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वेनेजुएला की नई राष्ट्रपति बनीं डेल्सी रोड्रिग्ज

न्यूयार्क. अमेरिकी सेना द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला में मचे भारी राजनीतिक घमासान के बीच देश के सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को देश की कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने का आदेश दिया है। अदालत का कहना है कि यह निर्णय देश की संप्रभुता और प्रशासनिक निरंतरता को बनाए रखने के लिए जरूरी है। कौन हैं डेल्सी रोड्रिग्ज? 56 साल की डेल्सी रोड्रिग्ज वेनेजुएला की राजनीति का एक कद्दावर और अनुभवी चेहरा हैं। वे एक क्रांतिकारी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता, जॉर्ज एंटोनियो रोड्रिग्ज एक वामपंथी गुरिल्ला नेता थे। कानून की पढ़ाई करने वाली डेल्सी पिछले एक दशक में मादुरो सरकार की सबसे भरोसेमंद सहयोगी बनकर उभरी हैं। वह मादुरो सरकार की सशक्त समर्थक रही हैं। मादुरो ने अपनी सरकार का समर्थन करने के लिए डेल्सी को 'शेरनी' तक कहा था। डेल्सी रोड्रिग्ज का राजनीतिक सफर उन्होंने 2013 से 2017 के बीच सूचना और विदेश मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली। जून 2018 में मादुरो ने उन्हें देश का उपराष्ट्रपति नियुक्त किया। मादुरो अक्सर उन्हें 'हजारों लड़ाइयों में परखी हुई एक बहादुर क्रांतिकारी' कहते रहे हैं। अगस्त 2024 में उन्हें तेल मंत्री का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था ताकि वे अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ देश की अर्थव्यवस्था को संभाल सकें। मादुरो को बताया देश का इकलौता राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक ऑडियो संदेश में डेल्सी रोड्रिग्ज ने सख्त तेवर दिखाए। उन्होंने अमेरिकी हिरासत में मौजूद निकोलस मादुरो को ही देश का एकमात्र वैध राष्ट्रपति बताया और अमेरिका से उनके जिंदा होने के सबूत मांगे। उन्होंने कहा, "इस देश का केवल एक ही राष्ट्रपति है और उनका नाम निकोलस मादुरो मोरोस है।" ट्रंप के दावे और विरोधाभास डेल्सी का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के ठीक उलट है, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि रोड्रिग्ज ने राष्ट्रपति पद की शपथ ले ली है और वे वाशिंगटन के साथ सहयोग करने को तैयार हैं। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया था कि अमेरिका फिलहाल वेनेजुएला का शासन चलाने की तैयारी में है। हालांकि, डेल्सी रोड्रिग्ज ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे संप्रभुता पर हमला करार दिया है। फिलहाल कराकस से आ रही तस्वीरों में डेल्सी रोड्रिग्ज को देश के भीतर ही सक्रिय देखा गया है, जिसने उन अफवाहों पर विराम लगा दिया है जिनमें उनके रूस जाने की बात कही जा रही थी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दावा: खनन क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों से मध्यप्रदेश बना देश में अग्रणी

