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ये देश 16 साल से कम बच्चों पर इंटरनेट बैन! बढ़ते ऑनलाइन खतरे को रोकने बड़ा कदम

नई दिल्ली  दुनियाभर में साइबरबुलिंग, ऑनलाइन फ्रॉड और यौन शोषण की घटनाओं में बढ़ोतरी ने कई देशों की सरकारों को चिंतित कर दिया है। इसी को देखते हुए मलेशिया ने अगले साल से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट प्रतिबंध लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। सरकार का कहना है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाना अब बेहद जरूरी हो गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी निगरानी मलेशिया के संचार मंत्री फाहमी फादजिल ने बताया कि इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। सरकार अब ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों द्वारा अपनाए गए मॉडलों का अध्ययन कर रही है। मंत्री के अनुसार, यूजर्स की उम्र सत्यापित करने के लिए पहचान पत्र, पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन सिस्टम को लागू करने पर विचार किया जा रहा है। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी निगरानी बनाएगी। नियमों का पालन करना अनिवार्य मलेशिया ने इस साल जनवरी से 80 लाख यूजर्स वाले बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। लाइसेंस प्राप्त प्लेटफॉर्म्स को आयु सत्यापन, कंटेंट सुरक्षा और पारदर्शिता नियमों का पालन करना होगा। उद्देश्य यह है कि बच्चों को एक सुरक्षित डिजिटल स्पेस उपलब्ध कराया जा सके। 10 दिसंबर से ऑस्ट्रेलिया में लागू होगा दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया में पहली बार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध का कानून बनाया है, जो 10 दिसंबर से लागू होगा। फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स को सख्त चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर 5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। डेनमार्क और नॉर्वे भी इसी दिशा में उठा रहे कदम डेनमार्क और नॉर्वे भी इसी दिशा में कदम उठा रहे हैं। डेनमार्क 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर चुका है, जबकि नॉर्वे ने सोशल मीडिया उपयोग की न्यूनतम उम्र 15 साल तय करने का प्रस्ताव रखा है।

दिसंबर ट्रैवल आसान: हरियाणा से राजस्थान के लिए चलेंगी अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें

हरियाणा  उत्तर पश्चिम रेलवे ने हरियाणा से राजस्थान के बीच सफर करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए दिसंबर माह में तीन नई स्पेशल ट्रेनों का संचालन करने का फैसला किया है। इनमें रेवाड़ी–रींगस के बीच दो और भिवानी–जयपुर के बीच एक स्पेशल ट्रेन शामिल है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण ने बताया कि रेवाड़ी–रींगस के बीच चलने वाली एक स्पेशल ट्रेन 15 ट्रिप और दूसरी 13 ट्रिप लगाएगी। वहीं भिवानी–जयपुर के बीच रोज़ाना स्पेशल ट्रेन का संचालन होगा। रेवाड़ी–रींगस स्पेशल ट्रेन सेवाएं गाड़ी संख्या 09633 – रेवाड़ी–रींगस एक्सप्रेस स्पेशल तारीखें: 1, 4, 6, 7, 13, 14, 15, 20, 21, 25, 27, 28, 29, 30, 31 दिसंबर (कुल 15 ट्रिप) समय: रेवाड़ी से रात 10:50 बजे, रींगस आगमन 01:35 बजे   गाड़ी संख्या 09634 – रींगस–रेवाड़ी एक्सप्रेस स्पेशल तारीखें: 2, 5, 7, 8, 14, 15, 16, 21, 22, 26, 28, 29, 30, 31 दिसंबर 2025 और 1 जनवरी 2026 (कुल 15 ट्रिप) समय: रींगस से सुबह 2:20 बजे, रेवाड़ी आगमन 5:20 बजे रैक: 16 डिब्बों वाला DEMU रैक     गाड़ी संख्या 09637 – रेवाड़ी–रींगस स्पेशल तारीखें: 1, 4, 6, 7, 13, 14, 15, 20, 21, 25, 27, 28, 31 दिसंबर 2025 (13 ट्रिप) समय: रेवाड़ी से सुबह 11:45 बजे, रींगस आगमन 2:45 बजे     गाड़ी संख्या 09638 – रींगस–रेवाड़ी स्पेशल तारीखें: 1, 4, 6, 7, 13, 14, 15, 20, 21, 25, 27, 28, 31 दिसंबर 2025 (13 ट्रिप) समय: रींगस से दोपहर 3:05 बजे, रेवाड़ी आगमन 6:20 बजे रैक: 8 साधारण डिब्बे + 2 गार्ड कोच = कुल 10 डिब्बे  

