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अरावली मुद्दे पर SC का फैसला: 100 मीटर नियम पर रोक और अवैध खनन के खिलाफ कड़ा कदम

  नई दिल्ली    अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम सुनवाई करते हुए साफ कहा कि अवैध खनन एक गंभीर अपराध है और इसके पर्यावरणीय असर भयानक और अपूरणीय हो सकते हैं. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की है और तब तक केंद्र व संबंधित राज्यों को अपनी-अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. शुरुआती चिंता के बिंदु सामने आए: CJI सुनवाई की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) से कहा कि कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कुछ गंभीर चिंता के क्षेत्र चिन्हित किए हैं और इन पर केंद्र सरकार की सहायता की आवश्यकता है. CJI ने स्पष्ट किया कि यह कोई विरोधात्मक मुकदमा नहीं है, बल्कि उद्देश्य समस्या की जड़ तक पहुंचना है. इसी क्रम में कोर्ट ने एमिकस क्यूरी को एक विस्तृत नोट दाखिल करने को कहा और स्पष्ट किया कि तब तक पहले से लागू व्यवस्थाएं जारी रहेंगी. राजस्थान में अब भी कट रहे पेड़, दिए जा रहे खनन पट्टे राजस्थान के किसानों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि जस्टिस ओका की 2024 की पीठ के आदेशों के बावजूद राज्य में खनन पट्टे दिए जा रहे हैं और पेड़ों की कटाई जारी है. इस पर CJI ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हमारे आदेश बिल्कुल साफ हैं. दुर्भाग्य से अवैध खनन और भ्रष्टाचार मौजूद है. राज्य को अपनी मशीनरी हरकत में लानी होगी. अवैध खनन हर हाल में रोका जाना चाहिए, यह एक अपराध है. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि यदि कहीं अवैध खनन की जानकारी है तो उसकी प्रतिनिधि शिकायत ASG कार्यालय में दी जाए. साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि जब मामला पहले ही सुओ मोटो लिया जा चुका है, तो नई रिट याचिकाओं से बचा जाए ताकि सुनवाई भटके नहीं. स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की जरूरत ASG ने कोर्ट को बताया कि केंद्रीय सशक्त समिति (CEC), एमिकस क्यूरी की सहायता करेगी. इस पर CJI ने कहा कि अब जरूरत है कि वन, खनन, पर्यावरण और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ एक साथ काम करें. कोर्ट ने संकेत दिया कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष विशेषज्ञ समिति बनाई जाएगी, जो इस पूरे मसले पर कोर्ट की सीधी निगरानी में काम करेगी, ताकि सभी पहलुओं पर समग्र दृष्टि से विचार हो सके. 100 मीटर नियम पर रोक जारी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अरावली को लेकर पहले दिए गए उस आदेश पर लगी रोक जारी रहेगी, जिसमें 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली मानने की बात कही गई थी. कोर्ट ने दोहराया कि अरावली जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों पर सीधा असर डालती है. अरावली की परिभाषा पर उठे कानूनी सवाल सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अरावली पर्वतमाला को सख्ती से परिभाषित नहीं किया जा सकता, क्योंकि भूगर्भीय रूप से इसमें उप-टेक्टॉनिक संरचनाएं भी शामिल हैं. उन्होंने इस मुद्दे पर प्रारंभिक सुनवाई की मांग की. इस पर CJI ने कहा कि यदि एमिकस या केंद्र से कोई अहम पहलू छूट गया है, तो उस पर सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश सभी पक्ष विस्तृत नोट दाखिल करें एमिकस और सरकार पर्यावरण, वन और खनन विशेषज्ञों के नाम सुझाएं प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति कोर्ट की सीधी निगरानी में काम करेगी राजस्थान सरकार यह सुनिश्चित करे कि अवैध खनन तुरंत रोका जाए दिसंबर में दिया गया पिछला आदेश अगले निर्देश तक लागू रहेगा कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ‘वन’ और ‘अरावली’ की परिभाषाओं को अलग-अलग रखा जाएगा. जहां ‘वन’ की परिभाषा व्यापक होगी, वहीं ‘अरावली’ को संकीर्ण दायरे में देखा जाएगा.  एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर को चार हफ्तों में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई अब चार सप्ताह बाद होगी. सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि अवैध खनन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके पर्यावरणीय प्रभाव को पलटना लगभग असंभव होता है.

