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वेनेजुएला पर हमले के बाद भारत ने अपने नागरिकों के लिए जारी की एडवाइजरी

नई दिल्ली. वेनेजुएला में अमेरिका के हमले और पत्नी सहित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पकड़े जाने के बाद भारत की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। भारत सरकार ने अपने नागरिकों को वेनेजुएला के हालात को देखते हुए वहां की गैर जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने एक एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला में मौजूद सभी भारतीयों से भी अत्यधिक सावधानी बरतने और अपनी आवाजाही सीमित रखने को कहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि शनिवार तड़के काराकस में बड़े पैमाने पर किए गए अमेरिकी हमलों के दौरान मादुरो को पकड़ लिया गया। उन्होंने कहा है कि मादुरो और उनकी पत्नी फिलहाल अमेरिकी युद्धपोत पर हैं और उन्हें न्यूयॉर्क लाया जा रहा है। न्यूयॉर्क में उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा। भारत की एडवाइजरी में क्या है विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, ‘जो भारतीय किसी भी कारण से वेनेजुएला में हैं, उन्हें अत्यधिक सतर्क रहने, अपनी गतिविधियां सीमित रखने और काराकस स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह दी जाती है।’ वेनेजुएला में लगभग 50 अनिवासी भारतीय (एनआरआई) और 30 भारतीय मूल के लोग रहते हैं। अमेरिकी हमले के बाद वेनेजुएला में राजनीतिक अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। रूस और चीन सहित कई प्रमुख देशों ने मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई के लिए वॉशिंगटन की आलोचना की है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मादुरो को न्यूयॉर्क ले जाया जा रहा है, जहां उन्हें मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े गिरोहों को समर्थन देने के आरोपों में मुकदमे का सामना करना होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने वेनेजुएला पर कब्जे का कर दिया ऐलान वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वेनेजुएला में सुरक्षित सत्ता हस्तांतरण होने तक अमेरिका उस देश का प्रशासन संभालेगा। भारत ने अभी तक अमेरिका के इस अभियान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि केरल के मुख्यमंत्री ने अमेरिका के इस अभियान की निंदा की है। उन्होंने इसे आतंकवादी घटना बताया है। एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए विजयन ने कहा कि यह एक साम्राज्यवादी हमला है। उन्होंने कहा कि यह हमला एक दुष्ट राज्य के शातिर प्रशासन को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि अपने स्वार्थ को थोपने के लिए यह ग्लोबल साउथ में आशांति औऱ अस्थिरता पैदा कर रहा है। विजयन ने कहा कि कि वैश्विक समुदाय को इकट्ठे होकर इस तरह के हमले की निंदा करनी चाहिए।

देवास के किसान का अपहरण कर फिरौती मांगने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

देवास. भोपाल रोड स्थित खटाम्बा के एक किसान के अपहरण और फिरौती मांगने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हालांकि पुलिस ने मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार कर कार भी जब्त कर ली है। बीएनपी टीआइ अमित सोलंकी के अनुसार 2 जनवरी को बीएनपी थाने पर राजदीप सिंह निवासी रामनगर खटाम्बा ने उसके भाई अंकित राजपूत के गायब होने की सूचना दी थी। खेत पर सिंचाई के लिए गया था मिली जानकारी के अनुसार, अंकित खेत पर सिंचाई के लिए गया था, लेकिन देर रात तक वो घर वापस नहीं लौटा था। परिजनों की शिकायत पर बीएनपी पुलिस ने गुमशुदगी में मामला दर्ज कर किसान की तलाश शुरू कर दी। इसी दौरान थाना मंगलवारा जिला भोपाल से सूचना मिली कि अंकित राजपूत नामक युवक डिजायर कार में संदिग्ध अवस्था में पाया गया है तथा उसके शरीर पर मारपीट के निशान हैं। कार सवार चार युवकों ने जबरन कार में बैठाया सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल भोपाल पहुंची और किसान को लाया गया। पुलिस की पूछताछ में अंकित राजपूत ने बताया कि खेत से घर लौटते समय सफेद रंग की डिजायर कार में सवार चार युवकों ने उसे जबरन कार में बैठाया। उन युवकों ने रास्ते में उसके साथ मारपीट की और रुपयों की मांग करते हुए उसे भोपाल तक ले गए। मुखबिर की सूचना पर आरोपित गिरफ्तार मामले में बीएनपी पुलिस ने जांच शुरू की और अपने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया। इसके बाद मुखबिर की सूचना के आधार पर बीएनपी पुलिस ने आरोपित राजेश राणावत निवासी न्ये गौरी नगर इंदौर और सोनू राजपूत निवासी फंदा थाना खजूरी सड़क वर्तमान निवासी गौरी नगर इंदौर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। फिलहाल आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

