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MP हाईकोर्ट ने कटनी में हत्या आरोपी के घर पर 15 दिन के लिए बुलडोजर रोक, न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने दिया आदेश

जबलपुर  हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने कटनी में भाजपा नेता नीलू रजक की गोली मारकर हत्या के आरोपित अकरम खान का मकान गिराने पर 15 दिन की रोक लगा दी है। कोर्ट ने 15 दिन के भीतर अगर चाहे युगलपीठ में अपील के लिए भी स्वतंत्र किया है। मामले की सुनवाई में कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के पास मकान के वैध दस्तावेज नहीं है। हत्या के आरोपित अकरम खान के भाई इमरान खान ने मकान तोड़ने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता मोहम्मद इमरान खान की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उसके भाई अकरम खान और नेल्सन जोसेफ को नीलू रजक की 28 अक्टूबर को गोली मारकर हत्या के आरोप में कटनी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कैमोर नगर परिषद ने मकान को गिराने के लिए नोटिस जारी किया है जिसे की कोर्ट में चुनौती दी गई। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और पैनल अधिवक्ता आकाश मालपाणी ने पक्ष रखते हुए बताया कि यह याचिकाकर्ता के पास मालिकाना हक और निर्माण की अनुमति से संबंधित दस्तावेज नहीं है। मकान मोहम्मद इमरान खान की मां के नाम पर जरूर है, लेकिन उनके पास सिर्फ एग्रीमेंट के दस्तावेज है। ऐसे में, उनके विरुद्ध की जा रही कार्रवाई सही है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास कोई दस्तावेज न होने पर उसे राहत नहीं दी जा सकती। हालांकि बुलडोजर एक्शन से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के मद्देनजर याचिकाकर्ता के विरुद्ध कार्यवाही पर 15 दिन के लिए रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने यह भी कहा कि 15 दिन में यदि कोई कानूनी बाधा न हो तो प्रशासन नोटिस के मुताबिक कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होगा। याचिकाकर्ता की और से कोर्ट में पैरवी कर रहे उत्कर्ष अग्रवाल ने एकलपीठ के आदेश को युगलपीठ में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है।  

लूट का सरगना खालिद गिरफ्तार: मंडला में 2 करोड़ की चोरी का मास्टरमाइंड बिहार से हिरासत में

मंडला मध्यप्रदेश के मंडला में आयुषी ज्वेलर्स से 2 करोड़ से अधिक की लूट मामले में बिहार से मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया गया है. गुरुवार देर रात मध्यप्रदेश पुलिस और मुजफ्फरपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने सदर, बरूराज और पारू थाना क्षेत्र में छापेमारी कर तीन शातिर अपराधियों को पकड़ा. गिरफ्तार आरोपियों में बरूराज के रामपुरवा अखाड़ा का मास्टरमाइंड खालिद, सदर अतरदह का शशि कुमार और पारू ग्यासपुर का कृष्णा कुमार सिंह शामिल हैं. पुलिस ने घटना में इस्तेमाल खालिद की कार और उनके मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं. तीनों आरोपियों को 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर लेने के लिए मंडला पुलिस ने कोर्ट में आवेदन दिया है. गिरफ्तार आरोपियों में बरूराज थाना क्षेत्र रामपुरवा अखाड़ा निवासी मास्टरमाइंड मो. खालिद, सदर थाना क्षेत्र के अतरदह वार्ड 31 का शशि कुमार और पारू थाना के ग्यासपुर का कृष्णा कुमार सिंह है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल खालिद की कार भी जब्त की। शुक्रवार काे कोतवाली मंडला थाने के एसआई शफीक खान ने तीनों आरोपियों को 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया। पुलिस ने तीनों के मोबाइल भी जब्त किए हैं। लूटे गए सोना-चांदी के जेवर की बरामदगी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग घटना के बाद पुलिस ने अपराधियों की दो कारों को चिह्नित किया। मोबाइल टावर डंप करने के साथ अपराधियों के भागने की दिशा में कई टोल प्लाजा से सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसमें दोनों कार चिह्नित हुई। कारों मालिकों का पता लगाया गया, जिससे पुलिस सीधे मास्टरमाइंड खालिद तक पहुंची। उसकी गिरफ्तारी के बाद शशि और कृष्णा के बारे में पुलिस काे जानकारी मिली। 55 वर्षीय खालिद ने ही पूरी साजिश रची थी। उसने न केवल बिहार बल्कि मध्यप्रदेश के कई अपराधियों को शामिल किया था। पूछताछ में उसने कई साथियों के नाम और पते बताए, जिन पर गठित पांच विशेष टीम लगातार दबिश बनाए हुए है। SDPO पश्चिमी 1 सुचित्रा कुमारी ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस ने छापेमारी में तीन को गिरफ्तार किया है। जेवरात बरामद नहीं किए गए हैं। मास्टरमाइंड खालिद का आपराधिक इतिहास पता किया जा रहा है। पारू के ग्यासपुर के कृष्णा ने चलाई थी गोली गिरफ्तार तीनों अपराधियों से मध्यप्रदेश पुलिस ने पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया है। कृष्णा कुमार सिंह ने बताया कि वह ग्यासपुर (पारू) का रहने वाला और मजदूरी करता है। उसकी मुलाकात खालिद से हुई, जिसने उसे बताया कि मंडला में एक ज्वेलर्स दुकान में दो से ढाई किलो सोना रहता है, जिसे लूटना है। बड़ा काम है लाइफ सेट हो जाएगी। 17 नवंबर को खालिद अपनी कार से शशि और कृष्णा के साथ कटनी होते हुए जबलपुर और इंदौर की ओर गया और फिर मंडला पहुंचा। वहां पर स्थानीय शातिरों पंकज ठाकुर, लवकुश, शनि, अजहर आदि से संपर्क हुआ। कृष्णा ने स्वीकार किया कि वारदात के दौरान जब आयुष ने विरोध किया, तो गोली उसने चलाई थी। 20 नवंबर को हुई थी वारदात, विरोध पर व्यवसायी को मारी थी गोली। घटना 20 नवंबर की शाम करीब 7.15 से 7.30 बजे के बीच की है। स्टाफ के सिर पर पिस्टल रखकर कहा- बैग छोड़ दो कटरा मंडला स्थित हनुमान मंदिर के सामने आयुषी ज्वेलर्स में अक्षांश सोनी और उनके भाई आयुष सोनी व्यवसाय करते हैं। दुकान में बॉबी यादव कर्मचारी के रूप में काम करता है। रोज की तरह दुकान बंद करने के लिए सोना-चांदी के आभूषण दो बैग में रखकर बॉबी दुकान के सामने खड़ी कार में रखने जा रहा था। उसी समय मंडला की ओर से एक कार तेजी से आकर रुकी। कार से तीन हथियारबंद अपराधी उतरे, जबकि चालक कार में ही बैठा रहा। अपराधियों में से एक ने बॉबी के सिर पर पिस्टल सटाकर बैग वहां रखने के लिए कहा। डर से बॉबी ने बैग छोड़ दिया। इसके बाद एक अपराधी दुकान में घुसा और आयुष से दुकान में रखा पूरा सोना-चांदी निकालने के लिए कहा। वह सोने-चांदी के आभूषण काे लूटने लगा, जिसका आयुष ने विरोध किया। इसपर अपराधी ने पिस्टल से उसके बाएं पैर के घुटने के नीचे गोली मार दी। आयुष खून से लथपथ होकर गिर गया। इसके बाद अपराधी बैग उठाकर कार फरार हो गए। घायल आयुष को बॉबी और अक्षांश का जिला अस्पताल में इलाज हुआ।