धनबाद के कालेज में मोबाइल से परीक्षा का पेपर हल करते दिखीं छात्राएं

धनबाद. बीएसएस महिला कालेज की छात्राओं का मोबाइल देखकर परीक्षा में लिखते वीडियो वायरल हो गया है। किसी छात्रा ने ही मोबाइल से वीडियो बनाया और वायरल कर दिया। वायरल वीडियो में छात्राएं मोबाइल देखकर लिखती दिख रही हैं। आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन-आइसा की ओर से कालेज परिसर में चला जा रहे सदस्यता अभियान के दौरान कुछ छात्राओं ने उनसे इसकी शिकायत की। आइसा की जिला कमेटी के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने इसे लेकर प्राचार्य सहित अन्य शिक्षकों से बात की। प्राचार्य ने मोबाइल देख कर लिखने की बात को गलत बताया। आइसा से जुड़ी छात्राओं ने बताया कि कालेज के कुछ शिक्षकों की ओर से मामले को लेकर उन पर दबाव भी बनाया गया। साक्ष्य के रूप में उन्होंने इसका वीडियो बनाया। बाद में उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय की डीएसडब्ल्यू डा. पुष्पा कुमारी से मिलकर उनसे मामले की शिकायत की। कहा कि जल्द ही परिस्थिति में सुधार नहीं हुआ तो बीएसएस कालेज के खिलाफ सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे। राज्य उपाध्यक्ष स्नेहा कुमारी महतो, राज्य सह सचिव रितेश मिश्रा, बीबीएमकेयू प्रभारी दीपक महतो, ला कालेज की अध्यक्ष पायल, उपाध्यक्ष अंजलि, बीएसएस महिला कालेज की प्रतिनिधि प्राची दुबे, पल्लवी, रोशन, शशि राज, रिशु पांडे, साहिल उपाध्याय, अमन, सुजल समेत अन्य शामिल थे। कालेज ने 28 से 30 तक प्री-बोर्ड परीक्षा मोबाइल देख कर परीक्षा में लिखने का वीडियो वायरल होने के बीच बीएसएस कालेज की ओर से 12वीं की फाइनल प्री-बोर्ड परीक्षा संबंधी नोटिस भी मंगलवार को जारी किया गया। कालेज से जारी नोटिस में 28 से 30 तक प्री-बोर्ड परीक्षा की सूचना जारी की गई है। पहली पाली में दिन में 11 से 12 तथा दूसरी पाली में दोपहर एक से तीन बजे तक प्री-बोर्ड की परीक्षा आयोजित की जाएगी।

