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क्या टी20 विश्व कप तक फिट हो जाएंगे तिलक वर्मा? स्टार बल्लेबाज का इमोशनल मैसेज आया सामने

नई दिल्ली टी20 वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया के लिए राहत भरी खबर है। पेट से जुड़ी समस्या की वजह से न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के शुरुआती तीन मैचों से बाहर हुए तिलक वर्मा तेजी से ठीक हो रहे हैं। फिलहाल बेंगलुरु में बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस में रिहैब प्रॉसेस से गुजर रहे वर्मा ने सोशल मीडिया पर अपनी कुछ तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करके जल्द कमबैक की उम्मीद जताई है। तिलक वर्मा ने ऐसे ही एक वीडियो क्लिप को शेयर किया है जिसमें वह एक्सरसाइज करते दिख रहे हैं। उसके साथ उन्होंने लिखा- कोई कसर नहीं छोड़ रहे, कमबैक सून। तिलक वर्मा काफी समय से भारतीय टी20 बल्लेबाजी का अहम स्तंभ बने हुए हैं। पिछले साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होम सीरीज में भी उनकी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी का जलवा दिखा था। सीरीज में वर्मा 187 रनों के साथ टॉप स्कोर रहे। इस दौरान उन्होंने 2 फिफ्टी भी जड़ी। 23 साल के तिलक वर्मा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज की तैयारी के तहत विजय हजारे ट्रॉफी के 2 मैच भी खेले, जिसमें उन्होंने क्रमशः 109 और 34 रन की पारियां खेली। तिलक वर्मा न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज की तैयारी में जुटे हुए थे तभी उन्हें पेट से जुड़ी समस्या से जूझना पड़ा, जिसमें सर्जरी की जरूरत थी। इस वजह से वह न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 मैच की टी20 सीरीज के शुरुआती 3 मुकाबलों से बाहर हो गए। उनकी जगह पर श्रेयस अय्यर को स्क्वाड में जगह दी गई। बाएं हाथ के बल्लेबाज तिलक वर्मा नंबर तीन पर भारत के लिए शानदार खेल दिखाते आए हैं। विश्व कप में उनकी मौजूदगी टीम इंडिया के लिए काफी अहम है। उनके अंदर दबाव को सोखने और परिस्थितियों के हिसाब से बल्लेबाजी करने की शानदार क्षमता है। इसका मुजाहिरा उन्होंने एशिया कप के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ किया था। तिलक वर्मा के टी20 इंटरनेशनल करियर पर निगाह डालें तो उन्होंने अब तक 40 मैचों की 37 पारियों में 49.29 की औसत से 1,183 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 144.09 है। टी20 इंटरनेशनल में उनके नाम 2 शतक और 6 अर्धशतक दर्ज हैं। नंबर 3 पर वह उसी तरह की भूमिका निभा रहे हैं जिस तरह की भूमिका विराट कोहली निभाया करते थे। उन्होंने नंबर 3 पर बल्लेबाजी करते हुए 15 पारियों में 60.22 की औसत और 160 के स्ट्राइक रेट से 542 रन ठोके हैं। टी20 इंटरनेशनल में उनके दोनों शतक तीन पर बल्लेबाजी करते हुए ही आएं हैं। इसके अलावा इस नंबर पर उन्होंने 3 अर्धशतक भी जड़े हैं।  

दुनिया की पहली पसंद बनता भारत, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार जारी : अश्विनी वैष्णव

