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जलरंगों में साकार होती संवेदनाएं कल्पना से परे- दिया कुमारी

जयपुर. कला जगत में शनिवार (17 जनवरी) का दिन बेहद खास रहा जब प्रदेश की उपमुख्यमंत्री  तथा पर्यटन, कला एवं संस्कृति मंत्री दिया कुमारी ने जवाहर कला केंद्र की अलंकार आर्ट गैलरी में सुप्रसिद्ध जलरंग कलाकार डॉ. सुषमा महाजन के कला चित्रों से सुसज्जित तीन दिवसीय “मेलोडी ऑफ़ कलर्स”  एकल प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन किया। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने यहां प्रदर्शित डॉ. सुषमा महाजन की 60 जलरंग कृतियों को निहारने और उनका बारीकी से अवलोकन करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि "डॉ. सुषमा महाजन द्वारा तैयार ये कला कृतियां निश्चित ही उत्कृष्ट हैं, अद्भुत है। उन्होंने कहा कि "ये जलरंगों में साकार होती संवेदनाएं कल्पना से परे हैं" उपमुख्यमंत्री दिया ने उत्कृष्ट कला कृतियों से अत्यंत प्रभावित भाव से कहा " डॉ. सुषमा द्वारा ये जल रंग कृतियां बहुत बारीकी से ऊकेरी गई हैं, जिनमें वाइब्रेन्ट रंग और उनकी कलात्मकता मानवीय संवेदनाओं का प्रतिनिधित्व कर रहें हैं। दिया कुमारी ने कहा कि डॉ. सुषमा महाजन वास्तव में जल रंग कला कृतियों की सिद्धस्त कलाकार हैं, वे इस वाटर कलर आर्ट की मास्टर हैं। जल रंग में महारथ रखने वाली डॉ सुषमा की यह कला देश-प्रदेश और समूचे सृजन जगत में नायाब है, जो देश और दुनिया में राजस्थान की कला संस्कृति के परचम को फहरा रही है। उल्लेखनीय है कि इस तीन दिवसीय प्रदर्शनी का अवलोकन 19 जनवरी तक कला प्रेमी प्रतिदिन प्रातः 11:00 बजे से सायं 7:30 बजे तक कर सकेंगे। इस प्रदर्शनी में लगभग 60 जलरंग कृतियां प्रदर्शित की गईं हैं। इनमें 22 नई कृतियां विशेष रूप से इस प्रदर्शनी के लिए तैयार की गई हैं। साथ ही, पेरिस, जयपुर और नई दिल्ली में पूर्व में प्रदर्शित चुनिंदा कृतियों को भी इसमें सम्मिलित किया गया।