पंजाब में नया ‘कैश गेम’ उजागर: Wedding Season में 10-20 के नोटों की अचानक बढ़ी डिमांड

गुरदासपुर  गुरदासपुर जिले के तहत आने वाले शहरों/कस्बों और गांवों में बैंक कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत से 10-20 रूपये की ब्लैक का गोरख धंधा जोरों पर चल रहा है। शादी समारोह के दौरान दूल्हे/दुल्हन को 10-20 रुपये के नोट हार पहनाने के लिए दलालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पिछले दिनों जब हरचोवाल, कादियां, श्री हरगोबिंदपुर, काहनूवान, वडाला ग्रंथियां, घुमाण, कलानौर, धालीवाल, कादियां, बटाला, गुरदासपुर, ध्यानपुर, डेरा बाबा नानक, फतेहगढ़ चूडिय़ां, दीनानगर आदि कस्बों के विभिन्न बैंकों में बैंक के उच्च अधिकारियों से 10 और 20 रुपये के नोटों के बंडलों की मांग की गई तो उन्होंने नोटों के बंडल न होने का बहाना बनाकर लोगों को वापिस भेज दिया। जब हमने वहां मौजूद दुकानदारों में दलालों से बात की तो हमें नए दस और बीस रुपये के नोटों की जरूरत थी तो उन्होंने हमें 10 रूपये के एक हजार रुपये के नए नोट देने के बदले 1400 रुपये में देने की मांग की, इस प्रकार हमें बीस रुपये के नोटों का बंडल 2400 से 2500 रुपये में ब्लैक में देने के लिए कहा गया। यह बहुत ही हैरानी की बात है कि अगर ये नोट बैंकों में उपलब्ध नहीं हैं तो शहरों और कस्बों में बैठे दलाल इन नोटों को लोगों को ब्लैक में बेच रहे हैं। इस संबंधी ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी गगनदीप सिंह रियाड़ ने हा कि आर.बी.आई.को बैंक के इस भ्रष्ट धंधे में शामिल कर्मचारियों और दलालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। जो लोग इन नोटों को ब्लैक कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जिस बैंक में दस, बीस और पचास रुपये के नोटों के बंडल सप्लाई किए जाते हैं, उसकी डिटेल्स अंदर ब्लैक बोर्ड पर लिखी जानी चाहिए, जिसे भी शादी समारोह में इन नोटों की ज़रूरत हो, वह शादी का कार्ड सरपंच, किसी सम्मानित व्यक्ति से वेरिफाई करवाए और फिर ये नोट पूरे रेट पर दिए जाने चाहिए। गगनदीप सिंह रियाड़ ने आगे कहा कि, यह बहुत सोचने वाली बात है कि एक समय था जब बैंक में शादी का कार्ड दिखाकर 10, 20, 50 के नोटों के बंडल आसानी से मिल जाते थे। जबकि अब एैसा नही है। हैरानी की बात है कि ये बाजार में नए नोट ब्लैक में खुलेआम बिक रहे हैं। कुछ लोगों ने बैंक अधिकारियों से मिल कर इसे कमाई का साधन बना लिया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। हर बैंक के मैनेजर को इन नोटों की डिटेल्स सार्वजनिक करने के निर्देश दिए जाने चाहिए। रियाड़ ने पंजाब के डिप्टी कमिश्नरों और बड़े अधिकारियों से मांग है कि इन काले धन्धे को रोकने के लिए हर बैंक को निर्देश दिए जाएं। 

