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ये टिप्स रखेंगे आपको टेंशन फ्री

यदि आप अपने कार्यस्थल पर टेंशनमुक्त रहना चाहती हैं तो समय पर काम को पूरा करने की आदत डालें। साथ ही स्वयं की थोड़ी सी देखभाल भी करें। ऐसा करके न केवल आप अन्य लोगों के लिए मिसाल बन सकती हैं, बल्कि स्वयं को हमेशा प्रसन्न रख सकती हैं… तनाव आज इंसान के जीवन का हिस्सा बन चुका है और इसका सीधा असर पड़ता है उसके काम पर। तनावग्रस्त होने पर आप नाखुश तो रहती ही हैं साथ ही हताशा भी चेहरे पर साफ नजर आती है। इसका असर यहीं पर खत्म नहीं होता यह काम करने की क्षमता के साथ ही कंपनी के साथ आपके रिश्ते को भी प्रभावित करता है। यदि आप ऐसी समस्या से ग्रसित हैं तो ध्यान दें इन बातों का। तनाव की पहचान सबसे पहले तो इस बात को समझने की कोशिश करें कि आप तनावग्रस्त हैं कि नहीं। फिर उसके लक्षणों की पहचान करने की कोशिश करें। उदाहरण स्वरूप चिड़चिड़ाहट होना, अत्यधिक धूम्रपान या चाय, कॉफी लेना, नींद में अनियमितता आना ये तनाव के लक्षण हैं। यदि इनमें से एक या कई लक्षण नजर आते हैं तो निश्चित रूप से आप तनावग्रस्त हैं। तनाव का कारण शांति से बैठकर इस बात पर गौर करें कि तनाव का मुख्य कारण क्या है? यह आपके काम का तरीका है या काम की अधिकता ने आपको तनावग्रस्त कर दिया है? इस बारे में आराम से सोचें। क्या यह समस्या सिर्फ किसी खास प्रोजेक्ट में हो रही है या डेडलाइन पर काम खत्म न होने की टेंशन है या ऐसी स्थिति में खुद को कमजोर महसूस करना आपकी परेशानी को बढ़ा रहा है। काम का माहौल सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप जिस ऑफिस में काम करती हैं वहां का माहौल कर्मचारियों के अनुकूल है या नहीं? कई बार तनाव का कारण कार्यस्थल में होने वाली परेशानियां ही होती हैं। इसके लिए देखें कि आप जिस संस्थान से जुड़ी हैं वहां पर कर्मचारियों के लिए अच्छी सुविधाएं जैसे सुविधाजनक टाइम, पार्ट-टाइम काम करने की सुविधा, घर में काम करने का विकल्प, आकस्मिक छुट्टी आदि हैं कि नहीं। यदि ऐसा नहीं है तो ऐसे संस्थान को जितनी जल्दी संभव हो छोड़ दें और तनाव से मुक्ति पाएं। कारण, तनाव वाली जगह पर काम करने पर न केवल आपकी कार्यक्षमता प्रभावित होगी, बल्कि आप तनावग्रस्त भी होती जाएंगी। इसका नतीजा यह होगा कि आप हमेशा अस्वस्थ बनी रहेंगी। जाहिर है, अस्वस्थ रहकर कोई भी काम सपलतापूर्वक अंजाम नहीं दिया जा सकता। काम की लिस्ट तनाव से निपटने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि काम को उसकी प्राथमिकता के हिसाब से बांट लिया जाए। इसके लिए दिन में किए जाने वाले कामों की उनकी प्राथमिकता के हिसाब से लिस्ट बना लें। उदाहरणस्वरूप सबसे पहले काम से संबंधित जरूरी मीटिंग अटेंड करना। फिर जरूरी मेल भेजना। फिर अपने काम से संबंधित जरूरी चीजों को क्रमानुसार करते जाना। एक बार जब लिस्ट तैयार हो जाए तो हर काम के लिए समय सीमा तय कर लें। ब्रेक लेती रहें खुद को तनाव से बचाने के लिए काम के दौरान थोड़े-थोड़े अंतराल पर ब्रेक लेती रहें। हर दो घंटे के आसपास अपनी सीट से उठकर थोड़ा टहल लें पानी, चाय या कॉफी पिएं। आप चाहें तो अन्य सहयोगियों से कुछ देर बातचीत भी कर सकती हैं। कुछ जगहों पर आराम करने के लिए कैैंटीन, रेस्ट रूम, रीडिंग रूम या जिम आदि की व्यवस्था भी होती है। अगर आपके कार्यस्थल में ऐसी सुविधाएं हैं तो वहां जाकर दिमाग को हल्का करें। खुद की देखभाल स्वास्थ्य के लिहाज से यह बहुत ही जरूरी है कि आप अपनी पर्याप्त देखभाल करें। शरीर को पोषण पहुंचाने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्यवर्द्धक चीजों का सेवन करें। यदि आप उन लोगों में से हैं, जो काम के चक्कर में लंच को इग्नोर कर देते हैं तो सबसे पहले इस आदत को सुधारने की जरूरत है। लंच बॉक्स अपने साथ ऑफिस जरूर ले जाएं और रोजाना टाइम पर उसका सेवन करें। अगले दिन काम के दौरान तरोताजा रहने के लिए पर्याप्त नींद जरूर लें। मसल्स टोनिंग और बॉडी स्ट्रेंथनिंग जैसी एक्सरसाइज को भी अपने रुटीन का हिस्सा बनाएं। साथ ही सुबह या शाम के समय कुछ देर अवश्य टहलें। आप मेडिटेशन और योगा भी कर सकती हैं। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहेगी और आपका सारा काम खुशी-खुशी और आसानी से होगा।  

लाभार्थियों को राहत: मंईयां सम्मान योजना की नवंबर किस्त जारी, अब दिसंबर पर फोकस

रांची मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत नवंबर माह की राशि सभी महिला लाभुकों के खाते में हस्तांतरित कर दी गई है। महिला एवं बाल विकास के सामाजिक सुरक्षा निदेशालय ने क्रिसमस के पूर्व राशि हस्तांतरित करने के निर्देश सभी जिलों को दिए गए थे। इसके बाद जिलों ने नवंबर माह की राशि हस्तांतरित की। दो-तीन जिलों में यह टास्क लंबित था, लेकिन अंतिम समय में सभी जिलों में भी राशि हस्तांतरित कर दी गई। राशि उन लाभुकों के बैंक खाते में ही हस्तांतरित की गई है, जिनकी आधार सीडिंग हो चुकी है। अब जिलों में दिसंबर माह की राशि हस्तांतरित करने की तैयारी चल रही है। इस योजना के तहत अगले वर्ष फरवरी माह तक की राशि जिलों में उपलब्ध है। इस योजना के लिए चालू वित्तीय वर्ष के दूसरे अनुपूरक बजट में राशि का प्रविधान किया गया था। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान पारित दूसरे अनुपूरक बजट में कुल 7,721.25 करोड़ रुपये के प्रविधान किए गए थे, जिनमें सबसे अधिक 2,082 करोड़ रुपये की राशि का प्रविधान महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए किया गया था। इस योजना का संचालन इस विभाग द्वारा ही किया जा रहा है। इससे पहले, चालू वित्तीय वर्ष के बजट में मुख्यमंत्री मंइयां सम्मान योजना के लिए 13,363.35 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया था।  

अजमेर दरगाह पहुंचे राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, ख्वाजा साहब के दर पर चादर चढ़ाई

जयपुर  राज्यपाल हरिभाऊ बागडे की ओर से गुरुवार को अजमेर में गरीब नवाज ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर पेश की गई। लोक भवन में पदस्थापित राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नियंत्रक हाउस होल्ड शरद तिवारी ने दरगाह  पहुंचकर राज्यपाल की ओर से जियारत कर चादर चढ़ाई।  सालाना उर्स के अवसर पर राज्यपाल बागडे का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया। अपने संदेश में हरिभाऊ बागडे ने महान सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के अमन और शांति के पैगाम को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ख्वाजा साहब का उर्स "एक भारत श्रेष्ठ भारत" की सर्वधर्म सद्भाव की हमारी संस्कृति से जुड़ा है। उन्होंने  पीर पैगम्बरों के उदात्त जीवन, उनके मनुर्भव के चिंतन से जुड़ी भारतीय संस्कृति को महान बताते हुए ख्वाजा साहब की शिक्षाओं से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। राज्यपाल ने अपने संदेश में ख़्वाजा साहब को गरीब नवाज बताते हुए कहा कि वंचित और गरीब वर्ग का कल्याण ही हम सबकी प्राथमिकता होना चाहिए। उन्होंने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के वार्षिक उर्स की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए प्रदेशवासियों के खुशहाल जीवन के लिए भी प्रार्थना की है। इससे पहले लोकभवन में राज्यपाल बागडे ने अजमेर के लिए चादर पेश करने के लिए सौंपी। 

