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सत्ता और विपक्ष आमने-सामने: बैठक के दौरान हाथापाई, विधायकों की तीखी नोकझोंक से हड़कंप

नई दिल्ली कर्नाटक के बीदर में उस वक्त एक शर्मनाक दृश्य देखने को मिला, जब भाजपा और कांग्रेस के विधायक राज्य मंत्री के सामने ही हाथापाई पर उतर आए। यह वाकया जिला पंचायत हॉल में चल रहे कर्नाटक डेवलपमेंट प्रोग्राम की मीटिंग के दौरान हुआ। दरअसल मीटिंग में हुमनाबाद विधानसभा क्षेत्र में जंगल की जमीन के बारे में चर्चा हो रही थी। इसमें जिला प्रभारी मंत्री ईश्वर खंड्रे, भाजपा विधायक सिद्दू पाटिल और कांग्रेस MLC भीमराव पाटिल शामिल थे। तभी जमीन पर कब्जे के विवाद को लेकर दोनों नेता आपस में भिड़ गए।   हाथापाई की आई नौबत दोनों के बीच बहस होने लगी और देखते ही देखते यह बहस हाथापाई तक बढ़ गई। सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो भी वायरल है, जिसमें दोनों नेता एक-दूसरे पर उंगली उठाकर चिल्लाते नजर आ रहे हैं। हंगामे के थोड़ी देर बाद कांग्रेस एमएलसी अपनी कुर्सी से उठे और भाजपा विधायक की ओर बढ़कर उन्हें मारने के लिए हाथ उठाया। लेकिन तभी एक पुलिसवाले ने उन्हें रोक लिया। कमरे में मौजूद अन्य लोगों ने भी स्थिति को संभाला और दोनों नेताओं को धक्का देकर अलग किया। आरोप है कि दोनों ने एक-दूसरे को जमकर गालियां दीं और इसके बाद प्रभारी मंत्री ने मीटिंग को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया।  

उमर खालिद–शरजील की जमानत खारिज: यह न्याय नहीं, अन्याय की कहानी है, महबूबा की बेटी का बयान

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को सोमवार को खारिज कर दिया। यह फैसला 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में आया है, जहां दोनों पर UAPA के तहत साजिश रचने के आरोप लगे हैं। दंगों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा घायल हुए थे। SC के फैसले पर ढेर सारी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने इसे गर्भ में न्याय की मौत कहा है। एक्स पर उन्होंने पोस्ट करके कहा, ‘सुप्रीम कंटेम्प्ट ऑफ इंडिया, मिसकैरेज ऑफ जस्टिस।’ अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर है और जमानत देने का आधार नहीं बनता। पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद और कार्यकर्ता शरजील इमाम लंबे समय से जेल में हैं। एससी के ताजा फैसले से मानवाधिकार संगठनों में हलचल मच गई है, जबकि सरकारी पक्ष ने इसे कानून की जीत बताया। फैसले की सुनवाई जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने की। दोनों आरोपियों ने दावा किया था कि लंबी हिरासत उनके अधिकारों का उल्लंघन है, लेकिन अदालत ने सबूतों के आधार पर याचिका अस्वीकार की। यह मामला CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है, जहां भाषणों को दंगे भड़काने का माध्यम माना गया। दिल्ली में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता उमर, शरजील और अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। उनके खिलाफ यूएपीए और आईपीसी के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। क्षेत्र में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उमर सहित अन्य आरोपियों को जमानत देने से 2 सितंबर को इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपियों ने फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था।  

