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भोपाल के कई इलाकों में अतिक्रमण हटाए जाने की तैयारी, 1.30 लाख लोग प्रभावित—मंडला और छतरपुर में नई परियोजनाओं से संकट

भोपाल  भोपाल में भोज वेटलैंड व भदभदा, कलियासोत, मदन महल हिल्स में अतिक्रमण हटाए जाने हैं। मंडला में चुटका मप्र एटॉमिक पावर प्लांट, छतरपुर में डायमंड ब्लॉक लीज परियोजना, न्यू सिंगरौली कोयला खदान परियोजना से 1.30 लाख लोग प्रदेश में बेघर हो सकते हैं। विकास में बाधक बने घर हटाए – 2023 में झुग्गी-झोपड़ी, अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण के तहत 90 घर तोड़े। इन्हीं वजह से 2022 में 489 घर व दुकानें तोड़ी गईं।  – 2023 में कई परियोजनाओं में आड़े आ रहे 390 अन्य घर खाली कराए। इंदौर में 157 घर पीएम आवास योजना में बने थे। -2022 में ऐसे 245 घर थे। 127 सबसे ज्यादा मच्छी बाजार में खाली। – 2022 में एमपी के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 5 गांव में 175 घर खाली कराए। ये रिजर्व के कोर क्षेत्र में थे। एक घर खरगोन में हटाया गया। देशभर में चला नया ट्रेंड लेकिन… बता दें कि देश के कोने-कोने में इस समय जघन्य अपराधों में लिप्त आरोपियों, अपराधियों और आतंकियों के घर तोड़े जा रहे हैं। यह नया ट्रेंड जरूर है, लेकिन अतिक्रमण हटाने से लेकर विकास परियोजनाओं तक के लिए 2017 से 2023 के बीच यानी सात वर्ष में कम से कम 3.44 लाख मकान तोड़े जा चुके हैं। इन्हीं वजहों से अभी और करीब 1.7 करोड़ लोगों के घर टूटने के जोखिम पर हैं। हाउसिंग एंड लैंड राइट्स नेटवर्क संगठन द्वारा जुटाई जानकारियों के अनुसार सात साल में हुई कार्रवाइयों की वजह से करीब 16 लाख लोग बेघर हुए, जिनमें से अधिकतर के लिए सरकारी स्तर पर विस्थापन योजनाएं भी बनाई गईं हैं। 2023 में भारत में कुल 1,07,499 और 2022 में 46,371 मकान तोड़े गए। इसके जरिए दोनों वर्षों में क्रमश: 5,15,752 और 2,22,686 लोगों को घरों से निकाला गया।

डाक विभाग की स्मार्ट पार्सल डिलीवरी, घर पर ताला होने के बावजूद पहुंचेगा पार्सल, मध्य प्रदेश में भी होगी शुरुआत

