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5 हजार से अधिक वाहनों के माध्यम से गोदाम से दुकान तक निगरानी की मजबूत चेन

जीपीएस युक्त वाहनों के प्रयोग से यूपी में खाद्यान्न उठान में बढ़ी पारदर्शिता 5 हजार से अधिक वाहनों के माध्यम से गोदाम से दुकान तक निगरानी की मजबूत चेन  डोर स्टेप डिलीवरी से खाद्यान्न चोरी पर निर्णायक वार, जन वितरण प्रणाली में खत्म हुई कालाबाजारी लखनऊ  उत्तर प्रदेश में जनवितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्न को चोरी, लीकेज और गड़बड़ी से मुक्त करने की दिशा में जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम एक गेम चेंजर बनकर उभरा है। 5 हजार से अधिक वाहनों के माध्यम से अनाज डिपो से उचित दर विक्रेताओं की दुकानों तक खाद्यान्न की आवाजाही अब पूरी तरह डिजिटल निगरानी में है। सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी व्यवस्था और जीपीएस ट्रैकिंग की वजह से खाद्यान्न की एक-एक बोरी पर नजर रखी जा रही है, जिससे चोरी और कालाबाजारी पर रोक लगी है।  डिजिटल निगरानी से खत्म हुई कालाबाजारी प्रदेश में खाद्यान्न के उठान कार्यों में लगे 5000 से अधिक वाहनों में जीपीएस डिवाइस इंस्टाल की जा चुकी है। इससे भारतीय खाद्य निगम के डिपो से उचित दर दुकानों तक होने वाला पूरा परिवहन रियल टाइम ट्रैक किया जा रहा है। वाहन कहां से चला, कहां रुका और तय समय में गंतव्य तक पहुंचा या नहीं, हर जानकारी कंट्रोल सिस्टम में दर्ज हो रही है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि रास्ते में खाद्यान्न की हेराफेरी, डायवर्जन और कालाबाजारी लगभग समाप्त हो गई है। धान और मोटे अनाज की खरीद में भी सख्त निगरानी खरीफ विपणन सत्र 2025-26 में धान खरीद के दौरान भी जीपीएस ट्रैकिंग व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है। प्रदेश के सभी जनपदों में क्रय केन्द्रों से राइस मिलों तक धान परिवहन में प्रयुक्त 3773 वाहनों में जीपीएस डिवाइस इंस्टाल की गई है। इसके अलावा मोटे अनाज मक्का, ज्वार और बाजरा के परिवहन के लिए 1428 वाहनों को भी जीपीएस से जोड़ा गया है। इससे सरकारी खरीद से लेकर भंडारण डिपो तक की पूरी सप्लाई चेन पारदर्शी हो गई है। सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी से सिस्टम हुआ मजबूत प्रदेश में ब्लॉक गोदामों की व्यवस्था समाप्त कर सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी मॉडल लागू किया गया है। इसके तहत भारतीय खाद्य निगम के डिपो से सीधे उचित दर विक्रेताओं की दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है। यह पूरा कार्य ई-टेंडर के माध्यम से नियुक्त ठेकेदारों से कराया जा रहा है जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है और जवाबदेही तय हुई है। जीपीएस ट्रैकिंग के साथ यह मॉडल जनवितरण प्रणाली में पारदर्शिता की रीढ़ बन गया है। निर्बाध और सुरक्षित वितरण प्रणाली का निर्माण प्रदेश में चयनित लाभार्थियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 में अभी तक कुल 8.03 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न और मोटे अनाजों का आवंटन किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अंत्योदय लाभार्थियों हेतु 36850.35 मीट्रिक टन चीनी का आवंटन किया जा चुका है। जीपीएस ट्रैकिंग व्यवस्था के कारण यह सुनिश्चित हो रहा है कि यह खाद्यान्न बिना चोरी, बिना कटौती और सही समय पर लाभार्थियों तक पहुंचे। योगी आदित्यनाथ सरकार का स्पष्ट संदेश है कि सरकारी खाद्यान्न अब रास्ते में गायब नहीं होगा। तकनीक के सहारे निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और स्मार्ट सिस्टम से खाद्यान्न चोरी जैसे पुराने संकट को भी जड़ से खत्म किया जा सकता है।

BJP के नेतृत्व वाली महायुति ने महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव में 68 सीटों पर किया कब्जा, बिना एक भी वोट डाले