दावोस केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि पूरी दुनिया में भारत को लेकर तेजी से विश्वास बढ़ रहा है और दिग्गज अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और निवेशक देश में अपने ऑपरेशंस का विस्तार कर रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के साइडलाइन में हुई बैठक में वैष्णव ने कहा कि भारत की विकास यात्रा, सुधार और भविष्य के लिए तैयार इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्लोबल लीडर्स का अपनी ओर ध्यान खींच रहा है। उन्होंने कहा कि दावोस में हुई चर्चाओं से स्पष्ट रूप से यह झलका कि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत को एक भरोसेमंद और विश्वसनीय भागीदार के रूप में देखा जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक लॉजिस्टिक्स कंपनी मार्सक, जहाजरानी, ​​बंदरगाहों और रेलवे सहित लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भारत के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि चर्चा में सेमीकंडक्टर से संबंधित सामग्रियों में सहयोग पर भी बात हुई, जो भारत के दीर्घकालिक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। वैष्णव ने कहा, “मार्सक भारत के साथ जहाजरानी, ​​बंदरगाहों, रेलवे और सेमीकंडक्टर सामग्रियों सहित लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है।” केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “हनीवेल भारत के साथ रेलवे आधुनिकीकरण में साझेदारी कर रहा है। वह भारत में अपने विनिर्माण कार्यों का विस्तार करने के लिए उत्सुक है।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका स्थित प्रौद्योगिकी कंपनी हनीवेल भारत के साथ रेलवे आधुनिकीकरण में साझेदारी कर रही है और उसने देश में अपने विनिर्माण कार्यों का विस्तार करने में गहरी रुचि दिखाई है। निवेशकों की रुचि के बारे में बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टेमासेक के अध्यक्ष टीओ ची हीन ने भारत में टेमासेक की उपस्थिति बढ़ाने की स्पष्ट इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने आगे कहा कि सिंगापुर भारत के भौतिक और डिजिटल अवसंरचना के साथ-साथ डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो भारत की आर्थिक बुनियाद में दीर्घकालिक विश्वास को दर्शाता है। वैष्णव ने कहा, “एआई, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अग्रणी विशेषज्ञों के साथ हुई चर्चाएं एक विश्वसनीय मूल्य-श्रृंखला भागीदार के रूप में भारत के उदय को दर्शाती हैं।”

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 5000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उक्त शिक्षक भर्ती व्यापमं के माध्यम से की जाए तथा इसके लिए फरवरी 2026 तक विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण हो सके। बैठक में शिक्षक भर्ती परीक्षा–2023 से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा–2023 की प्रतीक्षा सूची की मान्यता नहीं बढ़ाई जाएगी, ताकि पिछले वर्षों में उत्तीर्ण युवाओं को भी शासकीय सेवा में आने का मौका दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तेज़ी से उठाए जाएंगे।

