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छत्तीसगढ़ की ऊर्जा यात्रा को मिला नया आयाम, सीएम विष्णु देव साय ने ‘ऊर्जावान छत्तीसगढ़’ पुस्तक का अनावरण किया

रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नवीन विधानसभा परिसर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में रजत महोत्सव विशेष छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल द्वारा प्रकाशित ‘ऊर्जावान छत्तीसगढ़’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। यह काफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना तथा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल एवं उसकी उत्तरवर्ती पावर कंपनियों की 25 वर्षों की गौरवमयी यात्रा, उपलब्धियों और विकास गाथा पर आधारित है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों, अधोसंरचना विकास, नवाचारों और जनसेवा आधारित कार्यों का सजीव दस्तावेज है। कॉफी टेबल बुक में छत्तीसगढ़ राज्य ने ऊर्जा क्षेत्र में सुदृढ़ नियोजन, आधुनिक तकनीक और उपभोक्ता-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ उल्लेखनीय उपलब्धियों को शामिल किया गया है और सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट की स्थापना से लेकर 32 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता, कोयला खनन के सुदृढ़ संचालन और राज्यव्यापी पारेषण- वितरण ढांचे के विस्तार तक बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधार को प्रदर्शित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल की टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के समर्पण, प्रतिबद्धता और योगदान की सराहना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एवं अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी श्री सुबोध कुमार सिंह, ऊर्जा सचिव एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन तथा डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी श्री रोहित यादव, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीम सिंह कंवर सहित वरिष्ठ अधिकारी श्री जे.एस. नेताम, श्री संजीव सिंह एवं श्री आशुतोष जायसवाल उपस्थित थे।

रिटायर्ड डीजीपी से मेयर तक का सफर! कौन हैं आर श्रीलेखा, जिन पर BJP ने जताया भरोसा

केरल  केरल के निकाय चुनाव में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इस बार तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) को करारी शिकस्त देते हुए नगर निगम की सत्ता हथिया ली है। एलडीएफ यहां पिछले चार दशकों से काबिज था। माना जा रहा है कि केरल की राजधानी में वाम मोर्चे को बड़ा झटका मिला है और यह केरल में परिवर्तन की शुरुआत है। इस चुनाव में केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी ने बड़ी जीत दर्ज की है। रिटायर्ड डीजीपी आर श्रीलेखा ने सस्थामंगलम डिवीजन में बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 64 साल की रिटायर्ड डीजीपी को बीजेपी मेयर भी बना सकती है। अगर ऐसा होता है तो वह तिरुवनंतपुरम में बीजेपी की पहली मेयर होंगी। बता दें कि इसी साल वह बीजेपी में शामिल हुई थीं। उन्होंने निकाय चुनाव में वॉर्ड सदस्य के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। मेयर बनाने को लोकर जब श्रीलेखा से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी का जो भी फैसला होगा, उन्हें स्वीकार होगा। उन्होने कहा, हमें पता चला है कि संस्थामंगलम वॉर्ड में आज तक किसी ने इतने ज्यादा अंतर से चुनाव नहीं जीता। मैं इस फैसले के लिए जनता को धन्यवाद देती हूं। उन्होंने कहा, मेरी उम्मीदवारी के ऐलान के बाद से ही एलडीएफ और कांग्रेस मेरी आलोचना कर रही थी। दोनों ने मेरे बारे में बुरा भला कहने में हदें पार कर दीं। मुझे खुशी है कि जनता ने उनको जवाब दे दिया है। बता दें कि शनिवार को निकाय चुनाव के परिणाम आए हैं। 101 सदस्यों वाले तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी सबसे बड़ी पर्टी बनकर उभरी है। बीजेपी ने 50 वॉर्ड में जीत हासिल की है। वहीं सीपीआईएम- की अगुआई वाले एलडीएफ को 29 सीटें ही मिली हैं। कांग्रेस की अगुआई वाले यूडीएफ को 19 सीटों पर जीत हासिल हुई है। कौन हैं आर श्रीलेखा? जनवरी 1987 में आर श्रीलेखा केरल की पहली महिला आईपीएस बनी थीं। तीन दशक के करियर में उन्होंने कई एजेंसियों और जिलों में अपनी सेवाएं दीं। वह सीबीआई, केरल क्राइम ब्रांच, विजिलेंस, फायर फोर्स और मोटर वीइकल डिपार्टमेंट में भी सेवाएं दे चुकी हैं। 2017 में उन्हें केरल की डीजीपी बनाया गया था। सीबीआई में कार्यकाल के दौरान उन्हें निकनेम 'रेड श्रीलेखा' दे दिया गयाथा। वह भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए बिना किसी डर के छापा डालती थीं। रिटायरमेंट के बाद वह राजनीति में ऐक्टिव होने लगीं। उन्होंने कई बार ऐक्टर दिलीप पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज किया। इसके अलावा कांग्रेस नेता राहुल मामकूटाथिल पर केस दर्ज करने में हुई देरी पर भी वह सवाल उठाती रहीं। अक्टूबर 2024 में वह औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गईं। अब चर्चा है कि बीजेपी उन्हें तिरुवनंतपुरम का मेयर बना सकती है।  

