samacharsecretary.com

राज्य सरकार सैनिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सैनिक केवल भारत की सीमाओं की रक्षा नहीं करते बल्कि देश के स्वाभिमान की भी रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि जो वर्दी पहन कर देश के लिए खड़ा होता है, उसके सामने पूरा राष्ट्र नतमस्तक होता है। मातृभूमि के प्रति सैनिकों के प्रेम और समर्पण के कारण ही भारत का तिरंगा शान से लहरा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत माता की सेवा में सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीर शहीदों के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में राज्य सैनिक रैली को भोपाल के राजकीय विमानतल से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हम सबके लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं, सैनिकों के प्रति उनकी संवेदनाएं सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि हमारे उन वीर सैनिकों जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर किए, उनकी कमी तो पूरी नहीं की जी सकती, लेकिन ऐसे वीरों के परिवारों के साथ सरकार हर कदम पर खड़ी है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि शहीद आश्रितों को पेंशन, वित्तीय सहायता, रोजगार और सभी मूलभूत सुविधाएँ समय पर और सम्मानपूर्वक प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि जहाँ भी आवश्यकता होगी, इन योजनाओं को और अधिक सशक्त किया जाएगा। राज्य सरकार ने शहीदों के माता-पिता को दी जाने वाली मासिक सहायता राशि अब 10 हजार रूपए प्रतिमाह कर दी है। शहीदों की पुत्रियों और बहनों के विवाह पर 51 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। युद्ध एवं सैन्य कार्रवाई में शहीद हुए सेना एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के आश्रितों को दी जाने वाली सहायता राशि बढ़ाकर 1 करोड़ रूपए की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निवासरत द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिकों और उनकी पत्नियों की मासिक पेंशन राशि 8 हजार से बढ़ाकर 15 हजार प्रतिमाह की गई है, जो देश मे सर्वाधिक है। विभिन्न शौर्य एवं विशिष्ट सेवा अलंकरणों से नवाजे गए सैनिकों एवं उनके आश्रितों को राज्य शासन द्वारा सर्वाधिक सम्मान राशि दी जाती है। मध्यप्रदेश निवासी ऐसे माता-पिता, जिनकी पुत्री सेना में है, उनकी सम्मान निधि 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 20 हजार रुपए प्रतिवर्ष की गई। इन्हीं प्रयासों के परिणाम स्वरूप वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश सैनिक कल्याण निदेशालय को रक्षा मंत्री द्वारा "प्रोगेसिव स्टेट ट्रॉफी" से सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है, साथ ही सैनिक विश्राम गृहों के उन्नयन का कार्य भी जारी है। प्रदेश में रोजगार एवं स्व-रोजगार के अवसरों को विस्तारित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सैनिक रैली राष्ट्र गौरव और एकता की भावना को और सुदृढ़ करे, यही कामना है। उन्होंने सभी को गणतंत्र दिवस की अग्रिम शुभकामनाएँ भी दीं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुरातत्व, दस्तावेज प्रबंधन और संग्रहालयों पर केन्द्रित प्रदर्शनी का किया शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर का भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान रहा है। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने पुरातत्व को जन आंदोलन बना दिया था। यह उनके व्यक्तित्व और संप्रेषण का ही प्रभाव था कि उज्जैन का जन-जन अपने परिवेश को पुरातत्व की दृष्टि से देखने लगा था। पुरातत्व को लोक रुचि का विषय बनाने का डॉ. वाकणकर का प्रयास अद्भुत और अनुकरणीय था। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर अनेक प्रतिभाओं के धनी थे। उन्होंने सितार वादन, मूर्ति कला, चित्रकला, काव्य लेखन एवं संगीत के माध्यम से भारतीय संस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर के परिश्रम और प्रयासों से काल गणना के केंद्र डोंगला की खोज हुई। उन्होंने बताया कि पृथ्वी की दीर्घकालीन घूर्णन धुरी में परिवर्तन के कारण उज्जैन में होने वाला शून्य देशांतर-रेखा और कर्क रेखा का मिलन उत्तर की ओर खिसक कर डोंगला में हुआ। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने उज्जैन क्षेत्र में गहन सर्वेक्षण किया था। शंकु की सहायता से उन्होंने कर्क रेखा की नई स्थिति का पता लगाया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने शिलाओं और गुफाओं में छिपे प्रमाणों के माध्यम से भारतीय सभ्यता की उस कहानी को दुनिया के सामने रखा, जो लिखित इतिहास से भी पहले की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह और राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पद्मश्री से सम्मानित डॉ. प्रो. यशोधर मठपाल को शॉल-श्रीफल और भू वराह की प्रतिकृति तथा 2 लाख रुपये का चैक भेंट कर 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान वर्ष 2022-2023 से सम्मानित किया। समारोह में अंतरराष्ट्रीय सितार वादक सुश्री स्मिता नागदेव एवं कवि लेखक श्री राहुल शर्मा ने सितार और कविता की जुगलबंदी से डॉ. वाकणकर द्वारा रचित कविता "इतिहास के पटल पर" का राग बैरागी भैरव में गायन प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा डॉ. वाकणकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "20वीं सदी में मध्यप्रदेश में स्वाधीनता आंदोलन 1920-1947, दुर्लभ अभिलेख और छाया चित्रों की प्रदर्शनी" पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया तथा एक स्टॉल पर कुम्हार के चाक पर स्वयं शिवलिंग की प्रतिकृति का निर्माण कर भारतीय संस्कृति, कला एवं शिल्प परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त किया। संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय का तीन दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन 11 जनवरी तक चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भीमबेटका के शैलचित्र 30 हजार वर्ष पुराने माने जाते हैं। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने वर्ष 1957 में भीमबेटका के शैलचित्रों का उत्खनन और गहन अध्ययन कर न केवल इन प्राचीन स्थलों पर प्रकाश डाला, बल्कि भारत को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई। आज भीमबेटका केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुका है। इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संचालित किया जा रहा है। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने महेश्वर, मंदसौर, नावड़ाटौडी, इंद्रगढ़, मनोटी, आवरा, कायथा, आजादनगर, इंदौर, दंगवाड़ा और रूनिजा जैसे विभिन्न पुरातात्विक स्थलों के उत्खनन और अध्ययन का नेतृत्व किया। डॉ. वाकणकर का मानना था कि ऋग्वेद में वर्णित सरस्वती नदी कोई मिथक नहीं, बल्कि एक वास्तविक, विशाल प्राचीन नदी थी। उन्होंने राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर यह दिखाने का प्रयास किया कि आज की घग्गर-हकरा नदी प्रणाली ही प्राचीन सरस्वती का अवशेष है। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर भारत तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने भारत, यूरोप और अमेरिका में 4 हजार से अधिक शैलचित्रों की खोज और अध्ययन किया। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. वाकणकर के इस अद्वितीय योगदान के लिए पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचारों से ओत-प्रोत थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. वाकणकर द्वारा पद्मश्री सम्मान ग्रहण करने के समय का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि डॉ. वाकणकर ने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के गणवेश का प्रमुख अंग 'ब्लैक कैप' धारण करके ही पद्मश्री सम्मान ग्रहण किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस विरासत को संजोते हुए हम विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। उनके सम्मान में रातापानी अभ्यारण्य का नाम डॉ. विष्णु वाकणकर के नाम पर रखकर राज्य सरकार ने महान इतिहासदृष्टा को श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में देश में पुरातत्व संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। आज से 1000 साल पहले गुजरात के सोमनाथ महादेव मंदिर पर हुए