खनन क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों से मध्यप्रदेश बना देश में अग्रणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केन्द्र सरकार ने खनन एवं खनिज क्षेत्र में जो व्यापक और दूरदर्शी सुधार किये हैं, उनका लाभ लेकर मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि खान एवं खनिज विकास (एमएमडीआर) संशोधन अधिनियम, 2025 और इससे जुड़े नियमों में किए गए बदलावों से खनिज अन्वेषण, नीलामी, निवेश और स्थानीय विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। उन्होंने कहा कि वर्ष-2025 में मध्यप्रदेश 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी करा कर देश में अव्वल रहा है। केन्द्र सरकार के संशोधित कानून के तहत राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास का विस्तार कर राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास न्यास (एनएमईडीटी) बनाया गया है। इससे खनिज अन्वेषण एवं विकास के लिए संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे और मध्यप्रदेश जैसे खनिज-समृद्ध राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार आधारित खनन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में किए गए ये सुधार मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर, औद्योगिक रूप से सशक्त और विकसित राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगे और विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खनिज नीलामी में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी खनिज नीलामी में वर्ष 2025 में देशभर में नीलाम किए गए 141 खनिज ब्लॉकों में से 32खनिज ब्लॉकों की नीलामी मध्यप्रदेश में हुई, जो देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश की पारदर्शी नीतियों, त्वरित निर्णय प्रक्रिया और निवेश-अनुकूल वातावरण का प्रमाण है। चूना पत्थर, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे प्रमुख खनिजों की नीलामी से सीमेंट, स्टील और संबद्ध उद्योगों को मजबूती मिली है। जिला खनिज फाउंडेशन से खनन प्रभावित क्षेत्रों का कायाकल्प देशभर में जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के अंतर्गत अब तक 1.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की गई है। देश में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। इस निधि से प्रदेश के खनन प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक जनकल्याण कार्य किए जा रहे हैं। डीएमएफ निधि से प्रदेश के खनन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, स्कूलों और कौशल विकास केंद्रों की स्थापना, पेयजल एवं स्वच्छता, सड़क एवं अन्य आधारभूत संरचना तथा आजीविका संवर्धन से जुड़े हजारों कार्य किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन से नए अवसर राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमम) के माध्यम से महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इस मिशन से मध्यप्रदेश में अन्वेषण, खनन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और अनुसंधान के क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। यह मिशन इलेक्ट्रिक वाहन, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के क्षेत्रों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। निवेश, रोजगार और सतत विकास को बढ़ावा खनन नियमों के सरलीकरण, खनिज एक्सचेंज की व्यवस्था और नीलामी प्रक्रिया को तेज़ किए जाने से मध्यप्रदेश में निजी निवेश को प्रोत्साहन मिला है। इससे राज्य के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हो रहे हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण और सतत खनन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।  

BlackBerry की तरह डिजाइन और iPhone के फीचर्स, लॉन्च हुआ नया स्मार्टफोन

 नई दिल्ली एक वक्त था जब मार्केट में BlackBerry के स्मार्टफोन्स को बिजनेस क्लास का फोन माना जाता था. कंपनी के एक के बाद एक मॉडल्स हिट हो रहे थे. लोगों की चाहत हुआ करती थी कि एक दिन वे ब्लैकबेरी खरीदेंगे. हालांकि, कंपनी एंड्रॉयड और iPhone के एंट्री के बाद मार्केट से गायब हो गई है.  एक बार फिर BlackBerry जैसा ही एक स्मार्टफोन मार्केट में लॉन्च हुआ है. हम बात कर रहे हैं Clicks Communicator की. Clicks स्मार्टफोन्स के लिए कीबोर्ड केस बनाती है. खासकर ऐपल और फ्लिप फोन्स के लिए कंपनी ने केस बनाया है, जो कीबोर्ड्स के साथ आते हैं. कितनी है कीमत? अब ब्रांड ने अपना पहला स्मार्टफोन लॉन्च किया है, जिसका नाम Communicator है. ये एक कीबोर्ड वाला फोन है, जो किसी समय में काफी पॉपुलर हुआ करते थे. इस फोन को अनवील करते हुए कंपनी एक बार फिर Blackberry वाला दौर वापस लाना चाहती है, लेकिन ये सब एक मॉर्डन ट्विस्ट के साथ आएगा. हालांकि, कंपनी इस फोन को सिर्फ रेगुलर स्मार्टफोन के रिप्लेसमेंट के तौर पर नहीं लाना चाहती है. बल्कि कंपनी का फोकस एक कंपैनियन फोन देना है, जो जरूरी फीचर्स पर फोकस करे. इसमें BlackBerry जैसा डिजाइन और iPhone के एक्शन बटन जैसा फीचर मिलता है. Clicks Communicator को 499 डॉलर (लगभग 45 हजार रुपये) की कीमत पर लॉन्च किया गया है. इस फोन को 199 डॉलर में रिजर्व किया जा सकता है. फोन का अर्ली बर्ड प्राइस 399 डॉलर (लगभग 36 हजार रुपये) है. इस पर उन लोगों को फोन मिलेगा, जिन्हें इसे रिजर्व किया होगा.  क्या हैं स्पेसिफिकेशन्स?  Clicks Communicator में बैकलिट, टच सेंसिटिव QWERTY कीबोर्ड मिलता है, जो स्क्रॉलिंग भी सपोर्ट करता है. फोन में USB-C, 3.5mm हेडफोन जैक, MicroSD कार्ड स्लॉट मिलते हैं. इसमें Airplane Mode के लिए एक स्पेशल बटन दी गई है. साथ ही एक प्रोग्रामेबल साइड बटन मिलती है (ये फीचर iPhone के एक्शन बटन जैसा है).  फोन में डुअल सिम सपोर्ट (फिजिकल और eSIM) मिलता है. इसमें 4.03-inch का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है. डिवाइस को पावर देने के लिए 4000mAh की बैटरी दी गई है. इसमें 50MP का रियर और 24MP का फ्रंट कैमरा मिलता है. MediaTek 5G प्रोसेसर के साथ आता है. फोन Android 16 पर काम करता है. इसके कवर को आप बदल सकते हैं.  

