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स्लॉटर हाउस कांड का खुलासा: दुधारू-स्वस्थ भैंसों की हत्या, बछड़े और पाड़ों के अवशेष मिलने से हड़कंप

भोपाल   स्लॉटर हाउस में नियमों को ताक पर रखकर की जा रही अवैध कटाई का मामला गहराता जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार स्लॉटर हाउस में 14-15 साल की निर्धारित उम्र के बजाय 4 से 8 साल के दुधारू और स्वस्थ भैंसों को काटा जा रहा है। यहां छोटे-छोटे बछड़ों और पाड़ों के अवशेष के साक्ष्य मिले हैं। 26 टन गौ मांस से भरा मिला था ट्रक बता दें कि पीएचक्यू (PHQ) के सामने 26 टन गोमांस से भरा ट्रक मिला था। इस मांस को स्लॉटर हाउस से मुंबई भेजने का सर्टिफिकेट नगर निगम ने जारी किया था। निगम के डॉक्टर ने इस मांस को भैंस का बताते हुए इंसानों के उपभोग के लिए फिट माना था।  पड़ताल में सामने आया कि स्लॉटर हाउस में रोज 100 से 150 पशुओं का वध किया जा रहा था। वहीं, निगम के रिकॉर्ड में ह संख्या औसतन 40 भैंसों की थी। 22 दिसंबर को स्लॉटर हाउस संचालक असलम कुरैशी ने भास्कर से बातचीत में खुद स्वीकारा था कि रोज 100 से 150 पशुओं की स्लॉटिंग हो रही है। यानी निगम के रिकॉर्ड और वास्तविक संचालन में 3 गुना से ज्यादा का अंतर था।स्लॉटर हाउस से मांस मुंबई और चेन्नई के रास्ते दुबई समेत खाड़ी देशों तक एक्सपोर्ट किया जा रहा था। हालांकि, नगर निगम प्रशासन को इस सप्लाई चैन की कोई जानकारी नहीं थी। एमआईसी सदस्य (हेल्थ और एसबीएम) आरके सिंह ने कहा, ‘निगम के रिकॉर्ड में हर दिन अधिकतम 40 भैंसों की स्लॉटिंग दर्ज है। मांस कहां और कितना भेजा जा रहा है, यह देखना हमारा काम नहीं है।’ निगम के डॉक्टर रोज दो बार स्लॉटर हाउस की जांच करते थे। शाम को पशुओं की मेडिकल जांच होती। इसके बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता। अगले दिन सप्लाई होने वाले मांस की गुणवत्ता की जांच होती थी। अब पुलिस रिपोर्ट की आड़ में मामला दबाने की कोशिश     जिस 26 टन मांस को मुंबई भेजा गया, उसमें गोमांस की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद पूरा सिस्टम पुलिस की जांच रिपोर्ट की आड़ लेता दिख रहा है। पुलिस कह रही है कि सीसीटीवी फुटेज में सिर्फ भैंसें नजर आ रही हैं, जबकि निगम यह तर्क दे रहा है कि पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की जांच होगी।     पुलिस की जांच रिपोर्ट का मतलब है चार्जशीट, जिसमें कम से कम 3 महीने लगते हैं। यानी तब तक कार्रवाई टालने का रास्ता साफ। ऐसे में सवाल है कि किस रिपोर्ट का इंतजार है?     जब पुलिस की पीएम रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि पहले ही हो चुकी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? मेयर से बोले पार्षद- मान लिया कि सब नियम से हुआ, पर गोमांस का जवाब दें गोमांस मामले में महापौर मालती राय अब एमआईसी सदस्यों और जोन अध्यक्षों को मनाने में जुट गई हैं। उन्होंने सोमवर को एमआईसी सदस्यों और जोन अध्यक्ष पार्षदों को इस मुद्दे पर निगम का साथ देने के लिए कहा। इस पर पार्षदों ने कहा कि माना सबकुछ नियम से हुआ, लेकिन गाय का मांस कैसे जस्टीफाई हो सकता है? इस पर तो जवाब देना ही होगा। अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। हम तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं। नियमों को तिलांजलि: डॉक्टर और तकनीक फेल 1- फिटनेस रिपोर्ट का अभाव: नियम है कि बिना पशु चिकित्सक की जांच और उम्र निर्धारण के किसी पशु को नहीं काटा जाएगा, लेकिन यहां बिना जांच के ही वध का खेल चल रहा था। 2- स्टनिंग और क्रूरता आधुनिक मशीनों और सीसीटीवी की मौजूदगी के बावजूद पशुओं को बिना बेहोश किए और अनावश्यक पीड़ा देकर काटा जा रहा था। 3- अवैध ड्रेसिंग: स्वास्थ्य मानकों के अनुसार जमीन पर मांस का संपर्क प्रतिबंधित है, लेकिन सबूत बताते हैं कि यहां स्वच्छता के मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। सवालों से भाग रहे अधिकारी 1- डॉ. बीपी गौर (पशु चिकित्सक): विवादित सर्टिफिकेट जारी करने के बाद से डॉक्टर ने चुप्पी साध ली है। वे न फोन उठा रहे हैं और न ही दफ्तर में मिल रहे हैं। 2- हर्षित तिवारी (अपर आयुक्त): पशु संबंधी कामकाज संभालने वाले अपर आयुक्त ने सवालों पर फोन काट दिया। स्लॉटर हाउस की नियमावली इनके पास नहीं है। 3- संस्कृति जैन (निगम आयुक्त): भोपाल शहर की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को स्लॉटर हाउस के संचालन की बुनियादी प्रक्रिया तक की जानकारी नहीं है, जिससे प्रबंधन की पोल खुल गई है। असलम पर मेहरबान निगम, 100 करोड़ की जमीन 4 लाख में दी यह मॉडर्न स्लॉटर हाउस करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर बना है, जिसकी बाजार कीमत करीब 100 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। निगम ने यह जमीन कंपनी को सालाना सिर्फ 4 लाख रुपए किराये पर दी थी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, परिसर में बाहरी लोगों की एंट्री प्रतिबंधित थी। संचालन का पूरा नियंत्रण असलम कुरैशी के पास था। सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग भी निगम के बजाय संचालक के पास थी। गोमांस की पुष्टि होते ही तुरंत स्लॉटर हाउस सील कर दिया। आगे की कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट के बाद की जाएगी।’ -मालती राय, मेयर ( नगर निगम भोपाल) गोमांस मामले में आरोपियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। मामले में सख्त कार्रवाई हो।’ -विश्वास सारंग, कैबिनेट मंत्री