ग्वालियर  ग्वालियर में जल्द ही डाक विभाग का नया स्मार्ट पार्सल डिलीवरी सिस्टम (एसपीडीएस) लागू होगा, जो पार्सल डिलीवरी के पूरे अनुभव को और भी आसान और आधुनिक बनाएगा। अगर पोस्टमैन को घर पर कोई नहीं मिलता, तो अब ग्राहक अपनी पार्सल को स्मार्ट मशीन से कलेक्ट कर सकेंगे। ऐसे काम करेगा अगर ग्राहक पार्सल डिलीवरी के समय घर पर नहीं मिलते, तो पार्सल स्मार्ट मशीन में रखा जाएगा। ग्राहक को मैसेज भेज बताया जाएगा कि पार्सल कहां रखा है। ग्राहक ओटीपी के जरिए मशीन से पार्सल ले सकते हैं। इससे डिलीवरी का रिकॉर्ड भी ऑटोमेटिड अपडेट हो जाएगा। ग्वालियर के दो प्रमुख स्थानों पर सेवा मध्यप्रदेश के ग्वालियर में यह सेवा सिंधिया स्कूल और सिंधिया कन्या विद्यालय के पास उपलब्ध होगी। नई सुविधा के बारे में डाक विभाग के प्रवर अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि ग्वालियर में रोजाना लगभग 350 से 400 पार्सल आते हैं और इनमें से 8-10 प्रतिशत पार्सल उसी दिन डिलीवर नहीं हो पाते। ऐसे में अब स्मार्ट पार्सल डिलीवरी सिस्टम इन समस्याओं को सुलझाने में मदद करेगा। इन शहरों में मिलेगी सुविधा इंदौर: तक्षशिला डिलीवरी, खातीवाला टैंक सियागंज ग्वालियर: सिंधिया स्कूल और सिंधिया कन्या विद्यालय चेन्नई: अन्ना रोड, मायलापुर, टी. नगर, अंबत्तूर हैदराबाद: बंजारा हिल्स, ऊह्रश्वपल, वनस्थलीपुरम OTP दिखाने पर ही डिलीवरी भारतीय डाक विभाग ने डिलीवरी की सुरक्षा बढ़ाने के लिए ओटीपी आधारित प्रणाली भी शुरू की है। इसका मतलब है कि जब कोई पार्सल या आर्टिकल डिलीवरी के लिए पहुंचेगा, तो प्राप्तकर्ता ग्राहक के मोबाइल फोन पर एक ओटीपी भेजा जाएगा। OTP दिखाने के बाद ही पार्सल दिया जाएगा। इससे गलत पते या किसी अन्य व्यक्ति को पार्सल मिलने की संभावना खत्म हो गई है। पार्सल सीधे उसी व्यक्ति को दिया जा रहा है, जिसके नाम से वह बुक किया गया है।

प्रदेश के विशेषज्ञ ट्रांसको इंजीनियर्स ने रिकॉर्ड समय में 50 एमवीए पॉवर ट्रांसफार्मर को किया ऊर्जीकृत

प्रदेश के विशेषज्ञ ट्रांसको इंजीनियर्स ने रिकॉर्ड समय में 50 एमवीए पॉवर ट्रांसफार्मर को किया ऊर्जीकृत भोपाल  मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने मालनपुर  (भिंड) में तकनीकी दक्षता, सटीक योजना और उत्कृष्ट समन्वय का  उदाहरण प्रस्तुत करते हुए लगभग 15 दिन में 50 एमवीए क्षमता के नये पावर ट्रांसफार्मर का ट्रांसपोर्ट, स्थापना, संपूर्ण तकनीकी परीक्षण एवं ऊर्जीकरण कर एक बेहद अनुकरणीय कार्य किया है। सामान्य परिस्थितियों में किसी भी पावर ट्रांसफार्मर के साइट पर पहुँचने के बाद उसके इरेक्शन, टेस्टिंग, आयल फिल्टेरेशन एवं ऊर्जीकरण में एक माह या उससे अधिक समय लग जाता है, किंतु  मालनपुर के ओद्योगिक क्षेत्र मे विद्युत की सामान्य बहाली की प्राथमिकता के कारण एम पी ट्रांसको ने तकनीकी रूप से जटिल , जोखिमपूर्ण और चुनौतीपूर्ण  कार्य को मुख्य अभियंता (परीक्षण एवं संचार) अमर कीर्ति सक्सेना के कुशल निर्देशन में दिन रात एक कर न्यूनतम संभव समय में सफलतापूर्वक पूरा किया। एम.पी. ट्रांसको के इतिहास में यह विरला अवसर है जब  पुराने फेल ट्रांसफार्मर को हटाकर, नए उच्च क्षमता के  पावर ट्रांसफार्मर का सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन , स्थापना, आवश्यक सभी तकनीकी परीक्षण एवं ऊर्जीकरण  का बेहद संवेदनशील कार्य लगभग 15 दिनों में संभव हो सका हो। न्यूनतम समय में पूर्ण हुआ अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य – एमडी तिवारी एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने बताया कि एम.पी. ट्रांसको के 220 केवी सबस्टेशन मालनपुर में तकनीकी कारणों से  19 दिसंबर  को फेल हुए 40 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर नए 50 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर को न्यूनतम संभव समय में ट्रांसपोर्ट कर सबस्टेशन में स्थापित एवं ऊर्जीकृत किया गया। उन्होंने बताया कि  पावर ट्रांसफार्मर की डिस्मेंटलिंग, ट्रांसपोर्टेशन, साइट प्रिपरेशन, इरेक्शन, ऑयल फिल्ट्रेशन, कमिशनिंग एवं टेस्टिंग की संपूर्ण प्रक्रिया अत्यंत तकनीकी, समय-साध्य एवं सुरक्षा-संवेदनशील होती है। मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र के उपभोक्ताओं को हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए, एम.पी. ट्रांसको के प्रदेश के विभिन्न भागों से नियुक्त किये गए अनुभवी अधीक्षण अभियंताओं ने  स्थानीय तकनीकी टीमों के साथ निरंतर   15 दिनों तक 24×7 कार्य करते हुए उच्च तकनीकी दक्षता, सतर्कता एवं समन्वय के साथ इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा किया। ऊर्जा मंत्री ने दी बधाई  मालनपुर सबस्टेशन में रिकॉर्ड समय में नये पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने पर बधाई देते हुए मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि एम.पी. ट्रांसको की यह सफलता उसके तकनीकी क्षमता, सुनियोजित रणनीति और टीमवर्क का सशक्त प्रमाण है, जो यह दर्शाती है कि प्रतिबद्धता और विशेषज्ञता से असंभव प्रतीत होने वाले कार्य भी संभव बनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के परिणामस्वरूप अब मालनपुर में लक्ष्मणपुरा औद्योगिक क्षेत्र के इंडस्ट्रियल फीडरों को पुनः सामान्य, निर्बाध एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति संभव हो सकेगी। 