PAK में सियासी तूफान: Board of Peace विवाद पर PM शहबाज शरीफ निशाने पर

दावोस ,स्विट्जरलैंड संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकीं मलीहा लोधी ने इस बोर्ड ऑफ पीस की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान अपने बहुप्रतीक्षित 'बोर्ड ऑफ पीस' (शांति बोर्ड) को औपचारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। इसे संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने वाला चार्टर बताया जा रहा है। हालांकि, इस अंतरराष्ट्रीय निकाय के चार्टर पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान ट्रम्प ने साफ किया कि उन्होंने भले ही अतीत में संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की है, लेकिन वह चाहते हैं कि उनका यह नया बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करे। उन्होंने कहा कि “एक बार जब यह बोर्ड पूरी तरह से गठित हो जाएगा, तो हम जो चाहें, कर सकेंगे और हम इसे संयुक्त राष्ट्र के साथ तालमेल बिठाकर करेंगे।” गाजा में सांति स्थापना के लिुए बनाए गए ट्रंप के इस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पाकिस्तान समेत कई देश शामिल हुए है, जबकि यूरोपीय देशों समेत कुछ मुल्कों ने इसका सदस्य बनने का निमंत्रण ठुकरा दिया है। पाकिस्तान में बवाल इधर, पाकिस्तान में अब बवाल उठ खड़ा हुआ है। लोग इसके लिए शहबाज शरीफ सरकार की आलोचना कर रहे हैं और उन्हें ट्रंप का चाटुकार बता रहे हैं। शहबाज शरीफ सरकार के इस कदम के आलोचकों में पूर्व राजदूत से लेकर कई डिप्लोमेट्स, एक्सपर्ट और बुद्धिजीवी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकीं मलीहा लोधी ने इस बोर्ड ऑफ पीस की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा। उन्होंने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है, 'पाकिस्तान ने एक ऐसे संगठन (बोर्ड ऑफ पीस) में शामिल होने का फैसला किया है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र के विकल्प की तरह पेश कर रहे हैं। यह पहल सीधे तौर पर ट्रंप से जुड़ी है और उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद इसके टिके रहने की संभावना नहीं दिखती। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ट्रंप को खुश करना सिद्धांतों पर टिके रहने से ज्यादा अहम हो गया है?' यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है पूर्व डिप्लोमेट ने इस बात पर आपत्ति जताई कि पाकिस्तान ने उस बोर्ड में शामिल होने का फैसला किया है, जिसमें पहले से इजरायल शामिल है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक तरफ पाकिस्तान ने अब तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है, दूसरी तरफ उसके शामिल बोर्ड में शामिल हो रहा है। पूर्व डिप्लोमेट के मुताबिक, यह शहबाज शरीफ सरकार की फिलिस्तीन के प्रति गद्दारी है। फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ गद्दारी पाकिस्तान के पूर्व कानून मंत्री बाबर अवान ने भी शरीफ सरकार के इस कदम की आलोचना की है। उन्होंने लिखा है कि सिर्फ ट्रंप को खुश करने के लिए शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर ने बोर्ड ऑफ पीस में सामिल होने का फैसला किया है, जो युद्ध अपराधों के लिए बदनाम बेंजामिन नेतन्याहू जैसे अपराधियों को जिम्मेदार बताना और फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ गद्दारी है। अवान ने लिखा कि ट्रंप के बूट पॉलिश की आदत ने पाकिस्तान को कहां से कहां पहुंचा दिया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक भूल करार दिया है। मुस्लिम दुनिया का सबसे बड़ा पाखंड पाक पत्रकार बकीर सज्जाद ने भी एक्स पर लिखा, 'अफसोस है कि यही वो शांति बोर्ड है जो कुछ मुस्लिम देश ट्रंप की खुशामद और चापलूसी करके बेबस फिलिस्तीनियों के लिए हासिल कर पाए हैं। उन्होंने लिखा कि यह मुस्लिम दुनिया की सबसे बड़ी पाखंड वाली राजनीतिक मिसाल है। पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर और वकील मुस्तफा नवाज खोखर ने एक्स पर लिखा, 'पाकिस्तान का बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का फैसला बिना किसी पब्लिक डिबेट और संसद की राय के लिया गया है, इसलिए यह अमान्य है।

गाजा मुद्दे पर दोहरा रवैया? ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल हुए मुस्लिम देश

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा के लिए चर्चित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में कई मुस्लिम देश शामिल हो गए हैं। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने हाल ही में संयुक्त बयान जारी कर गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए चल रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को लेकर अपना समर्थन दोहराया है। हालांकि मुस्लिम देशों का यह फैसला विवादों के घेरे में आ गया है जहां यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि फिलिस्तीन की स्वायत्तता को लेकर चिंता जाहिर करने वाले देश अब किसी दूसरे प्रशासन को गाजा की जिम्मेदारी सौंपे जाने का समर्थन कैसे कर सकते हैं।   इससे पहले बुधवार को कतर, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई ने एक संयुक्त बयान जारी कर बोर्ड ऑफ पीस का समर्थन किया। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से अपने नेताओं को भेजे गए निमंत्रण का स्वागत करते हैं और सामूहिक रूप से ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का फैसला कर रहे हैं। बयान में यह भी कहा गया है कि सभी देश अपने-अपने कानूनी और जरूरी प्रक्रियाओं के तहत बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे। क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’? गौरतलब है कि ट्रंप का यह शांति बोर्ड गाजा में एक ट्रांजिशनल एडमिनिस्ट्रेशन के रूप में काम करेगा। अमेरिका का कहना है कि इसका मकसद स्थायी सीजफायर को मजबूत करना, गाजा के पुनर्निर्माण में मदद करना और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को एक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ना है, ताकि पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता कायम हो सके। यह बोर्ड गाजा के लिए फंड जुटाने का काम भी करेगा। मुस्लिम देशों के फैसले पर सवाल कई जानकार इसे मुस्लिम देशों का ट्रंप के आगे सरेंडर बता रहे हैं। पाकिस्तानी सीनेट के विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर हुसैन ने इस बोर्ड को गलत बताते हुए कहा है कि इसे जंग के बाद गाजा को बाहरी लोगों द्वारा चलने के लिए बनाया गया था, जो असल में फिलीस्तीन के लोगों से उनका खुद का राज चलाने का अधिकार छीन लेता है और यह नए जमाने की गुलामी जैसा लगता है। भारत ने अभी तक नहीं लिया कोई फैसला इस बीच भारत ने अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए दिए गए आमंत्रण पर कोई फैसला नहीं लिया है। मामले से परिचित लोगों ने बुधवार को यह जानकारी दी है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने बोर्ड में शामिल होने के लिए कई वैश्विक नेताओं को आमंत्रित किया था। इस सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी शामिल हैं। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि भारत इस पहल के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है क्योंकि इसमें संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं।

