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मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में रायपुर जिला अस्पताल को मिला IPHL सर्टिफिकेट

रायपुर. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने जिला अस्पताल रायपुर स्थित इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी (IPHL) को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स (NQAS) का प्रमाणन प्राप्त होने पर छत्तीसगढ़ सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल करने के लिए बधाई दी है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को लिखे पत्र में श्री नड्डा ने उल्लेख किया कि रायपुर IPHL देश में अपनी तरह की पहली प्रयोगशाला बन गई है, जिसे यह प्रतिष्ठित प्रमाणन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की विश्वसनीय एवं क्वालिटी-अश्योर्ड डायग्नोस्टिक सेवाएँ प्रदान करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि को राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और रायपुर जिला अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में जनविश्वास को मजबूत किया है और सेवा-प्रदाय के नए मानक स्थापित किए हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने आगे कहा कि IPHL की स्थापना प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अधोसंरचना मिशन (PM-ABHIM) का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह मिशन पूरे देश में स्वास्थ्य निगरानी, प्रयोगशाला नेटवर्क और आपदा तैयारी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मिशन का मूल उद्देश्य गुणवत्ता-सुनिश्चित, अस्पताल-विशिष्ट एवं रोग-विशिष्ट प्रयोगशाला निदान उपलब्ध कराना है। रायपुर IPHL को प्रदान किया गया यह प्रमाणन इस बात की पुष्टि करता है कि प्रयोगशाला ने अपने मानव संसाधन, अत्याधुनिक उपकरणों और उन्नत अधो संरचना का सफलतापूर्वक एकीकरण करते हुए राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को प्राप्त किया है। केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए एक राष्ट्रीय मानक स्थापित करती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से आग्रह किया कि वह रायपुर मॉडल को श्रेष्ठ अभ्यास (बेस्ट प्रैक्टिस) के रूप में अपनाते हुए राज्य के अन्य जिलों और क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली डायग्नोस्टिक सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार जिलों में गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशाला एवं डायग्नोस्टिक सेवाओं का निरंतर विस्तार करती रहेगी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रौद्योगिकी-सक्षम और मानक-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को भी दर्शाती है। यह प्रमाणन संस्थागत परिपक्वता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता आश्वासन की सुदृढ़ होती संस्कृति का परिचायक है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रायपुर IPHL को प्राप्त NQAS प्रमाणन छत्तीसगढ़ की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि राज्य में प्रयोगशाला सेवाओं के मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक उपकरणों और मजबूत अवसंरचना के क्षेत्र में सतत एवं परिणाममूलक सुधार किए गए हैं। श्री जायसवाल ने कहा कि यह प्रमाणन केवल एक संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों, लैब तकनीशियनों, पैरामेडिकल स्टाफ और जिला अस्पताल रायपुर की समर्पित टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य के अन्य जिलों में भी IPHL को इसी मॉडल पर विकसित किया जाएगा, ताकि प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, सटीक और विश्वसनीय जांच सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने पुनः आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार और गुणवत्ता संवर्धन के लिए निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य परिवर्तन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान सुदृढ़ करेगा।

महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को मोदी जी जमीन पर उतार रहे हैं