कांगेर घाटी में ‘ग्रीन गुफा’ का आगाज, पर्यटन स्थल को मिलेगा नया जीवन—आधिकारिक घोषणा

रायपुर छत्तीसगढ़ की कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता और विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के लिए देश-विदेश में विख्यात है। इसी कड़ी में अब कांगेर घाटी में एक और अनोखी प्राकृतिक स्थलाकृति सामने आई है, जिसे “ग्रीन केव” (ग्रीन गुफा) नाम दिया गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य सरकार द्वारा पर्यटन और वन्य धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। वन मंत्री कश्यप ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन गुफा के पर्यटन मानचित्र में शामिल होने से कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय विकास को गति प्राप्त होगी और शीघ्र ही पर्यटक इस अद्भुत गुफा की प्राकृतिक खूबसूरती का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकेंगे। वन विभाग द्वारा आवश्यक तैयारियां पूर्ण किए जाने के बाद शीघ्र ही इस गुफा को पर्यटकों के लिए खोले जाने की योजना है। उल्लेखनीय है कि यह ग्रीन गुफा कोटुमसर परिसर के कंपार्टमेंट क्रमांक 85 में स्थित है। गुफा की दीवारों और छत से लटकती चूने की आकृतियों (स्टैलेक्टाइट्स) पर हरे रंग की सूक्ष्मजीवी परतें पाई जाती हैं, जिसके कारण इसे “ग्रीन केव” नाम दिया गया है। चूना पत्थर और शैल से निर्मित यह गुफा कांगेर घाटी की दुर्लभ और विशिष्ट गुफाओं में से एक मानी जा रही है। ग्रीन गुफा तक पहुंचने का मार्ग बड़े-बड़े पत्थरों से होकर गुजरता है। गुफा में प्रवेश करते ही सूक्ष्मजीवी जमाव से ढकी हरी दीवारें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। आगे बढ़ने पर एक विशाल कक्ष दिखाई देता है, जहां से भीतर की ओर चमकदार और विशाल स्टैलेक्टाइट्स तथा फ्लो-स्टोन (बहते पानी से बनी पत्थर की परतें) देखने को मिलती हैं, जो गुफा की प्राकृतिक भव्यता को और भी बढ़ा देती हैं। घने जंगलों के मध्य स्थित यह गुफा अपनी अनोखी संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बनने जा रही है। वन विभाग द्वारा गुफा की सुरक्षा एवं नियमित निगरानी की जा रही है। साथ ही पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहुंच मार्ग, पैदल पथ तथा अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का विकास कार्य प्रगति पर है। वन विभाग द्वारा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वनबल प्रमुख व्ही. श्रीनिवासन तथा प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरुण पांडे का मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