धीरेंद्र शास्त्री की पहल: 300 लड़कियों के विवाह के लिए 1 दिसंबर से रजिस्ट्रेशन, 15 फरवरी को होगा महोत्सव

छतरपुर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. वे अपनी कथाओं, बयानों, यात्रा सहित हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग को लेकर चर्चा में रहते हैं. इस बार धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर एक अच्छी खबर दी है. जहां उन्होंने गरीब बेटियों की शादी कराने की घोषणा करते हुए रजिस्ट्रेशन की तारीख बताई. बागेश्वर् बाबा ने इस आयोजन में जुड़ने की सभी से अपील की. धीरेंद्र शास्त्री कराएंगे 300 बेटियों का विवाह सिद्ध पीठ बागेश्वर धाम में हर साल शिवरात्रि के दिन सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव का आयोजन किया जाता है. इस महोत्सव के माध्यम से उन गरीब बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा जाता है, जो बेसहारा, मातृ पितृहीन, अर्थहीन हैं. 15 फरवरी 2026 को होने वाले इस महोत्सव में 300 बेटियों को वैवाहिक बंधन में बांधा जाएगा. 1 दिसंबर से 15 दिसंबर के बीच बेटियों के रजिस्ट्रेशन होंगे. पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव के संबंध में बताया कि "इस साल 300 बेटियों का विवाह करने का निर्णय लिया गया है. विवाह के लिए 1 दिसंबर से शुरु है रजिस्ट्रेशन 1 दिसंबर से 15 दिसंबर के बीच धाम के कार्यालय नंबर-5 में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चलेगी. इस महोत्सव में उन बेटियों के विवाह किए जाते हैं, जो बेसहारा, अत्यंत निर्धन परिवार, मातृ-पितृ हीन हैं. उन्होंने बताया कि बागेश्वर धाम में आने वाले दान से बेटियों का विवाह किया जाएगा. बागेश्वर बाबा ने कहा कि अगर देशभर के मंदिरों की दान पेटियों से बेटियों का घर बसने लगेगा, तो मानस मंदिर भी घर-घर बनने लगेगा है. इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से इस आयोजन से जुड़ने की अपील की. लोगों से सही डॉक्यूमेंट्स लाने की अपील उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि जो भी रजिस्ट्रेशन कराने आएगा, वह पूरी तरह से सही दस्तावेज लेकर आए. बागेश्वर धाम की टीम घर-घर जाकर उनकी जांच करेगी. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा जितने ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उनकी बात पहुंचेगी, उतने ही जरुरतमंद की मदद होगी. 15 फरवरी को बागेश्वर धाम में बड़ा महोत्सव होगा. जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होने पहुंचेंगे.

अब पुलिसकर्मियों को बाल कटवाने या क्लीन शेव रखने की जरूरत नहीं, छत्तीसगढ़ पुलिस ने किया स्पष्ट

