा किया कि OpenAI बेहद तेजी से गैप को कम कर रहा है। गूगल का नया Gemini 3 मॉडल कोडिंग, डिजाइन और प्रोटोटाइप जेनरेशन में शानदार प्रदर्शन कर रहा है। यह मॉडल गूगल के सर्च, प्रोडक्टिविटी ऐप्स और क्रिएटिव टूल्स में गहराई से इंटीग्रेट किया गया है, जिससे इसे बड़े पैमाने पर यूजर विजिबिलिटी मिल रही है। क्या Gemini से पिछड़ रही ChatGPT? डेवलपर्स का कहना है कि Gemini 3 वेबसाइट डिजाइन, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और टेक्स्ट-टू-प्रोटोटाइप जैसे काम बेहद तेजी और सटीकता से कर रहा है। ये वो क्षेत्र हैं जहां पहले OpenAI का दबदबा था। ऑल्टमैन ने स्वीकार किया कि यह बड़ी चुनौती है, लेकिन साथ ही कहा कि कंपनी का असली फोकस सुपरइंटेलिजेंस बनाने पर है, जो भविष्य में गूगल समेत हर प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ देगी। Anthropic का उभरता खतरा गूगल के अलावा, ऑल्टमैन ने Anthropic का भी जिक्र किया, जिसकी Claude AI कोडिंग और डीबगिंग में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। Claude सीधे OpenAI के Codex और Copilot जैसे सिस्टमों की टक्कर में खड़ी है। AI इंडस्ट्री में कई मोर्चों पर चुनौतियां हैं, और OpenAI को अब एक साथ कई स्तरों पर मुकाबला करना पड़ रहा है। गूगल की तगड़ी आर्थिक ताकत भी है बड़ी चुनौती तकनीकी क्षमता के साथ-साथ गूगल की आर्थिक मजबूती भी उसे इस दौड़ में बढ़त देती है। कंपनी का मार्केट वैल्यू 3.5 ट्रिलियन डॉलर है और वह हर साल 70 बिलियन डॉलर से अधिक फ्री कैश फ्लो जनरेट करती है। विडंबना यह है कि इसी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियां भी करती हैं, यानी प्रतिस्पर्धियों पर गूगल का अप्रत्यक्ष आर्थिक लाभ भी बना रहता है। सुपरइंटेलिजेंस की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही OpenAI ऑल्टमैन के अनुसार, OpenAI अभी मजबूत स्थिति में है और AI रेस की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। कंपनी इस साल लगभग 13 बिलियन डॉलर की कमाई की ओर बढ़ रही है, हालांकि रिसर्च और कंप्यूटिंग पर भारी खर्च उसकी वित्तीय रणनीति को चुनौती देते हो सकते हैं। ऑल्टमैन ने कहा कि कंपनी को एक साथ कई मुश्किल काम करने हैं। बेहतरीन रिसर्च लैब, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोडक्ट प्लेटफॉर्म बनना कंपनी के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। ChatGPT की एंगेजमेंट घटी, पर वित्तीय स्थिति मजबूत कंपनी की सीएफओ सारा फ्रायर ने बताया कि ChatGPT की यूजर्स के बीच एंगेजमेंट भले स्थिर हो गई हो, लेकिन कंपनी आर्थिक रूप से सेफ जोन में है। यह बयान उन चिंताओं को कम करने की कोशिश है जो पिछले कुछ महीनों में OpenAI की धीमी गति को लेकर उठ रही थीं।  

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल से जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 10 को 7 करोड़ की विकास योजनाओं की मिली स्वीकृति