शीतलहर से कांपा झारखंड, लोहरदगा बना सबसे ठंडा इलाका—3.4 डिग्री दर्ज

रांची झारखंड के कई हिस्सों में सोमवार को शीतलहर की स्थिति बनी रही और राज्य के 10 जिलों में पारा 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। मौसम विभाग के अनुसार, लोहरदगा में राज्य का सबसे कम तापमान 3.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके बाद गुमला में 4.1 डिग्री सेल्सियस और लातेहार में 5.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने कहा, "क्षोभमंडल के निचले स्तरों में उत्तर-पश्चिमी हवाओं के चलने के कारण पारे में गिरावट आई है।" रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने कहा, राज्य की राजधानी रांची में न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। झारखंड के अन्य जिले जहां तापमान 10 डिग्री से नीचे रहा, उनमें बोकारो, कोडरमा, हजारीबाग, खूंटी, सिमडेगा और पलामू शामिल हैं।  

भ्रष्टाचार पर वार: लोकायुक्त ने नगरपालिका आरआई को 20 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा

भिंड भिंड से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां नगरपालिका में आर आई को रिश्वत लेते लोकायुक्त ने धर दबोचा है। आर आई अवधेश यादव को लोकायुक्त ने रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरआई गौहद नगरपालिका में पदस्थ है। आरोप है कि टेंट हाउस के बिल पास कराने के एवज में आरआई ने 97 हजार के बिल पर 50 हजार की रिश्वत की मांग की थी। सौदा पटने पर फरियादी रिश्वत की किश्त देने गया था। इसी वक्त आरोपी को 20 हजार की रिश्वत की एक किश्त लेते हुए लोकायुक्त ने धर दबोचा।  

निकलस मादुरो की गिरफ्तारी पर बेटे का ऐलान: मां की कसम, लड़ाई जारी रहेगी

वेनेजुएला वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन में गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया। इसे लेकर, मादुरो के बेटे निकोलस मादुरो गुएरा ने सोशल मीडिया पर ऑडियो मैसेज जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा कि इतिहास बताएगा कि गद्दार कौन था। गुएरा ने आंतरिक साजिश की आशंका जताई और कहा, 'इतिहास बताएगा कि गद्दार कौन था और यह इतिहास ही उजागर करेगा। हम देखेंगे।' वह ला गुएरा राज्य के सांसद और सत्तारूढ़ PSUV पार्टी के सदस्य हैं। गुएरा ने समर्थकों से 5 जनवरी को सड़कों पर उतरकर एकजुटता दिखाने की अपील की। उन्होंने बाहरी आक्रमण का सामना करने के लिए राजनीतिक और सैन्य एकता की जरूरत पर जोर दिया।   निकोलस मादुरो के बेटे गुएरा ने कहा कि पार्टी एकजुट रहेगी और हार नहीं मानेगी। उन्होंने अपनी मां की कसम खाते हुए भावुक अंदाज में कहा, 'हम ठीक हैं और शांत हैं। आप हमें सड़कों पर लोगों के साथ देखेंगे। वे हमें कमजोर देखना चाहते हैं, लेकिन हम गरिमा के साथ झंडा उठाएंगे। हमें दुख तो है, गुस्सा तो है, लेकिन वे जीत नहीं पाएंगे। मैं अपनी जान, अपनी मां और सिलिया की कसम खाता हूं।' वेनेजुएला में समर्थक सड़कों पर उतरने भी लगे हैं। ड्रग तस्करी की साजिश के आरोप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि बड़े पैमाने पर हमले के बाद मादुरो दंपति को काराकास से पकड़ा गया और USS इवो जिमा युद्धपोत के जरिए अमेरिका लाया गया। उन पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी की साजिश के आरोप हैं, जिनका मुकदमा न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में सोमवार को शुरू होने वाला है। यह अभियान अमेरिकी विशेष बलों की ओर से किया गया, जिसमें वेनेजुएला में कई ठिकानों पर हमले भी हुए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस अभियान की निंदा भी हो रही है और इसे कानून का उल्लंघन बताया जा रहा है।  