रायपुर  राज्य पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बाल जीरो कट रखने और क्लीन शेव अनिवार्य होने को लेकर फैल रही चर्चाओं पर अब स्थिति स्पष्ट हो गई है। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने आरटीआई के माध्यम से बताया है कि इस संबंध में न तो कोई प्रशासनिक आदेश जारी हुआ है और न ही प्रशासन शाखा या उप शाखा के किसी अभिलेख में ऐसा कोई उल्लेख मौजूद है। इसका अर्थ है कि पुलिसकर्मियों के लिए लंबे बाल या दाढ़ी रखना अनुशासनहीनता की श्रेणी में नहीं आता। यह जानकारी संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान द्वारा लगाए गए आरटीआई आवेदन के जवाब में सामने आई है। जानकारी के अनुसार, दीवान ने 13 अक्टूबर को आवेदन लगाया था, जिस पर 12 नवंबर को एआईजी अंशुमान सिसोदिया ने जवाब दिया। दीवान ने बताया कि वर्ष 1861 से पुलिस व्यवस्था पर अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का प्रभाव रहा है और कई पुराने, अप्रचलित नियम आज भी व्यवहार में लाए जा रहे हैं। दाढ़ी बढ़ाने पर किया जाता था दंडित उन्होंने आरोप लगाया कि कई पुलिसकर्मियों को केवल बाल जीरो कट न कराने या दाढ़ी बढ़ाने पर अनुशासनहीनता बताकर दंडित किया गया, जबकि संबंधित अधिकारियों को भी इस संबंध में वास्तविक नियमों की जानकारी नहीं थी। दीवान का कहना है कि वर्तमान में कई स्थानों पर हर मंगलवार और शुक्रवार को बाल जीरो कट रखना अनिवार्य बताया जाता है, जिससे जवानों को अनावश्यक अपमान झेलना पड़ता है।  

200 देशों को कर्ज देने वाला चीन, अमेरिका को सबसे अधिक कर्ज, ट्रंप की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

बीजिंग  दुनिया के नक्शे पर आज चीन केवल एक प्रोडक्शन सेंटर या आर्थिक शक्ति नहीं रह गया है, बल्कि अब वह दूसरे मुल्कों को कर्ज और वित्तीय सहायता देकर दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला बड़ा खिलाड़ी बन चुका है. अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान जैसे देशों से लेकर छोटे और गरीब देशों तक, लगभग हर कोने में चीन का पैसा पहुंच चुका है. हैरानी की बात यह है कि जिन देशों को चीन उधार दे रहा है, उनमें सबसे ऊपर नाम अमेरिका का है. बढ़ते तनाव, टकराव और प्रतिस्पर्धा के बावजूद ‘अंकल सैम’ ही चीन से सबसे बड़ा उधार लेने वाला देश है, यह फैक्ट दुनिया को चौंका देने के लिए काफी है. डैन वोंग नामक एक लेखक ने अपनी किताब ब्रेकनेक (Breakneck) में लिखा है कि चीन की इंजीनियरिंग क्षमता, निर्माण की गति और शहरी बदलाव सिर्फ विकास की कहानी नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुके हैं. उनका सवाल सीधा है- “क्या चीन इतना आगे निकल चुका है कि अब अमेरिका ही पीछे छूटने से डर रहा है?” इसी बीच AidData रिसर्च लैब की रिपोर्ट ने इस बहस को और तीखा कर दिया है. रिपोर्ट बताती है कि साल 2000 से 2023 तक चीन ने दुनियाभर में कर्ज और अनुदान के रूप में 2.2 ट्रिलियन डॉलर बांटे हैं, और करीब 200 देशों व क्षेत्रों को इससे फायदा या कर्ज का बोझ मिला है. दुनिया का सबसे बड़ा आधिकारिक कर्जदाता चीन ने यह पैसा केवल आर्थिक रूप से कमजोर देशों को नहीं दिया. सिर्फ 6 फीसदी रकम की सहायता ग्रांट या सस्ते कर्ज के रूप में दी है. 