लाडली बहना योजना में नया अपडेट: कुछ महिलाओं के खाते में नहीं आएंगे पैसे, जानें क्या है पूरा मामला

भोपाल   मध्यप्रदेश की लाडली बहना योजना की अगली किस्त खाते में आने वाली है. इससे पहले योजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. जल्द ही योजना की राशि पात्र महिलाओं के खातों में सरकार की ओर से डाली जाएगी, लेकिन सभी महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिलेगा. कुछ लाभार्थियों के नाम सूची से हट सकते हैं और कई के पैसे खाते में अटक सकते हैं. जी हां… बैंक खाता, आधार लिंक या पात्रता से जुड़ी छोटी गलती भी परेशानी बन बहनों के लिए बन सकती है. इसलिए जरूरी है कि महिलाएं समय रहते अपनी जानकारी जांच लें, ताकि लाभ बिना रुकावट मिलता रहे. आइए आपको आगे की बात बताते हैं. जरूरी दस्तावेज समय पर पूरे कर लें दरअसल, मध्यप्रदेश की लाडली बहना योजना के तहत जल्द ही महिलाओं के खातों में 1500 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी. सरकार ने इसकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं. तय तारीख के आसपास डीबीटी के माध्यम से पैसा सीधे लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में भेजा जाएगा, जिससे उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके. जिन महिलाओं के दस्तावेज पूरे नहीं हैं, जिनका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है या जो अब योजना की पात्रता में नहीं आतीं, उन्हें इस बार लाडली बहना योजना की राशि नहीं दी जाएगी. इसलिए जरूरी है कि सभी जरूरी दस्तावेज समय पर पूरे कर लिए जाएं.  मध्यप्रदेश की लाडली बहना योजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. जल्द ही लाभ ट्रांसफर होने वाला है, लेकिन सभी महिलाओं को इसका फायदा नहीं मिलेगा. कुछ बहनों के नाम लिस्ट से हट सकते हैं और कई के खाते में पैसा अटक सकता है .बैंक, आधार और पात्रता से जुड़ी छोटी सी गलती भारी पड़ सकती है.पूरी जानकारी पढ़ें और जानें कैसे सुनिश्चित करें कि आपका नाम लाभार्थी सूची में बना रहे.  बता दें कि इस योजना के लिए राशि हर महीने की 1 तारीख से 15 तारीख के बीच जारी की जाती है. इसलिए मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की अगली किस्त (32वीं किस्त) 1 जनवरी से 15 जनवरी के बीच कभी भी जारी की जा सकती है. हालांकि पैसे जारी होने की सही तारीख की अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. बैंक खाता निष्क्रिय होने पर क्या होगा? जांच के दौरान यदि गलत जानकारी या अपात्रता पाई जाती है, तो महिलाओं का नाम योजना से हटाया जा सकता है और आगे भुगतान रोक दिया जाएगा. जिन बहनों का बैंक खाता निष्क्रिय है, आधार सीडिंग या एनपीसीआई लिंक नहीं है, उनके खाते में राशि अटक सकती है. महिलाएं अपने नजदीकी शिविर, पंचायत या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दस्तावेज और स्टेटस अपडेट करा सकती हैं. ऐसी महिलाओं के पैसा आएंगे खाते में महिलाएं अपना आधार-बैंक लिंक जरूर जांच लें, सभी दस्तावेज अपडेट रखें और योजना की पात्रता सुनिश्चित करें. जानकारी सही होने पर लाडली बहना योजना की 1500 रुपये की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी.