सीमा पर खुशियों का सवेरा, योगी सरकार के सुशासन से चौगुर्जी गांव में रचा गया इतिहास

यूपी-नेपाल सीमा पर बसे गांव में योगी सरकार लाई खुशियों का सवेरा पुल से चलकर आई ‘जिंदगी’ चौगुर्जी में सीएम योगी के मार्गदर्शन, डीएम की सक्रिय पहल से बदली 109 परिवारों की बदली तकदीर कर्णाली और मोहना नदी पर बने नए पांटून पुल का लोकार्पण लखनऊ/लखीमपुर खीरी भारत-नेपाल सीमा पर बसा चौगुर्जी गांव वर्षों तक विकास से कटे रहने की मजबूरी झेलता रहा। नदी, दूरी और दुर्गम भूगोल ने यहां के 109 परिवारों को मुख्यधारा से अलग-थलग कर दिया था। लेकिन योगी सरकार के “हर गांव तक विकास” के संकल्प ने आज इस सीमांत गांव की नियति ही बदल दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित सुशासन मॉडल का जीवंत उदाहरण गुरुवार को तब देखने को मिला, जब जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल की प्रशासनिक तत्परता और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से चौगुर्जी गांव को ‘जिंदगी’ की वह सौगात मिली, जिसका इंतजार दशकों से था। पुल बना, दूरी घटी, अब घंटे नहीं, मिनटों में सफर गुरुवार को कर्णाली व मोहना नदी पर बने नए पांटून पुल का लोकार्पण डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल और निघासन विधायक शशांक वर्मा ने किया। यह पुल सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि गांव के लिए जीवन-रेखा साबित हुआ है। जहां पहले गांव तक पहुंचने में दो घंटे लगते थे, अब एंबुलेंस, स्कूल बस और आवश्यक सेवाएं मिनटों में उपलब्ध होंगी। यह बदलाव योगी सरकार की उस नीति का परिणाम है, जिसमें सीमांत और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंच प्राथमिकता है। शुद्ध जल, स्वस्थ जीवन, आर्सेनिक से मिली मुक्ति योगी सरकार के जल जीवन मिशन के तहत चौगुर्जी के 109 परिवारों को नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा मिली। वर्षों से आर्सेनिक युक्त पानी पीने को मजबूर ग्रामीणों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं। बटन दबाते ही नलों से निकला साफ पानी इस बात का प्रतीक बना कि सरकार की योजनाएं अब कागजों से निकलकर ज़मीन पर उतर चुकी हैं। अंधेरे से उजाले की ओर, सोलर लाइटों से रोशन गांव सीमांत गांव की गलियों में अब अंधेरा नहीं, बल्कि उम्मीद की रोशनी है। 20 सोलर स्ट्रीट लाइटों के लोकार्पण से न सिर्फ गांव जगमगाया, बल्कि सुरक्षा और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया। यह पहल योगी सरकार की ग्रीन एनर्जी और आत्मनिर्भर गांव की सोच को दर्शाती है। शिक्षा को मिली नई उड़ान, बच्चों के सपनों को लगे पंख परिषदीय विद्यालयों में सौर ऊर्जा, स्मार्ट क्लास और नया फर्नीचर उपलब्ध कराकर सरकार ने यह संदेश दिया कि सीमा पर रहने वाला बच्चा भी वही अवसर पाएगा, जो शहरों में उपलब्ध हैं। अब चौगुर्जी के बच्चे भी डिजिटल शिक्षा से जुड़कर देश की मुख्यधारा का हिस्सा बनेंगे। ग्रामीणों की जुबानी, यह सिर्फ विकास नहीं, सम्मान है ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि यह दिन उनके जीवन का सबसे बड़ा पल है। इतने वर्षों बाद हमें पुल, साफ पानी, रोशनी और शिक्षा मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, विधायक और डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने हमारे गांव को पहचान दी है। चौगुर्जी गांव की यह तस्वीर लखीमपुर खीरी में चल रहे उस व्यापक बदलाव की कहानी कहती है, जहां योगी सरकार के नेतृत्व में सीमा, दूरी और संसाधनों की कमी अब विकास में बाधा नहीं बन रही।