47 फीसदी गरीब देशों ने और 43 फीसदी अमीर व विकसित देशों ने चीन से कर्ज लिया. यानी जितने विकासशील देश चीन पर निर्भर होते जा रहे हैं, उतने ही डेवलप हो चुके और अमीर देश भी चीन पर वित्तीय रूप से निर्भर हो गए हैं. AidData के अनुसार, चीन अब दुनिया का सबसे बड़ा आधिकारिक कर्जदाता (official creditor) बन चुका है. सिर्फ इतना ही नहीं, चीन की राज्य-स्वामित्व वाली कंपनियां और बैंक पूरी दुनिया में बुनियादी ढांचा, खनिज संसाधन, एयरपोर्ट, पाइपलाइन, डेटा सेंटर और हाई-टेक कंपनियों में निवेश कर रहे हैं. रिपोर्ट कहती है कि चीन की रकम 2,500 अमेरिकी परियोजनाओं में लगी है, जिनमें टेस्ला (Tesla), अमेज़न (Amazon), डिज्नी (Disney) और बोइंग (Boeing) जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं. टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में खूब लगाया पैसा दुनिया अक्सर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की चर्चा करती है, लेकिन आंकड़ों के अनुसार BRI चीन की कुल विदेशी उधारी का सिर्फ 20 फीसदी हिस्सा है. चीन का बहुत सारा पैसा अमीर देशों की टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में भी जा रहा है. यानी वह केवल सड़कें और पुल नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक पर भी अपना नियंत्रण मजबूत कर रहा है. अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया… भारत भी… सब कर्जदार 2000 में चीन का सिर्फ 11 प्रतिशत कर्ज अमीर देशों को जाता था, लेकिन 2023 तक यह बढ़कर 75 प्रतिशत हो गया. यानी अमीर दुनिया गरीब देशों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से चीन के पैसों पर निर्भर होती गई है. चीन के 10 सबसे बड़े कर्जदार देशों की सूची में सबसे ऊपर है संयुक्त राज्य अमेरिका (202 बिलियन डॉलर), उसके बाद रूस (172 बिलियन डॉलर), ऑस्ट्रेलिया (130 बिलियन), वेनेज़ुएला (106 बिलियन) जैसे देश आते हैं. भारत भी इससे बाहर नहीं है. भारत ने चीन से 11.1 बिलियन डॉलर कर्ज और अनुदान के रूप में प्राप्त किए हैं. इन सभी आंकड़ों से एक बात साफ उभरती है कि चीन का खेल केवल डेवलपमेंट हेतु मदद का नहीं, बल्कि रणनीतिक आर्थिक प्रभाव का है. कर्ज और निवेश के माध्यम से चीन न केवल देशों में बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है, बल्कि वैश्विक राजनीतिक समीकरणों को भी अपने हित में मोड़ रहा है. और यही वजह है कि भविष्य की दुनिया की राजनीति, तकनीक और व्यापार में चीन की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक होती जा रही है.

