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अगर चच्चे के 30 बच्चे हो सकते हैं, तो हिंदुओं के 4 क्यों नहीं? बागेश्वर बाबा की जनसंख्या टिप्पणी पर विवाद

शिवपुरी  शिवपुरी में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य राजनीति नहीं, हिंदू और सनातन एकता है। उन्होंने कहा कि हम इस देश को गजवा-ए-हिंद नहीं बल्कि हमें भगवा हिंद बनाना है। उन्होंने हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए कहा “हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने चाहिए। चच्चे के 30 बच्चे हो सकते हैं तो हिंदुओं के 4 क्यों नहीं?” पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भारत में पाठयक्रम में गीता‑भागवत‑रामायण को जोड़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के पाठ्यक्रम में ऐसे ग्रंथ शामिल होने चाहिए जो युवाओं को सही दिशा दें। अगर गीता, भागवत और रामायण को जोड़ दिया जाए तो युवा सही दिशा पाएंगे। कई पुस्तकें ऐसी हैं जो केवल अपने मजहब के लोगों को इंसान मानती हैं और बाकी को काफिर कहती हैं। सनातन धर्म ऐसा नहीं है। यह वसुधैव कुटुंबकम् की बात करता है। इसलिए पाठ्यक्रम में ‘जोड़ने वाले’ जोड़ें, ‘तोड़ने वाले’ नहीं।   वही दिल्ली ब्लास्ट पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग इस देश का खाना खाते हैं और तिरंगे में चांद देखना चाहते हैं, जबकि हम चांद पर तिरंगा देखना चाहते हैं। उन्होंने आत्मघाती हमलों में मारे गए आतंकियों के परिवारों को लेकर कहा कि इस्लाम धर्म मानने वाले अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दें। अपने बच्चों को अब्दुल कलाम बनाएं, आतंकवादी नहीं। जो ऐसा नहीं करना चाहते, वे लाहौर जा सकते हैं। दिल्ली धमाके के आरोपी डॉक्टरों पर शास्त्री ने कहा कि यह आतंकी संगठनों की बौखलाहट है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश का खाना खाते हैं और तिरंगे में चांद ढूंढते हैं, जबकि हम चांद पर तिरंगा देखना चाहते हैं।  

भारत-नेपाल संबंधों में तनाव: नेपाल ने नए नोट पर विवादित नक्शा छापा, बढ़ी कूटनीतिक गर्मी

नेपाल  नेपाल के केंद्रीय बैंक ने बृहस्पतिवार को 100 रुपए के नए नोट जारी किए, जिन पर देश का संशोधित मानचित्र छपा है, जिसमें विवादास्पद कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्र भी शामिल हैं। भारत ने इस कदम को ‘‘कृत्रिम विस्तार'' करार दिया है। नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) के नए नोट पर पूर्व गवर्नर महाप्रसाद अधिकारी के हस्ताक्षर हैं। बैंक नोट पर जारी करने की तिथि 2081 बीएस अंकित है, जो गत वर्ष 2024 को दर्शाती है। तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान, नेपाल ने मई 2020 में संसद के अनुमोदन के माध्यम से कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्रों को शामिल करते हुए मानचित्र को अद्यतन किया था। मानचित्र के अद्यतन संस्करण के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए, NRB के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह मानचित्र पुराने 100 रुपये के बैंक नोट में पहले से ही मौजूद है और सरकार के निर्णय के अनुसार इसे संशोधित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 रुपये, 50 रुपये, 500 रुपये और 1,000 रुपये जैसे विभिन्न नोटों में से केवल 100 रुपये के बैंक नोट पर ही नेपाल का मानचित्र अंकित है। भारत का कहना है कि लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा उसके क्षेत्र हैं। नेपाल पांच भारतीय राज्यों – सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ 1850 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा साझा करता है। भाषा शफीक पवनेश भारत की कड़ी प्रतिक्रिया  MEA (विदेश मंत्रालय) ने कहा है कि नेपाल द्वारा 100 रुपये के नोट पर विवादित क्षेत्रों  Kalapani, Lipulekh और Limpiyadhura  को अपना बताने वाला नया नक्शा छापना “एकतरफा” (unilateral) कदम है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने कहा कि ऐसा नक्शा मात्र नोट पर होने से “पृथ्वी पर वास्तविक स्थिति (ground reality)” नहीं बदल जाएगी। भारत ने इसे “कृत्रिम विस्तार (artificial enlargement)” और “असमर्थनीय (untenable)” ज़मीन दावे कहा है।  भारत ने नेपाल को चेतावनी दी है कि सीमा विवाद को लेकर कोई भी कदम  विशेष रूप से नक्शों या मुद्रा में  बिना आपसी समझौते के नहीं होगा।  सीमावर्ती राज्यों विशेषकर Uttarakhand के व्यापारियों का भी कहना है कि वे विवादित नक्शे वाले नोट स्वीकार नहीं करेंगे। भारत की स्थिति स्पष्ट है  कि नेपाल द्वारा नोट में विवादित क्षेत्र दिखाना स्वीकार्य नहीं। यह कदम किसी भी तरह से सीमा विवाद या नियंत्रण‑दावे को बदलने वाला नहीं। भारत अपनी सीमाओं और संप्रभुता के प्रति पूरी तरह सतर्क है और नेपाल से “संवाद और कूटनीति” के जरिए विवाद हल करने की मांग करता है।  

