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किसानों पर ‘सेम’ की दोहरी मार, राजस्थान की 2 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित

जयपुर राजस्थान में सूखे से ज्यादा सेम की समस्या खेती को बर्बाद कर रही है।  मिट्टी की लवणता यानी ‘सेम’ की समस्या राजस्थान में तेजी से गंभीर रूप ले रही है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी कि राज्य में करीब 1 लाख 96 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सेम से प्रभावित हो चुकी है। सबसे ज्यादा असर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में देखने को मिल रहा है, जहां हजारों हेक्टेयर उपजाऊ जमीन दलदली होकर खेती के लायक नहीं रह गई है। इससे किसानों की आजीविका पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने सांसद कुलदीप इंदोरा के एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) द्वारा वैज्ञानिक अध्ययन कराया गया है। इस अध्ययन में सामने आया कि राजस्थान में 1,95,571 हेक्टेयर भूमि मिट्टी के लवणीकरण से प्रभावित है, जिसे आम भाषा में सेम कहा जाता है। क्यूं बढ़ रही है सेम की समस्या अध्ययन के अनुसार सेम की मुख्य वजहें प्राकृतिक जल निकास में रुकावट, अत्यधिक सिंचाई और भूजल स्तर का बढ़ना हैं। इन कारणों से मिट्टी में मौजूद लवण ऊपर की सतह पर आ जाते हैं, जिससे धीरे-धीरे खेत बंजर हो जाते हैं और फसल उत्पादन प्रभावित होता है। केंद्र सरकार ने माना कि उत्तर राजस्थान के नहर सिंचित क्षेत्रों में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। ICAR की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में करीब 5,397 हेक्टेयर भूमि सेम से प्रभावित है, जिससे जलभराव, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और कृषि उत्पादकता में कमी आ रही है। ICAR ने सुझाए उपाय समस्या से निपटने के लिए ICAR ने अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों उपाय सुझाए हैं। अल्पकालिक उपायों में प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, सतही जल निकासी में सुधार, सिंचाई का बेहतर प्रबंधन, मिश्रित गुणवत्ता के पानी का उपयोग और नमक सहनशील फसलों को बढ़ावा देना शामिल है। वहीं दीर्घकालिक समाधान के तौर पर भूमिगत जल निकासी प्रणाली, गहरी जड़ों वाले वृक्षों के जरिए बायो-ड्रेनेज और नमक सहनशील पेड़ों के साथ कृषि वानिकी मॉडल अपनाने की सिफारिश की गई है। सरकार ने बताया कि इन तकनीकों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता अभियानों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना के तहत जारी किए जा रहे सॉयल हेल्थ कार्ड भी सेम प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को मिट्टी प्रबंधन में मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो राजस्थान में उपजाऊ कृषि भूमि का नुकसान और बढ़ सकता है।