रायपुर जिला पंचायत कवर्धा क्षेत्र क्रमांक 10 के लिए विकास का नया अध्याय जुड़ गया है। उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा के निरंतर प्रयासों से क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित सड़क—दुल्लापुर, नेवारीगुड़ा, कान्हाभैरा से कंझेटा तक—के निर्माण हेतु 7 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह निर्णय क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। क्षेत्रवासियों ने इस जनहितकारी निर्णय के लिए उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क के अभाव में लंबे समय से आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और व्यापारिक गतिविधियों में काफी दिक्कतें आती थीं। सड़क निर्माण प्रारंभ होने से इन समस्याओं का समाधान होगा और आर्थिक-सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 10 के सदस्य  कैलाश चंद्रवंशी ने बताया कि उपमुख्यमंत्री  शर्मा क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लगातार सक्रिय हैं। उनके मार्गदर्शन में क्षेत्र की अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लिए कई अहम परियोजनाएँ स्वीकृत हो रही हैं। उन्होंने कहा कि दुल्लापुर–नेवारीगुड़ा–कान्हाभैरा मार्ग इस पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। सड़क का निर्माण दुल्लापुर के नहर पार से नेवारीगुड़ा तक गांव के बाहरी हिस्से से होकर किया जाएगा, जो दुल्लापुर और नेवारीगुड़ा के लिए बायपास मार्ग के रूप में भी कार्य करेगा। यह योजना क्षेत्र की गतिशीलता और सुविधा को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ करने की तैयारी तेजी से जारी है। इसके पूर्ण होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा बेहतर होगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने कहा कि यह स्वीकृति उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा की संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और जनसेवा के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

‘वीर बेटियों के साहस को सलाम’—भारत की जीत पर PM मोदी व दोनों CMs ने दी शुभकामनाएँ

नई दिल्ली भारतीय महिला दृष्टिबाधित टीम ने टी20 विश्व कप का (Blind T20 world cup) खिताब जीत लिया है. भारतीय टीम ने कोलंबो के पी सारा ओवल में खेले गए फाइनल मुकाबले में नेपाल को 7 विकेट से हराया. इस टूर्नामेंट का आयोजन पहली बार हो रहा था और भारत इस वैश्विक टूर्नामेंट को जीतने में सफल रहा. इस जीत के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पहली बार विश्व चैंपियन बनी भारतीय महिला टीम को हार्दिक बधाई दी है. मुख्यमंत्री ने इसे पूरे देश के लिए गर्व, प्रेरणा और भावनाओं से भरा ऐतिहासिक क्षण बताया. भारतीय महिला दृष्टिबाधित टीम को सीएम साय ने दी बधाई मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह जीत केवल एक खेल उपलब्धि भर नहीं है, बल्कि हिम्मत, विश्वास और अदम्य इच्छाशक्ति की विजयगाथा है. भारतीय बेटियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर संकल्प दृढ़ हो, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं रहती. विशेष रूप से दृष्टिबाधित महिलाओं की टीम द्वारा विश्व मंच पर हासिल की गई यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का उज्ज्वल दीपक बनेगी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत की पहले टी20 ब्लाइंड महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक जीत की सराहना की। सीएम योगी ने कहा कि दृष्टिहीनता कभी भी जीत की राह में रुकावट नहीं बन सकती, और संकल्प से ही जीत हासिल होती है। CM Yogi ने भारत के टी20 ब्लाइंड महिला विश्व कप जीतने पर बधाई दी दरअसल, यूपी के सीएम योगी ने अपने सोशल मीडिया पर भारतीय टीम की शानदार जीत के लिए बधाई दी और लिखा कि भारत की वीर बेटियों ने एक और बार देश का नाम रोशन किया है, और दुनिया भर में भारत का ध्वज