बीजेपी नेताओं को नसीहत- ‘नितिन नबीन अब माननीय अध्यक्ष, सीधा नाम लेकर न बुलाएं’

नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांगठनिक ढांचे में हाल ही में हुए बदलावों के बाद पार्टी के भीतर एक नई कार्यशैली और कड़े अनुशासन का संदेश दिया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर जहां नए कार्यकारी अध्यक्ष के पद की गरिमा को लेकर कड़े निर्देश जारी हुए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष ने पदभार संभालते ही बागी और गुटबाज तेवर रखने वालों को आईना दिखाना शुरू कर दिया है। भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के मनोनयन के बाद पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन में पद सर्वोपरि है। चूंकि नए अध्यक्ष उम्र और अनुभव में कई वरिष्ठ नेताओं से छोटे हैं, इसलिए अक्सर आपसी चर्चाओं में वरिष्ठ नेता उन्हें नाम से संबोधित कर देते थे। पार्टी ने अब सभी नेताओं और पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि बातचीत के दौरान 'प्रोटोकॉल' का पूरा ध्यान रखा जाए। निर्देश दिया गया है कि पुराने निजी संबंध चाहे जो भी रहे हों, लेकिन चर्चा के दौरान पद की गरिमा के अनुरूप ही सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग होना चाहिए। विशेष रूप से इसलिए भी क्योंकि कार्यकारी अध्यक्ष के जल्द ही पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना है। हालांकि, स्वयं नितिन नबीन की सादगी चर्चा का विषय है। वे आज भी अपने वरिष्ठों से उसी पुराने सम्मान और सहजता के साथ मिल रहे हैं। खेमेबाजी पर पंकज चौधरी का कड़ा प्रहार वहीं, उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कमान संभालते ही यह साफ कर दिया है कि वे अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करेंगे। हाल ही में एक खास जाति से जुड़े विधायकों की अलग बैठक और खेमेबाजी की खबरों पर अध्यक्ष ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ऐसी गतिविधियां पार्टी के संविधान और आदर्शों के खिलाफ हैं। सियासी गलियारों में इस सख्ती के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। कुछ लोग इसे 'मिशन-2027' के लिए टिकट पक्का करने की होड़ मान रहे हैं, तो कुछ इसे नए अध्यक्ष की पहली बड़ी परीक्षा। अध्यक्ष के इस कड़े रुख से उन लोगों के पसीने छूट रहे हैं जो अब तक गुट बनाकर काम कर रहे थे। उन्हें डर है कि उनकी पिछली कारगुजारियां और जातिगत राजनीति की जानकारी नए अध्यक्ष तक पहुंच गई, तो उनके राजनीतिक भविष्य पर संकट आ सकता है। पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग अध्यक्ष के इस अनुशासन की सराहना कर रहा है, उनका मानना है कि चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं में यह संदेश जाना जरूरी था। वहीं, कुछ लोग इसे अतिरेक मान रहे हैं। फिलहाल, भाजपा मुख्यालय से लेकर जिलों तक में इस नए अनुशासन की चर्चा जोरों पर है।

ओवैसी ने दी चुनौती- ‘मोदी जी 56 इंच का सीना है तो 26/11 आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड को पाकिस्तान से पकड़कर लाएं’

मुंबई. अमेरिकी सेनाओं की ओर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को पकड़कर यूएस ले जाने का मामला गरमाया हुआ है। भारत में भी इस पर काफी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दे डाली। मुंबई में जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, 'आज हमने सुना कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सेनाओं ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मदुरो को पकड़ लिया और उन्हें उनके देश से अमेरिका ले गए। अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उनके अपने देश से अपहरण कर सकते हैं, तो आप भी पाकिस्तान जाकर 26/11 आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड को भारत ला सकते हैं।' असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मोदी जी हम आपको कह रहे हैं, आप भी पाकिस्तान में जाकर जो मुंबई की सड़कों पर साजिश करने वाले 26/11 के जालिम लोग हैं, चाहे वो मसूद अजहर हो या फिर लश्कर-ए-तैयबा का जालिम शैतान हो। उन्होंने कहा, 'मोदी जी 56 इंच का सीना है तो भेजकर उनको उठाकर लाओ। अगर ट्रंप कर सकते हैं तो क्या आप कम हैं। जब ट्रंप कर सकता है तो आपको भी करना पड़ेगा, क्योंकि मोदी ने कहा था- अबकी बार ट्रंप सरकार।' वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की कि अमेरिकी सेनाओं ने वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला किया, जिसमें काराकास और आसपास के इलाकों में विस्फोट हुए। इस ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो व उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया गया और उन्हें देश से बाहर अमेरिका ले जाया गया। ट्रंप ने कहा कि मदुरो को नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी के आरोपों में न्यूयॉर्क में मुकदमा चलाया जाएगा। अमेरिका अंतरिम रूप से वेनेजुएला को संभालेगा जब तक सब सुरक्षित नहीं हो जाता। इस कार्रवाई की कई देशों ने निंदा की, जबकि विपक्षी नेता और प्रवासी वेनेजुएलावासियों ने जश्न मनाया।