नई विधानसभा का पहला सत्र शुरू होने को तैयार, बिहार में अगले दिन होगा अध्यक्ष पद का चुनाव

पटना  बिहार विधानसभा का पहला सत्र 1 दिसंबर को शुरू होगा और इस दिन सभी नए सदस्यों का शपथ ग्रहण कराया जायेगा. इसके अलगे दिन यानी 2 दिसंबर को विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा. 3 दिसंबर को सेंट्रल हॉल में विधानसभा और विधान परिषद की संयुक्त बैठक में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का अभिभाषण होगा. इसके अगले दिन राज्यपाल की अभिभाषण पर चर्चा होगी. फिर 5 दिसंबर को दूसरी अनुपूरक बजट का सदन में बहस होगी और विनियोग विधेयक पेश किया जाएगा. क्या होता है विनियोग विधेयक राज्य विनियोग विधेयक को पारित करना एक जरुरी प्रोसेस है. पहले इस विधेयक को विधानसभा और विधान परिषद में मंजूरी मिलती है. इसके बाद इसे राज्यपाल के पास भेजा जाता है. राज्यपाल की स्वीकृति मिलने पर यह कानून बन जाता है, जिसके बाद राज्य की संचित निधि से खर्च की अनुमति मिलती है. इस बार सदन में क्या नया होगा बिहार विधानसभा में इस बार सदन की कार्यवाही बिल्कुल नई तकनीक के साथ चलने वाली है. सभी विधायकों की सीटों पर टैबलेट लगा दिए गए हैं, जिनके जरिए वे सवाल पूछेंगे. इससे सदन के अंदर कागज का इस्तेमाल लगभग खत्म हो जाएगा. नेवा योजना के तहत विधानसभा को डिजिटल बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है. 18वीं बिहार विधानसभा के नए चुने गए विधायकों को यह व्यवस्था एक तरह से स्वागत-उपहार के रूप में मिलेगी. शुक्रवार को सभी सीटों पर टैब लगाने का काम लगभग पूरा हो गया. विधान परिषद में यह व्यवस्था पहले ही लागू हो चुकी है.

राजद से दूरी बनाएगी कांग्रेस? गठबंधन पर बिहार नेताओं की उठी आपत्तियाँ

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार झेलने के बाद महागठबंधन में टूट की अटकलें चलने लगी हैं। हाल ही में समीक्षा के दौरान कांग्रेस के अधिकतर उम्मीदवारों ने लालू एवं तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से गठबंधन को चुनावी हार के लिए जिम्मेदार ठहराया। इनमें से कई ने तो कांग्रेस आलाकमान को राजद से गठबंधन तोड़ने की वकालत भी कर दी। इसके बाद से सियासी पारा गर्माया हुआ है। हालांकि, पार्टी के किसी भी बड़े नेता की तरफ से गठबंधन के भविष्य को लेकर कोई भी बयान नहीं आया है। पिछले दिनों संपन्न हुए बिहार चुनाव के नतीजों में कांग्रेस, राजद और अन्य विपक्षी दलों के गठबंधन को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस 71 सीटें लड़कर महज 6 पर जीत दर्ज कर पाई। राजद ने भी 143 सीटें लड़ी और 25 पर ही जीत नसीब हुई। अन्य घटक दलों की स्थिति भी खराब रही। महागठबंधन कुल 243 में से महज 35 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज कर पाया। बीते गुरुवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में कांग्रेस ने बिहार चुनाव की हार की समीक्षा बैठक बुलाई। इसमें सभी 61 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के अलावा प्रदेश स्तर के नेता मौजूद रहे। बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सभी उम्मीदवारों से 10-10 के समूह में बात की। सूत्रों के अनुसार, अधिकतर उम्मीदवारों ने आलाकमान को बताया कि तेजस्वी यादव की पार्टी राजद से गठबंधन की वजह से कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा है। अगर कांग्रेस इस चुनाव में अकेले मैदान में उतरती तो परिणाम बेहतर होते। प्रत्याशियों ने कहा कि कांग्रेस को राजद से गठबंधन खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने महागठबंधन में सीट बंटवारे में देरी होने और लगभग एक दर्जन सीटों पर फ्रेंडली फाइट को भी हार की वजह माना। हालांकि, कांग्रेस के वरीय नेता इस पर कुछ बोल नहीं रहे हैं। दिल्ली में समीक्षा बैठक के बाद बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह से जब राजद से गठबंधन तोड़ने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने आलाकमान इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसका फैसला आलाकमान करेगा। फिलहाल महागठबंधन में शामिल घटक दल अपने-अपने स्तर पर हार की समीक्षा कर रहे हैं। राजद में प्रमंडलवार प्रत्याशियों से फीडबैक लिया जा रहा है। चुनाव में विरोधियों के हित में काम करने वाले भितरघातियों की पहचान भी की जा रही है। उन पर ऐक्शन हो सकता है। इस बीच, बिहार विधानसभा का सत्र 1 दिसंबर से शुरू होने वाला है। इसमें नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी। राज्य में प्रचंड जीत के बाद गदगद नीतीश सरकार अपना अनुपूरक बजट भी सदन में पेश करेगी। विधानसभा सत्र से पहले शनिवार को पटना में तेजस्वी यादव के आवास पर महागठबंधन की बैठक बुलाई गई है। इसमें राजद, कांग्रेस और वाम दलों के विधायक शामिल होंगे। इसमें विधानसभा सत्र की रणनीति को लेकर चर्चा की जाएगी।  

