samacharsecretary.com

1 जनवरी का अचूक टोटका: पति-पत्नी के रिश्ते में बढ़ेगा प्यार और समझदारी

 नया साल केवल कैलेंडर बदलने का दिन नहीं होता बल्कि यह अपने जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और नई शुरुआत को आमंत्रित करने का एक अवसर होता है। अक्सर भागदौड़ भरी जिंदगी और आपसी तालमेल की कमी के कारण वैवाहिक जीवन में दूरियां आने लगती हैं। वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसे सरल और अचूक उपाय बताए गए हैं, जिन्हें यदि 1 जनवरी 2026 को अपनाया जाए, तो आपके दांपत्य जीवन में खोया हुआ प्रेम और सुकून वापस लौट सकता है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा की सफाई वास्तु में ईशान कोण को देवताओं का स्थान माना गया है। यदि इस दिशा में गंदगी या भारी सामान होता है, तो घर में तनाव बढ़ता है। 1 जनवरी की सुबह सबसे पहले इस कोने को साफ करें। यहाँ गंगाजल छिड़कें और एक तांबे के पात्र में जल भरकर रखें। इससे मानसिक शांति आती है और पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद कम होते हैं। बेडरूम से हटाएं ये चीजें बेडरूम वह स्थान है जहां आप अपने जीवनसाथी के साथ सबसे अधिक समय बिताते हैं। यहां की ऊर्जा आपके रिश्तों पर सीधा असर डालती है। टूटे हुए कांच, बंद घड़ियां, कैंची या कांटेदार पौधे। अगर आपके बिस्तर के सामने आईना लगा है, तो उसे हटा दें या रात को ढक दें। सोते समय अपना चेहरा आईने में देखना रिश्तों में अविश्वास पैदा करता है। सेंधा नमक का जादुई उपाय नमक नकारात्मक ऊर्जा को सोखने का सबसे उत्तम साधन है। 1 जनवरी को घर के पोंछे के पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाएं। इसके अलावा, एक छोटी कांच की कटोरी में सेंधा नमक भरकर बेडरूम के एक कोने में रख दें। यह नमक आपसी झगड़ों और नकारात्मकता को सोख लेगा। हर 15 दिन में इस नमक को बदलते रहें। दिशा और रंगों का चुनाव दांपत्य जीवन में मधुरता लाने के लिए रंगों का बहुत महत्व है। बेडरूम की दीवारों पर हल्के रंगों जैसे गुलाबी, हल्का पीला या क्रीम का प्रयोग करें। लाल रंग ऊर्जा का प्रतीक है लेकिन इसकी अधिकता विवाद बढ़ा सकती है। नए साल के पहले दिन अपने बिस्तर पर गुलाबी या सफेद रंग की नई चादर बिछाएं। यह प्रेम और शांति का प्रतीक है। खुशबू और रोशनी का प्रभाव रुखी और फीकी रोशनी मन में चिड़चिड़ापन पैदा करती है। नए साल की शाम को दक्षिण-पश्चिम कोने में एक घी का दीपक जलाएं। घर में मोगरा, गुलाब या लैवेंडर की सुगंध वाली अगरबत्ती या डिफ्यूज़र का उपयोग करें। मधुर सुगंध मन को शांत करती है और रोमांस बढ़ाती है।

अजय सिंगल को सौंपी गई हरियाणा पुलिस की कमान, 1992 बैच के IPS अधिकारी को मिली बड़ी जिम्मेदारी

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने आईपीएस अधिकारी अजय सिंगल को राज्य का नया पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार उनकी नियुक्ति यूपीएससी द्वारा भेजे गए पैनल पर विचार के बाद की गई है।  अजय सिंगल 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और दो वर्ष के निर्धारित कार्यकाल के लिए पदभार संभालेंगे। आदेश में बताया गया कि यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई है। साथ ही 1990 बैच के शत्रुजीत सिंह कपूर और 1993 बैच के आलोक मित्तल को भी पैनल में शामिल किया गया था। गृह विभाग ने आदेश की प्रति सभी संबंधित अधिकारियों और विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी है।   एसीबी के प्रमुख पद पर तैनात थे हरियाणा में पुलिस महानिदेशक (DGP) की कुर्सी को लेकर अजय सिंघल का नाम सबसे आगे चल रहा है। 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय सिंघल वर्तमान में एंटी करप्शन ब्यूरो के प्रमुख के रूप में तैनात हैं और वे राज्य पुलिस सेवा में सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। अधिकारियों में अच्छी पकड़ सूत्रों के मुताबिक सिंघल को पुलिस विभाग की धरातलीय जरूरतों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों का अनुभव हासिल है, जिससे उन्हें शीर्ष भूमिका के योग्य माना जा रहा है। अधिकारी स्तर पर उनकी साख मजबूत मानी जाती है। पूर्व सीएम मनोहर लाल के कार्यकाल में थे विश्वासपात्र विश्लेषकों का कहना है कि सिंघल का नाम राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिष्ठानों में भी सकारात्मक माना जाता है। उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच अच्छी पकड़ और पिछले मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में प्रशासकीय टीम में विश्वसनीय अधिकारी के रूप में देखा गया है।