बिहार के 82,000 शिक्षकों के लिए नीतीश सरकार ने नए साल में दी बड़ी राहत, ऐलान किया गया

पटना  बिहार के 82 हजार नियोजित शिक्षकों के लिए नए साल की शुरुआत होते ही बड़ा ऐलान कर दिया गया है. नीतीश सरकार की तरफ से सुनहरा मौका शिक्षकों को मिलने वाला है. दरअसल, पांचवीं सक्षमता परीक्षा को लेकर घोषणा कर दी गई है. जिसके मुताबिक, जनवरी के आखिरी या फरवरी के पहले सप्ताह में परीक्षा ली जा सकती है. ऑफिशियल एक्स अकाउंट के जरिये किया ऐलान दरअसल, जेडीयू के ऑफिशियल एक्स अकाउंट के जरिये एक पोस्ट शेयर किया गया है. जिसमें पांचवीं सक्षमता परीक्षा को लेकर बड़ी जानकारी दी गई. ऐसे में नए साल पर नियोजित शिक्षकों के लिए यह बेहद खास तोहफा माना जा रहा है. काफी लंबे समय से नियोजित शिक्षकों की तरफ से परीक्षा का इंतजार किया जा रहा था. इस बीच बड़ी घोषणा कर दी गई है. ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर कर सकते हैं आवेदन पांचवीं सक्षमता परीक्षा को लेकर नियोजित शिक्षक ऑफिशियल वेबसाइट https://sakshamtabihar.com पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए शिक्षकों को 1100 रुपये देना होगा. क्लास 1 से 12वीं तक के लिए यह परीक्षा आयोजित की जायेगी. पूरे ढाई घंटे की यह परीक्षा होगी, जिसमें 150 ऑप्शनल क्वेश्चन पूछे जायेंगे. इसके साथ ही किसी तरह की परेशानी होने पर हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करने की भी सलाह दी गई है. फर्जी नियोजित शिक्षकों की बढ़ी मुश्किलें इससे पहले यह भी खबर आई थी कि बिहार में फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने वाले नियोजित शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. निगरानी विभाग की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. राज्य के अलग-अलग जिलों में 2916 नियोजित शिक्षक फर्जी प्रमाणपत्र और जाली अंकपत्र के आधार पर नौकरी कर रहे थे. इन सभी के खिलाफ संबंधित जिलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. दिसंबर 2025 तक शिक्षा बोर्ड से कराए गए प्रमाणपत्र सत्यापन में इन शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी पाए गए. जांच में सामने आया है कि कुछ शिक्षकों ने अपने अंकपत्र में छेड़छाड़ कर नंबर बढ़ा लिए थे, तो कुछ ने दूसरे व्यक्ति के नाम और रोल नंबर का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल कर ली. कई मामलों में प्रमाणपत्र में दर्ज पिता का नाम मेल नहीं खाता, जबकि कई दस्तावेज पूरी तरह जाली निकले हैं.

पारो की कहानी: माघ मेला में दातुन बेचने वाली लड़की हुई वायरल, सुंदरता से ज्यादा दिल छूने वाली है उसकी कहानी