आक्रमण के बाद आज हमारी आस्था का यह केंद्र भव्य और गौरवशाली रूप में स्थापित हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार उज्जैन में 14 जनवरी से महाकाल महोत्सव की शुरुआत करने जा रही है। राज्य सरकार उज्जैन में पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर की स्मृतियों और उनके द्वारा एकत्रित पुरातत्व ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं का संरक्षण करते हुए संग्रहालय को भी वर्तमान तकनीकी व्यवस्थाओं से लैस कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पुरातत्वविद डॉ. मठपाल को राष्ट्रीय सम्मान, पुरातत्व एवं शैल चित्र अध्ययन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। डॉ. मठपाल एक वरिष्ठ पुरातत्वविद, चित्रकार, क्यूरेटर और शैल चित्र संग्रहण विशेषज्ञ हैं। डॉ. मठपाल ने पश्चिमी घाट, हिमालय, विंध्य और कैमूर पर्वत श्रृंखलाओं में 400 से अधिक प्राचीन गुफाओं की खोज की है। मध्यप्रदेश के पुरातत्व कला और संस्कृति में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। शैल चित्र संरक्षण की वैज्ञानिक पद्धतियों के विकास में उनके योगदान ने भारत की प्रागैतिहासिक विरासत के अध्ययन और संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा प्रदान की है। कार्यक्रम में सचिव पर्यटन श्री टी. इलैयाराजा तथा आयुक्त पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय श्रीमती उर्मिला शुक्ला तथा राष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात विचारक तथा विशेषज्ञ उपस्थित थे।

अशोक लीलैंड के नए प्लांट से बढ़ा भरोसा, धरातल पर दिख रहा योगी सरकार के प्रयासों का असर

केंद्र सरकार के “डी-रेगुलेशन 1.0” कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश नंबर-1, सिंगल विंडो सिस्टम से हो रहा तेज अनुमोदन अनुमतियों की प्रक्रिया सरल, समय सीमा तय होने और ऑनलाइन सिस्टम से निवेशकों को मिली राहत लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में किए गए बड़े व्यापारिक और नीतिगत सुधार अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। सरकार ने कारोबार शुरू करने की प्रक्रियाओं को आसान बनाया, अनुमतियों के लिए तय समय सीमा लागू की और ऑनलाइन सिस्टम शुरू किया। इन कदमों का नतीजा है कि अब बड़े उद्योग उत्तर प्रदेश में निवेश करने के लिए आगे आ रहे हैं। इसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है अशोक लीलैंड का नया प्लांट, जिसका शुभारंभ शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुआ। लखनऊ में इस प्लांट के शुभारंभ से न सिर्फ प्रदेश की औद्योगिक पहचान मजबूत हुई है, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी गया है कि उत्तर प्रदेश अब देश के सबसे भरोसेमंद निवेश स्थलों में शामिल हो चुका है। केंद्र सरकार के “डी-रेगुलेशन 1.0” कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान मिला है। उत्तर प्रदेश में भूमि, भवन, निर्माण, श्रम, पर्यावरण अनुमति और बिजली–पानी जैसे 23 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार किए गए। फ्लेक्सिबल ज़ोनिंग, डिजिटल लैंड यूसेज बदलाव, जीआईएस लैंड बैंक और ऑनलाइन अनुमोदन ने पुरानी जटिलताएं खत्म कर दीं। इसी कारण अब उद्योग अपनी इकाइयां लगाने के लिए उत्तर प्रदेश को तरजीह दे रहे हैं। अशोक लीलैंड का प्लांट इस भरोसे का बड़ा उदाहरण है। इस प्लांट से प्रदेश में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और हजारों युवाओं के लिए सीधे और परोक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे। साथ ही आसपास के एमएसएमई, छोटे उद्योग और सप्लाई चेन को भी बड़ा लाभ मिलेगा। श्रम सुधार भी इस बदलाव के महत्वपूर्ण कारण हैं। महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति, कार्य घंटे में लचीलापन और तृतीय पक्ष प्रमाणीकरण जैसी सुविधाओं ने उद्योगों के संचालन को आसान बनाया है। पर्यावरण और अन्य लाइसेंसों की ऑनलाइन प्रक्रिया से अनावश्यक देरी खत्म हुई है। बिजली और पानी के कनेक्शन भी अब जल्दी मिल रहे हैं। इन सभी सुधारों का परिणाम यह है कि निवेश अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर नए कारखानों, उत्पादन और रोजगार के रूप में दिखाई दे रहा है। अशोक लीलैंड का नया प्लांट इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश एक नीति आधारित निवेश गंतव्य बन चुका है, जहां स्थिरता, भरोसा और साफ प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। “उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार अधिनियम, 2025” और राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम ने इस व्यवस्था को और मजबूत किया है।