इंदौर हाई कोर्ट का आदेश: चाइनीज मांझे वाली पतंग उड़ाने पर नाबालिगों के अभिभावक होंगे जिम्मेदार

 इंदौर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने सोमवार को राज्य सरकार को चीनी मांझे पर लगे प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए. अदालत ने कहा कि यदि कोई नाबालिग प्रतिबंधित चीनी मांझे से पतंग उड़ाते हुए पाया जाता है, तो उसके अभिभावकों को भी कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि जनता के बीच व्यापक प्रचार किया जाए कि चीनी मांझे की बिक्री या उपयोग से, अगर कोई घायल होता है या किसी की मृत्यु होती है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत कार्रवाई की जा सकती है. अदालत ने 11 दिसंबर 2025 को चीनी मांझे से हुई मौतों और हादसों को लेकर स्वतः संज्ञान लिया था. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि चीनी मांझे की बिक्री रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं और हादसों से बचाव के लिए कई एहतियाती उपाय लागू किए जा रहे हैं. सरकार ने यह भी कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे. हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित मांझे की बिक्री या उपयोग करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ BNS, 2023 की धारा 106(1) (आईपीसी की धारा 304-ए) के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है. साथ ही, यदि कोई नाबालिग चीनी नायलॉन धागे का उपयोग करता है, तो उसके अभिभावकों को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा. सुनवाई के दौरान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने अदालत को बताया कि निर्देशों के पालन में प्रशासन जल्द आदेश जारी करेगा, जिन्हें पड़ोसी जिलों में भी तत्काल प्रसारित किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, पिछले डेढ़ महीने में इंदौर में चीनी मांझे से गला कटने की दो अलग-अलग घटनाओं में 16 वर्षीय किशोर और 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो चुकी है. प्रशासन द्वारा प्रतिबंध के बावजूद पतंगबाज प्रतिद्वंद्वियों की पतंग काटने के लिए अब भी इस खतरनाक मांझे का इस्तेमाल कर रहे हैं.

