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सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है खजूर, अगर आप इन 5 में से हैं

खजूर एक ऐसा ड्राई फ्रूट है, जो खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए काफी फायदेमंद भी होता है। खजूर में विटामिन-बी6, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो सेहत को कई लाभ पहुंचाते हैं। इसके नियमित सेवन से इम्यूनिटी बूस्ट हो सकती है। साथ ही, यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने से लेकर हड्डियों को मजबूत बनाने में मददगार होता है। लेकिन इतने फायदों के बावजूद कुछ लोगों को खजूर का सेवन करने से बचना चाहिए। जी हां, कुछ लोगों के लिए खजूर का सेवन नुकसानदायक साबित हो सकता है। जरूरत से ज्यादा खजूर का सेवन करने से शरीर में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। तो आइए, डाइट्रीफिट की डायटीशियन अबर्ना माथीवानन से जानते हैं किन लोगों को खजूर का सेवन नहीं चाहिए? किडनी से जुड़ी समस्या से ग्रसित लोग जिन लोगों को किडनी से जुड़ी कोई बीमारी है, उन्हें खजूर का सेवन करने से बचना चाहिए। दरअसल, इसमें पोटैशियम की अधिक मात्रा पाई जाती है, जो किडनी रोगियों के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए अगर आपको किडनी से जुड़ी कोई समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करें। मोटापे से जूझ रहे लोग मोटापे से ग्रस्त लोगों को भी खजूर का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए। दरअसल, इसमें कैलोरी और शुगर की मात्रा काफी अधिक होती है, जिससे आपका वजन बढ़ सकता है। इसके अलावा, अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपको इसका सेवन करने से बचना चाहिए। कमजोर पाचन वाले लोग पाचन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों को भी खजूर का सेवन नहीं करना चाहिए। दरअसल, इसमें लैक्सेटिव गुण होता है, जो मल त्याग को बढ़ावा देता है। ऐसे में, इसका सेवन करने से डायरिया की समस्या हो सकती है। इसमें ज्यादा फाइबर की मौजूदगी और तासीर गर्म होने के कारण पेट की समस्याएं बढ़ सकती हैं। डायबिटीज के मरीज डायबिटीज के मरीजों को भी खजूर का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए। दरअसल, इसमें प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक होती है। ऐसे में, इसका ज्यादा मात्रा में सेवन करने से आपका ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ सकता है। अगर आपको शुगर है, तो खजूर का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। एलर्जी कुछ लोगों को खजूर का सेवन करने से एलर्जी की समस्या हो सकती है। इसके कारण उन्हें त्वचा पर खुजली, रैशेज, बार-बार छींक आना और आंखों में खुजली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में, जिन लोगों को खजूर से एलर्जी है, उन्हें इसका सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

यूपी को इससे सर्वाधिक लाभ, रोजगार की नई गारंटी के साथ प्रदेश में लागू करेंगेः मुख्यमंत्री