HEC सरकारी कंपनी पर 280 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया

रांची. झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) पर बकायेदारों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। सबसे बड़ा बकायेदार हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (एचईसी) है, जो हर महीने 80 से 90 लाख रुपये की बिजली खपत करने के बावजूद बिजली बिल के एवज में एक रुपये का भी भुगतान नहीं कर रहा है। स्थिति यह है कि एचईसी पर जेबीवीएनएल का बकाया 280 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और अगर यही रफ्तार रही तो यह राशि जल्द ही 350 करोड़ रुपये के पार चली जाएगी। इस गंभीर मुद्दे पर शुक्रवार को रांची एरिया बोर्ड की बैठक में गहरी चिंता जताई गई। बैठक में एरिया बोर्ड के महाप्रबंधक मनमोहन कुमार ने बताया कि इतनी बड़ी राशि को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह सीधे तौर पर बिजली वितरण व्यवस्था को कमजोर कर रही है। उन्होंने बताया कि बैठक में केवल एक ही एजेंडा पर चर्चा हुई है, बड़े बकायेदारों से बिजली बिल वसूला जाए, नहीं तो कनेक्शन काटा जाए। बताया गया कि पिछले चार महीनों से सरकार की ओर से 200 यूनिट फ्री बिजली के एवज में जेबीवीएनएल को भुगतान नहीं मिल रहा है, जिसके कारण एनटीपीसी और डीवीसी को भुगतान अटक गया है। निगम पर एनटीपीसी का करीब 450 करोड़ और डीवीसी का लगभग 300 करोड़ रुपये बकाया है। बैठक में रांची एरिया बोर्ड के सभी कार्यपालक अभियंता शामिल हुए। सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अब रिलेशन मेंटेन करने के बजाय बकायेदारों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करें और जरूरत पड़े तो बिजली कनेक्शन काटें। रिंग रोड के अंदर 90 हजार हाई वोल्टेज कंज्यूमर मौजूद, जल्द होगा वसूली इस मौके पर जीएम मनमोहन कुमार ने कहा कि निर्बाध बिजली आपूर्ति तभी संभव है जब उपभोक्ता समय पर बिजली बिल का भुगतान करें। उन्होंने कहा कि जैसे निगम की जिम्मेदारी लगातार बिजली देने की है, वैसे ही उपभोक्ताओं की भी जिम्मेदारी है कि वे समय पर बिलें। उन्होंने कहा कि रांची रिंग रोड के अंदर हाई वोल्टेज कंज्यूमर की संख्या 90 हजार है, जिससे वसूली के लिए 21 से 23 जनवरी तक योजना बनाकर वसूली किया जाएगा। सबसे पहले वेस्ट डिविजन में वसूली के लिए कार्रवाई होगी, अंत में कोकर डिविजन में वसूली होगी। उन्होंने कहा कि कई अन मीटर और डिफेक्टिव मीटर के भी मामले सामने आए है, इसकी जांच कर इसे ठीक किया जाए।

किसानों को हर क्षेत्र में उन्नत एवं खुशहाल बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर. प्रदेश में आयोजित होने वाली ‘ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम)-2026’ से पूर्व गिरदावर सर्किल स्तर पर 23 जनवरी (बसंत पंचमी) से विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट-2026 के संबंध में आयोजित समीक्षा बैठक में इस संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मीट में अधिक से अधिक कृषकों और पशुपालकों की सहभागिता सुनिश्चित करने और उन्हें धरातल पर विभागीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए ये शिविर महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।  शर्मा ने कहा कि किसानों के लिए बसंत पंचमी का विशेष महत्व है क्योंकि यह रबी फसलों की कटाई के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है, जो अच्छी पैदावार और समृद्धि की उम्मीद जगाती है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 22 जनवरी को ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन कर ग्रामीणों को शिविरों के आयोजन के संबंध में जानकारी दी जाए।  गिरदावर सर्किल स्तर आयोजित होंगे शिविर— प्रदेश में गिरदावर सर्किल स्तर पर इन शिविरों का आयोजन 23, 24, 25 व 31 जनवरी तथा 1, 5, 6, 7 व 9 फरवरी को किया जाएगा। शिविरों में विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम-2025 (वीबी-जी राम जी) के तहत गांवों में आवश्यक विकास कार्यों के प्रस्ताव लेने के साथ ही सॉइल हेल्थ कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, मंगला पशु बीमा योजना के तहत पॉलिसी वितरण, पॉलीहाउस की स्वीकृति, पशु टीकाकरण सहित कृषि एवं उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, डेयरी आदि से संबंधित विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को हर क्षेत्र में उन्नत एवं खुशहाल बनाने के लिए ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट-2026 का आयोजन करने जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविरों के सफल आयोजन के लिए कृषि, उद्यानिकी, डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, सिंचाई सहित सभी संबंधित विभाग समन्वय स्थापित कर कृषकों एवं पशुपालकों सहित ग्रामीणों को विभागीय योजनाओं का लाभ पहुंचाएं।  देश-विदेश के कृषक एवं विशेषज्ञ होंगे शामिल — मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मीट के राज्य स्तरीय आयोजन में देश-विदेश के किसान, पशुपालक हिस्सा लेंगे। साथ ही, कृषि एवं पशुपालन की उन्नत तकनीक साझा करने के लिए देश-विदेश से विभिन्न प्रदर्शक फर्म भी आएंगी। कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों का भी ग्राम-2026 में   सम्मान किया जाए। साथ ही, देश-विदेश में उन्नत कृषि, जल प्रबंधन, फसल विविधीकरण जैसे नवाचारों को उपयोग में लाने वाले कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिकों तथा तकनीकी जानकारों को भी आमंत्रित किया जाएगा। श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आयोजन को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे ग्रामीण स्तर पर किसानों को कार्यक्रम एवं योजनाओं की जानकारी मिल सके। बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव जल संसाधन अभय कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय अखिल अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग शिखर अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव ग्रामीण विकास श्रेया गुहा सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे। 