सकट चौथ 2026: 6 या 7 जनवरी को व्रत? यहां जानें तिथि, नियम और पूजा का सही तरीका

सनातन परंपरा में सकट चौथ एक महत्वपूर्ण व्रत और पर्व माना गया है, जिसे विशेष रूप से संकटों संकट निवारण और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्ति के लिए मनाया जाता है. इस दिन भक्त विशेष श्रद्धा और संयम के साथ गणेशजी और सूर्यदेव की उपासना करते हैं. शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, सकट चौथ का व्रत जीवन में आने वाले कठिनाइयों, आर्थिक, स्वास्थ्य या पारिवारिक संकटों को दूर करने में सहायक होता है. साथ ही यह व्रत परिवार में सुख-शांति, मानसिक स्थिरता और संतान सुख प्राप्त करने के लिए बहुत ही फलदायी माना गया है. कब है सकट चौथ 2026? पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि 6 जनवरी 2026 को सुबह 8 बजकर 1 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 07 जनवरी 2026 को सुबह 06:52 बजे समाप्त होगी. ऐसे में सकट चौथ का पावन पर्व 06 जनवरी 2026, मंगलवार के दिन ही मनाया जाएगा. शास्त्रों में सकट चौथ पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में सकट चौथ को विशेष स्थान प्राप्त है. भागवत पुराण और ब्रह्मांड पुराण में उल्लेख है कि इस दिन की साधना संकटों को दूर करने में अत्यंत प्रभावी है. शास्त्रों के अनुसार, व्रत के साथ किए गए दान और सेवा से संतान सुख, घर की समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है. यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संकटमोचन साधना, आत्मशुद्धि और मानसिक शांति का प्रतीक माना जाता है. श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाया गया सकट चौथ व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, खुशहाली और आध्यात्मिक विकास सुनिश्चित करता है. यह पर्व जीवन को संतुलित, संयमित और सार्थक बनाने का मार्ग भी दिखाता है. व्रत की विधि और नियम     सकट चौथ का व्रत भक्तिभाव और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है और जीवन में संकटमोचन, सुख-शांति तथा मानसिक स्थिरता लाने में सहायक होता है.     श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ वस्त्र धारण करते हैं, साथ ही पूजा स्थल की साफ-सफाई कर वातावरण को पवित्र बनाते हैं. गणेशजी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर फलों, मिठाई और अन्य प्रसाद का भोग अर्पित किया जाता है. भक्त सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करके उनकी कृपा प्राप्त करते हैं.     व्रती पूरे दिन संयम का पालन करते हैं, अनावश्यक भोजन और विलासिता से दूर रहते हैं. माता-पिता, वृद्धजनों और जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य कमाया जाता है.     कठोर अनुशासन और नियमों के पालन से मन, शरीर और आत्मा शुद्ध होती है. इस व्रत के परिणामस्वरूप व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ, मानसिक स्थिरता और परिवार में सुख-शांति प्राप्त होती है. सकट चौथ का धार्मिक महत्व सकट चौथ का महत्व विशेष रूप से संकट निवारण और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्ति से जुड़ा है. शास्त्रों और पुराणों में उल्लेख है कि इस दिन किया गया व्रत और पूजा जीवन में आने वाले कठिन समय, आर्थिक समस्याओं, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और पारिवारिक संकटों से रक्षा करता है. भक्त विशेष रूप से गणेशजी और सूर्यदेव की उपासना करते हैं, क्योंकि इनके आशीर्वाद से घर में सुख-शांति, समृद्धि और मानसिक स्थिरता बनी रहती है. सकट चौथ का व्रत पूरी तरह श्रद्धा और संयम पर आधारित होता है. कई श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ हल्का भोजन करते हैं. इस दिन पूजा में दीप जलाना, फलों और मिठाई का भोग अर्पित करना, और विशेष मंत्र जाप करना शामिल है. साथ ही, जरूरतमंदों को दान और सेवा करने से पुण्य और सकारात्मक ऊर्जा कई वर्षों तक बनी रहती है.