ग्रामीण विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा विकसित भारत–जी राम जी कानून : सीएम योगी यूपी को इससे सर्वाधिक लाभ, रोजगार की नई गारंटी के साथ प्रदेश में लागू करेंगेः मुख्यमंत्री सीएम बोले, जिन्होंने लंबे समय तक देश के संसाधनों पर डकैती डाली, जनता उनसे सवाल करेगी मनरेगा के दौरान अधूरी व अस्थायी परिसंपत्तियां बनीं, फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी की शिकायतें मिलीं, इसलिए लाया गया बदलाव बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, रियल टाइम मोबाइल ऐप मॉनिटरिंग और डीबीटी के माध्यम से सीधा भुगतान होगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को ‘विकसित भारत–जी राम जी कानून, 2025’ कानून की खूबियां बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण भारत के कायाकल्प की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन को मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 पारित किया गया है, जो देश के ग्रामीण विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को इस कानून से सर्वाधिक लाभ होगा। रोजगार की नई गारंटी के साथ इसे प्रदेश में लागू किया जाएगा।  लोकभवन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए योगी ने कहा कि जिन लोगों ने लंबे समय तक देश के संसाधनों पर डकैती डाली, गरीबों को भूख और युवाओं को बेरोजगारी व पलायन के लिए मजबूर किया, वे आज पारदर्शी सुधारों का समर्थन करने से इसलिए बच रहे हैं, क्योंकि तब जनता उनसे सवाल करेगी कि जब उन्हें मौका मिला था, तब उन्होंने यह काम क्यों नहीं किया। कांग्रेस और उसका इंडी गठबंधन इस महत्वपूर्ण अधिनियम पर सवाल खड़े कर रहा है, जबकि देशहित, श्रमिकों, किसानों और गांवों के विकास के लिए उठाए गए इस कदम का स्वागत होना चाहिए था। प्रधानमंत्री और एनडीए के प्रति आभार जताने के बजाय वे अपने पुराने, भ्रष्टाचार-प्रेरित मॉडल का बचाव कर रहे हैं। सीएम योगी ने बताया कि वीबी–जी राम जी एक्ट, 2025 की मूल भावना पारदर्शी प्रक्रिया, रोजगार की अधिकतम गारंटी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर आधारित है। यही अधिनियम विकसित भारत-2047 के विजन की मजबूत आधारशिला बनेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा जब राज्य विकसित होंगे और राज्य तभी विकसित होंगे जब गांव विकसित होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त कर किसान आत्मनिर्भर बनेगा, श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और सम्मान मिलेगा। पहले कमजोर सोशल ऑडिट, शिकायत निवारण की खामियां थीं मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून इसलिए जरूरी था क्योंकि मनरेगा के दौरान अधूरी व अस्थायी परिसंपत्तियां बनीं, फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी और भुगतान में कटौती जैसी शिकायतें हर जनपद से सामने आईं।  समाजवादी पार्टी की सरकार के समय मनरेगा में घोटाला हुआ था जिसकी सीबीआई जाँच चली।   कमजोर सोशल ऑडिट, शिकायत निवारण की खामियां, प्रशासनिक अक्षमताएं और मजदूरी में देरी लगातार बनी रहीं। खेती के मौसम में किसानों को मजदूर नहीं मिलते थे और श्रमिकों को समय पर काम व भुगतान की गारंटी नहीं मिल पाती थी। सीएम योगी ने बताया कि नए अधिनियम में रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। साप्ताहिक भुगतान होगा और देरी पर मुआवजा व अतिरिक्त ब्याज दिया जाएगा। समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अब कानूनी अधिकार बन गया है। खेती के मौसम में मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्यों को बुवाई और कटाई के समय 60 दिन तक कार्य स्थगित करने का अधिकार दिया गया है। बंद होगा गड्ढा खोदने और पाटने का खेल उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत पंचायतें स्थायी परिसंपत्तियां बना सकेंगी। ग्राम पंचायतें चार प्राथमिक श्रेणियों में कार्य तय करेंगी। जल संरक्षण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, चेक डैम, ग्रामीण सड़कें, नालियां, आजीविका से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर, खेल मैदान, ओपन जिम, बाजार और मंडियों का निर्माण किया जा सकेगा। आपदा प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्य भी इसी के तहत होंगे। सीएम योगी ने बताया कि इस अधिनियम में टेक्नोलॉजी को कानूनी अधिकार के रूप में शामिल किया गया है। बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, रियल टाइम मोबाइल ऐप मॉनिटरिंग और डीबीटी के माध्यम से सीधा भुगतान होगा। फर्जी नामों पर भुगतान का खेल पूरी तरह बंद होगा। पहले जो लोग गड्ढा खोदते थे और उसे पाटते थे, उनका यह खेल बंद होगा।  मनरेगा की तुलना में 17 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त संसाधन मिल सकते हैं राज्यों को उन्होंने बताया कि कानून में छह माह में अनिवार्य सोशल ऑडिट, डिजिटल और समयबद्ध शिकायत निवारण, जिला लोकपाल और मानकों के अनुरूप ऑडिट की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। केंद्र–राज्य की साझेदारी 60:40 रहेगी और कार्य पूरी तरह मांग आधारित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नई योजना से राज्यों को मनरेगा की तुलना में लगभग 17 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त संसाधन मिल सकते हैं। जिन राज्यों में श्रमिकों की संख्या अधिक है, वहां अधिक कार्य मिलेगा। रोजगार अब केवल राहत नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनेगा। हर पात्र को समय पर काम, हर गांव में टिकाऊ परिसंपत्तियां सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूरी केंद्रीय कैबिनेट के प्रति आभार जताते हुए कहा कि राज्य सरकार इसे पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और प्रभावशीलता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है। हर पात्र को समय पर काम, हर गांव में टिकाऊ परिसंपत्तियां और हर श्रमिक के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और खुशहाली। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत राजग से जुड़े दलों के नेता भी उपस्थित थे।