BJP दफ्तर तक सड़क: 40 पेड़ उखाड़ने पर SC नाराज़, हरियाणा सरकार को फटकार

हरियाणा  करनाल में नए भाजपा कार्यालय तक पहुंचने वाली सड़क बनाने के लिए 40 पेड़ उखाड़े जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को क्यों हटाया गया और इनका क्या किया गया। कोर्ट ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि आगे लापरवाही मिली तो राज्य और उसके संबंधित निकायों को कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा। अदालत ने पूरे मामले में सुधारात्मक कार्रवाई योजना भी मांगी है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति जे बी पार्डीवाला और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ 1971 युद्ध के वेटरन कर्नल (सेवानिवृत्त) दविंदर सिंह राजपूत की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में करनाल के सेक्टर-9, अर्बन एस्टेट की आवासीय कॉलोनी में राजनीतिक दल को जमीन आवंटित करने और बाद में उसके कार्यालय तक जाने के लिए हरित पट्टी में 40 पेड़ काटकर सड़क बनाने पर आपत्ति जताई है। पीठ ने हरियाणा सरकार का पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी से साफ शब्दों में पूछा कि 40 पेड़ों को हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी और इस पर उनका स्पष्टीकरण क्या है। पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि राजनीतिक दल का कार्यालय किसी ऐसे स्थान पर क्यों नहीं बनाया गया, जहां पेड़ काटने की जरूरत ही न पड़े। एएसजी विक्रमजीत बनर्जी ने कोर्ट को बताया कि भूखंड के आवंटन और सड़क निर्माण के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) और अन्य निकायों ने हरित मानकों का पालन किया है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि काटे गए पेड़ों की संख्या के अनुपात में पौधे लगाए जाएंगे। लेकिन पीठ इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि पेड़ आसानी से वापस नहीं आ सकते। पीठ ने पूछा कि इन पेड़ों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा। अदालत ने बनर्जी और राज्य सरकार की ओर से पेश अन्य वकीलों को चेतावनी देते हुए कहा कि आगे कोई भी विकास कार्य बिना जानकारी के किया गया तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। जमीन 36 साल पहले खरीदी थी कर्नल (सेवानिवृत्त) दविंदर सिंह राजपूत, जो 79 वर्ष के हैं और 1971 के युद्ध में घायल हुए थे तथा वीर चक्र से सम्मानित हैं। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने 36 साल पहले सेक्टर-9 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (तत्कालीन हुडा) से एक हजार वर्ग गज का भूखंड खरीदा था। यह भूखंड हरित पट्टी की ओर था, जिसके लिए उन्होंने 10 प्रतिशत अधिमान्य स्थान शुल्क भी दिया था।  पर्यावरण को हो रहा नुक्सान- याचिकाकर्ता  याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनकी जमीन के ठीक पास स्थित आवासीय कॉलोनी में 1 हजार 550 वर्ग गज के अनियमित आकार वाले एक खाली भूखंड को संस्थागत श्रेणी में बदलकर राजनीतिक दल को आवंटित कर दिया गया। यह भूखंड 9 मीटर चौड़ी सड़क पर स्थित था और 1989 से खाली था। उनका कहना है कि यह पूरा आवंटन हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट एक्ट, 1977 और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की नीतियों का उल्लंघन है। राजपूत की याचिका के अनुसार उनके घर के सामने 100 मीटर चौड़ी हरित पट्टी थी। इसी में 10 मीटर चौड़ा रास्ता बनाकर पेड़ हटाए गए। उन्होंने कहा कि  इससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को दिया ये आदेश  वहीं सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण, पेड़ों की भरपाई की योजना और संस्थागत भूखंड आवंटन से जुड़े सभी रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