मुंबई  महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले महाराष्ट्र नगर निकाय और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव से पहले बीजेपी-नेतृत्व वाली महायुति ने बड़ी बढ़त बना ली है. नामांकन वापसी की अंतिम तारीख के बाद विभिन्न नगर निकायों में महायुति के 68 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए. इन 68 सीटों में से बीजेपी को 44 सीटें, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 22 सीटें और अजित पवार की एनसीपी को 2 सीटें मिली हैं. सबसे ज्यादा निर्विरोध जीत ठाणे जिले की कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में दर्ज हुई. इसके अलावा पुणे, पिंपरी-चिंचवाड, पनवेल, भिवंडी, धुले, जलगांव और अहिल्यानगर से भी सीटें महायुति के खाते में गईं. पुणे में वार्ड नंबर 35 से बीजेपी उम्मीदवार मंजूषा नागपुरे और श्रीकांत जगताप को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया. केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने इसे बीजेपी के कामकाज पर जनता के भरोसे का परिणाम बताया और दावा किया कि पुणे का अगला मेयर बीजेपी का होगा. समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए मोहोल ने कहा, "हमारा लक्ष्य 125 सीटें जीतना है. इनमें से दो सीटें निर्विरोध जीती जा चुकी हैं, अब 123 सीटें शेष हैं." उद्धव गुट का आरोप भाजपा के प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कहा कि इन घटनाक्रमों से राज्य भर के शहरी नगर निकायों में पार्टी की बढ़ती पकड़ का पता चलता है. पार्टी नेताओं ने इस रुझान का श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की लोकप्रियता और राज्य इकाई के अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा निर्देशित चुनावी रणनीति को दिया. हालांकि, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने इस पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों को ईडी-सीबीआई की धमकी या सौदेबाज़ी के जरिए नाम वापस लेने पर मजबूर किया गया. सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए. प्रियंका चतुर्वेदी ने मुंबई में पत्रकारों से कहा, "लोकतंत्र को खत्म करने का यह एक ऐसा तरीका है जिसमें विपक्षी उम्मीदवार ईडी और सीबीआई की धमकियों से डराकर या रिश्वत देकर उनसे समझौता कर लेते हैं. वे अपनी जीत खरीदने की कोशिश कर रहे हैं और यह शर्म की बात है कि चुनाव आयोग इस पर चुप्पी साधे हुए है." महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों, जिनमें मुंबई की बीएमसी भी शामिल है, के चुनाव 15 जनवरी को होंगे और मतगणना अगले दिन होगी.  

भोपाल में अवैध कॉलोनियों का अधिग्रहण होगा, बचे प्लाटों को बेचा जाएगा

 भोपाल  भोपाल जिले में अब तक अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई कर उन्हें रोकने के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन इनमें कोई खास सफलता नहीं मिल सकी। ऐसे में अब प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों का अधिग्रहण करने की योजना बनाई है। जिसके तहत नए साल में जिला प्रशासन, नगर निगम और जिला पंचायत द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई अवैध कॉलोनियों का अधिग्रहण किया जाएगा, इसके बाद इनमें बचे हुए प्लाटों को बेचा जाएगा। इन प्लाटों से जो भी धन प्रशासन को प्राप्त होगा, उसी से कॉलोनियों में सड़क, बिजली, पानी, सीवेज आदि की व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। इससे लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। बता दें कि जिले की हुजूर, कोलार तहसील में हर साल 100 से अधिक अवैध कॉलोनियों का विकास हो रहा है, लेकिन इनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। शहर में हुजूर, कोलार और बैरसिया तहसील क्षेत्र के अंतर्गत पिछले छह से आठ साल में तेजी से बसाहट हो रही है। यहां लोग कॉलोनियों में अपने बजट के अनुसार प्लाट खरीदकर उनमें मकान बनाकर रह रहे हैं। इन अवैध कॉलोनियों के कॉलोनाइजर लोगों को बिजली, पानी, सड़क, सीवेज, पार्क आदि की सुविधाओं का दावा कर प्लाट बेचकर मोटी रकम वसूल कर लेते हैं, लेकिन बाद में ऐसी कोई भी सुविधा लोगों को नहीं मिलती है। इससे परेशान होकर रहवासी एसडीएम, तहसील और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाना शुरू कर देते हैं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए कलेक्टर ने अवैध कालोनियों को अधिग्रहित कर विकास कार्य करने की योजना बनाई है। निरंतर शिकायतों के कारण लिया फैसला कलेक्ट्रेट में लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि भूमाफिया सस्ती कृषि भूमि खरीदकर खेतों में मुरम डालकर प्लाट काट रहे हैं और कालोनी बताकर बेच रहे हैं। कई जगह न सड़क है, न नाली, न बिजली-पानी, फिर भी प्लाट टीएंडसीपी से स्वीकृत कालोनियों के बराबर दामों पर बेचे जा रहे हैं। इससे आम लोग भविष्य में बुनियादी सुविधाओं और रजिस्ट्री जैसी समस्याओं में फंस सकते हैं। ऐसे में अवैध कालोनी काटने वालों पर कार्रवाई और लोगों को सुविधा देने अधिग्रहण का फैसला लिया गया है। नौ अवैध कॉलोनियों को नोटिस किए जारी अधिकारियों ने बताया कि जिन कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित किया जा रहा है। अब तक नौ अवैध कॉलोनियों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं, प्लाटिंग रोकी गई है और संबंधित बिल्डरों के खिलाफ वैधानिक प्रक्रिया शुरू की गई है। आने वाले दिनों में अभियान और तेज किया जाएगा। इन क्षेत्रों को किया चिह्नित अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की शुरुआत मुबारकपुर, सेवनिया ओंकारा, पिपलिया बेरखेड़ी, कुराना, थुआखेड़ा, सुरैया नगर, छावनी पठार, कान्हासैया, सिंकदराबाद, शोभापुर, जहेज, कोलुआखुर्द, नरेला वाज्याफ्त, बंगरसिया, अरेड़ी, इब्राहिमपुरा, परेवाखेड़ा, हज्जामपुरा ईंटखेड़ी सड़क, जगदीशपुर, अरवलिया, चौपड़ा कलां, बांसिया, गोलखेड़ी, इमलिया, मालीखेड़ी, दामखेड़ा, कोलुआ सहित आदि को चिह्नित किया गया है। 100 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों की लिस्ट तैयार हुजूर तहसील में आने वाली 100 से अधिक अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार की जा चुकी है। जब तक अवैध कॉलोनियों को लेकर शासन स्तर से नए नियम लागू नहीं होते हैं, तब तक प्रशासन पुराने प्रविधानों के तहत कार्रवाई करेगा। इसी के चलते इन 100 अवैध कॉलोनियों में प्लाट बेचने वाले कॉलोनाइजर व भूमि स्वामी पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद शहरी क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत व प्रशासन द्वारा अधिग्रहण किया जाएगा। इन कॉलोनियों में शेष रह गए प्लाटों को बेचकर आने वाले रुपये से सड़क, नाली, बिजली आदि सुविधाएं विकसित की जाएंगी। प्लाट बेचने वालों पर होगी कार्रवाई     अवैध कॉलोनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत 100 से अधिक कॉलोनियों को चिह्नित किया गया है, इनमें प्लाट बेचने वालों पर कार्रवाई होगी। इसके अलावा शहरी क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत व एसडीएम स्तर पर अवैध कॉलोनियों का अधिग्रहण शुरू होगा, जिससे इनमें बचे प्लाटों को बेचकर आने वाले धन से मूलभूत सुविधाओं का कार्य करवाया जा सके। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर  