– वीबी-जी रामजी योजना वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार कर गांवों को बनाएगी समृद्ध – वीबी-जी रामजी योजना में 125 दिन के रोजगार की गारंटी, मनरेगा में मिलता था सिर्फ 100 दिन का काम – ग्रामीण क्षेत्र के समुचित विकास में मील का पत्थर साबित होगी वीबी-जी रामजी योजना – प्रधानमंत्री जी ने 35 हजार करोड़ से 95 हजार करोड़ कर योजना का बजट करीब तीन गुना बढ़ाया – कृषि वर्ष 2026 में कृषि को उद्योग और रोजगार से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाएगी सरकार – कृषि वर्ष में वीबी-जी रामजी योजना से कृषि आधारित उद्योगों को मिलेगा नया विस्तार – 15 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना से खेती बनेगी रोजगार और उद्योग का सशक्त माध्यम – ‘विकसित भारत‘ संकल्प को धरातल पर उतारने वाला मिशन बनेगी वीबी-जी रामजी योजना – वीबी-जी रामजी योजना से गांवों में अधोसंरचना का होगा विकास, आएगी विकास की क्रांति भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में वीबी-जी रामजी योजना को लेकर पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच का प्रतिफल है वीबी-जी रामजी जी योजना। प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी सोच से आज दुनिया भारत की ओर देख रही हैं। वीबी-जी रामजी योजना वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार कर गांवों को समृद्ध बनाएगी। इस योजना में 125 दिन के रोजगार की गारंटी है, जबकि मनरेगा में सिर्फ 100 दिन काम मिलता था। यह योजना ग्रामीण क्षेत्र के समुचित विकास में मील का पत्थर साबित होगी। कांग्रेस के शासनकाल में इस योजना में 35 हजार करोड़ मिलते थे, जिसे बढ़ाकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 74 हजार करोड़ किया और अब सुधारों के साथ लागू की जा रही इस योजना का बजट बढ़ाकर 95 हजार करोड़ कर दिया है। बजट में यह बढ़ोत्तरी कांग्रेस के शासनकाल के समय से लगभग तीन गुना अधिक है। प्रधानमंत्री जी महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को जमीन पर उतार रहे हैं। कृषि वर्ष 2026 में कृषि को उद्योग और रोजगार से जोड़कर सरकार किसानों की आय बढ़ाने का कार्य करेगी। कृषि वर्ष में वीबी-जी रामजी योजना से कृषि आधारित उद्योगों को नया विस्तार मिलेगा। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार 15 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना बनाकर कृषि को रोजगार और उद्योग का सशक्त माध्यम बनाएगी। यह सुधार प्रक्रिया का एक हिस्सा है, कांग्रेस को इस योजना का विरोध की बजाय तथ्यात्मक बात करनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि वीबी-जी रामजी अधिनियम से गांवों में अधोसंरचना का विकास होगा और विकास की नई क्रांति आएगी। वीबी-जी रामजी योजना में गरीबों, मजदूरों को अब 100 दिन के बजाय बजाय 125 दिन मजदूरी मिलेगी। कांग्रेस योजना को लेकर भ्रम फैलाकर ग्रामीणों को गुमराह कर रही है। इस योजना में पंचायतों को भी कार्य करने का अधिकार दिया गया है। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “विकसित भारत” संकल्प को धरातल पर उतारने वाला राष्ट्रीय स्तर का मिशन है। अधोसंरचना के स्थाई निर्माण के साथ आजीविका का दायरा भी बढ़ाया गया है- डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का आभार मानता हूं कि उन्होंने महात्मा गांधी नरेगा योजना को आवश्यकता के अनुरूप सुधार करके देश भर में लागू किया है। इस योजना को लेकर छह माह में राज्य सरकारों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया पूरी करनी है। अब मजदूरों को 125 दिन के रोजगार की गारंटी निश्चित रूप से रोजगार को बढ़ावा देने वाला है। कौशल और उद्यमिता के साथ इस योजना को जोड़कर रोजगार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सुधारों के साथ लागू की जा रही नई योजना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब वर्ष में कभी भी मजदूरी प्राप्त कर सकते हैं। केंद्र सरकार 60 और राज्य सरकार 40 प्रतिशत की राशि वहन करेगी। कई मामलों में पहले केंद्र सरकार ही निर्णय लेता था, लेकिन अब राज्य सरकारें भी गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों के समुचित विकास को ध्यान में रखकर कार्यों को शामिल कर सकते हैं। नरेगा में विद्यालय भवन, पुस्तकालय, कोल्ड स्टोरेज, ग्रामीण पार्किंग, सौर ऊर्जा, नवकरणीय ऊजा, जैविक खाद इकाई, बाढ़ आश्रय स्थल, आपदा में क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत, जल जीवन मिशन के कार्यों में सुधार एवं रखरखाव जैसे कार्य शामिल नहीं थे। नई योजना में यह सभी कार्य शामिल किए गए हैं। जैविक खाद निर्माण इकाइयां, पशुपालन, मुर्गी-पालन शेड, मत्स्य पालन संबंधी निर्माण कार्यां, नर्सरी निर्माण, भवन-निर्माण सामग्री उत्पादन इकाई निर्माण का प्रावधान भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आजीविका को बढ़ाने के लिए किया गया है। योजना में पारदर्शिता को और बढ़ाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वीबी-जी रामजी योजना में और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए होने वाले कार्यों की जियो-टैगिंग, डिजिटल रिकॉर्डिंग एवं सूचना प्रबंधन प्रणाली तथा नियोजित सभी श्रमिकों को त्वरित एवं उचित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल तथा बायोमेट्रिक भुगतान प्रणाली का प्रावधान किया गया है। पारदर्शिता के लिए ग्राम-सभा द्वारा सोशल ऑडिट भी कराने का प्रावधान है। नई योजना में पंचायतीराज संस्थाओं  जैसे ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत तथा राज्य परिषद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। श्रीमिकों का पंजीकरण करने, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी करने तथा कार्यों की प्राथमिकता के आधार पर कम से कम 50 प्रतिशत कार्यों के निष्पादन की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। भौगोलिक स्थिति, नगरीकरकण की दिशा में प्रगति जैसी बातों को योजना निर्माण के दौरान ध्यान में रखा जाएगा। नई योजना से जनकल्याणकारी कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार को कानूनी अधिकार बनाया गया है, काम नहीं तो बेरोजगारी भत्ता मिलेगा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वीबी-जी रामजी योजना में प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को न्यूनतम 125 दिन रोजगार या आजीविका का अवसर वैधानिक अधिकार है। महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों, खानाबदोस, महिला मुखिया परिवार, दिव्यांग मुखिया परिवार, छोटे व सीमांत किसानों के लिए भी रोजगार का प्रावधान किया गया है। अकुशल शारीरिक कार्यों की मजदूरी दरें केंद्र सरकार … Read more