वंदे भारत ट्रेनों में परोसा जाएगा स्थानीय भोजन, रेलवे ने फर्जी टिकट बुकिंग रोकने के लिए सख्त नियम और ओटीपी प्रणाली लागू की

भोपाल   भारतीय रेलवे यात्रियों को बेहतर और यादगार सफर देने के लिए लगातार नई पहल कर रहा है. इसी कड़ी में अब वंदे भारत ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को उस क्षेत्र का स्थानीय भोजन चखने का मौका मिलेगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में अधिकारियों के साथ हुई एक समीक्षा बैठक में इस योजना की जानकारी दी. उनका कहना है कि इससे यात्रियों को न केवल आरामदायक यात्रा मिलेगी, बल्कि वे उस इलाके की संस्कृति और खानपान से भी जुड़ सकेंगे. वंदे भारत ट्रेनों में मिलेगा लोकल फूड रेल मंत्री ने बताया कि वंदे भारत ट्रेनों में स्थानीय भोजन की सुविधा शुरू की जाएगी. उदाहरण के तौर पर, यदि ट्रेन दक्षिण भारत से गुजर रही है तो यात्रियों को वहां के पारंपरिक व्यंजन मिलेंगे, वहीं उत्तर भारत के रूट पर स्थानीय स्वाद परोसा जाएगा. यह योजना पहले वंदे भारत ट्रेनों में लागू होगी और इसके सफल रहने पर इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा. फर्जी टिकट बुकिंग पर रेलवे की सख्ती रेलवे ने टिकट बुकिंग प्रणाली को पारदर्शी और आम यात्रियों के लिए आसान बनाने के लिए फर्जी टिकट बुकिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं. रेल मंत्री ने बताया कि फर्जी और संदिग्ध यूजर आईडी के कारण असली यात्रियों को तत्काल टिकट नहीं मिल पाता था. अब इस समस्या से निपटने के लिए कड़ा सिस्टम लागू किया गया है. 3.03 करोड़ फर्जी अकाउंट किए गए बंद रेलवे और आईआरसीटीसी ने अब तक 3.03 करोड़ फर्जी अकाउंट बंद कर दिए हैं. इसके अलावा 2.7 करोड़ यूजर आईडी को संदिग्ध गतिविधियों के चलते अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है. कड़े सत्यापन के बाद अब आईआरसीटीसी वेबसाइट पर प्रतिदिन करीब 5,000 नए यूजर अकाउंट ही बनाए जा रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या एक लाख तक पहुंच जाती थी. आधार आधारित OTP सिस्टम लागू फर्जी बुकिंग रोकने के लिए रेलवे ने आधार-आधारित ओटीपी सिस्टम लागू किया है. यह व्यवस्था अभी 322 ट्रेनों में शुरू हो चुकी है, जिससे तत्काल टिकट कन्फर्म होने की संभावना करीब 65% तक बढ़ गई है. इसके साथ ही आरक्षण काउंटरों पर भी यह सिस्टम 211 ट्रेनों में लागू किया जा चुका है. एंटी-बॉट तकनीक से मिले बेहतर परिणाम रेल मंत्री ने बताया कि Akamai जैसी एंटी-बॉट तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे फर्जी यूजर्स की पहचान आसानी से हो रही है. इससे असली यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान, सुरक्षित और स्मूथ बन गई है. रेलवे के इन कदमों से यात्रियों को अब बेहतर सुविधा और न्यायसंगत टिकट प्रणाली का लाभ मिल रहा है.

संघर्ष से सलाम तक: डाक विभाग की नौकरी छोड़ भारतीय सेना में अफसर बने उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट

देहरादून  सपनों का पीछा कैसे किया जाता है, यह कोई उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी स्पर्श सिंह देवड़ी से सीखे। शनिवार को आईएमए की पासिंग आउट परेड में जब स्पर्श अंतिम पग पार कर रहे थे, तो यह कदम सिर्फ एक कैडेट का अफसर बनना नहीं था, बल्कि एक 'डाक बाबू' का सेना में लेफ्टिनेंट बनने तक का अविश्वसनीय सफर था। भारतीय सेना को 491 युवा सैन्य अफसर मिल गए। आईएमए देहरादून से पासआउट इन अफसरों में देश की आन, बान और शान की रक्षा के लिए मर मिटने का जज्बा दिखा। पासिंग आउट परेड की सलामी सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ली। इस दौरान 14 मित्र देशों के 34 अफसर भी पासआउट हुए, जो अपने-अपने देश की सेनाओं में सेवाएं देंगे।   मूल रूप से अल्मोड़ा के नैनी गांव के रहने वाले स्पर्श सिंह देवड़ी की कहानी युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। स्पर्श अब सात-जाट रेजिमेंट में बतौर लेफ्टिनेंट अधिकारी देश की सेवा की शुरुआत करेंगे। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने करीब तीन साल तक अल्मोड़ा के जैंती गांव में शाखा डाकपाल के पद पर नौकरी की। दिन में वे ग्रामीणों की चिट्ठियां और डाक का काम संभालते थे। पिता की तरह सरहद की निगहबानी करेंगे रजत हल्द्वानी ब्लॉक कार्यालय के पास भगवानपुर निवासी रजत जोशी ने शनिवार को देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकैडमी (आईएमए) की पासिंग आउट परेड में हिस्सा लेकर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया। वह मूलरूप से बागेश्वर के कांडा कमश्यार के रहने वाले हैं। सीडीएस परीक्षा में सफलता के बाद रजत ने आईएमए में प्रशिक्षण पूरा किया। इससे पहले वह इंडियन कोस्ट गार्ड में छह माह असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में सेवा दे चुके हैं। उनके पिता सब-इंस्पेक्टर नवीन चंद्र जोशी वर्तमान में इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस में लद्दाख में सेवारत हैं। मां चंद्रा जोशी उनके जीवन की प्रेरणा स्रोत रही हैं। अफसर बेटे ने चौड़ा कर दिया शिक्षक पिता का सीना गरमपानी खैरना बाजार के पास सूरी फार्म निवासी अखिलेश सिंह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। उनके पिता भवर सिंह राजकीय इंटर कॉलेज शेर में प्रवक्ता व माता पिंकी सिंह गृहिणी हैं। परिवार में उनकी बहन और भाई भी हैं। अखिलेश की इस सफलता से गांव और क्षेत्र में खुशी की लहर है। परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी मनाई। अखिलेश सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों, भाई-बहन और मित्रों को दिया है।

ब्रेट ली का बड़ा बयान: ऑस्ट्रेलिया का यह बॉलिंग अटैक इतिहास में सबसे खतरनाक, 1586 विकेट झटक चुके

नई दिल्ली  एक समय ऐसा था जब ब्रेट ली, ग्लेन मैक्ग्रा, शेन वॉर्न और जेसन गिलेस्पी के बॉलिंग अटैक ने वर्ल्ड क्रिकेट पर राज किया था, बड़े-बड़े बल्लेबाजों के पैर इस बॉलिंग अटैक के सामने कांपने लगते थे। मगर अब ब्रेट ली ने खुद बताया है कि उनके इस बॉलिंग अटैक से भी खतरनाक बॉलिंग अटैक ऑस्ट्रेलिया को मिल गया है। वह है पैट कमिंस की अगुवाई वाली मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और नाथन लॉयन का बॉलिंग अटैक। ब्रेट ली ने ऑस्ट्रेलिया के इस मौजूदा बॉलिंग अटैक को अपने देश का अब तक का सबसे महान बताया है, और कहा है कि पैट कमिंस की टीम ने 2000 के दशक की शुरुआत की उनकी टीम को पीछे छोड़ दिया है।   पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क, नाथन लायन और जोश हेजलवुड ने अब तक कुल मिलाकर 389 टेस्ट खेले हैं, जिसमें 1,586 विकेट चटकाए हैं। इन चार में से तीन गेंदबाज 300 विकेट का मील का पत्थर पार कर चुके हैं, जबकि हेजलवुड 295 पर हैं और चोट से लौटने पर निस्संदेह इस क्लब में अपनी जगह बना लेंगे। कमिंस, स्टार्क, हेजलवुड और लायन ने एकसाथ मिलकर ऑस्ट्रेलिया के लिए अभी तक 35 टेस्ट खेले हैं, जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने 22 जीते हैं, नौ हारे हैं और चार ड्रॉ रहे हैं। एक साथ प्लेइंग XI में रहते हुए चारों ने मिलकर 567 विकेट लिए हैं, जो एक रिकॉर्ड है। वहीं 2000 के दशक में तबाही मचाने वाले ग्लेन मैकग्रा, शेन वॉर्न, जेसन गिलेस्पी और ली ने कुल 1842 विकेट चटकाए। चारों ने मिलकर 16 टेस्ट खेले जिसमें ऑस्ट्रेलिया 10 जीता था। लेकिन ब्रेट ली ने कहा कि उन्हें लगता है कि मौजूदा ग्रुप ने अब उनकी जगह ले ली है। ली ने AAP से कहा, "मुझे लगता है कि वे अब तक के सबसे अच्छे हैं। यह अलग-अलग दौर हैं, और तुलना करना मुश्किल है, लेकिन मैं उन्हें हमसे ऊपर रखूंगा। अगर आप सिर्फ स्टैट्स देखें, तो सभी ने 250 से ज़्यादा टेस्ट विकेट लिए हैं, और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। स्कॉट बोलैंड, अगर उन्हें इसमें शामिल किया जाए, तो वह माइकल कैस्परोविच जैसे हैं, उन्हें सच में मौका नहीं मिला लेकिन वह एक शानदार बॉलर हैं। ये लोग इतने अच्छे हैं कि ऑस्ट्रेलियाई जनता को तब तक पता नहीं चलेगा कि वे कितने अच्छे हैं, जब तक वे चले नहीं जाते।"  

घने कोहरे ने ली सड़क सुरक्षा की परीक्षा, हरियाणा में 4 बसें भिड़ीं, यात्रियों में अफरा-तफरी

चंडीगढ़  हरियाणा के रेवाड़ी जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 352डी पर सुबह एक बड़ी सड़क दुर्घटना होने की सूचना मिली है। भीषण कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम होने की वजह से चार बसों में आपस में टक्कर हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना तड़के सुबह हुई जब घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी बहुत कम हो गई थी। इस हादसे में तीन से चार बसें एक-दूसरे से टकरा गईं। ये बसें रेवाड़ी से झज्जर की ओर जा रही थीं।   सूत्रों के मुताबिक, इस टक्कर में कई यात्री घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में ले जाया गया है। हालांकि, घायलों की सही संख्या की पुष्टि होना बाकी है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। प्राथमिक आकलन से पता चलता है कि कम दृश्यता ही दुर्घटना का मुख्य कारण थी, हालांकि अधिकारियों ने कहा कि विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना की सही परिस्थितियों का पता चल पाएगा।  

मेसी के कार्यक्रम में हंगामा, हिमंत सरमा का बड़ा हमला— ममता बनर्जी को किया जाए गिरफ्तार

कोलकाता  फुटबॉल आइकॉन लियोनेल मेसी के कोलकाता कार्यक्रम के दौरान फैली अव्यवस्था ने पश्चिम बंगाल सीएम ममता बनर्जी को निशाना पर ला दिया है। भाजपा लगातार टीएमसी और सरकार पर निशाना साध रही है। इसी क्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने भी इस घटना के लिए बनर्जी पर हमला बोला है। उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था के पूरी तरह से ध्वस्त होने का आरोप लगाते हुए कहा कि टीएमसी नेताओं के वीआईपी कल्चर की वजह से एक अच्छा कार्यक्रम खराब हो गया।   लियोनेल मैसी के भारत दौरे के पहले दिन ही कोलकाता के मैदान में मची अफरा-तफरी का जिक्र करते हुए सरमा ने कहा कि जवाबदेही ऊपर से तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री, गृहमत्री और कोलकाता पुलिस आयुक्त को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।" इतना ही नहीं सरमा से जब पूछा गया कि क्या वह कार्यक्रम के आयोजक कि गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हैं? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वह न तो इसका विरोध कर रहे हैं और न ही इसका समर्थन कर रहे हैं। सरमा के मुताबिक इस घटना की पहली जिम्मेदारी राज्य के गृहमंत्री और पुलिस आयुक्त की बनती है। सरमा ने दूसरे राज्यों में हुए बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों की तुलना कोलकाता के आयोजन से करते हुए कहा कि भंगाव में भीड़ प्रबंधन की नाकामी साफ तौर पर सामने आई है। उन्होंने कहा, "गायक जुबिन गर्ग के निधन के बाद गुवाहाटी की सड़कों पर तीन दिनों तक करीब 10 लाख लोग मौजूद थे, लेकिन कोई हादसा नहीं हुआ। यहां पोस्ट मालोन का कार्यक्रम भी शांतिपूर्ण ढंग से हुआ, जिसमें करीब 50 हजार लोग शामिल हुए और कोई घटना नहीं हुई। मुंबई में विश्व कप फाइनल हुआ और सब कुछ शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। लेकिन पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य है, जहां कुछ भी अनुमानित नहीं होता। क्योंकि वहां वीआईपी कल्चर चरम पर है।” गौरतलब है कि भारत दौरे पर आए अर्जेंटीना के फुटबॉल आइकॉन लियोनेल मैसी का सबसे पहला कार्यक्रम कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में ही था। इस कार्यक्रम के लिए लोगों ने हजारों रुपए के टिकट खरीदे और अपने पसंदीदा फुटबॉल सितारे की एक झलक पाने के लिए खचाखच भरे स्टेडियम में पहुंचे। हालांकि, उनकी यह हसरत उस समय हताशा में बदल गई, जब मैसी केवल 15 मिनट बाद ही स्टेडियम से चले गए। इसके बाद गुस्साए प्रशंसकों ने पानी की बोतलें फेंकनी शुरू कर दी। उन्होंने आयोजकों पर आरोप लगाया कि पहले बताया गया था कि कार्यक्रम लगभग 45 मिनट का होगा, लेकिन मैसी 15 मिनट में ही चले गए और जितने भी समय वह ग्राउंड पर रहे, टीएमसी नेताओं और वीआईपी लोगों के परिवारों ने ही उन्हें घेरे रखा।  

न्यायपालिका में पारदर्शिता की जरूरत: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कॉलेजियम सुधार की वकालत की

नई दिल्ली  भारत के नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने 24 नवंबर से अपना 15 महीने का कार्यकाल शुरू किया है। उन्होंने कॉलेजियम प्रक्रिया को और खोलने तथा लंबित मामलों से निपटने के लिए अपने रोडमैप पर चर्चा की है। उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपने 14 वर्षों के कार्यकाल के दौरान ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए दिए गए कई आदेशों के बारे में बात की। इसके साथ ही उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली में सुधार की वकालत की। इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जब 2015 के आसपास यह मामला उन्हें सौंपा गया था, तब पंजाब में ड्रग्स का खतरा अत्यधिक अनियंत्रित स्तर पर था। उन्होंने इसे धैर्य की वास्तविक परीक्षा बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक आदेश से हल होने वाला मामला नहीं था। CJI को मास्टर ऑफ रोस्टर क्यों होना चाहिए? जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि CJI को मास्टर ऑफ रोस्टर कहा जाना सही है, लेकिन इस भूमिका को अक्सर गलत समझा जाता है। CJI सर्वोच्च न्यायालय का सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश होता है और यह वरिष्ठता न्यायिक भूमिका के साथ-साथ अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी लाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि मामले एकतरफा तरीके से सौंपे जाते हैं। व्यवहार में ये निर्णय अन्य न्यायाधीशों के साथ उनकी उपलब्धता, अनुभव के क्षेत्रों और न्यायालय के समग्र कामकाज को ध्यान में रखते हुए विचार-विमर्श के बाद लिए जाते हैं। न्यायिक स्वतंत्रता पर जस्टिस कांत ने पूर्ण सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारे देश में प्रभावी न्याय वितरण प्रणाली की आधारशिला है, और यह संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के साथ चलती है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी पूरी तरह से संविधान और उन लोगों के प्रति है जिनकी यह रक्षा करता है। सोशल मीडिया पर जजों की हो री आलोचना पर चीफ जस्टिस ने कहा कि सोशल मीडिया को नियंत्रित करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह स्वतंत्रता को बाधित करने वाला एक कठोर उपाय होगा। उन्होंने माना कि जब अदालत की कार्यवाही के संक्षिप्त अंश या 'स्निपेट्स' संदर्भ के बिना ऑनलाइन साझा किए जाते हैं, तो गलतफहमी लगभग अपरिहार्य होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आलोचना अक्सर अज्ञानता से उत्पन्न होती है और इसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि कर्तव्यों से ध्यान हटाकर सोशल मीडिया पर ध्यान केंद्रित करने से न्याय की गुणवत्ता प्रभावित होगी। कॉलेजियम प्रणाली में सुधार चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कॉलेजियम प्रणाली का बचाव किया लेकिन स्वीकार किया कि किसी भी प्रणाली में सुधार की गुंजाइश हमेशा होती है। उम्मीदवारों के साथ व्यक्तिगत बातचीत एक स्वागत योग्य कदम है, जो कॉलेजियम के सदस्यों को उम्मीदवार का सीधे आकलन करने में मदद करता है। उन्होंने योग्यता, सत्यनिष्ठा और अनुभव पर और भी अधिक जोर देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अब नियुक्तियों में अनुमोदन और अस्वीकृति के लिए कारण बताने का प्रयास किया जाता है, जो अधिक खुलेपन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्रक्रिया अंतर्निहित रूप से जटिल है और प्रणाली की अखंडता बनाए रखने के लिए कुछ आंतरिक प्रक्रियाओं को सार्वजनिक डोमेन में पूरी तरह से नहीं रखा जा सकता है।  

वंदे भारत ट्रेनों में मिलेगा स्थानीय खान-पान, सभी ट्रेनों में चरणबद्ध लागू होगा मॉडल

नई दिल्ली  फर्जी खातों पर कार्रवाई के परिणाम: 3.03 करोड़ फर्जी खातों को निष्क्रिय करने और 2.70 करोड़ से अधिक खातों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया या बंद करने के लिए चिह्नित किए जाने के बाद नई यूजर आईडी बनाने की संख्या पहले के एक लाख प्रतिदिन से घटकर 5000 तक आ गई है केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज रेल भवन में अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह बिट्टू भी उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को वंदे भारत ट्रेनों में संबंधित क्षेत्र के स्थानीय व्यंजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। स्थानीय व्यंजन शुरू करने से यात्रियों का अनुभव काफी बेहतर होगा क्योंकि इससे यात्रा के दौरान मिलने वाले भोजन में उस क्षेत्र की संस्कृति और स्वाद की झलक मिलेगी। यह सुविधा भविष्य में धीरे-धीरे सभी ट्रेनों में लागू की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि फर्जी पहचान के जरिए ट्रेन टिकट बुकिंग पर भारतीय रेलवे की कार्रवाई से सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। उपयोगकर्ता की पहचान स्थापित करने और फर्जी आईडी का पता लगाने के लिए एक सख्त प्रणाली लागू होने के बाद, आईआरसीटीसी  वेबसाइट पर प्रतिदिन लगभग 5,000 नई यूजर आईडी बनाई जा रही हैं। नवीनतम सुधारों से पहले, यह संख्या प्रतिदिन लगभग एक लाख नई यूजर आईडी तक पहुंच गई थी। इन प्रयासों से भारतीय रेलवे को 3.03 करोड़ फर्जी खातों को निष्क्रिय करने में मदद मिली है। इसके अलावा, 2.7 करोड़ यूजर आईडी को या तो अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है या उनकी संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर बंद करने के लिए चिह्नित किया गया है। केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि टिकट प्रणाली में इस स्तर तक सुधार किया जाए जहां सभी यात्री एक वास्तविक और प्रामाणिक यूजर आईडी के माध्यम से आसानी से टिकट बुक कर सकें।

कर्नाटक CM पद पर विवाद: ’99 प्रतिशत पक्का’ शिवकुमार के CM बनने की संभावना, सिद्धारमैया और शिवकुमार हाई कमान से मिलेंगे