साइक्लोन डिटवाह की दस्तक! तटीय राज्यों में तेज़ हवाओं-बारिश का अलर्ट जारी

कोलकाता  बंगाल की खाड़ी में बने साइक्लोन ‘डिटवाह’ (Cyclone Ditwah) के 30 नवंबर तक तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटों तक पहुँचने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव वाला क्षेत्र तेज होकर साइक्लोनिक तूफान (Weather Update) में बदल गया है। IMD ने बताया कि यह सिस्टम उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगा और तटीय इलाकों को प्रभावित करेगा। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, साइक्लोन सेन्यार निकोबार द्वीप समूह के सबसे उत्तरी द्वीप से 850 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है और शाम तक यह कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल सकता है। इसके अलावा, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व श्रीलंका के पास तथा इक्वेटोरियल हिंद महासागर में एक और वेदर सिस्टम सक्रिय है।   IMD के लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, साइक्लोन डिटवाह पोट्टुविल के पास है, जो चेन्नई से लगभग 700 किलोमीटर दूर है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यह सिस्टम 30 नवंबर की शुरुआत तक उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटों तक पहुंच जाएगा। दिल्ली, यूपी और बिहार पर इस तूफान का कोई असर नहीं बताया गया है, लेकिन इन इलाकों में बारिश होने की संभावना है, जिससे सर्दी बढ़ सकती है। साइक्लोन का नाम ‘डिटवाह’ यमन द्वारा दिया गया है। IMD ने चेन्नई, नागपट्टिनम, तिरुवल्लूर और तंजावुर समेत तमिलनाडु के कई जिलों में 27, 28 और 29 नवंबर के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। साइक्लोन सेन्यार की ताजा जानकारी के अनुसार, यह भारतीय क्षेत्र से दूर मलेशिया की ओर बढ़ रहा है और सुमात्रा के पास है। मौसम विशेषज्ञों ने इसे ‘रेयर’ बताया क्योंकि यह मलक्का स्ट्रेट में पहली बार इतना शक्तिशाली साइक्लोनिक सिस्टम रिकॉर्ड किया गया है।