नेहा सिंह राठौर को बड़ी राहत: विवादित सोशल मीडिया पोस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

नई दिल्ली लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को पहलगाम आतंकी हमले पर कथित विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने नेहा की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह मामला अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ा है, जिसमें कई पर्यटकों की मौत हो गई थी। हमले के बाद नेहा सिंह राठौर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे, जिनमें सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचना की गई थी। पोस्ट को आपत्तिजनक बताते हुए लखनऊ के हजरतगंज थाने में शिकायतकर्ता अभय प्रताप सिंह की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई। आरोप है कि इन पोस्ट से देश में नफरत फैलाने और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। इस मामले में नेहा सिंह राठौर ने पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी, लेकिन दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता अभय प्रताप सिंह को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए नेहा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी, लेकिन स्पष्ट निर्देश दिया कि वह 19 जनवरी को पुलिस जांच में शामिल होंगी और पूछताछ में पूरा सहयोग करेंगी। अगर वह जांच में सहयोग नहीं करतीं, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच आगे बढ़ेगी और नेहा को निर्देशों का पालन करना होगा। नेहा सिंह राठौर सोशल मीडिया पर अपनी राजनीतिक और सामाजिक टिप्पणियों के लिए जानी जाती हैं। उनके गाने और पोस्ट अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस मामले में पहले भी वे जांच के दायरे में थीं, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक से उन्हें तत्काल राहत मिल गई है। हालांकि, मामला अभी लंबित है और आगे की सुनवाई में अंतिम फैसला आएगा।

वेनेजुएला के करीब रूस की पनडुब्बी की एंट्री, अमेरिकी कार्रवाई से भड़का अंतरराष्ट्रीय तनाव