लालू परिवार को कोर्ट से बड़ा झटका, लैंड फॉर जॉब मामले में फ्रॉड और साजिश के आरोप फ्रेम

पटना लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार को बहुत बड़ा झटका लगा है। दरअसल, दिल्ली की कोर्ट ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए हैं। अब इस आदेश के बाद लालू परिवार पर मुकदमा चलेगा। दिल्ली राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती, हेमा यादव सहित कई अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय कर दिए हैं। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर के रूप में इस्तेमाल किया ताकि वह एक आपराधिक गतिविधि को अंजाम दे सकें, जिसमें सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करके यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन हासिल की। रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोग बरी अदालत ने इस मामले में 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किये और रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोगों को बरी कर दिया। इससे पहले, सीबीआई ने मामले में आरोपी व्यक्तियों की स्थिति के बारे में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि उसके आरोप-पत्र में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो गई है। अदालत ने मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 23 जनवरी की तारीख तय की है। जांच एजेंसी ने कथित घोटाले के सिलसिले में लालू यादव, उनकी पत्नी एवं बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था। क्या हैं पूरा मामला? आरोप है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप-डी श्रेणी में भर्तियां लालू यादव के रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गईं। इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े तोहफ़े में दिए या हस्तांतरित किए। सीबीआई ने यह भी दावा किया कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गईं और इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां शामिल थीं, जो आपराधिक कदाचार और साजिश के समकक्ष है। आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रवासी भारतीय दिवस पर दीं शुभकामनाएं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रवासी भारतीय दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के साथ जुड़ाव तथा विदेशी धरती पर प्रगति के नए अध्याय लिख रहे अप्रवासी भारतीयों पर हम सभी को गर्व है। प्रवासी भारतीय भाई-बहन, दुनिया में भारत को गौरवान्वित करते रहें, यही मंगलकामनाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने किया सीधी जिले में 201 करोड़ रूपए के 209 विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण

बहरी में खुलेगा नया कॉलेज, सिंहावल और देवसर के कॉलेज में विज्ञान और वाणिज्य संकाय किए जाएंगे शुरू देवसर में लगेगी फुल टाइम एडिशनल कलेक्टर कोर्ट गोपद नदी पर बनेगा 500 मीटर लंबा पुल, महान नदी पर बनेगा रपटा बहरी से चुरहट तक बनेगी 64.54 कि.मी. लंबी टू लेन रोड सीधी में लगाए जाएंगे सभी प्रकार के उद्योग संकल्प से समाधान महाभियान-1 चलेगा 12 जनवरी से 31 मार्च तक   भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सबके सहयोग से हम एक नया मध्यप्रदेश गढ़ने जा रहे हैं। विकसित मध्यप्रदेश के लिए गांव, गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओं, सभी को आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध बनाना जरूरी है और हम इसी दिशा में मिशन मोड में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम प्रदेश के किसी भी क्षेत्र को विकास से वंचित नहीं रहने देंगे। विकास की राह पर हम सब मिलकर आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को सीधी जिले की सिंहावल विधानसभा क्षेत्र के तहसील मुख्यालय बहरी में विभिन्न शासकीय विभागों के हितग्राहियों के प्रशिक्षण सह उनमुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनता का सरकार पर अटूट विश्वास ही हमें प्रदेश के समग्र विकास और कल्याण के लिए नई ऊर्जा और ताकत देता है। नए विकास कार्यों और नवरोजगार सृजन से हम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती देने के लिए हर जरूरी प्रयास कर रहे हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम बहरी से ही सीधी जिले के लिए 201 करोड़ 64 लाख रूपए की लागत वाले कुल 209 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इसके अतिरिक्त 11 करोड़ 58 लाख रूपए की लागत से एक बगिया माँ के नाम के अंतर्गत 505 कार्यों का भी शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री ने 133 करोड़ 62 लाख रूपए के 30 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं 68 करोड़ रूपए से अधिक की लागत वाले 179 विकास कार्यों का लोकार्पण कर सीधी जिलेवासियों को कई निर्माण कार्यों की सौगातें दीं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहरी में नया कॉलेज खोलने की घोषणा की। यह कॉलेज अगले सत्र से ही प्रारंभ किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ग्राम बहरी से चुरहट तक 129 करोड़ की लागत से 64.54 कि.मी. लंबे टू-लेन रोड निर्माण की भी घोषणा इस मौके पर की। उन्होंने सिंहावल और देवसर के महाविद्यालयों में विज्ञान और वाणिज्य संकाय की कक्षाएं प्रारंभ करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने देवसर में वर्तमान में संचालित पार्ट टाइम एडिशनल कलेक्टर कोर्ट को अब फुल टाइम संचालित किए जाने की घोषणा की। साथ ही सीधी जिले की गोपद नदी पर 500 मीटर लंबा एक नया पुल तथा महान नदी पर रपटा बनवाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहावल विधानसभा क्षेत्र के कुछ स्कूलों को हाईस्कूल से हायर सेकेण्डरी स्कूल में प्रोन्नत करने तथा कुछ गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोलने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि बहरी तहसील क्षेत्र के सभी गांवों में सिंचाई की स्थायी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीधी जिले में सभी प्रकार के उद्योग-धंधे लगाए जाएंगे। पंजा दरी सीधी की पहचान है। सिंहावल ब्लॉक के क्लस्टर में पंजा दरी और कालीन बुनाई की विभिन्न इकाइयां हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सीधी की पंजा दरी को जीआई टैग दिलाने के लिए प्रयासरत है, हम पंजा दरी को वैश्विक पहचान दिलाएंगे। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर में भारी निवेश आ रहा है। इससे पंजा दरी कला को भी प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस दौरान विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी से 31 मार्च तक 'संकल्प से समाधान अभियान-1' चलाया जाएगा। इसमें नागरिकों को सरकार की 106 प्रकार की हितग्राहीमूलक योजनाओं/सेवाओं/सुविधाओं का घर-घर जाकर लाभ प्रदाय किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोन नदी के किनारे सीधी जिला सोने की नगरी के समान है। आज यहां 201 करोड़ की लागत से क्षेत्र के विकास के लिए लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किए गए हैं। इसमें सीधी जिले में नए जनपद भवन, ग्राम पंचायत भवन, बालक-बालिका छात्रावास जैसे विभिन्न निर्माण कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार नारी सशक्तिकरण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए यह पूरा साल आरक्षित कर दिया है। प्रदेश के सभी पात्र किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सालभर में 12 हजार रुपए की सहायता राशि दी जा रही है। हमारी लाड़ली बहनों को हर महीने दी जा रही सहायता राशि लगातार बढ़ती जाएगी। अभी हर महीने 1500 रुपए दिए जा रहे हैं। इससे बहनें उद्यमी और आत्मनिर्भर बन रही हैं। घर का खर्च चलाने के साथ बच्चों के ट्यूशन फीस भी भर रही हैं। लाड़ली बहनों को सरकार ने लगभग 50 हजार करोड़ रुपए दिए हैं। बहनों को रोजगार आधिरित उद्योगों