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14 जनवरी का राशिफल: इस दिन के ग्रहों का आपके लिए क्या संदेश है, जानें यहां

मेष 14 जनवरी के दिन आज आप समृद्ध हैं। बातचीत में खुलापन लाने पर विचार करें। निजी और पेशेवर जीवन, दोनों में समझदार और संवेदनशील रहें। आपका दिन प्रोडक्टिव रहेगा। कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं होगी। आर्थिक स्थिति भी आपके पक्ष में रहेगी। वृषभ 14 जनवरी के दिन ऑफिस की गॉसिप से बचें। ऑफिस के काम पर ध्यान केंद्रित करें। आपका प्रेम जीवन खुशनुमा रहेगा और आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। आज का दिन समझदारी भरे निवेश के लिए भी अच्छा साबित हो सकता है। मिथुन 14 जनवरी के दिन अनुशासन और मेहनत के जरिए करियर जीवन को प्रोडक्टिव बनाए रखें। आज प्रेम जीवन को रोमांटिक बनाएं। सुरक्षित वित्तीय निवेश को प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य आपका अच्छा रहेगा। आज रिश्ते में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। कर्क 14 जनवरी के दिन लव के मामले में अहंकार को दूर रखें। भविष्य के लिए प्लान करें। अपनी क्षमता साबित करने के लिए ऑफिस में नए काम हाथ में लें। पैसों से जुड़ी कोई समस्या नहीं आएगी। आज आप स्वस्थ भी हैं। सिंह 14 जनवरी के दिन प्यार से साथ रहें और पेशेवर जोखिम उठाने की इच्छा भी दिखाएं। धन और स्वास्थ्य दोनों अच्छे रहेंगे, और कुछ महिलाओं को संपत्ति भी विरासत में मिलेगी। आपको अपने हाव-भावों को लेकर सावधान रहने की जरूरत है। कन्या 14 जनवरी के दिन प्यार में खुशी के पलों की तलाश करें और ऑफिस में नई भूमिकाएं निभाना सुनिश्चित करें। आंख मूंदकर निवेश न करें, बल्कि एक उचित निवेश योजना बनाएं। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। तुला 14 जनवरी के दिन लव लाइफ में बेहतरीन पल देखने को मिलेंगे। प्रोफेशनल मुद्दों को सुलझाएं। आर्थिक निवेश पर विचार करें, जो सुरक्षित हों। आपकी हेल्थ अच्छी रहेगी। आप वर्क-लाइफ के बीच जरूरी बैलेंस बनाए रखें। वृश्चिक 14 जनवरी के दिन अपनी लव लाइफ में निष्पक्ष रहें। करियर में जोखिम उठाने पर विचार करें। समृद्धि के बावजूद, आपको खर्चों को लेकर सावधान रहना चाहिए। स्वास्थ्य भी आपके पक्ष में है। धनु 14 जनवरी के दिन रिश्तों की समस्याओं के समाधान के लिए फोकस बनए रखें। बेहतर विकास के लिए पेशेवर अवसरों का लाभ उठाएं। आज समृद्धि बनी रहेगी और स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। बैलेंस पर फोकस रखें। मकर 14 जनवरी के दिन रिश्ते में सुखद पलों की तलाश करें। लव लाइफ को अगले लेवल पर ले जाने पर विचार करें। अहंकार को दफ्तर की जिंदगी से दूर रखें। आज आप हेल्दी महसूस करेंगे। धन मिलने पर सुरक्षित वित्तीय फैसले लें। कुंभ 14 जनवरी के दिन प्रेम जीवन को रोमांटिक बनाए रखें। धन का आगमन होगा। इस बात का ध्यान रखें कि आप प्रोफेशनल एक्सपेक्टेशन पर भी खरे उतरें। आज आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों अच्छे रहेंगे। मीन 14 जनवरी के दिन रिश्ते में सुखद पल आएंगे। अपनी लगन और मेहनत का परिचय देने के लिए कार्यस्थल पर नई चुनौतियों का सामना करें। सुरक्षित वित्तीय निर्णय लेने को प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

“ये 1962 नहीं, 2026 है” — पाक-चीन साजिश पर लद्दाख LG की दो-टूक चेतावनी, बोले: खुद बिखर जाएगा दुश्मन

जम्मू लद्दाख के उप राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने मंगलवार को शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का पूरा क्षेत्र भारत का है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी विस्तारवादी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शक्सगाम घाटी में कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए चीन की आलोचना करते हुए गुप्ता ने कहा है कि यह इलाका भारत का हिस्सा है और ऐसी गतिविधियों को तुरंत रोका जाना चाहिए। भारत की आपत्तियों के मद्देनजर, चीन ने सोमवार को शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावों को दोहराते हुए जोर दिया कि इस क्षेत्र में चीनी अवसंरचना परियोजनाएं ‘संदेह से परे’ हैं। प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोग भी भारत का