UPI ट्रांजैक्शन ने खोला राज: चेतन बनकर होटल में ठहरे अशरफ, दो आधार कार्ड से हुआ खुलासा

मंदसौर मंदसौर में बस स्टैंड के पास स्थित एक होटल में राजस्थान का रहने वाला अशरफ नाम का युवक पहचान छिपाकर हिंदू युवती के साथ ठहरा था। अशरफ ने अपना नाम चेतन बताया था। आधार कार्ड में भी नाम चेतन था। उसका ये झूठ यूपीआई ट्रांजैक्शन में पकड़ा गया। होटल संचालक अशोक मारू ने भुगतान से जुड़े यूपीआई ट्रांजैक्शन की जांच की तो जिस खाते से 600 की राशि आई थी, वह अशरफ खान नाम से थी। जबकि होटल में दर्ज पहचान हिंदू नाम चेतन प्रकाश की थी। इसी विरोधाभास के चलते होटल संचालक को संदेह हुआ। रात के वक्त जब दोनों होटल लौटे तो होटल संचालक ने उनसे पूछताछ की। इस दौरान युवक के पास से एक और आधार कार्ड मिला, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उसने फर्जी पहचान के जरिए होटल में ठहरने की कोशिश की थी। इसके बाद होटल संचालक ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने उससे पूछताछ की और गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी अशरफ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी अशरफ को गिरफ्तार कर लिया है। हिंदू नाम के आधार पर लिया कमरा पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान अशरफ खान निवासी जैसलमेर (राजस्थान) के रूप में हुई है। वह अपनी हिंदू गर्लफ्रेंड के साथ होटल राज में चेतन प्रकाश नाम के आधार कार्ड के जरिए रुका हुआ था। जांच में आरोपी के पास दो आधार कार्ड मिले। दोनों में फोटो तो एक ही था, लेकिन नाम और पते अलग-अलग दर्ज थे। दोनों आधार कार्ड राजस्थान के बताए जा रहे हैं। लैब टेक्नीशियन की परीक्षा देने आया था बताया जा रहा है कि अशरफ लैब टेक्नीशियन की परीक्षा देने के लिए अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मंदसौर आया था। परीक्षा श्रीजी कॉलेज में थी। इसीलिए दोनों ने सुबह होटल राज में रूम लिया और परीक्षा देने चले गए। युवती राजस्थान के नागौर जिले की रहने वाली बताई जा रही है। दोनों जोधपुर के एक अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के रूप में काम करते हैं। पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को थाने ले जाकर पूछताछ की। पुलिस ने आरोपी अशरफ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि दोनों के परिजन को भी सूचना दे दी गई है। पुलिस पूरे मामले की तफ्तीश कर रही है। धार्मिक पहचान छिपाने की कोशिश शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि युवक को आशंका थी कि मुस्लिम नाम से हिंदू युवती के साथ होटल में ठहरने पर परेशानी हो सकती है। इसलिए उसने हिंदू नाम वाले फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया। हालांकि होटल संचालक ने युवक की इस चालाकी को पकड़ लिया।

भारत ने जो JF-17 गिराया था, पाकिस्तान ने अब इंडोनेशिया से डील की, विमान को ठिकाने लगा रहा है