बगलामुखी मंदिर जमीन विवाद में बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने फर्जी डिक्री को शून्य कर दिया, सरकार को मिली संपत्ति पर नियंत्रण

 नलखेड़ा आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर परिसर से जुड़ी करीब 200 करोड़ रुपए की भूमि पर अब राज्य सरकार का नियंत्रण फिर बहाल हो गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने राज्य शासन के पक्ष में फैसला देते हुए सनत कुमार और अन्य याचिकाकर्ताओं की पहली अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही वर्ष 1997 में बनाई गई संदिग्ध और फर्जी डिक्री को निचली अदालत द्वारा अवैध घोषित किए जाने का आदेश भी बरकरार रखा गया। दो दशक पुराने विवाद का अंत यह मामला बीस साल से ज्यादा समय से चढ़त-उतार में था। साल 1997 में विपक्षी पक्ष ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर मंदिर की जमीन पर अपना दावा स्थापित करने की कोशिश की थी। आगर के अपर जिला न्यायाधीश ने 14 मार्च 2007 को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उस डिक्री को पूरी तरह अवैध करार दिया था। हाईकोर्ट ने भी अपनी सुनवाई में साफ टिप्पणी की कि यह डिक्री धोखे, दस्तावेजों के दमन और एक संदेहास्पद वसीयत पर आधारित थी, जिसे कानूनी तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि संबंधित वाद में मंदिर या मूर्ति को पक्षकार ही नहीं बनाया गया था, जबकि विवाद सीधा मंदिर की संपत्ति से जुड़ा था। महाधिवक्ता ने मजबूती से रखा शासन का पक्ष मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने अंतिम बहस की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष राजस्व अभिलेख, ओकाफ समिति के मूल रिकार्ड, मंदिर की ऐतिहासिक संरचना, पूर्व के न्यायालयीन निर्णय तथा फर्जी दस्तावेज़ों के पूरे क्रम को स्पष्टता से रखा। अदालत ने माना कि धोखाधड़ी के माध्यम से उक्त भूमि पर गलत तरीके से दावा स्थापित करने की कोशिश की गई थी। हाई कोर्ट द्वारा सरकार के पक्ष में अपील निरस्त करने से मंदिर की भूमि सुरक्षित हो गई। देर रात तक चली जेसीबी, हटाया अतिक्रमण फैसला आने के बाद शुक्रवार रात को पुलिस और प्रशासन की टीम ने विभिन्न विभागों के दल के साथ मंदिर की भूमि पर से अतिक्रमण हटाया मौके पर एसडीएम सर्वेश यादव नलखेड़ा एसडीओपी देव नारायण यादव सीएमओ मनोज नामदेव नलखेड़ा सुसनेर पुलिस बल अन्य विभागों की टीम के साथ पहुंचे। जेसीबी की मदद से अतिक्रमण हटाया गया। रात में की गई कार्रवाई से अतिक्रमणकर्ताओ में हड़कंप की स्थिति रही। मामले में मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कोई भी जानकारी देने से इंकार किया।    डिक्री धोखे से और दस्तावेजों को छुपाकर प्राप्त की गई थी कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि वर्ष 1997 में प्राप्त डिक्री धोखे से और दस्तावेजों को छुपाकर प्राप्त की गई थी। यह विधिक रूप से टिकाऊ नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि मंदिर को उस वाद में पक्षकार तक नहीं बनाया गया था, जबकि विवाद स्वयं मंदिर की संपत्ति से संबंधित था। कोर्ट ने यह भी देखा कि प्रस्तुत वसीयतनामा संदेहास्पद था और मूल राजस्व अभिलेख मंदिर/मठ की पारंपरिक गुरू-चेले प्रणाली की पुष्टि करते थे। अपील निरस्त करने से मंदिर की भूमि सुरक्षित हुई मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने अंतिम बहस की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष राजस्व अभिलेख, ओकाफ समिति के मूल रिकार्ड, मंदिर की ऐतिहासिक संरचना, पूर्व के न्यायालयीन निर्णय तथा फर्जी दस्तावेज़ों के पूरे क्रम को स्पष्टता से रखा। अदालत ने माना कि धोखाधड़ी के माध्यम से उक्त भूमि पर गलत तरीके से दावा स्थापित करने की कोशिश की गई थी। हाई कोर्ट द्वारा सरकार के पक्ष में अपील निरस्त करने से मंदिर की भूमि सुरक्षित हो गई है। गौरतलब है कि उक्त वादित भूमि राजस्व अभिलेखों के अनुसार ऐतिहासिक रूप से मंदिर/धर्मशाला की रही है। उक्त संपत्ति विधिवत मूर्ति श्रीराम मंदिर व्यवस्थापक कलेक्टर के नाम दर्ज है। न्यायालय ने कहा कि किसी भी कपटपूर्ण दावे अथवा दस्तावेज़ से मंदिर की संपत्ति पर अधिकार स्थापित नहीं किया जा सकता है। दो दशकों से ज्यादा समय से चल रहा था विवाद यह विवाद दो दशकों से अधिक समय से चल रहा था। विपक्षी ने 1997 में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर इस भूमि पर दावा स्थापित करने का प्रयास किया था। आगर के अपर जिला न्यायाधीश ने 14 मार्च 2007 को साक्ष्यों के आधार पर उस डिक्री को अवैध घोषित कर दिया था। उच्च न्यायालय ने भी अपनी टिप्पणी में कहा कि वह डिक्री धोखे, दस्तावेजों के दमन और एक संदेहास्पद वसीयतनामे के आधार पर हासिल की गई थी, जो कानूनी रूप से मान्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी जिक्र किया कि मंदिर/मूर्ति को उस वाद में पक्षकार नहीं बनाया गया था, जबकि विवाद सीधे मंदिर की संपत्ति से संबंधित था। राज्य के अभिलेखों ने मजबूत किया केस राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने अंतिम सुनवाई में विस्तृत राजस्व रिकॉर्ड, औकाफ समिति के मूल दस्तावेज, मंदिर की गुरु-चेला परंपरा और पहले के फैसलों सहित संदिग्ध दस्तावेजों की पूरी श्रृंखला कोर्ट में पेश की। कोर्ट ने माना कि ये रिकॉर्ड न केवल मजबूत हैं, बल्कि पूरे छल के प्रकरण को उजागर करते हैं। विवादित भूमि कई वर्षों से सरकारी अभिलेखों में मंदिर और धर्मशाला की संपत्ति के रूप में दर्ज थी, और वर्ष 2006-07 से यह जमीन श्रीराम मंदिर व्यवस्थापक कलेक्टर के नाम विधिवत दर्ज है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी कपटपूर्ण दस्तावेज मंदिर की संपत्ति पर अधिकार का आधार नहीं बन सकता। साल 1997 में विपक्षी पक्ष ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर मंदिर की जमीन पर अपना दावा स्थापित करने की कोशिश की थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन की कार्रवाई फैसला आने के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने शुक्रवार (28 नवंबर) देर रात मंदिर परिसर की जमीन पर दोबारा अधिकार लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी। मौके पर अधिकारियों की टीम पहुंची और भूमि पर शासन का कब्जा फिर से बहाल करने के लिए कार्रवाई आगे बढ़ाई। कई दुकानदार रात में ही अपना सामान हटाते दिखाई दिए, क्योंकि जमीन पर लंबे समय से निजी उपयोग को लेकर तनाव बना हुआ था। रिकॉर्ड में मंदिर/धर्मशाला की संपत्ति के रूप में दर्ज थी राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने अंतिम सुनवाई में हाजिर होकर विस्तृत राजस्व अभिलेख, औकाफ समिति के मूल रिकॉर्ड, मंदिर की पारंपरिक गुरु-चेला प्रणाली और पहले के फैसलों सहित … Read more