हिस्सा बनना चाहते हैं और जल्द ही पाकिस्तान 'खुद टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा'। जम्मू में उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘पूरा कश्मीर (पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से समेत) हमारा है। हमें नहीं पता कि पाकिस्तान ने चीन के साथ क्या सौदा किया है। चीन को यह समझना चाहिए कि उसकी विस्तारवादी नीति से कुछ भी हासिल नहीं होगा। भारत सक्षम है। यह 1962 का भारत नहीं, 2026 का भारत है। ऐसे किसी भी प्रयास को विफल कर दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय इसका संज्ञान ले रहा है।’’ पहले से हम ज्यादा मजबूत, ये बात समझ ले चीन गुप्ता ने कहा कि ऐसे किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चीन को यह समझना होगा कि आज भारत पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने पहले अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर भी दावा किया था। पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए राज्यपाल ने आरोप लगाया कि पड़ोसी देश अपने ही लोगों को छल चुका है और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त है। बेचा जा रहा पाकिस्तान गुप्ता ने कहा, “पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसे बेचा जा रहा है। उसे अपनी संप्रभुता या अपने लोगों की कोई परवाह नहीं है। बलूचिस्तान, सिंध और कराची में आवाजें उठ रही हैं और वहां पाकिस्तानी सेना द्वारा अत्याचार किए जा रहे हैं। उन क्षेत्रों पर वस्तुतः सेना का ही शासन है।’’ गुप्ता ने संवेदनशील मुद्दों पर भड़काऊ बयानों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि पीओके पर संसद का स्पष्ट रुख है। ऐसे बयान नहीं दें जो भड़काऊ हो उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए जो भड़काऊ प्रकृति के हों। 1994 का एक संसदीय प्रस्ताव है जो स्पष्ट रूप से कहता है कि पूरा पीओके भारत का है।’’ सेना प्रमुख के हालिया बयान (जिसमें कहा गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी है) पर प्रतिक्रिया देते हुए गुप्ता ने कहा कि सशस्त्र बलों को पूर्ण राष्ट्रीय समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा, ‘‘पूरा देश सेना के साथ खड़ा है। सेना प्रमुख ने एक जिम्मेदार बयान दिया है और मैं इसका स्वागत करता हूं।’’ पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से शक्सगाम घाटी में स्थित 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र चीन को सौंप दिया था, जिसे उसने अवैध रूप से कब्जा करके हासिल किया था।

US के ईरान कदमों पर चीन की तीखी प्रतिक्रिया, 25 फीसदी टैरिफ का किया विरोध

बीजिंग बीजिंग ने ईरान के खिलाफ यूएस के रवैए पर आपत्ति जताई है। वहीं अंधाधुंध टैरिफ लगाए जाने को भी गलत करार दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को एक नियमित न्यूज ब्रीफिंग में कहा, "चीन लगातार दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में दखल का विरोध करता है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल के इस्तेमाल या धमकी का विरोध करता है, और हमें उम्मीद है कि सभी पक्ष मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता में योगदान देने के लिए और ज्यादा करेंगे।" माओ से इस मसले पर सवाल किया गया था। अमेरिका के अपने नागरिकों से तुरंत ईरान छोड़ने के दिशानिर्देश का हवाला दिया, जिसमें व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि साइबर युद्ध और मनोवैज्ञानिक युद्ध सहित अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। इस पर ही प्रवक्ता ने कहा कि चीन ईरान को राष्ट्रीय स्थिरता बनाए रखने में उम्मीद और समर्थन करता है। दूसरी ओर, वाशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए 25 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले की आलोचना की है। चीन के अनुसार वो "किसी भी गैर-कानूनी एकतरफा प्रतिबंधों और किसी के क्षेत्राधिकार में जबरन हस्तक्षेप" का विरोध करता है। प्रवक्ता ने एक्स पर कहा, "टैरिफ के अंधाधुंध लगाए जाने के खिलाफ चीन का रुख स्पष्ट है। टैरिफ युद्ध और व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता, और जबरदस्ती और दबाव से समस्याएं हल