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर के लिए उपभोक्ताओं को मिलेगा विकल्प, प्रीपेड या पोस्टपेड का चयन कर सकेंगे

लखनऊ   नियामक आयोग द्वारा जारी नई कास्ट डाटा बुक में यह साफ कर दिया गया है कि बिजली उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के तहत प्रीपेड या पोस्टपेड विकल्प चुनने की पूरी आज़ादी है। यह अधिकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अंतर्गत उपभोक्ताओं को मिला हुआ है। तमाम उपभोक्ता इस तरह से जबरन प्रीपेड मीटर लगाए जाने का विरोध कर रहे हैं। विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) का हवाला देते हुए आयोग से लगातार मांग की जा रही है कि अनिवार्य तौर पर प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। यह धारा उपभोक्ताओं को अधिकार देती है कि वे अपने लिए प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर का विकल्प चुनें। सोमवार को उपभोक्ता परिषद ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देकर उपभोक्ताओं के हक में आदेश जारी करने की मांग की है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और केंद्रीय व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए अब नियामक आयोग को स्पष्ट आदेश जारी करने चाहिए ताकि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को विकल्प ही माना जाए। टैरिफ आदेश में आयोग ने कहा था कि चूंकि इस संबंध में कई हाई कोर्ट में मामला सुना जा रहा है, इसलिए वह कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं करना चाहता। अब जबकि आयोग के पास सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं तो अब वह इसका हवाला देकर स्पष्ट आदेश जारी करे। उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि तत्काल कॉस्ट डेटा बुक भी रिवाइज करे ताकि मीटर के दाम तय हो सकें। उपभोक्ताओं के पास यह अधिकार राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि कानून के अनुसार उपभोक्ता चाहें तो सिक्योरिटी राशि जमा कर पोस्टपेड कनेक्शन जारी रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक राज्य में इस प्रावधान का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा था, लेकिन नई कास्ट डाटा बुक ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।  

भारत ने चिनाब पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट शुरू किया, पाकिस्तान बेबस, नहीं मिली कोई जानकारी