WPL 2026 Schedule Out: पहला मुकाबला मुंबई बनाम बैंगलोर, देखें पूरा कार्यक्रम और फाइनल डेट

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने वुमेंस प्रीमियर लीग यानी डब्ल्यूपीएल के चौथे सीजन के शेड्यूल का ऐलान कर दिया है। डब्ल्यूपीएल 2026 का आगाज डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और 2 बार की विजेता मुंबई इंडियंस के बीच 9 जनवरी से खेले जाने वाले मैच से होगा। इस टूर्नामेंट को दो भागों में बांटा गया है। पहले भाग की मेजबानी नवी मुंबई करेगा वहीं दूसरा भाग वडोदरा में खेला जाएगा। WPL 2026 का आगाज 9 जनवरी से होगा और फाइनल 5 फरवरी को खेला जाएगा। नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में 9-17 जनवरी तक सीजन के पहले 11 गेम खेले जाएंगे। इसके बाद लीग बाकी 11 मैचों के लिए वडोदरा जाएगी, जिसकी शुरुआत गुजरात जायंट्स और RCB के बीच मैच से होगी। लीग फेज 1 फरवरी तक चलेगा। सीजन में सिर्फ़ दो डबल-हेडर दिन (10 और 17 जनवरी) हैं और दोनों में दोपहर के गेम में UP वॉरियर्स शामिल होंगे। दूसरे और तीसरे नंबर पर रहने वाली टीमों के बीच एलिमिनेटर 3 फरवरी को खेला जाएगा, और टेबल में टॉप पर रहने वाली टीम सीधे 5 फरवरी को वडोदरा में होने वाले फाइनल में पहुंच जाएगी। WPL 2026 का पूरा शेड्यूल नई मुंबई लेग 9 जनवरी: मुंबई इंडियंस बनाम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 10 जनवरी: UP वॉरियर्स बनाम गुजरात जायंट्स 10 जनवरी: मुंबई इंडियंस बनाम दिल्ली कैपिटल्स 11 जनवरी: दिल्ली कैपिटल्स बनाम गुजरात जायंट्स 12 जनवरी: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु बनाम UP वॉरियर्स 13 जनवरी: मुंबई इंडियंस बनाम गुजरात जायंट्स 14 जनवरी: UP वॉरियर्स बनाम दिल्ली कैपिटल्स 15 जनवरी: मुंबई इंडियंस बनाम UP वॉरियर्स 16 जनवरी: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु बनाम गुजरात जायंट्स 17 जनवरी: UP वॉरियर्स बनाम मुंबई इंडियंस 17 जनवरी: दिल्ली कैपिटल्स बनाम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु वडोदरा लेग 19 जनवरी: गुजरात जायंट्स बनाम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 20 जनवरी: दिल्ली कैपिटल्स बनाम मुंबई इंडियंस 22 जनवरी: गुजरात जायंट्स बनाम UP वॉरियर्स 24 जनवरी: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु बनाम दिल्ली कैपिटल्स 26 जनवरी: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु बनाम मुंबई इंडियंस 27 जनवरी: गुजरात जायंट्स बनाम दिल्ली कैपिटल्स 29 जनवरी: यूपी वॉरियर्स बनाम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 30 जनवरी: गुजरात जायंट्स बनाम मुंबई इंडियंस 1 फरवरी: दिल्ली कैपिटल्स बनाम यूपी वॉरियर्स  