ऑस्ट्रेलियाई ओपन में नया कीर्तिमान बनाने उतरे जोकोविच, फैंस की बढ़ी धड़कनें

माल्टा सर्बिया के टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच की नजरें अब अगले साल होने वाले ऑस्ट्रेलियन ओपन पर लगी हैं। इसमें वह रिकॉर्ड 25वां ग्रैंड स्लैम जीतने उतरेंगे। इससे पहले वह एडिलेड इंटरनेशनल में उतरकर अपनी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। हैं। इसी को देखते हुए जोकोविच ने नये ट्रेनिंग पार्टनर फ्रांस के आर्थर काजॉक्स के साथ अभ्यास शुरु कर दिया है। इससे काजॉक्स बेहद उत्साहित हैं। इस युवा खिलाड़ी ने लिखा, तीन शानदार दिन, ट्रेनिंग, सीखने और एक महान खिलाड़ी के साथ अनुभव साझा करने का अवसर मिला। बहुत आभारी हूं। काजॉक्स ने साल 2025 में अपनी करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग 58 हासिल की।  उन्होंने एटीपी फाइनल में खेलते हुए कई बड़े खिलाड़ियों को हराया और ग्रैंड स्लैम स्तर पर ऑस्ट्रेलियन ओपन और विंबलडन में दो जीत दर्ज की। इस प्रदर्शन से प्रभावित होकर ही जोकोविच ने उन्हें ट्रेनिंग पार्टनर बनाया है। इस साझेदारी से दोनों खिलाड़ियों को लाभ हो रहा है। जहां जोकोविच एक युवा से खेलकर इससे अपने खेल को और बेहतर बना रहे हैं। वहीं काजॉक्स को एक शीर्ष खिलाड़ी से खेलने के कारण सीखने का मिल रहा है। जोकोविच जैसे खिलाड़ी के साथ अभ्यास करने से काजॉक्स को तकनीक और रणनीति बनाने का भी अनुभव हो रहा है।   

पुरुषों को दीवाना बना देती है हाई हील

अगर आप भी पुरुषों को अपना दीवाना बनाना चाहती हैं तो हाई हील पहनना शुरु कर दीजिए क्योंकि हाई हील पहनने वाली महिलाओं की मदद के लिए पुरुष अधिक आतुर रहते हैं। एक नए शोध से पता चला है कि महिलाओं की हाई हील महिलाओं के प्रति होने वाले पुरुषों के व्यवहार को कैसे प्रभावित करती है। इस शोध से बात सिद्ध हुई है कि जैसे-जैसे महिलाओं की हील में वृद्धि होती गयी वैसे ही पुरुष भी उनकी सहायता करने के लिए अधिक उत्साहित थे। फ्रांस के रिसर्चर निकोलस गुइगुइन के अनुसार पुरुषों की तरह अन्य महिलायें इससे प्रभावित नही होती। शोध के अनुसार महिलाओं के विभिन्न प्रकार के जूतों की तरह उनके प्रति पुरुषों का व्यवहार भी अलग-अलग होता है। सर्वे के अनुसार फ्लैट जूते की जगह जब महिलाओं ने हाई हील पहनी हुई थी तो पुरुषों ने उनकी बातों का बहुत आसानी से और अच्छी तरह पालन किया। एक अन्य प्रयोग में शोधकर्ता ने पाया कि एक बार में जब एक महिला फ्लैट जूतों की जगह हाई हील पहन कर आ गयी तो पुरुष उससे चैटिंग करने लग गये। इस शोध से यह निष्कर्ष निकला है कि महिलाओं की हाई हील से पुरुष महिलाओं के प्रति आकर्षित होते हैं।  

केंद्रीय गृह मंत्री शाह एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेश से रोजगार-अटल संकल्प विषय पर लगी प्रदर्शनी का किया अवलोकन