बढ़ी सुविधा: सिंगल हेल्थ पॉलिसी में अब परिवार के साथ लिव‑इन पार्टनर और भाई‑बहन का कवर

नई दिल्ली. भारत में हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों ने रिटेल हेल्थ प्लान को और अधिक लचीला बनाते हुए बड़ा बदलाव किया है. अब एक ही पॉलिसी में भाई, बहन और लिव इन पार्टनर को भी शामिल किया जा सकेगा. पहले यह विकल्प उपलब्ध नहीं था और कवरेज सिर्फ पति पत्नी, बच्चे और माता पिता जैसे पारंपरिक परिवार तक सीमित रहता था. इससे कई लोग एक ही घर में रहने के बावजूद अलग अलग पॉलिसियां लेने को मजबूर होते थे. पॉलिसीबाजार के अनुसार, मौजूदा ढांचा भारत की बदलती जीवनशैली से मेल नहीं खा रहा था. देश के बड़े शहरों में युवाओं का भाई बहन के साथ रहना आम बात है और काफी कपल शादी करने के बजाय लिव इन में रहते हैं. ऐसे परिवारों के लिए एक संयुक्त हेल्थ पॉलिसी का विकल्प जरूरी माना जा रहा था. इसी को देखते हुए अब कंपनियों ने कवरेज का दायरा बढ़ा दिया है. मॉडर्न फैमिली पैटर्न को देखते हुए बदलाव सिद्धार्थ सिंगल (Siddharth Singhal), हेड ऑफ हेल्थ इंश्योरेंस, पॉलिसीबाजार, ने कहा कि यह अपडेट सेक्टर के लिए सबसे प्रोग्रेसिव कदम है क्योंकि भारत के शहरी परिवारों की जरूरतें तेजी से बदल रही हैं. उन्होंने कहा कि यह बदलाव वास्तविक घरेलू जिम्मेदारियों और रिश्तों को मान्यता देता है जहां वित्तीय और हेल्थ संबंधी फैसले कई बार भाई बहन या लिव इन पार्टनर मिलकर लेते हैं. कवरेज की क्वॉलिटी पहले जैसी इंश्योरटेक कंपनियों ने बताया कि नए विकल्प जुड़ने के बावजूद एक्सक्लूजन, वेटिंग पीरियड, बेनिफिट्स और अंडरराइटिंग के नियम बिल्कुल पहले जैसे ही रहेंगे. इसका मतलब है कि परिवार बढ़ाने पर कवरेज की गुणवत्ता में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा. उपभोक्ताओं को सिर्फ अतिरिक्त सदस्य जोड़ने का फ्लेक्सिबल विकल्प दिया जा रहा है. कौन सी कंपनियों ने शुरुआत की आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड इस नए फीचर को लॉन्च कर चुके हैं. इंडस्ट्री जानकारों का कहना है कि अन्य कंपनियां भी जल्द ही इस मॉडल को अपनाएंगी क्योंकि बाजार में इनक्लूसिव और मॉडर्न फैमिली सेटअप को ध्यान में रखने वाली पॉलिसियों की मांग लगातार बढ़ रही है. यह कदम हेल्थ इंश्योरेंस की पहुंच और उपयोगिता दोनों बढ़ाने वाला माना जा रहा है. अंत में कहा जा रहा है कि इस बदलाव से उपभोक्ताओं को न सिर्फ सुविधा मिलेगी बल्कि लंबे समय की हेल्थ सिक्योरिटी प्लानिंग भी आसान होगी. एक ही पॉलिसी में पूरा घर कवर होने से प्रीमियम मैनेजमेंट सरल होगा और अलग अलग प्लान खरीदने का झंझट भी खत्म होगा.

डेप्युटी CM ने हिड़मा की मां से की लंच मुलाकात, नक्सलियों के नेता ने सरेंडर पर सोचा

सुकमा  माओवादियों के टॉप लीडर माड़वी हिड़मा के एनकाउंटर के बाद नक्सली संगठन में खौफ दिख रहा है। नक्सली संगठनों ने एक बार फिर हथियारबंद युद्ध रोकने के लिए तीन राज्यों के सीएम को लेटर लिखा है। वहीं, दूसरी तरफ एक खूंखार नक्सली के सरेंडर की अटकलें लगाई जा रही है। हिड़मा की मौत के बाद उसका दोस्त माने जाने वाला नक्सली देवा बारसे सरेंडर कर सकता है। देवा के सरेंडर को लेकर दावा किया जा रहा है कि वह सरेंडर के लिए बातचीत कर रहा है। दावा किया जा रहा है कि बटालियन कमांडर देवा बारसे अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण करना चाहता है लेकिन वह कन्फयूज्ड है कि किस राज्य में सरेंडर करे। पिछले दो तीन दिनों से नक्सली देवा के सरेंडर को लेकर खबरें आ रही हैं। हालांकि इसे लेकर अभी तक सुरक्षाबल के जवानों ने कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की है। दावा किया गया है कि हिड़मा की मौत के बाद से देवा काफी परेशान है और वह आने वाले दिनों ने सरेंडर कर सुकमा लौटना चाहता है। सरेंडर को लेकर क्यों कन्फयूज्ड है देवा देवा और उनके साथी को लेकर यह कहा जा रहा है कि वह इस बात को लेकर कन्फयूज्ड हो गया है कि वह छत्तीसगढ़ में सरेंडर करे या फिर किसी दूसरे राज्य में। वह किस तरह से सरेंडर करे कि आत्मसमर्पण करने के बाद वह सुरक्षित रह सके और शासन की योजनाओं का लाभ भी ले सके। देवा की मां से मिले थे डेप्युटी सीएम डेप्युटी सीएम विजय शर्मा ने हाल ही में सुकमा जिले के पूवर्ती गांव का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने हिड़मा और देवा के मां से मुलाकात की थी। दोनों की मां से अपील की थी कि नक्सली विचारधारा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट आएं। जिसके बाद देवा और हिड़मा की मां ने अपील की थी कि बेटा जहां भी हो लौट आओ। जंगल में भटकने से कोई फायदा नहीं होगा। इस अपील के 8 दिन बाद ही हिड़मा का एनकाउंटर हो गया था। पूर्वती का रहने वाला है देवा खूंखार नक्सली देवा सुकमा जिले के पूवर्ती का ही रहने वाला है। उसे हिड़मा का खास माना जाता था। कहा जाता है कि हिड़मा से प्रभावित होकर ही वह नक्सली विचारधारा में शामिल हुआ था। लेकिन उसकी मौत के बाद वह टूट गया। छत्तीसगढ़ सरकार ने उसके सिर पर 25 लाख रुपए का इनाम रखा है। हिड़मा की तरह देवा भी AK-47 हमेशा अपने साथ रखता है। 