कोयल ब्रिज में दरार के कारण लोहदरगा नहीं आएगी मेमू

लोहरदगा/रांची. रांची-लोहरदगा-टोरी रेल लाइन के कोयल नदी स्थित रेलवे ब्रिज संख्या 115 के पिलर संख्या 4 और 5 में आई दरार के बाद ट्रेनों का परिचालन फिलहाल रद है। इस मामले को लेकर मंगलवार को दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्र तकनीकी टीम के साथ रेलवे के स्पीक कोच से लोहरदगा कोयल नदी पुल तक पहुंचे। इस दौरान महाप्रबंधक ने रेलवे ब्रिज का निरीक्षण किया। तकनीकी टीम के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा की, जिसमें पिलर संख्या 5 की सबसे पहले मरम्मत करने की बात कही गई। इसके बाद पिलर संख्या 6 और 7 की भी मरम्मत की जाएगी। वहीं, 15 फरवरी तक सॉइल टेस्टिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा। प्रयास किया जा रहा है कि मार्च के अंतिम तक ट्रेन का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। सभी मरम्मत कार्य मई 2026 तक पूरे कर लिए जाएंगे। साथ ही रेलवे इस लाइन पर कोयल नदी में नए पुल के निर्माण को लेकर भी योजना पर काम करेगी। इरगांव तक चलेगी मेमू, मिलेगी बस सर्विस रेलवे महाप्रबंधक ने कहा कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन लोहरदगा स्टेशन से सात किलोमीटर दूर इरगांव हॉल्ट तक करेगी। यात्रियों को लोहरदगा से ईरगांव तक के लिए बस की सुविधा प्रदान की जाएगी। वहीं लोहरदगा से टोरी के लिए कनेक्टिंग ट्रेन की सुविधा भी शुरू की जाएगी। फिलहाल रांची से लोहरदगा के बीच एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन नहीं होगा। उन्होंने यह भी महत्वपूर्ण बात कही कि बालू के उठाव और कटाव की वजह से रेलवे पुल को नुकसान पहुंचा है। पुल की मरम्मत के लिए तीन-चार टीम लगातार 24 घंटे काम करेगी। पुल का पिलर संख्या 4, 5, 6 और 7 जैकेटिंग और पाइलिंग के जरिए दुरुस्त किया जाएगा। साथ ही स्टील गार्डर के माध्यम से फिलहाल परिचालन प्रारंभ करने का प्रयास किया जाएगा। लगभग दो घंटे तक रेलवे महाप्रबंधक यहां पर मौजूद रहे और उन्होंने तकनीकी टीम और अलग-अलग एजेंसियों के साथ बात की और उन्हें जरूरी निर्देश भी दिए।

उपमुख्यमंत्री ने बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर रिया का किया सम्मान

रायपुर. बिहार की राजधानी पटना में 25 से 29 दिसंबर तक आयोजित साउथ एशियन बॉल बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हाँसिल किया। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत, नेपाल, भूटान और श्रीलंका सहित चार देशों की टीमों ने भाग लिया था। इस चैंपियनशिप में भारत की विजेता टीम का हिस्सा बनकर देश और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाली कवर्धा की होनहार खिलाड़ी सुश्री रिया तिवारी का उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सम्मान किया। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने रिया को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनकी उपलब्धि की सराहना की तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि रिया तिवारी की यह उपलब्धि न केवल कवर्धा जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रिया ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा, अनुशासन और कठिन परिश्रम से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रिया भविष्य में भी देश के लिए अनेक पदक जीतेंगी और प्रदेश की नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगी। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने यह भी कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान कर रही है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकें। रिया ने कहा कि इस सफलता का पूरा श्रेय मेरे माता-पिता और मेरे कोच अविनाश चौहान एवं जय किशन को जाता है। उनके निरंतर मार्गदर्शन, अनुशासन और प्रेरणा के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं हो पाती। हर कठिन समय में उन्होंने मेरा आत्मविश्वास बनाए रखा और मुझे आगे बढ़ने की शक्ति दी। यह जीत मेरे लिए केवल एक पदक नहीं, बल्कि मेरे खेल जीवन की एक नई शुरुआत है। मैं आगे भी पूरे समर्पण और मेहनत के साथ देश और प्रदेश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का प्रयास करूंगी