उत्तर भारत में बढ़ेगी सर्दी, पंजाब के लिए मौसम विज्ञान का येलो अलर्ट

जालंधर  पहाड़ों के उपरी इलाकों में हो रही बर्फबारी के चलते मैदानी इलाकों में सर्दी अपना रंग दिखाने लगी है। इसके चलते पंजाब का न्यूनतम तापमान 4 डिग्री तक पहुंच गया है। वहीं, महानगर जालंधर में न्यूनतम तापमान 7-8 डिग्री तक रिकार्ड किया गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के चंडीगढ़ केन्द्र द्वारा 27 नवम्बर के लिए पंजाब के कई जिलों में यैलो अलर्ट घोषित किया गया है, जिसमें जालंधर भी शामिल है। महानगर में दिन व रात के समय ठंड का असर अधिक देखने को मिल रहा है और सुबह-शाम चल रही ठंडी हवाओं के चलते दो-पहिया वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, सुबह तड़कसार हलकी धुंध भी देखी जा सकती है। जालंधर में बुधवार को न्यूनतम तापमान 7-8 डिग्री जबकि अधिकतम तापमान 22 डिग्री दर्ज किया गया। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 1 तिहाई का अंतर है। इन आकड़ों के मुताबिक दिन व रात के तापमान में 14 डिग्री तक का अंतर देखने को मिल रहा है, जोकि आमतौर पर दिसंबर अंत में देखने को मिलता है। न्यूनतम तापमान में 1-2 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई जिसके चलते ठंड में बढ़ौतरी हुई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार सर्दी ने दिसंबर से पहले ही दस्तक दे दी है, इसी क्रम में अगले माह के पहले सप्ताह में एकाएक बदलाव देखने को मिलेंगे। वहीं, हिमाचल के उपरी इलाकों में बर्फबारी का सीधा प्रभाव पंजाब के मैदानी इलाकों में देखने को मिल रहा है। पंजाब के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री तक पहुंच गया है, इस क्रम में फरीदकोट में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री, अमृतसर में 7.5, लुधियाना में 6.4, बठिंडा में 6, होशियारपुर में 6.4 डिग्री तापमान रिकार्ड किया गया। अधिकतम तापमान में बठिंडा एयरपोर्ट का तापमान 27.7 डिग्री रिकार्ड हुआ जबकि लुधियाना में 23.2, अमृतसर में 22.4 डिग्री तापमान अधिकतम रहा। पहाड़ों में बर्फबारी बढ़ने से ठंड का असर बढ़ता हुआ देखने को मिल सकता है। वहीं, दोपहर के समय ठंड में बढ़ौतरी होगी और धूप कम होती नजर आएगी। मौजूदा समय में शहरों में धुंध का हलका असर देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में दिसंबर के पहले सप्ताह शहरों पर भी धुंध का प्रभाव बढ़ेगा और जनजीवन अस्त-व्यस्त होगा।   बाहरी इलाकों में धुंध का अलर्ट मौसम विभाग द्वारा हरियाणा, दिल्ली व चंडीगढ़ में धुंध को लेकर अलर्ट जारी किया गया है व इसी क्रम में पंजाब के बार्डर एरिया व बाहरी इलाकों में धुंध संबंधी अलर्ट बताया गया है। महानगर के कई इलाकों में सुबह के समय हलकी धुंध देखने को मिल रही है। इसी क्रम में रेलवे स्टेशन पर धुंध का असर देखा जा सकता है। धुंध के चलते वाहन चालकों को सावधानी से वाहन चलाने की हिदायतें दी गई है। खासतौर पर खेतों के साथ लगते इलाकों में सुबह व रात को धुंध का असर देखने को मिलेगा।

मोदी–पुतिन मुलाकात: यूक्रेन जंग, ऊर्जा सहयोग और रक्षा साझेदारी पर होगी अहम बातचीत