गर्व से फहराया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय बेटियों के टी20 ब्लाइंड महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप  में जीत पर बधाई दी। उन्होंने X पर लिखा कि आज हमारा तिरंगा आपकी इस उपलब्धि पर गर्व से ऊंचा लहराता है। आपकी विजय हमारे राष्ट्र के लिए सम्मान प्राप्त करने के लिए आपके संकल्प और समर्पण का प्रतीक है। ब्लाइंड क्रिकेट एक खास तरह का खेल है। इसमें एक सफेद प्लास्टिक की गेंद का इस्तेमाल होता है, जिसके अंदर बॉल बेयरिंग भरे होते हैं। जब गेंद लुढ़कती है तो उसमें से खड़खड़ाहट की आवाज आती है, जिससे खिलाड़ी उसे सुन पाते हैं। गेंदबाज को बल्लेबाज से पूछना होता है कि क्या वह तैयार है। फिर गेंद फेंकते समय "प्ले" चिल्लाना होता है। गेंद को कम से कम एक बार उछालकर अंडरआर्म फेंका जाता है। नियमित क्रिकेट की तरह ब्लाइंड क्रिकेट में भी हर टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं। लेकिन इसमें कम से कम चार खिलाड़ी पूरी तरह से नेत्रहीन होने चाहिए। खेल में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी खिलाड़ियों को आंखों पर पट्टी बांधना अनिवार्य होता है। फील्डर अपनी स्थिति बताने के लिए एक बार ताली बजाते हैं। बाकी खिलाड़ी आंशिक रूप से दृष्टिबाधित हो सकते हैं। उन्हें उनकी देखने की क्षमता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। B2 श्रेणी के खिलाड़ियों के लिए यह दूरी दो मीटर होती है, और B3 श्रेणी के लिए छह मीटर। हर टीम में अधिकतम आठ B1 (पूरी तरह से नेत्रहीन) खिलाड़ी हो सकते हैं। खास बात यह है कि B1 खिलाड़ी द्वारा बनाए गए हर रन को दोगुना गिना जाता है। बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्टता का नया इतिहास लिख रहीं- CM साय मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्टता का नया इतिहास लिख रही हैं—खेल, शिक्षा, विज्ञान, आर्ट, टेक्नोलॉजी और नेतृत्व—हर जगह उनकी चमक राष्ट्र का गौरव बढ़ा रही है. यह जीत न सिर्फ क्रिकेट की जीत है, बल्कि नारी शक्ति, आत्मविश्वास और ‘नए भारत' की भावना की जीत है. मुख्यमंत्री साय ने भारतीय महिला टीम के सभी खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट स्टाफ को बधाई देते हुए कहा कि उनका यह प्रदर्शन विश्व खेल जगत में भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों पर ले गया है.

स्कूलों को चेतावनी: यूनिफॉर्म व जूतों के लिए मजबूरी नहीं, नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई

गुना  सर्दी के मौसम में यूनिफार्म को लेकर बच्चों को होने वाली परेशानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। कई स्थानों पर गरीब परिवारों के बच्चे उचित गर्म कपड़े न होने के कारण स्कूलों में रोक-टोक का सामना कर रहे थे। इन परिस्थितियों को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने बड़ा निर्णय लेते हुए ठंड के दौरान स्कूल यूनिफार्म की बाध्यता समाप्त कर दी है, जिससे हजारों बच्चों को राहत मिलेगी।   संचालनालय ने दिया आदेश संचालनालय द्वारा गुना जिला शिक्षा अधिकारियों और जनजातीय कार्य विभाग के संयोजकों को जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि निर्धारित यूनिफार्म न होने की स्थिति में बच्चे किसी भी रंग और डिजाइन के गर्म कपड़े जैसे स्वेटर, जैकेट आदि पहनकर स्कूल आ सकते हैं। किसी भी स्थिति में वि‌द्यालय प्रबंधन या शिक्षक उन्हें कक्षा से बाहर नहीं कर सकते। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि कोई स्कूल यूनिफार्म के नाम पर बच्चों पर अनावश्यक दबाव बनाता है, तो संबंधित संस्था और जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यूनिफार्म और जूते उत्तरवाने का नहीं बनाएंगे दबाव संचालनालय ने एक और महत्वपूर्ण समस्या पर भी रोक लगा दी है। कुछ स्कूलों में बच्चों से कक्षा में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल उतरवाने की शिकायत मिली थीं, जो ठंड के दिनों में बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जोखिमभरी और अमानवीय मानी गई। अब इन दोनों प्रथाओं अनिवार्य यूनिफार्म और जूते-चप्पल उत्तरवाने पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। सभी स्कूलों को निर्देशित किया गया है कि वह बच्चों के स्वास्थ्य, गरिमा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। निजी स्कूल बच्चों पर ठंड से बचाव को लेकर अलग से स्वेटर और जैकेट पहनकर आने का दबाव बना रहे थे। क्योंकि स्कूलों की मोनोपॉली के तहत ठंड के लिए अलग से ड्रेस लागू की थी। इससे अभिभावकों को आर्थिक बोझ पड़ रहा था। विभाग का यह कदम स्कूलों में समानता, संवेदनशीलता और बच्चों के प्रति सम्मान की संस्कृति को भी मजबूत करेगा। उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई जिले के सभी निजी और सरकारी स्कूलों को आदेश भेजे जा चुके हैं। यदि किसी स्कूल द्वारा इन निर्देशों का उल्लंघन किया जाता है या यूनिफार्म के अभाव में बच्चे को कक्षा से बाहर करने की शिकायत मिलती है, तो तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी।- राजेश गोयल, डीईओ

‘चार बार डाला वोट’, अवैध घुसपैठियों का खुलासा; हाकिमपुर सीमा पर भारी भीड़ जुटी

उत्तर 24 परगना पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर बीएसएफ चौकी के पास एक कच्चे, धूल भरे रास्ते पर शनिवार को असामान्य सी हलचल दिखी। बरगद के पेड़ की छांव तले, छोटे बैग लिए परिवार, बच्चों के हाथों में पानी की बोतलें, और चुपचाप बैठे पुरुष- सब एक ही अपील दोहराते दिखे: 'हमें घर जाने दीजिए।' ये वे लोग हैं जिन्हें सुरक्षा एजेंसियां 'अवैध बांग्लादेशी निवासी' बता रही हैं, ऐसे लोग जिन्होंने वर्षों तक पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में रहकर काम किया, पहचान पत्र बनवाए, और अब अचानक वापस लौटने की कोशिश में हैं। इस असामान्य उलटी पलायन की वजह है पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) – यानी मतदाता सूची की सख्त जांच। 'अब डर लग रहा है… वापस जाना ही ठीक है' खुलना जिले की रहने वाली शाहिन बीबी अपने छोटे बच्चे के साथ सड़क किनारे इंतजार कर रही थीं। वो न्यू टाउन, कोलकाता में घरों में काम करके 20000 रुपये महीना कमाती थीं। उन्होंने साफ कहा, 'हम गरीबी के कारण आए थे। दस्तावेज ठीक नहीं थे। अब जांच हो रही है, इसलिए लौटना ही बेहतर लग रहा है।' कई लोग मानते हैं कि उन्होंने आधार, राशन कार्ड या वोटर आईडी जैसे कागज दलाल और बिचौलियों के जरिए बनवाए थे। एसआईआर में इन पुराने कागजों की दोबारा जांच हो रही है, इसलिए लोग पूछताछ और हिरासत से बचने के लिए खुद ही सीमा पर आ पहुंचे हैं। एक युवा वेटर बोला, 'आठ साल रह लिया। अगर पुराने कागज मांगे तो क्या दिखाएंगे? जाने में ही भलाई है।' कतार तंबू बन गई, सड़क इंतजारगाह बीएसएफ अधिकारियों के मुताबिक, हर दिन 150-200 लोग पकड़े जा रहे हैं और जांच के बाद उन्हें 'वापस भेजा' जा रहा है। 