 इस्लामाबाद केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर स्थित 260 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-दो जलविद्युत परियोजना को भारत की मंजूरी ने पाकिस्तान को मिर्ची लगा दी है। पाकिस्तान इसे सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) का उल्लंघन बता रहा है। लेकिन मजे की बात ये है कि भारत ने इस दशकों पुरानी संधि को पिछले साल ही निलंबित कर दिया था। इसके बाद से ही भारत अपनी मर्जी के मुताबिक पाक की ओर जाने वाली नदियों पर परियोजनाओं को मंजूरी दे रहा है। ताजा बयान में पाकिस्तान की बेबसी साफ झलक रही है। पाकिस्तान पहले भी कुछ मौकों पर भारत के सामने नदियों के पानी को लेकर गिड़गिड़ा चुका है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने गुरुवार को कहा कि इस परियोजना के बारे में भारत ने कोई पूर्व सूचना या अधिसूचना नहीं दी, जो 1960 की सिंधु जल संधि का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और द्विपक्षीय समझौतों की अवहेलना करार दिया। पाकिस्तान का दावा है कि संधि के तहत भारत को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) पर सीमित उपयोग की अनुमति है और किसी भी नई परियोजना की जानकारी पाकिस्तान के साथ शेयर करना अनिवार्य है। प्रवक्ता ने कहा- हमने मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं कि भारत चिनाब नदी पर दुलहस्ती स्टेज-द्वितीय परियोजना बनाने की योजना बना रहा है। इस संबंध में कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई, जो गंभीर चिंता का विषय है। पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के एक दिन बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक उपाय लागू किए थे, जिनमें 1960 की सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को स्थगित करना भी शामिल था। विश्व बैंक की मध्यस्थता से गठित आईडब्ल्यूटी 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती आ रही है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा- सिंधु जल के लिए पाकिस्तानी आयुक्त ने भारत में अपने समकक्ष से बताई गई परियोजनाओं की प्रकृति, दायरे और तकनीकी विवरणों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है, और वे यह भी जानना चाहते हैं कि क्या यह एक नई परियोजना है, या किसी मौजूदा संयंत्र में कोई परिवर्तन या अतिरिक्त कार्य है। प्रवक्ता ने कहा कि आईडब्ल्यूटी के तहत, भारत पश्चिमी नदियों पर एकतरफा रूप से किसी भी जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए अपने सीमित हिस्से का दुरुपयोग नहीं कर सकता है। भारत की ओर से पर्यावरण मंत्रालय की एक समिति ने दिसंबर 2025 में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में इस रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना को पर्यावरण मंजूरी दी। यह मौजूदा 390 मेगावाट दुलहस्ती स्टेज-I परियोजना का विस्तार है। समिति ने नोट किया कि परियोजना के पैरामीटर संधि के अनुरूप हैं, लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है। हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिसकी जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ली थी जो पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक प्रॉक्सी संगठन है। संधि निलंबन के बाद भारत सिंधु बेसिन में कई परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जैसे सावलकोट (1,856 मेगावाट), रतले, बुरसर, पाकल दुल आदि। भारतीय सूत्रों के अनुसार, ये कदम जल सुरक्षा और जलविद्युत क्षमता बढ़ाने के लिए हैं।

आरजीपीवी में गड़बड़ियों के बाद कुलपति पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू, राजभवन ने किया ऐलान

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में लंबे समय से चल रहे विवादों और गड़बड़ियों के आरोपों के बाद अब नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। राजभवन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार कुलपति पद के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 10 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। दरअसल, आरजीपीवी हाल के वर्षों में लगातार विवादों में रहा है। विश्वविद्यालय के प्रशासन, वित्तीय लेनदेन और शैक्षणिक प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इन्हीं आरोपों के बीच हाल ही में कुलपति ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद से विश्वविद्यालय का प्रशासन अस्थायी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहा है। मूल्यांकन प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों आपत्तियां आई थीं सामने दरअसल, कुलपति के खिलाफ विश्वविद्यालय की आंतरिक कार्यप्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आई थीं। छात्र संगठनों ने इन मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया था। बढ़ते दबाव और विवाद की स्थिति को देखते हुए कुलपति ने पद छोड़ना उचित समझा। इसके बाद उच्च स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि नए कुलपति की नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की जाए। सरकार और राजभवन दोनों ही बेहद सतर्क गौरतलब है कि आरजीपीवी प्रदेश का सबसे बड़ा तकनीकी विश्वविद्यालय है, जिससे सैकड़ों इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थान जुड़े हुए हैं। ऐसे में कुलपति की नियुक्ति को लेकर सरकार और राजभवन दोनों ही बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि नए कुलपति के सामने विश्वविद्यालय की छवि सुधारने, प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी। चार वर्ष का होगा कुलपति का कार्यकाल राजभवन की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि कुलपति की नियुक्ति राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम 1998 के तहत गठित चयन समिति की अनुशंसा पर राज्यपाल द्वारा की जाएगी। नियुक्त कुलपति का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से चार वर्ष का होगा।अधिसूचना के मुताबिक कुलपति विश्वविद्यालय का सर्वोच्च शैक्षणिक और प्रशासनिक अधिकारी होगा। ऐसे में अभ्यर्थी से उच्च कोटि की शैक्षणिक योग्यता, मजबूत प्रशासनिक अनुभव, सत्यनिष्ठा, नैतिकता और संस्थागत प्रतिबद्धता की अपेक्षा की गई है। साथ ही, अभ्यर्थी का प्रौद्योगिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित और ख्यातिप्राप्त होना अनिवार्य बताया गया है। आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में होगी पूरी आवेदन के साथ उम्मीदवार को अपने शैक्षणिक, प्रशासनिक और शोध करियर का विस्तृत विवरण देना होगा। इसके अलावा यह घोषणा भी अनिवार्य होगी कि अभ्यर्थी के विरुद्ध लोकायुक्त, आर्थिक अपराध शाखा या किसी अन्य एजेंसी में किसी प्रकार की जांच या आपराधिक मामला लंबित नहीं है। वर्तमान में सेवा में कार्यरत अभ्यर्थियों को अपने नियुक्तिकर्ता से यह प्रमाण पत्र भी देना होगा कि उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित नहीं है। आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा, जबकि दूसरे चरण में ऑनलाइन आवेदन की प्रति, जीवनवृत्त और सभी आवश्यक दस्तावेज पंजीकृत या स्पीड पोस्ट के माध्यम से राजभवन भेजने होंगे। बिना ऑनलाइन आवेदन के प्राप्त किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किए जाने की बात अधिसूचना में साफ तौर पर कही गई है।  