प्रयागराज  आपको पिछले साल का महाकुंभ (Maha Kumbh Mela 2025) याद होगा किस तरह लोगों ने काफी पैसे कमाए थे. अब उसी तर्ज पर माघ मेला (Magh Mela 2026) में भी लोग अलग-अलग तरह के बिजनेस करके अपनी जेबों को भरने के लिए तैयार हो गए हैं. कुंभ में काफी पॉपुलर हुए एक लड़के की तरह ही इस बार एक लड़की दातुन बेचकर कमाई कर रही है. (Woman sell neem sticks in Magh Mela 2026) उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल (Viral News) हो रहा है. मगर, वह दातुन बेचने की वजह से वायरल नहीं हुई है, बल्कि अपनी मुस्कान और सुंदरता के कारण सुर्खियों में छा गई है. एक लड़की इधर से उधर माघ मेला में घूमती दिखी. उसके हाथ में दातुन थे. वह लोगों से कह रही थी दातुन ले लीजिए, दातुन. तभी उसके चेहरे पर नजर पड़ी… काली आंखे, चेहरे पर मुस्कान, माथे पर तिलक और पीठ पर बैग लटकाए… सुंदर इतनी मानों कोई हिरोइन हो. मगर, इस लड़की की कहानी कोई सामान्य नहीं है. उसके दातुन बेचने के पीछे का दुख तब सामने आया. लड़की का नाम पारो कुमारी है. वह उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली है. वह गाजीपुर से प्रयागराज सिर्फ अपने परिवार के लिए आई है. उसके पिता बीमार हैं और घर में कोई कमाने वाला नहीं है. जब उसे पता लगा कि माघ मेला लगने वाला है तो कमर कस ली की अब घर वालों का बेड़ा वहीं उठाएगी. पारो ने कहा कि पापा बहुत बीमार हैं. इसलिए मैं दातुन बेचने आई हूं. इसे बेचकर उनका इलाज कराऊंगी. बता दें, नए साल के साथ ही साल 2026 को लेकर लोगों में धार्मिक और ज्योतिषीय उत्साह देखने को मिल रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह वर्ष सूर्य का वर्ष माना जा रहा है, इसलिए इसका असर धर्म, आस्था, तप और अच्छे कर्मों पर खास रूप से पड़ने वाला है. इसी शुभ अवसर पर साल की शुरुआत के साथ ही सनातन परंपरा का बड़ा धार्मिक आयोजन माघ मेला  शुरू हो गया है. माघ मेला करीब 40 दिनों से अधिक समय तक चलेगा और इसका समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन अंतिम पवित्र स्नान के साथ होगा. इस पूरे समय के दौरान देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु, संत और कल्पवासी प्रयागराज पहुंचकर संगम तट पर निवास करेंगे और पवित्र स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेंगे.

तरन तारन में समलैंगिक विवाह की अजीब घटना, शादी से पहले दुल्हन बनी लड़की सहेली के साथ भागी

 तरनतारन पंजाब के तरन तारन से अजीबोगरीब कहानी सामने आई है. यहां दो छात्राएं समलैंगिक विवाह करने के इरादे से घर से भाग गईं. दोनों लंबे समय से एक-दूसरे को जानती थीं. इस घटना के बाद परिजन भी हैरान हैं. इस मामले में एक छात्रा की मां ने मामले की शिकायत पुलिस से की है. पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और दोनों छात्राओं की तलाश की जा रही है. ये कहानी तरन तारन जिले के थाना सिटी क्षेत्र के अंतर्गत मोहल्ला मुरादपुरा की है. एक छात्रा की मां ने पुलिस से की गई शिकायत में कहा है कि बेटी को उसके साथ पढ़ने वाली छात्रा बहला-फुसलाकर घर से भगा कर ले गई है, जबकि 14 जनवरी को तरन तारन के एक युवक के साथ उसकी शादी होने वाली थी. वो दुल्हन बनने वाली थी. लेकिन उसके घर से भागने की खबर के बाद अब लड़के वालों ने भी शादी से इनकार कर दिया है. शिकायत करने वाली महिला ने कहा कि बेटी और उसके साथ पढ़ने वाली लड़की ने 9वीं से लेकर 12वीं तक साथ पढ़ाई की है. पढ़ाई के दौरान दोनों की दोस्ती काफी गहरी हो गई थी. उस लड़की ने बॉय कट स्टाइल रखा था. बेटी अक्सर उसके घर जाती थी. दोनों अधिकतर समय साथ ही रहती थीं. वह लड़की मोहल्ले में ही रहती है. इस वजह से शुरुआत में किसी तरह का शक नहीं हुआ. महिला ने पुलिस को बताया कि बेटी की शादी 14 जनवरी को तय कर दी थी. इसके लिए रिश्तेदारों में शादी के कार्ड भी बांटे जा रहे थे. इसी बीच मोहल्ले की लड़की इस शादी से नाराज रहने लगी. उसने मेरे बेटे को भी कई बार धमकाया कि यदि शादी कहीं और कर दी गई तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. शिकायत में महिला का आरोप है कि इन्हीं धमकियों के बाद मोहल्ले की वो लड़की बेटी को अपने साथ भगा कर ले गई. घटना की जानकारी मिलते ही परिवार ने रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों के यहां तलाश की, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं लगा. इस मामले में तरन तारन के सिटी थाने के एसएचओ अमरीक सिंह का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है. दोनों छात्राओं की लोकेशन ट्रेस करने के प्रयास किए जा रहे हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कानून के दायरे में रहते हुए सभी पहलुओं की जांच की जाएगी. दोनों के मिलने के बाद उनके बयान दर्ज किए जाएंगे.

निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का स्टॉपेज जल्द, भोपाल में चौथे स्टेशन पर तैयारियां पूरी

भोपाल  भोपाल में लगभग 500 करोड़ की लागत से बने निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के रुकने का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है. कुछ कागजी अनुमतियों मिलते ही यहां ट्रेनों का स्टॉपेज शुरू हो जाएगा. इस रेलवे स्टेशन पर सारी तैयारियां हो चुकी हैं. यात्री सुविधाओं को देखते हुए यहां एफओबी, लिफ्ट, यात्री प्रतीक्षालय, पेयजल व्यवस्था, प्लेटफॉर्म शेड जैसे काम पूरे हो चुके हैं. यात्रियों को दो साल से इंतजार निऱातपुरा रेलवे स्टेशन दो वर्ष पहले बनकर तैयार हो चुका था. तभी से निशातपुरा इलाके के लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें भोपाल स्टेशन नहीं जाना पड़ेगा. यह स्टेशन सभी आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण होने के बावजूद रेलवे से विभिन्न प्रकार की अनुमतियां नहीं मिलने के कारण सूना पड़ा है. अब यहां का सन्नाटा खत्म होने वाला है. निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के रुकने का इंतजार  निशातपुरा स्टेशन शुरू होने से इस इलाके के यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी. छोला, विश्वकर्मा नगर, नीलकंठ कॉलोनी, हनीफ कॉलोनी सहित कई घनी आबादी वाले क्षेत्र निशातपुरा के तहत आते हैं. इन इलाकों के लोगों को ट्रेन से यात्रा करने के लिए मजबूरी में दूर स्थित भोपाल रेलवे स्टेशन जाना पड़ता है. रेलवे स्टेशन चालू होने से व्यापार बढ़ेगा छोला के रहने वाले राजेंद्र राय का कहना है "निशातपुरा रेलवे स्टेशन के चालू हो जाने से हमें बहुत फायदा होगा. हमारा व्यापार बढ़ेगा." हरिनारायण चक्रवर्ती का कहना है "निशातपुरा रेलवे स्टेशन को बने 2 वर्ष से ज्यादा हो चुके हैं. यहां का काम बहुत धीरे चल रहा है. यदि यह स्टेशन चालू होता है तो हम लोगों को तो फायदा होगा." दो ट्रेनों के रुकने का नोटिफिकेशन मिला प्रभारी जनसंपर्क अधिकारी रेलवे भोपाल नवल अग्रवाल ने बताया "निशातपुरा रेलवे स्टेशन के लिए बोर्ड के नए नियमों के अनुसार नए स्टेशन की कैटेगरी अपडेट की गई है, जिसमें और सुविधाएं अपडेट की जा रही हैं. उम्मीद है कि जल्द ही स्टेशन शुरू किया जाएगा. स्टेशन पर सबसे पहले दो गाड़ियों के रुकने का नोटिफिकेशन आया है, जिसमें मालवा एक्सप्रेस और सोमनाथ एक्सप्रेस शामिल हैं."  रेलवे अधिकारियों के अनुसार अगर भोपाल स्टेशन पर समाप्त होने वाली कुछ ट्रेनों का टर्मिनेशन निशातपुरा तक बढ़ाया जाता है तो इंजन की दिशा बदलने की जरूरत खत्म हो जाएगी। अभी भोपाल स्टेशन पर इंजन की दिशा बदलने में 30 से 45 मिनट तक का समय लग जाता है, जिससे ट्रेनें लेट हो जाती हैं। निशातपुरा से ट्रेनों को सीधे इंदौर, उज्जैन और रतलाम की ओर रवाना करना आसान होगा। बता दें कि लगभग एक साल पहले निशातपुरा रेलवे स्टेशन बनकर तैयार हो चुका है। इसका औपचारिक उद्घाटन अब तक नहीं होने से इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। स्टेशन पर सभी सुविधाएं मौजूद रेलवे विभाग ने स्टेशन परिसर में प्लेटफार्म विस्तार के साथ टिकट घर, यात्री प्रतीक्षालय, पार्किंग, सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं दी हैं। अब फिर इन्हें दोबारा परीक्षण कर कार्य किया जा रहा है, जो अंतिम चरण में है।  

2300 लोगों का क्रूज, जहां नहीं पहन सकते कपड़े! 1.5 लाख रुपये में 11 दिन की ट्रिप, जानिए बाकी अजीब शर्तें

मियामी ये दुनिया अजीब लोगों और रंगों से भरी पड़ी है. अब सोशल मीडिया पर जो मामला वायरल है उसे जानने के बाद मुमकिन है कि आप अपना सिर पीट लें. जी हां, इन दिनों एक नेक्ड शिप की चर्चा सोशल मीडिया पर जोरों से है जहां आपको एंट्री कपड़े पहनकर नहीं बल्कि कपड़े उतारकर मिलेगी. जी हां, इस क्रूज पर Gender Equality को इतनी जबरदस्त तरीके से तरजीह दी गई है कि आप भी हैरान रह जाएंगे. इतना ही नहीं, यहां आपको अपने कपड़ों के साथ साथ मोटा किराया भी देना होगा.  मियामी से एक खास क्रूज लाइनर 11 दिनों की यात्रा पर रवाना होगा, लेकिन इसमें एक पेंच है. क्रूज जहाज पर सवार सभी 2300 मेहमान पूरी तरह से नग्न होंगे! जी हां, आपने ब‍िल्‍कुल सही पढ़ा है. इसके साथ ही इस ट्र‍िप को लेकर एक शर्त भी है. आइए इस विचित्र, मगर अनोखे क्रूज के बारे में आपको बताते हैं, जिसे ‘द बिग न्यूड बोट’ नाम दिया गया है. कपड़े उतार कर ही मिलेगी एंट्री…चाहे मर्द हो या औरत आपको बता दें कि न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों को बगैर कपड़ों के पार्टी करना पसंद है वो इस क्रूज पर आकर अपना सपना पूरा कर सकते हैं.बेअर नेसेसिटीज नाम की एक पर्यटन कंपनी है जो बगैर कपड़ों के यात्रा करने और क्वालिटी टाइम बिताने की व्यवस्था लोगों के लिए करती है.आपको बता दें कि इस जहाज का नाम "द बिग न्यूड बोट" है. ये 968 फुट लंबा है जिस पर लोग पार्टी, लंच और डिनर तक कर सकते हैं. कपल को यहां खास तरजीह दी जाती है. सोशल मीडिया पर इस क्रूज की कई तस्वीरें वायरल हैं जिन पर लोग क्वालिटी टाइम स्पेंड करते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि यहां कुछ नियम कायदे भी होते हैं. गेमिंग और स्विमिंग के वक्त आप कपड़े पहन सकते हैं. इसके अलावा लंच और डिनर के वक्त आपको प्राइवेट पार्ट कवर करने होंगे. क्या है ‘बिग न्यूड बोट’ ट्रिप? मियामी की एक न्यूडिस्ट ट्रैवल कंपनी, बेयर नेसेसिटीज द्वारा आयोजित ‘बिग न्यूड बोट’ ट्रिप नॉर्वेजियन पर्ल क्रूज शिप पर होती है, जिसमें लगभग 2300 मेहमानों के शामिल होने की उम्मीद है. इस क्रूज पर चढ़ने के लिए यात्रियों के पास वैध टिकट के अलावा एक अनिवार्य शर्त यह है कि उन्हें यात्रा के अधिकांश समय पूरी तरह न्‍यूड रहना होगा. बेयर नेसेसिटीज के अनुसार, इस क्रूज ट्रिप का उद्देश्य लोगों को सामाजिक नग्नता के डर से मुक्त करना और उन्हें धूप और समुद्र का आनंद लेते हुए एक आरामदायक और सुखद यात्रा का अनुभव कराना है. यूजर्स ने यूं किया रिएक्ट सोशल मीडिया पर इस क्रूज की तस्वीरें वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इसका समर्थन किया तो कई ने इसे गलत ठहराया. एक यूजर ने लिखा…अरे बाप रे पैसों के साथ साथ ये लोग तो इज्जत भी मांग रहे हैं. एक और यूजर ने लिखा…ये क्या फूहड़पन है. कोई सैर करने के लिए कपड़े क्यों उतरवाएगा. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…बाहरी लोगों के लिए अस तरह का रहन सहन आम है. किसी को अगर दिक्कत है तो ना जाए. क्रूज यात्रा कब शुरू होगी? जानकारी के अनुसार, ‘बिग न्यूड बोट’ क्रूज 3 फरवरी 2026 को मियामी से रवाना होगी और 11 दिनों की “बेयर-डाइस” यात्रा पर कैरिबियन के कई द्वीपों जैसे बहामास के ग्रेट स्टिरप के, सेंट लूसिया और सेंट मार्टेन की यात्रा करेगी. इस अनोखे न्यूडिस्ट अनुभव के अलावा, यात्रियों को क्रूज पर कई मजेदार गतिविधियों का आनंद मिलेगा, जैसे एलईडी पार्टियां, टैलेंट शो और फ्रेंडली स्पोर्ट्स प्रतियोगिताएं. नॉर्वेजियन पर्ल में एक बॉलिंग एली, रॉक क्लाइम्बिंग वॉल, 16 प्रकार के डाइनिंग ऑप्‍शन 14 बार हैं, जिनमें एक व्हिस्की लाउंज भी शामिल है, जिनका यात्री आनंद ले सकते हैं. क्या अभद्र व्यवहार को रोकने के लिए कोई नियम हैं? क्रूज ने अपने यात्रियों के अभद्र व्यवहार और सार्वजनिक अश्लीलता को रोकने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए हैं. यात्री समुद्र में या बंदरगाह पर होने पर डेक या बुफे जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों में नग्न हो सकते हैं. हालांकि, जब क्रूज बंदरगाह पर रुका होता है, तो यात्रियों को कपड़े पहनना अनिवार्य है. जैसे ही जहाज बंदरगाह से रवाना होता है, यात्री फिर से कपड़े उतार सकते हैं. यात्रियों को भोजन कक्ष में भोजन करते समय भी कपड़े पहनना आवश्यक है. इसके अलावा, पूल और डांस क्षेत्र में फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है, जबकि अनुचित स्पर्श और अश्लील काम सख्त वर्जित हैं और इसके परिणामस्वरूप जहाज से उतारा जा सकता है. किसी को अनुचित तरीके से टच करना मना है बेयर नेसेसिटिज़ ने स्पष्ट किया है कि उसके अनड्रेस्ड क्रूज का अनैतिक संबंध जैसी चीज से कोई लेना-देना नहीं है. यदि कोई स्विंगर अनुभव की तलाश में हैं, तो हम आपके लिए उपयुक्त क्रूज नहीं हैं. यहां किसी अन्य व्यक्ति के शरीर को टच करना या अनुचित तरीके से छूने पर प्रतिबंध है.    इस जहाज पर खुले तौर पर यौन गतिविधि में शामिल होना या किसी से ऐसी आग्रह करने पर पूर्णत: प्रतिबंध है. इसके अलावा जहाजों के पूल और डांस हॉल के आसपास कई "नो फोटो जोन" भी हैं. यहां बिना कपड़ों के समुद्री यात्रा का लुत्फ उठाने वाले लोगों को तस्वीरें लेने से प्रतिबंधित किया गया है.   जहाज पर इन मौकों पर कपड़ा पहनना है जरूरी जहाज के भोजनालयों के सामने साफ-साफ लिखा है. इन सभी जगहों पर कैज़ुअल कपड़े पहनना जरूरी है. डाइनिंग रूम में बाथरोब पहनने की अनुमति नहीं है. हालांकि, सेल्फ सर्विस बुफे के दौरान कपड़ा पहनना जरूरी नहीं है.  क्रूज लाइन इस बात पर भी जोर होता है कि जब जहाज किसी बंदरगाह पर खड़ा हो तब यात्री पूरे कपड़े पहनकर रखे. या फिर जब किसी तट पर जहाज रुका हो और स्थानीय लोग जहाज देखने के लिए आएं, तो यात्री अपने कपड़े पहने रखे.  ट्र‍िप की कीमत कितनी है? विवरण के अनुसार, 11-दिन की राउंड ट्रिप, जिसमें अरूबा, बोनेयर, कुराकाओ, जमैका और ग्रेट स्टिरप के द्वीपों की यात्रा शामिल है और इसकी कीमत $2,000 (लगभग ₹1.6 लाख) प्रति व्यक्ति से शुरू होती है.