त्रिपुरा पर्यटन विकास निगम का मध्यप्रदेश अध्ययन दौरा

ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे मॉडल और फिल्म टूरिज्म को विकसित करने प्राप्त किया मार्गदर्शन मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझा भोपाल मध्यप्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे पर्यटन ढांचे, बढ़ती पर्यटक संख्या और नवाचार आधारित पर्यटन विकास मॉडल देशभर में आकर्षण का केंद्र बन रहा है। इसी क्रम में त्रिपुरा अर्बन एंड टूरिज्म डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (TUTDP) के अंतर्गत त्रिपुरा टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TTDCL) का प्रतिनिधिमंडल आज मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड और पर्यटन भवन पहुंचा। निगम के प्रबंध संचालक डॉ. इलैया राजा टी. से त्रिपुरा टूरिज्म के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री प्रशांत बादल नेगी ने विस्तृत चर्चा की। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेड़ेकर ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और त्रिपुरा में पर्यटन के विकास हेतु हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि ज्ञान-साझाकरण आधारित ऐसे अध्ययन दौरों से राज्यों के बीच पर्यटन विकास की नई संभावनाएँ और साझेदारी मजबूत होती है। त्रिपुरा टूरिज्म के प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश के पर्यटन मॉडल का विस्तृत अध्ययन किया। प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश की ग्रामीण पर्यटन मॉडल, होमस्टे नीति, फिल्म टूरिज्म पॉलिसी, तथा सेफ एंड सस्टेनेबल टूरिज्म जैसे नवाचारों में विशेष रुचि दिखाई और त्रिपुरा में विकसित करने के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया। श्री नेगी ने बताया कि जिस प्रकार मध्य प्रदेश में महाकाल लोक के विकास के बाद धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, उसी प्रकार त्रिपुरा में भी 51 शक्तिपीठों में से एक ‘मालाबाड़ी शक्तिपीठ’ (त्रिपुरेश्वरी) के विकास का कार्य प्राथमिकता पर लिया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में एक्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर उत्तम पाल, एक्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर सुनील पोद्दार, जूनियर इंजीनियर सुनंदा पॉल, जूनियर इंजीनियर  झुतन दास, जूनियर इंजीनियर  देबब्रत दास, डिप्टी प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर तन्मय दाश, तथा ऑफिस मैनेजर-कम-अकाउंटेंट कुंतल भौमिक शामिल रहे। मध्यप्रदेश की ग्रामीण पर्यटन पहल, होमस्टे ईकोसिस्टम, सरल शूटिंग अनुमति व्यवस्था और सामुदायिक भागीदारी मॉडल से प्रभावित प्रतिनिधिमंडल ने इसे त्रिपुरा में लागू करने की इच्छा व्यक्त की। यह दौरा दोनों राज्यों के बीच पर्यटन क्षेत्र में सहयोग और सतत पर्यटन विकास के नए अवसरों को गति देगा। साझा की नवाचारों की जानकारी प्रतिनिधिमंडल ने ‘पर्यटन भवन’ पहुंचकर मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की प्रशासनिक संरचना एवं निगम द्वारा किए जा रहे नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने पर्यटकों के लिए जंगल भ्रमण हेतु ट्रेक्स क्रूजर एवं कैंटर बसों के संचालन, भोपाल स्थित बोट क्लब में 20 शिकारा बोट, चप्पू बोट तथा 5 नई वॉटर साइकिल के संचालन के बारे में अवगत कराया। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को प्रदेश में निगम द्वारा संचालित होटल, रिसॉर्ट, बोट क्लब, नए होटल परियोजनाओं एवं हाल ही में निर्मित उज्जैन के हेरिटेज होटल ‘सम्राट विक्रमादित्य’, शहडोल स्थित ‘सरसी आइलैंड रिसॉर्ट’ तथा पचमढ़ी में पूर्णत: महिलाओं द्वारा संचालित प्रदेश के एकमात्र होटल अमलतास के संचालन, के साथ नव श्रृंगारित ‘होटल नीलांबर स्काई लाइन’ की जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, माइस (MICE) टूरिज्म के अंतर्गत भोपाल स्थित ‘कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर’ एवं खजुराहो स्थित ‘महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर’ के संचालन तथा इनमें आयोजित होने वाले वृहद आयोजनों के बारे में भी विस्तार से बताया।