फर्जी गुरु ने इंजीनियर से ऐंठे 48 लाख, चमत्कारी दवा का दावा निकला ठगी

बेंगलुरु  बेंगलुरु में 29 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। उसने आरोप लगाया कि स्वघोषित आयुर्वेदिक हीलर ने उसे सेक्सुअल समस्याओं के इलाज के नाम पर महंगी और हानिकारक हर्बल प्रोडक्ट्स बेचे। इसके लिए उसे 48 लाख रुपये चुकाने पड़े। शिकायतकर्ता ने बताया कि इन दवाओं के सेवन से उसकी तबीयत बिगड़ गई और किडनी में समस्या आने लगी। पीड़ित ज्ञानभारती इलाके में रहता है और शिवमोग्गा जिले का मूल निवासी है। वह पिछले तीन वर्षों से एक निजी फर्म में नौकरी कर रहा है। उसने ज्ञानभारती पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, मार्च 2023 में उसकी शादी हुई। पति-पत्नी पहले बसवेश्वरनगर में रहते थे। शादी के शुरुआती महीनों में उसे सेक्सुअल समस्याएं होने लगीं। वह केंगरी में मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के लिए गया, जहां डॉक्टरों ने टेस्ट कराए और कुछ दवाएं लिखीं। इस साल 3 मई को अस्पताल जाते समय उसने उल्लाल में लॉ कॉलेज के पास सड़क किनारे आयुर्वेदिक तंबू देखा। यहां लगे पोस्टर पर सेक्सुअल समस्याओं के तुरंत समाधान का दावा किया गया था। वह टेंट के अंदर चला गया, जहां उसे एक व्यक्ति मिला। पीड़ित ने अपनी समस्याएं उसे बताईं। उस शख्स ने कहा कि 'विजय गुरुजी' इसका तेजी से इलाज कर सकते हैं। उसने विजय से मिलने की व्यवस्था करने का वादा किया। सड़क किनारे टेंट पर पड़ी नजर रिपोर्ट के मुताबिक, उसी शाम एक व्यक्ति टेंट में आया और उसने खुद को विजय गुरुजी बताया। पीड़ित की जांच करने के बाद विजय ने कहा कि एक दुर्लभ दवा देवराज बूटि उसकी समस्या का इलाज कर देगी। उसने इसे यशवंतपुर में विजयलक्ष्मी आयुर्वेदिक मेडिसिन शॉप से खरीदने को कहा। उसने कहा कि यह दवा केवल उसी दुकान पर उपलब्ध है और वह इसे उत्तराखंड के हरिद्वार से लाता है। उसने कहा कि देवराज बूटि का एक ग्राम 1.6 लाख रुपये का है। उसने कहा कि दवा केवल नकद भुगतान से खरीदी जानी चाहिए। उसने सुझाव दिया कि पीड़ित अकेले जाए, क्योंकि दावा करते हुए कि अगर कोई साथ जाए तो उसकी शक्ति नष्ट हो जाएगी। माता-पिता से उधार लिए पैसे पीड़ित ने घर से नकद पैसे लिए और आयुर्वेदिक दुकान पर चला गया। वह दवा लेकर विजय के पास लौटा। स्वघोषित आयुर्वेदिक हीलर ने बताया कि देवराज बूटि का इस्तेमाल कैसे करना है और उसे खास तरह का तेल भी दिया। इस तेल की कीमत 76,000 रुपये प्रति ग्राम थी और 15 ग्राम तेल खरीदने को कहा। उसने हर हफ्ते अपनी पत्नी और माता-पिता से पैसे उधार लिए और कुल 17 लाख रुपये का भुगतान 15 ग्राम तेल और अन्य प्रोडक्ट्स के लिए किया। मेडिकल जांच की रिपोर्ट से हैरान विजय ने बाद में उसे अतिरिक्त 3 ग्राम देवराज बूटि' खरीदने के लिए दबाव डाला। प्रत्येक ग्राम के लिए 1.6 लाख रुपये देने को कहा। पीड़ित ने बैंक से 20 लाख रुपये का लोन लिया और कुल 18 ग्राम देवराज बूटि खरीदी। बाद में उसे देवराज रसाबूटि नामक एक अन्य दवा खरीदने के लिए मनाया गया, जिसकी कीमत 2.6 लाख रुपये प्रति ग्राम थी। इसके लिए उसने दोस्त से 10 लाख रुपये उधार लिए और चार ग्राम देवराज रसाबूटि खरीदी। इस तरह पीड़ित ने विजयलक्ष्मी आयुर्वेदिक मेडिसिन शॉप से कुल 48 लाख रुपये देकर सभी दवाएं खरीदीं। सभी दवाओं का उपयोग करने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। जब पीड़ित ने मेडिकल जांच कराई तो ब्लड टेस्ट के नतीजे से किडनी में समस्याएं दिखीं। अब शिकायतकर्ता का आरोप है कि विजय गुरुजी की हर्बल दवाओं के सेवन से उसकी सेहत बिगड़ी। उसने विजय, दवा दुकान मालिक और उस टेंट वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जिसने उसे विजय से मिलवाया था।