नहीं हो सकतीं। चीन किसी भी गैर-कानूनी एकतरफा प्रतिबंधों और लॉन्ग-आर्म ज्यूरिस्डिक्शन का कड़ा विरोध करता है, और अपने वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।" दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप का सोशल प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर लिखा पोस्ट मंगलवार को काफी सुर्खियों में रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिका का 25 फीसदी टैरिफ ईरान के साथ व्यापार करने वालों पर तुरंत प्रभावी होगा। ट्रंप के इस कदम का दुनिया के जिन देशों पर प्रभाव पड़ेगा, उनमें भारत और चीन का भी नाम सामने आ रहा है। भारत पर अमेरिका ने पहले ही 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ किए जा रहे व्यापार पर 25 प्रतिशत का टैरिफ देगा। यह आदेश अंतिम और निर्णायक है।'

नए भारत की रफ्तार का प्रतीक ‘प्रगति’, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में यूपी सबसे आगे: योगी आदित्यनाथ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति और परिणामोन्मुख शासन का सशक्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से शासन में ठोस और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं। मंगलवार को आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रगति उस प्रशासनिक मॉडल का विस्तार है, जिसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी थी और वर्ष 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी गई। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को सशक्त बनाते हुए प्रगति ने जटिल परियोजनाओं और प्रशासनिक अड़चनों के समाधान को सरल और तेज बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि एक व्यापक गवर्नेंस रिफॉर्म है, जिसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से निकालकर फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में अग्रसर किया है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। उन्होंने बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन गवर्नेंस बाई एप्लिकेशन) के रूप में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के त्वरित निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। यही मॉडल आगे चलकर प्रगति के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके माध्यम से अब तक 86 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुआ है। आज उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो सेवाएं, एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में प्रगति की अहम भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास 10.48 लाख करोड़ रुपये की लागत की 330 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है, जो देश में सबसे बड़ा है। इनमें से 2.37 लाख करोड़ रुपये की 128 परियोजनाएं (करीब 39 प्रतिशत) पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 8.11 लाख करोड़ रुपये की 202 परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रगति पर हैं। सरकार की प्राथमिकता गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए सभी प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों का समाधान करना है, ताकि परियोजनाएं तय समय में धरातल पर उतर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। राजस्व, वन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर विकास, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभाग एक ही मंच पर समन्वय के साथ निर्णय ले रहे हैं, जिससे हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम जैसी परियोजनाओं में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रगति के तहत 515 मुद्दों में से 494 का समाधान किया जा चुका है, जो लगभग 96 प्रतिशत है। वहीं, 287 परियोजनाओं में से 278 परियोजनाओं का समाधान सुनिश्चित किया गया है, जिसकी समाधान दर 97 प्रतिशत है। प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफॉर्म के कारण उत्तर प्रदेश आज बॉटलनेक स्टेट से निकलकर ब्रेकथ्रू स्टेट में परिवर्तित हो चुका है। अब राज्य सरकार केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि एक्सेलेरेटर की भूमिका में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है। समयबद्ध परियोजनाएं रोजगार सृजन के साथ-साथ राज्य की आर्थिक गति को भी तेज करती हैं और इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।