ब्रह्मोस से भी तेज, चीनी मिसाइल DF-12 का बड़ा भाई K-4, पाकिस्तान के लिए बन सकता है काल

नई दिल्ली भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी तकनीक से बनी ‘प्रलय’ टैक्टिकल क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. यह परीक्षण 31 दिसंबर 2025 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किया गया. खास बात यह रही कि एक ही लॉन्चर से दो मिसाइलें एक के बाद एक (साल्वो लॉन्च) दागी गईं और दोनों ने तय लक्ष्य को पूरी सटीकता से भेदा. इस ट्रायल में मिसाइल सिस्टम की सटीकता, भरोसेमंदी और युद्धक्षेत्र में उपयोग की क्षमता साबित हुई. परीक्षण के दौरान आधुनिक ट्रैकिंग सेंसरों ने मिसाइलों की उड़ान पर नजर रखी और यह पुष्टि की कि दोनों मिसाइलें तय रास्ते पर ही आगे बढ़ीं. बंगाल की खाड़ी में तैनात विशेष जहाजों से मिले टेलीमेट्री डेटा ने भी लक्ष्य पर सटीक प्रहार की पुष्टि की. ‘प्रलय’ पूरी तरह स्वदेशी सतह से सतह पर मार करने वाली, ठोस ईंधन से चलने वाली मिसाइल है. इसकी मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर तक है. यह एक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, यानी यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल की तरह ऊंची और तय दिशा में नहीं उड़ती, बल्कि कम ऊंचाई पर रास्ते में दिशा बदल सकती है. इसी वजह से दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणालियों के लिए इसे रोकना मुश्किल हो जाता है. प्रलय मिसाइल रूस की इस्‍कंदर-एम और चीन की DF-12 से कई मायनों में उन्‍नत और ज्‍यादा ताकतवर है. प्रलय मिसाइल अपनी उड़ान के दौरान रास्ते में तेज मोड़ लेने और दिशा बदलने में सक्षम है. इससे यह दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती है. इसमें आधुनिक रिंग लेजर जाइरो आधारित नेविगेशन सिस्टम और अंतिम चरण में लक्ष्य भेदने के लिए उन्नत तकनीक लगी है. डीआरडीओ पहले भी 2021 और 2022 में प्रलय मिसाइल के सफल परीक्षण कर चुका है, लेकिन इस बार का साल्वो लॉन्च ट्रायल बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह साबित हो गया कि एक ही प्लेटफॉर्म से तेजी से कई मिसाइलें दागी जा सकती हैं. यह आधुनिक युद्ध में बेहद जरूरी क्षमता है. इस सफल यूजर ट्रायल के बाद प्रलय मिसाइल के भारतीय सेना में शामिल होने का रास्ता लगभग साफ हो गया है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करती है. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रलय मिसाइल के विकास में किसी विदेशी तकनीक पर निर्भरता नहीं है. इससे भारत की सीमाओं पर, खासकर मौजूदा क्षेत्रीय हालात में, सैन्य ताकत और रोकने की क्षमता (डिटरेंस) मजबूत होगी. इस परियोजना में DRDO के साथ निजी कंपनियों की भी अहम भूमिका रही है. मिसाइल का कैनिस्टराइज्ड लॉन्चर लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने बनाया है. इससे बड़े पैमाने पर उत्पादन और सेना की कई यूनिटों को तेजी से यह सिस्टम देने में मदद मिलेगी. प्रलय मिसाइल इस्‍कंदर-M मिसाइल (रूस) DF-12 मिसाइल (चीन) रेंज: 150 से 500 किलोमीटर रेंज: 500 किलोमीटर रेंज: 420 किलोमीटर रफ्तार: मैक 6.1 (7500 KMPH से ज्‍यादा) रफ्तार: मैक 6 से 7 (8000 KMPH) रफ्तार: हाइपरसोनिक (अनुमानित) वॉरहेड: अधिकतम 1000 किलोग्राम वॉरहेड: अधिकतम 800 किलोग्राम वॉरहेड: 480 किलोग्राम प्रोपल्‍शन: सॉलिड फ्यूल, टू-स्‍टेज प्रोपल्‍शन: सॉलिड फ्यूल, सिंगल स्‍टेज प्रोपल्‍शन: सॉलिड फ्यूल, सिंगल स्‍टेज प्रलय मिसाइल की मारक क्षमता क्या है? प्रलय मिसाइल 150 से 500 किलोमीटर तक की दूरी तक मार कर सकती है. यह एक ठोस ईंधन से चलने वाली अर्ध-बैलिस्टिक (क्वासी-बैलिस्टिक) मिसाइल है. इसमें अलग-अलग प्रकार के पारंपरिक (Conventionl) वारहेड लगाए जा सकते हैं, जिन्हें विभिन्न तरह के लक्ष्यों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. प्रलय मिसाइल का परीक्षण कैसे किया गया? रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 31 दिसंबर 2025 को सुबह करीब 10:30 बजे एक ही लॉन्चर से प्रलय मिसाइलों का परीक्षण किया. यह उड़ान परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन ट्रायल के तहत किया गया था. रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों मिसाइलें तय किए गए रास्ते पर चलीं और ट्रैकिंग सेंसरों ने पुष्टि की कि सभी उड़ान लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे हुए. प्रलय मिसाइल किसने विकसित की है? प्रलय मिसाइल को रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने विकसित किया है. इसके विकास में डीआरडीओ की कई अन्य प्रयोगशालाओं ने भी सहयोग किया है. इनमें शामिल हैं – डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी, एडवांस्ड सिस्टम्स लैबोरेटरी, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, हाई एनर्जी मटेरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी और टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी. इन सभी संस्थानों के संयुक्त प्रयास से प्रलय मिसाइल का विकास किया गया है. कम लागत, ज्यादा ताकत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर DRDO की टीम को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की सैन्य तैयारियों को और मजबूत करेगी. आमतौर पर ऐसे सफल परीक्षणों के बाद ही बड़े स्तर पर खरीद और उत्पादन के फैसले लिए जाते हैं. प्रलय मिसाइल प्रोग्राम को किफायती भी माना जा रहा है. स्वदेशी होने के कारण इसकी लागत विदेशी मिसाइल प्रणालियों की तुलना में कम है. इससे रक्षा बजट का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और भविष्य की तकनीकों पर निवेश बढ़ेगा. नए साल की शुरुआत से ठीक पहले हुआ यह सफल परीक्षण भारत की रक्षा तैयारियों के लिए एक मजबूत संदेश है. प्रलय मिसाइल ने साबित कर दिया है कि भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें खुद पूरी कर सकता है, बल्कि आधुनिक और प्रभावी हथियार प्रणालियों के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. क्या है प्रलय मिसाइल की खासियत? प्रलय एक ठोस ईंधन से चलने वाली, अत्याधुनिक सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल है. इसका वजन करीब 5 टन है और यह 1 टन तक का पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम है. पूरी क्षमता के साथ यह मिसाइल 350 किलोमीटर तक मार कर सकती है, जबकि आधा पेलोड होने पर इसकी रेंज 500 किलोमीटर तक पहुंच जाती है. इस मिसाइल में आधुनिक गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे यह बेहद सटीक निशाना साध सकती है. परीक्षण के दौरान मिसाइल ने तय किए गए रास्ते का पूरी तरह पालन किया और अधिकतम तथा न्यूनतम दोनों रेंज पर अपने सभी लक्ष्य हासिल किए. प्रलय मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी तेज रफ्तार और सटीकता है. इसकी अंतिम गति मैक 6 (7500 KMPH से ज्‍यादा) से अधिक है. इस तरह प्रलय मिसाइल ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के मौजूदा वर्जन से … Read more