बिहार पुलिस 50 एडवांस ड्रोन से यातायात और भीड़ करेगी कण्ट्रोल

पटना. बिहार पुलिस अब कानून-व्यवस्था और यातायात नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है। राज्य में पहली बार बिहार पुलिस की एक अलग ड्रोन यूनिट का गठन किया जाएगा। इस यूनिट का मुख्य उद्देश्य भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और यातायात कण्ट्रोल करेगी। एडीजी (आधुनिकीकरण) सुधांशु कुमार ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ड्रोन यूनिट के गठन से पुलिसिंग अधिक प्रभावी, तेज और तकनीक आधारित बनेगी। ड्रोन यूनिट का गठन, 50 आधुनिक ड्रोन खरीदेंगे एडीजी सुधांशु कुमार के अनुसार, इस यूनिट के लिए कुल 50 आधुनिक ड्रोन खरीदे जाएंगे, जिन पर लगभग 25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इनमें से 40 ड्रोन राज्य के विभिन्न पुलिस जिलों को दिए जाएंगे, जबकि 10 ड्रोन विशेष कार्यों के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को मिलेंगे। इन ड्रोन की खरीद केंद्र सरकार की ASUMP (असिस्टेंस टू स्टेट्स एंड ड्यूटीज फॉर मॉडर्नाइजेशन ऑफ पुलिस) योजना के तहत की जा रही है। उम्मीद है कि यह ड्रोन यूनिट मार्च तक पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी। निगरानी में होगा ड्रोन का प्रमुख उपयोग ड्रोन तकनीक का एक प्रमुख उपयोग यातायात निगरानी में होगा। एडीजी ने बताया कि ड्रोन कैमरों की मदद से बिना हेलमेट वाहन चलाने, गलत लेन में ड्राइविंग करने, ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने और जाम लगाने जैसी स्थितियों की पहचान की जाएगी। इसके बाद संबंधित वाहन मालिकों के खिलाफ ऑनलाइन चालान की कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ड्रोन यूनिट बड़े आयोजनों, त्योहारों, वीआईपी मूवमेंट और संवेदनशील इलाकों में भीड़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऊंचाई से पूरे क्षेत्र की लाइव निगरानी संभव होगी, जिससे स्थिति का तुरंत आकलन कर पुलिस बल की प्रभावी तैनाती की जा सकेगी। अपराधियों पर होगी सख्त निगरानी STF को दिए जाने वाले ड्रोन का इस्तेमाल खास तौर पर दियारा क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों में सक्रिय अपराधियों की निगरानी के लिए किया जाएगा। एडीजी ने कहा कि, इन इलाकों में पुलिस की भौतिक पहुंच सीमित रहती है, लेकिन ड्रोन के जरिए अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा। ड्रोन यूनिट के गठन से बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। इससे अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

इंडोनेशिया का रक्षा पैंतरा: भारत से ब्रह्मोस और पाकिस्तान से JF-17, मुस्लिम देशों में डिमांड में तेजी