विदा लेते वर्ष 2025 में प्रदेश ने अभी तक की बिजली की अधिकतम मांग की आपूर्ति का बनाया नया कीर्तिमान

31 दिसम्बर 2025 को 19849 मेगावाट डिमांड की सफलतापूर्वक आपूर्ति भोपाल विदा लेते वर्ष 2025 में प्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में फिर से एक नया कीर्तिमान दर्ज कर लिया है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि वर्ष के अंतिम दिन 31 दिसम्बर 2025 को सुबह 10:44 बजे प्रदेश की बिजली प्रणाली ने उस समय नया आयाम स्थापित किया, जब प्रदेश में 19849 मेगावाट बिजली की डिमांड को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस दौरान प्रदेश की विद्युत कंपनियों ने बेहतरीन समन्वय बनाकर निर्वाध विद्युत आपूर्ति की। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने सभी विद्युत कंपनियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुये कहा कि यह विद्युत कार्मिकों की मेहनत, समर्पण का परिणाम है। श्री तोमर ने बताया कि अधिकतम डिमांड के समय मध्यप्रदेश के उत्पादन केन्द्रों, लाईनों और सबस्टेशनों से निर्वाध विद्युत आपूर्ति की गई। प्रदेश में कैसी रही बिजली की मांग एम.पी. पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के मुख्य अभियंता श्री राजेश गुप्ता ने जानकारी दी कि प्रदेश में जब बिजली की मांग 19849 मेगावाट पर दर्ज हुई उस दौरान मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (जबलपुर, सागर व रीवा संभाग) में 5351 मेगावाट, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (भोपाल व ग्वालियर संभाग) में 6171 मेगावाट, मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (इंदौर व उज्जैन संभाग) में 7911 मेगावाट, एसईज़ेड एवं रेलवे में 416 मेगावाट बिजली की मांग दर्ज हुई। ऐसे हुई आपूर्ति अधिकतम मांग के समय ताप विद्युत गृहो से 3638 मेगावाट, जल विद्युत गृहों से 1568 मेगावाट, नवकरणीय ऊर्जा 1456 मेगावाट व एनटीपीसी, बैंकिंग एवं अन्य सोर्स से कुल 13187 मेगावाट बिजली प्राप्त हुई।  

कांप उठी राजधानी! दिल्ली में 6 साल बाद सबसे ठंडा दिसंबर, पारा गिरने से बढ़ी ठिठुरन

