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कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट से मचा घमासान, ग्वालियर-चंबल में क्यों पसरी है खामोशी?

ग्वालियर  पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह संघ और भाजपा की प्रशंसा करने से अपने ही दल के राजनीतिक भंवर में फंसे नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर पूर्व मुख्यमंत्री की पोस्ट से कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। इस घमासान में उनके राजनीतिक गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल में खामोशी है। अंचल में दिग्विजय सिंह के कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेता भी पक्ष और विपक्ष में बोलने से फिलहाल बच रहे हैं। केवल उनके पुत्र जयवर्धन और डॉ. गोविंद सिंह ही पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थन में खड़े नजर आए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अंचल के कांग्रेसी शीर्ष नेतृत्व के रूख का इंतजार कर रहे हैं। पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की यात्रा से जुड़े कुछ फोटो पोस्ट कर लिखा है कि उनके पिता के लिए संगठन सर्वोपरि है। पूर्व मुख्यमंत्री की निष्टा पर संदेह करना गलत पूर्व मुख्यमंत्री के नजदीकी माने जाने वाले पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने नईदुनिया के संपर्क करने पर कहा कि दिग्विजय सिंह के संगठन के प्रति समर्पण पर संदेह करना अनुचित है। पूर्व मुख्यमंत्री संघ व भाजपा के घोर विरोधी हैं। उनके द्वारा की गई पोस्ट संघ और भाजपा के संबंध में पोस्ट प्रशंसा नही, व्यंग्य है। यह हैं खामोश ग्वालियर-चंबल अंचल में पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थकों की लंबी फौज है। इसके साथ ही उनके विरोधियों की संख्या भी कम नही हैं, लेकिन उनकी पोस्ट पर समर्थकों व विरोधियों की अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नही आई है। पूर्व मंत्री केपी सिंह, राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह सरीखे नेता खामोश हैं। संघ व भाजपा के संगठन की प्रशंसा की थी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक ब्लैक एंड व्हाइट फोटो वायरल किया। इसमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फर्श पर बैठे नजर आ रहे हैं। यह फोटो वायरल करने के साथ उन्होंने संघ और भाजपा के संगठनात्मक शक्ति की प्रशंसा की। इस पोस्ट के बाद दिग्विजय सिंह कांग्रेसियों के टारगेट पर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दे दिया और नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सरदार पटेल निरुपित किया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि दिग्विजय सिंह की राज्यसभा में दोबारा जाने के लिए शीर्ष नेतृत्व पर दबाव की राजनीति है।

वंदे भारत की जगह धरती का पुष्पक विमान, 180 किमी/घंटा की स्पीड में सफल ट्रायल, लग्ज़री का नया अनुभव

नई दिल्ली भारतीय रेल वंदे भारत प्रीमियम सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन का स्‍लीपर वर्जन लॉन्‍च करने की तैयारी कर रहा है. इसका ट्रायल भी पूरा कर लिया गया है. इसे सबसे पहले गुवाहाटी से कोलकाता के बीच चलाया जाएगा. पीएम मोदी इसी महीने लग्‍जरी ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं. रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने खुद इसकी जानकारी दी है. उन्‍होंने वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन का ट्रायल सफल रहने के बारे में भी बताया है. वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन के अंदर की तस्‍वीरें सामने आई हैं, जिसे देखने पर इस सुपर एक्‍सक्‍लूसिव ट्रेन में मिलने वाली सुविधाओं का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. तस्‍वीरों में वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन की आरामदायक बर्थ को देखा जा सकता है. सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन की सीटें तेजस राजधानी, दुरंतो और अन्‍य सुपरफास्‍ट ट्रेनों के मुकाबले ज्‍यादा कंफर्टेबल होने वाली हैं.  रेल मंत्री ने अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि यह ट्रेन अगले 15 से 20 दिनों में शुरू हो जाएगी. संभावना है कि इसका शुभारंभ 18 या 19 जनवरी के आसपास हो सकता है. उन्होंने कहा, 'हमने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है और सभी तैयारियां पूरी हैं. सटीक तारीख की घोषणा अगले दो-तीन दिनों में कर दी जाएगी.' ऐसे में अनुमान है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने गुवाहाटी और कोलकाता के बीच बहुप्रतीक्षित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखा देंगे. रेल मंत्री वैष्णव के अनुसार, 16 डिब्बों वाली इस वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन में कुल 823 यात्रियों के सोने की व्यवस्था होगी. ट्रेन की डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा है, हालांकि गुवाहाटी और कोलकाता के बीच यह 120-130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी. यह ट्रेन असम और पश्चिम बंगाल के कई प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगी. बता दें कि दोनों राज्यों में इस वर्ष विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित हैं. रेल मंत्री ने इसे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया हवाई यात्रा की तुलना में काफी कम होगा. न्‍यूज एजेंसी PTI के अनुसार, उन्होंने बताया कि AC3 कोच का किराया करीब 2300 रुपये, AC2 का किराया करीब 3000 रुपये और फर्स्‍ट AC का फेयर करीब 3600 रुपये होगा. इन किरायों में भोजन भी शामिल रहेगा. उन्होंने बताया कि किराया तय करते समय मध्यम वर्ग को ध्यान में रखा गया है. वर्तमान में गुवाहाटी-कोलकाता हवाई यात्रा का खर्च करीब 6000 से 8000 रुपये तक होता है.  प्रति किलोमीटर किराए की जानकारी देते हुए वैष्णव ने बताया कि फर्स्‍ट AC के लिए 3.8 रुपये प्रति किमी, AC 2 के लिए 3.1 रुपये प्रति किमी और AC 3 के लिए 2.4 रुपये प्रति किमी किराया होगा. रेल मंत्रालय की प्रस्तुति के अनुसार, इस ट्रेन में 11 थर्ड AC, चार सेकेंड AC और एक फर्स्ट AC कोच होगा. कुल 823 बर्थ में से 611 थर्ड AC, 188 सेकेंड AC और 24 फर्स्ट AC में होंगी.  वंदे  भारत स्‍लीप ट्रेन की खासियतों में आरामदायक और बेहतर कुशनिंग वाली बर्थ, ऑटोमैटिक दरवाजे, बेहतर सस्पेंशन से कम शोर और स्मूथ सफर, ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली, आपातकालीन बातचीत प्रणाली और उच्च स्वच्छता के लिए कीटाणुनाशक तकनीक शामिल है. यह तकनीक 99.9 प्रतिशत कीटाणुओं को खत्म करने में सक्षम है.  180 किमी/घंटा की सफल ट्रायल स्पीड हासिल की भारतीय रेलवे ने देश में स्वदेशी रेल नवाचार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का अंतिम हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त (Commissioner of Railway Safety) की निगरानी में हुए इस परीक्षण ने भारत में अगली पीढ़ी की स्लीपर ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। कोटा–नागदा सेक्शन पर हाई-स्पीड ट्रायल इस अंतिम ट्रायल को कोटा–नागदा रेल खंड पर अंजाम दिया गया, जहाँ स्वदेशी रूप से निर्मित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने 180 किमी/घंटा की शीर्ष गति प्राप्त की। परीक्षण के दौरान राइड स्थिरता, कंपन परीक्षण, ब्रेकिंग क्षमता, आपातकालीन ब्रेकिंग प्रदर्शन और सुरक्षा प्रणालियों की जांच की गई। रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने ट्रायल को पूरी तरह संतोषजनक घोषित किया। उन्नत राइड क्वालिटी का प्रदर्शन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस सफल परीक्षण के वीडियो साझा किए, जिसमें वाटर-ग्लास स्थिरता प्रदर्शन विशेष आकर्षण रहा। इस परीक्षण में ग्लास में भरा पानी बिना छलके स्थिर रहा, जो ट्रेन की उन्नत सस्पेंशन प्रणाली और राइड कम्फर्ट को दर्शाता है। यात्री केंद्रित डिज़ाइन और आधुनिक सुविधाएँ 16 कोच वाली यह वंदे भारत स्लीपर रेक विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा के लिए तैयार की गई है। इसमें निम्नलिखित प्रमुख सुविधाएँ उपलब्ध हैं:     आरामदायक स्लीपर बर्थ     स्वचालित दरवाजे     आधुनिक टॉयलेट     CCTV आधारित निगरानी प्रणाली     डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली     ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियाँ     फायर डिटेक्शन और सेफ्टी मॉनिटरिंग सिस्टम खबर से जुड़े जीके तथ्य     वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने 180 किमी/घंटा की ट्रायल गति प्राप्त की है।     ट्रायल रेलवे सुरक्षा आयुक्त की देखरेख में हुआ और संतोषजनक पाया गया।     यह ट्रेन स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित की गई है।     यह आत्मनिर्भर भारत पहल का हिस्सा है। प्रमुख सुरक्षा और तकनीकी विशेषताएँ वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में निम्नलिखित अत्याधुनिक सुरक्षा और तकनीकी सुविधाएँ शामिल हैं:     कवच (KAVACH) ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम     क्रैशवर्थी सेमी-पर्मानेंट कपलर्स और एंटी-क्लाइंबर्स     फायर बैरियर डोर्स, एरोसोल आधारित अग्नि शमन प्रणाली     रीजनरेटिव ब्रेकिंग     UV-C लैंप आधारित वातानुकूलन संक्रमण नियंत्रण     केंद्रीय रूप से नियंत्रित स्वचालित दरवाजे     चौड़े सील्ड गैंगवे     आपातकालीन संवाद इकाई (Emergency Talk-back Unit)     दिव्यांगजन अनुकूल शौचालय     सेंट्रलाइज्ड कोच मॉनिटरिंग सिस्टम     एर्गोनॉमिक रूप से डिज़ाइन की गई सीढ़ियाँ भारतीय रेलवे की आत्मनिर्भरता और नवाचार की दिशा में अगला कदम CRS की स्वीकृति के बाद अब वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेवाओं की शुरुआत का रास्ता साफ हो गया है। यह उपलब्धि सुरक्षा, नवाचार और स्वदेशी निर्माण के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। आने वाले समय में यात्री लंबी दूरी की यात्रा को विश्वस्तरीय सुविधा और उच्च तकनीक के साथ अनुभव कर सकेंगे।  

ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2: 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा, बाघों के शिकार पर होगी सख्त कार्रवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान 56 बाघों की मौत के बाद वन विभाग ने शिकार और अवैध गतिविधियों पर सख्ती के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी टाइगर रिजर्व, वन मंडल और वन विकास मंडलों में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ चलाया जाएगा। इस विशेष अभियान के दौरान फील्ड स्तर पर सघन गश्त अनिवार्य होगी और शिकार की किसी भी घटना पर तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा इसको लेकर जारी निर्देश में कहा गया है कि हर वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में एक उपवन मंडल स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को जानकारी भेजेगा। ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप एक माह पांच दिन तक चलेगा। इस दौरान सभी वन मंडल इकाइयों में सघन गश्ती दिन और रात्रि में की जाएगी। सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी एवं अधीनस्थ अधिकारी गश्त करेंगे। साथ ही हफ्ते में दो दिन वन मंडल अधिकारी और उप वन मंडल अधिकारी वहीं एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक गश्त करेंगे। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ठंड के मौसम में शिकार की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं। फंदे और विद्युत करंट का उपयोग कर किए जाने वाले अवैध शिकार में बाघ, तेंदुआ, भालू और अन्य संरक्षित वन्य प्राणी भी फंस जाते हैं। बीते वर्ष बाघों की मौत के मामलों में शिकार की आशंका लगातार सामने आने के बाद विभाग ने विशेष निगरानी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ पूरे प्रदेश में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा। इसमें प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व, 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल शामिल होंगे। अभियान की अवधि में दिन और रात दोनों समय गश्त की जाएगी। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक वन मंडल, टाइगर रिजर्व और वन विकास मंडल में उपवन मंडल स्तर का एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेगा। गश्त के दौरान सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी और अधीनस्थ अधिकारी क्षेत्र में रहेंगे। दो दिन वन मंडल अधिकारी और उपवन मंडल अधिकारी, जबकि एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक द्वारा अनिवार्य निरीक्षण किया जाएगा। अभियान में प्रदेश के 9 डॉग स्क्वाड, 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड और एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड को सक्रिय रूप से लगाया जाएगा। संवेदनशील इलाकों, शिकारी और घुमक्कड़ समुदायों के डेरों, वन सीमा से सटे क्षेत्रों और विद्युत लाइनों के आसपास सघन सर्चिंग की जाएगी। मेटल डिटेक्टर उपकरणों का भी उपयोग किया जाएगा। यदि शिकार के फंदे में कोई वन्य प्राणी फंसा मिलता है, तो तत्काल रेस्क्यू कर उपचार की व्यवस्था और अपराध पंजीबद्ध करने के निर्देश हैं। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2014 से 2025 के बीच फंदे और विद्युत करंट से शिकार के 933 मामले दर्ज हुए। इनमें 39 बाघ, 101 तेंदुए, 36 भालू और 17 राष्ट्रीय पक्षी मोर शामिल हैं। सिर्फ वर्ष 2025 में ही 56 बाघों की मौत दर्ज की गई, जिनमें से 36 मामलों में शिकार की आशंका जताई गई है। अभियान के दौरान रोजाना स्तर पर वन मंडल अधिकारी समीक्षा करेंगे, जबकि साप्ताहिक समीक्षा मुख्य वन संरक्षक और क्षेत्र संचालकों द्वारा की जाएगी। वन विभाग का कहना है कि ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ का उद्देश्य केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि शिकार की घटनाओं को रोकना और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। गश्त को लेकर जारी निर्देश     प्रदेश में वर्तमान में 9 डॉग स्क्वाड हैं। इसका भी प्रयोग इस दौरान किया जाएगा।     गश्त के दौरान संवेदनशील क्षेत्र एवं शिकारी व घुमक्कड़ समुदाय के डेरों की चेकिंग, सर्चिंग कार्यवाही की जाएगी।     सर्चिंग के दौरान निकटतम डॉग स्क्वाड को साथ रखा जाएगा और मेटल डिटेक्टर उपकरण भी उपयोग में लाए जाएंगे।     गश्त के दौरान वन राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्र और बागड़, फेंसिंग में सर्चिंग की जाएगी।     