नई दिल्ली हाल के दिनों में पाकिस्तान के JF-17 थंडर फाइटर जेट्स की मांग मुस्लिम देशों में तेजी से बढ़ रही है. यह जेट पाकिस्तान और चीन द्वारा मिलकर बनाया गया है। लीबिया के साथ 4 अरब डॉलर का सौदा, सूडान के साथ 1.5 अरब डॉलर का करार और सऊदी अरब के साथ 4 अरब डॉलर की बातचीत चल रही है. इसके अलावा बांग्लादेश, अजरबैजान और इंडोनेशिया जैसे देश भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि इतनी जल्दी क्यों? विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का प्रभाव कम हो रहा है और यह उसका असर है.  JF-17 जेट की क्यों हो रही है इसकी बिक्री? JF-17 थंडर एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जिसे पाकिस्तान की पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) और चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री ग्रुप ने साथ मिलकर विकसित किया है. यह जेट सस्ता, रखरखाव में आसान और आधुनिक हथियारों से लैस है. पाकिस्तान इसे 'मुस्लिम दुनिया' के आधे हिस्से को बेचने की कोशिश कर रहा है.     लीबिया का सौदा: 4 अरब डॉलर में JF-17 जेट्स खरीदने का समझौता.     सूडान का करार: 1.5 अरब डॉलर का डील.     सऊदी अरब की बातचीत: 4 अरब डॉलर की संभावित डील.     अन्य देशों की रुचि: बांग्लादेश, अजरबैजान और इंडोनेशिया भी JF-17 खरीदने पर विचार कर रहे हैं. ये सौदे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद हैं. चीन की हथियार निर्यात रणनीति को मजबूत करते हैं. अमेरिका का प्रभाव क्यों कम हो रहा है? विशेषज्ञों के अनुसार, ये सौदे अमेरिका के घटते प्रभाव को दिखाते हैं. पहले सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश अमेरिकी सुरक्षा प्रणाली पर निर्भर थे. लेकिन अब वे विकल्प तलाश रहे हैं. चीनी जेट्स, पाकिस्तानी उत्पादन लाइन और वैकल्पिक हथियार सप्लाई चेन से अमेरिका के दबाव के पॉइंट कम हो जाते हैं. अगर अमेरिका सख्त कदम उठाता है, तो ये देश चीन और पाकिस्तान की तरफ और ज्यादा झुक सकते हैं. इसी वजह से अमेरिका संयम बरत रहा है. कूटनीति पर जोर दे रहा है. एक उदाहरण है ट्रंप प्रशासन का ईरान पर हमला न करने का फैसला, जिसमें खाड़ी देशों का दबाव काम आया. यह पूर्व और पश्चिम के बीच क्षेत्रीय प्रभाव की लड़ाई का हिस्सा है. इंडोनेशिया का मामला: JF-17 की रुचि और ब्रह्मोस सौदा भारत के लिए सबसे चिंता की बात इंडोनेशिया है. इंडोनेशिया भारत से 450 मिलियन डॉलर का ब्रह्मोस मिसाइल सौदा अंतिम चरण में है, लेकिन साथ ही वह पाकिस्तान से JF-17 जेट्स खरीदने पर विचार कर रहा है. पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में इंडोनेशियाई रक्षा मंत्री सजाफरी सजामसोद्दीन और पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू के बीच बैठक हुई. पाकिस्तान ने 40 JF-17 जेट्स की पेशकश की. इंडोनेशिया पाकिस्तानी कॉम्बैट ड्रोन भी खरीदने पर सोच रहा है. भारत इंडोनेशिया को दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ महत्वपूर्ण साझेदार मानता है. ऐसे में पाकिस्तान और चीन से जुड़े प्लेटफॉर्म खरीदना भारत के लिए चिंता का विषय है. इससे द्विपक्षीय विश्वास कम हो सकता है. क्षेत्रीय सुरक्षा जटिल हो सकती है. बांग्लादेश भी पाकिस्तान से JF-17 पर बात कर रहा है, जो क्षेत्र में पाकिस्तान की बढ़ती पहुंच दिखाता है. ब्रह्मोस मिसाइल क्यों है महत्वपूर्ण? ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे भारत और रूस ने मिलकर बनाया है. इसकी रेंज 300 किमी है. स्पीड मैक 3 से ज्यादा. यह रैमजेट इंजन से चलती है. फायर-एंड-फॉरगेट सिस्टम है, मतलब लॉन्च करने के बाद खुद टारगेट को हिट करती है. पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान ब्रह्मोस ने अहम भूमिका निभाई. ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने Su-30MKI जेट्स से 15 ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं. इनसे पाकिस्तान के 12 में से 11 प्रमुख एयरबेस (जैसे चकलाला, रफिकी, सरगोधा आदि) को नुकसान पहुंचा. रडार, कमांड सेंटर, गोला-बारूद डिपो और रनवे तबाह हो गए. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने माना कि हमला अप्रत्याशित था. यह मिसाइल भारत की आक्रामक रणनीति का गेम-चेंजर है. इंडोनेशिया इसे खरीदकर अपनी समुद्री रक्षा मजबूत करना चाहता है, खासकर नतुना सागर में. फिलीपींस ने 2022 में 375 मिलियन डॉलर में ब्रह्मोस खरीदा और इससे दक्षिण चीन सागर में अपनी स्थिति मजबूत की. भारत की चिंता और आगे क्या? भारत के रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि इंडोनेशिया का JF-17 पर विचार ब्रह्मोस सौदे के बीच में गलत संकेत देता है. इससे साझेदारी पर असर पड़ सकता है. नवंबर 2023 में भारत-इंडोनेशिया रक्षा मंत्रियों की बैठक में ब्रह्मोस पर प्रगति हुई. सौदा लगभग पूरा है, सिर्फ रूस की मंजूरी बाकी है (रूस की ब्रह्मोस में 49.5% हिस्सेदारी है). इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो 2025 के गणतंत्र दिवस पर भारत आए थे, तब ब्रह्मोस पर चर्चा हुई. इंडोनेशिया को ब्रह्मोस से अपनी सैन्य आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी. लेकिन JF-17 की खरीद भारत को सतर्क कर रही है. क्या इंडोनेशिया ब्रह्मोस सौदे पर पीछे हटेगा? या दोनों सौदे साथ चलेंगे? यह समय बताएगा. कुल मिलाकर, यह वैश्विक हथियार बाजार में बदलते संतुलन को दिखाता है, जहां चीन और पाकिस्तान नए विकल्प दे रहे हैं. अमेरिका का एकाधिकार टूट रहा है.   