पटना का नए डिजाइन वाला हार्डिंग पार्क टर्मिनल बदलेगा तस्वीर

पटना. राजधानी पटना के हार्डिंग पार्क में बन रहे नए रेलवे टर्मिनल का काम करीब छह महीने बाद फिर से शुरू हो गया है. इस बार रेलवे ने पूरी तरह नए डिजाइन के साथ निर्माण की रफ्तार बढ़ा दी है. लक्ष्य है कि वर्ष 2029 तक यह टर्मिनल पूरी तरह बनकर तैयार हो जाए और पटना को एक अत्याधुनिक ट्रांसपोर्ट हब की सौगात मिले. खास बात यह है कि जीपीओ से आर ब्लॉक की ओर जाने वाले फ्लाइओवर को सीधे स्टेशन से जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी कनेक्टिविटी का अनुभव मिलेगा. फ्लाइओवर से स्टेशन तक सीधी एंट्री नए डिजाइन के तहत हार्डिंग पार्क में एक फुट ओवरब्रिज बनाया जाएगा, जो फ्लाइओवर को सीधे रेलवे टर्मिनल से कनेक्ट करेगा. यानी यात्री फ्लाइओवर से उतरते ही सीधे स्टेशन परिसर में पहुंच सकेंगे. इससे शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा और समय की बचत भी होगी. जीपीओ गोलंबर की ओर से करीब साढ़े सात फुट ऊंची चहारदीवारी का निर्माण शुरू कर दिया गया है, जिससे स्टेशन क्षेत्र को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके. अतिक्रमण बना चुनौती, हटाने की प्रक्रिया तेज छह महीने तक काम रुके रहने के कारण हार्डिंग पार्क के आसपास अतिक्रमण तेजी से बढ़ गया. जीपीओ गोलंबर से लेकर आर ब्लॉक तक झोपड़ियां बस गई हैं. अब निर्माण एजेंसी ने जिला प्रशासन, आरपीएफ और जीआरपी को आवेदन देकर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू करा दी है. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि काम की गति बनाए रखने के लिए क्षेत्र को जल्द अतिक्रमण मुक्त करना जरूरी है. हार्डिंग पार्क के लिए अलग बिजली लाइन हार्डिंग पार्क टर्मिनल और वहां से चलने वाली ट्रेनों को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए 33 केवी की नई अलग बिजली लाइन बिछाई जाएगी. करीब 2.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत केबल डाली जाएगी, ताकि पटना जंक्शन, रेलवे कॉलोनी और कार्यालयों पर पड़ने वाले लोड का असर इस टर्मिनल पर न पड़े. इससे ट्रेनों के संचालन में किसी तरह की रुकावट नहीं आएगी. दो फेज में बनेगा टर्मिनल, खर्च होंगे 150 करोड़ हार्डिंग पार्क टर्मिनल का निर्माण दो फेज में किया जाएगा. पहले फेज पर लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसमें पांच नए प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे, जिनसे लोकल ट्रेनों का संचालन होगा. पहला फेज जून 2027 तक और दूसरा फेज उसके बाद डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य है. कुल मिलाकर तीन साल में स्टेशन को पूरी तरह विकसित करने की योजना है. एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं का दावा रेलवे का कहना है कि हार्डिंग पार्क टर्मिनल में एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी. मेट्रो और सड़क मार्ग से इसकी सीधी कनेक्टिविटी होगी. यह परियोजना अमृत भारत योजना के तहत पटना जंक्शन को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है. जगह की कमी के कारण पटना जंक्शन का विस्तार संभव नहीं था, इसलिए हार्डिंग पार्क को वैकल्पिक बड़े टर्मिनल के रूप में विकसित किया जा रहा है.