काराकास पिछले दिनों अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर हमले करके उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को कब्जे में ले लिया, जिसकी रूस समेत दुनिया के कई देशों ने निंदा की। तनावपूर्ण माहौल के बीच, रूस ने वेनेजुएला के पास संभावित अमेरिकी जब्ती से टैंकर को बचाने के लिए पनडुब्बी तैनात की है। रूस कई दशकों से वेनेजुएला का समर्थक रहा है और अब रूसी पनडुब्बी की तैनाती से इलाके में तनाव और बढ़ सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया गया है कि रूस ने उत्तरी अटलांटिक में एक खराब तेल टैंकर को एस्कॉर्ट करने के लिए एक पनडुब्बी और अन्य नौसैनिक संपत्ति की तैनाती की है। यह टैंकर, जो अब मरीनरा नाम से चल रहा है, वेनेजुएला के पास के पानी से निकलने के हफ्तों बाद से ही यूनाइटेड स्टेट्स कोस्ट गार्ड की निगरानी में है। हालांकि, जहाज खाली है और साफ तौर पर खराब हो रहा है, लेकिन इसकी यात्रा ने अमेरिकी अधिकारियों का ध्यान खींचा है, जो उस ग्लोबल नेटवर्क पर शिकंजा कसना चाहते हैं, जिसे वे रूस और अन्य प्रतिबंधित देशों से जुड़े अवैध तेल की तस्करी करने वाला बताते हैं। बेला 1 से मरीनरा तक पहले बेला 1 के नाम से जाना जाने वाला यह टैंकर दो हफ्तों से ज्यादा समय से वेनेजुएला के पास प्रतिबंधित तेल शिपमेंट को निशाना बनाने वाली अमेरिकी नेतृत्व वाली नाकाबंदी से बचने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जहाज अटलांटिक में जाने से पहले डॉक करने और कच्चा तेल लोड करने में विफल रहा। तेल न होने के बावजूद, टैंकर का पीछा अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने किया। यह दुनियाभर में ब्लैक-मार्केट एनर्जी सप्लाई, जिसमें पश्चिमी प्रतिबंधों के बाहर रूस द्वारा बेचा गया तेल भी शामिल है, को ले जाने वाले बेड़ों को रोकने के बड़े प्रयास का हिस्सा था। जहाज का नाम बदलकर रूस में करवा लिया रजिस्ट्रेशन दिसंबर 2025 में, जहाज के चालक दल ने खुले पानी में जाने से पहले अमेरिकी अधिकारियों द्वारा जहाज पर चढ़ने की कोशिश को नाकाम कर दिया। भागने के दौरान, चालक दल ने जहाज के बाहरी हिस्से पर मोटा-मोटा रूसी झंडा बनाया, जहाज का नाम बदलकर मरीनरा कर दिया, और इसका रजिस्ट्रेशन रूस में करवा लिया। इन कदमों ने किसी भी संभावित जब्ती से जुड़े कानूनी माहौल को काफी जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों ने टैंकर को बिना किसी निरीक्षण या सामान्य औपचारिकताओं के अपने झंडे के तहत रजिस्टर करने की रूस की अनुमति को बहुत असामान्य बताया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम अवैध रूसी तेल ले जाने का आरोप लगने वाले जहाजों पर हाल ही में अमेरिकी जब्ती को लेकर मॉस्को की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