4 नवंबर, यानी एसआईआर शुरू होने के बाद से ही भीड़ बढ़नी शुरू हो गई। सभी लोगों के बायोमैट्रिक डेटा लेकर पुलिस और प्रशासन को भेजा जाता है। भीड़ ज्यादा होने पर दो-तीन दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। गेट के अंदर बीएसएफ खाना दे रहा है। बाहर इंतजार कर रहे लोग सड़क किनारे चाय-ढाबों पर निर्भर हैं। 40 रुपये में चावल-अंडा और 60 रुपये में चावल-मछली मिल रहा है। 'कागज बनवाने में 20000 रुपये लगे थे…अब सब बेकार' ढुलागोरी की फैक्टरी में काम करने वाले 29 वर्षीय मनीरुल शेख बताते हैं, 'हमने 5000 से 7000 रुपये देकर भारत में एंट्री ली थी। लेकिन कागज बनवाने में 20000 रुपये तक खर्च हो गया। अब एसआईआर की जांच से सब डर गए हैं।' इमरान गाजी नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि, 'मैंने 2016, 2019, 2021 और 2024 में चार बार वोट दिया है। पर 2002 का कोई असली कागज नहीं। इसलिए लौट रहा हूं।' वहीं एक पुलिस अधिकारी का कहना था, 'दो दिन में 95 लोग आए थे। हमारे पास इतनी जगह ही नहीं है। बाद में हमने हिरासत लेना बंद कर दिया।' 'हम यहां दोस्त छोड़कर जा रहे हैं…' कतार में खड़ी छह साल की बच्ची ने अपनी मां से कहा, 'न्यू टाउन में अपने दोस्तों को याद करूंगी।' उसकी मां ने बताया कि वे पिछले साल 25,000 टका देकर बॉर्डर पार करके भारत आए थे। पिता, जो रिक्शा चलाते थे, बोले, 'गरीबी लाई थी… डर वापस ले जा रहा है।' वहीं हाकिमपुर ट्रेडर्स एसोसिएशन के एक सदस्य ने कहा, 'दिल्ली, ढाका, कोलकाता अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ें, पर यहां सड़क पर बैठे इन परिवारों की पीड़ा कौन देखेगा?' स्थानीय व्यापारी और युवा मिलकर खिचड़ी बांट रहे थे। 'अंधेरे में आए थे, उजाले में जा रहे हैं…' बीएसएफ का एक जवान लाइन को देखते हुए बोला, 'ये लोग रात के अंधेरे में आए थे… अब दिन की रोशनी में लौट रहे हैं। फर्क बस इतना ही है।' पिछले छह दिनों में करीब 1,200 लोग आधिकारिक प्रक्रिया पूरी कर बांग्लादेश लौट चुके हैं। शनिवार को करीब 60 लोग अभी भी इंतजार कर रहे थे। 99 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं को दिए गए फॉर्म- ECI वहीं चुनाव आयोग के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के फेज-2 के तहत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। चुनाव आयोग के अनुसार अब तक 99 प्रतिशत से अधिक यानी 50.47 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को एसआईआर फॉर्म मिल चुके हैं। इनमें से 20 करोड़ से अधिक फॉर्म, लगभग 40 प्रतिशत, पहले ही डिजिटाइज कर लिए गए हैं। आयोग का कहना है कि डिजिटल प्रोसेसिंग से सत्यापन और अपडेट कार्य की गति बढ़ी है। लक्ष्य है कि पात्र मतदाताओं के नाम समय पर सूची में शामिल हों और त्रुटियों को न्यूनतम किया जाए। चुनाव आयोग ने एसआईआर को लेकर राज्यवार सूची भी जारी की है।  

अब अंतिम समय पर कैंसिलेशन में भी 80% रिफंड, हवाई टिकट पर मेडिकल इमरजेंसी कवरेज