इस्लामाबाद चीन की मदद से लड़ाकू विमान बना रहा पाकिस्तान अब इसे दूसरे देशों को बेचने के लिए छटपटा रहा है. बांग्लादेश के बाद अब पाकिस्तान JF-17 को लेकर इंडोनेशिया के साथ डील करने वाला है. बताया जा रहा है कि लड़ाकू विमान की खरीद को लेकर इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री और पाकिस्तानी वायुसेना चीफ के बीच एक बैठक हुई है. इस बैठक में JF-17 और किलर ड्रोन को लेकर बातचीत की गई.  ये बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान कई देशों के साथ डिफेंस डील को लेकर बातचीत कर रहा है. हाल ही में बांग्लादेश के एयर चीफ मार्शल ने भी पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की थी, जिसमें JF-17 की डील को लेकर चर्चा हुई थी. इसके साथ ही लीबिया और सूडान की सेना के साथ भी डील को लेकर बातचीत चल रही है. अब इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री सफरी शम्सुद्दीन और पाकिस्तानी वायुसेना के एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात की है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी दी है. रॉयटर्स ने बताया कि इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय और पाकिस्तानी सेना से जुड़े सूत्रों ने इस मुलाकात की पुष्टि की है. सूत्रों ने बताया कि ये बातचीत JF-17 लड़ाकू विमान की बिक्री को लेकर हुई थी. ये एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जिसे पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर बनाया है. ये वही JF-17 है, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने मार गिराया था. रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि बातचीत के दौरान 40 से ज्यादा JF-17 की बिक्री को लेकर चर्चा की गई. एक सूत्र ने ये भी कहा कि इंडोनेशिया की पाकिस्तान की शह पर ड्रोन खरीदने में भी दिलचस्पी है. इंडोनेशिया को क्यों चाहिए JF-17? इंडोनेशिया की वायुसेना के ज्यादातर विमान पुराने हो चुके हैं, इसलिए उसे नए विमानों की जरूरत है. सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान JF-17 जेट और एयर डिफेंस सिस्टम की बिक्री को लेकर चर्चा कर रहा था. रिटायर्ड एयर मार्शल आसिम सुलेमान ने बताया कि इंडोनेशिया की डील पाइपलाइन में है और वह 40 JF-17 खरीद सकता है. पिछले महीने ही इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने दो दिन का पाकिस्तान का दौरा किया था. इस दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर बनाने के साथ-साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना था. इंडोनेशिया ने पिछले कुछ सालों में लड़ाकू विमान के लिए कई ऑर्डर दिए हैं. 2022 में उसने 8.1 अरब डॉलर में फ्रांस से 42 राफेल खरीदने पर डील की थी. पिछले साल तुर्की के साथ 48 KAAN फाइटर जेट को लेकर डील हुई थी. ये सौदे इसलिए हो रहे हैं, ताकि इंडोनेशियाल अपने पुरानी फ्लीट को बदल सके. बताया जा रहा है कि इंडोनेशिया की चीन के साथ J-10 फाइटर जेट और अमेरिका के साथ F-15EX जेट खरीदने पर भी बात चल रही है. डिफेंस डील कर रहा पाकिस्तान पाकिस्तान कई देशों के साथ डिफेंस डील कर रहा है. पाकिस्तान अपने JF-17 को बेचने की भरपूर कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान, बांग्लादेश के साथ भी एक डिफेंस डील करना चाहता है, जिसके तहत मुशाक ट्रेनिंग जेट और JF-17 की बिक्री शामिल है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब के साथ भी एक डील के लिए बातचीत कर रहा है, जिसकी कीमत 2 से 4 अरब डॉलर हो सकती है. अगर ये समझौता होता है तो पाकिस्तान को सऊदी से जो लोन मिला है, उसके बदले में उसे मिलिट्री सप्लाई की जाएगी.  

KGMU धर्मांतरण केस में नया मोड़, PFI लिंक, विदेशी संपर्क और दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े अहम सबूत मिले

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़े लव जिहाद, यौन शोषण और धर्मांतरण मामले की जांच गंभीर हो गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर केस की कमान स्पेशल टास्क फोर्स को सौंप दी गई है. STF की जांच शुरू होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बनी आंतरिक जांच समिति को भंग कर दिया गया है.  फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अब तक की जांच रिपोर्ट कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद को सौंपते हुए आगे की जांच STF से कराने की सिफारिश की थी. KGMU की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी. उन्होंने 9 जनवरी को महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के दौरे के दौरान हुए बवाल से मुख्यमंत्री को अवगत कराया. इसके साथ ही विश्वविद्यालय में की गई कार्रवाई और जांच की स्थिति भी बताई. मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. इस केस का सबसे अहम किरदार आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज पुलिस की गिरफ्त में है. 50 हजार के इनामी रमीज को 18 दिन की फरारी के बाद लखनऊ से गिरफ्तार किया गया. उससे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि KGMU में चल रहा धर्मांतरण नेटवर्क सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार कई लोगों से जुड़े हो सकते हैं. यहां की दो महिला स्टाफ और एक डॉक्टर नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं. आरोप है कि मिलकर धर्मांतरण का रैकेट चलाया जा रहा था. यह भी सामने आया है कि कुछ महिलाओं ने पहले ही इसकी शिकायत की थी. उस वक्त विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया था. अब कुछ विभागाध्यक्षों की भूमिका भी एजेंसियों के रडार पर है. रमीज की गिरफ्तारी के बाद उसके PFI कनेक्शन ने जांच को नई दिशा दी है. पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि फरारी के दौरान रमीज प्रतिबंधित संगठन PFI के कई पदाधिकारियों के संपर्क में था. उसने PFI से कानूनी मदद लेने की कोशिश भी की थी. इसके सबूत मोबाइल डेटा से मिले हैं. रमीज के पिता सलीमुद्दीन के भी PFI से पुराने और गहरे संबंध बताए जा रहे हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि PFI ने सलीमुद्दीन को दो बार सम्मानित किया था. सबसे चौंकाने वाला खुलासा दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन को लेकर हुआ है. पूछताछ में रमीज ने स्वीकार किया है कि उसका संपर्क दिल्ली ब्लास्ट केस की आरोपी डॉक्टर शाहीन से था.  शाहीन को पहले ही दिल्ली ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है. रमीज ने बताया कि वह डॉक्टरों की कॉन्फ्रेंस में उससे मिला था. फरारी के दौरान शाहीन बाग भी गया था. पुलिस पहले ही रमीज और डॉक्टर शाहीन के संबंधों की जानकारी ATS को दे चुकी थी. इसी इनपुट के बाद ATS ने केस में सक्रियता बढ़ा दी है. रमीज के पास से बरामद फोन के डेटा को रिकवर के लिए भेजा गया है.  जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे PFI नेटवर्क, विदेशी संपर्क और संभावित आतंकी लिंक की कई परतें खुल सकती हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या KGMU में मेडिकल पेशे की आड़ में धर्मांतरण का कोई बड़ा नेटवर्क चल रहा था. क्या दिल्ली ब्लास्ट जैसे आतंकी मामलों से इसके तार जुड़े हैं. और इस पूरे नेटवर्क का असली सरगना कौन है?