ग्वालियर में 315 करोड़ से बनेंगी 10 नई सड़कें, मास्टर प्लान में अतिक्रमण पर होगी सख्त कार्रवाई

ग्वालियर  ग्वालियर शहर की यातायात व्यवस्था को नई रफ्तार देने और बदहाल सड़कों के दाग को धोने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने मास्टर प्लान तैयार किया है। 315 करोड़ रुपए की लागत से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में 10 नई सड़को का निर्माण (New roads construction) किया जाएगा। इन सड़को के बनने से न केवल शहर का 'ट्रैफिक मैप' बदल जाएगा, बल्कि वर्षों से धूल और गड्‌ढों की मार झेल रहे हजारों राहगीरों को बड़ी राहत मिलेगी। विभाग का लक्ष्य इन परियोजनाओं को सत्र 2026-27 तक पूर्ण करने का है। एक विधानसभा क्षेत्र दूसरे से जुड़ेगा खास बात यह है कि ये 10 सड़कें सिर्फ कनेक्टिविटी का जरिया नहीं है, बल्कि ये एक विधानसभा क्षेत्र को दूसरी विधानसभा से जोड़ने वाली कड़ी साबित होंगी। वर्तमान में इनमें से अधिकांश सड़कों की हालत बेहद खस्ता है, जिससे आवागमन जोखिम भरा बना हुआ है। पीडब्ल्यूडी अफसरों के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कुछ मुख्य मार्गों पर वर्क ऑर्डर के साथ काम भी शुरू कर दिया गया है। ग्रामीण विस को बड़ी सौगात: 30 गांव सीधे जुड़ेंगे शहर से इन परियोजनाओं में सबसे महत्वपूर्ण ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की दो बड़ी सड़कें हैं (जड़ेरूआ से बहादुरपुर और खुरैरी से गुहीसर)। करीब 130 करोड़ की लागत से बनने वाली ये सड़कें क्षेत्र के 30 से अधिक गांवों को सीधे ग्वालियर मुख्य शहर की सड़कों से जोड़ देंगी। इससे किसानों और ग्रामीणों को मंडी व अस्पताल पहुंचने में लगने वाला समय आधा रह जाएगा। सावधान, मास्टर प्लान के आड़े आए तो चलेगा पीला पंजा सड़क निर्माण के साथ ही विभाग ने अतिक्रमणकारियों के खिलाफ भी सख्त रुख अपना लिया है। पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने स्पष्ट किया है कि ये सभी सड़कें 'मास्टर प्लान के मानकों के अनुरूप चौड़ी बनाई जाएंगी। निर्माण में बाधा बनने वाले मकान, दुकान या अन्य संपत्तियों को सर्वे के बाद हटाया जाएगा। इसके लिए नगर निगम के साथ मिलकर जल्द ही नोटिस जारी करने की तैयारी है। अवैध संपत्तियों को हटाया जाएगा पीडब्ल्यूडी कार्यपालन यंत्री देवेंद्र भदौरिया ने कहा शहर और ग्रामीण सड़कों के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं। कुछ स्थानों पर काम शुरू भी हो चुका है। ये सड़कें मास्टर प्लान के तहत बनाई जा रही हैं, ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके। सड़क निर्माण के दायरे में आने वाली बाधाओं और अवैध संपत्तियों को हटाया जाएगा।  

बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे का ऐलान, 90 दिन में हिड़मा और बसवाराजू का एनकाउंटर, 6 अन्य की तलाश