नई दिल्ली  दिल्ली बुधवार को घने कोहरे की चादर में लिपटी रही जिससे दृश्यता का स्तर 50 मीटर से भी नीचे चला गया। दिल्ली हवाई अड्डे पर करीब 150 उड़ानें रद्द कर दी गईं और 100 से अधिक ट्रेनें देरी से चलीं। धूप नहीं निकलने से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में कई जगहों पर कोल्ड डे और कुछ जगहों पर सीवियर कोल्ड डे की स्थिति देखी गई। 6 साल में बुधवार का दिन दिसंबर का सबसे ठंडा दिन के रूप में दर्ज हुआ। यह मौसम का भी सबसे ठंडा दिन रहा। मौसम विभाग ने अगले 3 दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और गुरुवार को हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई है।   ठंड ने तोड़ा 6 साल का रिकॉर्ड मौसम विभाग की ओर से साझा किए गए आंकड़े के मुताबिक, दिल्ली में बुधवार का दिन दिसंबर महीने के लिए 6 वर्षों में सबसे ठंडे दिन के रूप में रिकॉर्ड किया गया। दिल्ली की मानक वेधशाला सफदरजंग में दिन का अधिकतम तापमान 14.2 डिग्री रिकार्ड किया गया जो सामान्य से 6.2 डिग्री सेल्सियस कम है। इससे पहले 2019 में 29 दिसंबर को अधिकतम तापमान 13.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। किन जगहों पर कोल्ड डे की स्थिति? बुधवार का दिन दिल्ली में मौसम का सबसे ज्यादा ठंडा दिन रहा। बता दें कि न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम होने और अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.5 डिग्री कम होने पर उसे कोल्ड डे की स्थिति मानी जाती है। अधिकतम तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री सेल्सियस से कम हम होने पर सीवियर कोल्ड डे यानी गंभीर शीत दिवस की स्थिति मानी जाती है। बुधवार को सफदरजंग, रिज और आयानगर में शीत दिवस और पालम व लोधी रोड में गंभीर शीत दिवस की स्थिति रही। कल हल्की बारिश, 3 दिन येलो अलर्ट मौसम विभाग ने गुरुवार को दिल्ली-NCR के अलग-अलग हिस्सों में पश्चिमी विक्षोभ से हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई है। दिल्ली के अधिकांश हिस्सों में सुबह के समय मध्यम और कुछ इलाकों में घना कोहरा छाया रह सकता है। दिन में कहीं-कहीं शीत दिवस की स्थिति भी बन सकती है। इसको लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। IMD ने एक से लेकर 3 तारीख तक के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। पहाड़ों पर हिमपात के बाद गलन भरी सर्दी का पूर्वानुमान है। 150 उड़ानें रद्द, 100 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित दिल्ली में छाए घने कोहरे का खासा असर विमान सेवाओं पर देखने को मिला है। घने कोहरे के चलते दिल्ली हवाई अड्डे पर लगभग 150 उड़ानों को रद्द कर दिया। दो उड़ानों का मार्ग परिवर्तन भी किया गया। यात्रियों को विमान सेवाओं के संपर्क में रहने और उसी अनुसार यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी गई है। रेल सेवा भी बुरी तरह प्रभावित रही। दिल्ली के अलग-अलग स्टेशनों पर लगभग 100 रेलगाड़ियां देरी से पहुंचीं।  

2026 में मोदी सरकार ने बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स को दी हरी झंडी, नासिक से सोलापुर तक अब होगा सुपरफास्ट सफर

नई दिल्ली  देश में इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार को और तेज करते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने साल के अंत में महाराष्ट्र और ओडिशा को बड़ी सौगात दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के दो बड़े प्रस्तावों पर मुहर लगा दी गई. इन फैसलों के तहत 20,668 करोड़ रुपये की लागत से दो अहम हाईवे प्रोजेक्‍ट को मंजूरी मिली है. सरकार के इस फैसले से जहां महाराष्ट्र में कनेक्टिविटी को नए पंख लगेंगे, वहीं ओडिशा के पिछड़े और नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की नई इबारत लिखी जाएगी. 1. महाराष्ट्र: 6 लेन का ग्रीनफील्ड नासिक-सोलापुर कॉरिडोर कैबिनेट के फैसले में सबसे बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के नाम रहा है. सरकार ने नासिक और सोलापुर के बीच एक बिल्कुल नए (ग्रीनफील्ड) 6-लेन कॉरिडोर को मंजूरी दी है. कुल लागत: 19,142 करोड़ रुपये कुल लंबाई: 374 किलोमीटर रूट: नासिक फाटा से खेड़ तक (पुणे और अहमदनगर होते हुए) क्यों खास है यह प्रोजेक्ट? अभी नासिक से सोलापुर जाने में लोगों को भारी ट्रैफिक और संकरे रास्तों का सामना करना पड़ता है. यह नया कॉरिडोर एक ‘ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट’ है, जिसका मतलब है कि इसके लिए नई जमीन का अधिग्रहण कर बिल्कुल नया रास्ता बनाया जाएगा. यह मौजूदा सड़कों पर दबाव कम करेगा और शहरों के बीच से गुजरने के बजाय बाईपास के जरिए कनेक्टिविटी देगा. आर्थिक और धार्मिक महत्व यह कॉरिडोर महाराष्ट्र के दो प्रमुख आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़ेगा. नासिक, जो कि अंगूर की खेती और धार्मिक पर्यटन (त्र्यंबकेश्वर, शिरडी के पास) के लिए प्रसिद्ध है, अब सोलापुर जैसे टेक्सटाइल हब से सीधे जुड़ जाएगा. इससे अहमदनगर और बीड जैसे जिलों को भी बड़ा फायदा होगा. माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) की लागत कम होगी और सब्जियों व फलों को मंडियों तक पहुंचाना आसान हो जाएगा. यह प्रोजेक्ट सूरत-चेन्नई इकोनॉमिक कॉरिडोर का भी एक अहम हिस्सा बनेगा. 2. ओडिशा: NH-326 का चौड़ीकरण और मजबूती सरकार ने पूर्वी भारत पर भी विशेष ध्यान दिया है. ओडिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग-326 (NH-326) के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण को मंजूरी दी गई है. कुल लागत: 1,526 करोड़ रुपये कुल लंबाई: 206 किलोमीटर इलाका: मलकानगिरी से कोरापुट तक कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव यह प्रोजेक्ट सिर्फ सड़क बनाना नहीं है, बल्कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. यह हाईवे ओडिशा के मलकानगिरी और कोरापुट जिलों से गुजरता है, जो वामपंथी उग्रवाद (LWE) या नक्सलवाद से प्रभावित माने जाते रहे हैं. अच्छी सड़कें यहां सुरक्षा बलों की पहुंच आसान बनाएंगी और स्थानीय लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ेंगी. यह हाईवे ओडिशा को दो पड़ोसी राज्यों आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है. इसके चौड़ीकरण से इन तीनों राज्यों के बीच व्यापारिक और सामाजिक आवाजाही सुगम होगी.