मध्य प्रदेश बोर्ड: 10वीं और 12वीं परीक्षा की तिथियों में बदलाव, देखें नई डेट शीट

भोपाल  मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने 2025-26 सत्र की हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) बोर्ड परीक्षाओं के टाइम टेबल में बड़ा बदलाव किया है.मंडल ने आधिकारिक नोटिस जारी कर कुछ विषयों की परीक्षा तिथियां आगे बढ़ा दी हैं. ये बदलाव छात्रों के हित में किया गया है. बाकी सभी विषयों का शेड्यूल पहले जैसा ही रहेगा. सभी परीक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होंगी.मंडल ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वो संशोधित टाइम टेबल छात्रों तक पहुंचाएं और सूचना पटल पर लगाएं. छात्रों से अपील की गई है कि वो सिर्फ ऑफिशियल वेबसाइट www.mpbse.nic.in पर उपलब्ध टाइम टेबल को ही मानें और अफवाहों से बचें. 10वीं और 12वीं में किन विषयों की तारीखें बदलीं? 10वीं कक्षा का हिंदी पेपर पहले 11 फरवरी (बुधवार)को होना था, लेकिन अब इसे 6 मार्च (शुक्रवार)को शिफ्ट कर दिया गया है. 12वीं कक्षा में तीन मुख्य विषयों की तारीखें बदली गई हैं: – उर्दू और मराठी का पेपर पहले 9 फरवरी (सोमवार)को था, अब 6 मार्च (शुक्रवार)को होगा. – हिंदी का पेपर पहले 7 फरवरी (शनिवार)को था, अब 7 मार्च (शनिवार)को होगा. बाकी सभी विषयों की परीक्षा पहले निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होगी.ये बदलाव सभी प्रकार के छात्रों पर लागू होगा.चाहे नियमित छात्र हों,स्वाध्यायी हों या दिव्यांग छात्र. परीक्षा केंद्र पर पहुंचने और नियमों की सख्ती सभी छात्रों को परीक्षा केंद्र पर सुबह 8:00 बजे तक पहुंचना अनिवार्य है. सुबह 8:30 बजे तक परीक्षा कक्ष में अपना स्थान ग्रहण करना जरूरी है. 8:45 बजे के बाद किसी भी छात्र को कक्ष में प्रवेश नहीं मिलेगा. 8:50 बजे ओएमआर शीट वितरित होगी. 8:55 बजे प्रश्न पत्र उपलब्ध कराया जाएगा. प्रैक्टिकल परीक्षाओं का शेड्यूल रेगुलर छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षाएं उनके स्कूलों में 10 फरवरी 2026 से 10 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएंगी. छात्रों के लिए जरूरी सलाह मंडल ने छात्रों से कहा है कि वो संशोधित तारीखों के अनुसार अपनी पढ़ाई और तैयारी को व्यवस्थित करें. स्कूल प्रशासन और अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि सभी छात्रों को समय पर सूचना मिले. ऑफिशियल वेबसाइट पर ही नवीनतम अपडेट चेक करें.