कृषि आधारित रोजगारपरक उद्योगों पर होगी कृषि कैबिनेट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसान कल्याण एवं स्वाभिमान पर्व मनाएगी सरकार कृषि ग्राम सभा सहित कृषि से जुड़े उपकरणों के क्रेता-विक्रेताओं का कराएं सम्मेलन ग्रामीणों और युवाओं को भावनात्मक रूप से जोड़ें खेती-किसानी से 26 से 30 जनवरी तक मनाया जाएगा कृषि लोकरंग – 2026 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि लोकरंग की तैयारियों को लेकर ली बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेती-किसानी और हमारी संस्कृति आपस में जुड़े हुए हैं। हमारा पारम्परिक जीवन, कलाएं और बहुरूपी मौखिक परंपराएं कृषि के मूल से ही उत्पन्न होते हैं और यही कृषि लोकरंग मनाने का आधार है। उन्होंने कहा कि भोपाल सहित प्रदेश के अन्य संभागों और अंचलों में कृषि लोकरंग – 2026 पूरी गरिमा और भव्यता के साथ मनाया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रदेश में कृषि आधारित रोजगारपरक उद्योगों के समावेशी विकास लक्ष्य को लेकर कृषि कैबिनेट आयोजित की जाएगी। किसान कल्याण,स्वाभिमान एवं पर्व कृषि ग्राम सभा जैसे आयोजन सहित कृ‍षि से जुड़े उन्नत उपकरणों के क्रेता-विक्रेताओं का सम्मेलन, कृ‍षि उत्सव और किसान मेले भी आयोजित किए जाएंगे। किसानों को सरकार की हर योजना का लाभ दिलाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि सभ्यता हमारी परम्पराओं से भीतर तकजुड़ी हुई है, इसलिए ग्रामीणों, युवाओं और विद्यार्थियों को भी भावनात्मक रूप से खेती-किसानी से जोड़ा जाए। सफल किसानों के एग्री बिजनेस मॉडल भी बताए जाएं, ताकि दूसरे किसान भी इनसे प्रेरणा लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में कृषि लोकरंग – 2026 के आयोजन की तैयारियों के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। कृषि लोकरंग आगामी 26 से 30 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि लोकरंग वास्तव में ग्राम पंचायतों एवं विकास खंड स्तर पर नागरिकों और युवाओं को खेती से जोड़ने और इसके व्यापक लोकव्यापीकरण का प्रयास है। लोकरंग के दौरान प्रदेश के बड़े कस्बों और बड़े शहरों में सरकार द्वारा कृषि और किसानों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी सांस्कृतिक एवं नाट्य प्रस्तुतियों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि हमारी सहज परम्पराओं और धार्मिक अनुष्ठानों को भी कृषि से जुड़े विषयों से जोड़ा जाए। कार्यक्रम ऐसे हों, जिसमें जनता का सहज जुड़ाव हो। लोकरंजन के कार्यक्रमों को नीचे से क्रियान्वित कर ऊपर तक लाया जाए, इससे नागरिकों में कृषि के प्रति एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि लोकरंग को जन-जन का उत्सव बनाने के लिए आकर्षक देशी वेशभूषा जैसे पगड़ी, धोती, साफा आदि सहित पुराने देशज बीज संग्रहण/संचयन के प्रोत्साहन से जुड़ी प्रतियोगिता, लखपति किसानों की प्रतियोगिता, अच्छी नर्सरी और बगीचे वालों की प्रतियोगिता और सायकिल प्रतियोगिता जैसे आयोजन भी किए जाएं। किसान कल्याण वर्ष का बनाएं आकर्षक लोगो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' घोषित किया है। इस आयोजन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए इस वर्ष का एक आकर्षक लोगो तैयार करें। सोयाबीन, मूंग, उड़द, मक्का एवं अन्य फसलों का उत्पादन करने वाले किसानों को बुलाकर दूसरे किसानों के समक्ष उनकी सफलता बताने को कहा जाए। बैठक में सचिव, किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री निशांत वरवड़े ने बताया कि कृषि लोकरंग – 2026 के दौरान पारम्परिक ग्रामीण खेलों एवं खेत-खलिहान पर केन्द्रित विभिन्नन गतिविधियां जैसे फसल, मौसम, ऋतुओं, संस्कारों पर गीत-गायन आदि, कृषि के देशज ज्ञान पर आधारित प्रतियोगिताएं, बड़े एवं नवप्रयोगधर्मी किसानों का प्रदेशभर से चयन एवं उनका मुख्यमंत्रीजी से सीधा संवाद, ओपन माइक सत्र सहित मेरा किसान, मेरा अभिमान सत्र आयोजित किए जाएंगे। इस सत्र में किसानों के बच्चे मंच पर जाकर बतायेंगे कि हमारे किसान देश की शान क्यों हैं ? ऐसी अन्य गतिविधियां भी इस दौरान संचालित की जाएंगी। कृषि लोकरंग के आयोजन में संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास भी सहभागिता करेगा। लोकरंग के दौरान कृषि को सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाने का लोक संयोजन किया जाएगा। बैठक में संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, मुख्यमंत्री के सचिव श्री आलोक कुमार सिंह, आयुक्त जनसम्पर्क श्री दीपक कुमार सक्सेना, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री श्रीराम तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभ्युदय म.प्र. के विजयी प्रतियोगियों को किया पुरस्कृत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित अभ्युदय मध्यप्रदेश क्विज के विजयी प्रतियोगियों को एक समारोह में पुरस्कार प्रदान किए। विजयी प्रतियोगियों को ई-स्कूटी, ई-बाइक, लैपटॉप और विक्रमादित्य घड़ी के साथ नासा किट पुरस्कार के रूप में प्रदान की गई। कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, संचालक संस्कृति श्री एमपी नामदेव उपस्थित थे। वीर भारत न्यास के संचालक और संस्कृति सलाहकार श्री राम तिवारी ने बताया कि ऑनलाइन क्विज में डेढ़ लाख प्रतियोगियों ने विजिट किया। करीब 30 हजार प्रतियोगी रजिस्टर्ड हुए। क्विज में 24 प्रतियोगी विजयी हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए उनका अभिनंदन किया। इसके साथ ही खगोल विज्ञान केंद्र उज्जैन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बच्चों के सवालों के जवाब भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन की साइंस सिटी में तारामंडल का सभी बच्चों को अवलोकन करना चाहिए, जहां अंतरिक्ष विज्ञान के संबंध में रोचक ढंग से महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्विज के सभी प्रतिभागियों को उनकी जागरूकता के लिए भी बधाई दी। क्विज प्रतियोगिता के विजेता अभ्युदय मध्यप्रदेश क्विज विजेताओं में बीना से कीन्स अहिरवार, मंडला से आशीष मरकाम, राजगढ़ से संदीप बादल, शाजापुर से सचिन मीणा, बैतूल से प्रमोद देशमुख, इंदौर से अमन उपाध्याय, शाजापुर सुभाष पाटीदार, मंदसौर से जलज वर्मा, जबलपुर से नवीन केवट, ग्वालियर से देवेन्द्र सिंह, उज्जैन से राहुल शर्मा, नर्मदापुरम से दीपशिखा जाटव, भोपाल से अंजली जैन, विदिशा से सलोनी व्यास, देवास से दीपिका यादव, भोपाल से पारूल खरे, छतरपुर से रोमिका चौरसिया, सागर से पलक पासी, शुजालपुर से ज्योति जायसवाल, अनूपपुर से आंचल तिवारी, सतना से तनुजा सिंह, बालाघाट से पीहू स्वामी, नर्मदापुरम से रजनी परिहार और इंदौर से नरेन्द्र कुमार हैं।  

सीमा सुरक्षा सख्त: बांग्लादेश की स्थिति को लेकर असम के सीएम ने की समीक्षा बैठक

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को बांग्लादेश की ताजा स्थिति पर चिंता जताई, जहां हिंदुओं पर हिंसक हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक हिंदू नागरिकों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री सरमा मंगलवार को बांग्लादेश के साथ लंबी सीमा साझा करने वाले श्रीभूमि जिले में एक सरकारी कार्यक्रम में शामिल होते हुए। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "यह हमारी चिंता है कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर बार-बार हमले हो रहे हैं और पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक लोगों के साथ खड़ा होना और उन्हें किसी भी तरह की अवांछित स्थिति से बचाना हमारा नैतिक अधिकार है। केंद्र सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया है और राज्य सरकार को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।" मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बांग्लादेश में अशांति का असम पर भी कुछ असर पड़ा है और राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में सुरक्षा निगरानी बढ़ा दी है। सीएम सरमा ने आगे कहा कि असम सरकार बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार से कदम उठाने का अनुरोध करेगी। उन्होंने कहा, "हालांकि विदेश संबंध केंद्र सरकार का मामला है, फिर भी हम बांग्लादेश में अत्याचार का शिकार हुए हिंदू लोगों की देखभाल के लिए