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जश्न बना मातम: शादी समारोह में DJ प्वाइंट पर आग, लाखों का सामान स्वाहा

करनाल करनाल जिला में तरावड़ी के वार्ड नंबर-4 की राणा कालोनी में एक डीजे वाली गाड़ी में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते गाड़ी जलकर राख हो गई। डीजे की गाड़ी एक शादी समारोह में आई हुई थी।     मामले की जानकारी देते हुए तानिष नाम के युवक जिसके भाई की शादी है, ने बताया पड़ोसियों द्वारा आग लगने की जानकारी हमे मिली थी। बाहर आकर देखा तो डीजे वाली गाड़ी पूरी तरह से जल रही थी। पानी डालकर आग को बुझाने का प्रयास किया लेकिन तब तक गाड़ी में रखा सामान जल कर राख हो गया था। युवक द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया तकरीबन तीन और 4:00 बजे के बीच में आग लगने की घटना हुई थी। गाड़ी और डीजे उनका खुद का था ।   परिवार के अन्य व्यक्ति द्वारा मामले की जानकारी देते हुए बताया गया देर रात तक डीजे पर सभी लोगो ने डांस किया । 3 और 4 बजे के बीच में हमे पड़ोसियों ने उठाया जब हमने बाहर आकर देखा तो डीजे वाली गाड़ी में आग लगी हुई थी ।    फिलहाल डीजे वाली गाड़ी में आग किसने लगाई यह तो जांच का विषय है इस बारे में अभी तक कोई भी पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है। परिवार में शादी है परिवार पुलिस को जानकारी देगा या नहीं इस बारे में भी अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।  

खाद्य प्रसंस्करण हब बनने की ओर जशपुर: निफ्टेम कुंडली का सतत् प्रयास

रायपुर,  राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान कुंडली हरियाणा की 18 यूजी व पीजी छात्रों और 2 संकाय सदस्यों की टीम ने अपने प्रतिष्ठित ग्राम अंगीकरण कार्यक्रम के तहत 19 से 27 नवंबर 2025 तक लगातार तीसरे वर्ष जशपुर का दौरा किया l  निफ्टेम ने 2023 में जशपुर जिला प्रशासन के निर्देशानुसार कृषि, बागवानी और वन उत्पादों विशेषकर महुआ के खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने की दिशा में अपनी गतिविधियाँ प्रारम्भ की थीं। निफ्टेम टीम ने समूह, एफ़ पी ओ और खाद्य प्रसंस्करण हितधारकों से मिलकर गुणवत्ता, सुरक्षा, विनियमन और उद्यमिता से संबंधित जानकारी साझा की। मोटे अनाज से मूल्यवर्धित उत्पादों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण           जशपुर में खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण की आधारशिला मजबूत हुई वर्तमान वर्ष में टीम ने कुशल मानव संसाधन तैयार करने हेतु विविध प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए। कुनकुरी स्थित कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन में एक फूड प्रोसेसिंग ट्रेनिंग एवं इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किया गया, जहां युवाओं को मोटे अनाज आधारित बेकरी उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। वी ए पी टीम द्वारा स्व सहायता समूह एवं एफ पी ओ सदस्यों तथा युवाओं के लिए मोटे अनाज से मूल्यवर्धित उत्पादों पर तीन व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त, सुजी आधारित पास्ता निर्माण, पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग पर आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कुल 96 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिनमें 65 प्रतिशत महिलाएँ सम्मिलित रहीं। जशपुर : फसलों और अवसरों का समृद्ध भंडार          जशपुर की जलवायु एवं भौगोलिक विविधता में अच्छी फसलों का उत्पादन होता है। जहां धान, कोदो-कुटकी, रागी, सेब, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी, काजू, कटहल, अदरक, हल्दी, नींबू, चाय और महुआ जैसी फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है। खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से इन अतिरिक्त उत्पादों को दीर्घ शेल्फ लाइफ, सुरक्षित प्रसंस्करण, और मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों—जैसे स्नैक्स, नाश्ते के अनाज, एनर्जी बार और रेडी-टू-ईट/कुक उत्पाद—में बदला जा सकता है।         जिला प्रशासन द्वारा सभी ब्लॉकों में खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। निफ्टेम का वी ए पी कार्यक्रम ग्रामीण समुदायों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और उद्यमिता विकास प्रदान कर इस प्रयास को सशक्त बना रहा है। महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस : निफ्टेम टीम द्वारा सराहना         अपने दौरे के दौरान निफ्टेम टीम ने महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का भी दौरा किया, जहाँ महुआ फूल से तैयार किए गए विभिन्न नवाचारपूर्ण मूल्यवर्धित उत्पादों  जैसे महुआ च्यवनप्राश, महुआ टी, महुआ आधारित स्नैक्स तथा अन्य प्रयोगात्मक खाद्य उत्पाद  के विकास कार्य को विस्तार से समझा। टीम ने उत्पादों की गुणवत्ता, संगत प्रसंस्करण विधि, पैकेजिंग की स्वच्छता एवं प्रस्तुति तथा महुआ के आधुनिक फूड-ग्रेड उपयोग की विशेष रूप से सराहना की। महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जिला प्रशासन जशपुर द्वारा प्रारम्भ किया गया एक छोटा लेकिन महत्त्वपूर्ण प्रसंस्करण केंद्र है, जिसे वर्तमान में जय जंगल द्वारा संचालित किया जा रहा है। यह केंद्र जिले में कोदो, कुटकी, रागी और महुआ के प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और स्थानीय महिला समूहों के लिए वास्तविक कौशल एवं आय-वृद्धि का केंद्र बन चुका है।            वी ए पी कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे प्रो. प्रसन्ना कुमार ने जशपुर की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया । उन्होंने जिला कलेक्टर जशपुर, जिला पंचायत सीईओ,  एनआर ए एल एम मिशन मैनेजर  तथा जय जंगल एफ पी सी के निदेशक के योगदान को रेखांकित किया। निफ्टेम निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने वी ए पी को छत्तीसगढ़ में उभरते खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र का आधार बताते हुए इसकी गतिविधियों को और अधिक क्षेत्रों तक विस्तार देने की आवश्यकता पर बल दिया।                    इस समग्र विश्लेषण के आधार पर तैयार की गई विस्तृत “जशपुर खाद्य प्रसंस्करण विकास रिपोर्ट” आज जिला प्रशासन को औपचारिक रूप से प्रस्तुत की गई।

हस्तशिल्प पुरस्कार 2025: भारतीय हस्तकला को सम्मान, छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हिराबाई झरेका बघेल का विशेष रूप से गौरव

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 9 दिसंबर 2025 को करेंगी हस्तशिल्प पुरस्कार प्रदान नई दिल्ली / रायपुर कपड़ा मंत्रालय 9 दिसंबर 2025, मंगलवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले हस्तशिल्प पुरस्कार 2025 के माध्यम से वर्ष 2023 और 2024 के विशिष्ट शिल्पियों को सम्मानित करेगा। इस वर्ष के समारोह में छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सुश्री हिराबाई झरेका बघेल को विशेष रूप से रेखांकित किया जा रहा है, जिन्हें जगदलपुर से धातुकला (बेल मेटल) में अद्वितीय कौशल के लिए सम्मानित किया जा रहा है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू होंगी। केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे तथा कपड़ा एवं विदेश राज्य मंत्री श्री पबित्रा मरगेरीटा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कारों की स्थापना 1965 में हुई थी, जिनका उद्देश्य उन उत्कृष्ट शिल्पियों को पहचान देना है जिनके अद्वितीय कौशल ने देश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया है। “शिल्प गुरु” पुरस्कार, जो 2002 में आरंभ किए गए, हस्तशिल्प क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान हैं और उन शिल्प गुरुओं को प्रदान किए जाते हैं जिन्होंने परंपरागत कला में असाधारण निपुणता, नवाचार और संरक्षण का परिचय दिया है। यह समारोह राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह (8 से 14 दिसंबर) का प्रमुख आकर्षण है। इस दौरान देशभर में विविध गतिविधियाँ—हस्तकला प्रदर्शनी, विषयगत कार्यशालाएँ, क्षमता-वृद्धि कार्यक्रम, शिल्प प्रदर्शन, पैनल चर्चा, जन-जागरूकता पहल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों—का आयोजन किया जाता है, जिनका उद्देश्य हस्तशिल्प की सामाजिक-आर्थिक महत्ता को बढ़ाना है। भारत का हस्तशिल्प क्षेत्र न केवल सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण संरक्षक है, बल्कि ग्रामीण व अर्धशहरी क्षेत्रों में करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार भी है। कपड़ा मंत्रालय शिल्पियों को पहचान, कौशल विकास, तकनीकी सहयोग, वित्तीय सशक्तिकरण और बाजार उपलब्धता जैसे उपायों के माध्यम से निरंतर समर्थन प्रदान कर रहा है। हस्तशिल्प पुरस्कार और राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह जैसे आयोजनों के माध्यम से सरकार का उद्देश्य भारत की समृद्ध शिल्प विरासत को सुदृढ़ करना और शिल्प समुदायों को सशक्त बनाना है।

रूस के बाजार में भारतीय आयुर्वेद का बोलबाला, भृंगराज-त्रिफला की बढ़ती मांग

नई दिल्ली  भारत और रूस की मित्रता काफी पुरानी है। एक-दूसरे की संस्कृति को सम्मान देने के साथ ही हर क्षेत्र में दोनों देश रूचि लेते हैं। बात आयुर्वेद की हो तो मित्र राष्ट्र इसमें भी पीछे नहीं। भृंगराज, त्रिफला से लेकर अन्य औषधियों समेत भारतीय आयुर्वेद ने रूस में खास जगह बनाई है। आयुर्वेद भारत की सदियों पुरानी पद्धति है। वात-पित्त-कफ के संतुलन, पंचकर्म, रसायन चिकित्सा और दिनचर्या पर आधारित यह विश्व की सबसे प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है। आयुर्वेद को विश्व स्वास्थ्य संगठन की भी मान्यता प्राप्त है। आयुर्वेद भारत में मॉडर्न मेडिसिन के समानांतर नेशनल हेल्थ सिस्टम का अभिन्न अंग बन चुका है। रूस में भी आयुर्वेद का तेजी से प्रभाव बढ़ता जा रहा है। रूस, भारत के बीच लंबे समय से साझेदारी रही है, जो समय की कसौटी पर खरा भी उतरी है। इसी कड़ी में सदियों पुरानी भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को रूस में 1989 से ही आधिकारिक मान्यता और लोकप्रियता मिल रही है। यह सफर उस समय शुरू हुआ जब दुनिया के सबसे भयानक परमाणु दुर्घटनाओं में से एक चेर्नोबिल परमाणु दुर्घटना घटित हुई। इसके बाद सोवियत डॉक्टरों ने विकिरण से प्रभावित बच्चों और मरीजों के इलाज के लिए आयुर्वेद की ओर रुख किया। अमेरिका की रिसर्च बेस्ड नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसीन साइंस की ऑफिशियल वेबसाइट पर रूस में बढ़ती आयुर्वेद की लोकप्रियता को लेकर विस्तार से जानकारी मिलती है। भारत सरकार के सहयोग से 1989 में बेलारूस के मिन्स्क में पहला आयुर्वेदिक केंद्र खोला गया। भारतीय चिकित्सकों ने रूसी डॉक्टरों के साथ मिलकर विकिरण बीमारी के लक्षणों जैसे सिरदर्द, अनिद्रा, जोड़ों का दर्द, कमजोर इम्यूनिटी आदि पर सफलतापूर्वक काम किया। इसके बाद 1996-98 के बीच मास्को में 85 चेरनोबिल पीड़ितों पर किए गए आयुर्वेदिक उपचार में अधिकांश मरीजों को पूर्ण या आंशिक राहत मिली और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। साल 1990 में सोवियत स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुर्वेद को रूसी स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने के लिए अलग विभाग बनाया और मॉस्को में पहला ट्रेनिंग कोर्स शुरू किया, जिसमें 250 से अधिक डॉक्टरों को आयुर्वेद के लिए ट्रेनिंग दी गई। 1991 में रूसी पारंपरिक चिकित्सा संघ की स्थापना हुई। साल 1996 से 2005 तक मॉस्को के 'नामी आयुर्वेद सेंटर में डॉक्टर नौशाद अली, डॉक्टर मोहम्मद अली और डॉक्टर उन्नीकृष्णन जैसे भारतीय विशेषज्ञों ने 15 सौ से अधिक मरीजों का इलाज किया। साल 2003 में शुरू हुई 'वश्य आयुर्वेद' परियोजना और 2005 में बने आयुर्वेद रूस-भारत संघ ने इसे और गति दी। आज रूस की पीपुल्स फ्रेंडशिप यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल मेडिसिन में आयुर्वेद विभाग है। भारतीय प्रोफेसर हर साल बड़ी संख्या में रूसी डॉक्टर्स को प्रशिक्षण देते हैं। रूसी बाजार में च्यवनप्राश, त्रिफला गुग्गुलु, ब्राह्मी रसायन, मेदोहर गुग्गुलु, महामंजिष्ठादि, भृंगराज जैसी भारतीय औषधियां और आंवला, अश्वगंधा, बाला, महानारायण जैसे दर्जनों तेल उपलब्ध हैं। यही नहीं, देश में 1 हजार से अधिक स्पा सेंटर हैं जिनमें से आधे से अधिक पंचकर्म, अभ्यंगम, हर्बल स्टीम बाथ जैसी शुद्ध आयुर्वेदिक सेवाएं देते हैं। रूस के बच्चे-बूढ़े, जवान सभी शारीरिक और मानसिक समस्याओं से राहत के लिए आयुर्वेद का सहारा ले रहे हैं ।

योगी सरकार का अवैध नशे पर बड़ा प्रहार, कोडीन के दुरुपयोग पर 128 फर्मों पर एफआईआर

– मुख्यमंत्री के निर्देश पर औषधि प्रशासन की ताबड़तोड़ छापेमारी में लाखों की अवैध दवाएं जब्त, आधा दर्जन से अधिक गिरफ्तार   – सबसे अधिक वाराणसी में 38, जौनपुर में 16, कानपुर नगर में 8, गाजीपुर में 6 और लखीमपुर खीरी-लखनऊ में 4-4 एफआईआर दर्ज की गई – प्रदेश के 28 जिलों में कोडीन के संगठित दुरुपयोग पर विभिन्न फर्मों पर दर्ज की गई एफआईआर लखनऊ, योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को नशे की आगोश में धकेलने वाले अवैध नशे के सौदागरों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। सीएम योगी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में एएनटीएफ (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा बड़ा एक्शन लिया गया है। इसी क्रम में एफएसडीए द्वारा प्रदेश भर में कोडीनयुक्त कफ सिरप और नॉरकोटिक्स श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। इस विशेष अभियान में अब तक प्रदेशभर में लाखों की अवैध नॉरकोटिक और कोडीनयुक्त औषधियां जब्त की गई हैं जबकि अब तक 128 एफआईआर दर्ज की गई हैं। वहीं आधा दर्जन से अधिक अवैध नशे के सौदागरों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे धकेला गया है। दो दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर कोडीनयुक्त सिरप एवं नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री पर लगाई रोक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, डॉ. रोशन जैकब ने बताया की मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में अब तक  प्रतिष्ठानों पर निरीक्षण/छापेमारी की गई, लाखों की औषधियां सीज की गईं। जांच में संदिग्ध पाए गए अभिलेखों की अग्रिम विवेचना तक दो दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर कोडीनयुक्त सिरप एवं नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। प्रदेश भर में कोडीन युक्त / नॉरकोटिक्स/साईकोट्रॉपिक श्रेणी औषधियों की अवैध आवाजाही की जांच हेतु संदिग्ध मेडिकल स्टोर की सघन जांच, विशेष अभियान के रूप में जारी है। उन्होंने बताया कि अवैध रूप से नकली एवं नशे के रूप में दुरूपयोग होने वाली औषधि के भंडारण, क्रय-विक्रय अथवा आवाजाही से संबंधित सूचना विभाग द्वारा जारी व्हाट्सप्प नंबर 8756128434 पर दी जा सकती है। अवैध नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री और भंडारण के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कई जिलों में छापेमारी की है और एनडीपीएस एक्ट में सख्त कार्रवाई की गई। इन जिलों में दर्ज की गई एफआईआर आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि अभियान के दौरान 28 जिलों में कुल 128 एफआईआर दर्ज की गई। इनमें वाराणसी में 38, जौनपुर में 16, कानपुर नगर में 8, गाजीपुर में 6, लखीमपुर खीरी 4, लखनऊ 4 और बहराइच, बिजनौर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सीतापुर, सोनभद्र, बलरामपुर, रायबरेली, संतकबीर नगर, हरदोई, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, उन्नाव, बस्ती, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, सहारनपुर, बरेली, सुल्तानपुर, चंदौली, मीरजापुर आदि जिलों में 52 एफआईआर दर्ज की गई।

युवाओं को बड़ा तोहफा: नीतीश सरकार का 1 करोड़ नौकरियों का रोडमैप, बने तीन नए विभाग

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के युवाओं के लिए एक बड़े बदलाव वाली घोषणा करते हुए कहा है कि सरकार ने वर्ष 2025 से 2030 के बीच 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए सरकार बहु-आयामी संरचनात्मक बदलाव कर रही है। रोजगार सृजन को गति देने के लिए युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। इसी क्रम में सरकार ने तीन नए विभागों का गठन किया है। नीतीश सरकार ने युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और नागर विमानन विभाग के गठन का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इन विभागों की स्थापना से युवाओं को प्रशिक्षण, उद्यमिता और नौकरी के अवसरों से जोड़ने की प्रक्रिया और अधिक तेज और प्रभावी होगी। सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "हमलोगों ने अगले 5 वर्षों (2025-30) में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए जरूरी है कि राज्य में ज्यादा से ज्यादा युवाओं को कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण दिया जाए और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च एवं तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।  साथ ही लक्ष्य की उपलब्धि के लिए सघन अनुश्रवण भी किया जाए। इसके लिए राज्य में अलग से तीन नए विभाग- युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और नागर विमानन विभाग सृजित करने का निर्देश दिया है। इन तीन नए विभागों के सृजन से राज्य में ज्यादा से ज्यादा युवाओं को नौकरी एवं रोजगार दिलाने में काफी मदद मिलेगी। युवा, रोजगार एवं कौशल विभाग के जरिए अगले 5 वर्षों में बड़ी संख्या में युवाओं को उद्यमिता के अवसर प्रदान करने हेतु विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रोजगार दिलाने का निर्णय लिया गया है।" सीएम ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा विभाग के सृजन का उद्देश्य है कि उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार हो, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा मिले, तकनीकी एवं व्यवसायिक शिक्षा का विकास हो और समाज के सभी वर्गों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण रोजगारपरक शिक्षा मिल सके। आप सभी को पता है कि राज्य में कई नए हवाई अड्डों का निर्माण हो रहा है एवं भविष्य में उड़ान योजना के तहत कई बड़े-छोटे नए हवाई अड्डों का निर्माण प्रस्तावित है। राज्य में अलग से नागर विमानन विभाग के सृजन से इसमें तेजी आएगी, औद्योगिक वातावरण बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और इससे राज्य में निर्मित उत्पादों के निर्यात में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, हम लोगों ने अलग से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय एवं बिहार विपणन प्रोत्साहन निगम (Bihar Marketing Promotion Corporation) सृजित करने का भी निर्णय लिया है जिससे युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार देने के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय का गठन कर युवाओं को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से संबंधित कौशल विकास के लिए प्रत्येक जिले में मेगा स्किल सेंटर की स्थापना की जाएगी ताकि राज्य के युवाओं को अधिक से अधिक नौकरी/रोजगार का अवसर मिल सके। सीएम नीतीश ने पोस्ट में आगे लिखा, "साथ ही बिहार विपणन प्रोत्साहन निगम के सृजन से राज्य में कृषि, पशुपालन, बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण के साथ-साथ हस्तशिल्प, ग्रामीण उद्योग, लघु एवं कुटीर उद्योग जैसे उत्पादों की उपलब्धता, गुणवत्ता एवं वितरण व्यवस्था सुदृढ़ होगी और बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। राज्य के युवाओं के सुखद भविष्य के लिए हमलोग लगातार काम कर रहे हैं। अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार देने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। बिहार के युवा दक्ष एवं आत्मनिर्भर हों, उन्हें रोजगार के नए अवसर मिलें, उनका भविष्य सुरक्षित हो इसके लिए हमलोग कृतसंकल्पित हैं।"

उत्तर प्रदेश में नवाचार की नई परंपरा, इनक्यूबेशन सेंटर बने विकास के अग्रदूत

प्रदेश में 8 वर्षों में विकसित हुआ सशक्त इनक्यूबेशन इकोसिस्टम योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों से युवाओं को मिला रोजगार उद्यम और नवाचार का नया अवसर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले आठ वर्षों में इनक्यूबेशन आधारित नवाचार को नई पहचान दी है। आज प्रदेश में कुल 76 इनक्यूबेशन सेंटर सक्रिय हैं। ये केंद्र विद्यार्थियों और युवाओं को विचार से उद्योग तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में सहयोग देते हैं। सरकार का उद्देश्य हर जिले में ऐसा माहौल तैयार करना है जहां युवा सुरक्षित और संगठित तरीके से उद्यम शुरू कर सकें। इसी लक्ष्य के तहत वित्तीय सहायता तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञ नेटवर्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इनक्यूबेशन सेंटर वह स्थान है, जहां नए आइडिया को विकसित कर सफल कारोबार में बदलने के लिए सभी आवश्यक संसाधन एक ही स्थान पर उपलब्ध कराए जाते हैं। यह ऐसा केंद्र है जो स्टार्टअप को उसके जन्म से लेकर उसके पांव जमाने तक मार्गदर्शन, सहायता और सुविधाएं प्रदान करता है। इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना से उद्यमियों की कई चुनौतियां सरल हो गई हैं। यहां शुरुआती चरण में जरूरी प्रशिक्षण कानूनी सलाह बाजार से जुड़ी जानकारी तकनीकी मार्गदर्शन और निवेशकों से संपर्क जैसे सभी तत्व एक ही स्थान पर उपलब्ध होते हैं। इससे किसी भी स्टार्टअप की सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इन केंद्रों ने युवाओं में उद्यमिता की भावना को मजबूत किया है और उन्हें जोखिम लेने का आत्मविश्वास दिया है। पिछले आठ वर्षों में इन केंद्रों से जुड़े हजारों युवाओं ने अपनी पहचान बनाई है। कृषि तकनीक शिक्षा स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले कई स्टार्टअप प्रदेश के भीतर और बाहर अपनी उपयोगिता सिद्ध कर चुके हैं। इन स्टार्टअप ने रोजगार भी बढ़ाया है और स्थानीय समस्याओं के समाधान भी प्रदान किए हैं। इससे उत्तर प्रदेश के आर्थिक ढांचे को नई दिशा मिली है। स्टार्टअप विशेषज्ञ विनीत का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार स्टार्टअप को बढ़ावा देने का ठोस प्रयास कर रही है। इन्क्युबेटर्स की स्थापना से स्टार्टअप्स को बड़ी मदद मिलती है। शुरुआत में स्टार्टअप्स को बहुत दिक्कतें आती है, ऐसे में इन्क्युबेटर्स बड़े सहायक होते हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार का मानना है कि इनोवेशन और तकनीक आधारित उद्यम ही भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार तैयार करेंगे। इनक्यूबेशन सेंटर इसी सोच का विस्तार हैं। छोटे शहरों से निकलकर बड़े मंच तक पहुंचने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह परिवर्तन प्रदेश को एक मजबूत स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित कर रहा है। कुल मिलाकर इनक्यूबेशन सेंटर उत्तर प्रदेश में विकास और अवसरों के नए द्वार खोल रहे हैं। यह नेटवर्क न केवल उद्यमिता को गति दे रहा है बल्कि प्रदेश को आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भी अग्रसर कर रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार से पहले इनक्यूबेशन सेंटर मामले में स्थिति उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले इनक्यूबेशन सेंटरों की संख्या लगभग 12 से 15 के बीच थी। यह केंद्र केवल चुनिंदा विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों तक सीमित थे। न इनके विस्तार की कोई स्पष्ट नीति थी और न ही स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर कोई स्पष्ट संरचना। योगी आदित्यनाथ सरकार में विस्तार वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने स्टार्टअप नीति लागू की और पूरे राज्य में इनक्यूबेशन नेटवर्क का व्यापक विस्तार शुरू किया। परिणाम स्वरूप आज प्रदेश में 76 इनक्यूबेशन सेंटर सक्रिय हैं और कई और स्थापित किए जाने की प्रक्रिया में हैं। सरकार के प्रमुख लक्ष्य – हर जिले में कम से कम एक इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करना – उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करना – युवा उद्यमिता को रोजगार सृजन का प्रमुख साधन बनाना – स्टार्टअप की सफलता दर को बढ़ाना – कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल सेवाएं सुरक्षा और ई-गवर्नेंस सहित कई क्षेत्रों में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण करना – इनक्यूबेशन सेंटरों की संख्या 100 करने का लक्ष्य

सगाई टूटी या सिर्फ अफ़वाह? शादी पोस्टपोन के बाद स्मृति मंधाना के वीडियो ने बढ़ाई हलचल

नई दिल्ली स्मृति मंधाना ने संगीतकार पलाश मुच्छल के साथ अपनी शादी पोस्टपोन होने के बाद पहली बार अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया है। इस वीडियो में मंधाना के हाथ में सगाई की रिंग नहीं दिखी। इससे फैंस हैरान हो गए हैं। हालांकि, यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि यह वीडियो, शादी पोस्टपोन होने के बाद या फिर उससे पहले शूट किया गया था। ये अभी तक एक सवाल बना हुआ है। गौरतलब हो कि स्मृति मंधाना और संगीतकार पलाश मुच्छल की 23 नवंबर को शादी होने वाली थी। हालांकि, शादी के दिन मंधाना के पिता श्रीनिवास बीमार पड़ गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद शादी पोस्टपोन कर दी गई। अगले दिन पलाश भी बीमार पड़ गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अब दोनों को छुट्टी मिल गई है, लेकिन दोनों परिवारों ने अभी तक शादी की नई तारीख की घोषणा नहीं की है।    अब मंधाना ने शुक्रवार को पहली बार अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया। यह एक प्रमुख टूथपेस्ट ब्रांड के साथ एक पेड पार्टनरशिप थी। हालांकि, फैंस का ध्यान इस बात पर गया कि उनकी अंगुली में सगाई की अंगूठी नहीं थी। यह पता नहीं चल पाया है कि यह विज्ञापन सगाई से पहले शूट किया गया था या फिर बाद में। फिर भी, यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।    पलक मुच्छल ने तोड़ी चुप्पी गौरतलब हो कि स्मृति मंधाना ने शादी पोस्टपोन होने के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शादी से जुड़ी सभी पोस्ट हटा दी हैं, जिससे अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। इसी बीच फिल्मफेयर से बातचीत में पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पलक मुच्छल ने बात की। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि परिवारों ने बहुत ही कठिन समय का सामना किया है और मैं बस यही दोहराना चाहूंगी कि हम इस समय में सकारात्मकता में विश्वास रखना चाहेंगे।

जेम्स कैमरून की नई फिल्म ने तोड़ी सारी हदें, दर्शक कह रहे ‘अल्टीमेट’ अनुभव

जेम्स कैमरून की 'अवतार: फायर एंड ऐश' का बीते तीन साल का इंतजार खत्‍म होने वाला है। 2022 में आई 'अवतार: द वे ऑफ वॉटर' की यह सीक्‍वल फिल्‍म आखिरकार इस महीने 19 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। यह साल 2009 में शुरू हुई ब्‍लॉकबस्‍टर 'अवतार' फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्‍म है। मेकर्स ने वर्ल्‍डवाइड थ‍िएटर रिलीज से पहले मीडिया के लिए अमेरिका में एक प्रीव्‍यू शो का आयोजन किया था। इसके बाद X पर फिल्‍म के फर्स्‍ट रिएक्‍शन और रिव्‍यूज सामने आए हैं। इनमें Avatar: Fire and Ash को एक 'अल्‍टीमेट सिनेमैटिक एक्‍सपीरियंस' बताया गया है। विदेशी मीडिया के समीक्षकों ने जेम्‍स कैमरून की फिल्‍म के विजुअल्‍स और इमोशन की जमकर तारीफ की है। फिल्म क्रिटिक कोर्टनी हॉवर्ड ने X पर 'अवतार: फायर एंड ऐश' की तारीफ करते हुए लिखा है, 'यह फिल्‍म हमें याद दिलाती है कि मूवी थिएटर किसलिए बनाए गए थे। अद्भुत।' उन्‍होंने आगे तारीफ में कहा है, 'तीन फिल्में करने के बाद भी, जेम्स कैमरून में अभी भी दम है। यह जबरदस्त और शानदार फिल्म है, जो आप पर इमोशनली भी असरदार है। एक शानदार कहानी। हर तरह से दमदार, शानदार और जबरदस्त। इसे देखते हुए लगता है कि मूवी थिएटर्स ऐसी फिल्‍मों के लिए ही बनाए गए थे।' विजुअल्स और इमोशन की हो रही तारीफ एक अन्‍य समीक्षक क्रिटिक शॉन ताजीपोर ने भी X पर तारीफ करते हुए लिखा है, 'फायर एंड ऐश, जेम्‍स कैमरून ने हर फ्रेम के साथ अपनी सीमाओं को आगे बढ़ाया है। मैं ‘अवतार’ का सबसे बड़ा सुपरफैन नहीं हूं, लेकिन ‘अवतार: फायर एंड ऐश’ साबित करता है कि कैमरून हमेशा सबसे बेहतरीन सिनेमैटिक फिल्म दे सकते हैं और देंगे। विजुअल्स और इमोशन को उन्‍होंने नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। एक सच्ची ब्लॉकबस्टर मूवी।' ‘अवतार: फायर एंड ऐश’ पेंडोरा की दुन‍िया में अद्भुत सफर इसी तरह 'कोलाइडर' के पेरी नेमिरॉफ ने लिखा, 'मैं अभी भी इस बात से हैरान हूं कि ‘अवतार’ फिल्में कितनी जादुई हैं। काश मेरे पास और ओरिजिनल फ्रेजिंग होती, लेकिन ‘अवतार: फायर एंड ऐश’ सच में एक अद्भुत सफर जैसा लगता है। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं कितनी जल्दी पेंडोरा की दुनिया में वापस खींच लिया गया और सिचुएशन में बह गया।' 'कहानी में थोड़ी कमी हो सकती है, लेकिन…' फिल्म राइटर माइकल ली ने भी फिल्‍म देखी है। उन्‍होंने X पर लिखा, 'विज़ुअल्स के मामले में ‘अवतार: फायर एंड ऐश’ बहुत शानदार है, खासकर 3D में। पेंडोरा और नए कबीलों की गहरी खोज बेहतरीन है। कहानी में थोड़ी कमी हो सकती है, लेकिन यह टेक्निकल सीमाओं को आगे बढ़ाती है, कुछ ऐसी, जैसी कल्पना भी नहीं की जा सकती।' 'अवतार: फायर एंड ऐश' का प्‍लॉट और कास्‍ट जानकारी के लिए बता दें कि 'अवतार: फायर एंड ऐश' फ्रेंचाइजी की पिछली फिल्‍म 'अवतार: द वे ऑफ वॉटर' की घटनाओं के बाद की कहानी दिखाती है, जो खास तौर पर जेक सुली और नेतिरी के बेटे नेतेयम की मौत के साथ खत्म हुई थी। इस नई फिल्‍म में सुली परिवार जहां अपने एक सदस्य के जाने का दुख मनाता है, वहीं फायर कबीले के रूप में एक नया खतरा सामने आता है। ये नावी, ज्वालामुखी में रहने वालों का दुश्मन है। इसके लीडर का नाम वरंग (ऊना चैपलिन) है। फिल्‍म में पिछली फिल्‍मों से सैम वर्थिंगटन, ज़ो सलदाना, सिगॉरनी वीवर, स्टीफन लैंग और केट विंसलेट की वापसी हुई है। 'अवतार' और 'अवतार 2' ने की थी महाबंपर कमाई डायरेक्‍टर जेम्‍स कैमरून ने हाल ही एक इंटरव्यू में साफ-साफ कहा था कि 'अवतार' फ्रेंचाइजी का भविष्य इस 'फायर एंड ऐश' के बॉक्स ऑफिस परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है। डायरेक्टर ने शुरू में पांच 'अवतार' फिल्में बनाने की सोची थी। चौथी फिल्म का एक बड़ा हिस्सा पहले ही शूट कर लिया है। जहां तक कमाई की बात है तो ओरिजिनल 'अवतार' ने 2009 में दुनियाभर में 224,480 करोड़ रुपये से अध‍िक का ग्रॉस कलेक्‍शन किया था। जबकि 2022 में आई 'अवतार: द वे ऑफ वॉटर' ने ₹180,975 करोड़ का कारोबार किया।

मेयर-आयुक्त की जांच में खुली सड़क परियोजना की खामियां, दो जूनियर इंजीनियरों पर गिरी गाज

यमुनानगर यमुनानगर मेयर सुमन बहमनी और नगर निगम आयुक्त महाबीर प्रसाद ने वीरवार को वार्ड-8 में डीएवी डेंटल कॉलेज के पास चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य का औचक निरीक्षण किया। लगभग 12 लाख रुपये की लागत से लक्ष्मी टी स्टॉल से आरसी पाहुजा के घर तक सड़क चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान आयुक्त महाबीर प्रसाद ने इंटरलॉकिंग टाइलों को उखाड़कर गुणवत्ता की जांच की। जांच में पाया गया कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री उच्च गुणवत्ता की नहीं थी तथा कई जगहों पर बेहद कम सामग्री डाली गई थी। गुणवत्ता में कमी देखकर मेयर और आयुक्त ने वहां मौजूद नगर निगम के कनिष्ठ अभियंताओं से निगरानी को लेकर पूछताछ की। लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद आयुक्त ने दो कनिष्ठ अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने और संबंधित एजेंसी की पेमेंट रोकने  के निर्देश दिए। कार्यकारी अभियंता ने मौके से टाइलों के नमूने लेकर जांच प्रक्रिया शुरू की। आयुक्त ने निर्देश दिए कि संबंधित एजेंसी को दिए गए अन्य विकास कार्यों की भी गुणवत्ता जांच की जाए। मेयर सुमन बहमनी ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विकास कार्य चल रहे हैं। ऐसे में गुणवत्ता पर कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम प्रशासन हर वार्ड में किए जा रहे विकास कार्यों की जांच करेगा और जहां भी लापरवाही मिलेगी, वहां संबंधित अधिकारियों व एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम आयुक्त महाबीर प्रसाद ने कहा कि डीएवी डेंटल कॉलेज के पास सड़क चौड़ीकरण के निरीक्षण में स्पष्ट रूप से क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों में कमी पाई गई। ठेकेदार ने लापरवाही बरती और जेई अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे। इसलिए दोनों जेई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में चल रहे सभी विकास कार्यों का वे स्वयं निरीक्षण करेंगे। यदि कहीं भी कार्य में कोताही मिली तो संबंधित एजेंसी और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।