मकर संक्रांति और खिचड़ी का गहरा संबंध: परंपरा, आस्था और ज्योतिष का रहस्य

हर साल माघ माह में सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. इस साल 14 जनवरी को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे. ऐसे में इस साल ये पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा. पूरे देश में इस त्योहार को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान भी किया जाता है. इस त्योहार को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है. उत्तर भारत के कई राज्यों में इस दिन खचड़ी बनाई और खाई जाती है. साथ ही इसका दान भी किया जाता है. ये एक पुरानी परंपरा है. यही कारण है कि मकर संक्रांति का नाम आते ही खिचड़ी याद आ जाती है, लेकिन इस परंपरा के पीछे सिर्फ स्वाद भर नहीं है, बल्कि गहरी आस्था और सामाजिक भावना है. इसका ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व भी है. आइए जानते हैं. ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इसे एक शुभ परिवर्तन माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन जो भी दान किया जाता है, उससे शुभ फल प्राप्त होते हैं. खिचड़ी में पड़ने वाला चावल, दाल और घी सात्विक आहार है. ये सूर्य को अर्पित करने के लिए उपयुक्त माना जाता है. इस दिन खिचड़ी का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं. जीवन में स्थिरता आती है. यही वजह है कि इस दिन स्नान के बाद खिचड़ी का दान कर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है. ये भी है एक धार्मिक मान्यता धार्मिक कथाओं में मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा बाबा गोरखनाथ से जोड़ी जाती है. बताया जाता है कि एक समय कठिन हालातों और आक्रमणों की वजह से योगी और साधु नियमित रूप से भोजन नहीं बना पाते थे. ऐसे में बाबा गोरखनाथ ने सभी को सलाह दी कि दाल, चावल और मौसमी सब्जियों को एक साथ पकाया जाए. यह भोजन कम समय में बन जाता था और लंबे समय तक उर्जा देता था. धीरे धीरे इस साधारण और पौष्टिक भोजन की चर्चा साधु संतों से समाज तक पहुंची. इसी के बाद इसे मकर संक्रांति के पर्व से जोड़ दिया गया. तभी से इस दिन खिचड़ी बनाना और खाना शुभ कहा जाने लगा.

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: कॉन्ट्रेक्ट पर काम करने वालों को सरकारी कर्मचारियों के समान अधिकार नहीं

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी एजेंसी के जरिए अनुबंध पर नौकरी पाने वाले कर्मचारी सरकारी महकमों/ निकायों के नियमित कर्मचारियों के बराबर समानता का दावा नहीं कर सकते। शीर्ष अदालत ने सरकारी महकमों/निकायों के नियमित नौकरी को सार्वजनिक संपत्ति बताया। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि नियमित नियुक्तियां पारदर्शी प्रक्रिया से होती हैं, जिससे सभी योग्य उम्मीदवारों को बराबर मौका मिलता है। पीठ ने कहा कि किसी एजेंसी/ठेकेदार के जरिए नौकरी देना उसकी मर्जी पर छोड़ दिया जाता है, जिससे कानून में दोनों श्रेणी पूरी तरह से अलग हो जाती हैं। शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा 2018 में पारित फैसला रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने किसी तीसरे पक्ष (ठेकेदार) द्वारा नगर निगम के लिए 1994 में अनुबंध पर रखे गए कर्मियों को नियमित कर्मचारी के समान वेतन एवं भत्ता से संबंधित लाभ देने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक नियमित और अनुबंध कर्मचारियों के बीच फर्क नहीं होंगे, तो अलग-अलग नियुक्ति तरीकों (स्थायी, अनुबंध और तदर्थ) के मूलभूत आधार अपनी पवित्रता खो देंगे। पीठ ने कहा कि कानून में इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती क्योंकि किसी राज्य प्राधिकार के तहत नौकरी एक सार्वजनिक संपत्ति है और देश के हर नागरिक को इसके लिए आवेदन करने का हक है। शीर्ष अदालत ने कहा कि नियमित नियुक्ति में सुरक्षा उपाय इसलिए हैं ताकि कोई पक्षपात या अन्य बाहरी विचार न हो, जहां लोगों को, केवल योग्यता के आधार पर, कानून में ज्ञात पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती किया जाता है। यह था मामला सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में नंदयाल नगरपालिका परिषद की अपील पर यह फैसला दिया है। अपील में हाईकोर्ट के 2018 के फैसले को चुनौती दी गई थी। यह मामला ठेकेदार जरिए नौकरी पर रखे गए सफाई कर्मचारियों से जुड़ा था और इस समय-समय पर ठेकेदार भी बदलता रहा।

खुशखबरी: प्रदेश के लाखों शिक्षकों के वेतन में हर महीने 5 हजार तक बढ़ोतरी, कैबिनेट बैठक में आज फैसला