Being’ फिल्म को मिला बेस्ट विज़ुअल्स का सम्मान, इंडीवुड ने सिनेमा एआई हैकाथॉन में दिखाई कला

H इंडीवुड की फिल्म ‘Being’ को 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के सिनेमा एआई हैकाथॉन में बेस्ट विज़ुअल्स का अवॉर्ड मुंबई  इंडीवुड की एआई-जनरेटेड फिल्म बींग ‘Being’ ने 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) के सिनेमा एआई हैकाथॉन 2025 में बेस्ट विज़ुअल्स फिल्म का अवॉर्ड अपने नाम किया। दुनिया भर से आए 500 से अधिक प्रविष्टियों में से चुनकर दिया गया यह सम्मान इंडीवुड के रचनात्मक सफर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और एआई-चालित सिनेमा में उसकी औपचारिक एंट्री को मजबूत करता है। भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह द्वारा नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएफडीसी) के साथ मिलकर आयोजित यह सिनेमा एआई हैकाथॉन देश का पहला ऐसा प्रमुख मंच रहा, जिसने फिल्म निर्माण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रचनात्मक संभावनाओं को प्रदर्शित किया। इस प्रतियोगिता में 18 देशों के 500+ क्रिएटर्स ने हिस्सा लिया। 48 घंटे की इस चुनौती में शीर्ष 10 टीमों को कार्यक्रम स्थल पर ही बताए गए एक रहस्यमयी विषय पर 2 मिनट की फिल्म बनानी थी। भारत के पहले एआई फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा रहे इस आयोजन ने IFFI 2025 में तकनीक और रचनात्मकता के अनोखे संगम को प्रदर्शित किया। उत्तरी केरल की धुंध से ढकी वादियों में आधारित ‘Being’ एक ऐसी बाल्यकालिक स्मृति की गूंज को दर्शाती है, जिसने हमेशा के लिए एक जीवन को बदल दिया। बचपन में फिल्म का पात्र ‘ओरेकल’ से डरता है—एक ऐसा रहस्यमयी रूप जो दादी की चेतावनियों, लोककथाओं और मंदिर के नगाड़ों की गूंज से बना था। उसके सपनों में यह ओरेकल लाल रंग में लिपटा नजर आता था, जो बरगद की जड़ों के बीच फुसफुसाहट की तरह सरकता था। फिल्म की भावनात्मक प्रेरणा बचपन में कुम्माटी आकृतियों से जुड़े भय और बड़े होकर उसे नए नजरिये से समझने की

विनीत तिवारी की फ़लस्तीन यात्रा, कहा— इंसानियत के नाम पर हमेशा फ़लस्तीन के साथ खड़ा रहना चाहिए

फ़लस्तीन यात्रा से लौटे विनीत तिवारी * फ़लस्तीन के साथ खड़ा होना इंसानियत का तकाज़ा _” अपने देश में बाँध विस्थापितों के नर्मदा बचाओ आंदोलन में या आदिवासी संगठनों के आंदोलनों में राज्य की हिंसा की वारदातों में, या सांप्रदायिक हिंसा पीड़ित इलाक़ों में स्वतंत्र जाँच दल के सदस्य की हैसियत से जाने पर अनेक बार पुलिस तथा सांप्रदायिक-फ़ासीवादी विचार वाले लोगों से आमना-सामना भी हुआ और झड़प भी, लेकिन फ़लस्तीन यात्रा मेरे लिए मानसिक तौर पर ज़्यादा चुनौतीपूर्ण थी। कभी डर का ऐसा अहसास नहीं हुआ था जैसा फ़लस्तीन जाते वक़्त हुआ। एक दूसरे देश में जहाँ इज़रायल ने हथियारों की ताक़त के दम पर इंसाफ़ को क़ैद किया हुआ है, जहाँ इतने बड़े-बड़े सीसीटीवी कैमरे लगे हैं कि लगता है, वे आपको कपड़ों में भी बिना कपड़ों के देख रहे हों, जहाँ चप्पे-चप्पे पर हथियारबंद फौजी होना आम बात है, और जहाँ इज़रायल ने 75 वर्षों से नस्लीय हिंसा फैला रखी है, वहाँ फ़लस्तीनियों के हाल जानना, उनसे मिलना कभी भी आशंकाओं से खाली नहीं होता था। लेकिन एक निश्चय था कि फ़लस्तीन के इंसाफ़ के संघर्ष को जानना और उसे जितना ज़्यादा हो सके, उतने लोगों तक पहुँचाना भी ज़रूरी है, इसीलिए मैं डर और ख़तरे के बावजूद वहाँ गया। – विनीत तिवारी (फ़लस्तीन से लौटकर)_ फ़लिस्तीनियों को मानव अधिकारों से वंचित रखकर दुनिया भर से मौकापरस्त यहूदियों और अन्य धर्मों के लोगों को फ़लस्तीन की ज़मीन पर बसाया गया है। इज़रायल में अमेरिकी समर्थन से ये लोग ऐश का जीवन जी रहे हैं। शेष आबादी, फ़लस्तीन के मूल निवासी, ईसाई और मुसलमान दोनों ही प्रताड़ित और अपमानित जीवन जीने के लिए अभिशप्त हैं। यह जानकारी प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने दी। वे हाल ही में फ़लस्तीन के हालात को क़रीब से जानने के लिए फ़लस्तीन गए थे। वहाँ उन्होंने दस दिनों तक वेस्ट बैंक के अनेक शहरों और गाँवों में जाकर मौजूदा हालात का जायज़ा लिया। प्रगतिशील लेखक संघ की इंदौर इकाई द्वारा अभिनव कला समाज में अनुभव साझा करने हेतु 24 नवंबर को आयोजित एक सभा में नगर के प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए विनीत तिवारी ने बताया कि इज़रायल में फ़लिस्तीनियों को बेहद सीमित आज़ादी मिली हुई है। उन्हें बेथलहम से दस किलोमीटर दूर जेरुसलम जाने के लिए भी तमाम चेकपोस्टों से होकर गुजरना पड़ता है। कदम-कदम पर उन्हें जाँच चौकियों पर इज़रायली सैनिकों के अपमानजनक व्यवहार और उनकी मनमानियों से जूझना पड़ता है। अधिकांश इज़रायली लोग फ़लिस्तीनियों के साथ घोर अपमानजनक भेदभावभरा नस्लभेदी व्यवहार करते हैं। इज़रायली सरकार ने फ़लस्तीनियों के लिए अलग सड़कें बना रखी हैं, उनकी गाड़ियों की नंबर प्लेटें भी अलग होती हैं। एक ही शहर में एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले तक जाने के लिए भी पाबंदियाँ हैं। जगह-जगह आठ मीटर ऊँची दीवारें खड़ी की हुई हैं, जिन पर पूरा वक़्त निगरानी रहती है। फ़लस्तीनी लोग उन सड़कों पर नहीं जा सकते जो इज़रायली लोगों के लिए बनायी गईं हैं। लेकिन इज़रायली लोगों को कुछ भी करने के विशेषाधिकार दिए हुए हैं। यहाँ तक कि फ़लस्तीनी लोगों की हत्या करने पर भी वे छोड़ दिये गए हैं। वेस्ट बैंक और गाज़ा के हालात में फ़र्क़ के बारे में उन्होंने कहा कि जो गाज़ा में इज़रायल ने एक झटके में कर दिया, वेस्ट बैंक में वे उसे धीरे-धीरे रोज़-रोज़ कर रहे हैं। फ़लस्तीन के किसानों की सैकड़ों एकड़ में खड़ी जैतून की फ़सल लूट लेना, उनकी ज़मीनों पर क़ब्ज़ा कर लेना, उनके मवेशी लूट लेना इज़रायली लोगों के लिए और इज़रायली फौजियों के लिए आम है। वहाँ के घुमंतू आदिवासी बेदुइन लोग इन इज़रायली घुसपैठियों के ज़ुल्म का रोज़ निशाना बनते हैं। इज़रायल दूसरे देशों से मौकापरस्त लाखों लोगों को ऐशो-आराम की ज़िंदगी का लालच देकर फ़लस्तीन की ज़मीन पर बसा रहा है ताकि फ़लस्तीनी लोग लगातार सिकुड़ते जाएँ। बेशक वेस्ट बैंक के हालात गाज़ा से बहुत बेहतर हैं। गाज़ा में अब तक क़रीब एक लाख फ़लस्तीनी लोग मार दिए गए हैं। हज़ारों लाशें मलबे के नीचे अभी भी दबी हुई हैं। नब्बे फ़ीसदी इमारतें इज़रायली बमों से ज़मींदोज़ हो चुकी हैं। अस्पताल भी बमों के निशाने बने हैं और डॉक्टर भी। स्कूल-कॉलेज तो भूल जाइए, तीन साल से युद्ध के चलते ज़रूरी दवाओं, सैनिटरी पैड्स, पीने के पानी और खाने के भी लाले पड़े हुए हैं। गाज़ा में जो लोग रहते हैं, वे भी वेस्ट बैंक के लोगों के ही रिश्तेदार हैं। अपने ही देश के लोगों और रिश्तेदारों की यह हालत उनके लिए भी बहुत तक़लीफ़देह है लेकिन वे मजबूर महसूस करते हैं। वेस्ट बैंक में हज़ारों एकड़ ज़मीन इज़रायली क़ब्ज़े में ली जा रही है जहाँ बाहर से लाकर लाखों लोगों को स्थानीय फ़लस्तीनी लोगों के अधिकार छीनकर बसाया जा रहा है। पेयजल वितरण में भी फ़लस्तीनियों के साथ पक्षपात होता है। सार्वजनिक स्थलों पर फ़लिस्तीनियों से सावधान रहने की चेतावनी के बोर्ड लगे हैं। उन्होंने पैलस्टीन एडमिनिस्ट्रेशन (पीए) और हमास के फ़र्क़ के बारे में भी बताया और एकता के सूत्रों के बारे में भी। उन्होंने बताया कि वे जेनिन रिफ्यूजी कैम्प के पीड़ितों से भी मिले जिनके हज़ारों घरों को जनवरी में एक रात में ही मलबे के ढेर में बदल दिया गया। उन्होंने जबाबदेह, नाबलुस, आर्मीनिया, जेरिको, जॉर्डन वैली, जेरुसलम और सबस्तिया आदि जगहों के अपने अनुभव बताये। एक महत्त्वपूर्ण बात उन्होंने यह भी बतायी कि सभी इज़रायली नागरिक इज़रायली सरकार के इस नस्लभेदी अमानवीय रवैये के समर्थक नहीं हैं। अनेक इज़रायली नागरिक फ़लस्तीनी नागरिकों के हक़ के लिए अपनी सरकार से लड़ भी रहे हैं। उन्हीं में रूसी मूल का युवा इज़रायली नागरिक आंद्रे और इज़रायली कम्युनिस्ट पार्टी की सांसद आईदा टॉमस सुलेमान, कैरोस फ़ॉर पैलस्टीन के रिफ़त कसीस जैसे लोग भी हैं जिनसे विनीत की मुलाक़ात हुई। वे बेतेलहेम विश्वविद्यालय के फ़लस्तीनी विद्यार्थियों से भी मिले जहाँ ग़सान कनाफ़ानी और मेहमूद दरवेश के चित्र और शब्द अंकित थे। उन्होंने बताया कि फिलिस्तीन की समस्या प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद ब्रिटिश शासकों की देन है। उन्होंने फ़लस्तीन पर अपना क़ब्ज़ा हासिल करने के साथ ही दुनिया भर में फैले यहूदीवादी लोगों को फ़लस्तीन पर क़ब्ज़े के लिए उकसाना शुरू कर दिया था। बाद में 1948 में अँग्रेज़ों ने फ़लस्तीन से अपने हाथ झाड़कर यह देश यहूदियों … Read more

