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11 दिसंबर 2025 का राशिफल: सभी राशियों के लिए कैसा रहेगा दिन, क्या मिलेगा लाभ?

मेष राशि: कल का दिन आपके लिए नए एनर्जी लेकर आएगा। कल आप पहले से भी ज्यादा कॉन्फिडेंस फील करने वाले हैं, जिसकी वजह से पूरा दिन सही जाने वाला है। ऑफिस में काम से जुड़े फैसले आपके फेवर में जाएंगे और आने वाले दिनों में आपको कई नए मौके भी मिलेंगे। किसी खास शख्स से मुलाकात होने के योग हैं, जो आने वाले समय में लाभ दे सकती है। परिवार में माहौल शांत रहेगा। कपल्स के लिए आज का दिन सही है। आपकी सेहत सही रहेगी। वृषभ राशि: कल आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और कहीं से आपका रुका हुआ पैसा वापस आ सकता है। परिवार में कोई गुड न्यूज मिल सकती है। कामकाजी लोगों को ऑफिस में बॉस से तारीफ मिल सकती है, जिससे आगे चलकर अच्छे मौके मिल सकते हैं। रिलेशनशिप में समझ बढ़ने के संकेत है। आपका पार्टनर आपको सपोर्ट करेगा। आपकी जिंदगी में सकारात्मकता बढ़ेगी। सेहत आपकी सही रहने वाली है। मिथुन राशि: कल का दिन आपके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। आप अपनी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देख सकते हैं। किसी भी तरह के फैसले लेने में कोई भी जल्दबाजी ना करें। काम का प्रेशर आप पर बहुत रहेगा। हालांकि शाम तक सब कुछ फिर से ट्रैक पर आ जाएगा। लव लाइफ में सुधार आएगा। कल किसी खास शख्स से आपकी बात हो सकती है। आने वाले समय में आप कहीं पर ट्रैवल भी कर सकते हैं। कर्क राशि: घर में खुशियों का माहौल होगा। सभी के साथ अच्छा समय बीतेगा। प्रोफेशनल लाइफ में आपको सफलता मिलने वाली है। आपके शांत स्वभाव और समझदारी की तारीफ की जाएगी। जो लोग सिंगल है उनका ध्यान किसी खास की ओर जा सकता है। बिजनेस से जुड़े लोगों को लाभ मिलने वाला है। सेहत में सुधार देखने को मिलने वाला है। सिंह राशि: कल का दिन आपके लिए शुभ है। कल आप चमकने वाले हैं। लोग आपकी सलाह को गंभीरता से सुनते हैं। प्रोफेशनल लाइफ में आपको नए मौके मिलेंगे। कोई प्रोजेक्ट सफल होने वाला है। रिश्ते के मामले में भी कल का दिन आपके लिए लकी है। कल धन लाभ के योग है। सेहत सही रहने वाली है। कन्या राशि: कल का दिन आपके लिए बिजी रहने वाला है। आपकी मेहनत अब जाकर रंग लाने वाली है। अगर आप अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में बैलेंस बनाकर रखेंगे तो लाभ मिलेगा। आज कोई बड़ा फैसला लेने से बचें। आज पार्टनर से संभलकर बात करें क्योंकि बहसबाजी हो सकती है। हालांकि आप के बीच सब कुछ सही हो जाएगा। आपको अपनी सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है। तुला राशि: कल का दिन आपके लिए पॉजिटिव आउटकम लेकर आएगा। रिश्तों में मिठास बढ़ेगी। आज किसी ऐसे शख्स का साथ मिल सकता है, जिसकी आपको जरूरत महसूस हो रही थी। ऑफिस में आज नए मौके मिल सकते हैं। आप अपनी क्रिएटिविटी से हर किसी को इम्प्रेस करने वाले हैं। पैसों के मामले में स्थिति सही रहेगी और लव लाइफ भी स्मूद होगी। धनु राशि: कल आप कहीं पर ट्रैवल कर सकते हैं और ये शुभ भी रहेगा। नया जगह आपको नया अनुभव देने वाला है। करियर में नए मौके मिलेंगे। कल आपको किसी एक्सपीरियंस इंसान से सलाह मिल सकती है, जो आपके फ्यूचर में बहुत काम आने वाली है। पार्टनर के साथ रिश्ता मजबूत होगा। सेहत भी सही रहने वाली है। मकर राशि: कल का दिन बहुत सही जाने वाला है। कल आप कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं, जिसका रास्ता सफलता की ओर ही जाता है। ऑफिस में आपकी वाहवाही होगी। परिवार में भी लोगों को सपोर्ट और प्यार मिलने वाला है। लव लाइफ भी सही जाएगी। पैसों की स्थिति बेहतर होगी। सेहत में सुधार आएगा। कुंभ राशि: आपकी क्रिएटिविटी कल सबको पसंद आएगी। सबको आपका आइडिया भी पसंद आने वाला है। आपको कल हर काम में सफलता मिलने वाली है। साथ ही आपको अपने दोस्तों का पूरा सपोर्ट मिलने वाला है। कल के दिन कोई पुराना विवाद खत्म हो सकता है। पैसों के मामले में कल का दिन सही जाने वाला है। वृश्चिक राशि: कल आपके सीक्रेट प्लान सफल होने वाले है। आपकी मेहनत रंग लाने वाली है। किसी पुरानी समस्या का हल मिलने वाला है। लवर्स के लिए अच्छा दिन रहेगा। करियर में नए मौके मिलेंगे। सेहत के मामले में आज का दिन सही रहेगा। मीन राशि: कल आप भावनात्मक रूप से मजबूत होंगे। शांति की ओर आपका रूझान बढ़ने वाला है। धन लाभ के पूरे-पूरे योग है। आपको पार्टनर का जबरदस्त सपोर्ट मिलने वाला है। काम में बहुत मन लगेगा और आप शांति से अपना काम कर पाएंगे। सेहत सही रहेगी।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का तीखा हमला: वोट चोरी तो कांग्रेस की पहचान बताया