8वें वेतन आयोग का ऐलान, कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी—किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

भोपाल  देशभर के सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनर्स के बीच इन दिनों 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चा चरम पर है। केंद्र सरकार ने इसकी प्रक्रिया की शुरुआत पहले ही कर दी है, वहीं राज्यों में भी हलचल तेज हो गई है। नए साल पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बड़ा ऐलान करते हुए 8वें राज्य वेतन आयोग के गठन की घोषणा कर दी। इसके साथ ही असम यह फैसला लेने वाला देश का पहला राज्य बन गया। इस ऐलान के बाद अब मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी उम्मीदें बढ़ गई हैं। एमपी में तेज हुई हलचल, कर्मचारी संघ सक्रिय असम की पहल के बाद मध्यप्रदेश में भी 8वें वेतन आयोग को लेकर कवायद तेज हो गई है। राज्य कर्मचारी संघ ने इसे लेकर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कर्मचारियों को होने वाले संभावित लाभ का पूरा हिसाब-किताब तैयार करने की तैयारी चल रही है। राज्य कर्मचारी संघ के महामंत्री जितेंद्र सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संजय अवस्थी और प्रवक्ता अनिल भार्गव ने बताया कि जल्द ही इस विषय पर विशेष बैठक बुलाई जाएगी।  8वें वेतन आयोग: जानें किस वर्ग को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा 8वां वेतन आयोग क्या है? सरकार हर 10 साल में वेतन आयोग का गठन करती है, ताकि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन व पेंशन की समीक्षा की जा सके। 8वां वेतन आयोग भी इसी उद्देश्य से बनाया गया है। इसके तहत सैलरी स्ट्रक्चर, भत्ते और पेंशन में संशोधन किया जाएगा, ताकि बढ़ती महंगाई का असर कर्मचारियों पर कम हो सके। कितने लोग होंगे लाभार्थी? इस वेतन आयोग से करीब 50 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी (रक्षा कर्मियों सहित) और लगभग 65 लाख पेंशनभोगी (रक्षा सेवानिवृत्तों सहित) लाभान्वित होंगे। यानी कुल मिलाकर करीब एक करोड़ लोग इस फैसले के दायरे में आएंगे। वेतन बढ़ोतरी कैसे तय होगी? 8वें वेतन आयोग में वेतन बढ़ोतरी का आधार फिटमेंट फैक्टर होगा। अभी सरकार ने इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक फिटमेंट फैक्टर 2.15 से लेकर 2.57 तक हो सकता है। फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, बेसिक सैलरी में उतनी ही ज्यादा बढ़ोतरी होगी। उदाहरण के तौर पर, अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 रखा जाता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 38,700 रुपये हो सकती है। कितना बढ़ेगा वेतन? विशेषज्ञ करेंगे गणना कर्मचारी संघ के मुताबिक –  6वें और 7वें वेतनमान का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा सभी संवर्ग, श्रेणी, वेतनमान और ग्रेड पे के आधार पर आकलन होगा वित्त विशेषज्ञों से चर्चा कर संभावित लाभ का खाका तैयार किया जाएगा इसके बाद निष्कर्षों के आधार पर राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री कार्यालय, सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों से भी मुलाकात करेगा। केंद्र सरकार का बड़ा कदम गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया है। इस आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना देसाई कर रही हैं। केंद्र सरकार ने आयोग को 18 महीने में रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है। अब सवाल यही—कब मिलेगा फायदा? असम की पहल के बाद उम्मीद की जा रही है कि अन्य राज्य भी जल्द बड़ा फैसला ले सकते हैं। अगर मध्यप्रदेश में भी 8वां वेतन आयोग लागू होता है, तो लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को वेतन और पेंशन में बड़ा फायदा मिल सकता है। नजरें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं… कितना फायदा होगा, इसका करेंगे हिसाब किताब राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार 8 वें वेतनमान में कर्मचारियों, अधिकारियों को होनेवाले फायदे का पूरा हिसाब निकाला जाएगा। वित्त विशेषज्ञों से भी इस संबंध में बात करेंगे। इससे जो निचोड़ निकलेगा, राज्य सरकार को उसकी जानकारी देंगे। संघ के महामंत्री जितेंद्र सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संजय अवस्थी और प्रवक्ता अनिल भार्गव के अनुसार जल्द ही इसके लिए बैठक बुलाई जाएगी। संभावित लाभ के आकलन के लिए कठिन कवायद राज्य कर्मचारी संघ का कहना है कि मध्यप्रदेश में 8 वें वेतन आयोग के लिए 6 वें और 7 वें वेतनमान का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे। इसके साथ ही प्रदेश के सभी संवर्ग और श्रेणी के अधिकारियों, कर्मचारियों के वेतनमान और ग्रेड पे के हिसाब से 8 वें वेतनमान से संभावित लाभ का आकलन करेंगे।कर्मचारियों, विशेषज्ञों से चर्चा के बाद निष्कर्षो से राज्य सरकार को अवगत कराने ज्ञापन तैयार करेंगे। इसके साथ ही राज्य कर्मचारी संघ का प्रतिनिधिमंडल सीएम कार्यालय जाएगा। प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों को भी यह ज्ञापन दिया जाएगा।