बच्चों का स्वर्णिम भविष्य शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर : बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनाने की महती जिम्मेदारी शिक्षा विभाग पर – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत शिक्षा विभाग की रणनीति पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक अंजोर विजन के लघु, मध्यम और दीर्घकालीन लक्ष्यों पर व्यापक एवं गहन विमर्श मुख्यमंत्री ने कहा — लक्ष्य बड़े हैं, इसलिए कार्ययोजना ठोस हो और क्रियान्वयन पूरी ईमानदारी से हो रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत शिक्षा विभाग के लक्ष्यों की प्राप्ति को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने वर्ष 2030 तक के लघु अवधि, 2035 तक के मध्य अवधि तथा दीर्घकालीन लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा की और अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना तैयार कर त्वरित एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकसित भारत 2047 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, और इसी क्रम में ‘अंजोर विजन’ के माध्यम से विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति का सबसे सशक्त आधार शिक्षा है, क्योंकि दक्ष, कुशल और स्मार्ट बच्चे ही भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में शिक्षकों की संख्या राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। बैठक के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से समस्त जानकारी मुख्यमंत्री के साथ साझा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यदि एक शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को दृढ़ता से निभा ले, तो बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने शिक्षकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, प्रतिभाशाली शिक्षकों को नेतृत्व के अवसर प्रदान करने और बेहतर अकादमिक माहौल विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने आंगनबाड़ी एवं बालवाड़ी के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। बैठक में अंजोर विजन 2047 के अंतर्गत 1000 मॉडल स्कूलों की स्थापना, स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्कूलों की शुरुआत, एआई-आधारित मूल्यांकन प्रणाली, डिजिटल ऐप के माध्यम से व्यक्तिगत पाठ योजनाएं, शिक्षक प्रशिक्षण के उन्नयन तथा STEM शिक्षा के विस्तार जैसे प्रमुख लक्ष्यों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने STEM शिक्षा को प्रोत्साहित करने हेतु साइंस सिटी की स्थापना, विज्ञान मेलों के आयोजन और एआई एवं रोबोटिक्स लैब प्रारंभ करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में वर्ष 2035 तक ड्रॉपआउट दर को शून्य करने, राज्य स्तरीय ECCE समिति के गठन, शिक्षकों की भर्ती, मूल्यांकन केंद्रों को सुदृढ़ करने और आगामी तीन वर्षों के लक्ष्यों को निर्धारित कर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने संबंधी विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्यप्रणाली — परीक्षार्थियों के डेटा संकलन, प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन — की समीक्षा की तथा हायर सेकेंडरी स्तर पर अतिरिक्त विषयों के विकल्प, प्रतियोगी परीक्षाओं पर आधारित प्रश्न बैंक, त्रुटिरहित मूल्यांकन व्यवस्था और गोपनीय प्रश्नपत्रों के परिवहन हेतु ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए। बैठक में एनईपी 2020 के तहत नामांकन दर में हुई उल्लेखनीय वृद्धि, बालवाड़ी को स्कूली शिक्षा से जोड़ने, मातृभाषा-आधारित शिक्षण, ‘जादुई पिटारा’ एवं संवाद कार्यक्रम, इको क्लब की गतिविधियाँ, पीएम ई-विद्या के अंतर्गत डिजिटल प्रसारण तथा व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार जैसी उपलब्धियाँ भी प्रस्तुत की गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंजोर विजन 2047 के लक्ष्य छत्तीसगढ़ की आने वाली पीढ़ी को सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, मुख्य सचिव विकास शील, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष मती रेणु पिल्लै, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव मती शम्मी आबिदी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार सहित स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