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने 'वोट चोरी' के मुद्दे पर कांग्रेस को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सिर्फ अपने मुस्लिम वोट बैंक से मतलब है। वह आज भी मुस्लिम परस्त राजनीति कर रही है। यही वजह है कि वे एसआईआर और ईवीएम के विरोध में हैं। निशिकांत दुबे ने बुधवार को संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस को 'मूर्ख पार्टी' बताया। उन्होंने कहा, 'संसद में मैंने सुकुमार सेन के बारे में कहा था। 1953 में एक गवर्नर जनरल का एग्रीमेंट हुआ था। उस समय सूडान के मुख्य चुनाव आयुक्त बनाए जाते थे, उन्हें गवर्नर बोला गया। इस पर कांग्रेस के लोग मुझे कह रहे हैं कि 'गवर्नर और एंबेसडर' के बारे में फर्क नहीं पता है। यही कांग्रेस की मूर्खता की पराकाष्ठा है।" निशिकांत दुबे ने 'वोट चोरी' पर जवाब देते हुए कहा, "आरके त्रिवेदी और एस रमा देवी को गवर्नर बनाया। सोनिया गांधी को बचाने वाले एमएस गिल मंत्री बने। टीएन शेषन ने एक बयान में बोला था कि जब मैं कमेटी में जाता हूं तो 'स्टांप मुहर' बन जाता हूं।" उन्होंने 2010 में मुख्य सतर्कता अधिकारी रहे पीजे थॉमस का उल्लेख करते हुए कांग्रेस को घेरा। भाजपा सांसद ने कहा, 'पीजे थॉमस के ऊपर पामोलीन आयात घोटाले का आरोप था। उस आरोपी का सुषमा स्वराज ने काफी विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने उस नियुक्ति को खारिज किया था। उसी तरह से एक सीबीआई डायरेक्टर थे, जिन्होंने 2जी में कांग्रेस को लाभ पहुंचाया, एनएचआरसी का सदस्य नहीं बन पाए तो यूपीएससी का सदस्य बना दिया गया। भ्रष्टाचार के कारण ही यूपीएससी की मेंबरशिप से उन्हें हटना पड़ा।" भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, "कांग्रेस 'चोरों की सरदार' है, इसलिए कोई भी राहुल गांधी को गंभीरता से नहीं लेता।" जिन्ना से लेकर सलमान रुश्दी को लेकर कांग्रेस की नीति पर निशिकांत दुबे ने कहा, "कांग्रेस के खिलाफ पहले कोई बयान आता था, तो जवाहर लाल नेहरू सीधे जिन्ना को चिट्ठी लिखते थे। उसी तरह से, जब नेहरू कभी जिन्ना के खिलाफ बोलते थे, तो जिन्ना भी उन्हें वापस लिखकर भेजते थे कि ऐसा क्यों बोल रहे हैं?" एक लेखक का जिक्र करते हुए निशिकांत दुबे ने कहा, "नेहरू मेमोरियल से सोनिया गांधी ने सारी चिट्ठी चुराईं। इस बारे में लगातार नेहरू मेमोरियल ने लिखा है, लेकिन उन्होंने चिट्ठियां वापस नहीं की हैं।"