बस्तर में माओवादी हिंसा की दिशा बदलने का वक्त, 60 लाख के इनामी माओवादी की हुई शिनाख्त

 जगदलपुर  बस्तर से लेकर तेलंगाना तक फैला माओवादी नेटवर्क अब निर्णायक रूप से टूट चुका है। दशकों से जारी लाल आतंक का ‘रिवर्स काउंटडाउन’ (उल्टी गिनती) शुरू हो गया है। सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, निरंतर दबाव और नेतृत्व के विघटन ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है। सुरक्षा एजेंसियों का विश्वास है कि 26 जनवरी को इसकी घोषणा कर दी जाए।  तेलंगाना में पीएलजीए (पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी) बटालियन नंबर–एक के प्रमुख बारसे देवा उर्फ सुक्का के आत्मसमर्पण और सुकमा में कोंटा एरिया कमेटी प्रमुख के मारे जाने के बाद बस्तर में संगठन लगभग नेतृत्वविहीन हो गया है। पापा राव ही एकमात्र बड़ा नाम शेष अब शीर्ष स्तर पर पापा राव ही एकमात्र बड़ा नाम शेष है। 14 माओवादी शनिवार को सुकमा, बीजापुर में मारे गए थे। उधर, तेलंगाना में बारसे देवा ने अपने 20 साथियों के साथ समर्पण किया था। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी का कहना है कि माओवादी संगठन का संख्या बल लगातार घट रहा है और नेतृत्व पूरी तरह बिखर चुका है। बस्तर में अब केवल पापा राव शीर्ष स्तर पर बचा है, जबकि जमीनी स्तर पर गिनती के ही माओवादी सक्रिय हैं। यदि बचे हुए माओवादी समय रहते आत्मसमर्पण नहीं करते, तो भविष्य में उनके लिए यह विकल्प भी नहीं बचेगा। पांच महिला सहित 12 माओवादियों की शिनाख्त वहीं सुकमा में बुर्कलंका और पामलूर इलाके में शनिवार को मुठभेड़ में मारे गए पांच महिला सहित 12 माओवादियों की शिनाख्त हो गई है। सभी शवों को जिला मुख्यालय लाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद स्वजन को सौंपा जाएगा। माओवादियों में डीवीसीएम वेट्टी मंगडू उर्फ मुक्का आठ लाख का इनामी, एसीएम माड़वी हितेश आठ लाख, सीवाईपीसी पोड़ियम जोगा 10 लाख, कोमरम बदरी, झितरू माड़वी, माड़वी मुक्का, मुचाकि मुन्नी, माड़वी जमली, पोड़ियम रोशनी ये सभी एसीएम जिन पर पांच लाख का इनाम घोषित था। इनके अलावा तामो नंदा, मड़कम रामा, मासे ये तीनों पार्टी के सदस्य थे और इन पर दो लाख का इनाम राशि घोषित था। मुठभेड़ स्थल से एके-47, इंसास, एसएलआर राइफल, बीजीएल लांचर, 12 बोर हथियार, वायरलेस सेट, स्कैनर तथा बड़ी मात्रा में जिंदा राउंड बरामद किए गए हैं। हिंसा का भविष्य नहीं सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने पत्रवार्ता में कहा कि बस्तर क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में निरंतर व निर्णायक प्रगति हो रही है। हिंसा का कोई भविष्य नहीं है और संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों के माध्यम से ही बस्तर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने हिंसा के रास्ते पर चल रहे माओवादी कैडरों से समय रहते मुख्यधारा में लौटने और विकास के भागीदार बनने की अपील की। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई सुरक्षा बलों की सतत रणनीति और मजबूत खुफिया तंत्र का परिणाम है। पत्र में ग्रामीण को दी थी धमकी पत्रवार्ता में यह भी खुलासा हुआ कि घटनास्थल से एक धमकी भरा पत्र बरामद किया गया है, जिसमें माओवादियों ने मेहता ग्राम पंचायत के बालंगतोग गांव के एक ग्रामीण को पुलिस मुखबिर बताते हुए चेतावनी दी है। पत्र में जन अदालत में सजा देने और सुधार न होने पर कार्रवाई की धमकी का उल्लेख है। मोबाइल टावर एसपी ने कहा कि यह माओवादियों की जनविरोधी मानसिकता को दर्शाता है। 41 बड़ी घटनाओं में शामिल था मंगड़ू पुलिस के अनुसार कोंटा एरिया कमेटी का सचिव मंगडू 41 बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है, जिनमें ताड़मेटला, बुर्कापाल, एर्राबोर राहत शिविर, दरभागुड़ा, कोताचेरू और मिनपा जैसी भीषण घटनाएं शामिल हैं, जिनमें बड़ी संख्या में जवान और नागरिक बलिदान हुए थे।