आत्मनिर्भर बन कम करें पेरेंट्स का बोझ

अगर आप समझदारी दिखाएं और कोई पार्टटाइम जॉब कर कुछ हद तक आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करें, तो एजुकेशन पर होने वाले भारी खर्च से पेरेंट्स को काफी राहत दिला सकते हैं। अब भारत में भी इसके लिए कई तरह के अवसर मौजूद हैं। महंगाई के इस जमाने में पेरेंट्स के लिए अपने बच्चों की स्टडी का खर्च अफोर्ड करना काफी मुश्किल हो गया है। एजुकेशन काफी प्रोफेशनल स्वरूप अख्तियार कर चुका है और खासकर निजी क्षेत्र के कॉलेजों, यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा बेहद महंगी होती है। भारतीय मां-बाप के पास अपने बच्चों की परवरिश से लेकर एजुकेशन, शादी आदि की तमाम जिम्मेदारियां होती हैं और वे किसी भी तरह से इसे पूरा करते ही हैं। लेकिन आजकल के भारी खर्च को देखते हुए अगर बच्चे भी कुछ समझदारी दिखाएं और कुछ हद तक आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करें, तो पेरेंट्स को काफी राहत मिल सकती है। पार्टटाइम जॉब या ट्यूशन:- पढ़ाई के साथ अपना खर्च निकालने का सबसे परंपरागत और लोकप्रिय सदाबहार काम है-ट्यूशन पढ़ाना। ट्यूशन पढ़ाना स्टूडेंट के लिए सबसे बेहतर पार्टटाइम जॉब होता है। इसकी वजह यह है कि इसमें किसी तरह की पूंजी नहीं लगती है, समय कम लगता है और स्टूडेंट के अपने सब्जेक्ट का भी रिवीजन होता रहता है। आप अपने से जूनियर क्लास के स्टूडेंट्स को होम ट्यूशन दे सकते हैं। इसके अलावा, किसी कोचिंग क्लास में जाकर पढ़ाना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। कोचिंग क्लास में पढ़ाने पर आपको ज्यादा पैसा मिल सकता है। भारत में अब पार्टटाइम जॉब के भी कई विकल्प मौजूद हैं, जिसे आप अपना सकते हैं। यह किसी ऑफिस में काम से लेकर किसी कॉफी रिटेल शॉप या रेस्टोरेंट में सेल्समैन तक का हो सकता है। एजुकेशन लोन एक विकल्प:- हायर एजुकेशन अब काफी महंगा हो गया है और आपको कोई अच्छा प्रोफेशनल कोर्स करने में 5 से 10 लाख रुपये तक की जरूरत होती है। इतना पैसा जुटाने में आपके पेरेंट्स को काफी मुश्किल आती है। इसका एक अच्छा विकल्प यह है कि आप अपनी स्टडी के लिए एजुकेशन लोन ले लें। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी मिलने पर आप अपना एजुकेशन लोन चुका सकते हैं। एजुकेशन लोन की री-पेमेंट आपको हर महीने ईएमआई के रूप में चुकानी होती है, इसलिए ज्यादा बोझ नहीं पड़ता। घरेलू खर्चों में योगदान दें:- आपने इनकम के लिए कोई पार्टटाइम काम हासिल कर लिया, यह अच्छी बात है। यदि आप अपने पेरेंट्स के साथ रहते हैं, तो अब आपको भी घरेलू खर्चों में कुछ योगदान करना चाहिए। आपकी थोड़ी-सी भागीदारी आपके पेरेंट्स के लिए लिए बड़ी राहत बन सकती है। यदि पेरेंट्स रिटायर हो चुके हैं या होने वाले हैं तो आपका यह कदम उनके कंधे का सहारा साबित हो सकता है। समझदारी का रास्ता:- -आत्मनिर्भर बनने के लिए आपके पास सबसे अच्छा विकल्प ट्यूशन पढ़ाने का होता है? ट्यूशन पढ़ाना स्टूडेंट के लिए सबसे बेहतर पार्टटाइम जॉब होता है। इसके अलावा, किसी कोचिंग क्लास में जाकर पढ़ाना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। -पार्टटाइम जॉब के भी कई विकल्प मौजूद हैं, जिसे आप अपना सकते हैं। यह किसी ऑफिस में काम से लेकर किसी कॉफी रिटेल शॉप में सेल्समैन तक का हो सकता है। मॉल कल्चर के विस्तार से अब तमाम फूड चेन और कॉफी चेन में पार्टटाइम जॉब की अच्छी संभावना बन गई है। -प्रोफेशनल कोर्स पर होने वाले लाखों रुपये के खर्च के लिए आप एजुकेशन लोन ले सकते हैं। आप पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी मिलने पर अपना एजुकेशन लोन चुका सकते हैं। यह आपको हर महीने ईएमआई के रूप में चुकानी होती है, इसलिए ज्यादा बोझ नहीं पड़ता। -अपनी स्टडी के लिए आप भी कुछ पैसों की बचत कर सकते हैं, ताकि अभिभावकों का बोझ हल्का हो। हायर एजुकेशन से कुछ साल पहले अच्छी योजना के साथ आप अपनी पॉकेट मनी या अपने पार्टटाइम जॉब से मिलने वाले पैसे को बचाना शुरू करें। -आप यदि अपने पेरेंट्स के साथ रहते हैं तो अब आपको भी घरेलू खर्चों में कुछ योगदान करना चाहिए। आपकी थोड़ी-सी भागीदारी आपके पेरेंट्स के लिए बड़ी राहत बन सकती है।  