में काम करने पर 5000 रुपए महीने का अतिरिक्त लाभ भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने विगत 2 सात में ही 10 लाख हैक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ा दिया है। नदी जोड़ो अभियान के माध्यम से अभी प्रदेश में 55 लाख हैक्टेयर सिंचाई का रकबा पहुंचा है। अगले 5 साल में इसे 100 लाख हेक्टेयर तक करने का लक्ष्य हमने रखा है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए गौपालन एवं दूध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। गौपालन को प्रोत्साहित करने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की शुरुआत की गई है, जिसमें लाभार्थियों के लिए 40 लाख रुपए तक के अनुदान का प्रावधान है।   क्या है संकल्प से समाधान महाअभियान-1 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के दौरान घोषणा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी से 31 मार्च तक प्रदेश में 'संकल्प से समाधान महाअभियान-1' चलाया जाएगा। इसमें नागरिकों को राज्य सरकार की 106 प्रकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की घर पहुंच सेवा उपलब्ध कराई जाएंगी। इस दौरान पूरे प्रदेश की हर विधानसभा, ब्लॉक, तहसील, जिले, गांव-गांव और नगरों के वार्डों-मोहल्लों तक भी शासकीय अधिकारी पहुंचेंगे और पात्र हितग्राहियों को सभी योजनाओं का लाभ दिलाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया‍ कि इस महाभियान के पहले चरण में … Read more

अयोध्या परिक्षेत्र ने फिर मारी बाजी, आईजीआरएस मासिक रैंकिंग में रेंज व सभी पांच जिलों को मिला प्रथम स्थान

  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति पर तेजी से हो रहा है आईजीआरएस पर समाधान अयोध्या  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के नेतृत्व में पुलिस विभाग की सुदृढ़ व्यवस्था और प्रभावी कार्यप्रणाली से दिव्य और भव्य अयोध्या में एक बार फिर सुशासन, सुरक्षा और मर्यादा का वातावरण स्थापित होता दिखाई दे रहा है। वहीं प्रदेश पुलिस की जन शिकायत निस्तारण प्रणाली(आईजीआरएस) में एक बार फिर अयोध्या परिक्षेत्र ने शानदार प्रदर्शन किया हैं। एडीजी/आईजी अयोध्या प्रवीण कुमार के कुशल निर्देशन और आईजीआरएस टीम की अथक मेहनत से परिक्षेत्र को मासिक रैंकिंग में पुनः प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। सबसे खास बात यह है कि परिक्षेत्र के सभी पांच जिलों अयोध्या, अम्बेडकरनगर, अमेठी, बाराबंकी और सुल्तानपुर को भी अलग-अलग प्रथम रैंक मिली है। यह उपलब्धि पुलिस की जनता के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का प्रतीक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति और जन शिकायतों के समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर देने के कारण प्रदेश भर में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों का तेजी से समाधान हो रहा है। अयोध्या परिक्षेत्र में यह सफलता लगातार टीम वर्क और अधिकारियों की सक्रियता का नतीजा हैं।शिकायतकर्ताओं से संतुष्टि फीडबैक लेने और डिफॉल्ट मामलों को न्यूनतम रखने में टीम ने उत्कृष्ट कार्य किया। एडीजी/आईजी प्रवीण कुमार ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सफलता हमारी आईजीआरएस टीम की मेहनत और सभी जिलों के पुलिस कप्तानों व थाना प्रभारियों की समर्पण भावना का परिणाम है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता है कि जनता की हर शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण हो। हमारा प्रयास रहेगा कि अयोध्या परिक्षेत्र हर महीने इसी तरह अव्वल रहे और जनता का विश्वास पुलिस पर और मजबूत हो। पुलिस कर्मियों का मनोबल हुआ ऊंचा इस रैंकिंग में प्रथम स्थान प्राप्त करने से परिक्षेत्र के पुलिसकर्मियों का मनोबल ऊंचा हुआ है। जिलों में थानों पर शिकायतों का त्वरित समाधान, फॉलो-अप और शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लेने की प्रक्रिया को और मजबूत किया गया है। रामनगरी अयोध्या सहित पूरे परिक्षेत्र में पर्यटन और धार्मिक आयोजनों के कारण शिकायतों की संख्या अधिक रहती है, फिर भी टीम ने इसे चुनौती बनाकर सफलता हासिल की। यह उपलब्धि अन्य परिक्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जनसेवा और पारदर्शिता ही उनकी प्राथमिकता है। आने वाले महीनों में भी इसी प्रदर्शन को बनाए रखने का संकल्प लिया गया है। रैंकिंग में क्रमवार ऐसे है नाम बाराबंकी अयोध्या अमेठी अम्बेडकरनगर सुल्तानपुर नोट:  सभी ने शत प्रतिशत प्राप्तांक हासिल किए हैं।

सड़कों पर उमड़ा आक्रोश: प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए खामेनेई ने ट्रंप पर साधा निशाना

तेहरान ईरान की सड़कों पर उतरे आंदोलनकारियों को संबोधित करने के लिए आज खुद सुप्रीम लीर अयातुल्लाह खामेनेई सामने आए। उन्होंने सरकारी टीवी चैनल पर जनता को संबोधित करते हुए शांति की अपील की तो वहीं उपद्रव के लिए इजरायल और अमेरिका पर ठीकरा फोड़ा। उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका के आतंकी एजेंट ही ईरान में उपद्रव करा रहे हैं। उन्होंने सीधा हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर किया। खामेनेई ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के हाथ खून से रंगे हुए हैं। उन्होंने ईरान के लोगों का खून बहाया है। ट्रंप की सत्ता खत्म होगी और उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति पद से जाना होगा। यही नहीं खामेनेई ने ट्रंप को नसीहत देते हुए कहा कि वह अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दें। इस बीच ईरान के प्रशासन ने आंदोलन करने वालों को देश विरोधी करार दिया है और उन्हें सख्त ऐक्शन की चेतावनी दी है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर उपद्रव फैलाने की अपील करने वालों पर भी ऐक्शन होगा। खामेनेई ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं के इशारों पर काम करने वालों को सहन नहीं किया जाएगा। इससे पहले ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने एक कार्यक्रम में आंदोलनकारियों को इदरायल और अमेरिका के इशारे पर काम करने वाले आतंकी एजेंट बताया था। खामेनेई बोले- दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए क्यों जला रहे अपना मुल्क टीवी चैनल का कहना था कि ये लोग आखिर हिंसा क्यों फैला रहे हैं। ऐसे ही सुर अपनाते हुए खामेनेई ने कहा कि आखिर दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए कुछ लोग अपने ही देश की गलियों पर तबाही क्यों मचा रहे हैं। बता दें कि ईरान में चल रहे आंदोलनों को लेकर भी डोनाल्ड ट्रंप का बयान आया था। उन्होंने कहा था कि यदि आंदोलनकारियों पर बर्बरता की गई तो अमेरिका उनकी रक्षा करेगा। रजा पहलवी दशकों बाद हुए ऐक्टिव, अमेरिका का हाथ होने की क्यों चर्चा वहीं ईरान की ओर से कहा गया है कि अमेरिका दूर रहे, वरना अंजाम भुगतना होगा। इस पूरे मामले में डीप स्टेट की भी चर्चा हो रही है। वजह यह है कि निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी अचानक ही ऐक्टिव हो गए हैं। उनके नाम से नारे लगाए जा रहे हैं। पहलवी अमेरिका के करीब माने जाते हैं। इसलिए माना जा रहा है कि इस आंदोलन में अमेरिका का हाथ हो सकता है।  

दूसरे राज्यों की पुलिस की एंट्री पर बवाल, गहलोत और जूली ने भजनलाल सरकार को कटघरे में खड़ा किया

जयपुर राजस्थान में कानून-व्यवस्था और पुलिस के सूचना तंत्र को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। गुजरात पुलिस द्वारा जोधपुर में एमडी ड्रग्स लैब पर की गई कार्रवाई के बाद यह सामने आया कि स्थानीय राजस्थान पुलिस को इस ऑपरेशन की पूर्व जानकारी तक नहीं थी। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब स्वयं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुलिस अधिकारियों से संवाद के दौरान इस पर सवाल उठाए। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर तीखा हमला बोला।  पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं कि दूसरे राज्यों की पुलिस बिना सूचना के राजस्थान में कार्रवाई कर रही है। उन्होंने इसे राजस्थान पुलिस के सूचना तंत्र के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण बताया। गहलोत ने कहा कि गुजरात और महाराष्ट्र, दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है और राजस्थान में भी भाजपा सत्ता में है, इसके बावजूद आपसी समन्वय का यह अभाव सरकार की गंभीर प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है। गहलोत ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री ही राज्य की पुलिस पर भरोसा नहीं जता पा रहे, तो आम जनता अपनी सुरक्षा के लिए किसके पास जाए। उन्होंने कहा कि गृह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है, ऐसे में यह जवाबदेही से बचने का प्रयास है। पुलिस का मनोबल गिराकर सरकार अपनी नाकामी नहीं छिपा सकती। वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में दिया गया बयान राजस्थान की बदहाल कानून-व्यवस्था की स्वीकारोक्ति है। जूली ने कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या मुख्यमंत्री की नींद आज टूटी है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को खुद नहीं पता कि पुलिस महकमे में क्या चल रहा है। जूली ने चूरू में महिला कांस्टेबल द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का भी जिक्र करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।   इस पूरे मामले ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, पुलिस समन्वय और सरकार की प्रशासनिक पकड़ को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।  

प्रशासनिक सुधारों से विकास की रफ्तार: बिहार-त्रिपुरा ने साझा किए अनुभव

पटना बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बुधवार को त्रिपुरा सरकार के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ नियमों में ढील और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक और संवाद आयोजित किया गया। इस बैठक का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच प्रशासनिक सुधार, सरल नीतियों के निर्माण और उद्योगों को बढ़ावा देने के सफल तरीकों को साझा करना था। बैठक की शुरुआत में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने त्रिपुरा के मुख्य सचिव जितेंद्र कुमार सिंह और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस तरह का अनुभव साझा करना बिहार के समग्र विकास और सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जरूरी है। त्रिपुरा सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने विस्तार से बताया कि कैसे पुराने और जटिल नियमों में बदलाव कर निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाया गया है। उन्होंने समझाया कि अनुमति की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है, एक ही जगह से सभी स्वीकृतियां देने की व्यवस्था लागू की गई है और नीतियों में सुधार किए गए हैं। बैठक में भूमि और श्रम से जुड़े सुधारों, उद्योगों के लिए जमीन की उपलब्धता, श्रम कानूनों को सरल बनाने, जांच व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए केंद्रीकृत प्रणाली अपनाने, तथा बिजली, पानी और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए बिना रुकावट अनुमति देने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार सरकार आत्मनिर्भर बिहार और औद्योगिक विकास की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। त्रिपुरा में किए गए नीतिगत सुधारों का अध्ययन कर बिहार अपनी औद्योगिक नीति को और अधिक आकर्षक बनाने पर विचार करेगा, जिससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों और औपचारिकताओं का बोझ कम होने से सरकारी कामों में देरी खत्म होगी और सुशासन को मजबूती मिलेगी। बैठक में युवा, रोजगार और कौशल विकास विभाग की भागीदारी यह दिखाती है कि सरकार का उद्देश्य केवल उद्योग लगाना नहीं है, बल्कि बिहार के युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित और सक्षम बनाना भी है। इस अवसर पर त्रिपुरा सरकार की ओर से उद्योग एवं वाणिज्य सचिव किरण गिट्टे, शहरी विकास सचिव अभिषेक सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं बिहार सरकार की ओर से गृह रक्षा वाहिनी के महानिदेशक, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव, नगर विकास, उद्योग, ऊर्जा और श्रम संसाधन विभाग के सचिव तथा बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए। यह जानकारी सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी, मंत्रिमंडल सचिवालय एवं वित्त विभाग, बिहार की ओर से दी गई।