कोंडागांव में किसानों को मृदा स्वास्थ्य पत्रक अनुरूप उर्वरक उपयोग के बताए फायदे

कोण्डागांव. कृषि विज्ञान केंद्र, पूर्वी बोरगांव, कोंडागांव में मृदा स्वास्थ्य पत्रक अनुरूप उर्वरक उपयोग विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कृषकों को मृदा स्वास्थ्य पत्रक के महत्व, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना था, जिससे टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दिया जा सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. सुरेश कुमार मरकाम ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य ही सतत एवं लाभकारी कृषि का मूल आधार है। यदि मृदा स्वस्थ रहेगी, तभी फसलें स्वस्थ होंगी और किसान की आय में वृद्धि संभव होगी। उन्होंने हरी खाद, फसल अवशेष प्रबंधन तथा जैविक उर्वरकों के प्रयोग पर विशेष जोर देते हुए बताया कि इन उपायों से मृदा में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। साथ ही मृदा स्वास्थ्य पत्रक की सिफारिशों के अनुसार उर्वरक एवं सूक्ष्म तत्वों का संतुलित उपयोग करने से न केवल उत्पादन लागत कम होती है, बल्कि फसल उत्पादकता एवं गुणवत्ता में भी सुधार होता है। डॉ. मरकाम ने मृदा को मानव जीवन का आधार बताते हुए भावी पीढ़ियों के हित में मृदा संरक्षण एवं वैज्ञानिक फसल चक्र अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, कांकेर से पधारे डॉ. कोमल सिंह केराम ने राज्य एवं जिले की मिट्टी की भौतिक एवं रासायनिक विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने उर्वरक उपयोग की वैज्ञानिक विधियाँ, प्राकृतिक स्रोतों से खाद निर्माण, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्टिंग तथा मृदा गुणवत्ता प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मृदा गुणवत्ता को बनाए रखते हुए उत्पादन बढ़ाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जिले के उपसंचालक कृषि श्री कैलाश मरकाम ने विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए कृषकों को उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप साग-सब्जी, मक्का, धान, दलहन एवं तिलहन आधारित फसल चक्र अपनाने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विविधीकृत खेती से जोखिम कम होता है और किसानों की आय के नए स्रोत विकसित होते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र, कांकेर के पादप रोग वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र कुमार नाग ने फसलों में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान तथा उनके नियंत्रण हेतु समन्वित कीट-रोग प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने जिले में प्रमुख रूप से पाई जाने वाली फसलों में लगने वाले कीट एवं रोगों के जैविक एवं रासायनिक नियंत्रण की विस्तृत जानकारी प्रदान की। जिला कलेक्ट्रेट, कोंडागांव से आए श्री रागिब अली, जिला संसाधन प्रकोष्ठ ने बताया कि कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना के निर्देशानुसार जिले के 50 किसानों के खेतों की मृदा जांच की गई, जिसमें मृदा में कई पोषक तत्वों की कमी पाई गई है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग द्वारा दिए जा रहे प्रशिक्षण एवं आगामी सहयोग के माध्यम से जैव उर्वरकों के प्रयोग को अपनाने हेतु किसानों को प्रेरित किया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. हितेश मिश्रा ने गाय के गोबर से जैविक खाद तथा गोमूत्र से कीटनाशक एवं अन्य कृषि उपयोगी आदानों के निर्माण पर बल दिया। डॉ. भूपेंद्र ठाकुर, सस्य वैज्ञानिक ने रबी मौसम की फसलों के वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी दी, वहीं डॉ. प्रिया सिंह ने उन्नत कृषि यंत्रों की उपयोगिता बताते हुए कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त करने हेतु आधुनिक यंत्रों के प्रयोग पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में कोंडागांव, माकड़ी, फरसगांव एवं केशकाल विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी हेमलाल पद्माकर, तुलसी नेताम, आनंद नेताम, मीना नेताम, आत्मा योजना से टिकेश्वर नाग, संबंधित विकासखंडों के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तथा लगभग 70 कृषकों ने सक्रिय सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया।

अब और सुरक्षित होगा भारतीय पासपोर्ट! e-Passport में लगी होगी चिप, जानिए कितना खर्च और कैसे करें अप्लाई

नई दिल्ली भारत में अब पासपोर्ट सेवा का नया दौर शुरू हो चुका है। अब हर नए या रिन्यू किए जाने वाले पासपोर्ट के साथ आपको e-passport मिलेगा, जो पुराने पासपोर्ट से कहीं अधिक सुरक्षित और आधुनिक है। यह बदलाव ‘पासपोर्ट सेवा 2.0’ के तहत लागू किया गया है। ई-पासपोर्ट क्या है? e-passport सामान्य पासपोर्ट की तरह दिखता है, लेकिन इसके अंदर एक स्मार्ट चिप लगी होती है। यह चिप आपकी फोटो, उंगलियों के निशान और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तिगत जानकारी को डिजिटल तरीके से सुरक्षित रखती है। चिप की वजह से इसे नकली बनाना या इसमें छेड़छाड़ करना बेहद मुश्किल हो गया है। फीस और चार्जेस e-passport की फीस सामान्य पासपोर्ट के बराबर रखी गई है। -36 पन्नों वाला ई-पासपोर्ट: सामान्य प्रक्रिया के लिए 1,500 रुपये, जबकि तत्काल पासपोर्ट के लिए 3,500 रुपये (1500 फीस + 2000 तत्काल चार्ज)। -60 पन्नों वाला ई-पासपोर्ट: सामान्य प्रक्रिया के लिए 2,000 रुपये, और तुरंत पासपोर्ट चाहने पर 4,000 रुपये। कौन कर सकता है आवेदन? e-passport के लिए पात्रता वही है जो सामान्य पासपोर्ट के लिए होती है। यानी कोई भी भारतीय नागरिक, चाहे बच्चा, किशोर या बुजुर्ग, आवेदन कर सकता है। 75 साल से ऊपर उम्र वाले नागरिकों को कुछ मामलों में प्राथमिकता भी मिलती है।   पहली बार पासपोर्ट बनवाने वाले या पुराने पासपोर्ट के एक्सपायर होने, खो जाने या पन्नों के भर जाने पर ई-पासपोर्ट जारी किया जाएगा। वर्तमान साधारण पासपोर्ट वैध होने तक मान्य रहेगा, इसलिए तुरंत बदलना जरूरी नहीं है। विदेश में रहने वाले भारतीय भी अपने नजदीकी दूतावास के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त या लंबित मुकदमे वाले नागरिकों को पासपोर्ट मिलने में परेशानी हो सकती है। जरूरी दस्तावेज ई-पासपोर्ट बनवाने के लिए कुछ प्रमाण पत्र जरूरी हैं: पहचान पत्र जैसे आधार या पैन कार्ड पते का प्रमाण जन्म तिथि का प्रमाण (जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट) ई-पासपोर्ट न केवल सुरक्षा में बेहतर है, बल्कि यह भारत की डिजिटल पहल का हिस्सा भी है, जिससे पासपोर्ट प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय बनती है।  