कर्नाटका में 3 दरिंदे आए और लड़की को अगवा कर किया रेप

बेंगलुरु. कर्नाटक पुलिस ने यौन उत्पीड़न के लिए तीन नाबालिग लड़कों के खिलाफ बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, नाबालिग लड़कों ने लड़की के माता-पिता के दिन में बाहर होने के दौरान हफ्ते भर से अधिक समय तक उस पर हमला किया। हुबली-धारवाड़ के पुलिस आयुक्त एन शशिकुमार ने बताया, 'एक शिकायत दर्ज की गई है कि नाबालिग लड़की को यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया और तीन आरोपियों की ओर से हमला किया गया। सभी तीन आरोपी 14 से 15 वर्ष की आयु वर्ग के नाबालिग हैं। हमने उन्हें हिरासत में ले लिया है।' पुलिस आयुक्त ने कहा कि इन लड़कों ने पिछले सात-आठ दिनों से लड़की के खिलाफ यौन अपराध किए हैं। लड़की के माता-पिता काम पर जाते हैं और दिन में घर से बाहर रहते हैं। आरोपियों ने इस दौरान वारदात को अंजाम दिया। एन शशिकुमार ने आगे कहा कि पुलिस बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के तहत आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करेगी। आगे की जांच जारी है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। अगवा कर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार वहीं, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में पुलिस ने 16 वर्षीय लड़की को अगवा कर दुष्कर्म करने के आरोपी को शनिवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस के अनुसार, फेफना थानाक्षेत्र के एक गांव में रहने वाली 16 वर्षीय लड़की का गांव के ही रहने वाले शुभम खरवार उर्फ निर्मोही ने 13 फरवरी 2024 को अपहरण कर लिया था। पुलिस ने बताया कि इस मामले में लड़की की मां की शिकायत पर शुभम के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस के मुताबिक, लड़की के दादा ने हरियाणा जाकर उसे मुक्त कराया और 30 दिसंबर को पुलिस को सुपुर्द कर दिया। नाबालिग लड़की ने पुलिस को बताया कि शुभम खरवार उसे अगवा कर हरियाणा ले गया और उससे बार-बार दुष्कर्म किया।

AIIMS ने किया शोध- बुध-गुरु को अचानक हो रहीं सबसे ज्यादा मौतें

नई दिल्ली. नाचते हुए मौत, खेलते हुए दम तोड़ा, बैठे-बैठे अचानक चली गई जान… पिछले कुछ सालों में आपने ऐसी कई खबरें पढ़ी होंगी, सीसीटीवी वीडियो देखे होंगे और कई तरह की चर्चाएं भी सुनी होंगी। कई बार इसे कोविड वैक्सीन से भी जोड़ने की कोशिश हुई। अब इस तरह की मौतों पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्टडी सामने आई है जिसमें अचानक होने वाली मौतों के पैटर्न को समझने की कोशिश की गई है। आयु, लिंग, स्थान, दिन आदि के आधार पर समझने की कोशिश की गई है कि कौन और कब लोग इसकी जद में आ रहे हैं। एक साल तक चली स्टडी को हाल ही में इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित किया गया है। मेडिकल टर्म में 'सडन डेथ' (अचानक मौत) ऐसे मामलों को माना गया है जिसमें लक्षण दिखने के एक घंटे भीतर मौत हो गई या जिन्हें मरते हुए किसी ने नहीं देखा पर 24 घंटे पहले एकदम स्वस्थ दिखे थे। मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच डॉक्टरों ने कुल 2214 पोस्टमॉर्टम में 180 केसों (8.1 फीसदी) को अचानक मौतों की श्रेणी में पाया। इनमें से 103 ( 57.2 फीसदी) की उम्र 18 से 45 के बीच की थी, जबकि 77 की उम्र 46 से 65 के बीच की थी। सडन डेथ वाले अधिकांश पुरुष एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि अचानक हुई मौतों के मामले में पुरुषों और महिलाओं के बीच बहुत बड़ा अंतर है। पुरुष महिला का अनुपात 4.5:1 का है। कम आयु वाले समूह में मरने वाले 77 पुरुष थे तो 17 महिलाएं। वहीं, अधिक उम्र वालों में यह अनुपात 64:4 का है। दिल ने दिया धोखा एक निष्कर्ष यह निकला कि अचानक हुई मौतों के मामले में दिल का धोखा अहम कारण है। 42.6 प्रतिशत मामले हृदय संबंधी कारणों से जुड़े पाए गए। उम्र के तीसरे दशक में प्रवेश करने वाले युवाओं में भी हृदय से जुड़ी समस्याएं पाईं गईं। अधिकांश मौतें कोरोनरी आर्टरी डिजीज से संबंधित थीं- यानी हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में गंभीर संकुचन। 70 प्रतिशत से अधिक ब्लॉकेज को गंभीर माना जाता है। जांच में यह पाया गया कि जिन युवा वयस्कों की मौत हुई, उनमें से कई में धमनियों की रुकावट इस स्तर तक या उससे भी अधिक थी। फेफड़ों या सांस से जुड़ी समस्याएं मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण सामने आया। 21.3 फीसदी मृतक इन समस्याओं से ग्रसित थे। ध्रूम्रपान और शराब कितना बड़ा फैक्टर अचानक मृत्यु का शिकार हुए आधेक से अधिक (57.4 फीसदी) युवा धूम्रपान की आदत रखते थे, जबकि 52 फीसदी कभी-कभी या नियमित शराब का सेवन करते थे। हर मौसम में ऐसी मौतें, सप्ताह के बीच ज्यादा कहर अचानक होने वाली मौतें सभी मौसम के दौरान करीब समान रूप से पाईं गईं। 20.9 फीसदी मौतें (मई से जुलाई), 31 फीसदी अगस्त से अक्टूबर के बीच और 27.8 फीसदी सर्दियों में नवंबर से जनवरी के बीच और 19.1 फीसदी फरवरी से अप्रैल के बीच बसंत के दौरान हुईं। 40.1 फीसदी की मौत रात या सुबह जल्दी हुई, जबकि 30.2 फीसदी सुबह और अन्य दोपहर में हुई। दिनों के लिहाज से देखें तो अधिकतर मौतें गुरुवार और बुधवार को हुईं। 55 फीसदी की मौत घर पर, 30.2 की यात्रा के दौरान और 14.8 फीसदी की कार्यस्थल या या बाहर हुईं। अचानक मौतों से पहले कैसे लक्षण दिखे जांच में सामने आया है कि अचानक हुई मौतों के ज्यादातर मामलों में लोगों को पहले अचानक बेहोशी आ गई थी। कुछ लोगों ने मौत से पहले सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, घबराहट, पेट दर्द, उल्टी या बुखार की शिकायत की थी। चिंता की बात यह है कि युवाओं में भी दिल की बीमारी बड़ी वजह बनकर सामने आई है, जबकि उनमें से अधिकतर को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। वहीं बुजुर्गों में मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य बीमारियां ज्यादा देखने को मिलीं। यह रिपोर्ट बताती है कि दिल से जुड़ी बीमारियां अब कम उम्र के लोगों के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।

ट्रंप ने दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा को भी दी धमकी

वाशिंगटन. वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने के बाद अब अमेरिका की ट्रंप सरकार के हौसलें बुलंद हैं और अब वे दक्षिण अमेरिका के अन्य देशों को भी धमकाने पर उतर आए हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा के नेता को चेतावनी देते हुए कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद अगर मैं क्यूबा की सरकार में होता तो यकीनन मुझे चिंता होती। मार्को रुबियो ने क्यूबा को दी चेतावनी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, 'क्यूबा पूरी तरह से तबाह है। इसे पूरी तरह से अयोग्य सरकार और इसे एक वृद्ध व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा है। इसकी कोई अर्थव्यवस्था नहीं बची है। यह पूरी तरह से तबाह देश हैं। मादुरो की सुरक्षा में लगे सभी गार्ड भी क्यूबा के थे। क्यूबा ने कुछ मामलों में वेनेजुएला पर कब्जा किया हुआ है। क्यूबा ने वेनेजुएला को अपनी कालोनी बनाने की कोशिश की। अगर हम सुरक्षा के लिहाज से देखें तो अगर मैं हवाना में रह रहा होता और मैं सरकार में होता तो में घटनाक्रम से थोड़ा चिंतित तो जरूर होता।' अमेरिका और क्यूबा के बीच रिश्ते दशकों से तनावपूर्ण हैं। दोनों देशों के संबंधों में तनाव 1960 के दशक से है, जब फिदेल कास्त्रों की सरकार के साथ अमेरिका के संबंध बिगड़े और अमेरिका ने क्यूबा पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। बराक ओबामा के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध सुधारने की कोशिश हुई, लेकिन ट्रंप और बाइडन सरकार में फिर से संबंध तनावपूर्ण हो गए। ट्रंप ने भी दिए संकेत गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी क्यूबा की आलोचना की और इसे एक असफल राष्ट्र बताया। ट्रंप ने कहा कि क्यूबा के नागरिकों और क्यूबा छोड़ चुके लोगों की मदद करना अमेरिका का लक्ष्य है। ट्रंप ने कहा, 'क्यूबा एक रोचक मामला है। क्यूबा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। क्यूबा के लोग वर्षों से परेशानी झेल रहे हैं। मुझे लगता है कि क्यूबा एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर हम आगे चर्चा करेंगे क्योंकि क्यूबा एक असफल राष्ट्र है। हम क्यूबा के लोगों की मदद करना चाहते हैं।' अमेरिका की खुफिया एजेंसियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाकर शनिवार को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार किया और उन्हें अमेरिका ले जाया गया है। अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पाम बोन्डी ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, नशीली दवाओं की तस्करी और नार्को आतंकवाद की साजिश रचने के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया गया है।

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की धमकी- ‘दंगाईयों को उनकी जगह दिखाओ’

तेहरान. ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का बयान सामने आया है। खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को धमकी दी है और सुरक्षाबलों को सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। खामेनेई ने कहा कि जो दंगाई हैं, उन्हें उनकी जगह दिखाई जाए। खामेनेई का बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान में आर्थिक संकट को लेकर बीते कई दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन विरोध प्रदर्शनों में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। खामेनेई के इस बयान को ईरान के सुरक्षा बलों के लिए खुली छूट माना जा रहा है और अब वे प्रदर्शनकारियों पर और सख्ती बढ़ा सकते हैं।  खामेनेई ने विदेशी ताकतों पर लगाए साजिश रचने के आरोप ईरान के राष्ट्रीय टीवी पर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का बयान जारी किया गया। इस बयान में खामेनेई ने कहा, 'हम प्रदर्शनकारियों से बात कर रहे हैं, अधिकारियों को भी प्रदर्शनकारियों से बात करनी चाहिए, लेकिन बात करने से कोई फायदा नहीं होगा। दंगाइयों को उनकी जगह पर पहुंचा देना चाहिए।' खामेनेई ने विरोध प्रदर्शन के पीछे विदेशी ताकतों के हाथ होने का दावा किया। उन्होंने कहा, 'दुश्मनों द्वारा खरीदे गए कुछ लोग इस विरोध प्रदर्शन के पीछे हैं, जो दुकानदारों और प्रदर्शनकारी लोगों के पीछे से ईरान, ईरानी गणतंत्र और इस्लाम के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।' अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों का किया समर्थन ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के अभी थमने के आसार नहीं लग रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर दिया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि अगर ईरान की सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा करती है तो अमेरिका उनके बचाव में आएगा। ट्रंप के इस बयान पर ईरान की सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैनिकों पर हमले की धमकी दी। ईरान में साल 2022 में भी एक 22 वर्षीय युवती महसा अमीनी की मौत के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। महसा अमीनी को बुर्का न पहनने के लिए प्रताड़ित किया गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। 2022 के बाद ईरान में अब इतने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ईरान के कट्टरपंथी नेता प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के पक्ष में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में साल 2019 में ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में 300 लोगों की मौत हुई थी। वहीं महसा अमीनी की मौत के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में 500 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और 22 हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था।  

‘न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी बोले- मादुरो पर युद्ध की कार्रवाई से कानून का उल्लंघन हुआ है’