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज सुबह 11 बजे मंत्रालय में मोहन कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी। इस बैठक में पहली बार ई-कैबिनेट एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा जिसके जरिए सभी प्रस्ताव डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत किए जाएंगे। शिक्षकों की सैलरी बढ़ाने पर मुहर संभव  आज की कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा कर उन्हें मंजूरी दी जा सकती है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश के शिक्षकों को चतुर्थ समयमान वेतनमान देने के प्रस्ताव को कैबिनेट की स्वीकृति मिल सकती है। इस फैसले से प्रदेश के करीब 1 लाख 25 हजार शिक्षकों को लाभ होगा और उनके वेतन में हर माह 4 से 5 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है। पहली बार होगा ई-कैबिनेट ऐप का इस्तेमाल   इसके अलावा जल संसाधन विभाग की मालवा क्षेत्र से जुड़ी दो महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है, जिससे क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं प्रदेश में साइंटिफिक रिसर्च को प्रोत्साहित करने से जुड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा के बाद निर्णय लिया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस पहल से राज्य में शोध और नवाचार को नई दिशा मिलेगी। 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षक होंगे लाभान्वित शिक्षा विभाग के अनुसार, 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके लगभग 1.25 लाख शिक्षक वर्तमान में तृतीय समयमान वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं और चतुर्थ समयमान की मांग कर रहे हैं। कई शिक्षक ऐसे हैं, जो पिछले 5 से 8 वर्षों से इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। वर्तमान में चतुर्थ समयमान वेतनमान का लाभ केवल प्राचार्य और व्याख्याताओं को ही मिल रहा है। 5 सितंबर को की गई थी घोषणा गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) के अवसर पर शिक्षकों को चतुर्थ समयमान वेतनमान देने की घोषणा की थी। अब इस घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए आज की कैबिनेट बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। शिक्षक संगठनों को फैसले का इंतजार शासकीय शिक्षक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो शिक्षकों को हर महीने सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और वर्षों से लंबित मांग का समाधान होगा। शिक्षकों और कर्मचारियों की निगाहें कैबिनेट पर आज होने वाली मोहन कैबिनेट की बैठक को लेकर प्रदेशभर के शिक्षक और कर्मचारी वर्ग आशान्वित हैं। यदि चतुर्थ समयमान वेतनमान को मंजूरी मिलती है, तो यह फैसला शिक्षकों के लिए नई आर्थिक राहत लेकर आएगा और सरकार के प्रति विश्वास को और मजबूत करेगा।

बांग्लादेश का बड़ा दावा: ‘हम पाकिस्तान में खेलना चाहते थे’, ICC पर उठाए सवाल, सुरक्षा नाकामी का खंडन