अनुरोध कर सकते हैं। हाल की घटनाएं बहुत निंदनीय हैं।" इससे पहले, सीएम ने कहा कि इंटरनेशनल बॉर्डर पर हो रहे डेवलपमेंट को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता, खासकर ऐसे समय में जब हिंसा और असुरक्षा बढ़ती दिख रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, "बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है। हिंदुओं पर अत्याचार और उत्पीड़न बढ़ रहा है और इसका असम पर भी असर पड़ सकता है।" उन्होंने ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत पर जोर दिया। पड़ोसी देश में हाल के राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में भीड़ की हिंसा और अल्पसंख्यक समुदायों पर टारगेटेड हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहना चाहिए और राज्य में किसी भी तरह के बुरे असर को रोकने के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, "इस समय, हमें सावधान रहने और सीमा पार हो रहे घटनाक्रमों पर करीब से नजर रखने की जरूरत है। साथ ही बांग्लादेश में हिंदू समाज को नैतिक समर्थन और भरोसा देना भी जरूरी है।" 2022 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश में लगभग 13.13 मिलियन हिंदू रहते हैं, जो देश की आबादी का लगभग आठ प्रतिशत हैं। सीएम सरमा की यह टिप्पणी बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर क्षेत्र में बढ़ती चिंता के बीच आई है।

हर खेत तक पहुंचाएंगे पानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मंत्रि-परिषद् ने राजगढ़ एवं रायसेन जिले की तीन सिचांई परियोजनाओं को दी मंजूरी सारंगपुर, भोजपुर और उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र के किसानों ने मुख्यमंत्री का आभार जताकर किया अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हमारा अभिमान हैं। किसानों का मान बढ़ाने हमने कोई कमी नहीं की। प्यासे खेतों तक पानी पहुंचाना हमारा लक्ष्य है और हर खेत तक पानी पहुंचाकर हम यह लक्ष्य जल्द ही पाकर रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास में किसानों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार किसान कल्याण के लिए संकल्पित है। प्रदेश के किसान समृद्ध और सशक्त बनें, इसी मंशा से हमने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना, केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और ताप्ती ग्राउंड वॉटर रिचार्ज मेगा परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। इन तीनों नदी परियोजनाओं के पूरा होने पर प्रदेश का लगभग सम्पूर्ण कृषि रकबा सिंचित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी मध्यप्रदेश में कृषि का सिंचित रकबा 56 लाख हेक्टेयर है। हमारी सरकार ने इसे जल्द से जल्द 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के एक-एक गांव और हर एक खेत तक बिजली और पानी की सतत् आपूर्ति बरकरार रहे, यही हमारा संकल्प है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का राजगढ़ जिले की सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र और रायसेन जिले की भोजपुर एवं उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं किसानों ने आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन कर आभार जताया। उल्लेखनीय है कि 13 जनवरी, 2026 को हुई मंत्रि-परिषद् की बैठक में राज्य सरकार द्वारा इन तीन विधानसभा क्षेत्रों के किसानों के हित में करीब 900 करोड़ रुपए लागत वाली तीन अलग-अलग सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। किसान इसी सौगात के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करने मुख्यमंत्री निवास आए थे। बड़ी संख्या में आए किसानों ने इस सौगात के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आल्हादित होकर अभिनंदन किया। किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भगवान शिव की प्रतिमा, बीजासन माता का चित्र, जैविक अनाज एवं स्टील और लकड़ी के हल की प्रतिकृति भेंटकर अपना हर्ष और आभार जताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं एक किसान परिवार से आते हैं और खेती के लिए सिंचाई का महत्व उन्हें अच्छी तरह ज्ञात है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नर्मदा, चंबल, बेतवा, ताप्ती, क्षिप्रा जैसे अनेक नदियों का मायका है और इन्हीं के कारण हमारा प्रदेश जल संपदा से संपन्न है। प्रदेश में बहती नदियां किसानों को सिंचाई के जल उपलब्ध कराती हैं, ये नदियां हमारे लिए जीवन रेखा के समान हैं। कृषि के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं के विकास में हम कोई कसर रख रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्री सुंदरलाल पटवा, पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का प्रदेश में किसानों के कल्याण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए स्मरण किया। उन्होंने कहा कि स्व. श्री पटवा प्रदेश के एक आदर्श राजनेता थे। इन तीन विधानसभा क्षेत्रों के किसान होंगे लाभान्वित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मंत्रि-परिषद द्वारा राजगढ़ एवं रायसेन जिले की कुल 898.42 करोड़ रूपये लागत वाली तीन सिंचाई परियोजनाओं के लिए की स्वीकृति दी गई है। राजगढ़ जिले की सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र में 396 करोड़ 21 लाख रूपये लागत वाली मोहनपुरा विस्तारीकरण (सारंगपुर) सिंचाई परियोजना से सारंगपुर तहसील के 26 ग्रामों की 11,040 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई उपलब्ध होगी। इस परियोजना से 10 हजार 400 किसान परिवार लाभांवित होंगे। रायसेन जिले की भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में 115 करोड़ 99 लाख रूपये लागत वाली सुल्तानपुरा उद्वहन सिंचाई परियोजना से सुल्तानपुर तहसील के 20 गांवों की 5,700 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई उपलब्ध होगी। इससे 3,100 किसान परिवारों को लाभ होगा। साथ ही रायसेन जिले की ही उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र की 386 करोड़ 22 लाख रुपये लागत वाली बारना उद्वहन सिंचाई परियोजना से बरेली तहसील के 36 गांवों की 15 हजार हैक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। इस परियोजना से 6,800 किसान परिवार सीधे तौर पर लाभांवित होंगे। जनप्रतिनिधियों एवं किसानों ने माना मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार अभिनंदन समारोह में कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भागीरथ के समान प्रदेश में खेत-खेत तक सिंचाई की गंगा बहाने का संकल्प लिया है। राजगढ़ को पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना का भी लाभ मिलेगा। इससे जिले के लगभग 200 से अधिक गांवों के हजारों लोगों को पीने के स्वच्छ पेयजल एवं सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होगा। जिले में सिंचाई सुविधाओं के विकास से श्रमिकों और किसानों का दूर क्षेत्रों में रोजगार की तलाश में आवागमन धीरे-धीरे कम हो रहा है। उदयपुरा विधानसभा के किसानों की ओर से आभार व्यक्त करते हुए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव अपना वादा निभाने में कभी पीछे नहीं हटते हैं। उन्होंने बरेली की जनसभा में बारना सिंचाई परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए घोषणा की थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकसित भारत @2047 की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पूर्व मंत्री एवं भोजपुर विधायक श्री सुरेन्द्र पटवा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुल्तानपुर के किसानों को 115 करोड़ रुपए लागत से सिंचाई परियोजना की सौगात दी है।

‘केरल’ से ‘केरलम’ तक: नाम बदलने की मांग पर राजीव चंद्रशेखर का पीएम मोदी को पत्र

तिरुवनंतपुरम भारतीय जनता पार्टी के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का आधिकारिक नाम 'केरल' से बदलकर 'केरलम' करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 'केरलम' नाम मलयालम भाषा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। राजीव चंद्रशेखर ने पत्र में यह भी बताया कि जून 2024 में केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें राज्य के नाम को आधिकारिक दस्तावेजों में 'केरल' से बदलकर 'केरलम' करने की मांग की गई है। चंद्रशेखर ने यह भी बताया कि उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को भी पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से इस महान राज्य को, जो