प्रदेश में वर्तमान में 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड एवं एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड काम कर रहा है, इसको भी उपयोग में लाया जाएगा। गश्त के दौरान शिकार के लिए प्रयुक्त फंदे में वन्य प्राणी फंसा पाए जाने की स्थिति में तत्काल निकटतम रेस्क्यू स्क्वाड की सहायता से वन्य प्राणी के उपचार की उचित व्यवस्था की जाएगी। अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा। ऐसे मामले में अपराध में शामिल अपराधी का पता लगाकर तत्काल कार्यवाही की जाएगी।     वन भूमि या वन्य प्राणी क्षेत्र से जाने वाले विद्युत लाइन के नीचे और उसके आसपास गश्ती करने के लिए भी कहा गया है और आवश्यकता अनुसार विद्युत अमले को भी साथ रखने के लिए कहा गया है।     गश्त के दौरान शिकार के लिए लगाए गए फंदे में फैलाया गया विद्युत करंट, वायर वन भूमि या वन्य प्राणी क्षेत्र में पाए जाने पर प्रकरण में मिले साक्ष्य के आधार पर जब्त कर अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा और अपराध में शामिल अपराधी का पता लगाकर कार्यवाही की जाएगी।     गांव और शहर में पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी निगरानी पंजी में भी दर्ज की जाएगी।     ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप के अंतर्गत वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में की जा रही कार्यवाही की समीक्षा रोज वन मंडल अधिकारी करेंगे और हर सप्ताह संबंधित मुख्य वन संरक्षक, क्षेत्र संचालक, क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक के द्वारा भी इसकी समीक्षा की जाएगी। प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व, 11 परियोजना मंडल सभी मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक, क्षेत्रीय क्षेत्र संचालक, संचालक टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक वन विकास निगम, वन मंडल अधिकारी तथा संभागीय प्रबंधक वन विकास निगम को जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल हैं। ऐसे इलाकों में शिकारी और मांस के शौकीन लोगों द्वारा शिकार के जो तरीके अपनाए जाते हैं उससे बाघ, तेंदुए, हाथी, भालू आदि भी शिकार हो जाते हैं। विभागीय पोर्टल में दर्ज शिकार के प्रकरणों का विश्लेषण करने पर पाया गया है कि वर्ष 2014 से 2025 तक फंदे एवं विद्युत लाइन में तार फंसाकर शिकार से संबंधित कुल 933 प्रकरण … Read more

मोहन यादव सरकार ने लिया बड़ा फैसला, सरकारी नौकरियों के लिए दो बच्चों की शर्त को समाप्त करने की दिशा में कदम

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त हटाने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने विधि विभाग से सलाह के बाद इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस बदलाव से उन कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जो इस नियम के कारण नौकरी के लिए अपात्र हो गए थे या जिनकी सेवाएं समाप्त हो गई थीं। 2001 से लागू था नियम यह नियम 26 जनवरी, 2001 से लागू था, जिसके तहत तीसरा बच्चा होने पर सरकारी नौकरी नहीं मिलती थी और नौकरी में रहते हुए तीसरा बच्चा होने पर सेवा समाप्त कर दी जाती थी। यह नियम तब बनाया गया था जब प्रदेश में प्रजनन दर अधिक थी। हालांकि, सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) बुलेटिन 2023 के अनुसार, मध्य प्रदेश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.4 है, जो भारत की टीएफआर 1.9 से अधिक है। शहरी क्षेत्रों में यह दर 1.8 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.6 है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य पहले ही इस तरह के नियमों को संशोधित कर चुके हैं। इन कर्मचारियों को होगा लाभ इस नए नियम से स्कूल, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और अन्य विभागों के कर्मचारियों को लाभ होगा। हालांकि, जिन कर्मचारियों पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है, उन्हें इस नए नियम से कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि इसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। परिवीक्षा अवधि में भी संशोधन इसके साथ ही, परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि को लेकर भी नियमों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अब कर्मचारी परिवीक्षा अवधि पूरी होने के छह महीने के भीतर नियमित कर दिए जाएंगे, जिससे उनकी वार्षिक वेतनवृद्धि पर पड़ने वाले असर को रोका जा सकेगा। परिवीक्षा अवधि के नियम में भी सरकार संशोधन कर रही है। अब नियुक्ति के बाद दो या तीन साल की परिवीक्षा अवधि पूरी होने के छह महीने के भीतर कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। अभी इसमें देरी होने से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान होता है, क्योंकि उनकी वार्षिक वेतनवृद्धि पर इसका असर पड़ता है। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ लगातार इस बात को उठा रहा था कि परिवीक्षा अवधि समाप्त करने के लिए समितियों की बैठकें नियमित रूप से होनी चाहिए।

क्या कंडोम महंगे करने से जनसंख्या बढ़ेगी? तीसरे साल से डरा हुआ चीन, भारत के लिए यह क्या अवसर ला सकता है?