  नई दिल्ली इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने सोमवार को संकेत दिए कि वह बांग्लादेश की उस मांग को स्वीकार करने के मूड में नहीं है, जिसमें टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारत में होने वाले उसके मैचों का वेन्यू बदलने की बात कही गई थी. आईसीसी द्वारा कराई गई सुरक्षा समीक्षा रिपोर्ट में बांग्लादेश टीम के लिए खतरे के स्तर को 'कम' बताया गया है. आईसीसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, वर्ल्ड बॉडी की रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट में ऐसा कोई ठोस या सीधा खतरा सामने नहीं आया है, जिसके आधार पर यह कहा जाए कि बांग्लादेश टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकती. यह टूर्नामेंट 7 फरवरी से शुरू होना है और बांग्लादेश को लीग स्टेज में भारत में चार मुकाबले खेलने हैं. आईसीसी से मिल सकता है बांग्लादेश को झटका आईसीसी सूत्र ने पीटीआई से नाम न छापने की शर्त पर कहा, 'यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा की गई आईसीसी की स्वतंत्र जांच में यह निकला है कि बांग्लादेश भारत में अपने तय मैच बिना किसी खतरे के खेल सकता है.' सूत्र ने आगे कहा कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारत में सुरक्षा जोखिम को कम से मध्यम (Low to Moderate) आंका गया है, जो दुनिया के कई बड़े खेल आयोजनों के समान ही है. बांग्लादेश की रिपोर्ट को भी किया खारिज आईसीसी की रिपोर्ट ने बांग्लादेश के खेल मंत्रालय के सलाहकार आसिफ नज़रुल के उस दावे को भी खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुस्तफिज़ुर रहमान की टीम में मौजूदगी से सुरक्षा खतरा बढ़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत के किसी भी वेन्यू पर बांग्लादेश टीम या अधिकारियों को लेकर कोई प्रत्यक्ष खतरा नहीं पाया गया है. आईसीसी सूत्र के मुताबिक, 'पेशेवर सलाह के आधार पर कोलकाता और मुंबई में होने वाले बांग्लादेश के मुकाबलों को लेकर जोखिम कम से मध्यम स्तर का है और ऐसा कोई संकेत नहीं है जिसे मौजूदा सुरक्षा इंतजामों के जरिए संभाला न जा सके.' आईसीसी सूत्रों का कहना है कि मौजूदा शेड्यूल में बदलाव की संभावना बेहद कम है. सूत्र ने कहा, 'आईसीसी को बीसीसीआई और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर तैयार की जा रही सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा है. भारत का रिकॉर्ड बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को सुरक्षित तरीके से कराने का रहा है.' हम पाकिस्तान में खेलना चाहते हैं टी20 वर्ल्ड कप बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने एक बार फिर दोहराया है कि बांग्लादेश की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम टी20 वर्ल्ड कप 2026 खेलने के लिए भारत नहीं जाएगी. सोमवार, 12 जनवरी को एक कार्यक्रम के दौरान नजरुल ने दावा किया कि भारत में बांग्लादेश के खिलाफ माहौल बेहद नकारात्मक है, ऐसे में टीम को वहां भेजना संभव नहीं है. आईसीसी पर भी बोला हमला आसिफ नजरुल ने इस दौरान इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर आईसीसी वाकई एक 'वैश्विक संगठन' है, तो उसे बांग्लादेश को भारत के बाहर अपने मैच खेलने की अनुमति देनी चाहिए. खेल सलाहकार ने कहा कि बांग्लादेश श्रीलंका, पाकिस्तान या संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अपने मैच खेलने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. क्या बोले बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नज़रुल ने कहा, 'भारत में मौजूदा बेहद सांप्रदायिक हालात और बांग्लादेश विरोधी माहौल को देखते हुए, खासकर पिछले 16 महीनों से भारत में चल रहे बांग्लादेश विरोधी अभियान के कारण, हमारे लिए भारत में क्रिकेट खेलना असंभव है.' उन्होंने आगे कहा, 'मुस्तफिज़ुर की घटना वह इस बात का पुख्ता सबूत है. हमारा मानना है कि क्रिकेट पर किसी एक देश का एकाधिकार नहीं होना चाहिए. किसी टूर्नामेंट या खेल का भविष्य सिर्फ बाजार प्रबंधन के आधार पर तय नहीं किया जा सकता. अगर आईसीसी वास्तव में एक वैश्विक संस्था है और वह केवल भारत के निर्देशों पर नहीं चलती, तो उसे हमें श्रीलंका में टी20 वर्ल्ड कप खेलने का मौका देना चाहिए. हम इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेंगे.' गौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) द्वारा मुस्तफिज़ुर रहमान का इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) कॉन्ट्रैक्ट खत्म किए जाने के बाद बांग्लादेश ने अपने टी20 वर्ल्ड कप मैचों के वेन्यू बदलने की मांग की थी. इसे भारत की कार्रवाई के जवाब में उठाया गया कदम माना गया. इसके बाद बांग्लादेश ने आईपीएल के प्रसारण पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगा दिया और आईसीसी को पत्र लिखकर अपने वर्ल्ड कप मैच भारत से बाहर कराने का अनुरोध किया. पाकिस्तान या UAE में खेलने को तैयार बांग्लादेश नज़रुल ने यह भी दावा किया कि आईसीसी कोलकाता और मुंबई से मैच हटाने के लिए तैयार है, लेकिन नए वेन्यू भारत के ही अन्य शहर बताए जा रहे हैं, जो बांग्लादेश को स्वीकार नहीं हैं. उन्होंने कहा, 'वे दो वेन्यू का प्रस्ताव दे रहे हैं, लेकिन दोनों भारत में हैं. भारत का मतलब भारत ही है. हम भारत की बात कर रहे हैं. हमने कोलकाता का ज़िक्र किया था, उसे श्रीलंका में शिफ्ट करना कोई समस्या नहीं है. अगर पाकिस्तान हमारे मैचों की मेज़बानी करना चाहता है तो कोई दिक्कत नहीं, यूएई में करवा दीजिए, कोई दिक्कत नहीं.' हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि खुद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आईसीसी ने अब तक उनके वेन्यू बदलने के अनुरोध पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है.