डायबिटीज के मरीजों के लएि फायदेमंद है यह आसन

  डायबिटीज के दौरान शरीर में ग्लूकोज और इन्सुलिन के संतुलन को बनाए रखना बड़ी चुनौती है। ऐसे में पैंक्रियाज का फिट रहना डायबिटिक लोगों के लिए और भी जरूरी है। गोमुख आसन के नियमित अभ्यास से पैंक्रियाज सही तरह से काम करता है जिससे डायबिटीज पर नियंत्रण करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, इस आसने के अभ्यास से कमर, कंधे, गर्दन और रीढ़ की हड्डी की जकड़न को खत्म करता है और मांसपेशियां मजबूत होते हैं। यह ज्वाइट्स के बीच रक्त संचार बढ़ाता है जिससे जोड़ों में होने वाली परेशानियों में आराम होता है। ऐसे करें गोमुख आसन:- -इसे करने के लिए सबसे पहले घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं। अगर आप गठिया के मरीज हैं तो पद्मासन में बैठें। -अब अपने बाएं हाथ को ऊपर उठाएं और कोहनी मोड़कर पीठ के पीछे ले जाएं। वहीं दाएं हाथ को कोहनी से मोड़ें और बाएं हाथ की उंगलियां पकड़ने की कोशिश करें। -इस प्रक्रिया के दौरान रीढ़ की हड्डी सीधे रखें और श्वास सामान्य रखें। -कुछ सेकंड बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं और इस प्रक्रिया को दूसरे हाथ से दोहराएं।  

हाथियों ने मचाया तांडव: धान खरीदी केंद्र से रात में 15 बोरी धान बरबाद

रायगढ़  जिले के बंगुरसिया धान खरीदी केंद्र में इन दिनों हाथियों का आतंक किसानों और कर्मचारियों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गया है। बीते दो दिनों के भीतर हाथियों के एक दल ने खरीदी केंद्र में रखी करीब 15 बोरी धान खा ली, जबकि कई अन्य बोरियों को फैलाकर पूरी तरह बर्बाद कर दिया। इस घटना से न सिर्फ किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि धान खरीदी व्यवस्था की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। रात के अंधेरे में केंद्र में घुसे हाथी जानकारी के अनुसार, देर रात हाथियों का एक झुंड धान खरीदी केंद्र परिसर में दाखिल हुआ। खुले में रखे धान को देखकर हाथी केंद्र के भीतर पहुंच गए और बोरियों को उठाकर धान खाने लगे। हाथियों की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गनीमत रही कि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई। सीसीटीवी वीडियो वायरल पूरी घटना धान खरीदी केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, वहीं कुछ ग्रामीणों ने मोबाइल से भी हाथियों के उत्पात का वीडियो रिकॉर्ड किया। ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें साफ देखा जा सकता है कि हाथी बेखौफ होकर धान की बोरियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। धान खरीदी शुरू होते ही बढ़ी हाथियों की आवाजाही ग्रामीणों का कहना है कि धान खरीदी शुरू होने के बाद से ही इलाके में हाथियों की आवाजाही बढ़ गई है। केंद्र के आसपास वन क्षेत्र होने के कारण हाथी आसानी से यहां तक पहुंच जाते हैं। रात के समय हाथियों के आने से किसानों और कर्मचारियों में दहशत का माहौल बना हुआ है, जिससे कई लोग रात में केंद्र की ओर जाने से भी कतरा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल धान खरीदी केंद्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से किसानों में नाराजगी देखी जा रही है। न तो केंद्र के चारों ओर पर्याप्त बाड़ है और न ही हाथियों को रोकने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था। खुले में रखे धान की वजह से हाथियों को आकर्षित होने का मौका मिल रहा है। किसानों ने की सुरक्षा उपायों की मांग ग्रामीणों और किसानों ने वन विभाग और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मांग है कि धान खरीदी केंद्र के चारों ओर बिजली की बाड़, रात के समय पहरेदारों की तैनाती, हाथियों की निगरानी के लिए वन अमले की नियमित गश्त और धान के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था जल्द की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में न केवल धान का नुकसान बढ़ेगा, बल्कि किसी बड़े हादसे की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में प्रशासन और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई ही किसानों को राहत दिला सकती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का रतलामवासियों ने अभूतपूर्व सौगात के लिए किया अभिनंदन