भोपाल में कर्मचारियों को मकर संक्रांति पर छुट्टी मिलने की संभावना, कलेक्टर ने भेजा शासन को प्रस्ताव

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर स्थानीय अवकाश घोषित किया जा सकता है। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने इस संबंध में राज्य शासन को औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो करीब 40 हजार कर्मचारियों और अधिकारियों को अवकाश का लाभ मिलेगा। चार स्थानीय अवकाशों का प्रस्ताव शासन के पास कलेक्टर द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में मकर संक्रांति के साथ-साथ तीन अन्य महत्वपूर्ण तिथियों को भी शामिल किया गया है –  25 सितंबर: अनंत चतुर्दशी 19 अक्टूबर: महानवमी 3 दिसंबर: भोपाल गैस त्रासदी बरसी इन सभी अवसरों पर स्थानीय अवकाश घोषित करने की अनुशंसा की गई है। भोपाल को साल में मिलते हैं 4 स्थानीय अवकाश राजधानी भोपाल में हर साल कुल चार स्थानीय अवकाश घोषित किए जाते हैं। वर्ष 2025 में मकर संक्रांति, रंगपंचमी, गणेश चतुर्थी और भोपाल गैस त्रासदी बरसी पर अवकाश दिया गया था। हालांकि इस बार रंगपंचमी पर अवकाश का प्रस्ताव नहीं भेजा गया, जिससे कर्मचारियों में हल्की निराशा भी देखी जा रही है। लगातार वीकेंड का फायदा, कर्मचारियों में खुशी इस बार प्रस्तावित अवकाश वाले दिन खास माने जा रहे हैं –  मकर संक्रांति: बुधवार अनंत चतुर्दशी: शुक्रवार महानवमी: सोमवार गैस त्रासदी बरसी: गुरुवार इन तारीखों में शनिवार-रविवार की बाधा नहीं होगी, जिससे कर्मचारियों को छुट्टी का पूरा लाभ मिल सकेगा। अब सभी की नजरें राज्य शासन के फैसले पर टिकी हैं। मंजूरी मिलते ही भोपाल के हजारों कर्मचारियों के चेहरे खिल उठेंगे।

माघ मेले में श्रद्धालु तंबुओं में रहकर करते हैं कठिन नियमों का पालन

नई दिल्ली. प्रयागराज की पावन धरती पर माघ मेला 2026 (Magh Mela 2026) का आयोजन हर बार धूमधाम और भक्ति भाव से किया जाता है। संगम तट पर कड़ाके की ठंड के बीच हजारों श्रद्धालु छोटे-छोटे तंबुओं में रहकर कठिन नियमों का पालन करते हुए साधना करते हैं, जिसे 'कल्पवास' कहा जाता है। पौष पूर्णिमा से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलने वाली इस साधना का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर लोग अपना घर-बार छोड़कर एक महीने के लिए यहां क्यों आते हैं? आइए जानते हैं कल्पवास के पीछे का धार्मिक महत्व और इसके नियम, जो इस प्रकार हैं – क्या है 'कल्पवास' का अर्थ? कल्पवास शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। 'कल्प' जिसका मतलब है समय का एक चक्र और 'वास' का मतलब है निवास स्नान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संगम के तट पर एक महीने तक निवास करने से व्यक्ति का मानसिक और आध्यात्मिक कायाकल्प होता है। पुराणों में कहा गया है कि कल्पवास करने से साधक को पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और वह मोक्ष की ओर आगे बढ़ता है। कल्पवास का धार्मिक महत्व पद्म पुराण और मत्स्य पुराण में कल्पवास की महिमा के बारे में बताया गया है। देवताओं का निवास – ऐसा माना जाता है कि माघ महीने में सभी देवी-देवता संगम तट पर निवास करते हैं। ऐसे में यहां रहकर पूजा-अर्चना करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। आत्म-शुद्धि – कल्पवास केवल नदी किनारे रहना नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि की प्रक्रिया है। कहा जाता है कि इस दौरान गंगा स्नान और सात्विक जीवन जीने से शरीर और मन दोनों पवित्र होते हैं। मोक्ष की प्राप्ति – ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति विधि-विधान से कल्पवास पूर्ण करते हैं, उन्हें जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। कल्पवासी के कठिन नियम    कल्पवासी पूरे दिन में केवल एक बार फलाहार या सात्विक भोजन करते हैं।     इनके लिए दिन में तीन बार गंगा स्नान और पूजा-पाठ करना जरूर होता है।     कल्पवासी पलंग या बिस्तर का त्याग कर जमीन पर पुआल या साधारण चटाई बिछाकर सोते हैं।     इस दौरान झूठ बोलना, क्रोध करना, निंदा करना और सुख-सुविधाओं की वस्तुओं का त्याग करना होता है।     इस दौरान अपने तंबू में अखंड दीप जलाना और दिनभर प्रवचन व सत्संग में समय बिताना होता है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं।