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SBI ने घटाया लोन ब्याज, जानिए कैसे कम होगी आपकी EMI

 नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्‍याज में कटौती करने के बाद भारतीय स्‍टेट बैंक (SBI) ने एक बड़ा फैसला लिया है. भारतीय स्‍टेट बैंक ने होम लोन के ब्‍याज दरों में कटौती का ऐलान किया है. एसबीआई मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR), एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR), रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR), बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) और बेस रेट में कटौती करेगा.  यह बदलाव 15 दिसंबर, 2025 से प्रभावी माना जाएगा. अब इस कटौती के साथ आपके लोन ब्‍याज दर कम हो जाएंगे, जिससे आपके लोन की ईएमआई भी 0.25 फीसदी तक कम हो जाएगी. भारत के सबसे बड़े पब्लिक सेक्‍टर बैंक के इस फैसले से लाखों खुदरा और कॉर्पोरेट उधारकर्ताओं को लाभ मिलेगा.  गौरतलब है कि एसबीआई का यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से 25 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद आया है. आरबीआई ने ग्रोथ को बढ़ावा देते हुए लगातार चौथी बार रेपो रेट में कटौती की है. इस कटौती के साथ ही रेपो रेट घटकर 5.25 फीसदी हो चुका है. अभी कितना आपके लोन का ब्‍याज? अभी एसबीआई अपने कस्‍टमर्स से होम लोन पर कम से कम ब्‍याज  7.4% का ब्‍याज वसूलता है और पर्सनल लोन पर ब्‍याज 9 से 10 फीसदी वूसलता है. लेकिन अब इस फैसले के बाद होम लोन और पर्सनल लोन पर ब्‍याज कम हो जाएंगे. इससे कस्‍टमर्स की बड़ी सेविंग हो सकती है. MCLR रेट अब कितना हुआ?  अवधि मौजूदा MCLR (%) संशोधित एमसीएलआर (%) रातोंरात 7.90 7.85 एक महीना 7.90 7.85 तीन महीने 8.30 8.25 छह महीने 8.65 8.60 एक वर्ष 8.75 8.70 दो वर्ष 8.80 8.75 तीन वर्ष 8.85 8.80 लिंक्ड लोन के लिए EBLR और RLLR में कटौती एसबीआई ने अपने ईबीएलआर (EBLR) को 8.15% + क्रेडिट रिस्क प्रीमियम (सीआरपी) + बैंक स्प्रेड (बीएसपी) से घटाकर 7.90% + सीआरपी + बीएसपी कर दिया है, जो बेंचमार्क में 25 बेसिस पॉइंट की गिरावट है. आरएलएलआर (RLLR) 7.75% + सीआरपी से घटकर 7.50% + सीआरपी हो गया है. इन बाहरी बेंचमार्क लोन के उधारकर्ताओं को उनके रिस्‍क प्रोफाइल के आधार पर ईएमआई में कमी देखने को मिलेगी.  ईबीएलआर 8.15% + सीआरपी + बीएसपी 7.90% + सीआरपी + बीएसपी आरएलएलआर 7.75% + सीआरपी 7.50% + सीआरपी बीपीएलआर और बेस रेट अपडेट आखिरी में एसबीआई ने अपने बीपीएलआर को घटाकर 14.65% प्रति वर्ष और बेस रेट को 9.90% कर दिया, जो दोनों 15 दिसंबर से प्रभावी हैं. इन कदमों से क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे घर खरीदने और व्यावसायिक निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है.  कितनी बचेगी आपकी ईएमआई?  अगर आपने EBLR बेस पर 30 लाख रुपये तक का लोन 20 साल के टेन्‍योर पर लिया है और अभी ब्‍याज 8 फीसदी है तो आपकी ईएमआई ₹25,093 होगी. वहीं अब 25 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद यह ईएमआई घटकर ₹24,628 हो जाएगी. 

भोपाल में प्रदूषण मुक्त सफर की शुरुआत, 21 दिसंबर से दौड़ेगी मेट्रो ट्रेन, मोहन सरकार की बड़ी योजना

 भोपाल मध्य प्रदेश अब देश के उन 12 चुनिंदा राज्यों में शामिल हो रहा है, जहां एक से अधिक शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। इंदौर की तरह अब राजधानी भोपाल भी मेट्रो के नये दौर में प्रवेश करने को तैयार है। प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि भोपाल में मेट्रो का संचालन 21 दिसंबर से शुरू कर दिया जाएगा। इससे राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। राजधानी के यात्रियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण और लंबे समय से प्रतीक्षित सुविधा है, जिसका उद्देश्य शहर की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक के दबाव को कम कर यातायात निर्बाध बनाना है। इंदौर मेट्रो सबसे पहले चली प्रदेश में सबसे पहले इंदौर मेट्रो ट्रेन की शुरुआत 31 मई, 2025 को हुई। अभी इसका छह किलोमीटर (गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर स्टेशन 3 तक) के 'सुपर प्रॉयोरिटी कॉरिडोर' पर कमर्शियल रन किया जा रहा है, जो कि कुल 31.32 किमी के पहले चरण का हिस्सा है, जिसका धीरे-धीरे विस्तार हो रहा है। वहीं, भोपाल में 21 दिसंबर को कमर्शियल रन शुरू होगा। इसमें भोपाल एम्स से सुभाष नगर तक साढ़े सात किमी प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो दौड़ेगी। यह भोपाल के पहले चरण के 30 किमी का हिस्सा है। प्रदेश में इंदौर और भोपाल में कुल 60 किमी के काम को पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर 2028 तय किया गया है। प्रदूषण मुक्त सफर मेट्रो के शुरू होने से रोजाना हजारों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त यात्रा का विकल्प मिलेगा। हालांकि अभी यात्रियों की संख्या कम है, लेकिन आने वाले समय में मेट्रो की दूरी बढ़ने के साथ उपयोग बढ़ने की बात विशेषज्ञ बता रहे हैं। साथ ही शहर के प्रमुख इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे समय और ईंधन की बचत भी होगी। राज्य सरकार का कहना है कि मेट्रो परियोजना न केवल परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि भोपाल को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लक्ष्य को और सुदृढ़ करेगी। मेट्रो कॉरिडोर के आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। इसी तरह इंदौर में मेट्रो संचालन शुरू होने के बाद से शहरवासियों में आधुनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर उत्साह देखने को मिला है और अब भोपाल में भी इसी तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो ट्रेन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी। सुरक्षा के लिए ऑटोमैटिक डोर सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, यात्री सूचना प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीक इसमें शामिल हैं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा-कुशल प्रणाली अपनाई गई है। आने वाले महीनों में मेट्रो के अन्य चरणों पर भी तेजी से काम किया जाएगा, ताकि पूरे शहर को बेहतर नेटवर्क से जोड़ा जा सके। अभी इन 11 राज्यों में दौड़ती है मेट्रो दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, गुजरात, केरल, राजस्थान, हरियाणा शामिल है। अब भोपाल मेट्रो के व्यावसायिक संचालन की शुरुआत के साथ मध्य प्रदेश 12वां राज्य बन गया। देश के इन शहरों में चल रही मेट्रो     दिल्ली-एनसीआर: देश का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क     कोलकाता: भारत की पहली मेट्रो (1984 में शुरू)।     