पेंच जल विद्युत गृह ने मॉक ड्रिल में दिया महाराष्ट्र के तीन ताप विद्युत गृहों को बैकअप

भोपाल मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह के माध्यम से उच्च स्तरीय अभियान्त्रिकी दक्षता, समन्वय एवं परिचालन तत्परता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए महाराष्ट्र राज्य विद्युत पारेषण कम्पनी (MahaTransco) के साथ गत दिवस सफलतापूर्वक ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल की। यह अभ्यास विशिष्ट आपातकालीन परिस्थितियों या राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के आंशिक अथवा पूर्ण विफल होने की स्थिति में विद्युत प्रणाली की त्वरित बहाली एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की दृष्टि से किया जाता है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी के पेंच जल विद्युत गृह से महाराष्ट्र राज्य स्थित कोराडी ताप विद्युत गृह (महा-जेनको), खापरखेड़ा ताप विद्युत गृह (महा-जेनको) व विदर्भ औद्योगिक विद्युत गृह (अदाणी समूह), नागपुर तक एक आयलैंड का निर्माण कर महाराष्ट्र की लगभग 5 हजार मेगावाट उत्पादन क्षमता को बैकअप दिया गया। क्यों की जाती है मॉक ड्रिल भारतीय विद्युत ग्रिड संहिता (इंडियन इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड – IEGC) एवं MEGC 2020 के प्रावधानों के अंतर्गत ग्रिड पुनर्बहाली प्रक्रियाओं का सामयिक परीक्षण व सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इसमें पूर्ण या आंशिक ब्लैकआउट की स्थिति में ब्लैक स्टार्ट प्रक्रिया, आयलैंड का निर्माण व उसके पुनः राष्ट्रीय ग्रिड के साथ समन्वय की व्यवस्था शामिल है। मॉक ड्रिल कैसे की गई पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह में यह ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल गत दिवस 21 जनवरी को सुबह 10:03 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक सफलतापूर्वक संचालित की गई। इस मॉक ड्रिल में आयलैंड के माध्यम से पेंच जल विद्युत गृह से लगभग 20 मेगावाट विद्युत की आपूर्ति महाराष्ट्र के तीन ताप विद्युत गृहों कोराडी ताप विद्युत गृह, खापरखेड़ा ताप विद्युत गृह व विदर्भ औद्योगिक विद्युत गृह को की गई। इस मॉक ड्रिल में आपातकालीन स्थिति में विद्युत गृह को प्रारंभ करने की तकनीकी क्षमता का परीक्षण किया गया। लगभग दो घंटे तक आयलैंड के सफल एवं स्थिर संचालन के बाद दोपहर 12:02 बजे पेंच जल विद्युत गृह को राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के साथ सफलतापूर्वक पुनः समन्वित (री-सिंक्रोनाइज) किया गया। यह संपूर्ण प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप पूर्ण की गई, जो मध्यप्रदेश पावर कंपनी की उच्च स्तरीय अभियान्त्रिकी दक्षता, समन्वय व परिचालन तत्परता को प्रदर्शित करती है। ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल क्या है ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल एक विशेष तकनीकी अभ्यास है, जिसके अंतर्गत किसी भी पूर्ण या आंशिक ब्लैक आउट की स्थिति में विद्युत गृह को बाह्य ग्रिड सहायता के बिना, सेल्फ स्टार्ट जनरेटरों की सहायता से चालू किया जाता है। सामान्यतः यह प्रक्रिया जल अथवा गैस आधारित विद्युत गृहों द्वारा की जाती है, जहाँ स्थानीय स्टैंड-अलोन विद्युत स्रोतों जैसे डीजल जनरेटर सेट के माध्यम से सहायक प्रणालियों को विद्युत आपूर्ति देकर क्रमशः ताप विद्युत इकाइयों को प्रारंभ किया जाता है। यह अभ्यास त्वरित समाधान, प्रणाली की विश्वसनीयता तथा अभियंताओं की तकनीकी तत्परता एवं दक्षता का व्यावहारिक परीक्षण होता है। पेंच जल विद्युत गृह की विशिष्ट भूमिका पिछले वर्षों में ग्रिड संबंधी घटनाओं के परिपेक्ष्य में ब्लैक स्टार्ट सक्षम विद्युत गृहों की निरंतर तत्परता, परीक्षण एवं अभ्यास अत्यंत आवश्यक है, जिससे आपातकालीन स्थितियों में विद्युत प्रणाली की शीघ्र बहाली कर आर्थिक एवं सामाजिक क्षति को न्यूनतम किया जा सके। उल्लेखनीय है कि सेंट्रल इंडिया व विदर्भ क्षेत्र के निकटस्थ उपलब्ध एकमात्र जल विद्युत स्रोत 160 मेगावाट क्षमता का पेंच जल विद्युत गृह है। इस दृष्ट‍ि से पेंच जल विद्युत गृह आपातकालीन तकनीकी अभ्यास के लिए अहम भूमिका रखता है। पेंच जल विद्युत गृह के माध्यम से आसपास स्थित महाराष्ट्र के विभिन्न ताप विद्युत गृहों को आपातकालीन परिदृश्य निर्मित कर इस अभ्यास को क्रियान्वित किया गया।  