बुलडोजर एक्शन और मणिकर्णिका का भविष्य, काशी के ‘महाश्मशान’ की तस्वीरों में नई दिशा

वाराणसी काशी में इन दिनों मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प का काम चल रहा है. निर्माण कार्य में हो रही तोड़फोड़ को लेकर हंगामा भी बरपा हुआ है. कांग्रेस इसे लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर है. इस बीच शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे. उन्होंने कहा कि 'कुछ लोग काशी को बदनाम कर रहे हैं'. इस बीच यूपी सरकार ने मणिकर्णिका के प्रस्तावित नए स्वरूप की तस्वीरें जारी की हैं जिनमें इस 'महाश्मशान' के भविष्य के स्वरूप को देखा जा सकता है. मणिकर्णिका घाट का प्लेटफार्म काफी बड़ा बनाया जाएगा ताकि एक साथ किए जाने वाले अंतिम संस्कार को लेकर विश्व स्तरीय सुविधाएं वहां मिल सकें. सरकार ने मणिकर्णिका घाट को नए सिरे से बनाने की तैयारी की है. इस प्रोजेक्ट की तस्वीरों में देखा जा सकता है कि अंतिम संस्कार के लिए बना यह घाट कायाकल्प के बाद कैसा दिखाई देगा. 35 करोड़ की राशि आवंटित फिलहाल मणिकर्णिका घाट पहुंचने के लिए तंग गलियों से होकर गुजरना पड़ता है. यहां दाह संस्कार की मूलभूत सुविधाएं बेहद जर्जर और गंदगी से भरी पड़ी थीं. लेकिन पीएम मोदी ने कुछ समय पहले काशी कॉरिडोर से सटे मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प की परियोजना को अपने विजन काशी में शामिल किया था. पहले ही प्रथम चरण के लिए 35 करोड़ की राशि आवंटित की जा चुकी है और जल्द ही मणिकर्णिका घाट नए तरीके से बनकर सामने आएगा.  मणिकर्णिका पर कभी नहीं बुझती चिता की आग मणिकर्णिका घाट के बारे में यह कहा जाता है कि यहां 24 घंटे 365 दिन कभी चिता की आग नहीं बुझती. यहां जलने वाली चिताओं से निकलने वाली भस्म कॉरिडोर तक आती हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में अब जब कॉरिडोर बिल्कुल मणिकर्णिका घाट से सट गया है, इसके कायाकल्प की जरूरत भी महसूस की जा रही थी. हालांकि यहां एक चबूतरे के विध्वंस के बाद हंगामा मच गया क्योंकि वहां कई मूर्तियां थीं. सरकार अब नए तरीके से इसे बना रही है. 'कुछ लोग काशी को बदनाम कर रहे' शनिवार को वाराणसी के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. जब काशी विश्वनाथ धाम परियोजना की शुरुआत हुई थी, तब भी इसके खिलाफ साजिशें रची गई थीं. आज वही लोग टूटी हुई मूर्तियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर यह भ्रम फैला रहे हैं कि मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं, जबकि इससे बड़ा सफेद झूठ कुछ नहीं हो सकता. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज काशी को एक नई वैश्विक पहचान मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि काशी की प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे देश और दुनिया के सामने नए स्वरूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए. इसी सोच के तहत बीते वर्षों में काशी में बड़े स्तर पर विकास कार्य हुए हैं. कांग्रेस ने साधा निशाना यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा, 'देश, काशी और हिंदू धर्म की विरासत को मोदी-योगी सरकार ने ध्वस्त कर दिया है. कॉरिडोर के नाम पर मॉल बनाया गया और काशी विश्वनाथ जी के कई मंदिर तोड़े गए. वट वृक्ष को खत्म कर दिया गया. कसौटी के पत्थर पर लक्ष्मी नारायण जी के मंदिर को तोड़ दिया है. 