रिश्वत लेते ही भागी कार, देवास में अधिकारी रंगेहाथ गिरफ्तार; लोकायुक्त का दबंग ऑपरेशन

देवास अंचल के बागली तहसील के महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं बढ़ाने के नाम पर वहां के परियोजना अधिकारी ने 2 महीने की सैलरी मांगी। दो किस्तों में 9-9 हजार रुपये देने की बात तय हुई। इसी बीच कंप्यूटर ऑपरेटर प्रितेश तंवर ने लोकायुक्त उज्जैन में शिकायत कर दी। लोकायुक्त टीम ने धर दबोचा कुछ दिन पहले उसने 4000 रुपये दे दिए थे और बाकी के 5000 देने की बात तय हुई थी। बुधवार को देवास में कलेक्टर कार्यालय में मीटिंग में आए परियोजना अधिकारी रामप्रवेश तिवारी ने उज्जैन रोड पर जैसे ही 5000 की राशि ली, वैसे ही पहले से तैयार लोकायुक्त टीम सक्रिय हो गई। पकड़े जाने की शंका देखकर परियोजना अधिकारी ने अपनी कार भगाई, लेकिन कुछ दूर पीछा करने के बाद टीम ने दबोच लिया।   परियोजना अधिकारी पर केस दर्ज इसके बाद कार्रवाई के लिए परियोजना अधिकारी को पकड़कर टीम मीठा तालाब के समीप स्थित रेस्ट हाउस पहुंची। यहां कागजी कार्रवाई पूरी की गई। लोकायुक्त डीएसपी दिनेश पटेल ने बताया मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जा रहा है।

एशिया में तनाव चरम पर: रूस-चीन की संयुक्त उड़ानें, जापान ने दिखाई अमेरिकी समर्थन की ढाल

टोक्यो/बीजिंग जापान और चीन के बीच तल्खी 7 नवंबर से सुर्खियां बटोर रही है। जमीन पर बिगड़े संबंध अब आसमान तक पहुंच गए हैं। हाल ही में जापान ने चीन पर अपने एयरक्राफ्ट को लॉक करने का आरोप लगाया। बीजिंग ने इससे साफ इनकार भी किया। अब खबर है कि रूसी बॉम्बर चीनी एयर पेट्रोलिंग का हिस्सा बन गए हैं तो वहीं अमेरिका ने भी जापान के कदम को सही करार दिया है। जापानी रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार देर रात कहा कि जापान ने देश भर में जॉइंट पेट्रोलिंग कर रही रूसी और चीनी एयर फोर्स पर नजर रखने के लिए जेट भेजे हैं। दो रूसी टीयू-95 न्यूक्लियर-कैपेबल स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स ने जापान सागर से पूर्वी चीन सागर की ओर उड़ान भरी ताकि दो चीनी एच-6 बॉम्बर्स से मिल सकें और एक "लंबी दूरी की जॉइंट फ्लाइट" कर सकें। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने बुधवार को एक्स पोस्ट में कहा कि रूस और चीन का संयुक्त अभ्यास “साफ तौर पर हमारे देश के खिलाफ ताकत दिखाने के इरादे से किया गया था, जो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता की बात है।” वहीं पहली बार अमेरिका ने भी जापानी फाइटर जेट्स पर चीनी सेना के रडार इस्तेमाल की आलोचना की। जापानी मीडिया हाउस ने इसकी पुष्टि की है। उसके मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बुधवार को ईमेल के जरिए 'द जापान टाइम्स' को बताया, "चीन की हरकतें इलाके की शांति और स्थिरता के लिए सही नहीं हैं।" "अमेरिका-जापान अलायंस पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और एकजुट है। हम अपने साथी जापान के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हैं, और हम इस और दूसरे मुद्दों पर करीबी संपर्क में हैं।" जापान के चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी मिनोरू किहारा ने टिप्पणियों का स्वागत करते हुए कहा कि ये "यूएस-जापान के मजबूत गठबंधन को दिखाते हैं"। चीनी विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। शनिवार की घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की यह आलोचना पहली टिप्पणी थी। 6 दिसंबर को लियाओनिंग एयरक्राफ्ट कैरियर से भेजे गए चीनी फाइटर जेट्स ने एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के जेट्स को दो बार रडार लॉक किया था; टोक्यो ने इस हरकत को "खतरनाक" बताया था। रडार की यह घटना ऐसे समय में हुई जब टोक्यो और बीजिंग प्रधानमंत्री साने ताकाइची के 7 नवंबर के बयान के बाद दोनों देश आपस में उलझे हुए हैं। ताकाइची ने डाइट में कहा था कि सेल्फ-डिफेंस फोर्स को कुछ “सबसे विपरीत स्थितियों” में तैनात किया जा सकता है, जैसे कि ताइवान पर चीनी नौसेना की नाकाबंदी, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह जापान के “अस्तित्व के लिए खतरे” वाली स्थिति होगी।

इस्लामाबाद में PTI प्रदर्शन बेकाबू, पुलिस ने इमरान खान की बहन पर चलाया वाटर कैनन; पार्टी ने कहा— लोकतंत्र का गला घोंटा गया

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की सियासत गरमाई हुई है। इन दिनों पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का गतिरोध देखने को मिल रहा है। पीटीआई के चीफ इमरान खान को लेकर बीते कुछ दिनों से अलग-अलग खबरें सामने आ रही हैं। दरअसल, पाकिस्तान सरकार ने इमरान खान से मुलाकात पर बैन जारी रखने का ऐलान किया। इस पर पीटीआई चीफ की बहन आलीमा खान भारी संख्या में समर्थकों के साथ विरोध प्रदर्शन करने पहुंच गईं। जेल के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहीं आलीमा खान और अन्य प्रदर्शनकारियों पर ठंड की रात में पानी की बौछार कर दी गई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पाकिस्तानी मीडिया डॉन ने पीटीआई की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा बयान के हवाले से बताया कि पार्टी ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने इमरान खान की बहन और पीटीआई कार्यकर्ताओं की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अदियाला जेल के बाहर वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, जबकि कोर्ट ने इमरान खान से मिलने की इजाजत दी थी। इसमें कहा गया, "शांतिपूर्ण धरने पर यह बेरहमी से की गई कार्रवाई बुनियादी मानवाधिकारों और ठंड के मौसम में इकट्ठा होने की आजादी का उल्लंघन है।" इसके अलावा, पार्टी ने एक्स पर एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें लोगों को मौके से भागते और वॉटर कैनन का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया। पीटीआई ने कहा, "पंजाब पुलिस की फासीवादी हरकतें एक बार फिर शुरू हो गई हैं। बहुत ज्यादा ठंड में अदियाला जेल के बाहर शांतिपूर्वक धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं पर वॉटर कैनन से हमला किया गया। ये कायरतापूर्ण हरकतें न तो हमारी आवाज दबा पाएंगी और न ही हमारा हौसला कम कर पाएंगी।" एक और पोस्ट में, इमरान खान की पार्टी ने कहा, "उनके परिवार को उनसे मिलने की इजाजत नहीं मिलने की वजह से धरना दिया गया। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना न सिर्फ इमरान खान के कैदी अधिकारों का बेशर्मी से उल्लंघन है, बल्कि सरकार के अत्याचारों का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर भी सीधा हमला है।" पीटीआई ने अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान की बहन अलीमा खान और पीटीआई के सदस्यों ने मंगलवार को रावलपिंडी की अदियाला जेल के बाहर धरना देना शुरू कर दिया। अलीमा खान ने बताया कि इमरान खान को पिछले 14 महीनों से अपने पर्सनल डॉक्टर से मिलने की इजाजत नहीं दी गई है।

रियल एस्टेट को राहत! हरियाणा में हाईराइज बिल्डिंग के नियम बदले, डेवलपर्स को बड़ी सहूलियत

चंडीगढ़ हरियाणा में मकान बनाने से लेकर ऊंची कमर्शियल बिल्डिंग खड़ी करने तक की प्रक्रिया अब पहले जैसी थकाऊ नहीं रहेगी। हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 में किए गए बड़े बदलावों के बाद अब घर, दुकान, होटल, मॉल और फैक्टरी बनाने वालों को न तो महीनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे और न ही निरीक्षण की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। सरकार ने अब पूरे सिस्टम को आसान करते हुए दो श्रेणियों में बांटा है – कम जोखिम और उच्च जोखिम वाली बिल्डिंग। कम जोखिम वाले घरों और दुकानों का आक्युपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) अब आर्किटेक्ट खुद जारी कर सकेगा, जबकि बड़े प्रोजेक्ट का प्रमाणन थर्ड पार्टी तकनीकी विशेषज्ञ देंगे। इसके साथ ही, एफएआर बढ़ाया गया है। सुरक्षा नियम अपडेट हुए हैं और पहली बार गरीब वर्ग के मकानों में बाथरूम और टॉयलेट का न्यूनतम आकार तय कर दिया गया है।   यहां बता देंकि लंबे समय से आम नागरिक, डेवलपर्स और उद्योगपति शिकायत कर रहे थे कि कि बिल्डिंग परमिशन और ओसी लेने में महीनों लग जाते हैं। निरीक्षण प्रक्रिया धीमी और अपारदर्शी है। नियम अस्पष्ट हैं और हर अधिकारी अलग व्याख्या करता है। छोटे उद्योग और मकान निर्माण के मामले में सिस्टम जरूरत से ज्यादा जटिल है। सरकार ने माना कि इस प्रक्रिया में सुधार जरूरी है और अब संशोधन लागू कर दिए गए हैं। अब कौन सी बिल्डिंग कैसे मंजूर होगी नई प्रणाली में अब बिल्डिंग्स को दो श्रेणियों में रखा गया है ताकि अनुमोदन प्रक्रिया सरल और तेज हो। पहली श्रेणी मंे कम जोखिम वाली बिल्डिंग्स में छोटे और बड़े प्लॉटों पर बने आम मकान (16.5 मीटर तक ऊंचाई), दुकानें – एचसीएफ, एससीओ व डीएसएस शामिल होंगे। वहीं वे उद्योग भी इसी कैटेगरी में रहेंगे, जिनकी बिल्डिंग की ऊंचाई 30 मीटर तक होगी। इन पर सरकार ने भरोसा दिखाया है। अब इनका प्रमाणन आर्किटेक्ट द्वारा सेल्फ सर्टिफिकेटेशन मोड में किया जाएगा। वहीं दूसरी दूसरी श्रेणी में उच्च जोखिम वाली बिल्डिंग शामिल रहेंगी। इनमें मल्टीप्लेक्स, ऊंची आवासीय इमारतें, डेटा सेंटर, बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स तथा होटल और रिसॉर्ट शामिल हैं। इनका प्रमाणन अब सरकारी अधिकारी नहीं बल्कि थर्ड पार्टी एम्पेनल्ड इंजीनियर/आर्किटेक्ट करेंगे। सरकार केवल मॉनिटर करेगी।   बाथरूम और टॉयलेट की जगह तय नायब सरकार ने पहली बार राज्य ने ईडब्ल्यूएस यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के घरों के लिए स्पष्ट नियम तय किए हैं। अब इन घरों में अलग टॉयलेट 0.90 वर्गमीटर से छोटा नहीं होगा। बाथरूम कम से कम 1.20 वर्गमीटर का होगा। यदि दोनों एक साथ हैं तो वह 1.80 वर्गमीटर से छोटा नहीं बनाया जा सकेगा अब और ऊंची और चौड़ी बिल्डिंगें संभव एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेसो में भी सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। इसी से तय होता है कि किसी जमीन के प्लॉट पर कितनी मंजिलें या कितना निर्माण किया जा सकता है। पहले एफएआर सीमित था और बढ़ाने की गुंजाइश कम रहती थी। अब संशोधनों के बाद उद्योगों को 150 प्रतिशत से अधिक एफएआर खरीदने की सुविधा मिलेगी। डेटा सेंटरों के लिए एफएआर 500 प्रतिशत तक उपलब्ध होगा। वहीं कमर्शियल और हॉस्पिटेलिटी सेक्टर के लिए एफएआर की सीमा बढ़ाई गई है। इससे उद्योगों, मॉल, होटल और डेटासेंटर जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण और निवेश की संभावना बढ़ेगी। होटल, रिसॉर्ट और बैंक्वेट हॉल्स को राहत हॉस्पिटेलिटी सेक्टर को बड़ा फायदा होगा। पहले निर्माण सीमित था और एफएआर कम मिलता था। अब नये नियम लागू होने से रिसॉर्ट, होटल और मोटल अधिक एफएआर खरीद सकेंगे। ऊंचाई और कवरेज सीमा में ढील दी गई है। यह बदलाव केवल प्रक्रिया आसान करने का नहीं बल्कि सुरक्षा को मजबूत करने का भी है। अब बड़ी इमारतों में फायर एनओसी अनिवार्य होगी। सोलर पैनल इंस्टॉल करने का प्रमाण-पत्र लेना जरूरी होगा। एनर्जी इफिशिएंसी स्टैंडर्ड अपनाने होंगे। गलत जानकारी छिपाने पर एक्शन सरकार ने साफ किया है अगर कोई गलत रिपोर्ट जमा करता है, नियम तोड़कर निर्माण करता है या जानबूझकर जानकारी छुपाता है तो ओसी को रद्द किया जाएगा। संबंधित इंजीनियर या आर्किटेक्ट पर कार्यवाही होगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पूरा सिस्टम अब ऑनलाइन होगा। कुछ भी-दबाकर नहीं रखा जा सकेगा। पहले कई लोगों की फाइलें महीनों दबाई जाती थीं। अब ऐसा संभव नहीं होगा क्योंकि अब हर बिल्डिंग आवेदन, स्वीकृति, ओसी और निरीक्षण रिपोर्ट ऑनलाइन ई-रजिस्टर में सार्वजनिक रूप से दिखेगी।  

प्राइमरी टीचर भर्ती में नया नियम: B.Ed. उम्मीदवारों को करना होगा 6 महीने का ट्रेनिंग कोर्स

लुधियाना स्टेट कॉसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एस.सी.ई.आर.टी.), पंजाब ने बी. एड. डिग्री के आधार पर नियुक्त प्राइमरी शिक्षकों की पेशेवर योग्यता पूरी करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। एस.सी.ई. आर. टी., पंजाब ने समूह जिला शिक्षा अफसरों (ए.शि.) को नैशनल इंस्टीच्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एन. आई. ओ.एस.) द्वारा करवाए जा रहे 6 महीने के' ब्रिज कोर्स' के लिए संबंधित शिक्षकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा है। यह कोर्स' प्राइमरी टीचर एजुकेशन' में 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स है, जिसे ओपन और डिस्टेंस लर्निंग (ओ.डी.एल.) मोड के माध्यम से पूरा करवाया जाएगा। एस. सी.ई.आर.टी. द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इन निर्देशों की हू-ब-हू पालना सुनिश्चित की जाए। उन्होने शिक्षकोंको हिदायत दी है कि वे अपने अन.आई.एस. के पोर्टल पर अपना पंजीकण समय रहते जरूर करवाए। एन.आई.ओ.एस. ने भी उम्मीदवारों को सलाहदी है कि वे आवेदन करने से पहले योग्यता मानदंडों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उनकी पालना करें। विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि य समय सीमा के भीतर सभी योग्य शिक्षकों का पंजीकरण सुनिश्चित करवाया जाए। रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 25 दिसंबर है।  कौन है इस कोर्स का पात्र? यह ब्रिज कोर्स विशेष रूप से उन प्राइमरी शिक्षकों के लिए अनिवार्य है जो बी.एड. डिग्री के साथ नियुक्त हुए थे। जिनकी नियुक्ति एनसीटीई की दिनांक 28 जून 2018 की नोटिफिकेशन के अनुसार हुई थी।  जो माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 11 अगस्त 2023 को दिए गए फैसले से पहले सेवा में आ चुके थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- जल जीवन मिशन का कार्य निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2028 के पहले मार्च-2027 में होगा पूर्ण