आरटीओ टैक्स छूट पर रोक से ग्वालियर व्यापार मेले में कारोबार ठप, करोड़ों का नुकसान

 ग्वालियर  ग्वालियर शहर का मान कहे जाने वाले ऐतिहासिक व्यापार मेले का शुभारंभ हुए एक सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन मेले का सबसे मुख्य आकर्षण आटोमोबाइल सेक्टर फिलहाल सन्नाटे की आगोश में है। 25 दिसंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मेले के भव्य उद्घाटन के बाद उम्मीद थी कि आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट की घोषणा तत्काल हो जाएगी, लेकिन शासन स्तर पर हो रही देरी ने कारोबारियों और खरीदारों दोनों के उत्साह पर पानी फेर दिया है। आलम यह है कि शोरूम्स पर गाड़ियां तो सजी हैं, लेकिन उनकी बिक्री का पहिया पूरी तरह थम गया है। पिछले तीन साल से हो रही है टैक्स छूट मिलने में देरी ग्वालियर व्यापार मेले में आरटीओ टैक्स छूट देरी से दिए जाने का सिलसिला पिछले तीन सालों से जारी है। 2022-23 में आरटीओ टैक्स छूट का नोटीफिकेशन मेला शुरू होने से दो दिन पहले ही आ गया था। लेकिन इसके बाद 2023-24, 2024-2025 में जनवरी मध्य यानि मकर संक्राति तक ही 50 प्रतिशत छूट आरटीओ टैक्स में मिल पाई। यानि मेला शुरू होने के बीस दिन बाद। अब व्यापार मेला 2025-26 को शुरू हुए भी 10 दिन हो गए हैं। लेकिन अभी तक टैक्स छूट का नोटीफिकेशन जारी नहीं हुआ है। क्या असर होता है मेले पर     छूट में में देरी होने से वाहनों की बिक्री भी कम होती है और जिससे कारोबारियों को तो नुकसान होता है, शासन को भी राजस्व का नुकसान होता है।     ग्वालियर व्यापार मेले का मुख्य आकर्षण ऑटोमोबाइल सेक्टर है। इस सेक्टर में रौनक ही टैक्स छूट मिलने के बाद आती है। दूसरे टैक्स छूट न मिलने से आटोमोबाइल सेक्टर में कारोबार भी प्रभावित होता है।     बुकिंग वाले वाहनों की डिलिवरी न होने से शोरूम मालिक डिमांड के मुताबिक कारों का स्टाक नहीं मंगा पा रहे हैं। यह भी बताई जा रही वजह 2023-24 में ग्वालियर के साथ उज्जैन में विक्रम व्यापार मेला की शुरूआत हुई थी। जब जनवरी मध्य में ग्वालियर के लिए छूट मिली थी तभी मार्च से शुरू होने वाले विक्रम व्यापार मेला के लिए छूट जारी हो गई। 2024-2025 में भी जनवरी मध्यम में ग्वालियर के साथ ही उज्जैन मेले के लिए टैक्स छूट का नोटीफिकेशन जारी हुआ था। इसके पीछे बताया जाता है कि इसके पीछे उज्जैन मेला को प्रमोट करना अधिक है। ऐसे में ग्वालियर मेले के लिए टैक्स छूट देरी से दी जा रही है। बुकिंग की कतार, डिलीवरी कम सैकड़ों लोगों ने अपनी पसंद की कारों और दोपहिया वाहनों की बुकिंग करा ली है, लेकिन कोई भी डिलीवरी लेने को तैयार नहीं है। सभी को आरटीओ टैक्स की 50 प्रतिशत की छूट का इंतजार है। यही वजह है कि पिछले चार दिनों में नाममात्र के वाहनों की ही बिक्री हुई है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में कारोबार ज्यादा होगा     मेला जब से शुरू होता है, टैक्स में छूट उसी दिन से मिलना चाहिए। इससे न केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर में कारोबार अधिक होगा, बल्कि ग्राहक सहित शोरूम संचालक भी हड़बड़ी में नहीं रहेंगे और ग्राहकों को डिलिवरी समय मिल पर मिलेगी। – रवि गुप्ता, अध्यक्ष कैट वाहनों की बिक्री प्रभावित होती है     समय पर टैक्स में छूट मिलती है तो ग्राहकों को भी समय पर वाहन मिल जाता है। साथ ही चूंकि कंपनी से वाहनों का स्टाक मंगाने में भी समय लगता है। ऐसे में डिलीवरी लेट होती है। साथ ही वाहनों की बिक्री भी प्रभावित होती है। – संजय गर्ग, ऑटोमोबाइल कारोबारी कैबिनेट मीटिंग में रखा जाएगा प्रस्ताव     व्यापार मेला के लिए आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत छूट का प्रस्ताव आगामी छह जनवरी को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में रखा जाएगा। संभवत मीटिंग में प्रस्ताव पास हो जाएगा। इसके बाद टैक्स छूट की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। – उदयप्रताप सिंह, मंत्री परिवहन व शिक्षा।  

हरभजन सिंह का बांग्लादेश पर कड़ा हमला: ‘भारत में स्वागत, लेकिन वहां जो हुआ…!’

जालंधर  बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) और भारतीय क्रिकेट के बीच चल रहा टकराव इन दिनों सुर्खियों में है. मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से रिलीज किए जाने के बाद ये विवाद तब और गहरा गया जब बांग्लादेश ने भारत में होने जा रहे टी20 वर्ल्ड कप के बहिष्कार की धमकी दी. भारत के पूर्व ऑफ-स्पिनर हरभजन सिंह ने अब इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है. हरभजन ने साफ किया कि भारत हर टीम की मेज़बानी के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी ज़ोर देकर कहा कि अंतिम फैसला बांग्लादेश और आईसीसी के हाथ में है. क्या बोले हरभजन सिंह सोमवार को न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ दिनों में जो-जो घटनाएं हुई हैं, उनकी वजह से बांग्लादेश भारत नहीं आना चाहता. बांग्लादेश में जो कुछ हुआ, वह गलत है. आईसीसी को उनके अनुरोध पर फैसला लेना चाहिए. हम भारत में सभी का स्वागत करते हैं, लेकिन वे यहां आना चाहते हैं या नहीं, यह उनकी पसंद है.' बांग्लादेश भारत में खेलना नहीं चाहता हरभजन की यह टिप्पणी उस समय आई, जब बीसीबी ने औपचारिक रूप से आईसीसी को पत्र लिखकर भारत से बाहर अपने सभी टी20 वर्ल्ड कप 2026 मैचों को शिफ्ट करने की मांग की. बीसीबी ने इसके पीछे गंभीर सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया है. यह टूर्नामेंट 7 फरवरी से भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेज़बानी में होना तय है, लेकिन बांग्लादेश अब चाहता है कि उसके सभी मैच पूरी तरह श्रीलंका में कराए जाएं. बीसीबी का यह फैसला शनिवार को हुई आपात बोर्ड बैठक के बाद लिया गया. यह बैठक तब बुलाई गई थी, जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के युवा एवं खेल सलाहकार डॉ. आसिफ नज़रुल ने मौजूदा हालात में टीम को भारत न भेजने की सलाह दी. भारत-विरोधी रुख को और मज़बूत करते हुए बांग्लादेश ने अपने देश में आईपीएल के प्रसारण पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. मुस्तफिजुर से कूटनीतिक और क्रिकेट विवाद इस टकराव की तात्कालिक वजह बीसीसीआई द्वारा केकेआर को मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज़ करने का निर्देश देना रहा. मुस्तफिजुर को आईपीएल नीलामी में 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा गया था, जो किसी भी बांग्लादेशी खिलाड़ी के लिए अब तक की सबसे बड़ी राशि थी. बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा कि यह फैसला “हालिया घटनाक्रम” के कारण लिया गया और यह भी पुष्टि की कि केकेआर को रिप्लेसमेंट लेने की अनुमति दी जाएगी. इसके बाद हालात और बिगड़ते चले गए. बांग्लादेश सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि देश में आईपीएल 2026 के प्रसारण को “अगले आदेश तक” निलंबित किया जा रहा है. वहीं, सितंबर में होने वाला भारत का बांग्लादेश दौरा भी फिलहाल टाल दिया गया है. हालांकि, खबरों के मुताबिक बीसीसीआई ने बांग्लादेश की वेन्यू बदलने की मांग को लॉजिस्टिक तौर पर नामुमकिन बताया है, लेकिन अब आईसीसी एक संवेदनशील भू-राजनीतिक और खेल संबंधी दुविधा के केंद्र में आ गया है. वर्ल्ड कप शुरू होने में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं और ऐसे में बांग्लादेश के मैचों का भारत के बाहर होना तय माना जा रहा है. इसका मतलब यह होगा कि बांग्लादेश और पाकिस्तान, ये दो टीमें होंगी जो भारत में अपने मैच नहीं खेलेंगी. बता दें कि बांग्लादेश को भारत में कोलकाता के ईडन गार्डन्स पर 3 मैच खेलने हैं जबकि मुंबई के वानखेड़े में उसका वर्ल्ड कप का एक मैच होना है.  