2023 में मणिकर्णिका घाट का स्वनीकरण की जगह उसे विध्वंस कर दिया गया.' 'ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है' कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, 'बनारस में मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलाकर सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. मणिकर्णिका घाट और इसकी प्राचीनता का धार्मिक महत्व तो है ही, इससे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की स्मिृतियां भी जुड़ी हैं. विकास के नाम पर, चंद लोगों के व्यावसायिक हितों के लिए, देश की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है. इसके पहले भी बनारस में रिनोवेशन के नाम पर कई सदी पुराने अनेक मंदिर ध्वस्त किए जा चुके हैं. काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान मिटाने की ये साजिशें तत्काल बंद होनी चाहिए.  

26 जनवरी से पहले दिल्ली के खिलाफ बांग्लादेशी आतंकी हमला कर सकते हैं, सरकार ने जारी किया हाई अलर्ट

नई दिल्ली  रिपब्लिक डे पर दिल्ली समेत भारत के कुछ शहरों पर आतंकी खतरे का साया मंडरा रहा है. खालिस्तानी और बांग्लादेशी आंतकियों को लेकर 26 जनवरी से पहले सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा अलर्ट आया है. 26 जनवरी के पहले खुफिया विभाग ने अपने अहम अलर्ट में कहा है कि खालिस्तानी आतंकी संगठन और बांग्लादेश के आतंकी संगठन 26 जनवरी 2026 के मद्देनजर देश की राजधानी दिल्ली समेत दूसरे कई शहरों को निशाना बनाने की फिराक में हैं. इस अलर्ट को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं. खुफिया विभाग के अलर्ट में यह भी कहा गया है कि पंजाब के गैंगस्टर अब विदेश में बैठे खालिस्तानी और कट्टरपंथी हैंडलरों के फुट सोल्जर बनते जा रहे हैं. खूफिया विभाग के अलर्ट के मुताबिक, ये गैंगस्टर हरियाणा, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सक्रिय हैं, जो खालिस्तानी आतंकवादियों से जुड़ रहे है. उनके इशारे पर ही ये गैंगस्टर अब आतंकी बनकर दहशत फैलाने की फिराक में हैं. खालिस्तानी आतंकी और बांग्लादेश के कुछ आतंकी मिलकर 26 जनवरी के मद्देनजर देश का माहौल खराब कर सकते हैं. खुफिया अलर्ट में यह भी कहा गया है कि पंजाब और उत्तर भारत–एनसीआर के अन्य हिस्सों में सक्रिय संगठित आपराधिक सिंडिकेट्स के पास न केवल देशी हथियार बल्कि अत्याधुनिक हथियारों की भी बड़ी खेप मौजूद है. यही आंतरिक सुरक्षा के लिहाज़ से गंभीर चिंता का विषय है. अलर्ट के मुताबिक विदेशी खालिस्तानी और कट्टरपंथी हैंडलर इन गैंगस्टर नेटवर्क का इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं. वहीं, बांग्लादेश के कुछ आतंकी और प्रतिबिंबित संगठन से जुड़े ऑउटफिट दिल्ली में गड़बड़ी मचा सकते हैं. न्यूज18 इंडिया के पास खूफिया अलर्ट की कॉपी मौजूद है. फिलहाल, आतंकी संगठन के नाम का खुलासा नहीं हुआ है.