श्री राम जन्मभूमि परिसर में मां अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर रक्षा मंत्री ने की धर्मध्वजा की स्थापना

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय वार्षिकोत्सव पर अयोध्या पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह  श्री राम जन्मभूमि परिसर में मां अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर रक्षा मंत्री ने की धर्मध्वजा की स्थापना भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा, भारत की आध्यात्मिक शक्ति की प्राण प्रतिष्ठा है- राजनाथ सिंह गगन में जब तक चंद्र और दिवाकर विद्यमान हैं, तब तक सनातन आस्था की ये धर्मध्वजा लहराती रहे – राजनाथ सिंह ऑपरेशन सिंदूर में हमने भगवान राम की युद्ध में भी मर्यादा न छोड़ने की शिक्षा का पालन किया- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह  अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु रामलला के विराजमान होने के प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह के द्वितीय वार्षिकोत्सव में शामिल होने, आज देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अयोध्या धाम पहुंचे। इस पावन अवसर पर उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी में हनुमान जी का दर्शन पूजन कर, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु रामलला के दर्शन किये। इसके बाद उन्होंने मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में बने में मां अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा को स्थापित किया।इस दौरान अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने अपने मनोभावों को व्यक्त करते हुए कहा कि “नाथ आजु मैं कहा न पावा”। ऐसा लग रहा है कि जीवन में मैं जो पाना चाहता था, वह सब कुछ मुझे मिल गया। राघवेंद्र सरकार ने इस दिन के लिए स्वयं मुझे चुना था, इसलिए आज यह अवसर मुझे मिल रहा है।  अयोध्या की हर गली, हर चौराहा क्या पूरा भारतवर्ष आज राममय है रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यशाली दिन बताते हुए कहा, "आज से दो वर्ष पूर्व जब प्रभु श्रीराम यहां पुनर्प्रतिष्ठित हुए, वो समस्त भारतवासियों के लिए गौरव का ऐतिहासिक क्षण था। प्रभु श्रीराम अपनी कीर्ति से आज केवल भारतवर्ष ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को विभूषित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या की हर गली-हर चौराहा राममय हो गया हो। कनक भवन, दशरथ महल, हनुमानगढ़ी, संपूर्ण अयोध्या मां सरयु की गोद में शोभायमान हो रही है। यह आभा केवल अयोध्या क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण अवध और भारतवर्ष आज राममय है। उन्होंने इस दिन को गौरवपूर्ण बताते हुए याद दिलाया कि यह वही भूमि है, जिसने वर्षों तक भगवान राम के लिए असहनीय बलिदान दिया, अपमान सहा, लेकिन आस्था को कभी डिगने नहीं होने दिया। अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा को राजनाथ सिंह ने भारत की आध्यात्मिक शक्ति की प्राण प्रतिष्ठा कहा। उन्होंने कहा, हम सभी पिछले अनेक पीढ़ियों की तुलना में अत्यतं सौभाग्यशाली हैं कि हमने वह क्षण अपनी आंखों से देखा।  राम मंदिर आंदोलन, दुनिया का सबसे ग्रैंड नैरेटिव है राम मंदिर आंदोलन को उन्होंने दुनिया का सबसे ग्रैंड नैरेटिव बताते हुए कहा कि यह आंदोलन भूगोल और समय दोनों के हिसाब से अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि भारत से लेकर पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड जैसे अनेकों देश जहां हिंदुओं के अलावा अन्य समुदायों के लोग भी प्रभु राम से खुद को जुड़ा हुआ मानते हैं, यह उन सब राम को मानने वालों का आंदोलन था। 500 वर्षों के लम्बें अहिंसक संघर्ष से चलने वाला ऐसा आंदोलन इतिहास में कहीं देखने को नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या में केवल श्रीराम मंदिर का ही निर्माण नहीं हुआ है बल्कि हवाई अड्डा, रेल नेटवर्क, रोड कनेक्टिविटी के साथ उद्योग, व्यापार का सभी क्षेत्रों में अयोध्या विकास के नये आयाम रच रही है। विकास की यह धारा केवल अयोध्या तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे अवध प्रांत से लेकर देश के कोने-कोने तक पहुंच रही है। अवधपुरी की इस विकास यात्रा के लिए उन्होंने डबल इंजन सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और सफल प्रयास की सराहना की और बधाई दी। ऑपरेशन सिंदूर में हमने आतंकियों को उनके ठिकानों में घुस कर सबक सिखाया रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए प्रभु श्रीराम की मर्यादा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा जिस प्रकार प्रभु श्रीराम ने युद्ध में मर्यादा न छोड़ने की शिक्षा हम सबको दी है, उसी प्रकार हमारी सेना ने भी सीमित, नियंत्रित और उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई की। ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकियों को सबक सिखाना था, हमने उनके ठिकाने में घुस कर सबक सिखाया है। साथ ही उन्होंने बताया कि जिस तरह भगवान राम का दिव्य-भव्य मंदिर आयोध्या धाम में प्रतिष्ठित है, उसी तरह पुनौराधाम में मां जानकी की जन्मस्थली में भव्य मंदिर का भी निर्माण हो रहा है। अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने प्रार्थना की, "जब तक गगन में चंद्र और दिवाकर विद्यमान हैं, तब तक सनातन आस्था की ये धर्मध्वजा लहराती रहे। प्रभु राम हम सबको कर्तव्य का मार्ग दिखाएं।"

पुलिस मुख्यालय परिवार द्वारा चार सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों को भावभीनी विदाई

पुलिस महानिदेशक ने सभी को स्‍मृति चिन्‍ह भेंट किए भोपाल  पुलिस मुख्‍यालय की विभिन्‍न शाखाओं से माह दिसंबर में सेवानिवृत्‍त चार कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा नेबुधवार को भावभीनी विदाई दी। डीजीपी ने सभी को प्‍लांट एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए और उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों को उनके विभिन्‍न स्‍वत्‍व (क्‍लेम) भुगतान के आदेश भी प्रदान किए गये। नवीन पुलिस मुख्‍यालय भवन कॉन्‍फ्रेंसहॉल में आयोजित विदाई समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशक श्री अनिल कुमार, पुलिस महानिरीक्षक श्री अंशुमान सिंह एवं अन्‍य पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों के परिजन उपस्थित थे। पुलिस मुख्‍यालय से सेवानिवृत्‍तमान सेवी उप पुलिस अधीक्षक विशेष शाखा श्री भगवानदास विधानी, कार्यवाहक उप पुलिस अधीक्षक सीआईडी श्रीमती कल्‍पना शर्मा मिश्रा, सूबेदार (एम) विशेष शाखा श्री ओम नारायण द्विवेदी तथा प्रधान आरक्षक (एम) विशेष शाखा श्रीमती स्‍वराजवती वर्मा को पुलिस मुख्‍यालय परिवार ने बुधवार को भावभीनी विदाई दी। सहायक पुलिस महानिरीक्षक सुश्री इरमीन शाह ने सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों के कार्यकाल पर प्रकाश डाला। विदाई समारोह में मौजूद अधिकारियों ने सेवानिवृत कर्मचारियों की मेहनत और लगन की सराहना की।  