नई दिल्ली भारतीय कंपनियों ने रूस से तेल की खरीद सीमित करने के साफ संकेत के बावजूद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा के दौरान कच्चे तेल (क्रूड) व्यापार प्रमुख मुद्दा बनेगा। दिसंबर के पहले हफ्ते में पीएम नरेन्द्र मोदी के साथ सालाना सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति की तरफ से भारत को रूसी क्रूड की खरीद बढ़ाने के लिए हर संभव छूट देने की पेशकश होने के आसार हैं। रूसी तेल व्यापार है भारत यात्रा का मुख्य मुद्दा यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों से जूझ रही रूसी अर्थव्यवस्था के लिए भारत एक जीवन रेखा साबित हुआ है, लेकिन हाल के दिनों में भारत द्वारा रूसी तेल आयात में कमी ने मास्को को चिंतित कर दिया है। कूटनीतिक व उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि रूसी पक्षकारों ने पहले ही भारत को यह संकेत दिया है कि जिस तरह की छूट भारतीय तेल कंपनियों को पहले मिला करती थी, आगे वैसी ही छूट जारी रह सकती है। भारतीय तेल उद्योग के सूत्रों ने बताया कि हाल के दिनों में रूसी तेल आपूर्तिकर्ता कंपनियों के साथ विमर्श में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि वो किसी भी कीमत पर भारत जैसे बड़े ऊर्जा खरीददार देश को छोड़ना नहीं चाहते। रूस की योजना अगले दो दशक तक अपने सारे प्रमुख तेल उत्पादक फील्डों से तेल उत्पादन बढ़ाने की है। भारत को तेल छूट जारी रखने की पेशकश इस बढ़ते हुए उत्पादन की खपत तभी होगा जब भारत जैसे तेजी से विकास करती अर्थव्यवस्था उसे खरीदे। पिछले दो वर्षों (2023-2025) में रूस की कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी नाटकीय रूप से बढ़ी है। 2021 में रूसी क्रूड भारत के कुल आयात का मात्र तीन फीसद था, जो 2024 तक 37 फीसद तक पहुंच गया। 2024-25 वित्तीय वर्ष में रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड आपूर्तिकर्ता बन गया, जिसकी हिस्सेदारी 35 फीसद रही। अक्टूबर 2025 में भारत ने रूस के कुल तेल निर्यात का 38 फीसद हिस्सा लिया है जो चीन (47 फीसद) के बाद दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। इस वृद्धि का श्रेय डिस्काउंटेड रूसी तेल को जाता है, जिसने भारत की रिफाइनरियों, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी को आकर्षित किया। कुल मिलाकर, 2024 में रूस से भारत को 67.15 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जिसमें क्रूड का योगदान प्रमुख था।अब स्थिति बदलने के संकेत हैं। भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड खरीदार रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट रूप से रूसी क्रूड आयात बंद करने की घोषणा की है, जबकि कुल आयात दिसंबर में तीन साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच सकता है। भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड खरीदार है और इसकी हिस्सेदारी खोने से रूसी तेल उद्योग पर भारी दबाव के संकेत मिलने लगे हैं। यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी-यूरोपीय प्रतिबंधों ने रूसी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। 2025 में रूस का जीडीपी विकास दर एक फीसद से नीचे रहने का अनुमान है। महंगााई की दर आठ फीसद से ज्यादा है। यही वजह है कि रूस हर हाल में भारत से क्रूड कारोबार को जारी रखना चाहता है। रूस की तेल उद्योग की तरफ से दिया जाने वाले टैक्स वहां के कुल राजस्व का 40 फीसद होता है। भारत जैसे विशाल खरीददार का विकल्प अभी रूस को मिलना मुश्किल है। एक तो यह प्रतिबंध की वजह से मुश्किल है और दूसरा, चीन के अलावा और किसी भी देश में इतनी ज्यादा तेल खरीदने की क्षमता नहीं है। पुतिन का चार साल बाद भारत आगमन हो रहा है। इसके पहले वह यूक्रेन-रूस युद्ध की शुरुआत (फरवरी, 2022) से ठीक पहले दिसंबर, 2021 में भारत आए थे। रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा संभव माना जाता है कि उस दौरे ने फरवरी, 2022 के बाद भारत की तरफ से रूस से ज्यादा कच्चे तेल की खरीद की जमीन तैयार की थी। अब जबकि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्ति की ठोस पहल अमेरिका और यूरोपीय देशों की तरफ से की जा रही हैं तब पुतिन फिर से नई दिल्ली में होंगे। अधिकारियों का कहना है कि आगामी भारत-रूस सालाना सम्मेलन में रक्षा व ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग सबसे मुद्दा होने जा रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय ने कहा भी है कि इस यात्रा का फोकस आर्थिक साझेदारी पर होगा।  

प्रकृति का कहर: श्रीलंका में मूसलाधार बारिश ने ली 31 जानें, अगले 12 घंटे बेहद खतरनाक

कोलम्बो  श्रीलंका में बीते 11 दिन में मूसलाधार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण 31 लोगों की मौत हो गई जबकि करीब 4,000 लोग प्रभावित हुए हैं। श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र ने बृहस्पतिवार को कहा कि अकेले मध्य पर्वतीय जिलों में 18 लोगों की मौत होने की जानकारी मिली है। डेली मिरर ऑनलाइन की खबर के अनुसार एक भयावह घटना में, कुंबुक्कना में बढ़ते जलस्तर के बीच एक यात्री बस फंस गई, जिसके बाद आपात दलों ने 23 यात्रियों को सफलतापूर्वक बचा लिया।   अडाडेराना समाचार पोर्टल ने बताया कि करीब 10 लोग घायल हुए हैं जबकि 14 लोग लापता बताए जा रहे हैं। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने 25 में से 17 प्रशासनिक जिलों में बिगड़ती स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई है। मौसम ब्यूरो के अनुसार देश के दक्षिण पूर्व में एक निम्न दाब क्षेत्र बना, जो बाद में एक अवदाब क्षेत्र में बदल गया। ब्यूरो के अनुसार फिलहाल वह बट्टीकलोआ से 210 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित है। ब्यूरो ने कहा, “अगले 12 घंटे में इसके उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ने और जोर पकड़कर गहन दबाव क्षेत्र में बदलने का प्रबल अनुमान है।” ब्यूरो ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश होने का पूर्वानुमान है।  