मकर संक्रांति से शुरू होकर माहभर से अधिक चलने वाले मेले की तैयारियां पूरी

श्रद्धा, मनोरंजन व रोजगार का संगम है गोरखनाथ मंदिर का खिचड़ी मेला मकर संक्रांति से शुरू होकर माहभर से अधिक चलने वाले मेले की तैयारियां पूरी त्रेतायुगीन है महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा गोरखपुर  मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में लगने और इससे पखवारा पूर्व शुरू होकर माह भर से अधिक समय तक चलने वाला खिचड़ी मेला श्रद्धा, मनोरंजन और रोजगार का संगम है। पूरी प्रकृति को ऊर्जस्वित करने वाले सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की अनूठी परंपरा पूरी तरह लोक को समर्पित है। गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी के रूप में चढ़ाए जाने वाला अन्न वर्षभर जरूरतमंदों में वितरित किया जाता है। मंदिर के अन्न क्षेत्र में कभी भी कोई जरूरतमंद पहुंचा, खाली हाथ नहीं लौटा। ठीक वैसे ही, जैसे बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर मन्नत मांगने वाला कभी निराश नहीं होता। मंदिर में खिचड़ी का यह पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनेगा। गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा त्रेतायुगीन मानी जाती है। मान्यता है कि तत्समय आदियोगी गुरु गोरखनाथ एक बार हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां ज्वाला देवी के दरबार मे पहुंचे। मां ने उनके भोजन का प्रबंध किया। कई प्रकार के व्यंजन देख बाबा ने कहा कि वह तो योगी हैं और भिक्षा में प्राप्त चीजों को ही भोजन रूप में ग्रहण करते हैं। उन्होंने मां ज्वाला देवी से पानी गर्म करने का अनुरोध किया और स्वयं भिक्षाटन को निकल गए। भिक्षा मांगते हुए वह गोरखपुर आ पहुंचे और राप्ती और रोहिन के तट पर जंगलों में बसे इस स्थान पर धूनी रमाकर साधनालीन हो गए। उनका तेज देख लोग उनके खप्पर में अन्न (चावल, दाल) दान करते रहे। मकर संक्रांति का पर्व आने पर यह परंपरा खिचड़ी पर्व के रूप में परिवर्तित हो गई। तब से बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने का क्रम हर मकर संक्रांति पर अहर्निश जारी है। कहा जाता है कि उधर ज्वाला देवी के दरबार मे बाबा की खिचड़ी पकाने के लिए आज भी पानी उबल रहा है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर नाथ पंथ की विशिष्ट परंपरानुसार गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी चढ़ाकर समूचे जनमानस की सुख समृद्धि की मंगलकामना करते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार तथा देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी लाखों की तादाद में श्रद्धालु शिवावतारी बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं। मकर संक्रांति के दिन भोर में सबसे पहले गोरक्षपीठ की तरफ से पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी चढ़ाकर बाबा को भोग अर्पित करते हैं। तत्पश्चात नेपाल राजपरिवार की ओर से आई खिचड़ी बाबा को चढ़ाई जाती है। इसके बाद मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं और जनसामान्य की आस्था खिचड़ी के रूप में निवेदित होनी शुरू हो जाती है। खिचड़ी महापर्व को लेकर मंदिर व मेला परिसर सज धजकर तैयार है। प्रशासन के साथ ही मंदिर प्रबंधन की तरफ से श्रद्धालुओं के ठहरने और अन्य सुविधाओं का पूरा इंतज़ाम किया गया है। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी अब तक तीन बार खिचड़ी मेला की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं।   सामाजिक समरसता का केंद्र है गोरखनाथ मंदिर गोरखनाथ मंदिर सामाजिक समरसता का ऐसा केंद्र है जहां जाति, पंथ, महजब की बेड़ियां टूटती नजर आती हैं। इसके परिसर में क्या हिंदू, क्या मुसलमान, सबकी दुकानें हैं। यानी बिना भेदभाव सबकी रोजी रोटी का इंतजाम है। यही नहीं, मंदिर परिसर में  लगने वाला खिचड़ी मेला भी जाति-धर्म के बंटवारे से इतर हजारों लोगों की आजीविका का माध्यम बनता है। मंदिर परिसर में नियमित रोजगार करने वालों से लेकर मेला में दुकान लगाने वालों तक, बड़ी भागीदारी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की होती है। उन्होंने कभी कोई भेदभाव महसूस नहीं किया बल्कि अपनेपन के भाव से विभोर होते रहते हैं। मेले में खरीदारी से लेकर मनोरंजन के साधनों तक का भरपूर इंतजाम हैं।

लालू-राबड़ी के नाती लेंगे 2 साल की मिलिट्री ट्रेनिंग, रोहिणी ने दी जानकारी

पटना. RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद की पुत्री रोहिणी आचार्य के घर काफी दिनों के बाद खुशियां लौटी हैं। यह मौका उन्‍हें उनके बड़े बेटे की वजह से म‍िला है। बेटे की सफलता पर मां (रोहिणी आचार्य) गर्व महसूस कर रही हैं। दरअसल रोहिणी के बेटे ने प्री यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी कर ली है और वे बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए गए हैं। रोहिणी ने खुद अपने एक्‍स हैंडल पर यह साझा किया है। तस्‍वीर और वीडियो शेयर करते हुए उन्‍होंने लिखा है-"आज मेरा दिल गर्व से भरा हुआ है। दो वर्ष की मिलिट्री ट्रेनिंग पर गया आदित्‍य आज अपनी प्री – यूनिवर्सिटी ( Pre-University) की पढ़ाई पूरी करने के बाद 18 साल की उम्र में हमारा बड़ा बेटा आदित्य 2 साल की Basic Military Training के लिए गया है। आदित्य .. तुम बहादुर , साहसी और अनुशासन के साथ रहने वाले हो, जाओ कमाल कर दिखाओ , हमेशा याद रखना जीवन की सबसे कठिन लड़ाइयों में ही योद्धा बनते हैं .. हम सबों का सारा प्यार और हौसला हमेशा तुम्हारे साथ है।" ममता बनर्जी को बताया मजबूती की मिसाल सोशल मीडिया पर एक्‍ट‍िव रहने वालीं रोहिणी अक्‍सर समकालीन विषयों पर पोस्‍ट करती रहती हैं। इससे पूर्व उन्‍होंने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को जन्‍मदिन की बधाई दी। उन्‍हें मजबूती की मिसाल और प्रेरणास्रोत बताया है। इसके अलावा एक दिन पहले सावित्रीबाई फुले की जयंती पर भी उन्‍होंने पोस्‍ट किया था। उसमें उन्‍होंने मह‍िलाओं का महत्‍व बयां किया था। रोहिणी ने लिखा-"खुशी हुई देखकर कि कल पूरा देश सावित्रीबाई फुले की जयंती मना रहा था। कहीं पढ़ी थी सावित्री माई कहती हैं क‍ि स्त्री को नीचा दिखाकर जो मर्द ऊँचा लगता है, वह असल में खड़ा नहीं, टिका हुआ है। और ऐसे टिके हुए तिनकों को बरगद समझने वालों के लिए उन्होंने कहा था “स्त्री को पापी बताने वाला समाज, अपने पाप छुपाना चाहता है।”

गलत दिशा में टंगा कैलेंडर रोक सकता है तरक्‍की! जानें वास्तु शास्त्र के 5 जरूरी नियम

वास्तु शास्त्र में घर की हर छोटी-बड़ी वस्तु की एक निश्चित दिशा और ऊर्जा बताई गई है। कैलेंडर हर घर में होता है। लेकिन, अक्सर हम कैलेंडर को खाली दीवार देखकर कहीं भी टांग देते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि कैलेंडर केवल तारीखें देखने का जरिया नहीं है। बल्कि, यह आपके समय और प्रगति का प्रतीक है? कैलेंडर आपके जीवन पर काफी हद तक असर डालता है। गलत दिशा में लगा कैलेंडर न केवल आपकी तरक्की को रोक सकता है, बल्कि घर में तनाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी ला सकता है। आइए जानते हैं कैलेंडर से जुड़े वास्तु के वो 5 नियम जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं। दक्षिण दिशा है पूरी तरह वर्जित वास्तु शास्त्र के अनुसार, कैलेंडर को कभी भी दक्षिण दिशा (South) में नहीं लगाना चाहिए। दक्षिण दिशा को 'ठहराव' की दिशा माना जाता है और इसके स्वामी यमराज हैं। अगर, आप यहां कैलेंडर लगाते हैं, तो यह आपके परिवार के सदस्यों की प्रगति में बाधा उत्पन्न करने का काम करता है। इससे समय आपके पक्ष में नहीं रहता और घर के मुखिया के स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ सकता है। तरक्की के द्वार खोलती हैं ये दिशाएं पूर्व दिशा (East): पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य हैं, जो उदय और प्रगति के प्रतीक हैं। यहां कैलेंडर लगाने से जीवन में नए अवसर मिलते हैं और मान-सम्मान बढ़ता है। लाल या गुलाबी रंग के कैलेंडर यहाँ शुभ होते हैं। उत्तर दिशा (North): यह दिशा कुबेर देव की है। यहाँ कैलेंडर लगाने से धन लाभ और करियर में उन्नति होती है। उत्तर में हरे या नीले रंग के कैलेंडर का प्रयोग करना बेहतर होता है। पश्चिम दिशा (West): अगर आप अपने रुके हुए कामों को गति देना चाहते हैं, तो पश्चिम दिशा में कैलेंडर लगाना लाभप्रद होता है। मुख्य दरवाजे और दरवाजे के पीछे न लगाएं अक्सर जगह बचाने के लिए लोग कैलेंडर को दरवाजे के पीछे टांग देते हैं। वास्तु के अनुसार, यह एक गंभीर दोष माना जाता है। दरवाजे के पीछे कैलेंडर होने का मतलब है कि आप समय से पीछे चल रहे हैं। इसी तरह, मुख्य द्वार के सामने भी कैलेंडर नहीं होना चाहिए। क्योंकि, वहां से गुजरने वाली ऊर्जा समय चक्र से प्रभावित होकर घर में तनाव पैदा कर सकती है। पुराने कैलेंडर को तुरंत हटाएं नया साल शुरू होते ही पुराने कैलेंडर को घर से विदा कर देना चाहिए। कई लोग पुराने कैलेंडर के ऊपर ही नया कैलेंडर टांग देते हैं या पिछले साल का कैलेंडर दीवार पर लगा रहने देते हैं। वास्तु में इसे 'रुका हुआ समय' माना जाता है, जो आपकी पुरानी यादों और असफलताओं को वर्तमान से जोड़े रखता है और भविष्य के रास्ते बंद कर देता है। चित्रों का चुनाव सोच-समझकर करें कैलेंडर पर बने चित्र आपके अवचेतन मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। कभी भी ऐसे कैलेंडर का प्रयोग न करें जिसमें हिंसक जानवर, युद्ध के दृश्य, पतझड़ या उदास करने वाले चित्र हों। घर में हमेशा उगते हुए सूरज, हरियाली, देवी-देवता या सकारात्मक दृश्यों वाले कैलेंडर ही लगाएं।  

Mahindra XUV 7XO लॉन्च, 13.66 लाख रुपये की शुरुआती कीमत, जानें इसके शानदार फीचर्स

मुंबई  स्वदेशी एसयूवी निर्माता कंपनी Mahindra & Mahindra ने भारतीय बाजार में अपनी नई Mahindra XUV 7XO को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस एसयूवी को 13.66 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर उतारा है, जो पुरानी Mahindra XUV 700 की शुरुआती कीमत के बराबर ही है. बता दें कि यह भारतीय बाजार में लोकप्रिय Mahindra XUV 700 का फेसलिफ्ट वर्जन है, और इसके नेमप्लेट को बदलकर Mahindra XUV 7XO कर दिया गया है और साथ ही इसमें कुछ खास स्टाइलिंग अपडेट भी किए गए हैं, जो इसे थोड़ा और मस्कुलर लुक देते हैं. इसके अलावा, अब इसके केबिन में Mahindra की नई बोर्न इलेक्ट्रिक SUVs से ली गई नई टेक्नोलॉजी दी गई है. नई Mahindra XUV 7XO का डिजाइन इसके डिजाइन की बात करें तो, इसका फ्रंट अब पहले से ज़्यादा स्क्वेयर दिखता है. इसके अलावा इसकी ग्रिल को एक नया लुक दिया गया है और इसके दोनों तरफ़ नए, ज़्यादा एंगुलर डुअल-बैरल LED प्रोजेक्टर हेडलाइट्स लगाई गई हैं, साथ ही नए LED डे-टाइम रनिंग लैंप भी दिए गए हैं. कंपनी ने इसके बम्पर को भी रीडिज़ाइन किया गया है और इसमें सेंट्रल एयर इनटेक के दोनों तरफ़ खास ट्विन LED फॉग लैंप लगाए गए हैं. वहीं साइड प्रोफाइल पर नजर डालें तो, यहां पर सबसे बड़ा बदलाव नए डिजाइन का अलॉय व्हील है, जबकि पीछे की तरफ़ आपको नए टेल लैंप और एक रीडिज़ाइन किया गया रियर बम्पर मिलता है. नई Mahindra XUV 7XO का इंटीरियर केबिन अंदर नजर डालें तो, सबसे बड़ा बदलाव यह है कि यहां नए लुक वाला डैशबोर्ड लेआउट देखने को मिलता है. इसके टॉप वेरिएंट का डैशबोर्ड Mahindra XEV 9E और 9S के जैसा दिखाई देता है, क्योंकि इसमें वाइड-स्क्रीन ट्राई-डिस्प्ले सेटअप दिया गया है. ये डिस्प्ले लेटेस्ट AdrenoX Plus पर चलेंगे, जिसमें को-ड्राइवर डिस्प्ले कंटेंट स्ट्रीम कर सकता है. कार में आगे की सीटें पावर एडजस्टेबल हैं, और ड्राइवर की सीट में मेमोरी फंक्शन का फीचर भी दिया गया है. वहीं को-ड्राइवर सीट में एक पावर्ड बॉस मोड भी मिलता है, जो पीछे की सीट पर बैठे लोगों को सीट को पीछे खिसकाकर पैर फैलाने के लिए जगह बनाने की सुविधा देता है. वहीं रियर पैसेंजर की बात करें तो, पीछे की सीट पर बैठने वालों को सेंट्रल फ्लोर कंसोल के बेस पर एक वायरलेस चार्जिंग पैड, दरवाजों पर सन ब्लाइंड्स और तीसरी रो में आसानी से जाने के लिए को-ड्राइवर साइड सीट के लिए टम्बल फंक्शन मिलता है. इसके अलावा, वेरिएंट के आधार पर, खरीदार दूसरी रो में बेंच सीट या अलग-अलग कैप्टन चेयर में से विकल्प चुन सकते हैं. आपको बता दें कि कंपनी ने नई Mahindra XUV 7XO को कुल 6 ट्रिम लेवल में उतारा, जिनमें AX, AX3, AX5, AX7, AX7T और AX7 L शामिल हैं. नई Mahindra XUV 7XO के फीचर्स फीचर्स लिस्ट को देखें तो, नई 7XO में लेवल-2 ADAS टेक, ऑटो हेडलाइट्स और वाइपर्स, मल्टीज़ोन क्लाइमेट कंट्रोल, पावर्ड फ्रंट सीट्स, वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, पावर्ड बॉस मोड, डॉल्बी एटमॉस के साथ हरमन कार्डन साउंड सिस्टम, 540-डिग्री कैमरा, महिंद्रा के ब्रिंग योर ओन डिवाइस के ज़रिए मल्टी-डिवाइस स्ट्रीमिंग इंटीग्रेशन, बीच वाली रो में 65W टाइप C USB आउटलेट, एक पैनोरमिक सनरूफ और अन्य कई फीचर्स मिलते हैं. नई Mahindra XUV 7XO का पावरट्रेन मैकेनिकल तौर पर नई 7XO में कोई बदलाव नहीं किया गया है, और इसमें XUV700 वाले ही 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल और 2.2-लीटर डीजल इंजन विकल्प मिलते हैं. दोनों यूनिट मैनुअल और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स ऑप्शन के साथ आते हैं, और टॉप डीजल ट्रिम्स में ऑल-व्हील ड्राइव का ऑप्शन भी मिलता है. हालांकि Mahindra का कहना है कि कंपनी ने नई Mahindra XUV 7XO के सस्पेंशन सेटअप पर काम किया है, और इस SUV में नए 'डेविंची' डैम्पर लगाए गए हैं, जिनके बारे में कंपनी द्वारा दावा किया गया है कि वे राइड क्वालिटी को बेहतर बनाते हैं.