बच्चों की ऑनलाइन दुनिया पर लग सकता है ताला, 16 वर्ष से कम उम्र के लिए सोशल मीडिया बैन पर विचार

दावोस/अमरावती आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह खुलासा राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान ब्लूमबर्ग से बातचीत में किया। नारा लोकेश ने कहा कि कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया पर मौजूद कई तरह की सामग्री को सही तरीके से समझ नहीं पाते, जिससे उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों को ऐसे प्लेटफॉर्म पर नहीं होना चाहिए। वे यह नहीं समझ पाते कि वे किस तरह के कंटेंट के संपर्क में आ रहे हैं। ऐसे में एक मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है।” ऑस्ट्रेलिया के कानून से प्रेरणा गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार ने पिछले महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए TikTok, X (ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस कानून के तहत न तो बच्चे नए अकाउंट बना सकते हैं और न ही पुराने अकाउंट चालू रख सकते हैं। आंध्र प्रदेश सरकार इसी मॉडल का अध्ययन कर रही है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो आंध्र प्रदेश भारत का पहला राज्य होगा, जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानूनी पाबंदी लगाएगा। बच्चों की सुरक्षा ही मकसद तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पिछली YSRCP सरकार के दौरान सोशल मीडिया का दुरुपयोग हुआ था और खासकर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक व अपमानजनक हमले किए गए। उन्होंने कहा, “कम उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे ऑनलाइन मौजूद नकारात्मक और नुकसानदायक कंटेंट को समझ सकें। इसलिए आंध्र सरकार दुनिया के बेहतरीन उदाहरणों का अध्ययन कर रही है, खासकर ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 सोशल मीडिया कानून का।” इस कदम को सेंशरशिप ना समझें हालांकि, दीपक रेड्डी ने यह भी साफ किया कि इस कदम को सरकारी निगरानी या सेंसरशिप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, “इसका उद्देश्य सिर्फ बच्चों को जहरीले कंटेंट, ऑनलाइन नफरत और मानसिक नुकसान से बचाना है।” फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव पर विचार और अध्ययन के चरण में है। आने वाले समय में यदि इसे लागू किया जाता है, तो यह डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।