पीएम योजना से बैकुंठपुर की शीतल गुप्ता का घर हुआ रोशन, बिजली बिलों से मिली राहत

रायपुर केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ़्त बिजली योजना से कोरिया जिले के बैकुंठपुर निवासी  शीतल गुप्ता का घर रोशन हुआ है। वे इस योजना का लाभ लेकर अपने घर का ऊर्जा बचत और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ा है।     पीएम सूर्यघर योजना के हितग्राही  गुप्ता बताते हैं कि उन्हें इस योजना की जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से मिली। योजना के बारे में विस्तार से जानने के बाद वे निकटतम बिजली कार्यालय पहुँचे और वहां आवश्यक प्रक्रिया समझकर आवेदन किया।     उन्होंने अपने घर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल लगाने का निर्णय लिया, जिसके लिए उन्हें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से ऋण भी सहज रूप से उपलब्ध हो गया। सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार से मिलने वाली 78 हजार रुपए की सब्सिडी उन्हें समय पर प्राप्त हो गई।      गुप्ता का कहना है कि इस योजना से जुड़कर उन्हें अब महंगे बिजली बिलों से छुटकारा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, वे इसे एक ऐसा कदम मानते हैं जो न केवल परिवार पर आर्थिक बोझ कम करेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा।पीएम सूर्यघर योजना के माध्यम से शीतल गुप्ता जैसे लाभार्थी अब स्वच्छ, सस्ती और सतत ऊर्जा की ओर बढ़ते नए भारत के प्रतीक बनते जा रहे हैं।