कांग्रेस नेता छत्रपति यादव के भोज में पहुंचे दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस में गुटबाजी और तेज हो गई है। बिहार कांग्रेस के नाराज गुट की ओर से शुक्रवार को मकर संक्रांति का दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया। पूर्व विधायक छत्रपति यादव के पटना स्थित आवास पर आयोजित इस भोज में दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कई जिला अध्यक्ष समेत प्रदेश नेतृत्व से नाराज चल रहे कई नेता शामिल हुए। यह भोज सूबे के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। दही-चूड़ा भोज का आयोजन एआईसीसी सदस्य आनंद माधव, पूर्व विधायक छत्रपति यादव, राजकुमार राजन एवं नागेंद्र पासवान विकल की ओर से किया गया। छत्रपति यादव ने कहा कि भोज में सभी कांग्रेसियों के अलावा उन नेताओं को भी बुलाया गया जिन्हें प्रदेश कार्यालय सदाकत आश्रम में निमंत्रण नहीं दिया गया था। आनंद माधव ने कहा कि यह कोई राजनीतिक भोज नहीं है। बीते सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पार्टी का आधिकारिक दही-चूड़ा भोज आयोजित हुआ था। उसमें नाराज गुट के नेता नहीं दिखे थे। पार्टी के सभी 6 विधायकों ने भी इससे दूरी बनाए रखी थी। हालांकि, नेताओं की नाराजगी की बात से प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इनकार किया था। दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश कांग्रेस के एक गुट ने प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर पैसे लेकर बाहरियों को चुनाव में टिकट देने का आरोप लगाया था। चुनाव नतीजों में पार्टी को करारी हार मिली तो नाराज गुट का विरोध तेज हो गया। पटना से लेकर दिल्ली तक पार्टी कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया गया। अब इस गुट को दो पूर्व अध्यक्ष अखिलेश सिंह और मदन मोहन झा का भी खुलकर समर्थन मिल गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में गुटबाजी चरम पर पहुंचने के आसार नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, एनडीए की ओर से कांग्रेस के सभी 6 विधायकों के पाला बदलने के दावे भी किए जा रहे हैं।

कर्नाटक में राजनीति के जाल में उलझे डीके शिवकुमार, दावोस दौरा रद्द

 बेंगलुरु कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में शामिल होने के लिए प्रस्तावित आधिकारिक दौरा रद्द कर दिया है. वह 18 जनवरी से शुरू होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले थे, लेकिन ऐन वक्त पर उनका कार्यक्रम बदल गया. सूत्रों के मुताबिक, दावोस दौरा रद्द करने के पीछे दिल्ली और बेंगलुरु में बढ़ती राजनीतिक और आधिकारिक व्यस्तताएं बड़ी वजह हैं. आने वाले दिनों में डीके शिवकुमार की AICC के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें प्रस्तावित हैं, जिन्हें देखते हुए यह फैसला लिया गया. जानकारी के अनुसार, डीके शिवकुमार इस समय केंद्र सरकार के खिलाफ MNREGA (मनरेगा) को लेकर राज्य सरकार के अभियान की अगुवाई भी कर रहे हैं. इसी मुद्दे पर कर्नाटक विधानसभा का पांच दिवसीय विशेष सत्र 22 जनवरी से शुरू होने वाला है, जिसमें सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं. राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कर्नाटक की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और अंदरूनी समीकरणों ने भी दावोस यात्रा रद्द करने में अहम भूमिका निभाई. राज्य की राजनीति में चल रही हलचल के बीच डीके शिवकुमार का बेंगलुरु और दिल्ली में मौजूद रहना पार्टी और सरकार दोनों के लिहाज से जरूरी माना जा रहा है. हालांकि आधिकारिक तौर पर सरकार की ओर से दावोस दौरा रद्द करने की कोई विस्तृत वजह नहीं बताई गई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि अंतरराष्ट्रीय मंच से ज्यादा प्राथमिकता इस वक्त घरेलू राजनीति और प्रशासनिक चुनौतियों को दी जा रही है.