वेनेजुएला की चीनी रडार प्रणाली अमेरिकी हमले में हुई नाकाम, JYL-1 और JY-27A सिस्टम हुए पूरी तरह फेल

काराकस     दक्षिण अमेरिका की सबसे मजबूत एयर डिफेंस 'कबाड़' बन गई. अमेरिकी विशेष सेनाओं ने 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया. इस दौरान अमेरिकी हेलीकॉप्टर और विमान बिना किसी रोक-टोक के काराकस में घुसे. वजह? वेनेजुएला की एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह फेल हो गई. खासकर चीन में बने JYL-1 लंबी दूरी के 3D सर्विलांस रडार और JY-27A एंटी-स्टेल्थ रडार एक भी अमेरिकी विमान या हेलीकॉप्टर को डिटेक्ट नहीं कर सके. ये रडार स्टेल्थ हंटर कहे जाते थे, लेकिन अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से अंधे हो गए. वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने क्या बताया था इस साल की शुरुआत में, वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने दावा किया था कि वेनेजुएला की सेना ने चीन निर्मित JY-27A एंटी-स्टील्थ रडार का उपयोग करके 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पांच अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों को सटीक रूप से निशाना बनाया था। हालांकि, अमेरिकी हवाई हमले के दौरान यह रडार सिस्टम कथित तौर पर "पूरी तरह से निष्क्रिय" हो गया। ऐसी आशंका है कि अमेरिका ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के जरिए JY-27A एंटी-स्टील्थ रडार को जाम कर दिया। इससे अमेरिकी सेना को बिना किसी रोक-टोक के वेनेजुएला में घुसने का मौका मिला। चीनी रडार सिस्टम का इस्तेमाल करता है वेनेजुएला वेनेजुएला अपनी हवाई सीमा की सुरक्षा के लिए कई चीनी रडार का इस्तेमाल करता है। इनमें चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉर्पोरेशन का JYL-1 लंबी दूरी का निगरानी रडार और "एंटी-स्टील्थ हथियार" JY-27 रडार शामिल हैं। JY-27 रडार मीटर वेव फिक्वेंसी बैंड (240-390MHz) का इस्तेमाल कर स्टील्थ लड़ाकू विमानों को डिटेक्ट करता है। वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने एक बार दावा किया था कि 2025 तक, उन्होंने 300 किलोमीटर से अधिक की पहचान सीमा के साथ अमेरिकी F-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान का कई बार सफलतापूर्वक पता लगा लिया था। कुछ रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि लॉक-ऑन रेंज 75 से 500 किलोमीटर तक है। वेनेजुएला में चीन के 12 रडार फेल रिपोर्ट में कहा गया है कि यह रडार, एस-बैंड जेवाईएल-1 और जेवाई-11बी रडारों के साथ मिलकर, लंबी दूरी की प्रारंभिक चेतावनी और सटीक स्थिति निर्धारण को मिलाकर एक एयर डिफेंस नेटवर्क बनाता है। यह रूसी निर्मित एस-300वीएम और बुक वायु रक्षा मिसाइलों को निर्देशित करके हमले भी कर सकता है, जिससे एक बंद-लूप "डिटेक्शन-लॉक-इंटरसेप्शन" प्रणाली का निर्माण होता है। वेनेजुएला ने कम से कम 12 ऐसे रडार तैनात किए हैं, जिससे एक राष्ट्रव्यापी एंटी-स्टील्थ निगरानी नेटवर्क का निर्माण हुआ है, जो चीन के असममित रक्षा प्रौद्योगिकी निर्यात का एक विशिष्ट उदाहरण बन गया है। वेनेजुएला में चीनी एयर डिफेंस भी नाकाम इसके अतिरिक्त, वेनेजुएला ने चीनी FK-3 (HQ-12 का एक्सपोर्ट वेरिएंट) मध्यम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम को भी शामिल की है, जो चीनी रडार सिस्टमों के साथ मिलकर राजधानी काराकस और प्रमुख स्थानों की सुरक्षा करता है। हालांकि, वेनेजुएला में तैनात ये चीनी एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिकी हवाई हमलों का पता लगाने में नाकाम रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हमले के कुछ घंटों पहले अमेरिका ने शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक युद्ध शुरू किया था। इसमें वेनेजुएला के रडार को निष्क्रिय करने के लिए विद्धुत चुंबकीय तरंगों का इस्तेमाल किया गया। इसने वेनेजुएला के एयर डिफेंस को नाकाम कर दिया और वह लगभग अंधा हो गया।   वेनेजुएला ने चीन की इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप से कई रडार खरीदे थे…     JYL-1: लंबी दूरी (300-470 किमी) का 3D रडार, हवा की निगरानी के लिए.     JY-27/JY-27A: मीटर-वेव बैंड रडार, जो स्टेल्थ विमानों (जैसे F-35) को पकड़ने का दावा करता है. डिटेक्शन रेंज 300-500 किमी बताई जाती है. ये रडार दक्षिण अमेरिका की सबसे मजबूत एयर डिफेंस का हिस्सा थे, साथ में रूसी S-300 और Buk-M2 मिसाइल सिस्टम. चीनी मीडिया ने पहले दावा किया था कि ये रडार अमेरिकी F-35 को 75 किमी दूर ट्रैक कर सकते हैं. लेकिन अमेरिकी हमले में ये पूरी तरह पैरालाइज हो गए. अमेरिका ने EA-18G ग्राउलर जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमानों से जैमिंग की, जिससे रडार ब्लाइंड हो गए. शुरुआती हमलों में ही एयर डिफेंस नेटवर्क खत्म हो गया. पाकिस्तान से मिलती-जुलती नाकामी यह पहली बार नहीं जब चीनी रडार फेल हुए हैं. 2025 की ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान की एयर डिफेंस को आसानी से तोड़ा. पाकिस्तान के चीनी रडार (HQ-9, LY-80 आदि) भारतीय मिसाइलों और ड्रोनों को डिटेक्ट नहीं कर सके. भारत ने लाहौर समेत कई जगहों पर रडार साइट्स नष्ट कर दीं. पाकिस्तान की चीनी सप्लाई वाली डिफेंस सिस्टम ब्लाइंड हो गई, ठीक वेनेजुएला जैसा. पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ्रीकी देशों और अब वेनेजुएला में चीनी हथियारों की नाकामी का पैटर्न साफ है. असल लड़ाई में ये सिस्टम अमेरिकी या भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के सामने टिक नहीं पाते. क्यों फेल होते हैं चीनी रडार?     इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग: अमेरिका जैसे देशों के पास एडवांस जैमिंग टेक्नोलॉजी है, जो रडार सिग्नल को ब्लॉक कर देती है.     ऑपरेटर ट्रेनिंग और मेंटेनेंस: कई देशों में रखरखाव की कमी और ट्रेनिंग कम होती है.     हाइप vs रियलिटी: चीनी मीडिया में बड़े-बड़े दावे, लेकिन असल जंग में कमजोर पड़ जाते हैं. यह घटना चीनी मिलिट्री इक्विपमेंट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है. वेनेजुएला की सबसे मजबूत एयर डिफेंस कुछ घंटों में कबाड़ बन गई. पाकिस्तान की तरह, यहां भी चीनी टेक्नोलॉजी ने निराश किया. भविष्य में ऐसे हथियार खरीदने वाले देश सोचेंगे दो बार.

वाई-फाई, एलईडी, कैमरे, आधुनिक फर्नीचर की सुविधा से लेकर वीडियो, ऑडियो लेक्चर और क्विज सब लाइब्रेरी में मिलेगा

30 तक सभी डिजिटल गांवों में खुल जाएगी डिजिटल लाइब्रेरी, युवा घर बैठे कर सकेंगे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी वाई-फाई, एलईडी, कैमरे, आधुनिक फर्नीचर की सुविधा से लेकर वीडियो, ऑडियो लेक्चर और क्विज सब लाइब्रेरी में मिलेगा शहर जाने के बजाय गावों में ही मिल सकेंगी सुविधाएं, 26 जनवरी तक पुस्तकालयों के लिए खरीद लिए जाएंगे फर्नीचर उत्तर प्रदेश के ग्राम पंचायत सचिवालयों तक पहुंचेंगी देश के बड़े बड़े शहरों में मिलने वाली सुविधाएं लखनऊ  उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत अब सिविल सर्विसेज और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को बड़े-बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। योगी सरकार 30 जनवरी तक सभी जिलों में आईटी उपकरणों की खरीद पूरी कर ग्राम पंचायत सचिवालयों में अत्याधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करने की तैयारी में जुटी है। यह पहल ग्रामीण प्रतिभाओं को देश के बड़े कोचिंग और अध्ययन केंद्रों जैसी सुविधाएं उनके अपने गांव में उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। 26 जनवरी तक पुस्तकालयों के लिए फर्नीचर की खरीद पूरी कर लेने  कोशिश की जा रही है, जिसके बाद डिजिटल लाइब्रेरी संचालन के लिए तैयार होंगी। लाखों डिजिटल कंटेंट के जरिए कर सकेंगे उच्च स्तरीय तैयारी पंचायतीराज निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि डिजिटल लाइब्रेरी में वाई-फाई, एलईडी स्क्रीन, सीसीटीवी कैमरे, कंप्यूटर सिस्टम के साथ-साथ किताबों और डिजिटल कंटेंट की समृद्ध व्यवस्था होगी। ई-बुक्स, वीडियो और ऑडियो लेक्चर, क्विज और लाखों डिजिटल शैक्षणिक सामग्री के जरिए ग्रामीण युवा अब अपने गांव में रहकर ही उच्च स्तरीय तैयारी कर सकेंगे। विकसित भारत की दिशा में युवाओं को बराबरी का अवसर देने वाला महत्वपूर्ण कदम हर जिले की ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं। प्रत्येक लाइब्रेरी पर करीब 4 लाख रुपये खर्च होंगे। इसमें 2 लाख रुपये की पुस्तकें, 1.30 लाख रुपये के आईटी उपकरण और 70 हजार रुपये के आधुनिक फर्नीचर की व्यवस्था की जा रही है। योगी सरकार की यह पहल ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और विकसित भारत की दिशा में युवाओं को बराबरी का अवसर देने वाला मजबूत कदम मानी जा रही है। पंचायत स्तर पर इस तरह की जाएगी नियमित निगरानी पंचायतीराज निदेशक ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों की ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से डिजिटल लाइब्रेरी खोली जाएंगी। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव लाइब्रेरी का प्रबंधन करेंगे, जबकि सहायक अधिकारी इसकी नियमित निगरानी करेंगे। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर मजबूत होगा और युवा रोजगार व प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अधिक सक्षम बनेंगे।