बीजिंग बीते तीन सालों से चीन एक ऐसी लड़ाई लड़ रहा है, जिसमें न तो तोपें चल रही हैं और न ही मिसाइलें। यह लड़ाई है- जनसंख्या बचाने की। एक देश जो कभी दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला था, वह अब अपनी आबादी घटने से परेशान है। चीन लंबे समय तक 'वन चाइल्ड पॉलिसी' से जनसंख्या नियंत्रित करता रहा, अब इसके उलटा हो गया है। चीन से आए ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2025 में लगातार तीसरे साल उसकी आबादी में गिरावट दर्ज की गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि चीन की सरकार अब बच्चों को बढ़ाने की हर कोशिश कर रही है- यहां तक कि कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियां महंगे कर दिए। सवाल यह है: क्या कंडोम महंगे करने से जनसंख्या बढ़ जाएगी? और यह संकट ग्लोबल सप्लाई चेन, आपके फोन-गैजेट्स की कीमतों और भारत जैसे युवा देशों पर कैसे असर डालेगा? आइए समझते हैं। चीन का डर: बूढ़ा होता ड्रैगन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा कोई विदेशी दुश्मन नहीं, बल्कि उसकी अपनी जनसांख्यिकी है। 2025 के आंकड़े बताते हैं कि मरने वालों की संख्या पैदा होने वाले बच्चों से कहीं ज्यादा है। चीन ने एक बच्चा नीति को सख्ती से लागू किया था। आज वही नीति उसके गले की फांस बन गई है। उस वक्त जो बच्चे पैदा नहीं हुए, आज वो 'युवा वर्कफोर्स' (काम करने वाले लोग) के रूप में मौजूद नहीं हैं। चीन की चुनौती सिर्फ कम जन्मों तक सीमित नहीं है; तेजी से बढ़ती उम्रदराज आबादी भी उतनी ही बड़ी समस्या है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग अब कुल आबादी के 20% से अधिक हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान बताते हैं कि 2100 तक यह अनुपात 50% तक पहुंच सकता है। इसके नतीजे दूरगामी हैं- कामकाजी आबादी सिकुड़ेगी, आर्थिक वृद्धि पर दबाव बढ़ेगा और स्वास्थ्य व पेंशन पर सरकारी खर्च तेजी से ऊपर जाएगा। क्यों घट रही है चीन की जनसंख्या? चीन की यह समस्या नई नहीं। 1980 से 2015 तक 'वन चाइल्ड पॉलिसी' चली, जिसमें ज्यादातर परिवारों को सिर्फ एक बच्चा करने की इजाजत थी। इसका मकसद तेजी से बढ़ती आबादी को काबू करना था। नतीजा? जन्म दर तेजी से घटी। 2016 में दो बच्चे, 2021 में तीन बच्चों की इजाजत दी गई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। आज युवा कपल बच्चे नहीं चाहते। कारण साफ हैं: बच्चा पालना बहुत महंगा: एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में एक बच्चे को 18 साल तक पालने का खर्च करीब 5.38 लाख युआन (लगभग 76 हजार डॉलर) है। शहरों में तो एक करोड़ युआन से ज्यादा।     नौकरी का दबाव, हाउसिंग महंगी, शिक्षा और हेल्थकेयर का बोझ।     महिलाओं पर घर और करियर दोनों का भार।     शादियां भी कम हो रही हैं- 2025 में रिकॉर्ड कम शादियां हुईं। 2024 में जन्म थोड़े बढ़े क्योंकि 'ड्रैगन ईयर' था (चीनी संस्कृति में शुभ माना जाता है) और कोविड के बाद देरी से शादियां हुईं। लेकिन 2025 में फिर जन्मदर घट गई। संयुक्त राष्ट्र की भविष्यवाणी कहती है कि 2050 तक चीन की आबादी 200 मिलियन कम हो सकती है और बुजुर्गों की तादाद दोगुनी होगी। चीन की जनसांख्यिकीय पहेली: नीति खत्म हुए दस साल, लेकिन आबादी संकट गहराता हुआ 1 जनवरी 2026 को उस फैसले को दस साल पूरे हो गए, जब चीन ने औपचारिक रूप से अपनी कुख्यात एक-बच्चा नीति को खत्म किया था। यह नीति तीन दशकों से भी अधिक समय तक चीन के पारिवारिक जीवन और सामाजिक संरचना को आकार देती रही। वर्ष 2016 में इसे समाप्त करने का निर्णय एक कठोर हकीकत से उपजा था- जन्म दर इतनी तेजी से गिर रही थी कि वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक ऊर्जा और स्थिरता के लिए खतरा बन गई थी। लेकिन एक दशक बाद, तमाम नीतिगत बदलावों और प्रोत्साहनों के बावजूद, बीजिंग जनसंख्या में आ रही ऐतिहासिक गिरावट को रोकने में नाकाम दिख रहा है। चीन की कुल जनसंख्या 2022 में पहली बार 60 से अधिक वर्षों में घटनी शुरू हुई। नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 2022 में आबादी घटकर 1.411 अरब रह गई- एक साल पहले के मुकाबले करीब 8.5 लाख कम। इसकी घोषणा 2023 में की गई थी। विश्लेषकों ने इसे 1961 के बाद पहली जनसंख्या गिरावट बताया, जब माओ त्से तुंग की ग्रेट लीप फॉरवर्ड नीति से उपजे भीषण अकाल ने देश को झकझोर दिया था। 2023 और 2024 में भी यह संकुचन जारी रहा। 2024 में जन्मों में मामूली बढ़त के बावजूद, मौतों की संख्या अधिक रहने से कुल आबादी घटती रही और विशेषज्ञ इस उछाल को स्थायी मोड़ मानने से इनकार कर रहे हैं। जन्मों में तेज गिरावट आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में चीन में लगभग 95 लाख बच्चों का जन्म हुआ- जो 2019 के 1.47 करोड़ जन्मों से बहुत कम है। यह गिरावट ड्रैगन वर्ष जैसी सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़े अस्थायी उछाल के बावजूद दर्ज हुई। वास्तविक तस्वीर यह है कि युवा पीढ़ी बढ़ती महंगाई, आवास लागत, शिक्षा खर्च, असुरक्षित नौकरियों और कार्य-जीवन असंतुलन जैसी चिंताओं से जूझ रही है, जिससे परिवार बढ़ाने का फैसला और कठिन हो गया है। 2025 का अनुमान है कि चीन में लगभग 87 लाख बच्चे पैदा हुए होंगे, जो भारत के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है। हालांकि कुछ एनालिसिस में यह संख्या 73 से 78 लाख के बीच रहने का अनुमान है। यह सरकारी कोशिशों के बावजूद कम फर्टिलिटी रेट, लाइफस्टाइल में बदलाव और डेमोग्राफिक बदलावों के कारण लगातार गिरावट को दिखाता है। यह संख्या पिछले सालों की तुलना में काफी कम है। 2026 का विवादित कदम सबसे हालिया और विवादित फैसला, 1 जनवरी 2026 से लागू हुआ है। इसके तहत सरकार ने गर्भनिरोधकों पर 13% वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) लगाना शुरू किया है, जबकि चाइल्डकेयर सेवाओं, विवाह-संबंधी सेवाओं और वरिष्ठ नागरिक देखभाल को कर-मुक्त रखा गया है। पहले 1994 से ये टैक्स-फ्री थे, क्योंकि तब जनसंख्या नियंत्रण नीति थी। अब नीति उलटी है- बच्चे पैदा करो! सरकार का तर्क है कि इससे जन्मोत्साहन और पारिवारिक समर्थन सेवाएं मजबूत होंगी। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि गर्भनिरोधकों पर कर महिलाओं के प्रजनन अधिकारों और स्वास्थ्य विकल्पों … Read more

15 अगस्त 2027 से भारत में शुरू होगी पहली बुलेट ट्रेन, सूरत–वापी से होगी शुरुआत

 सूरत देश की बहुप्रतिक्षित बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को इसके बारे में संकेत दिया था. उन्होंने कहा था कि, 15 अगस्त, 2027 को पहली बुलेट ट्रेन मिलने की संभावना है.  भारत में बुलेट ट्रेन का सपना अब साकार होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। नए साल के मौके पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देशवासियों को बड़ी सौगात देते हुए बताया कि 15 अगस्त 2027 से देश में पहली बुलेट ट्रेन दौड़ने लगेगी। रेल मंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अगले स्वतंत्रता दिवस के लिए लोग अभी से बुलेट ट्रेन की यात्रा का मन बना सकते हैं। पहले चरण में यह हाई-स्पीड ट्रेन सूरत से वापी के बीच लगभग 100 किलोमीटर के हिस्से में चलाई जाएगी। अहमदाबाद से मुंबई के बीच प्रस्तावित देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अहमदाबाद से मुंबई के बीच प्रस्तावित है। इसके पूरा होने के बाद दोनों महानगरों के बीच 508 किलोमीटर की दूरी मात्र 2 घंटे 17 मिनट में तय की जा सकेगी। फिलहाल इस महत्वाकांक्षी परियोजना का करीब 55 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूरत में परियोजना की प्रगति की समीक्षा भी की थी। पूरे रूट में से 352 किलोमीटर गुजरात और दादरा-नगर हवेली में जबकि 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में आता है। यह परियोजना नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा जापान के सहयोग से तैयार की जा रही है। जापान के तकनीक पर आधारित होगी यह ट्रेन जापान की प्रसिद्ध शिंकानसेन तकनीक पर आधारित होगी, जिसकी अधिकतम गति 320 किमी प्रति घंटा होगी। पूरे मार्ग पर कुल 12 स्टेशन होंगे, जिनमें अहमदाबाद, वडोदरा, भरूच, सूरत, वापी, ठाणे और मुंबई शामिल हैं। परियोजना का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा एलिवेटेड ट्रैक पर है, जिसमें से 326 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। दुनिया में हाई-स्पीड ट्रेनों की बात करें तो चीन के पास सबसे बड़ा नेटवर्क है, जबकि जापान ने 1964 में सबसे पहले बुलेट ट्रेन शुरू की थी। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, दक्षिण कोरिया और ताइवान भी इस क्षेत्र में आगे हैं। अमेरिका, इंडोनेशिया और मोरक्को में भी हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि, बुलेट ट्रेनें 2027 तक पटरी पर आ जाएंगी. इसका पहला सेक्शन सूरत से बिलिमोरा तक चालू किया जाएगा. दूसरा सेक्शन वापी से सूरत, फिर वापी से अहमदाबाद, फिर ठाणे से अहमदाबाद और आखिर में मुंबई से अहमदाबाद में शुरू होगा. बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के बारे में बताते हुए वैष्णव ने आगे कहा कि, पोल लगाने के लिए एक नई तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें पोल ​​को ज़मीन से उठाकर वायडक्ट तक ले जाया जाता है. यह टेक्नोलॉजी भारत में डेवलप की गई है. अब जापान भी अपने प्रोजेक्ट्स में इसका इस्तेमाल करेगा. केंद्रीय मंत्री ने ट्रैक सिस्टम की नई टेक्नोलॉजी के बारे में आगे बताया कि, उन्हें J-Slab के लिए एक बहुत अच्छा इनोवेशन मिला है. यह वह स्ट्रक्चर है जिस पर ट्रैक बिछाया जाता है. वैष्णव ने कहा कि, यह स्लैब फैक्ट्री में तैयार किया जाता है, साइट पर लाया जाता है, और फिर मशीनों का इस्तेमाल करके एक-एक करके बिछाया जाता है. बुलेट ट्रेन के 12 स्टेशन हैं, महाराष्ट्र में मुंबई, थाने, विरार और बोइसर. गुजरात में वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती. हालांकि, साबरमती और मुंबई टर्मिनल स्टेशन हैं. मुंबई स्टेशन BKC (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स) में है, और तीन डिपो बनाए गए हैं. महाराष्ट्र में दूसरी टनल का निर्माण पालघर जिले की सबसे लंबी सुरंगों में से एक, 1.5 किलोमीटर की पहाड़ी सुरंग, विरार और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच है. ठाणे और BKC के बीच पहली 5 किलोमीटर की अंडरग्राउंड सुरंग पिछले साल सितंबर में पूरी हुई थी. प्रोजेक्ट की कुल लंबाई प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 508 किलोमीटर और टनल की लंबाई 27.4 किलोमीटर है. इसमें से 21 किलोमीटर अंडरग्राउंड टनल और 6.4 किलोमीटर सरफेस टनल है. कुल 8 माउंटेन टनल हैं. जिसमें से 7 महाराष्ट्र में 6.05 किलोमटर और एक गुजरात में 350 मीटर टनल है. ट्रांसपोर्टेशन लैंडस्केप घनी आबादी वाले शहरों, ऊबड़-खाबड़ इलाकों और सुरक्षित वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी से अपना रास्ता बनाते हुए, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट देश में अब तक की सबसे मुश्किल इंजीनियरिंग चुनौतियों का सामना कर रहा है. फिर भी, हर माइलस्टोन हासिल करने के साथ, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर असलियत के करीब आता जा रहा है, एक बार पूरा होने के बाद, यह प्रोजेक्ट भारत के ट्रांसपोर्टेशन लैंडस्केप में एक बड़ा बदलाव लाने वाला अध्याय होगा. पूरे कॉरिडोर में कंस्ट्रक्शन का काम तेजी पकड़ रहा है. जियोटेक्निकल जांच पूरी होने वाली है, रणनीतिक तौर पर ज़रूरी पहाड़ी सुरंगों पर काम शुरू हो गया है, और लगभग 11 किलोमीटर तक पियर बनाने के लिए ओपन फाउंडेशन का काम पूरा हो चुका है. नॉइज बैरियर जैसे-जैसे कॉरिडोर बन रहा है, इसके रास्ते में रहने वाले समुदायों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा कि, ट्रेन के चलने से होने वाले शोर को कम करने के लिए, हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन ने वायडक्ट के दोनों तरफ नॉइज बैरियर लगाना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि, शिंकानसेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके, इन नॉइज बैरियर में खास तौर पर इंजीनियर्ड कंक्रीट पैनल होते हैं जो आवाज को सोखने और मोड़ने के लिए डिजाइन किए गए हैं. हर पैनल रेल लेवल से दो मीटर ऊपर उठता है और एक मीटर चौड़ा होता है, जो एलिवेटेड कॉरिडोर के साथ एक लगातार अकूस्टिक शील्ड बनाता है. एक बार लग जाने पर, इन बैरियर से ट्रेनों और सपोर्टिंग सिविल स्ट्रक्चर दोनों से होने वाले ऑपरेशनल शोर में काफी कमी आने की उम्मीद है, जिससे आस-पास के निवासियों के लिए शांत माहौल पक्का करने में मदद मिलेगी. गुवाहाटी–कोलकाता के बीच चलेगी स्लीपर वंदे भारत रेल मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि देश की पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह ट्रेन 18–19 जनवरी से गुवाहाटी और कोलकाता (हावड़ा) के बीच शुरू की जा सकती है। ट्रायल के दौरान 16 कोच वाली इस ट्रेन ने 182 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की। जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र … Read more

केंद्र सरकार का नया फैसला: 10 रुपये वाली सिगरेट की कीमत में हो सकती है बढ़ोतरी, जानें क्यों

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार ने तंबाकू और तंबाकू से बने उत्‍पाद पर एक्‍साइज ड्यूटी लगाने का ऐलान किया है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होंगे. ऐसे में अगर आप सिगरेट पीते हैं तो अब आपको ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है.आपको कितना ज्‍यादा भुगतान करना होगा, यह स‍िगरेट ब्रांड के आधार पर ही नहीं, बल्कि सिगरेट की लंबाई पर भी निर्भर करेगा.  साल 2017 में GST लागू होने के बाद स‍िगरेट पर यह सबसे ज्‍यादा कर  है. सिगरेट पर 40% जीएसटी के ऊपर एक्‍साइज टैक्‍स को लगाया जाएगा, जो सिगरेट की लंबाई और फिल्‍टर है या नहीं, इस हिसाब से तय होगा. जितनी लंबी सिगरेट होगी, उतना ज्‍यादा भुगतान करना होगा.  क्‍या है नए टैक्‍स रेट्स?      1 फरवरी से लागू होने टैक्‍स नियम के अनुसार, एक्‍साइस ड्यूटी प्रति 1000 सिगरेट के हिसाब से लागू होगा. यह कितना लगेगा यह उस सिगरेट की लेंथ पर निर्भर होगा.       नॉन फिल्‍टर सिगरेट,  लंबाई 65 मिमी तक ₹2,050 प्रति हजार होगा      नॉन-फिल्टर सिगरेट, लंबाई 65 मिमी से अधिक और 70 मिमी तक ₹3,600 प्रति हजार लगेगा.      फिल्टर सिगरेट, लंबाई (फिल्टर मिलाकर) 65 मिमी तक ₹2,100 प्रति हजार लगेगा.     फिल्‍टर सिगरेट, लंबाई (फिल्टर के साथ) 65 मिमी से अधिक और 70 मिमी तक ₹4,000 प्रति हजार लगेगा.      फिल्टर सिगरेट, लंबाई (फिल्टर के साथ) 70 मिमी से अधिक और 75 मिमी तक ₹5,400 प्रति हजार लगेगा.  अन्य सिगरेट पर ₹8,500 प्रति हजार तक एक्‍साइज लागू होगा. तंबाकू ऑप्‍शनल वाले सिगरेट पर एक्‍साइज ड्यूटी ₹4,006 प्रति हजार लागू होगा. इसी तरह, तंबाकू विकल्पों के सिगारिलो 12.5% या ₹4,006 प्रति हजार, जो भी अधिक हो, वह लागू होगा. अन्य 12.5% या ₹4,006 प्रति हजार, जो भी ज्‍यादा होगा, वह लगेगा.  हर सिगरेट पर कितने बढ़ेंगे दाम? एक्‍साइज ड्यूटी के हिसाब से कैलकुलेशन करें तो नॉन फिल्‍टर वाली छोटी सिगरेट (65 मिमी तक) पर 2.05 रुपये की बढ़ोतरी होगी.  फिल्‍टर वाली छोटी सिगरेट (65 मिमी तक) के दाम 2.10 रुपये  बढ़ जाएंगे. 65-70 मिमी तक वाली सिगरेट के दाम में  3 से 4 रुपये तक का इजाफा होगा. प्रीमियम सिगरेट (70-75 मिमी) में करीब 5 रुपये तक का इजाफा हो सकता है.  10 रुपये का सिगरेट अब कितने का?  वहीं एक्‍सपर्ट की बात माने तो, उनका कहना है कि सरकार के इस फैसले से सिगरेट के दाम में 20 से लेकर 50 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है. अगर छोटी  सिगरेट है तो उसपर 20 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है और मध्‍यम वाले सिगरेट पर 30 फीसदी का इजाफा हो सकता है. वहीं प्रीमियम सिगरेट पर 50 फीसदी का इजाफा हो सकता है.  इस हिसाब से देखा जाए तो 10 रुपये वाली सिगरेट पर 2 रुपये का इजाफा हो सकता है, जिस कारण यह सिगरेट 12 रुपये की मिल सकती है. वहीं अगर 15 रुपये की सिगरेट है तो यह 18 रुपये या 19 रुपये में मिल सकती है. 20 रुपये वाली सिगरेट के दाम 23 से 25 रुपये तक हो सकते हैं.    किन सिगरेट पर ज्‍यादा होगा असर?  एक्‍साइज ड्यूटी बढ़ने का पूरा भार कंपनियां ग्राहकों पर डाल सकती हैं, जिस कारण कस्‍टमर्स को सिगरेट पीने पर ज्‍यादा भुगतान करना होगा. इस बढ़ोतरी का ज्‍यादा असर प्रीमियम, लंबी और फ्लेवर एड वाले सिगरेट पर पड़ सकता है. सरकार का उद्देश्‍य सिगरेट पर एक्‍स्‍ट्रा ड्यूटी लगाकर तंबाकू मार्केट में टैक्‍स चोरी को रोकना और सरकार की आय बढ़ाना है.