भोपाल  मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरा ग्वालियर में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर “अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट” स्थल पर “निवेश से रोजगार-अटल संकल्प” विषय पर प्रदर्शनी लगाई गई। समिट के मुख्य अतिथि केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समिट में केन्द्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमरऔर वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश अध्यक्षश्री हेमन्त खंडेलवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण भी उनके साथ थे। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की राष्ट्रप्रेम को समर्पित जीवन यात्रा प्रदर्शित यह प्रदर्शनी स्व. वाजपेयी अटल जी की राष्ट्र प्रेम को समर्पित जीवन यात्रा और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को अत्यंत जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रही थी। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की कविताओं, ओजस्वी भाषणों और उनकी राजनीतिक यात्रा के माध्यम से उनकी दूरदर्शिता, एकात्म मानववाद की विचारधारा तथा भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के उनके संकल्प को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।इसमें पोखरण परमाणु परीक्षण और गोल्डन क्वाड्रिलेटरल जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया गया। साथ ही देश की मजबूती व विकास में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की भूमिका को रेखांकित कर रहे थे। औद्योगिक प्रगति को भी दर्शाया प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति और आर्थिक विकास को भी प्रदर्शित किया गया। इसमें राज्य की प्रमुख औद्योगिक परियोजनाओं जैसे सिंगाजी थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट, मालनपुर भिंड की इलेक्जर पीवीसी प्लाइवुड इकाई, पीथमपुर ऑटो हब और भोपाल फूड पार्क भी प्रदर्शित किये गये है। इसके साथ ही ड्रोन टेक्नोलॉजी और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में कार्यरत सफल स्टार्ट-अप्स की कहानियों के माध्यम से नवाचार, उद्यमशीलता और युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों को भी प्रदर्शित किया गया। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट भी किये गए प्रदर्शित प्रदर्शनी में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना ओडीओपी में मंदसौर की अफीम, मैहर का हस्तशिल्प, छिंदवाड़ा का टिंकीरा चावल जैसे उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। साथ ही जीआई टैग प्राप्त उत्पादों में विदिशा का लहसुनिया लाल चना, बालाघाट का काकड़ हाट चावल, मुरैना की सरसों से बने स्थानीय उत्पाद एवं मुरैना की जीआई टैग गजक तथा दतिया का प्रसिद्ध जीआई टैग बेलमेटल वर्क शामिल किया गया। समिट की प्रदर्शनी निवेशमें रोजगार से जोड़ने के अटल संकल्प को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया गया।औद्योगिक विकास, नवाचार और स्थानीय उत्पादों के संवर्धन से सतत और समावेशी विकास की दिशा में निरंतर अग्रसरहोते मध्यप्रदेश को प्रदर्शित किया गया है।  

इतिहास रचा गया: सिंगापुर हिंदू बोर्ड की CEO बनीं सरोजिनी पद्मनाथन

सिंगापुर  सिंगापुर के हिंदू बोर्ड में मंदिरों और भारतीय संस्कृति के प्रबंधन के लिए एक अनुभवी महिला नियुक्त सिंगापुर, 25 दिसंबर (भाषा) सिंगापुर में प्रमुख हिंदू मंदिरों का प्रबंधन करने वाली एक वैधानिक संस्था, हिंदू एंडावमेंट्स बोर्ड (एचईबी) ने जन सेवा को समर्पित एक अनुभवी नेता को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। सरोजिनी पद्मनाथन को बुधवार को एचईबी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया। अपने 40 वर्षों के शानदार करियर में उन्होंने 1990 के दशक में अस्पतालों के पुनर्गठन और कोविड-19 महामारी के दौरान संगठनात्मक मजबूती बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय और हेल्थ साइंसेज अथॉरिटी में वरिष्ठ पदों पर कार्य किया, जहां उन्होंने चिकित्सा, नर्सिंग और प्रशासनिक क्षेत्रों में कार्यबल विकास का नेतृत्व किया। साप्ताहिक ‘टैब्लॉइड' (लघुपत्र) ‘तबला!' के अनुसार, 57 वर्षीय पद्मनाथन इससे पहले एचईबी की वित्त सदस्य रह चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने वित्तीय प्रशासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और बोर्ड के संचालन से गहरे से जुड़ी रहीं। इसमें इसके चार मंदिर, एक पुनर्वास केंद्र और धार्मिक कार्यक्रम शामिल हैं। वर्ष 1968 में स्थापित एचईबी ने कहा, ‘‘उनका नेतृत्व अनुभव और मजबूत प्रशासनिक पृष्ठभूमि उन्हें बोर्ड की समुदाय-केंद्रित पहलों का मार्गदर्शन करने के लिए उपयुक्त बनाती है।'' पद्मनाथन जीवगंथ अरुमुगम का स्थान लेंगी, जो सितंबर 2024 से इस पद पर कार्यरत थे। हिंदू एंडावमेंट्स बोर्ड सिंगापुर के प्रमुख हिंदू मंदिरों – जैसे श्री मरिअम्मन मंदिर और श्री शिवन मंदिर का प्रबंधन करता है। इसके अलावा, यह संस्कृति, समुदाय और युवा मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय समुदाय के लिए सांस्कृतिक, धार्मिक और परोपकारी कार्यक्रमों की भी देखरेख करता है।    