लाइसेंस बनवाने पर बड़ा झटका! पंजाब में बढ़ी दिक्कतें, नई शर्तों से परेशानी

लुधियाना पंजाब सरकार की नई होम डिलीवरी लाइसैंस सेवा शुरुआत के कुछ ही दिनों में सवालों के घेरे में आ गई है। लोगों का कहना है कि सरकार ने सुविधा तो शुरू कर दी लेकिन व्यवस्थाएं कमजोर होने के कारण लाभ नहीं मिल पा रहा। लोगों ने बताया कि वे 1073 हैल्पलाइन नंबर पर बुकिंग करा लेते हैं और उन्हें मैसेज भी मिल जाता है कि निर्धारित तारीख पर कर्मचारी दस्तावेज लेने या लाइसैंस संबंधी प्रक्रिया के लिए घर आएगा लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी कोई नहीं पहुंचता। कई लोग 2-2- बार बुकिंग कराने के बावजूद हफ्तों से इंतजार कर रहे हैं।  5 नवम्बर को की थी बुकिंग, आज तक कोई नहीं आया  आरती नामक महिला ने बताया कि उन्होंने 5 नवम्बर को लर्निंग लाइसैंस के लिए होम सर्विस बुक कराई थी। मैसेज भी आ गया था कि कर्मचारी जल्द पहुंचेगा लेकिन अब तक कोई नहीं आया। उन्होंने कहा कि यह सुविधा शुरू तो कर दी गई है लेकिन इसका लाभ तभी मिलेगा जब सिस्टम ठीक से काम करे। इसी तरह मनप्रीत सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे के लर्निंग लाइसैंस के लिए अप्वाइंटमैंट ली थी। उन्हें लगातार मैसेज आ रहे हैं कि उनकी बुकिंग कन्फर्म है और कर्मचारी जल्द पहुंचेगा लेकिन असल में कोई नहीं आता। इससे लोग और ज्यादा परेशान हो रहे हैं।  लोग बोले- सरकार समय सीमा तय करे  लोगों का कहना है कि सेवा के नाम पर उन्हें केवल इंतजार कराया जा रहा है। टोल-फ्री नंबर पर भी समाधान नहीं मिलता। कॉल करने पर ऑप्रेटर केवल यही बताते हैं कि जल्द कर्मचारी आ जाएगा या मामला आगे भेज दिया गया है। नागरिकों ने मांग की है कि सरकार यह स्पष्ट करे कि बुकिंग के बाद कर्मचारी कितने समय में पहुंचेगा। एक तय समय सीमा होने से लोगों को उम्मीद रहेगी और परेशानी कम होगी।  प्रशासन का दावा : बुकिंग ज्यादा, समय से सर्विस देना मुश्किल  वहीं, अधिकारियों का कहना है कि अभी सेवा प्रारंभ हुई है और बुकिंग उम्मीद से कहीं अधिक आ रही है। यही वजह है कि टीम हर बुकिंग तक समय पर नहीं पहुंच पा रही। विभाग का कहना है कि स्टाफ बढ़ाने और व्यवस्थाओं को सुचारू करने की प्रक्रिया जारी है, ताकि जल्द सभी शिकायतें दूर की जा सकें।