अपनी समृद्ध परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है, 'केरलम' के रूप में ही देखती आई है। पार्टी की विचारधारा पारंपरिक, भाषाई और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सम्मान पर आधारित है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में राजीव चंद्रशेखर ने उम्मीद जताई कि राज्य का नाम बदलने के बाद सभी राजनीतिक दल मिलकर केरलम की हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और पुनर्जीवित करने के लिए काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल से एक विकसित और सुरक्षित केरलम का निर्माण संभव होगा, जहां सभी मलयाली (चाहे वे किसी भी धर्म से हों) अपनी आस्था और परंपराओं को लेकर सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सकें। राजीव चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि राज्य का नाम 'केरलम' रखने से उन कट्टरपंथी तत्वों के प्रयासों को कमजोर किया जा सकेगा, जो धर्म के आधार पर राज्य को बांटने और अलग-अलग जिले बनाने की मांग करते रहते हैं। उनके अनुसार, अपनी ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा केरलम, समाज को जोड़ने का काम करेगा। पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि मलयालम भाषा में निहित और विशिष्ट नाम 'केरलम' को ही राज्य का आधिकारिक नाम सुनिश्चित किया जाए। राजीव चंद्रशेखर ने विश्वास जताया कि अपनी गौरवशाली विरासत से जुड़ा 'केरलम' भविष्य में सभी मलयालियों के लिए एक उज्ज्वल, समृद्ध और सुरक्षित राज्य के रूप में आगे बढ़ेगा।

मंत्री टेटवाल ने मुख्यमंत्री का माना आभार

सारंगपुर को मिली नई सौगात, मोहनपुरा डेम से जुड़े 26 गांव भोपाल राजगढ़ जिले की सारंगपुर विधानसभा में लगातार विकास कार्यों को गति मिल रही है। किसानों के हित को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के विस्तारीकरण के तहत सारंगपुर क्षेत्र के 26 गांवों को योजना से जोड़ने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई परियोजना का प्रत्यक्ष और स्थायी लाभ मिलेगा। 11,040 हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगी सिंचाई सुविधा मंत्री श्री गौतम टेटवाल ने बताया कि सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मोहनपुरा विस्तारीकरण सिंचाई परियोजना को राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना पर 396.21 करोड़ रुपए की लागत आएगी। परियोजना के माध्यम से सारंगपुर तहसील के 26 ग्रामों की 11,040 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना से किसानों की आय में वृद्धि होगी मंत्री श्री टेटवाल ने बताया कि इस परियोजना के तहत आधुनिक दाबयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली को अपनाया जाएगा, जिससे जल की बचत के साथ सिंचाई की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। परियोजना से क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होगा, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। इस योजना से लगभग 10,400 किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। मंत्री श्री टेटवाल ने मुख्यमंत्री का जताया आभार मंत्री श्री गौतम टेटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार जनहित के कार्य कर रही है। किसान कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मोहनपुरा सिंचाई परियोजना एक वृहद और दूरगामी लाभ देने वाली योजना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सारंगपुर को नई सौगात देते हुए मोहनपुरा डेम की सिंचाई परियोजना से 26 गांवों को जोड़ने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए उन्होंने सारंगपुर की जनता की ओर से मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। मोहनपुरा सिंचाई परियोजना से जुड़े 26 ग्राम मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के विस्तारीकरण के तहत सारंगपुर तहसील के लीमा चौहान, पान्दा, टूट्याहेड़ी, दराना, देवीपुर, भेंसवा माता, भवानीपुर, कलाली, अरण्या, लोटटया, घटटटया, रोजड़कलां, धमन्दा, गायन, पट्टी, इचीवाड़ा, शंकरनगर, अमलावता, पीपल्या पाल, पाडल्या माता, शेरपुरा, कमलसरा, किशनखेड़ी, सुल्तानिया, जोगीपुरा और छापरा ग्रामों को योजना से जोड़ा गया है।