मध्य प्रदेश में युवाओं के लिए बड़ा कदम, 100 करोड़ की लागत से बीपीसीएल कौशल विकास केन्द्र बनेगा

सागर  बीपीसीएल बीना रिफाइनरी (BPCL Bina Refinery) द्वारा क्षेत्र के युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए कौशल विकास केन्द्र खोला जा रहा है। इसके लिए स्वीकृति भी मिल चुकी है, जिसमें जल्द काम शुरू हो जाएगा और केन्द्र की शुरुआत होने पर क्षेत्र सहित आसपास के जिले के युवाओं को दूसरे शहरों में प्रशिक्षण लेने नहीं जाना पड़ेगा। यह मांग लोगों की लंबे समय से चली आ रही थी। 100 करोड़ में बनेगा केंद्र जानकारी के अनुसार कौशल विकास केन्द्र (Skill Development Center) करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा, जिसमें आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस केन्द्र से प्रत्येक वर्ष करीब 1000 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण मिलेगा और 500 विद्यार्थियों को रुकने के लिए हॉस्टल की व्यवस्था रहेगी। इस प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृति मिल गई है और टेंडर प्रक्रिया चल रही है। दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा प्रशिक्षण लेने अभी शहर में बड़े तकनीकी इंस्टीट्यूट न होने से युवाओं को भोपाल, उज्जैन, इंदौर आदि शहरों में जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ता है, जिसमें रुपए खर्च करने पड़ते हैं। साथ ही कई युवा दूसरे शहरों में जा भी नहीं पाते हैं। इन कोर्सों में मिलेगा प्रशिक्षण कौशल विकास केन्द्र में आधुनिक कोर्स जैसे रोबोटिक्स, सीएमसी मशीन ट्रेनिंग, हैबी ड्यूटी इंडस्ट्रीयल वेलंडिग इलेक्ट्रीशियन, पेट्रोकेमिकल, सेफ्टी सुपरवाइजर, ऑपरेटर सहित अन्य तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण को लेकर युवाओ को रिफाइनरी सहित अन्य उद्योगों में रोजगार मिलेगा। साथ ही स्वयं का रोजगार भी स्थापित कर सकेंगे। मिल गई है स्वीकृति कौशल विकास केन्द्र के निर्माण की स्वीकृति बोर्ड से मिल गई है। इस प्रोजेक्ट पर सौ करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होंगे और प्रत्येक वर्ष करीब 1000 युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। यह केन्द्र बीना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धी होगी।- केपी मिश्रा, चीफ मैनेजर, एचआर, बीपीसीएल बीना रिफाइनरी

इंदौर में कांग्रेस की न्याय यात्रा, 11 को भागीरथपुरा कांड के खिलाफ लापरवाही नहीं, सुनियोजित हत्या का विरोध

इंदौर  भागीरथपुरा दूषित पेयजल मामले में कांग्रेस 11 जनवरी को न्याय यात्रा निकालेगी। इसके साथ ही हर वार्ड में इन मृतकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस घटना के लिए कांग्रेस ने प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री तथा क्षेत्र के विधायक कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की है। इस प्रदर्शन को लेकर शहर के सभी ब्लॉक अध्यक्ष, पार्षद और प्रमुख नेताओं को बुलाया गया था। सभी नेताओं से कहा कि भागीरथपुरा के मुद्दे को लेकर आंदोलन किस तरह से किया जाना चाहिए इस बारे में आप अपने सुझाव दें। सभी नेताओं के द्वारा दिए गए सुझाव के आधार पर यह फैसला लिया गया है कि 11 जनवरी को कांग्रेस के द्वारा भागीरथपुरा के 17 मृतकों के परिवार को न्याय दिलाने के लिए न्याय यात्रा निकाली जाएगी। पटवारी ने विजयवर्गीय को घटनाओं का सरगना बताया शनिवार को भागीरथपुरा में कांग्रेस नेताओं को रोकने के मामले में पटवारी ने विजयवर्गीय को सभी घटनाओं का सरगना बताया। वहीं कांग्रेस ने 11 जनवरी को भागीरथपुरा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए न्याय यात्रा निकालने की घोषणा की है। यह यात्रा बड़ा गणपति मंदिर से राजवाड़ा तक जाएगी, जिसमें प्रदेश के सभी बड़े कांग्रेस नेता और सभी विधायक शामिल होंगे। यह न्याय यात्रा बड़ा गणपति चौराहा से शुरू होगी और राजवाड़ा पर अहिल्या प्रतिमा पर आकर समाप्त होगी। इस यात्रा के माध्यम से इन सभी मृत व्यक्तियों के परिवार जनों के लिए न्याय मांगा जाएगा। भागीरथपुरा के मामले में हुई मौत कोई साधारण मौत या लापरवाही न होकर एक सुनियोजित हत्या है। ऐसे में यह आवश्यक है कि इस घटना के दोषियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। पटवारी ने कहा कि हम हर वार्ड में इन मृतकों को श्रद्धांजलि देंगे   गांधी भवन में आयोजित की गई बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के द्वारा इंदौर की प्रभारी नियुक्त की गई उषा नायडू, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष शोभा ओझा, प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे, जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे। बैठक में कांग्रेस ने आंदोलन की रूपरेखा तय की रविवार को गांधी भवन में आयोजित बैठक में कांग्रेस ने आंदोलन की रूपरेखा तय की। इस बैठक की अध्यक्षता पटवारी ने की, जिसमें राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी की इंदौर प्रभारी उषा नायडू, पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष शोभा ओझा, पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा और जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। पटवारी ने पुलिस के रवैये की आलोचना की पटवारी ने इंदौर में कांग्रेसियों को रोकने की कोशिश और पुलिस के रवैये की आलोचना की। उन्होंने पदाधिकारियों से सुझाव मांगे कि आंदोलन को कैसे संचालित किया जाए। छह जनवरी को शहर के सभी 85 वार्डों में प्रमुख चौराहों पर कांग्रेस मोमबत्तियां जलाकर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेगी। सात जनवरी को महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी के नेतृत्व में महिला कार्यकर्ता मंत्री विजयवर्गीय का इस्तीफा मांगते हुए विरोध प्रदर्शन करेंगी।