जोधपुर में 90 करोड़ का फोरलेन फ्लाईओवर देगा जाम से बड़ी राहत

जोधपुर. जोधपुर शहर के व्यस्ततम चौराहों में से एक एम्स-नहर चौराहे पर आने वाले समय में वाहन चालकों को ट्रैफिक समस्या से निजात मिलेगी। राज्य सरकार और जेडीए की बजट योजना के तहत नहर चौराहे-पाल रोड और शास्त्री नगर थाना-लूणी पंचायत समिति तक डीपीआर बनने के बाद और मुख्यमंत्री के वर्चुअल शिलान्यान करने के बाद अब फ्लाईओवर के निर्माण का कार्य मंगलवार को शुरू हो गया है। हालांकि, इस कार्य का वर्कऑर्डर 10 माह पूर्व दिया गया था, लेकिन पेड़ों की शिफि्ंटग सहित अन्य कार्याें में 10 माह गुजर जाने के बाद अब इस फ्लाईओवर का कार्य शुरू किया गया है। जेडीए को यह कार्य 20 मार्च 2027 तक पूरा करना है। जोधपुर विकास प्राधिकरण करीब 90 करोड़ रुपए की लागत से 760 मीटर लम्बा नहर रोड चौराहा फ्लाईओवर का निर्माण करेगा। यह फ्लाईओवर चार लेन का होगा। अब जेडीए बना रहा फ्लाईओवर दरअसल, शहर के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल पाल रोड पर चौहाबो थाने के पास नहर चौराहे पर यातायात जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए कई बार-बार अलग प्रयोग किए गए। यातायात सिग्नल लाइटें शुरू की गईं। कई बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की गई, लेकिन यहां पर ट्रैफिक समस्या से निजात नहीं मिली। ट्रैफिक की समस्या से निजात दिलाने के लिए आखिरकार जेडीए ने यहां पर फ्लाईओवर तैयार किया जा रहा है। पियर फाउंडेशन का कार्य हुआ शुरू जेडीए आयुक्त उत्साह चौधरी ने बताया कि नहर रोड फ्लाईओवर के निर्माण का कार्य मंगलवार को शुरू किया गया। इसके तहत पियर फाउंडेशन का कार्य शुरू किया गया है। यहां इस फ्लाईओवर का सबसे बड़ा 64 मीटर का स्पॉम बनेगा। इसके लिए 12 पियर तैयार होने के बाद इस पर पिलर जाएंगे। फ्लाईओवर के निर्माण से इन सड़कों पर मिलेगी राहत 1. एम्स से आ रही सड़क: इस सड़क से एम्स और बासनी, सालावास जाने वाला ट्रैफिक रहता है। 2. बाड़मेर व डीपीएस सर्कल तक की सड़क: जोधपुर से लूणी या बाड़मेर जाने वाली सरकारी और प्राइवेट बसों के साथ ही निजी वाहन और आस-पास के क्षेत्रों में स्थित स्कूलों की बसों का भी दबाव रहता है। 3. हाउसिंग बोर्ड से आने वाली सड़क: हाउसिंग बोर्ड से नहर चौराहे तक आने वाली सडक़ से लोग सीधे एम्स और बासनी की ओर से जाते है। मुख्यतया सुबह और शाम को हाउसिंग बोर्ड की तरफ जाने वाले ट्रैफिक का दबाव रहता है। 4. जोधपुर शहर की ओर से आने वाली सड़क: जोधपुर शहर से आने वाली सड़क पर बोरानाडा सहित अन्य स्थानों पर जाने वाले लोगों के ट्रैफिक का दबाव। रोजाना गुजरते हैं 25 हजार से ज्यादा वाहन नहर चौराहे से पाल रोड से होते हुए बाड़मेर रोड पर प्रतिदिन 25 हजार से भी ज्यादा वाहनों का दबाव रहता है। इससे यहां रोजना जाम की स्थिति बनी रहती है। एम्स के साथ ही करीब 30 कॉलोनियों के रास्ते इस रोड से डायवर्ट होते है। ओवरब्रिज बनने से इस सडक़ से गुजरने वाले वाहन चालकों के साथ ही आस-पास की कॉलोनियों पर भी खासा फर्क पड़ेगा।