RS में नामंजूर हुआ प्रस्ताव, अब LS में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग पर संशय—SC ने किया स्पष्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (7 जनवरी) को इस धारणा पर सवाल उठाए हैं कि अगर संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव खारिज हो जाए, और उसी दिन लोकसभा में वही प्रस्ताव स्वीकार किया गया हो तो क्या उसे विफल मान लिया जाएगा। शीर्ष अदालत ने इस विचार पर संदेह जताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग के लिए लोकसभा द्वारा स्वीकार किए गए प्रस्ताव को विफल माना जाना चाहिए। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की बेंच जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उनके खिलाफ महाभियोग के लिए 'जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट' के तहत तीन सदस्यीय समिति गठित करने के लोकसभा स्पीकर के फैसले को रद्द करने की मांग की गई थी। जस्टिस वर्मा ने प्रक्रियागत आधार पर लोकसभा स्पीकर के फैसले को चुनौती दी है। अपनी याचिका में जस्टिस वर्मा ने इस बात पर जोर दिया है कि हालांकि उनके महाभियोग के नोटिस लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दिए गए थे, लेकिन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने राज्यसभा चेयरमैन द्वारा प्रस्ताव स्वीकार किए जाने का इंतजार किए बिना एकतरफा रूप से जांच समिति का गठन कर दिया। मुकुल रोहतगी के क्या तर्क? उनकी तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि 'जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट' की धारा 3 के एक प्रावधान के तहत, ऐसे मामलों में जहां महाभियोग प्रस्ताव दोनों सदनों में उठाया जाता है, लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन के बीच संयुक्त परामर्श की परिकल्पना की गई है। उन्होंने तर्क दिया कि इसके बाद ही एक जांच समिति का गठन किया जा सकता है। हालांकि, लोकसभा के महासचिव ने अब इसका जवाब देते हुए कहा है कि राज्यसभा ने महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, जिसका मतलब है कि यह प्रावधान लागू नहीं होगा। मुकुल रोहतगी ने आगे दलील दी कि इस प्रक्रिया का पालन न होने से पूरी जांच ही त्रुटिपूर्ण हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी दूसरी तरफ, लोकसभा के महासचिव ने कोर्ट में कहा कि राज्यसभा ने महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार ही नहीं किया, इसलिए संयुक्त परामर्श से जुड़ा प्रावधान लागू नहीं होता। इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने अहम सवाल उठाते हुए पूछा, “अगर एक सदन में प्रस्ताव विफल हो जाए और दूसरे में सफल, तो क्या सफल प्रस्ताव भी अपने आप गिर जाएगा? कानून में ऐसा कोई स्पष्ट प्रतिबंध तो नहीं दिखता।” कोर्ट ने आगे कहा कि संयुक्त जांच समिति तभी बनती है, जब दोनों सदन प्रस्ताव स्वीकार करें। अगर एक सदन प्रस्ताव खारिज कर दे, तो कानून यह नहीं कहता कि दूसरा सदन आगे नहीं बढ़ सकता। कानून की उद्देश्यपूर्ण व्याख्या जरूरी बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस दत्ता ने यह भी कहा कि कानून की उद्देश्यपूर्ण व्याख्या (purposive interpretation) जरूरी है, ताकि संसद की मंशा को सही तरीके से समझा जा सके। उन्होंने प्रारंभिक तौर पर यह संकेत भी दिया कि वह इस तर्क से सहमत नहीं हैं कि राज्यसभा में प्रस्ताव खारिज होने से लोकसभा का प्रस्ताव स्वतः विफल हो जाएगा। क्या राज्यसभा में प्रस्ताव वास्तव में स्वीकार हुआ था? सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने केंद्र से पूछा कि क्या राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव वास्तव में “स्वीकार” किया गया था? इस पर मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्यसभा के सभापति ने प्रस्ताव की प्राप्ति को स्वीकार किया था और यह कहा था कि जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे यह अप्रत्यक्ष स्वीकृति (implied admission) मानी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या उपसभापति, सभापति के फैसले की समीक्षा कर सकते हैं? सरकार की दलील सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि सभापति ने न तो प्रस्ताव स्वीकार किया और न ही खारिज,वह सिर्फ यह जांचना चाहते थे कि क्या उसी दिन लोकसभा में भी ऐसा प्रस्ताव लाया गया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह गुरुवार को सुनवाई जारी रखेगा और यह जांचेगा कि जांच समिति गठित करने से पहले लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति के बीच परामर्श न होने से क्या जस्टिस यशवंत वर्मा के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है या नहीं? कोर्ट ने कहा,“हमें सिर्फ यह देखना है कि क्या इस मामले में हमें हस्तक्षेप करना चाहिए या नहीं?”  