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, राज्य में पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण होगा आसान

परिवार के बीच दान विलेख पर स्टाम्प शुल्क में राहत, अब व्यावसायिक व औद्योगिक संपत्तियां भी शामिल योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, राज्य में पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण होगा आसान पारिवारिक सदस्यों को दान दी गई संपत्ति पर देय होगा अधिकतम ₹5,000 स्टाम्प शुल्क  व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर मिली राहत, शहरी और गांव सभी जगह होगा लागू   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य में परिवार के सदस्यों के मध्य निष्पादित अचल संपत्ति के दान विलेख पर प्रभार्य स्टाम्प शुल्क में दी जा रही छूट के दायरे को और व्यापक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस निर्णय से अब पारिवारिक सदस्यों के बीच व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी स्टाम्प शुल्क में बड़ी राहत मिलेगी। अभी तक भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में दान विलेखों पर संपत्ति के मूल्य के अनुसार हस्तांतरण पत्र (कन्वेयंस डीड) की भांति स्टाम्प शुल्क देय होता है, जबकि रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के प्रावधानों के अनुसार अचल संपत्ति के दान विलेख का पंजीकरण अनिवार्य है। ₹5,000 तक सीमित है स्टाम्प शुल्क स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन अनुभाग-2 की 3 अगस्त 2023 की अधिसूचना के माध्यम से यह व्यवस्था की गई थी कि यदि अचल संपत्ति का दान परिवार के सदस्यों के पक्ष में किया जाता है तो स्टाम्प शुल्क में छूट देते हुए अधिकतम ₹5,000 ही लिया जाएगा। यह छूट अब तक केवल कृष्य एवं आवासीय संपत्तियों तक सीमित थी। योगी कैबिनेट द्वारा पारित प्रस्ताव के तहत इस छूट को पारिवारिक सदस्यों के मध्य व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे परिवारों के बीच संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और कम खर्चीली हो जाएगी। शहरी और ग्रामीण सभी कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर मिलेगी राहत   प्रदेश के स्टांप तथा पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि 2022 से पहले तक परिवार के रिश्ते में यदि कोई प्रॉपर्टी देता था तो पूरे सर्किल रेट के बराबर स्टाम्प शुक्ल देना पड़ता था। 2022 में मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में तय हुआ कि पारिवारिक रिश्तों में यदि कोई प्रॉपर्टी दान की जाती है तो उस पर फिक्स्ड 5 हजार रुपए स्टांप लगेगा। लेकिन यह दान केवल आवासीय और कृषि पर लागू था, लेकिन अब यह नियम कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर भी लागू कर दिया गया है। शहर के अंदर अब तक यह 7 प्रतिशत और गांवों में 5 प्रतिशत था, लेकिन अब गांव या शहर कहीं भी आपको केवल 5 हजार रुपए ही भुगतान करना है।  प्रावधानों में और स्पष्टता कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, पूर्व में जारी अधिसूचना में उल्लिखित संबंधियों की परिभाषा एवं अन्य प्रावधानों को भी और अधिक स्पष्ट किया गया है, जिससे नियमों के क्रियान्वयन में किसी प्रकार का भ्रम न रहे। यह छूट संबंधित अधिसूचना के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित होने की तिथि से तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी। सरकार के इस फैसले को आम जनता के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे पारिवारिक संपत्ति के वैधानिक हस्तांतरण को प्रोत्साहन मिलेगा और विवादों में भी कमी आएगी। कुशीनगर और झांसी में नए उप निबंधक कार्यालय भवनों के लिए भूमि आवंटन को मंजूरी कैबिनेट की बैठक में स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग से जुड़े दो अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत कैबिनेट ने जनपद कुशीनगर की तहसील कप्तानगंज में उप निबंधक कार्यालय भवन के निर्माण हेतु ग्राम बसहिया उर्फ कप्तानगंज स्थित तहसील परिसर की भूमि में से 0.0920 हेक्टेयर (920 वर्गमीटर) भूमि को स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के पक्ष में निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। वर्तमान में उप निबंधक कार्यालय जीर्ण-शीर्ण भवन में संचालित है, जिसे ध्वस्त कर नए भवन का निर्माण किया जाएगा।  इसके साथ ही कैबिनेट ने झांसी में उप निबंधक कार्यालय सदर एवं अभिलेखागार के निर्माण हेतु पुरानी तहसील परिसर, मौजा झांसी खास स्थित आराजी संख्या 3035 में से 0.0638 हेक्टेयर (638 वर्गमीटर) भूमि को राजस्व विभाग से स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को आवंटित/हस्तांतरित करने की स्वीकृति प्रदान की। दोनों ही मामलों में भूमि राज्य सरकार के स्वामित्व की है, अतः भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत स्टाम्प शुल्क से तथा रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के अंतर्गत पंजीकरण शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान की जाएगी।