रतलाम का सौभाग्य, बगैर मांगे मिली मेट्रोपोलिटिन रीजन में शामिल होने की सौगात : मंत्री काश्यप भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सेंव, सोना और साड़ी के लिए रतलाम की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति है। इनसे रतलाम की अपनी विशिष्ट पहचान बनी है। रतलाम स्वाभिमानी और पुरूषार्थी लोगों की नगरी है। यहां के लोग काम के आधार पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाते हैं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण सूक्ष्म,लघु, एवं मध्यम, उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यप हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रतलाम को इंदौर मेट्रोपोलिटिन रीजन में शामिल करने के लिए रतलाम वासियों के द्वारा संवाद भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह को संबोधित करते हुए एमएसएमई मंत्री श्री काश्यप ने कहा कि बगैर मांग के रतलाम को मेट्रोपोलिटिन रीजन में शामिल किया जाना रतलाम वासियों के लिए सौगात की बात है। रतलाम के प्रभारी मंत्री डॉ. विजय शाह ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने वाले मुख्यमंत्री हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रतलाम में औद्योगिक विकास की सभी संभावनाएं पहले से ही असीमित हैं। इन संभावनाओं को साकार करने के लिए रतलाम को मेट्रोपोलिटिन क्षेत्र में शामिल किया गया है। नागदा और खाचरौद पहले ही शामिल कर लिए गए, ऐसी स्थिति में असीमित संभावनाओं से परिपूर्ण रतलाम को भी शामिल करना ही था। अब इंदौर, उज्जैन के साथ रतलाम के शामिल हो जाने से मेट्रोपोलिटिन रीजन का विकास ट्रिपल इंजन की समन्वित शक्ति से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रतलाम वासियों का अभिनंदन के लिए आभार मानते हुए कहा कि मुख्यमंत्री निवास प्रदेश की जनता का ही घर है। एमएसएमई मंत्री श्री काश्यप ने कहा कि मध्यप्रदेश का विगत दो वर्षों में अभूतपूर्व विकास हुआ है। मेट्रोपॉलिटिन रीजन का विजन मुख्यमंत्री की विकास के प्रति अद्वितीय ललक की परिणीति है। वर्ष 2025 में भोपाल में आयोजत ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, विभिन्न संभागों में आयोजित रीजनल इन्डस्ट्रीयल कॉन्क्लेव और मेट्रोपोलिटिन रीजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मध्यप्रदेश के विकास के प्रति व्यापक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संवाद भवन में रतलाम के संयुक्त व्यापारी संघ, सराफा एसोसिएशन, खेल संगठन, ग्रेन मर्चेंट संघ, बार एसोसिएशन, मेडिकल एसोसिएशन सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अभिनंदन किया। समारोह में जिला अध्यक्ष श्री प्रदीप उपाध्याय, महापौर रतलाम नगर निगम श्री प्रह्लाद पटेल, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती मनीषा शर्मा सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रमुख बिंदु     रतलाम स्वाभिमानी और पुरूषार्थी लोगों की नगरी है।     यहां के लोग काम के आधार पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाते हैं।     बगैर मांग के रतलाम को मेट्रोपोलिटिन रीजन में शामिल किया जाना रतलाम वासियों के लिए सौगात की बात है।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने वाले मुख्यमंत्री हैं।     रतलाम में औद्योगिक विकास की संभावनाएं असीमित हैं।     इंदौर, उज्जैन के साथ रतलाम के शामिल हो जाने से मेट्रोपोलिटिन रीजन का विकास ट्रिपल इंजन की समन्वित शक्ति से होगा।     मुख्यमंत्री निवास प्रदेश की जनता का ही घर है।     मेट्रोपॉलिटिन रीजन का विजन मुख्यमंत्री की विकास के प्रति अद्वितीय ललक की परिणीति है।  

धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म ‘इक्कीस’ की रिलीज डेट बदली, 01 जनवरी को होगी रिलीज