अंतरराष्ट्रीय एविएशन में हड़कंप: A320 अपडेट ने रोकीं सैकड़ों फ्लाइट्स

 नई दिल्ली दुनियाभर में इस्तेमाल होने वाले एअरबस A320 फैमिली के विमानों में सोलर रेडिएशन से फ्लाइट कंट्रोल डेटा करप्ट होने का खतरा सामने आया है. एअरबस ने हाल ही में हुई एक घटना के बाद अपने लगभग 6,000 विमानों पर तत्काल सॉफ्टवेयर/हार्डवेयर अपडेट का आदेश जारी कर दिया है. इसका सीधा असर भारत की एअरलाइंस इंडिगो और एअर इंडिया समेत दुनियाभर की कई कंपनियों पर पड़ रहा है. यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने भी इस पर इमरजेंसी एअरवर्थिनेस डायरेक्टिव (EAD) लागू कर दिया है, जिससे ग्लोबल उड़ान संचालन प्रभावित होना तय है.  उड़ान नहीं भर पा रहीं 6000 फ्लाइट्स, जानिए क्या है CME? अगर आप भी कहीं भी फ्लाइट से सफर करने का सोच रहे हैं तो यह खबर जरूर पढ़ लीजिए. देशभर में कई फ्लाइट्स कैसिंल हो सकती हैं या फिर उनका संचालन देरी से हो सकता है. दरअसल भारत समेत दुनियाभर के 6,000 विमानों की हवाई यात्राएं इस सप्ताह पूरी तरह से प्रभावित होने वाली हैं. इसका कारण है कि एयरबस A320 फैमिली के विमानों में टेक्निकल खराबी आ गई है, जिससे सही करने के लिए ग्राउंड किया जा रहा है. इन विमानों पर तेज सोलर रेडिएशन का खतरा मंडरा रहा है. भारत में इंडिगो और एयर इंडिया ग्रुप के लगभग 250 से ज्यादा A320 फैमिली के विमानों को इस अपग्रेड के लिए रोका जाएगा. साफ्टवेयर अपग्रेड होने में लगभग 2-3 दिन का समय लग सकता है.  जानिए क्या है समस्या Airbus A320 फैमिली एयरक्राफ्ट में बड़ी तकनीकी समस्या सामने आई है, जिसके चलते देश में 250 से ज्यादा विमानों को तुरंत सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर अपडेट की जरूरत पड़ गई है. सोलर रेडिएशन के कारण फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम में डेटा करप्शन की शंका है और इसी वजह से कई प्लेनों को ग्राउंड कर चेकिंग और अपडेट करना पड़ेगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विमान निर्माता कंपनी एयरबस ने अपने सभी ऑपरेटर्स को अलर्ट किया है कि हाल ही में A320 विमान में अचानक पिच डाउन की समस्या हुई थी. जांच में यह सामने आया कि समस्या एलीवेटर-ऐलेरॉन कंप्यूटर (ELAC) में टेक्निकल समस्या के कारण हो सकती है. एयरबस ने साफ किया कि अगर इस खराबी को समय पर ठीक नहीं किया गया तो विमान के फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बन सकता है. इस बीच ईयू एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने भी आदेश दिया है कि प्रभावित विमानों में तुरंत काम करने वाले ELAC इंस्टॉल किए जाएं और यह अपडेट अगली उड़ान से पहले अनिवार्य रूप से लागू होना चाहिए. EASA ने भी जारी किया अलर्ट यूरोपीय संघ उड्डयन सुरक्षा एजेंसी यानी EASA ने भी Airbus A320 विमान फैमिली के लिए एक इमरजेंसी एयर वर्थीनेस निर्देश (EAD) जारी कर दिया है. यह निर्देश विमान के ऑनबोर्ड कंप्यूटरों में से एक के सॉफ्टवेयर अपडेट द्वारा शुरू की गई एक संभावित समस्या को दूर करने के लिए जारी किया गया है. अंतरिक्ष का मौसम विमान इलेक्ट्रॉनिक्स को कैसे प्रभावित करता है? बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार Qantas Airline के पूर्व कैप्टन डॉ. इयान गेटली ने बताया कि आसमान में उड़ने वाले विमान कभी-कभी सूर्य से निकलने वाले एक बड़े विस्फोट से प्रभावित हो सकते हैं जिसे कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहा जाता है. यह तब होता है जब सूरज से भारी मात्रा में प्लाज्मा यानी ज्यादा गर्मी , आवेशित कण अंतरिक्ष में निकलता है. यह प्लाज्मा पृथ्वी की तरफ आता है और हमारे वायुमंडल में प्रवेश करता है. विमान पर इसका प्रभाव डॉ. गेटली के अनुसार CME जितना ज्यादा शक्तिशाली होगा, उतना ही 28,000 फीट से ऊपर उड़ने वाले विमानों और उपग्रहों के इलेक्ट्रॉनिक्स में समस्या आने की उतनी ही ज्यादा संभावना होती है. जब ये ज्यादा आवेशित कण वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो वे ऊपरी वायुमंडल में और भी ज्यादा आवेशित कण बनाते हैं. ये नए आवेशित कण सीधे विमान के नेविगेशन और कम्युनिकेशन जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स में समस्या पैदा कर सकते हैं. डॉ. गेटली का कहना है कि उन्होंने 2003 में लॉस एंजिल्स और न्यूयॉर्क के बीच की उड़ान के दौरान इस घटना का एक्सपीरियंस किया था जिसके बाद उन्होंने इस विषय पर शोध करना शुरू किया. सरल शब्दों में कहें तो सूरज का शक्तिशाली विस्फोट यानी CME पृथ्वी के वायुमंडल को भर देता है जिससे विमान के इलेक्ट्रॉनिक्स  और कम्युनिकेशन सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं. दुनिया की पसंदीदा उड़ान पर मंडराया खतरा! एयरबस का A320 विमान परिवार दुनिया भर की एयरलाइंस की पसंद का विमान परिवार बना हुआ है. यह बेहतरीन विमान 4,700 नॉटिकल मील यानी लगभग 8,700 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है. इस विमान में 120 से 244 यात्रियों के बैठने की क्षमता है. सबसे खास बात यह है कि A320 अभी 50% सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के साथ उड़ान भर सकता है. इस विमान में दो एडवांस टर्बोफैन इंजन का ऑप्शन मिलता है जिसकी वजह से पिछली पीढ़ी के मुकाबले इसकी ईंधन खपत में 20% तक की कमी आती है. लेकिन अब इस विमान परिवार से जुड़े लगभग 6,000 एयरक्राफ्ट पर एक बड़ी चुनौती आ गई है. हालांकि राहत की बात यह है कि ज्यादातर विमानों के लिए, समाधान काफी आसान है, केवल नया कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना होगा, जिसमें अमूमन सिर्फ तीन घंटे लगेंगे. लेकिन करीब 900 पुराने विमानों को एक बड़ी मरम्मत की जरूरत है, उनके पूरे कंप्यूटर सिस्टम को बदलना होगा. जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता इन विमानों को उड़ाने के लिए ले जाने की अनुमति नहीं होगी.  क्या हुआ है?  दरअसल, एअरबस ने A-320 सेगमेंट के विमानों के लिए एक सोलर रेडिएशन से जुड़ी समस्या की पहचान की है. सोलर रेडिएशन की वजह से फ्लाइट के कंट्रोल सिस्टम में इस्तेमाल होने वाला डेटा प्रभावित हो सकता है. इसका असर A 320 सेगमेंट के करीब 6,000 विमानों पर पड़ेगा. एअरबस ने तुरंत सॉफ्टवेयर अपडेट कराने का निर्देश दिया है. भारत में इंडिगो, एअर इंडिया के विमान इस अपडेट से प्रभावित बताए जा रहे हैं. इन विमानों में बदलाव के दौरान कुछ उड़ानों में देरी या कैंसिल होने के आसार हैं. एअरबस ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया कि हाल ही में A320 फैमिली के एक विमान में ऐसी घटना सामने आई, जिसमें इंटेंस सोलर रेडिएशन ने फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम के लिए … Read more