कप्तान शुभमन गिल रहे नाकाम, उपकप्तान श्रेयस अय्यर की धमाकेदार वापसी

नई दिल्ली विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 के छठे राउंड के मैच में भारतीय वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल और उपकप्तान श्रेयस अय्यर पर सभी फैंस की निगाहें थीं। दोनों मंगलवार को टूर्नामेंट के मौजूदा सीजन में पहली बार खेलने उतरे। शुभमन फुस्स रहे और श्रेयस ने कमबैक पर गदर काटा। शुभमन पंजाब जबकि श्रेयस मुंबई का हिस्सा हैं। मध्यक्रम के बल्लेबाज श्रेयस ने लंबे समय तक चोट से जूझने के बाद प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी की। उनके पिछले साल अक्टूबर में सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे वनडे मैच के दौरान स्प्लीन (तिल्ली) में चोट लगी थी और अंदरूनी रक्तस्राव हुआ था।   शुभमन गिल ने खेली 12 गेंद गोवा के खिलाफ 211 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए पंजाब की शुरुआत अच्छी नहीं रही। जयपुर के केएल सैनी ग्राउंड में कप्तान प्रभसिमरन सिंह (11 गेंदों में 2) को वासुकी कौशिक ने तीसरे ओवर में बोल्ड किया। बतौर ओपनर उतरे शुभमन गिल का बल्ला भी नहीं चला। उन्होंने 12 गेंदों का सामना करने के बाद 11 रन बनाए। उन्होंने दो चौके जमाए। शुभमन को कौशिक ने पांचवें ओवर में प्रभुदेसाई के हाथों कैच कराया। शुभमन विजय हजारे ट्रॉफी में 8 जनवरी को पंजाब के लिए एक और मैच खेल सकते हैं। बीसीसीआई ने सभी भारतीय क्रिकेटरों के लिए विजय हजारे ट्रॉफी के कम से कम दो मैच खेलना अनिवार्य किया है। श्रेयस अय्यर ने खेली तूफानी पारी श्रेयस अय्यर ने जयपुर के जयपुरिया विद्यालय ग्राउंड में हिमाचल प्रदेश के खिलाफ तूफानी पारी खेली। उन्होंने चौथे नंबर पर आने के बाद 53 गेंदों में 83 रन बनाए। उनके बल्ले से 10 चौके और तीन छक्के निकले। उन्होंने मुशीर खान (73) के साथ तीसरे विकेट के लिए 82 और सूर्यकुमार यादव (24) के संग चौथे विकेट के लिए 65 रनों की साझेदारी की। श्रेयस को कुशल पाल ने 26वें ओवर में आउट किया। मुंबई ने हिमाचल प्रदर्शन के विरुद्ध 33 ओवर में 299/9 का स्कोर खड़ा किया। घने कोहरे के कारण मैच 33 ओवर का किया गया। श्रेयस मुंबई के कप्तान हैं। शार्दुल ठाकुर के चोटिल होने की वजह से श्रेयस को मुंबई की कमान सौंपी गई। श्रेयस 11 जनवरी से न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरू होने वाली सीरीज के लिए भारतीय स्कॉड में हैं।