मानसि‍क स्वास्थ्य पहल से विद्यार्थियों के समग्र विकास को मिलेगा नया आयाम

आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी में सहायक कुलसचिव एवं प्रभारी प्राचार्य के लिए प्रशिक्षण भोपाल उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, शाहपुरा भोपाल में सहायक कुलसचिव एवं प्रभारी प्राचार्यों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विषय-विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों के बारे में जानकारी दी जा रही है। गुरुवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुलसचिव व प्रभारी प्रचार्य को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस अवसर पर विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ. ऊषा नायर ने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक पहल की जा रही हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक कल्याण को सुनिश्चित करना है। डॉ. नायर ने कहा कि इन पहलों के माध्यम से विद्यार्थियों के भावनात्मक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होगा। परामर्श, मार्गदर्शन, जागरूकता कार्यक्रमों एवं सहयोगात्मक गतिविधियों के जरिए विद्यार्थी तनाव, चिंता और भावनात्मक दबाव को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इससे उनमें आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच तथा जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण का विकास होगा। उन्होंने कहा कि समय पर परामर्श, सहायता एवं संवेदनशील वातावरण के निर्माण से जोखिम की स्थिति में मौजूद विद्यार्थियों को आवश्यक सहयोग मिल सकेगा, जिससे न केवल मानसिक स्थिरता सुनिश्चित होगी बल्कि जीवन की रक्षा भी संभव हो पाएगी। इन पहलों के माध्यम से एक स्वस्थ, सुरक्षित एवं सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण का निर्माण होगा, जहां प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ सहानुभूति, सहयोग और समग्र विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाएगा। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत शिक्षण संस्थानों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच समन्वय एवं सहयोग को भी सुदृढ़ किया जाएगा। मनोवैज्ञानिकों, परामर्शदाताओं एवं प्राध्यापकों के संयुक्त प्रयासों से एक प्रभावी सहयोग तंत्र विकसित होगा, जो विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप समय पर सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 20 विश्वविद्यालयों के सहायक कुलसचिव एवं 20 महाविद्यालयों के प्रभारी प्राचार्य उपस्थित रहे।  

लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर पर समर्पित होगी नई दिल्ली गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाली म.प्र. की झांकी

 भोपाल लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड-2026 में मध्यप्रदेश की भव्य झांकी शामिल होगी झांकी में ‘पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर’ के गौरवशाली व्यक्तित्व, सुशासन, आत्मनिर्भरता, नारी सशक्तीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया जायेगा। झांकी के अग्र भाग में लोकमाता देवी अहिल्याबाई की चिर-परिचित प्रतिमा को दर्शाया गया है, जिसमें वे हाथ में शिवलिंग धारण किए पद्मासन में विराजमान हैं। यह दृश्य भारतीय मातृशक्ति की सौम्यता, गरिमा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। झाँकी के मध्य भाग में लोकमाता अहिल्याबाई अपने मंत्री-गण एवं सैनिकों के साथ दिखाई गई हैं, जो उनके सुदृढ़ प्रशासन और न्यायप्रिय शासन व्यवस्था को दर्शाता है। इसके निचले हिस्से में उनके शासनकाल में होल्कर साम्राज्य द्वारा किए गए मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्यों का चित्रण है, जहाँ एक सैनिक पहरा देते हुए सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का संदेश देता है। अंतिम भाग में देवी अहिल्याबाई की राजधानी महेश्वर के प्रसिद्ध घाट, मंदिर एवं किले को प्रदर्शित किया गया है। नीचे पवित्र नर्मदा नदी, घाट एवं नौकाओं का दृश्य अंकित है। झाँकी के अंतिम छोर पर महेश्वर घाट स्थित मंदिरों के शिखर दिखाई देते हैं। वहीं भित्तिचित्रों में लोकमाता अहिल्याबाई के मार्गदर्शन में महिलाएँ प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ी की बुनाई करती हुई नजर आती हैं, जो उनके काल में नारी सशक्तीकरण, स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण है। झाँकी के साथ चलते लोक कलाकारों का पारंपरिक नृत्य, इस प्रस्तुति को जीवंत, रंगीन और भावनात्मक रूप से प्रभावशाली बनाता है।