बस्तर  बस्तर में नक्सलवाद खत्म करने का काउंटडाउन शुरू हो गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर बनाने की डेडलाइन तय की है। अब इस तारीख तक सिर्फ 90 दिन बचे हैं। 2025 में नक्सलवाद पर बड़ा अभियान चलाया गया। डेढ़ साल में कुल 23 बड़े नक्सली मारे गए हैं। इनमें सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा, नक्सल संगठन सचिव बसवाराजू, गणेश उइके सहित 16 बड़े नक्सली शामिल हैं। भूपति, रूपेश और रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं। अब केवल पोलित ब्यूरो मेंबर देवजी, मिशिर बेसरा और गणपति तीन शीर्ष नक्सली बचे हैं, जो संगठन चला रहे हैं। बस्तर में पापाराव और देवा अपनी जान बचाने के लिए अब भी जंगल में घूम रहे हैं। पुलिस इनकी तलाश कर रही है। बस्तर में 200 से 300 नक्सली बचे नक्सल संगठन में बस्तर के अलग-अलग इलाकों में करीब 200 से 300 आर्म कैडर के नक्सली ही बचे हुए हैं, जो टुकड़ों में यहां-वहां छिपे हुए हैं। नक्सलियों का महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन पूरी तरह से खत्म हो गया है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी नक्सलियों का लगभग सफाया हो गया है। अब फोर्स के लिए इन 90 दिनों में दक्षिण बस्तर डिवीजन को नक्सल मुक्त करना ही सबसे बड़ी चुनौती है। जानकारी के मुताबिक दक्षिण बस्तर के जंगलों में ही देवा और पापाराव अपने साथियों के साथ अलग-अलग टुकड़ियों में छिपे हुए हैं। जबकि मिशिर बेसरा झारखंड में है। कुछ समय पहले देवजी की लोकेशन तेलंगाना-आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ट्राई जंक्शन में थी। हालांकि, वह बार-बार ठिकाने बदल रहा है। इन 90 दिनों में अगर ये 5 से 6 बड़े नक्सली मारे जाते हैं या सरेंडर करते हैं तो बस्तर के फ्रंट लाइन के सभी टॉप लीडर्स खत्म हो जाएंगे। जानिए उन टॉप नक्सलियों के बारे में जिनकी पुलिस को तलाश है… 1 – थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी (61)- देवजी तेलंगाना का रहने वाला है। बसवाराजू के एनकाउंटर के बाद नक्सल संगठन ने थिप्परी तिरुपति को नक्सल संगठन का महासचिव बनाया है। ये नक्सल संगठन में पोलित ब्यूरो मेंबर भी है। वर्तमान में नक्सल संगठन का सबसे टॉप लीडर यही है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की पुलिस इसकी तलाश में जुटी हुई है। इसपर सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही 1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित है। 2. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति (74)- गणपति भी तेलंगाना का रहने वाला है। बसवाराजू से पहले ये ही नक्सल संगठन का महासचिव था। हालांकि, बीमारी और बढ़ती उम्र के चलते इसने करीब 4-5 साल पहले ही संगठन के इस सबसे बड़े पद को छोड़ दिया था। जिसके बाद बसवाराजू को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी। इसपर भी 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित है। 3. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर (62)- भास्कर झारखंड का रहने वाला है। वर्तमान में नक्सलियों का पोलित ब्यूरो मेंबर है। साथ ही ERB का इंचार्ज है। इसपर भी 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित है। 4. पापा राव उर्फ मंगू (56)- पापाराव छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZCM) मेंबर है। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है। पापाराव अपने पास AK-47 राइफल रखता है। बस्तर के जल-जंगल जमीन से वाकिफ है, इसलिए कई बार पुलिस की गोलियों से बचकर निकला है। इसी इसने सरेंडर कर दिया या फिर एनकाउंटर में मारा गया तो नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी खत्म हो जाएगी। 