वाशिंगटन. अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को गिरफ्तार कर लिया है, जिसे न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान मामदानी ने युद्ध की कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। मामदानी ने कहा कि यह कदम संघीय और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इससे न्यूयॉर्क में हजारों वेनेजुएलाइयों पर असर पड़ सकता है। एक्स पर एक पोस्ट में मामदानी ने लिखा, 'अमेरिकी सेना की ओर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी मिली। साथ ही, उन्हें न्यूयॉर्क शहर में संघीय हिरासत में रखने का प्लान है। एक संप्रभु राष्ट्र पर एकतरफा हमला युद्ध की कार्रवाई है और संघीय व अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।' जोहरान मामदानी ने कहा कि यह शासन परिवर्तन की कोशिश न केवल विदेशों में प्रभाव डालती है, बल्कि न्यूयॉर्क में रहने वाले हजारों वेनेजुएलाइयों सहित सभी न्यूयॉर्कवासियों की सुरक्षा पर सीधा असर डालती है। उनका प्रशासन स्थिति पर नजर रखेगा और जरूरी दिशानिर्देश जारी करेगा।' वेनेजुएला की राजधानी काराकास में खुफिया एजेंसियों और अमेरिकी सेना की संयुक्त कार्रवाई में मादुरो व फ्लोर्स को गिरफ्तार किया गया और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मादुरो और उनकी पत्नी पर न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में ड्रग ट्रैफिकिंग और नार्को-टेररिज्म षड्यंत्र के आरोप लगाए गए हैं। वे मुकदमे का सामना करेंगे। अमेरिकी सेना का वेनेजुएला पर बड़ा सैन्य हमला डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर बड़ा सैन्य हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को गिरफ्तार कर लिया। ट्रंप के अनुसार, यह ऑपरेशन रात में किया गया, जिसमें वेनेजुएला की सैन्य क्षमताओं को निष्क्रिय कर दिया गया। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं कर सकता जो अमेरिका ने हासिल किया। मादुरो दंपति को अमेरिका ले जाया जा रहा है, जहां वे ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म के आरोपों में मुकदमा का सामना करेंगे। मुकदमा न्यूयॉर्क या फ्लोरिडा में हो सकता है। ट्रंप ने इसे अमेरिकी सेना की बहादुरी का नतीजा बताया है।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो के हाथों में हथकड़ी और डिटेंशन सेंटर नया ठिकाना

वाशिंगटन. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पहली तस्वीरें सामने आ गई हैं। लैटिन अमेरिकी देश के इस कद्दावर नेता को न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) के मुख्यालय में कड़ी सुरक्षा के बीच देखा गया। जारी किए गए वीडियो में मादुरो को हथकड़ियों में और सैनिकों के घेरे में मुख्यालय के गलियारे से ले जाते हुए दिखाया गया है। आपको बता दें कि शनिवार को अमेरिकी हवाई हमलों के बाद मादुरो और उनकी पत्नी, सीलिया फ्लोर्स को वेनेजुएला से न्यूयॉर्क लाया गया। मादुरो अब फेडरल कस्टडी में रहेंगे। अमेरिकी न्याय विभाग ने उन पर 'नार्को-टेररिज्म' की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है, जिसके तहत उन पर मुकदमा चलाया जाएगा। अमेरिका की नजर वेनेजुएला के तेल खजाने पर इस सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका कम से कम अस्थायी रूप से वेनेजुएला का शासन संभालेगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों का उपयोग करेगा और अन्य देशों को बड़ी मात्रा में तेल बेचेगा। ट्रंप ने कहा, "हम देश को तब तक चलाएंगे जब तक कि हम एक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं कर लेते।" डेलसी रोड्रिगेज बनीं कार्यवाहक राष्ट्रपति इधर वेनेजुएला में मचे सियासी घमासान के बीच देश की सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक चैंबर ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेलसी रोड्रिगेज को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, रोड्रिगेज प्रशासनिक निरंतरता और राष्ट्र की व्यापक रक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभालेंगी। कोर्ट अब इस बात पर बहस करेगा कि राष्ट्रपति की जबरन अनुपस्थिति की स्थिति में राज्य की संप्रभुता को बनाए रखने के लिए कानूनी ढांचा क्या होना चाहिए। आपको यह भी बता दें कि ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व की प्लानिंग महीनों से चल रही थी। रिहर्सल के बाद यह मिशन मात्र 30 मिनट में पूरा हुआ। वर्तमान में राजधानी काराकास में स्थिति तनावपूर्ण है। रूस और चीन जैसे देशों ने इस कार्रवाई पर कड़ी नजर रखी हुई है, जबकि अमेरिकी तेल कंपनियां बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए निवेश की तैयारी कर रही हैं।