जशपुर जिले में शिल्पकारों के लिए स्थापित होगा ग्लेज़िंग यूनिट: मुख्यमंत्री साय

कुम्हारों को 100 इलेक्ट्रॉनिक चाक का वितरण कुम्हार समाज के मंगल भवन के विस्तार के लिए 25 लाख रुपए की घोषणा  विष्णु महायज्ञ चक्र पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले के ग्राम नारायणपुर में कुम्हार समाज द्वारा आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ एवं चक्र पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए और पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने इस अवसर पर ग्राम गोरिया में माटी कला बोर्ड के माध्यम से कुम्हारों के लिए ग्लेज़िंग यूनिट स्थापित करने तथा कुम्हार समाज के मंगल भवन के विस्तार के लिए 25 लाख रुपए की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सरगुजा संभाग के 100 कुम्हारों को इलेक्ट्रॉनिक चाक का भी वितरण किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कुम्हार समाज द्वारा आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ का यह पवित्र आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। चक्र पूजा केवल मिट्टी के चाक की आराधना नहीं, बल्कि सृष्टि के निर्माण, परिश्रम, रचनात्मकता और मानव जीवन की निरंतरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कुम्हार समाज छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अभिन्न अंग है। आप सभी मिट्टी की कला में सिद्धहस्त हैं। आपकी रचनात्मक मेहनत हमारे तीज-त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों को जीवंत और पूर्णता प्रदान करती है। हमारी सरकार आपकी इस अनमोल विरासत के संरक्षण, संवर्धन और सशक्तिकरण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक चाक (इलेक्ट्रिक पॉटर व्हील) का वितरण किया जा रहा है, जिससे मेहनत कम होगी, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और उत्पादों को बेहतर फिनिशिंग मिलेगी। इससे बाजार में ऊँचा मूल्य मिलेगा और वर्षभर स्थिर आमदनी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि कारीगरों के प्रशिक्षण के लिए नई डिजाइन, आधुनिक तकनीक और उद्यमिता से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। हमारी सरकार कुम्हारों को वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रही है, जिससे आप नए उपकरण खरीदकर अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें। मार्केटिंग के लिए मेलों, प्रदर्शनियों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स का उपयोग बढ़ाया जा रहा है, जिससे आपकी कला पूरे देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों तक पहुँच सके। उन्होंने छत्तीसगढ़ की माटी कला को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की अपील की। कार्यक्रम में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, विधायक गोमती साय और  रायमुनी भगत, पद्मश्री जागेश्वर यादव, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शंभूराम चक्रवर्ती, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका अध्यक्ष जशपुर अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका जशपुर उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जूदेव,  कृष्ण कुमार राय, विजय आदित्य प्रताप सिंह जूदेव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक बंधु और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

शिक्षा को बढ़ावा: केंद्र सरकार देगी SC छात्रों को 2 लाख तक की वार्षिक सहायता

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों के लिए बड़ी राहत भरी घोषणा की है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2024-25 के लिए SC छात्रों के लिए टॉप क्लास स्कॉलरशिप योजना के नए और अपडेटेड दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इन नए नियमों के अनुसार छात्रों को अब पहले से अधिक वित्तीय सहायता मिलेगी और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट रूप से तय की गई हैं। योजना का उद्देश्य और मुख्य लाभ इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई भी योग्य छात्र उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। इसके तहत देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे SC छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस सरकार द्वारा वहन की जाएगी। इसके अलावा, छात्रों को शैक्षणिक भत्ता भी दिया जाएगा ताकि वे अपनी पढ़ाई से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर सकें। संशोधित वित्तीय सहायता व्यवस्था वर्ष 2024-25 से सरकार छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस और गैर-वापसी योग्य शुल्क सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजेगी। निजी संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए यह सहायता प्रति वर्ष अधिकतम 2 लाख रुपये तक सीमित होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि छात्रों को समय पर और पारदर्शी तरीके से आर्थिक सहायता मिल सके और किसी भी तरह की देरी या धोखाधड़ी से बचा जा सके। छात्रों के भविष्य के लिए बड़ी पहल सरकार का मानना है कि इस योजना से SC वर्ग के छात्रों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई करने का बेहतर अवसर मिलेगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे। यह कदम सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के साथ-साथ उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी को भी मजबूत करेगा। कुल मिलाकर, यह योजना लाखों SC छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।