5. देवा बारसे उर्फ सुक्का (48)- देवा सुकमा जिले का पूवर्ती का रहने वाला है। वर्तमान में SZCM कैडर का है। साथ ही नक्सलियों की सबसे खतरनाक टीम बटालियन नंबर 1 प्रभारी है। ये माड़वी हिड़मा का सबसे करीबी साथी रहा है। पुलिस को इसकी तलाश है। अगर पापा राव और देवा दोनों पकड़े या मारे जाते हैं तो दक्षिण बस्तर का इलाका भी शांत हो जाएगा। IG बोले- निर्णायक साल रहा बस्तर के IG सुंदरराज पी ने कहा कि साल 2025 बस्तर पुलिस के लिए नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में काफी निर्णायक साल रहा है। नक्सलियों के गढ़ में घुसकर बड़े लीडरों को मुठभेड़ में ढेर किया गया है। मारे गए माओवादियों के पास से LMG, AK-47, इंसास, SLR जैसे ऑटोमैटिक हथियार बरामद किया गया है। 2 सालों में ऐसे बदल गई परिस्थितियां? 2023 तक बस्तर में नक्सली फोर्स पर हावी थे। कई बड़े हमले किए गए। जवानों की कैजुअल्टी ज्यादा होती थी। लेकिन डेढ़ साल पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के दौरे के दौरान नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन जारी की थी। उन्होंने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक देशभर से नक्सलवाद का सफाया हो जाएगा। साथ ही छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के पुलिस अधिकारियों की बैठक ली। नई स्ट्रेटजी के तहत काम किया। नक्सल ऑपरेशन पर एक-दूसरे राज्य के साथ कॉर्डिनेशन स्थापित करने निर्देश दिए थे। वहीं राज्य में भी पड़ोसी जिलों की पुलिस फोर्स का संयुक्त ऑपरेशन लॉन्च किया गया। नक्सलियों के गढ़ में घुसकर जवान नक्सलियों को घेरकर मारने लगे। यही वजह थी कि नक्सलियों को ज्यादा नुकसान हुआ है। हर 5 से 10 किमी के दायरे में कैंप खोले गए। सड़कें बनीं, इंद्रावती नदी पर पुल बनने से इसका सीधा फायदा पहुंचा और मानसून में भी जवानों का ऑपरेशन जारी रहा।  

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद सागर कलेक्टर ने किया सख्त कदम, हर महीने ‘नो लीकेज’ सर्टिफिकेट अनिवार्य

 सागर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई जनहानि की घटना को गंभीरता से लेते हुए सागर कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी संदीप जी.आर. ने जिले की पेयजल व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पेयजल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर महीने देना होगा 'नो लीकेज' सर्टिफिकेट कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त, परियोजना प्रबंधक (MPUDC) और सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्रों में पाइपलाइनों का सघन निरीक्षण करें। अब से प्रत्येक निकाय को माह के प्रथम सप्ताह में यह प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से जमा करना होगा कि उनके क्षेत्र में कोई भी पाइपलाइन क्षतिग्रस्त नहीं है और पेयजल पूरी तरह शुद्ध है। प्रमुख निर्देश क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों को तुरंत सुधारा जाए, ताकि गंदे पानी का मिश्रण न हो। मरम्मत के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाया जाए। सप्लाई होने वाले पानी के नियमित नमूने लेकर लैब में जांच कराई जाए। दूषित पानी की शिकायत मिलते ही अधिकारी उसे गंभीरता से लें और तत्काल मौके पर सुधार सुनिश्चित करें। जनहानि रोकने के लिए एहतियात कलेक्टर संदीप जी.आर. ने कहा कि समाचार माध्यमों से संज्ञान में आया है कि दूषित जल से नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जिले में ऐसी स्थिति निर्मित न हो, इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। उन्होंने आमजन से भी अपील की है कि जल स्रोतों के पास स्वच्छता बनाए रखें और किसी भी लीकेज की सूचना तुरंत विभाग को दें।