बेंगलुरु   कर्नाटक की सियासी सरगर्मी अभी फिर से बढ़ने वाली है. राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच जारी घमासान दिल्ली में शांत कराया गया था. लेकिन, अब फिर से सियासी पारा गरम होने की संभावना बढ़ गया है. दरअसल, शनिवार को कांग्रेस MLA एच ए इकबाल हुसैन ने भविष्यवाणी की कि कर्नाटक के डिप्टी चीफ मिनिस्टर डीके शिवकुमार 6 या 9 जनवरी तक राज्य के चीफ मिनिस्टर बन जाएंगे क्योंकि इसी तारीख को CM सिद्धारमैया दिवंगत डी देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़कर कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक CM रहने वाले बन नेता बनेंगे. विधायक हुसैन शिवकुमार के पक्के सपोर्टर माने जाते हैं. उन्होंने एचटी से बात करते हुए बताया, ‘99% चांस है कि वह (शिवकुमार) ही CM बनेंगे. तारीख के बारे में, यह बस एक रैंडम नंबर है. हर कोई यही कह रहा है. यह 6 या 9 जनवरी हो सकती है. ये दो तारीखें हैं.’ रामनगर एमएलए ने कहा कि शिवकुमार को मौका देने के लिए सिद्धारमैया को सीएम पद छोड़ देना चाहिए. कांग्रेस के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में इन दोनों नेताओं की बैठक सोनिया गांधी, राहुल गांधी या फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी में से किसी एक से हो सकती है। पार्टी के करीबी सूत्र के मुताबिक इस बैठक के लिए समय बहुत कम है लेकिन अगर यह मुलाकात होती है, तो यह कर्नाटक के आगामी हालात के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी। कर्नाटक में कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एचटी से कहा, "सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। यदि वे हमारे किसी भी शीर्ष नेता से मिलना चाहते हैं, तो वह हमेशा ऐसा कर सकते हैं।" सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक के नेताओं की कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से यह मुलाकात नई दिल्ली के 'वोट चोर गद्दी छोड़' अभियान के तहत रामलीला मैदान में होने वाली रैली के बाद होगी। गौरतलब है कि कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से दोनों नेताओं की मुलाकात की खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब दोनों खेमों के बीच में पिछले कई दिनों से खींचतान मची हुई है। 2023 से सत्ता में आने के बाद से दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर तंज कसते रहे हैं। लेकिन 20 नवंबर को सरकार के ढाई साल पूरे होने पर इन हमलों की तीव्रता बढ़ गई। शिवकुमार समर्थकों का कहना है कि जीत के बाद सरकार के आधे पड़ाव पर सत्ता हस्तांतरण की बात हुई थी। हालांकि ऐसा नहीं हो सका। तारीख हो गई है तय तारीख की इंपॉर्टेंस के बारे में पूछे जाने पर हुसैन ने कहा, ‘मुझे नहीं पता. यह बस एक रैंडम नंबर है. हर कोई यही कह रहा है. यह 6 जनवरी या 9 जनवरी हो सकती है. ये दो तारीखें हैं.’ हुसैन खुले तौर पर मांग कर रहे हैं कि शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाए और उन्होंने एक दिन पहले भी अपनी इच्छा सबके सामने जाहिर की थी. शिवकुमार नहीं, परमेश्वर बनें सीएम, लोकिन… इस बीच, यूनियन मिनिस्टर ऑफ़ स्टेट फॉर रेलवेज़ और BJP MP वी सोमन्ना ने कहा कि वह मुख्यमंत्री पद के लिए कर्नाटक के होम मिनिस्टर जी परमेश्वर का सपोर्ट कर रहे हैं. तुमकुरु में एक प्रोग्राम में बात करते हुए सोमन्ना ने कहा, ‘पावर मिलना किस्मत की बात है. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि परमेश्वर सिर्फ होम मिनिस्टर ही रहेंगे. हमारी इच्छा है कि वे CM बनें. सिर्फ मेरी ही नहीं, बल्कि तुमकुरु के लोगों की भी इच्छा है कि वे CM बनें.’ जब डी के शिवकुमार के बारे में पूछा गया, जिन्हें भी एक मज़बूत दावेदार माना जा रहा है, तो सोमन्ना ने जवाब दिया, ‘छोड़ो यार, वह दूसरी बात है. शिवकुमार क्या बनना चाहते हैं, यह उनकी किस्मत पर निर्भर करता है. आचरण किस्मत से भी बड़ा है.’ क्या हो रहा है? कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार 14 दिसंबर को दिल्ली में कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी की चेयरपर्सन सोनिया गांधी से मिलने वाले हैं. सूत्रों ने शनिवार को बताया, एक बार फिर से राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान को लेकर बात होगी. मामले से जुड़े लोगों ने HT को बताया कि यह मीटिंग नई दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की मेगा रैली के बाद होगी. यह रैली पार्टी के ‘वोट चोर गड्डी छोड़’ कैंपेन के तहत ऑर्गनाइज़ की गई थी, जिसमें रूलिंग BJP और इलेक्शन कमीशन के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया गया था. लीडरशीप के लिए खींचतान 224 मेंबर वाली असेंबली में कांग्रेस के पास करीब 140 विधायक के साथ मैजोरिटी है. 20 नवंबर को कांग्रेस सरकार के पांच साल के टर्म का आधा हिस्सा पार करने के बाद से लीडरशिप की खींचतान तेज हो गई है, ऐसी खबरें हैं कि जेनरेशन ट्रांज़िशन के हिस्से के तौर पर चीफ मिनिस्टर का टर्म 2.5-2.5 साल के लिए बांटने के लिए एक पॉसिबल एग्रीमेंट हो सकता है. न तो पार्टी और न ही किसी लीडर ने ऑफिशियली ऐसे किसी अरेंजमेंट को कन्फर्म किया है, हालांकि शिवकुमार ने कुछ दिन पहले बिना डिटेल्स दिए एक ‘सीक्रेट डील’ का ज़िक्र किया था. अभी तक, 63 साल के शिवकुमार ने 77 साल के चीफ मिनिस्टर सिद्धारमैया के खिलाफ कोई ओपन कदम नहीं उठाया है.