मुंबई: देश के बड़े मेट्रो नेटवर्क में से एक।     बेंगलुरु (नम्मा मेट्रो): दक्षिण भारत का प्रमुख नेटवर्क।     हैदराबाद: आधुनिक मेट्रो प्रणाली के लिए जाना जाता है।     चेन्नई: एक और बड़ा महानगर मेट्रो।     जयपुर: राजस्थान की राजधानी में मेट्रो।     कोच्चि (केरल): दक्षिण भारत का महत्वपूर्ण मेट्रो नेटवर्क।     लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी में मेट्रो।     नोएडा-ग्रेटर नोएडा: दिल्ली से सटा हुआ मेट्रो नेटवर्क।     अहमदाबाद: गुजरात का मेट्रो नेटवर्क।     नागपुर: अपनी डबल-डेकर मेट्रो के लिए प्रसिद्ध।     कानपुर: उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण मेट्रो।     पुणे: महाराष्ट्र का एक और मेट्रो शहर।     गुरुग्राम (रैपिड मेट्रो): दिल्ली मेट्रो से जुड़ा हुआ। यहां चल रहा काम  पटना, आगरा में भी मेट्रो या तो चल रही है या निर्माण के विभिन्न चरणों में है, जिससे भारत का मेट्रो नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है।  

मुख्यमंत्री इंदौर में देंगे मेट्रो को लेकर बड़ी सौगात, मेट्रोपॉलिटन एरिया और अंडरग्राउंड रूट पर होगी चर्चा

  इंदौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 14 दिसंबर को रेसीडेंसी कोठी में शहर में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य फोकस इंदौर मेट्रो ट्रेन के अंडरग्राउंड रूट पर रहेगा। इंदौर में यह बैठक सरकार के दो साल पूर्ण होने के बाद हो रही है। इस कारण माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इंदौर को सौगात दे सकते है। बैठक में इंदौर के मेट्रोपाॅलिटन सिटी एरिया की घोषणा हो सकती है। पहले इसका एरिया छह हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में था। बाद में इंदौर विकास प्राधिकरण ने इसका प्रस्ताव 9 हजार वर्गकिलोमीटर एरिया किया है और प्रस्ताव सरकार को भेजा था। इस एरिया में उज्जैन, देवास, महू व धार की पंचायतें, कुछ नगरीय निकाय शामिल होंगे। एरिया की सीमा का खुलासा बैठक के दौरान होगा। मुख्यमंत्री इस बात पर अंतिम फैसला ले सकते हैं कि मेट्रो के रूट में कोई बदलाव किया जाएगा या पुराना रूट ही बरकरार रहेगा। पिछले दिनों मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तय अंडरग्राउंड रुट पर आपत्ति ली थी और मेट्रो को बंगाली काॅलोनी से ही अंडरग्राउंड करने पर जोर दिया था।   मेट्रो के अलावा, बैठक में बीआरटीएस की बस रैलिंग हटाने में हो रही देरी को लेकर भी चर्चा होगी। नौ महीने से अधिक समय तक रैलिंग नहीं हटाए जाने पर हाईकोर्ट ने भी नाराजगी व्यक्त की है। बीआरटीएस पर बनने वाले नए ब्रिजों को लेकर भी फैसला हो सकता है। समीक्षा बैठक में सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर शहर में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा भी की जाएगी। शहर के मास्टर प्लान की 23 सड़कों पर काम शुरू हो चुका है, लेकिन कुछ सड़कों के मार्ग में अभी भी बाधक निर्माण नहीं हटाए गए हैं।   

FD या बचत खाते से लोन लिंक करने पर बैंक को मिलेगी ग्राहक की अनुमति, लोन लिमिट अब सुरक्षित

नई दिल्ली  बैंक और लोन ऐप (Banks and Loan apps) अब अपनी मर्जी से लोन की लिमिट को नहीं बढ़ा सकेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने स्पष्ट किया कि ग्राहक की लिखित मंजूरी के बाद ही लोन सीमा को बढ़ाया जा सकता है। बैंकों की लोन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आरबीआई ने नए दिशा-निर्देश (RBI New Rules) जारी किए हैं। रिजर्व बैंक ने डेटा संरक्षण को लेकर साफ किया है कि बिना ग्राहक की मंजूरी के उसका डाटा थर्ड पार्टी से साझा नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि बैंकों द्वारा अपनी मर्जी से लोन सीमा बढ़ाए जाने को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। छोटी धनराशि वाले कर्ज को लेकर शिकायतें सबसे अधिक थीं। उदाहरण के लिए अगर किसी ग्राहक ने 20 हजार का लोन मंजूर कराया और तय किस्तों पर ग्राहक द्वारा लोन चुकाया जा रहा है तो कुछ बैंक और लोन ऐप आखिरी किस्त आने से पहले बिना स्वीकृति ग्राहक के खाते में 10 हजार रुपये का लोन जारी कर देते हैं। बैंक इसके पीछे अच्छी साख का तर्क देते हैं। ग्राहक इसे लौटाना चाहे तो बैंक आनाकानी करते हैं और ग्राहक पर जुर्माना लगाया जाता है। कर्ज लेने वाले ग्राहकों की एफडी या बचत ब्लॉक न करें आरबीआई के नए नियमों के तहत बैंक कर्ज को किसी सावधि जमा यानी एफडी, बचत खाते या सुरक्षा योजना से लिंक नहीं कर सकते। बैंकों को लेकर शिकायत थी कि छोटे ऋण जारी करते वक्त गारंटी के तौर पर ग्राहक की एफडी, खाते या अन्य सुरक्षा योजना को लिंक किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में जब तक ऋण पूरा अदा नहीं होता है या कोई किस्त जमा नहीं जाती है तो बैंक ग्राहक को एफडी तोड़ने की इजाजत नहीं देते। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि घर के खर्च और आय का आकलन बैंकों के लिए करना जरूरी है, लेकिन ऋण के बदले एफडी, खाते या किसी अन्य सुरक्षा को लिंक नहीं किया जा सकता। जरूरत का डेटा ही ले सकेंगे बैंक : कर्ज सेवा प्रदाता कंपनियों के लिए नए सख्त नियम जारी किए गए हैं। नियमों में डेटा कलेक्शन से लेकर उसकी स्टोरेज, थर्ड-पार्टी शेयरिंग और सभी डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की रिपोर्टिंग तक के प्रावधान शामिल हैं। मोबाइल की फाइल, फोटो, कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग आदि किसी भी संवेदनशील डेटा तक पहुंच नहीं होगी। कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन जैसी सुविधाओं का केवल एक बार उपयोग केवाईसी के लिए ही किया जा सकेगा।  जरूरत का डेटा ही ले सकेंगे बैंक कर्ज सेवा प्रदाता कंपनियों के लिए नए सख्त नियम जारी किए गए हैं। नियमों में डेटा कलेक्शन से लेकर उसकी स्टोरेज, थर्ड-पार्टी शेयरिंग और सभी डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की रिपोर्टिंग तक के प्रावधान शामिल हैं। अब बैंक और उनके पार्टनर केवल जरूरत के आधार पर ही ग्राहक का डेटा लें सकेंगे, जिसके लिए ग्राहकों की स्पष्ट सहमति लेनी अनिवार्य होगी। ग्राहक के मोबाइल की फाइल, फोटो, कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग आदि किसी भी संवेदनशील डेटा तक पहुंच नहीं होगी। कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन जैसी सुविधाओं का केवल एक बार उपयोग केवाईसी के लिए ही किया जा सकेगा। ग्राहकों को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी डेटा शेयरिंग को रोक सकें और पहले दी गई सहमति को वापस ले सकेंगे। ग्राहक बैंक/एलएसपी से अपना डेटा डिलीट करवाने की मांग कर सकें। किसी भी थर्ड-पार्टी के साथ ग्राहक की जानकारी साझा करने से पहले ग्राहक की स्पष्ट सहमति जरूरी होगी। ग्राहकों के हित में अनिवार्य नियम – बैंकों को दस्तावेज सत्यापित ई-मेल व एसएमएस पर देने होंगे। – धनराशि ऐप या एजेंट नहीं सीधे ग्राहक के खाते में जाएगी। – समय से पहले बिना जुर्माने कर्ज चुकाने का अवसर देना होगा। – रिकवरी एजेंट की जानकारी ग्राहक को पहले से भेजनी होगी। – कोई तीसरी पार्टी पैसे के लेनदेन को नियंत्रित नहीं कर सकती। ग्राहकों के हित में अनिवार्य नियम – बैंकों को दस्तावेज सत्यापित ई-मेल व एसएमएस पर देने होंगे। – धनराशि ऐप या एजेंट नहीं सीधे ग्राहक के खाते में जाएगी। – समय से पहले बिना जुर्माने कर्ज चुकाने का अवसर देना होगा। – रिकवरी एजेंट की जानकारी ग्राहक को पहले से भेजनी होगी। – कोई तीसरी पार्टी पैसे के लेनदेन को नियंत्रित नहीं कर सकती।

महिला अपराधियों की संख्या में वृद्धि, जानिए दुनिया भर के जेलों में कितनी महिलाएं बंद हैं

 नई दिल्ली  पुरुषों की तुलना में कम संख्या में महिलाओं को जेल भेजा जाता है. इसके बावजूद दुनियाभर के जेलों में महिला कैदियों की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में जानते हैं कि मौजूदा समय में दुनिया भर के जेलों में बंद महिला कैदियों की कुल संख्या कितनी है और इस मामले में सबसे आगे कौन सा देश है. साथ ही ऐसा होने के पीछे क्या वजहें हैं, इसे जानने की कोशिश करेंगे.  गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में महिला कैदियोंकी संख्या बढ़ रही है.  महिलाओं को  ज्यादातर मामलों में गैर-हिंसक अपराधों के लिए जेल भेजा जाता है. महिलाओं द्वारा किए गए अपराध अक्सर गरीबी से  जुड़े होते हैं. महिलाएं अक्सर अपने परिवार और बच्चों का भरण-पोषण और जीवित रहने के लिए गैर हिंसक अपराधों में संलग्न हो जाती हैं. इनमें तस्करी से लेकर देह व्यापार तक शामिल होता है.  विश्वभर में कितनी महिलाएं जेल में बंद हैं? अपराध और न्याय नीति अनुसंधान संस्थान (Institute for Crime and Justice Policy Research)के अनुसार, विश्व स्तर पर 733,000 से अधिक महिलाएं और लड़कियां जेलों में बंद हैं. इनमें से कईयों या तो मुकदमे से पहले हिरासत में लिया गया है, कई विचाराधीन कैदी हैं, कुछ दोषी ठहराई गई हैं और कईयों को सजा सुनाया जा चुका है.  माना जाता है कि जेलों में बंद महिलाओं की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि पांच देशों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं और चीन के आंकड़े अपुष्ट हैं.राष्ट्रीय जेलों में बंद कैदियों की कुल संख्या में महिलाएं हमेशा अल्पसंख्यक रही हैं.   जेल में तेजी से बढ़ रही है महिलाओं की संख्या जेलों में बंद महिला और पुरुषों की संख्या में  महिलाओं का औसत केवल 2-9% रहा है. यह आंकड़ा 2024 में वैश्विक रूप से बढ़ा. क्योंकि पिछले साल जेल में बंद लोगों में महिलाओं और लड़कियों की हिस्सेदारी मात्र 6.8% पहुंच गई है. जेल जाने के मामले में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक तेजी से बढ़ रही है. वर्ष 2000 से लेकर अब तक, जेल में बंद महिलाओं और लड़कियों की संख्या में लगभग 60% की वृद्धि हुई है – जो पुरुषों की जेल आबादी में लगभग 22% की वृद्धि की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है. 2020 के अंत तक पिछले 10 वर्षों में विश्वस्तर पर जेल में बंद महिलाओं की संख्या में 100,000 से अधिक की वृद्धि हुई है. किन देशों में सबसे अधिक महिलाएं जेल में हैं? अगर देश की बात करें तोअमेरिका में महिला कैदियों की संख्या सबसे अधिक है, जो 174,607 है. इसके बाद चीन में 145,000 महिलाएं और लड़कियां जेल में बंद हैं. साथ ही मुकदमे से पहले की हिरासत और प्रशासनिक हिरासत (जब किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के हिरासत में रखा जाता है) में अज्ञात संख्या में महिलाएं और लड़कियां हैं. अमेरिका और चीन के बाद बाद ब्राजील में 50,441, रूस में 39,153, थाईलैंड में 33,057, भारत में 23,772, फिलीपींस में 17,121, तुर्की में 16,581, वियतनाम 15,152, मैक्सिको में 13,841 और इंडोनेशिया में 13,044 महिला कैदी हैं.  इंग्लैंड और वेल्स में 3,566 महिलाएं जेल में हैं – जो कुल कैदियों की संख्या का 4% है , लेकिन अनुमान है कि 2027 तक यह संख्या बढ़कर 4,200 हो जाएगी. यूरोप में 94,472 महिलाएं हिरासत में हैं , जबकि ऑस्ट्रेलिया में 3,473 महिलाएं जेल में हैं, जो कुल कैदियों की संख्या का लगभग 8% है. महिलाओं के जेल जाने के पीछे गरीबी है बड़ी वजह पेनल रिफॉर्म इंटरनेशनल, वीमेन बियॉन्ड वॉल्स और ग्लोबल कैंपेन टू डिक्रिमिनलाइज़ पॉवर्टी एंड स्टेटस द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि कानून जीवनयापन के लिए किए जाने वाले कुछ कृत्यों को अपराध मानते हैं और महिलाएं इससे असमान रूप से प्रभावित होती हैं.  कुछ देशों में, गर्भपात, व्यभिचार, यौन दुराचार और वेश्यावृत्ति को अपराध मानने वाले कानून  महिलाओं को ही प्रभावित करते हैं. इसके अलावा महिलाओं को  कारावास की सजा मिलने की एक वजह आर्थिक रूप से असमर्थता भी है. क्योंकि छोटे-मोटे अपराधों के लिए जुर्माना भरने या जमानत राशि का भुगतान करने में गरीबी की वजह से महिलाएं असमर्थ होती हैं. इस वजह से उन्हें जेल में डाल दिया जाता है.

नई रिसर्च में खुलासा: विटामिन B3 (Nicotinamide) से स्किन कैंसर का खतरा 14% तक घट सकता है

  नई दिल्ली कैंसर का नाम सुनते ही लोग खौफ में आ जाते हैं. इस बीमारी से होने वाले जान के खतरे के साथ ही लोगों को इसके इलाज में खर्च होने वाले पैसे का इंतजाम करने का भी स्ट्रेस होने लगता है. दरअसल, इसका इलाज बहुत महंगा होता है और उसमें लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं. यहां तक कि इसकी टेस्टिंग भी बहुत महंगी होती है.  ऐसे में अक्सर लोग सोचते हैं कि कैंसर से बचने के लिए महंगी दवाइयां, बड़े-बड़े इलाज या मुश्किल थेरेपी की जरूरत होती है. लेकिन अगर हम कहें कि स्किन कैंसर जैसे खतरनाक और दुनिया के सबसे आम कैंसर से बचाव एक सस्ती, रोज ली जाने वाली विटामिन की गोली से हो सकता है, तो? सुनने में हैरानी जरूर होती है, लेकिन एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी के बायोमेडिकल साइंसेज के प्रोफेसर, जस्टिन स्टेबिंग के अनुसार, एक नई रिसर्च ने यही साबित किया है. है ना चौंकाने वाली बात? चलिए जानते हैं कौन सा है ये विटामिन और कैसे ये स्किन कैंसर के खतरे को कम करता है.   कौस सा विटामिन करता है स्किन कैंसर से बचाव? Nicotinamide, यानी विटामिन B3 का बहुत ही साधारण और सस्ता रूप, स्किन कैंसर के खतरे को कम कर सकता है. खास बात ये है कि इसका फायदा उन लोगों में और भी ज्यादा है जिन्हें पहले से एक बार स्किन कैंसर हो चुका है. इस स्टडी ने स्किन कैंसर प्रिवेंशन को एक नया मोड़ दे दिया है और डॉक्टरों को अपने पुराने तरीकों पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है. कैसे काम करता है Nicotinamide? Nicotinamide विटामिन B3 का एक रूप है, जो शरीर की एनर्जी बनाने में मदद करता है और स्किन को रिपेयर करने की प्रोसेस को तेज करता है. ये UV किरणों से हुए डैमेज को ठीक करने में मददगार होता है और स्किन में होने वाली सूजन को कम करता है. इसके अलावा, ये इम्यून सिस्टम को इतना मजबूत बनाता है कि वो खराब सेल्स को जल्दी पहचान सके. इस तरह, ये विटामिन स्किन को कैंसर बनने से पहले ही लड़ने की ताकत देता है. क्यों बढ़ रहा है स्किन कैंसर? स्किन कैंसर दुनिया में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर है और हर साल इसके लाखों नए केस सामने आते हैं. खासकर बेसल सेल कार्सिनोमा और स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ये कैंसर ज्यादा धूप में रहने, गोरी स्किन, बढ़ती उम्र और UV किरणों के ज्यादा एक्सपोजर से जुड़ा होता है. सबसे चिंताजनक बात ये है कि जिन्हें एक बार स्किन कैंसर हो चुका हो, उनमें इसके दोबारा होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. कितने लोगों पर की गई रिसर्च? नई रिसर्च 33,000 से ज्यादा अमेरिकी वेटरंस पर की गई थी. इसमें 12,000 लोग Nicotinamide (500 mg, दिन में दो बार) ले रहे थे, जबकि 21,000 लोग कोई सप्लीमेंट नहीं ले रहे थे. इतने बड़े ग्रुप पर की गई स्टडी ने स्किन कैंसर प्रिवेंशन को लेकर बेहद अहम जानकारी सामने रखी. क्या मिला नतीजा? रिसर्च के नतीजे हैरान कर देने वाले थे. Nicotinamide लेने वाले लोगों में नया स्किन कैंसर होने का खतरा लगभग 14% कम पाया गया. यानी सिर्फ एक सस्ती विटामिन की नियमित खुराक स्किन कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है. ये भी सामने आया कि अगर ये सप्लीमेंट पहली बार स्किन कैंसर डाइजनोज होने के तुरंत बाद शुरू किया जाए, तो दूसरी बार ये कैंसर होने का खतरा 54% तक कम हो सकता है. यह फायदा खास तौर पर स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा में सबसे ज्यादा देखा गया. सबसे बड़ा फायदा कब मिलता है? स्टडी ने साफ दिखाया कि इसका प्रभाव तभी सबसे ज्यादा होता है जब Nicotinamide को सही समय पर यानी पहले कैंसर के तुरंत बाद शुरू किया जाए. इससे शरीर को कैंसर बनने से पहले ही उससे लड़ने की ताकत मिलती है. क्या ये सनस्क्रीन का ऑप्शन है?  Nicotinamide स्किन कैंसर रोकने का एक नया और असरदार तरीका जरूर है, लेकिन ये कभी भी सनस्क्रीन का ऑप्शन नहीं हो सकता. डॉक्टर साफ कहते हैं कि आपको अब भी धूप में कम समय बिताना चाहिए, रोज सनस्क्रीन लगानी चाहिए, टोपी और फुल-स्लीव कपड़े पहनने चाहिए और स्किन की नियमित चेकअप करानी चाहिए. Nicotinamide सिर्फ एक extra protection की तरह काम करता है, धूप से बचाव की बुनियादी आदतों को ये रिप्लेस नहीं करता. इतना खास क्यों है ये विटामिन? इस विटामिन की खासियत इसकी आसान उपलब्धता और सुरक्षा में है. ये बेहद सस्ता है, आसानी से मिल जाता है और रोजाना बिना किसी परेशानी के लिया जा सकता है. सबसे बड़ी बात, ये स्किन कैंसर के दोबारा होने के खतरे को कम करने में प्रभावी साबित हुआ है. कई महंगी दवाइयों और बीमारी के इलाज की तुलना में Nicotinamide एक आसान, सुरक्षित और किफायती ऑप्शन है.  कुछ बातें अभी भी पूरी तरह साफ नहीं हैं. ये स्टडी एक ऑब्जर्वेशनल रिसर्च थी, जिसका मतलब है कि इसे मेडिकल रिकॉर्ड्स के आधार पर किया गया था, न कि किसी कंट्रोल्ड ट्रायल की तरह जहां सभी परिस्थितियां तय होती हैं. इसी वजह से कुछ सीमाएं बनी रहती हैं. स्टडी में ज्यादातर गोरी स्किन वाले पुरुष शामिल थे, इसलिए अलग-अलग नस्लों, महिलाओं और युवा लोगों पर इसका असर कैसा होगा, यह अभी पता नहीं है. इसके अलावा, जिन लोगों को कभी स्किन कैंसर नहीं हुआ, उन पर Nicotinamide का क्या प्रभाव होगा, यह भी अभी क्लियर नहीं है.