मुंबई,  बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म ‘इक्कीस’ 01 जनवरी 2026 रिलीज होगी। फिल्म ‘इक्कीस’ दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म है। धर्मेंद्र के निधन (24 नवंबर 2025) के बाद से ही उनके फैंस इस फिल्म की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं। यह फिल्म 25 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इस फिल्म की रिलीज डेट बदल गयी है। मैडॉक फिल्म्स ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘आज भी जी करता है, पिंड अपने नू जानवा।” धरम जी मिट्टी के सच्चे बेटे थे और उनके शब्दों में उस मिट्टी का सार है। उनकी यह कविता एक तड़प है; एक लेजेंड से दूसरे लेजेंड को एक ट्रिब्यूट। हमें यह टाइमलेस वर्स गिफ्ट करने के लिए धन्यवाद। सिनेमाघरों में ये फिल्म देखें। इक्कीस 01 जनवरी 2026 को रिलीज हो रही है।’ श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी फिल्म इक्कीस वर्ष 1971 के युद्ध पर आधारित है जिसमें एक 21 साल के लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की कहानी दिखाई जाएगी। मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म को दिनेश विजान और बिन्नी पड्डा ने प्रोड्यूस किया है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा, अरुण खेत्रपाल की भूमिका में हैं, जबकि धर्मेंद्र, अरुण के पिता एमएल. खेत्रपाल की अहम भूमिका में नजर आयेंगे। बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार की भांजी सिमर भाटिया इस फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू कर रही हैं। इस फिल्म की कहानी एक पिता की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है, जब वह यह समझने की कोशिश करते हैं कि 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उसके बेटे ने किस वजह से देश के लिए बलिदान दिया था।  

कोहरे की चादर में दिल्ली-NCR, फ्लाइट ऑपरेशंस पर बड़ा असर

नई दिल्ली दिल्ली और आसपास के इलाकों में आज सुबह घना कोहरा और जहरीला स्मॉग छाया, जिससे विजिबिलिटी गंभीर रूप से प्रभावित हुई। सड़कें धुंधली दिखाई दीं, हवाई उड़ानें प्रभावित हुईं और सांस लेना भी मुश्किल हो गया। गुरुवार सुबह इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से कुल 22 फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ा। इनमें 11 अराइवल और 11 डिपार्चर उड़ानें शामिल हैं। एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, सुबह विजिबिलिटी ‘जीरो’ के करीब पहुँच गई थी, जिसकी वजह से कई उड़ानों को सुरक्षित संचालन के लिए रोकना पड़ा। यात्रियों को अपनी फ्लाइट की नवीनतम जानकारी एयरलाइन से लेने की सलाह दी गई है। एयरपोर्ट पर कई उड़ानें प्रभावित दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने सुबह 8:10 बजे एक एडवाइजरी जारी की, जिसमें घने कोहरे के कारण उड़ानों में देरी या रुकावट की चेतावनी दी गई। एयरपोर्ट ने कहा, “घने कोहरे के चलते फ्लाइट ऑपरेशंस CAT III कंडीशंस में चल रहे हैं, जो देरी या बाधा पैदा कर सकते हैं। हम सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर पैसेंजर्स की असुविधा कम करने की कोशिश कर रहे हैं। लेटेस्ट फ्लाइट स्टेटस के लिए अपनी एयरलाइन से संपर्क करें। असुविधा के लिए खेद है।” एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस ने भी यात्रियों को फ्लाइट स्टेटस चेक करने की सलाह दी। हालांकि, बाद में एयरपोर्ट ने बताया कि उड़ानें सामान्य रूप से चल रही हैं। उत्तर भारत के कई एयरपोर्ट्स पर देरी और रद्द की खबरें आईं। दिल्ली में जहरीली हवा का खेल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 358 पर पहुंच गया है, जो ‘बहुत खराब’ कैटेगरी में आता है। हालांकि, कुछ इलाके ‘सीवियर’ यानी गंभीर स्थिति में हैं। आनंद विहार: AQI 415 (‘सीवियर’), आरके पुरम: 374, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम: 349, आईएसबीटी कश्मीरी गेट: 384, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम में भी हवा की गुणवत्ता खराब बनी रही। मौसम विभाग और CPCB का अनुमान है कि अगले छह दिनों तक AQI इसी रेंज में रहने की संभावना है। मौसम को लेकर अलर्ट आईएमडी के मुताबिक, गुरुवार सुबह उत्तर-पश्चिम दिशा से 10 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं, जो दोपहर में बढ़कर 15 किमी/घंटा तक पहुंच सकती हैं। शाम होते-होते हवा की रफ्तार फिर कम होने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि ये हवाएं स्मॉग को थोड़ा फैलाने में मदद करेंगी, जिससे विजिबिलिटी में सुधार हो सकता है। न्यूनतम तापमान में अगले दो दिनों तक कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। उसके बाद पारा करीब 2 डिग्री तक बढ़ने का अनुमान है। बुधवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 2.3 डिग्री कम है। अधिकतम तापमान 24.7 डिग्री दर्ज हुआ, जो सामान्य से 2.5 डिग्री अधिक रहा। प्रदूषण पर कड़ी कार्रवाई गंभीर प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए CAQM ने दिल्ली-NCR में ग्रैप स्टेज-IV लागू कर दिया है। इसके तहत गुरुवार से बीएस-VI से नीचे के नॉन-दिल्ली रजिस्टर्ड वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। वहीं, जिन वाहनों के पास वैध पीयूसी सर्टिफिकेट नहीं है, उन्हें ईंधन भी नहीं मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह कड़े कदम जहरीले स्मॉग पर काबू पाने और शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए अनिवार्य हो गए हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन उपायों से प्रदूषण के स्तर में गिरावट आएगी और हवा कुछ हद तक साफ हो सकेगी।

पति पुलकित सम्राट को घर पर प्यार से ‘अन्नपूर्णा’ बुलाती है कृति खरबंदा

मुंबई,  बॉलीवुड अभिनेत्री कृति खरबंदा अपने पति और अभिनेता पुलकित सम्राट को घर पर प्यार से 'अन्नपूर्णा' बुलाती है। बॉलीवुड की प्रेम कहानियाँ अक्सर ग्लैमर और चकाचौंध में लिपटी होती हैं, लेकिन कुछ सबसे खूबसूरत रिश्ते बेहद सादे और सच्चे पलों में जन्म लेती हैं और कृति खरबंदा और पुलकित सम्राट की कहानी उन्हीं में से एक है। कृति खरबंदा ने हाल ही में करण जौहर के साथ एक बातचीत के दौरान अपनी ज़िंदगी के उस निजी पल को साझा किया, जिसने उन्हें यह यकीन दिला दिया कि पुलकित ही वह इंसान हैं, जिनके साथ वह अपनी पूरी ज़िंदगी बिताना चाहती हैं। यह पल न तो शोहरत से जुड़ा था, न सफलता से और न ही किसी लग्ज़री से। कृति ने बताया कि यह एक देर रात की ड्राइव थी, जब दोनों बांद्रा की सड़कों से गुज़र रहे थे। उस समय तक उन्होंने अपने रिश्ते को निजी ही रखा हुआ था। शहर की शांत सड़कों पर गाड़ी चलाते हुए एक लेम्बॉर्गिनी उनके पास से गुज़री। सहज-सी जिज्ञासा में कृति ने पुलकित से पूछ लिया कि यदि कभी उनके पास बहुत सारा पैसा हुआ तो वह क्या करेंगे? पुलकित ने बिना एक पल सोचे, सड़क पर ध्यान रखते हुए जो जवाब दिया, उसने एक ही पल में सब कुछ बदल दिया। कृति ने मुस्कुराते हुए बताया, “पुलकित ने कहा कि वह एक गुरुद्वारा बनवाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वहाँ 24×7 लंगर चलता रहे।” यही वह क्षण था जब कृति को बिना किसी संदेह के यह एहसास हो गया कि यही वह शख़्स हैं, जिनसे वह शादी करना चाहती हैं।“उस पल, प्यार एक बार फिर से हो गया।” पुलकित की दरियादिली और खाने को लेकर पुलकित के पैशन पर कृति ने यह भी बताया कि वे घर पर पुलकित को प्यार से “अन्नपूर्णा” कहकर बुलाती हैं। कृति ने बताया कि पुलकित की असली पहचान उनकी सहज दरियादिली और समाज को लौटाने की भावना है। न महत्वाकांक्षा, न लाइफ़स्टाइल और न ही सफलता, बल्कि उनके शब्दों के पीछे छुपा दिल ही उन्हें खास बनाता है।  

मास्टर एथलीट फेडरेशन ऑफ इंडिया के खिलाड़ियों की सीएम से मुलाकात, साय बोले– मेहनत से मिली राष्ट्रीय पहचान

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विगत दिवस छत्तीसगढ़ विधानसभा के कार्यालय कक्ष में  मास्टर एथलीट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रतिभागियों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। मास्टर एथलीट फेडरेशन ऑफ इंडिया के द्वारा 5 से 9 नवम्बर तक चेन्नई में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया। इस प्रतियोगिता में प्रदेश के भिलाई, बिलासपुर, महासमुंद और बस्तर से आए खिलाड़ियों ने भाग लिया और विभिन्न स्पर्धाओं में जीत हासिल की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और लगन से छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने भविष्य में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल उपस्थित थे।