भांबरी और गोरानसन की शानदार शुरुआत

मेलबर्न भारत के शीर्ष युगल खिलाड़ी युकी भांबरी और स्वीडन के उनके जोड़ीदार आंद्रे गोरानसन ने बुधवार को यहां सीधे सेटों में आसान जीत दर्ज करके ऑस्ट्रेलियाई ओपन टेनिस टूर्नामेंट के पुरुष युगल के दूसरे दौर में जगह बनाई। भांबरी और गोरानसन की दसवीं वरीयता प्राप्त जोड़ी ने कोर्ट नंबर 13 पर 57 मिनट तक चले मुकाबले में वाइल्ड कार्ड से प्रवेश पाने वाले ऑस्ट्रेलिया के जेम्स डकवर्थ और क्रूज़ हेविट को 6-3 6-4 से हराया। भारत और स्वीडन की जोड़ी ने शुरू से ही शानदार प्रदर्शन किया। अगर प्रतिशत के आंकड़ों पर गौर करें तो भांबरी और गोरानसन ने अपनी पहली सर्विस पर 97 प्रतिशत अंक जीते। दूसरी सर्विस पर अंक हासिल करने में भी उनका प्रदर्शन उतना ही प्रभावशाली रहा, जिसमें उन्होंने 91 प्रतिशत अंक जीते। ⁠ भांबरी और गोरानसन ने अपने प्रतिद्वंद्वियों की सर्विस को दो बार तोड़ा और पूरे मैच में एक भी ब्रेक प्वाइंट का सामना नहीं किया, जिससे वे पूरे समय नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहे। निकी पूनाचा और थाईलैंड के उनके जोड़ीदार प्रुच्य इसारो मंगलवार को पेड्रो मार्टिनेज और जौमे मुनार से सीधे सेटों में हारकर पुरुष युगल प्रतियोगिता से बाहर हो गए थे।  

BJP अध्यक्ष बनते ही नितिन नवीन के शब्दों में आया गजब का बदलाव

पटना. भाजपा के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पदभार संभालते ही अपनी शैली और शब्दों में एक स्पष्ट बदलाव का संकेत दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। पार्टी नेतृत्व में शामिल इस युवा चेहरे के आगमन के बाद बोलचाल की भाषा, संगठनात्मक रुख और रणनीतिक संवाद में बदलाव दिख रहा है, जिसने कार्यकर्ताओं और विश्लेषकों दोनों का ध्यान खींचा है। नितिन नवीन को 20 जनवरी 2026 को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्विरोध चुना गया। वे पार्टी के सबसे युवा अध्यक्ष के रूप में इतिहास रचते हैं, जो पार्टी के नए युग का प्रतीक माने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर उन्हें ‘मिलेनियल बॉस’ कहा और स्पष्ट किया कि पार्टी के मामलों में अब नितिन नवीन की बात सर्वोपरि है। उनके अध्यक्ष बनने से पहले, नितिन नवीन राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे। पार्टी ने यह बड़ा बदलाव संगठन की नई दिशा को दर्शाने के लिए किया है, जिसमें युवा नेतृत्व को आगे लाने पर ज़ोर दिया गया है। इस परिवर्तन को पार्टी के भीतर पीढ़ीगत बदलाव की शुरुआत कहा जा रहा है। नवीन के भाषणों में भी आम राजनीतिक भाषणों की तुलना में अलग टोन दिखाई दे रहा है। उन्होंने तर्कोचित, स्पष्ट और काम-केंद्रित शब्दों का प्रयोग बढ़ाया है, जो संगठन के भीतर नई ऊर्जा और तेजी को दर्शाता है। यह परिवर्तन सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि उनकी रणनीति और नजरिए में भी झलकता है,  संगठन को चुनावी मोड में डालते हुए उन्होंने पहले ही दिन चुनावी तैयारियों की दिशा में कदम बढ़ा दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि नितिन नवीन का यह बदलाव पार्टी को समीकरणों के बदलते परिदृश्य में नई पहचान देने की योजना का हिस्सा है। युवा कार्यकर्ताओं के बीच उनकी लोकप्रियता और बिहार सहित अन्य राज्यों में उनके प्रभाव के कारण भी यह बदलाव रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, नितिन नवीन ने अपने अभिवादन, भाषण और संगठन के फैसलों में एक नई गंभीरता व स्पष्टता दिखाई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी अब अधिक प्रेरित, अधिक संगठित और चुनावी मोर्चे पर अधिक आक्रामक होगी। इस बदलाव को भाजपा के नए नेतृत्व की ऊर्जा और बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

CM सैनी ने दिवंगत ASI संदीप लाठर की पत्नी को बनवाया शिक्षक

पंचकूला. एएसआई संदीप लाठर की पत्नी को पीजीटी मैथ के पद पर नियुक्ति मिलेगी। संतोष कुमारी को कैम्पस स्कूल, एमडीयू रोहतक में ग्रुप बी की नौकरी मिली है। परिवार को करीब 2 करोड़ 6 लाख रुपये की आर्थिक मदद भी की गई है। बता दें कि दिवंगत एएसआई संदीप लाठर ने 14 अक्टूबर को गांव लाढौत से धामड़ रोड पर अपने मामा के खेतों में बने कोठड़े की छत पर जाकर अपनी सर्विस रिवाल्वर से गोली मारकर सुसाइड कर लिया था। सुसाइड से पहले उन्होंने एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया था और चार पेज का एक सुसाइड नोट भी लिखा था, जिसमें संदीप ने आईपीएस वाई पूरन कुमार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। सीएम सैनी ने परिवार से मुलाकात के बाद नौकरी का आश्वासन दिया था, जिसे अब पूरा किया गया है। कैबिनेट ने कुंजपुरा, मडलौडा और शहजादपुर को नगरपालिका का दर्जा भी दिया।

मैक्स लाइफ इंश्योरेंस को 1 करोड़ का हर्जाना देने का आदेश: उपभोक्ता आयोग

बिलासपुर. बिलासपुर के उपभोक्ता आयोग ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को एक करोड़ से अधिक का हर्जाना देने का महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. कोविड से हुई मौत के मामले में बिलासपुर के उपभोक्ता आयोग ने फैसला जारी किया है. फोरम ने 1 करोड़ रुपए की बीमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने के निर्देश दिया है. फोरम ने मानसिक पीड़ा और केस के खर्च के तौर पर 2 लाख रुपए अलग से देने का भी आदेश जारी किया है. मामले पर आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल, सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ में हुई सुनवाई में यह निर्णय लिया गया. बता दें, कि बिलासपुर निवासी कौशल प्रसाद कौशिक ने पत्नी शैल कौशिक के नाम पर मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से प्लैटिनम वेल्थ प्लान लिया था. बीमा करने से पहले कंपनी ने सभी जरूरी मेडिकल जांच करवाई थी. सितंबर 2020 में शैल कौशिक कोविड-19 से ग्रसित पाई गईं और इलाज के दौरान 11 अक्टूबर 2020 को उनकी मृत्यु हो गई. जिसपर पति ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, बीमा कंपनी ने दावा खारिज कर दिया, कहा कि उनकी पत्नी को पहले से ही गंभीर बीमारी थी. आयोग ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि बीमा से पहले मेडिकल जांच में महिला स्वस्थ थी, लिहाजा मुआवजे की मांग उचित है.

बेटे अमीन ने थामा एआर रहमान का साथ, कहा– उनका संगीत कभी नहीं होगा पुराना

मुंबई,  ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान को उनके संगीत के लिए दुनियाभर में सराहा जाता है। लेकिन, इन दिनों वह अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं, जिसमें उन्होंने बॉलीवुड में काम न मिलने के पीछे ‘सांप्रदायिक’ कारणों का हवाला दिया। इसके बाद से वह राजनीति और सिनेमा हस्तियों के निशाने पर आ गए। इस पूरे विवाद के बीच, उनके बेटे अमीन ने अपने पिता का समर्थन किया है। अमीन ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट के जरिए अपने पिता का समर्थन किया। उन्होंने इस पोस्ट में एक पुराना वीडियो शेयर किया, जिसमें उनके पिता ए.आर. रहमान स्टेज पर बैठे हैं और उनके साथ ब्रिटेन के मशहूर गायक एड शीरन नजर आ रहे हैं। वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, ”पापा का संगीत और योगदान केवल वर्तमान में ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा।” इसके साथ ही अमीन ने एक और स्टोरी साझा की, जिसमें उन्होंने मार्वल सुपरहीरो आयरन मैन के विजुअल्स को शामिल किया। वीडियो में आयरन मैन कहता है, ”आप मेरा घर, मेरे सारे खिलौने और ट्रिक्स छीन सकते हो, लेकिन एक चीज नहीं छीन सकते- मैं आयरन मैन हूं।” इस स्टोरी के जरिए अमीन ने कहा कि बाहरी आलोचना, समस्याएं या गलतफहमियां ए.आर. रहमान की असली पहचान और उनके अद्भुत योगदान को कभी नहीं छीन सकती। ए.आर. रहमान ने बीबीसी एशियन नेटवर्क के साथ बातचीत में कहा था, “मुझे बॉलीवुड में अब कम काम मिलने लगे हैं। कभी-कभी रचनात्मक निर्णय लेने की ताकत उन लोगों के हाथ में होती है जिनमें असल में क्रिएटिविटी नहीं होती। यह कभी-कभी साम्प्रदायिक कारणों से भी हो सकता है, लेकिन यह सीधे तौर पर पता नहीं चलता। यह केवल अफवाहों के रूप में पता चलता है कि मुझे किसी प्रोजेक्ट में चुना गया था, लेकिन फिर कंपनी ने अपने पांच अन्य कंपोजर्स को हायर कर लिया।” बयान पर विवाद के बढ़ने पर ए.आर. रहमान ने खुद वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी और कहा कि उनके शब्दों को गलत समझा गया और उनका किसी को चोट पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने भारत को अपना प्रेरणा स्रोत बताया और कहा कि उनका संगीत हमेशा लोगों को जोड़ने, संस्कृति का उत्सव मनाने और सम्मान देने का माध्यम रहा है।  

86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष का संबोधन

लोकसभा अध्यक्ष बोले, यूपी ने सुशासन, सामाजिक कल्याण, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की लोकतांत्रिक संस्थाओं को जवाबदेह, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने के संकल्प पर दिया जोर लोकसभा अध्यक्ष ने बैठकों और सकारात्मक बहस पर दिया जोर, डिजिटलाइजेशन, एआई और रिसर्च से बढ़ेगी क्षमता लखनऊ, 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, जवाबदेह, पारदर्शी तथा जन-आकांक्षाओं के अनुरूप बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारी सम्मेलनों के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता की आशाओं और आकांक्षाओं से जोड़ने हेतु व्यापक विचार-विमर्श हुआ है और इन चर्चाओं से ठोस परिणाम भी सामने आए हैं। अब समय है कि नवाचार, संवाद और प्रौद्योगिकी के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता के और नजदीक लाया जाए। समारोह में अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देशभर से आए सम्मानित सदस्यों का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्य सशक्त हुए हैं। राज्य ने सुशासन, सामाजिक कल्याण, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। ओम बिरला ने कहा कि सम्मेलन के दौरान सभी पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने लोकतंत्र को सार्थक चर्चा के माध्यम से और मजबूत बनाने तथा विधायी संस्थाओं को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए अपने-अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन चर्चाओं का उद्देश्य केवल संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इनके ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने आएं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में नवाचार को अपनाया जाए। “विकसित भारत” की संकल्पना के अनुरूप आगे बढ़ने का आह्वान” लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस सम्मेलन में यह संकल्प लिया गया है कि सभी विधायी संस्थाएं “विकसित भारत” की संकल्पना के अनुरूप अपने-अपने राज्यों को विकसित राज्य बनाने की दिशा में संवाद और चर्चा को आगे बढ़ाएं। इसके लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर निरंतर संवाद आवश्यक है। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यहां विजन-2047 समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर 36 घंटे तक लगातार चर्चा हुई, जिसमें विधायकों ने अपने विचार रखे। यह एक अनुकरणीय पहल है, जो यह दर्शाती है कि किस प्रकार सार्थक बहस और संवाद से दीर्घकालिक विकास की दिशा तय की जा सकती है। अब और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता ओम बिरला ने विधायी संस्थाओं में बैठकों की संख्या में आ रही कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में कई निर्णय लिए गए और उनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए, लेकिन अब और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राज्य विधानमंडलों में न्यूनतम 30 दिन सदन की बैठकें हों, सकारात्मक चर्चा हो और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राज्य के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बने। उन्होंने कहा कि विधानसभाएं वह मंच हैं जहां अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज सदन के माध्यम से सरकार तक पहुंचती है। मतदाता यह अपेक्षा करता है कि उसका प्रतिनिधि उसकी समस्याओं और चुनौतियों को सदन में उठाएगा तथा समाधान की दिशा में पहल करेगा। न्यायपालिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे लोगों को न्यायालय पर विश्वास होता है, वैसे ही यदि विधायक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सदन में अपनी बात रखें तो विधानसभाओं के माध्यम से भी सार्थक परिणाम सामने आएंगे। प्रौद्योगिकी और एआई से विधायी संस्थाओं की क्षमता वृद्धि लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग आवश्यक है। आज सभी राज्य विधानसभाएं पेपरलेस हो चुकी हैं और पुरानी बहसों, बजट तथा विधायी कार्यवाहियों का डिजिटलीकरण किया गया है। इससे विधायकों की क्षमता-वृद्धि होगी और शोध-आधारित चर्चा को बल मिलेगा। इसी उद्देश्य से विधानसभाओं में रिसर्च विंग का गठन भी किया गया है। संसद और राज्यों की विधानसभाएं मिलकर कर रही हैं काम ओम बिरला ने कहा कि डिजिटलीकरण से कानून निर्माण के समय सार्थक बहस के लिए आवश्यक संदर्भ आसानी से उपलब्ध होंगे। मिलकर कार्य करने से जन प्रतिनिधियों में क्षमता निर्माण होगा और विधायिकाएं अधिक जवाबदेह बनेंगी। इससे शासन-प्रशासन पर निगरानी भी प्रभावी होगी। गतिरोध लोकतंत्र के लिए उचित नहीं सदनों में बार-बार होने वाले गतिरोध पर चिंता व्यक्त करते हुए ओम बिरला ने कहा कि सदन का प्रत्येक क्षण बहुमूल्य होता है। सदन चर्चा, संवाद और समिति कार्यों के लिए होते हैं, न कि गतिरोध के लिए। विरोध राजनीतिक रूप से हो सकता है, लेकिन शब्दों और तर्कों का मंच सदन होना चाहिए, ताकि सार्थक परिणाम निकलें और जनता का विश्वास बना रहे। ‘लेजिसलेटिव इंडेक्स’ पर जोर लोकसभा अध्यक्ष ने ‘लेजिसलेटिव इंडेक्स’ की अवधारणा पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे विधानसभाओं की उत्पादकता, कार्यप्रणाली और उपयोगिता का आकलन होगा। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से नई प्रक्रियाएं, नियम और नवाचार सामने आएंगे, जिससे विधायी संस्थाएं अधिक प्रभावी बनेंगी। अपने संबोधन के अंत में ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी संविधान के अंतर्गत कार्य करते हैं और उन पर बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्हें निष्पक्ष और न्यायसंगत रहते हुए संस्थाओं को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में हुई चर्चाओं से निकले संकल्पों को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में आगे बढ़ाएंगे। यूपी परिवर्तन की धरती है, यहां से प्राप्त ऊर्जा को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में लेकर जाएंगे लोकसभा अध्यक्ष ने सम्मेलन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन नई दिशा, नए संकल्प और नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की ऊर्जा देता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और सभी सम्मानित अतिथियों का भी धन्यवाद किया और कहा कि उत्तर प्रदेश की यह भूमि सामाजिक, आध्यात्मिक और परिवर्तन की धरती है, जहां से प्राप्त ऊर्जा को सभी प्रतिनिधि अपने-अपने राज्यों में लेकर जाएंगे।