प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल मिलने से रोकने की बनायें कार्य-योजना एकल नल-जल योजना में 93 प्रतिशत कार्य पूर्ण योजनाओं के संचालन एवं संधारण की करें समुचित व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग की समीक्षा में दिये निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल किसी भी स्थिति में नहीं मिले और इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन मध्यप्रदेश इस कार्य को मार्च 2027 तक पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल पेश करेगा। उन्होंने कहा कि मिशन के संचालन-संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में जल आपूर्ति प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित किया जाए। विगत 10 वर्षों में जिन ग्रामों को जल संकट का सामना करना पड़ा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उन क्षेत्रों में जल प्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल की उपलब्धता के अनुसार जल वितरण का समय तय किया जाए, जिससे नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। मिशन के प्रभाव का विश्लेषण अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से कराए जाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गाँव के ऐसे ट्यूबवेल की सूची बनवाएं, जिनमें हमेशा पानी रहता हो और ट्यूबवेल मालिक सेवाभावी हों। जरूरत पड़ने पर इनके ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति कराने का प्रयास करें। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने जल जीवन मिशन के कार्यों के समुचित संचालन-संधारण के लिये प्रभावी योजना बनाने की बात कही। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्री नीरज मण्डलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी और प्रबंध संचालक जल निगम श्री के.वी.एस. चौधरी भी उपस्थित थे। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने बताया कि अब तक प्रदेश में 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं और मिशन की कुल प्रगति 72.54 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा किया गया है और वर्ष 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। बोरवेल दुर्घटना रोकने कानून बनाने वाला पहला राज्य बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश बोरवेल दुर्घटना रोकने के लिए कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य है। साथ ही “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में प्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान मिला है। वर्ष 2024-25 में 12,990 करोड़ रु. का व्यय कर 92.89 प्रतिशत वित्तीय लक्ष्य हासिल किया गया है। वर्ष 2025-26 में 6,016 करोड़ रु. का व्यय किया गया है, जो 30 सितंबर 2025 तक 35.11 प्रतिशत की प्रगति दर्शाता है। प्रदेश में 21,552 ग्राम “हर घर जल” घोषित किए जा चुके हैं तथा 15,026 ग्रामों को प्रमाणित किया जा चुका है। समूह नल जल योजनाओं के माध्यम से 3,890 ग्रामों में नियमित जल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है और एकल नल जल योजनाएँ 93 प्रतिशत प्रगति के साथ तेजी से पूर्णता की ओर अग्रसर हैं। विभाग द्वारा तकनीकी और डिजिटल मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। जल रेखा मोबाइल ऐप के माध्यम से योजनाओं की सतत निगरानी की जा रही है। राज्य की सभी 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हो चुकी है। ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से डिजिटल जल कर संग्रह व्यवस्था लागू की गई है। इंदौर में IoT (इंटरनेट ऑफ थिंक्स) आधारित जल आपूर्ति मॉडल सफलतापूर्वक लागू किया गया है और इसे अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जा रहा है। ऊर्जा प्रबंधन को देखते हुए 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना PPP मॉडल पर स्वीकृत की गई है, जिससे आने वाले 25 वर्षों तक सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अतिरिक्त 60 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना पर भी कार्ययोजना तैयार की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए जलदर्पण पोर्टल संचालित है तथा शिकायत निवारण हेतु कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं। अभी 64 ग्रामों में 24×7 जल आपूर्ति पायलट रूप में सफल रही है, जिसे आगे और विस्तृत किया जाएगा। बैठक में भविष्य के विजन पर जानकारी देते हुए बताया गया कि आगामी तीन वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित नल-जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल स्रोतों के संरक्षण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, डिजिटल प्रबंधन, तकनीकी क्षमता संवर्धन और ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नए ग्राम, बसाहट, विद्यालय, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य संस्थान और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों में पेयजल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश जल प्रदाय व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बन सके। महत्वपूर्ण बिन्दु     जल स्रोतों में सीवरेज का प्रदूषित जल मिलने से रोकने के लिये समुचित कार्य योजना बनाये।     जल जीवन मिशन के कार्य पूरा करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर 2028 तक का लक्ष्य दिया गया है।     प्रदेश में तय समय सीमा से पहले मार्च 2027 में ही जल जीवन मिशन के कार्यों को पूर्ण कर लिया जाएगा।     जल जीवन मिशन में किए गए कार्यों की अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा इंपैक्ट एनालिसिस कराएं।     प्रत्येक नागरिक को गुणवत्ता युक्त जल उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है ।     जल जीवन मिशन के तहत सरपंच, महिला समूह द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यो के लिए उन्हें राज्य स्तर, संभाग, जिला एवं ग्राम स्तर पर पुरस्कृत किया जाए।     जल जीवन मिशन के कार्यों के संचालन एवं संधारण की समुचित योजनाएं बनाएं ताकि किसी भी स्थिति में जल की नियमित आपूर्ति हो सके।     विगत 10 सालों में जिन गांवों में जल संकट रहा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उनमें … Read more

शासकीय स्कूलों की ई-अटेंडेंस नीति पर विवाद थमा, शिक्षकों ने याचिका क्यों लौटाई?

जबलपुर प्रदेश के शासकीय स्कूलों में ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को लेकर दायर की गई याचिका बुधवार को वापस ले ली गई। याचिकाकर्ता शिक्षकों की ओर से कोर्ट में निवेदन किया गया कि वे नए तथ्यों के साथ नई याचिका दायर करना चाहते हैं। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान करते हुए मामले का पटाक्षेप कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में जिस नियम को हवाला दिया जा रहा है, वह नई याचिका में ही दिया जा सकता है। पुरानी याचिका में जो आधार दिए गए थे, उन आधारों पर दूसरे मुकदमों के फैसले हो चुके है। दरअसल, प्रदेश सरकार के हमारे शिक्षक ई ऐप को चुनौती देते हुए प्रदेश के 27 शिक्षकों की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि हमारे शिक्षक ई-एप सुरक्षित नहीं है, इससे डेटा लीक होने और साइबर फ्राड की घटनाएं सामने आई हैं।   जबलपुर निवासी शिक्षक मुकेश सिंह बरकड़े सहित विभिन्न जिलों के 27 शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस के विरुद्ध हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हमारे शिक्षक ऐप से प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज कराने में गंभीर तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने दलील दी कि सरकार यह ऐप एक निजी संस्था से चलवा रही है और वही संस्था शिक्षकों का डेटा कलेक्ट कर रही है। केंद्र सरकार के निजी डेटा कलेक्शन नियम इस पर लागू होते हैं, पर ऐप में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। शिक्षकों ने कोर्ट को यह भी बताया था कि प्रदेश में पांच-छह शिक्षकों के खातों से रुपए निकाल लिए गए और उनकी निजी जानकारी लीक हुई। कई जिलों के शिक्षा अधिकारियों ने इसकी शिकायत करते हुए पत्र भी लिखे। डीपीआई ने इन शिकायतों को स्वीकार करते हुए माना कि कुछ शिक्षकों के साथ फ्रॉड की घटनाएं हुई हैं और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा था कि ई-अटेंडेंस सिस्टम पहले भी सही साबित किया गया है। सरकार का कहना है कि ऐप के लिए डेटा सेफ्टी सर्टिफिकेट लिया गया है और न तो सर्वर की समस्या है, न नेटवर्क की।

1952 में नेहरू ने कराया था देश का पहला SIR, अमित शाह का बड़ा बयान

नई दिल्ली  लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सदन में इस चर्चा के लिए न बोलने का सबसे बड़ा कारण यह है कि वे (विपक्ष) विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर चर्चा मांग रहे थे। एसआईआर पर इस सदन में चर्चा नहीं हो सकती, क्योंकि एसआईआर की जिम्मेदारी भारत के चुनाव आयोग की है। भारत का चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त, ये सरकार के तहत काम नहीं करते हैं। अगर चर्चा होती, और कुछ सवाल किए जाते तो इसका जवाब कौन देगा? अमित शाह ने कहा कि सबसे पहला एसआईआर 1952 में हुआ। उस समय कांग्रेस पार्टी से देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे।  दूसरा एसआईआर 1957 में हुआ। उस समय भी कांग्रेस पार्टी से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। तीसरा एसआईआर 1961 में हुआ। उस समय भी कांग्रेस पार्टी से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। 1965-66 में एसआईआर हुआ, उस समय भी कांग्रेस से लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे। 1983-84 में एसआईआर हुआ, उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं। 1987-89 में एसआईआर हुआ, उस समय प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। 1992-95 में एसआईआर हुआ, उस समय प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव थे। 2002-03 में एसआईआर हुआ, उस समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। 2004 में एसआईआर समाप्त हुआ, उस समय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह थे। अमित शाह ने चुनाव आयोग की शक्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग का गठन, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, इन सभी चुनावों का संपूर्ण नियंत्रण चुनाव आयोग को दिया गया है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 में मतदाता की पात्रता, योग्यता, और मतदाता होने की शर्तें तय की गई हैं। सबसे पहली शर्त है, मतदाता भारत का नागरिक होना चाहिए, विदेशी नहीं होना चाहिए। ये (विपक्ष) कह रहे हैं कि चुनाव आयोग एसआईआर क्यों कर रहा है? अरे, उसका (चुनाव आयोग) दायित्व है, इसलिए करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के संविधान के अनुच्छेद 324 से चुनाव आयोग की रचना हुई। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। संविधान में चुनाव आयोग का गठन, उसकी शक्तियां, चुनावी प्रक्रिया, मतदाता की परिभाषा और मतदाता सूची को तैयार करने तथा उसे सुधारने का प्रावधान किया गया, और प्रावधान जब किया गया तब हमारी पार्टी बनी ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 327 के तहत, मतदाता सूची तैयार करने, परिसीमन करने और चुनाव कराने की जिम्मेदारियां, जिसमें संबंधित कानून की सिफारिश करने का अधिकार भी शामिल है, चुनाव आयोग को सौंपी गई हैं। गृह मंत्री ने कहा कि हाल ही में, एक कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चुनाव आयोग को एसआईआर कराने का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि, अनुच्छेद 327 की व्याख्या के अनुसार, चुनाव आयोग को इस उद्देश्य के लिए मतदाता सूची तैयार करने का पूरा अधिकार है।