रायपुर: ‘बस्तर पंडुम 2026’ महोत्सव से रंगेगा आदिवासी कला-संसार, 10 जनवरी से शुरू

रायपुर : 'बस्तर पंडुम 2026’ से सजेगा आदिवासी कला-संसार बस्तर की लोक-संस्कृति का महोत्सव 10 जनवरी से 06 फरवरी तक चलेगा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दिशा निर्देश पर छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल बस्तर संभाग की लोक-संस्कृति, परंपरा और विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए बस्तर पंडुम 2026 के आयोजन की तैयारियां शुरु कर दी गई है। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026 में “बस्तर पंडुम 2026” का आयोजन जनपद, जिला एवं संभाग स्तर पर प्रतियोगात्मक स्वरूप में किया जाएगा। यह आयोजन बस्तर अंचल की लोककला, शिल्प, नृत्य, गीत-संगीत, पारंपरिक व्यंजन, बोली-भाषा, वेश-भूषा, आभूषण, वाद्य यंत्र, नाट्य एवं जनजातीय जीवन-पद्धति के संरक्षण और संवर्धन का एक भव्य मंच बनेगा। राज्य शासन ने बस्तर संभाग के सभी सात जिलों-बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कांकेर, कोण्डागांव एवं नारायणपुर-में इस उत्सव को व्यापक सहभागिता के साथ आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग की 1885 ग्राम पंचायतों से जुड़े 32 जनपद मुख्यालयों में 12 विधाओं पर आधारित प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। ग्राम पंचायत स्तर से चयनित लोक कलाकारों और कला दलों को निःशुल्क ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से जनपद स्तरीय प्रतियोगिता में आमंत्रित किया जाएगा। पहले चरण में जनपद स्तरीय प्रतियोगिताएं 10 से 20 जनवरी 2026 के बीच आयोजित होंगी। प्रत्येक विधा से एक-एक विजेता दल का चयन किया जाएगा, जिन्हें 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। जनपद स्तर पर आयोजन के लिए प्रत्येक जनपद पंचायत को 5 लाख रुपये का बजट आबंटित किया गया है। दूसरे चरण में जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं 24 से 29 जनवरी 2026 तक आयोजित की जाएंगी। जिला स्तर पर प्रत्येक विधा के विजेता दल को 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए प्रत्येक जिले को 10 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। अंतिम और सबसे भव्य चरण के रूप में संभाग स्तरीय प्रतियोगिता 2 से 6 फरवरी 2026 तक जगदलपुर, जिला बस्तर में आयोजित होगी। इसमें सातों जिलों से चयनित 84 विजेता दल भाग लेंगे। संभाग स्तर पर प्रथम पुरस्कार 50 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 30 हजार रुपये, तृतीय पुरस्कार 20 हजार रुपये तथा शेष 48 प्रतिभागी दलों को 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस महोत्सव की विशेषता यह होगी कि इसमें केवल वही कलाकार भाग ले सकेंगे, जो बस्तर संभाग के वास्तविक मूल निवासी हैं और जनजातीय लोक कला विधाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही, गांवों और कस्बों में अपनी कला से पहचान बना चुके वरिष्ठ कलाकारों के साथ-साथ नवोदित कलाकारों को भी मंच प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक स्तर पर विजेता दलों को पुरस्कार राशि के साथ प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह (फोटो फ्रेम) प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। आयोजन को जनउत्सव का स्वरूप देने के लिए समाज प्रमुखों, वरिष्ठ नागरिकों, आदिवासी मुखियाओं, जनप्रतिनिधियों एवं संस्कृति प्रेमियों को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने हेतु प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया के माध्यम से बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इस संपूर्ण आयोजन के लिए संचालनालय, संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। संस्कृति विभाग से युगल तिवारी, नोडल अधिकारी एवं कार्यक्रम संयोजक (मोबाइलः +91-94063-98080) को आयोजन का दायित्व सौंपा गया है। समन्वय हेतु प्रशांत दुबे (मोबाइलः +91-75093-62263) एवं भाविन राठौर (मोबाइलः +91-99071-41307) को नामांकित किया गया है। सभी जिलों को अपने-अपने स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त कर विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य शासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि “बस्तर पंडुम 2026” को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध, सुव्यवस्थित और गरिमामय ढंग से आयोजित किया जाए, ताकि बस्तर की लोक-संस्कृति की असली पहचान को सहेजते हुए उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।