गांव-गांव को बारहमासी सड़कों से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य अटलजी ने किया : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

  जन्म–शताब्दी वर्ष में सभी नगरीय निकायों में अटल परिसरों का निर्माण : अटलजी की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने का संकल्प रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर राज्य के 115 नगरीय निकायों में नवनिर्मित अटल परिसरों का लोकार्पण किया। उन्होंने राजधानी रायपुर में अटल एक्सप्रेस-वे के फुंडहर चौक पर स्थापित अटलजी की प्रतिमा का अनावरण तथा अटल परिसर का लोकार्पण करते हुए राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों से वर्चुअल रूप से जुड़कर अन्य 114 नगरीय निकायों में निर्मित अटल परिसरों का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब कार्यक्रम में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने फुंडहर खेल मैदान में आयोजित कार्यक्रम में रायपुर नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत 186 करोड़ 98 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत 23 कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 185 करोड़ 49 लाख रुपये के 17 कार्यों का भूमिपूजन तथा एक करोड़ 49 लाख रुपये के 6 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। इस अवसर पर उन्होंने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रकाशित अटल परिसरों पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के पाँच हितग्राहियों को भवन निर्माण अनुज्ञा-पत्र एवं पीएम स्वनिधि योजना के तहत पाँच महिला हितग्राहियों को 50-50 हजार रुपये के चेक वितरण किए गए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में अटलजी की 101वीं जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपस्थित नागरिकों को सुशासन दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि तीन करोड़ छत्तीसगढ़वासी आज अटलजी को कृतज्ञतापूर्वक नमन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अटलजी तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे, वे अजातशत्रु, प्रखर वक्ता, संवेदनशील कवि एवं श्रेष्ठ साहित्यकार थे। विरोधी दल भी उनके भाषणों को सुनने के लिए उत्सुक रहते थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से अटलजी ने गांव-गांव तक पक्की सड़कों का जाल बिछाया और बारहमासी सड़कों से ग्रामीण भारत को जोड़ा, जिससे छह लाख से अधिक गांवों में विकास के द्वार खुले। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को सुलभ कृषि ऋण उपलब्ध कराया गया, जिसका लाभ आज करोड़ों किसान उठा रहे हैं। अटल जी ने आदिम जाति विकास मंत्रालय का गठन कर उन्होंने आदिवासी कल्याण की योजनाओं को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज प्रदेश के 115 नगरीय निकायों में अटल परिसरों का लोकार्पण किया गया है। इससे पूर्व 60 स्थानों पर परिसरों का लोकार्पण हो चुका है। अटलजी के जन्म-शताब्दी वर्ष में सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर निर्मित किए जा रहे हैं, ताकि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता अटलजी की स्मृतियाँ चिरस्थायी बनी रहें। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के पश्चात छत्तीसगढ़ के विकास को नई गति मिली है। अटलजी की दूरदृष्टि और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ विकसित राज्य बनने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत रायपुर में 1023 आवासों की स्वीकृति दी गई है। विधायक किरण सिंह देव ने कहा कि अटलजी ने अपना वादा निभाते हुए छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का स्वरूप प्रदान किया। आज डबल-इंजन की सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘गुड गवर्नेंस’ की अवधारणा को देश ने अटलजी के नेतृत्व में अनुभव किया। विधायक मोतीलाल साहू ने कहा कि प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण होते हुए भी आर्थिक रूप से पिछड़े इस क्षेत्र की आवश्यकता को अटलजी ने पहचाना और नया राज्य देकर विकास का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्षों में रायपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में लगभग 500 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में रायपुर शहर का सर्वांगीण विकास हो रहा है और विकास के कार्य अंतिम पंक्ति तक पहुँच रहे हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस ने अपने स्वागत उद्बोधन में अटल परिसरों के निर्माण तथा आज लोकार्पित एवं भूमिपूजित कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायकगण राजेश मूणत, सुनील सोनी, पुरंदर मिश्रा, इंद्रकुमार साहू, अनुज शर्मा, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदकुमार साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, निगम आयुक्त विश्वदीप, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय सहित नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग एवं रायपुर नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर उन्हें नमन किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वतंत्रता सेनानी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक, भारत रत्न, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जयंती पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महामना मालवीय जी ने शिक्षा एवं समाज सुधार से प्रगति के नए युग का सपना देखा और अप्रतिम कृतित्व से साकार करने की नींव रखी। राष्ट्र सदैव महामना के प्रति कृतज्ञ रहेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के चहुँमुखी विकास की रखी सशक्त नींव : केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह

संतुलित विकास के क्षेत्रीय निवेश सम्मेलनों की श्रंखला की शुरूआत को बताया दूरदर्शी भोपाल केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मप्र के संतुलित विकास के क्षेत्रीय निवेश सम्मेलनों की श्रंखला आयोजित करने की शुरूआत को दूरदर्शी बताया है। उन्होने कहा कि यह ऐसी शुरूआत श्री नरेन्द्र मोदी जी ने गुजरात के लिये की थी। ‘वाइब्रेंट गुजरात’ के नाम से इंडस्ट्रियल समिट आयोजित करने की एक वैज्ञानिक और व्यवस्थित शुरुआत उन्होंने की। इसमें राज्य की राजधानी में बड़े स्तर पर इंडस्ट्रियल समिट आयोजित होते थे और राज्य में व्यापक निवेश आता था। डॉ. यादव ने क्षेत्रीय इन्वेस्टमेंट समिट के माध्यम से मध्यप्रदेश के चहुँमुखी विकास की एक मजबूत नींव रखी है। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती परग्वालियर में ‘अभुदय : मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट’ में अपने संबोधन मेंकेन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने क्लस्टर इन्वेंस्टमेंट पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं डॉ. मोहन यादव को बधाई देना चाहता हूँ कि उन्होंने राज्य के संतुलित विकास के लिए ‘क्षेत्रीय निवेश कॉन्क्लेव’ की एक नई और दूरदर्शी शुरुआत की है। मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कॉन्क्लेव आयोजित करने और निवेश के भूमिपूजन का जो सिलसिला उन्होंने शुरू किया है, वह आने वाले समय में राज्य के संतुलित विकास के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। आज जो 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है, वह देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन किसी एक क्षेत्र के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। किसी क्षेत्र की जनता के लिए यह निवेश अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि राज्य का संतुलित विकास नहीं होता, तो राज्य आगे नहीं बढ़ सकता, क्योंकि हर क्षेत्र में अपार संभावनाएँ छिपी होती हैं।जैसे मालवा, ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में कपास लंबे समय से किसानों की प्रमुख फसल रही है, लेकिन उन्हें उसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। अब पीएम मित्र पार्क के आने से पारंपरिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है और कपास फिर से किसानों के लिए एक लाभकारी फसल बन गई है। मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी विशेषता उसका भौगोलिक लोकेशन है। यहाँ से पूरे देश के आधे हिस्से तक बहुत कम ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में आपूर्ति संभव है। लेकिन इस भौगोलिक लाभ का शत-प्रतिशत उपयोग तभी संभव है, जब राज्य में सिमेट्रिक इंडस्ट्री विकसित की जाए। दक्षिण से जुड़े जिलों में उद्योग स्थापित हों, दिल्ली से जुड़े जिलों, जैसे ग्वालियर में उद्योग लगेंऔर पश्चिमी क्षेत्रों जैसे धार और झाबुआ में भी औद्योगिक विकास हो। तभी मध्यप्रदेश को अपने भौगोलिक लाभ का वास्तविक फायदा मिलेगा। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि इसी सोच के साथ यह आयोजन डॉ. मोहन यादव ने किया है। मैं उन्हें हृदय से बधाई देता हूँ कि उनकी क्षेत्रीय इन्वेस्टमेंट समिट ने मध्यप्रदेश के चहुँमुखी विकास की एक मजबूत नींव रखी है।