नई दिल्ली नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हवाई किरायों के रिफंड से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नई ड्राफ्ट गाइडलाइन में कहा गया है कि अगर किसी यात्री को मेडिकल इमरजेंसी के कारण टिकट रद्द करनी पड़े, तो एयरलाइन को पूरा पैसा लौटाना होगा या फिर क्रेडिट नोट देना होगा। ट्रैवल एजेंट के जरिए खरीदे टिकट का रिफंड भी अब सीधे एयरलाइन की जिम्मेदारी होगी। यानी ऑनलाइन पोर्टल या एजेंट से खरीदे टिकट के मामले में भी यात्री को एयरलाइन ही रिफंड देगी। इसके लिए 21 कार्यदिवस की समय सीमा तय की गई है। ड्राफ्ट नियमों पर स्टेकहोल्डर्स से सुझाव 30 नवंबर 2025 तक मांगे गए हैं। टिकट बदलने का समय बढ़ेगा डीजीसीए ने एक और राहत देने का प्रस्ताव रखा है, अब यात्री 48 घंटे के भीतर टिकट में बदलाव मुफ्त में कर सकेंगे, बशर्ते ये बदलाव:- घरेलू उड़ान के लिए- प्रस्थान से कम से कम पांच दिन पहले और अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए- प्रस्थान से 15 दिन पहले किया जाए। पहले यह सुविधा सिर्फ 24 घंटे और सभी उड़ानों के लिए सात दिन पहले तक सीमित थी। व्हीलचेयर और सुविधा नियमों में बदलाव डीजीसीए ने दिव्यांग यात्रियों के यात्रा मानकों को भी अपडेट किया है। व्हीलचेयर अब केवल दिव्यांग यात्रियों के लिए प्राथमिकता में रहेगी। सक्षम यात्री व्हीलचेयर का उपयोग करेंगे तो उन पर शुल्क लगेगा। एयरपोर्ट पर अम्बुलिफ्ट, एरोब्रिज या टोवेबल रैंप उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। जहां इनमें से कुछ भी न हो, वहां अंतिम विकल्प के रूप में स्टेप-लैडर की अनुमति दी गई है- हालांकि इसे लेकर विकलांग अधिकार समूहों ने नाराजगी जताई है। एयरपोर्ट को दिव्यांग यात्रियों के लिए स्पष्ट साइन बोर्ड, अलग ड्रॉप-ऑफ जोन और पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करना होगा। जरूरत पड़ने पर यात्रियों को डिजिटल मैप भी उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है। हवाई टिकटों में इंश्योरेंस जोड़ने की तैयारी सरकार हवाई टिकटों में ऐसा इनबिल्ट इंश्योरेंस जोड़ने की तैयारी कर रही है, जिससे उड़ान से कुछ ही घंटे पहले टिकट रद्द करने पर भी 80% तक रिफंड मिल सकेगा। यह पूरी कवरेज यात्रियों से कोई अतिरिक्त शुल्क लिए बिना दी जाएगी, प्रीमियम एयरलाइंस और बीमा कंपनियों की साझेदारी से भरा जाएगा। अभी की व्यवस्था के अनुसार, उड़ान के तीन घंटे के भीतर रद्द करने पर टिकट नो-शो माना जाता है और कोई रिफंड नहीं मिलता। मेडिकल इमरजेंसी साबित करने पर एयरलाइन कभी-कभी रिफंड दे देती हैं, लेकिन यह पूरी तरह उन्हीं के विवेक पर निर्भर है। कैसे काम करेगा नया प्लान? सरकार और एयरलाइंस मिलकर ऐसा मॉडल लाने जा रही हैं जिसमें लगभग ₹50 प्रति टिकट के हिसाब से बीमा लागत निकाली जा सकती है। इससे उड़ान से चार घंटे पहले तक रद्द टिकटों पर 80% रिफंड दिया जा सकेगा। कुछ एयरलाइंस पहले ही बीमा कंपनियों से बातचीत शुरू कर चुकी हैं। ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियां (ओटीए) अभी भी यात्रियों को अलग से इंश्योरेंस खरीदने का 'नज' देती हैं, लेकिन सरकार चाहती है कि बेस किराए में ही सुरक्षा शामिल हो, ताकि 'पैसा डूब जाने' का डर न रहे। क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव और कब लागू होगा? अथॉरिटीज के मुताबिक रिफंड से जुड़ी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। इसमें रिफंड मिलने में देरी, रिफंड राशि में कटौती, या फिर पैसा न देकर फ्यूचर क्रेडिट थमा देना – जो सीमित अवधि तक ही मान्य रहता है। इसीलिए डीजीसीए ने भी अपने रिफंड नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है ताकि यात्रियों की परेशानी कम की जा सके और प्रक्रिया पारदर्शी बने। सरकारी अधिकारी कह रहे हैं कि यह इनबिल्ट इंश्योरेंस मॉडल दो से तीन महीनों में लागू किया जा सकता है, बशर्ते एयरलाइंस और बीमा कंपनियों की गणना संतुलित बैठ जाए।