एक ओर भारत में विदा हुआ 2025, दूसरी ओर दुनिया में नए साल 2026 का आगाज़

नई दिल्ली  भारत के कई राज्यों में 2025 का आखिरी सूर्यास्त हो चुका है। भगवान जगन्नाथ के शहर पुरी और पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में 2025 में लोगों ने आखिरी बार आज सूर्यास्त देखा। अब नए साल 2026 के दस्तक की तैयारी है। इस बीच न्यूजीलैंड में रात्रि 12 बजे का वक्त हो गया है और नए साल की शुरुआत हो चुकी है। न्यूजीलैंड दुनिया का वह देश है, जहां टाइमजोन के हिसाब से सबसे पहले किसी दिन की शुरुआत होती है। वहीं अमेरिका के हाउलैंड आइलैंड और बेकर आइलैंड में सबसे आखिर में दिन शुरू होता है। ऑकलैंड ने 2026 का स्वागत न्यूजीलैंड की सबसे ऊंची इमारत, स्काई टॉवर से लॉन्च की गई आतिशबाजी के साथ किया। ऑकलैंड में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में मशहूर बॉल ड्रॉप होने से 18 घंटे पहले आधी रात होती है। पांच मिनट के इस शो में 787 फुट ऊंचे स्काई टॉवर की अलग-अलग मंजिलों से 3,500 आतिशबाजी की गई। इससे पहले पैसिफिक आइलैंड देश किरिबाती दुनिया का पहला देश बन गया जिसने 2026 का स्वागत किया। लाइन आइलैंड्स द्वीप में 12 बजते ही दुनिया भर में नए साल के जश्न की आधिकारिक शुरुआत हुई थी। वहीं अगले कुछ घंटों में कई देश नए साल का स्वागत करेंगे। इसकी शुरुआत ओशिनिया के कुछ हिस्सों से होगी। उसके बाद पूर्वी एशिया, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका में नए साल का जश्न मनाया जाएगा। जश्न के अलग-अलग रूप भारत समेत कई देशों में जश्न की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। अलग-अलग देशों में नए साल को मनाने का अलग-अलग तरीका भी है। जहां स्पेन के लोग अच्छी किस्मत के लिए आधी रात को 12 अंगूर खाकर नए साल का स्वागत करते हैं, वहीं जापान में नए साल के स्वागत में मंदिरों में 108 बार घंटियां बजाई जाती हैं। इसी तरह ब्राजील के लोग नए साल पर सफेद कपड़े पहनते हैं वहीं समुद्र को फूल अर्पित करते हैं। वहीं स्कॉटलैंड में नए साल का जश्न ‘हॉगमने’ के नाम से मनाया जाता है, जिसमें सड़कों पर दावत उड़ाई जाती हैं।  

आरडीएसएस अंतर्गत पश्चिम मप्र का 86वां सब स्टेशन ऊर्जीकृत

भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि शासन की महत्वपूर्ण रिवेम्प्ड डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) अंतर्गत पश्चिम क्षेत्र का 86वां 33/11 केवी सब स्टेशन इंदौर संभाग के खरगोन जिले के बलसगांव पाडल्या में ऊर्जीकृत किया गया है। पांच एमवीए के इस ग्रिड से हजारों उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में ज्यादा गुणवत्ता से बिजली मिलेगी। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया योजना में प्रदेश का पहला ग्रिड इंदौर जिले के ईमलीखेड़ा में तैयार हुआ था। अब तक इंदौर शहर वृत्त और इंदौर ग्रामीण वृत्त में कुल 13 सब स्टेशन तैयार कर बिजली वितरित की जा रही है। उज्जैन जिले में 12, शाजापुर 8, रतलाम 9, देवास 5, खरगोन 6, बड़वानी 4, खंडवा 8, बुरहानपुर 7, झाबुआ 5, धार 2, मंदसौर 3, नीमच में एक सब स्टेशन तैयार होकर विद्युत आपूर्ति सेवा प्रदान कर रहे है। श्री सिंह ने बताया कि आरडीएसएस अंतर्गत 5 एमवीए क्षमता के इन ग्रिडों से कंपनी की विद्युत वितरण क्षमता 430 एमवीए बढ़ी है।