बिहार विधानसभा के बजट सत्र में खत्म होगा आरजेडी, कांग्रेस और RLM में टूट का सस्पेंस?

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत 2 फरवरी से होने जा रही है। यह सत्र कई मायनों में रोचक रहने वाला है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठित एनडीए की नई सरकार का सदन में 3 फरवरी को पहला बजट पेश करेगी। सदन की कार्यवाही के दौरान विधायकों के सीटिंग अरेंजमेंट पर भी सबकी निगाहें रहेंगी। दरअसल, लालू एवं तेजस्वी यादव के राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में टूट के दावे और अटकलबाजी चर्चा का विषय बनी हुई है। अब इन दावों से सस्पेंस बजट सत्र में खत्म होने के आसार नजर आ रहे हैं। बिहार चुनाव में प्रचंड जीत और नई सरकार के गठन के कुछ दिनों बाद से ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेताओं की ओर से विपक्ष में टूट के दावे किए जाने लगे। विधानसभा में 25 सदस्यों वाली आरजेडी और 6 सदस्यों वाली कांग्रेस के अधिकतर विधायकों के एनडीए के संपर्क में होने और खरमास के बाद पाला बदलने के दावे किए जा रहे हैं। इससे सियासी पारा गर्माया हुआ है। हालांकि, विपक्ष की ओर से इस बात को लगातार खारिज किया जा रहा है। कांग्रेस विधायकों की पार्टी के भोज से दूरी बीते सोमवार को पटना स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया। इसमें पार्टी के कोई भी विधायक नहीं पहुंचे। इससे विपक्ष में टूट के दावों को और बल मिल गया। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कांग्रेस में सब कुछ ऑल इज वेल होने का दावा किया। मगर विधायकों की गैरमौजूदगी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहीं। एनडीए में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम में भी खटपट चल रही है। बिहार चुनाव में RLM के 4 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे। इनमें से कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता को छोड़ अन्य 3 विधायक शीर्ष नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। उनकी भाजपा से नजदीकी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को नीतीश कैबिनेट में मंत्री बनाया, जो किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। इससे पार्टी में नाराजगी बढ़ गई और कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया था। इसी वजह से पार्टी के 3 विधायक एकजुटता दिखा रहे हैं। पिछले दिनों तीनों विधायक (माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक कुमार सिंह) ने उन्होंने कुशवाहा की लिट्टी पार्टी से दूरी बनाए रखी। हाल ही में वे भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के दही-चूड़ा भोज में दिखे। इससे कुशवाहा की पार्टी में बिखराव की अटकलें लगाई जा रही हैं। बजट सत्र में खत्म होगा सस्पेंस? खरमास खत्म हो गया है लेकिन विभिन्न दलों में टूट और खटपट के दावों पर फिलहाल संशय बना हुआ है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले महीने होने वाले बिहार विधानसभा के बजट सत्र में यह सस्पेंस खत्म हो जाएगा। सदन के अंदर आरजेडी-कांग्रेस के विधायक विपक्ष के खेमे में ही बैठेंगे या नहीं, साथ ही आरएलएम के विधायकों का सीटिंग अरेंजमेंट कैसा होगा, यह 2 फरवरी को सत्र के पहले दिन स्पष्ट हो जाएगा।