दालमंडी क्षेत्र में ध्वस्तीकरण अभियान शुरू, कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस अलर्ट

वाराणसी यूपी के वाराणसी में बुधवार को दालमंडी में दोपहर बाद ध्‍वस्‍तीकरण की कार्रवाई हुई। इस दौरान मौके पर भारी पुल‍िस बल की तैनाती की गई थी। इसके पूर्व दालमंडी चौड़ीकरण को लेकर प्रशासन ने भवनों और दुकानदारों को चेतावनी देते हुए खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया था। कार्रवाई का दौर कुछ द‍िनों तक थमने के बाद अब दोबारा ध्‍वस्‍तीकरण का क्रम शुरू हो चुका है।   आपको बता दें कि महीने भर बाद दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण के लिए भवनों का ध्वस्तीकरण बुधवार से शुरू हुआ। भारी फोर्स के साथ जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी की टीम ने नरेली बाजार तिराहे की ओर से भवन तोड़ने का कार्य शुरू किया। इस दौरान चारों तरफ रास्ता रोक दिया गया था। इससे पहले अधिग्रहीत भवन स्वामियों और दुकानदारों को चेतावनी देते हुए मकान खाली करने को कहा गया। इसमें भवन संख्या सीके 39/5, सीके 43/113 और सीके 50/207 (सत्तार कटरा) शामिल है। हालांकि तीसरे भवन सत्तार मार्केट को स्वामी खुद तोड़वा रहे हैं। कार्रवाई के दौरान के मौके जिले के आला अधिकारी समेत भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दालमंडी क्षेत्र में चौड़ीकरण की प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। चौड़ीकरण की कार्रवाई से यातायात बेहतर होगा। प्रशासन ने सभी दुकानदारों और भवन स्वामियों को चेतावनी दी है कि वे अपने भवनों और दुकानों को समय पर खाली करें, ताकि ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। वहीं स्थानीय निवासियों और दुकानदारों मी मिलीजुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ लोग प्रशासन के इस कदम का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य इसे उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला मानते हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी प्रक्रियाएं कानूनी रूप से और उचित तरीके से की जाएंगी।  

निर्माणाधीन गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन मार्ग का सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया निरीक्षण

  गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्देशित किया कि गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखते हुए निर्माण कार्य में तेजी लाएं ताकि तय समयसीमा में यह मार्ग जनता को समर्पित कर दिया जाए। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने खजांची चौराहा फ्लाईओवर, जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के निर्माण की प्रगति की भी जानकारी ली और जरूरी दिशानिर्देश दिए। विकास कार्यों का जायजा लेने के क्रम में सीएम योगी बुधवार अपराह्न गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन मार्ग के विकास भारती स्कूल मोड के आगे पहुंचे। यहां उन्होंने सड़क परियोजना के ले आउट, ड्राइंग मैप का अवलोकन करने के साथ कार्य प्रगति की जानकारी ली। 19.485 किमी लंबाई वाले गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन मार्ग का निर्माण 942.44 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड तीन ने 11 फरवरी 2025 को कार्य प्रारंभ किया था। निर्माण 31 अगस्त 2026 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। साथ ही कार्य में तेजी लाते हुए इसे अगस्त 2026 तक पूर्ण किया जाना भी सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने फोरलेन सड़क पर पानी की लेवलिंग जांचने के भी निर्देश दिए ताकि सड़क पर जलजमाव की कोई समस्या न रहे। जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड का भी काम देखा सीएम ने गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन का निर्माण कार्य देखने के दौरान मुख्यमंत्री ने जंगल-कौड़िया रिंग रोड के कार्यों का भी अवलोकन और निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण में और तेजी लाते हुए इस रिंग रोड को सितंबर माह तक पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस रोड पर बिशुनपुर अंडरपास की चौड़ाई को भी परख लिया जाए। चौड़ाई इतनी होनी चाहिए कि जनता को कोई दिक्कत न हो। जल्द पूरा करें खजांची बाजार फ्लाईओवर का निर्माण निरीक्षण की श्रृंखला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खजांची चौराहे पर 96.50 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे फ्लाईओवर का भी जायजा लिया। फ्लाईओवर के पास रुककर उन्होंने निर्माण की अब तक की प्रगति जानी और ड्राइंग मैप को भी देखा। इस फ्लाई ओवर का निर्माण 99 प्रतिशत से अधिक पूर्ण हो गया है। कार्यदायी संस्था की तरफ से बताया गया कि करीब तीन दिन का ही काम शेष है। इस पर सीएम योगी ने जल्द से जल्द फ्लाईओवर का निर्माण शत प्रतिशत पूर्ण करने के निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक महेंद्रपाल सिंह, विपिन सिंह, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी भी उपस्थित रहे।

मकर संक्रांति पर एकादशी के संयोग में दोपहर 3.07 बजे से करें स्नान-दान

जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। पौष कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर इस साल मकर संक्रांति पड़ रही है। इस बार मकर संक्रांति ऐसे शुभ संयोगों के साथ आ रही है, जिसमें दान-पुण्य का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस साल दो शुभ योग तो बन ही रहे हैं, साथ ही 23 साल के बाद संक्रांति पर एकादशी का शुभ संयोग देखने को मिलेगा। 14 जनवरी 2026 को धनु राशि से मकर राशि में सूर्य का प्रवेश दोपहर 3:07 बजे हो रहा है। इसी दिन मकर संक्रांति मनाई जाएगाी। इस दिन गंगा स्नान और दान पुण्य के लिए पुण्य काल देखा जाएगा। मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी शुरु होती है। इस लिए इस पर्व को उत्तरायणी भी कहते हैं। मकर संक्रांति पर एकादशी का संयोग मकर संक्रांति पर इस वर्ष 23 साल बाद एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन षट्तिला एकादशी व्रत भी है। संक्रांति और एकादशी का एक ही दिन में आना आध्यात्मिक रूप से अक्षय पुण्य फल देने वाला माना जाता है। पंडितों के मुताबिक, इससे पहले मकर संक्रांति और एकादशी का शुभ संयोग वर्ष 2003 में बना था। जानें क्या रहेगा स्नान-दान का उत्तम समय इस बार मकर संक्रांति पर महा पुण्य काल दोपहर 3:07 बजे से शाम 6 बजे तक माना जाएगा। मकर संक्रांति पर दो शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिसमें सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग बन रहे हैं, जो सुबह 7:15 बजे से रात 3:03 बजे तक मान्य होंगे। अमृत सिद्धि योग में दान पुण्य और पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन खिचड़ी दान करने और खाने का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति पर क्या करें दान? मान्यता है कि मकर संक्रांति तिल, गुड़, खिचड़ी, चावल, हल्दी, नमक, उड़द, धान आदि का दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पापों का नाश होता है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं।