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नई-नवेली दुल्हन की हत्या: गुजरात में कांग्रेसी नेता के IAS भतीजे ने पत्नी को उतारा मौत के घाट, फिर खुद भी मरा

अहमदाबाद गुजरात में एक बड़े कांग्रेसी नेता के भतीजे और मैरीटाइम के अधिकारी ने अपनी पत्नी की हत्या के बाद खुद को भी गोली मारकर जान दे दी। दो महीने पहले ही दोनों की शादी हुई थी। किसी बात लेकर झगड़े के बाद अधिकारी ने पहले पत्नी की जान ली और फिर कुछ देर बाद खुद को गोली मारी। पत्नी की हत्या के बाद खुदकुशी करने वाले अधिकारी की पहचान यशराज सिंह गोहिल के रूप में हुई, जो मैरीटाइम बोर्ड (बंदरगाहों, तटीय विकास और समुद्री गतिविधियों के प्रबंधन देखने वाला एक सरकारी निकाय) के क्लास-1 अधिकारी थे। वह दिग्गज कांग्रेसी नेता और राज्य में पार्टी के पूर्व प्रमुख शक्तिसिंह गोहिल के भतीजे थे। पत्नी को गोली मारी, 108 पर कॉल किया फिर खुदकुशी पुलिस के मुताबिक बुधवार रात घर में यशराज और उनकी पत्नी राजेश्वरी गोहिल के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। इस दौरान यशराज सिंह ने अपने लाइसेंसी रिवॉल्वर से पत्नी राजेश्वरी को गोली मार दी। इसके बाद उन्होंने 108 इमर्जेंसी सर्विस पर कॉल करके मदद भी मांगी। मौके पर पहुंचे डॉक्टर ने राजेश्वरी को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने कहा कि जैसे ही इमर्जेंसी टीम फ्लैट से निकली। यशराज सिंह ने दूसरे कमरे में जाकर उसी रिवॉल्वर से खुद को गोली मार दी। मौके पर ही उन्होंने भी दम तोड़ दिया। UPSC की तैयारी कर रहे थे यशराज यशराज सिंह गोहिल हाल ही में गुजरात मैरीटाइम बोर्ड में अधिकारी बने थे और वह यूपीएससी की तैयारी में भी जुटे थे। दोनों शवों को पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस परिवार के सदस्यों से बातचीत करके यह पता लगाने में जुटी है कि किन वजहों से दोनों के बीच इतना तनाव था।

सुविधाएं वापस लेने की धमकी पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कड़ा प्रतिवाद

प्रयागराज नोटिस में प्राधिकरण ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे में यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनकी संस्था को माघ मेला में दी गई जमीन और सुविधाओं को निरस्त करके मेले में उनके प्रवेश को क्यों न प्रतिबंधित कर दिया जाए। इस नोटिस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया सामने आई है। माघ मेला-2026 में मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के लिए जाते समय शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पिछले पांच दिनों से इस पर यूपी में सियासी बवंडर मचा हुआ है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा एक और नोटिस जारी किए जाने के बाद शंकराचार्य के समर्थक और भक्त और नाराज हैं। इस नोटिस में प्राधिकरण ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे में यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनकी संस्था को माघ मेला में दी गई जमीन और सुविधाओं को निरस्त करके हमेशा के लिए मेले में उनके प्रवेश को क्यों न प्रतिबंधित कर दिया जाए। इस नोटिस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने जमीन और सुविधाएं वापस लेने की चेतावनी पर पलटवार करते हुए प्रशासन से पूछा है कि क्या समझकर दिया था और क्या समझकर वापस ले रहे हैं? निजी टीवी चैनलों से बातचीत में उन्होंने कहा- ‘क्या समझकर दिया था और क्या समझकर वापस ले रहे हो? देते समय तुम्हारी अकल कहां गई थी या लेते समय कहां अकल चली गई है, दोनों में तो अंतर आ गया न।’ उन्होंने कहा कि पीछे हटने की क्या बात है? 100 करोड़ सनातनधर्मियों के सम्मान को हम कैसे Give up कर दें? एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जो भी नोटिस आया है उसका जवाब दे दिया गया है। कल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने दी थी ये चेतावनी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और मेलाधिकारी ऋषिराज की ओर से को दिए गए नोटिस के जवाब के साथ प्राधिकरण के अफसरों से 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेने को कहा था। ऐसा न करने पर उन्होंने कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी थी। शंकराचार्य के अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र की ओर से दिए गए जवाब में मेला प्रशासन को बताया गया कि उनका पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका था, कोर्ट का आदेश बाद का है। साथ ही चेतावनी दी गई कि प्रशासन अपना नोटिस 24 घंटे के भीतर वापस ले। ऐसा न करने पर प्रशासन के खिलाफ कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत करने कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। आठ पेज के जवाब में प्रशासन की ओर से उठाए गए बिंदु पर स्थिति स्पष्ट की गई। प्रशासन ने दिया एक और नोटिस मेला प्रशासन द्वारा स्वामी जी को एक और नोटिस जारी किया गया जिसमें प्रशासन ने 24 घंटे में जवाब मांगते हुए मेला प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी है। प्रशासन द्वारा दिए गए नोटिस में 24 घंटे में जवाब न देने पर मेले से प्रतिबंधित करने और सुविधाएं निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगिराज सरकार ने आरोप लगाया कि सरकार पूरी तरह बदले की भावना के साथ कार्रवाई कर रही है। प्रशासन ने पारदर्शिता का उल्लंघन करते हुए शंकराचार्य शिविर पांडाल के पीछे बैक डेट (पुरानी तारीख) में नोटिस चस्पा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस लगाने के बाद अधिकारी खुद आकर कहने लगे की आपने इसका जवाब क्यों नहीं दिया। शैलेंद्र योगिराज सरकार ने यह भी कहा कि नोटिस का जवाब तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इसे प्रशासन को सौंप दिया जाएगा। बिना इजाजत पालकी पर संगम स्नान के लिए जाने का आरोप प्रशासन की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप है कि वह बिना इजाजत मौनी अमावस्या के दिन अपने अनुयायियों के साथ पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। भारी भीड़ के चलते उनसे पालकी छोड़कर पैदल संगम स्नान के लिए जाने का अनुरोध किया गया लेकिन वह अड़ गए। प्रशासन का कहना है कि उस दिन संगम स्नान के लिए करोड़ों श्रद्धालु जुटे थे और यदि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी पर अनुयायियों के साथ वहां जाते तो कोई अप्रिय घटना हो सकती थी। प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों पर बैरियर गिराने और धक्का मुक्की करने का अभी आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की जिद के चलते काफी देर तक वापसी मार्ग अवरुद्ध रहा जिससे सामान्य जनमानस को काफी असुविधा हुई। उधर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि यदि वह पैदल जाते तो उन्हें देखकर भीड़ उमड़ जाती और भगदड़ मच सकती थी। वह पिछले तीन वर्षों से पालकी पर इसीलिए जाते हैं ताकि श्रद्धालु दूर से उन्हें देख लें और वहां किसी प्रकार की असुविधा न हो।  

लूटकांड में लापरवाही पर सख्ती, 52 लाख की वारदात में थाना प्रभारी पर एसपी का प्रहार

सीतापुर यूपी के सीतापुर में सेवानिवृत्त लेखपाल के परिवार को बंधक बना कर 52 लाख की लूट के मामले में एसपी ने ऐक्शन लिया है। एसपी अंकुर अग्रवाल ने घटना के चार दिन बाद तालगांव थाना प्रभारी आशीष तिवारी को लाइन हाजिर कर दिया है। यूपी के सीतापुर में तालगांव में सेवानिवृत्त लेखपाल के परिवार को बंधक बना कर 52 लाख की लूट के मामले में चार दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। पुलिस अब तक एक दर्जन से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है पर किसी सटी नतीजे पर नही पहुंच सकी है। लापरवाही बरतने पर एसपी अंकुर अग्रवाल ने घटना के चार दिन बाद तालगांव थाना प्रभारी आशीष तिवारी को लाइन हाजिर कर दिया है। पुलिस लाइन में तैनात इंस्पेक्टर दिनेश प्रकाश पांडेय को अब तालगांव थाने की कमान सौंपी गई है। तालगांव के रसूलपुर स्थित सेवानिवृत्त लेखपाल अमर सिंह के घर में शनिवार देर रात नकाबपोश बदमाश घुस आए थे। बदमाशों ने घर में मौजूद पांच सदस्यों को बंधक बना लिया था। बदमाशों ने घर का कोना-कोना खंगाला था। बदमाशों ने महिलाओं के जेवर उतरवाने के साथ 52 लाख की लूट की बड़ी वारदात को अंजाम दिया था। जाते वक्त बदमाशों ने पुलिस से शिकायत करने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी थी। रविवार सुबह आईजी रेंज लखनऊ किरण एस घटनास्थल पर जांच के लिए पहुंचे थे। आईजी ने पीड़ित परिवार से मिलकर घटना के बारे में विस्तार से पूछताछ की थी। एसपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि आठ टीमें बदमाशों की तलाश में दबिश दे रही हैं। कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। बदमाशों के बारे में अहम सुराग मिले हैं। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया जाएगा। इस मामले में तालगांव थाना प्रभारी आशीष तिवारी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इंस्पेक्टर दिनेश प्रकाश पांडेय को अब तालगांव थाना प्रभारी बनाया गया है। आठ टीमें बदमाशों की तलाश में दे रहीं दबिश पुलिस अधिकारियों के मुताबिक लूटपाट की घटना को जिस तरह से अंजाम दिया गया है। अंदेशा है कि परिवार का कोई करीबी भी वारदात में शामिल है। बदमाशों को पहले से अंदाजा था कि किस कमरे में कौन रहता है। किस जगह कीमती सामान रखा है। कुछ दिन पहले ही बैंक से पैसा निकालकर भी लाए हैं। पुलिस कई अन्य पहलुओं पर भी जांच कर रही है। पुलिस की आठ टीमें बदमाशों की तलाश में दबिश दे रही हैं।  

दिल्ली शराब नीति मामला: केजरीवाल को दो केसों में क्लीन चिट, कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली कथित शराब घोटाले से जुड़े दो केस में आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल को राहत मिल गई है। समन को दरकिनार किए जाने की वजह से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज किए गए मुकदमों में दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री को बरी कर दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) पारस दलाल ने गुरुवार को आदेश पारित किया। विस्तृत आदेश का इंतजार है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएल) की धारा 50 के तहत दिए गए समन को दरकिनार किए जाने पर फरवरी 2024 में ईडी ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।  

इंटरपोल की हिट लिस्ट में जमशेदपुर का मो. अर्शियान

रांची/जमशेदपुर. रिपब्लिक डे से पहले अलकायदा और जैश-ए-मोहम्मद की ओर से देश के 26 स्थानों पर विस्फोट की धमकी दिए जाने के बाद पूरे भारत में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं. खुफिया एजेंसियों के इनपुट के बाद प्रमुख शहरों, रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. इसी सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने 14 संदिग्ध आतंकियों के पोस्टर जारी किए हैं. इनमें जमशेदपुर के आजादनगर निवासी मो अर्शियान का नाम भी शामिल है. दिल्ली पुलिस मो अर्शियान की पूरे जोर-शोर से तलाश कर रही है. दिल्ली पुलिस की लिस्ट में जमशेदपुर का मो अर्शियान दिल्ली पुलिस की ओर से जारी पोस्टर में जिन 14 आतंकियों की तस्वीरें हैं, उनमें मो अर्शियान को अलकायदा से जुड़ा हुआ बताया गया है. मो अर्शियान जमशेदपुर के आजादनगर थाना क्षेत्र के रोड नंबर-14 का रहने वाला है. उसका नाम सामने आने के बाद झारखंड पुलिस और जमशेदपुर जिला पुलिस भी सतर्क हो गई है. सभी थाना क्षेत्रों को अलर्ट कर दिया गया है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है. मो अर्शियान के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस सीबीआई के रिक्वेस्ट पर इंटरपोल ने मो अर्शियान के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है. इसका मतलब है कि अब उसकी तलाश इंटरनेशनल लेवल पर भी की जा रही है. सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि मो अर्शियान देश के बाहर छिपा हो सकता है या किसी इंटरनेशनल टेरर नेटवर्क के संपर्क में है. रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद उसके संभावित ठिकानों और संपर्कों की गहन जांच की जा रही है. भाई पहले से दिल्ली की जेल में है बंद जांच एजेंसियों के मुताबिक, मो अर्शियान का भाई मो जीशान पहले से ही दिल्ली की जेल में बंद है. दिल्ली पुलिस ने मो जीशान को 9 अगस्त 2017 को गिरफ्तार किया था. उस पर भी आतंकी संगठनों से जुड़े होने के गंभीर आरोप हैं. एजेंसियों का मानना है कि दोनों भाइयों के तार अलकायदा नेटवर्क से जुड़े हुए हैं. 2016 के ओडिशा केस के बाद सामने आया था नाम मो अर्शियान और उसके भाई का मो जीशान का नाम साल 2016 में तब सामने आया था, जब ओडिशा में अलकायदा से जुड़े आतंकी अब्दुल रहमान कटकी की गिरफ्तारी हुई थी. उस समय जांच के दौरान कई संदिग्धों के नेटवर्क का खुलासा हुआ था, जिसमें मो जीशान और मो अर्शियान का नाम प्रमुख रूप से सामने आया था. झारखंड पुलिस अलर्ट, लगातार निगरानी मो अर्शियान की तस्वीर जारी होने के बाद झारखंड पुलिस ने सभी जिलों को अलर्ट कर दिया है. जमशेदपुर में विशेष रूप से आजादनगर और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है. पुलिस पुराने संपर्कों, रिश्तेदारों और संभावित ठिकानों की जांच कर रही है. पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है.

निर्माण कार्यों को तत्परता से पूरा कराएं : उप मुख्यमंत्री

हिनौती गौधाम का किया निरीक्षण भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के गंगेव विकासखण्ड में हिनौती गौधाम का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि निर्माणाधीन रेस्टहाउस का शेष कार्य 15 फरवरी तक पूरा करें। हिनौती गौधाम के बाउन्ड्रीवॉल का निर्माण कार्य स्वीकृत कर दिया गया है। ग्राम पंचायत इसका तत्काल निर्माण कार्य शुरू कराए। एसडीएम सिरमौर निर्माण कार्यों के संबंध में आवश्यक प्रशासकीय तथा तकनीकी स्वीकृति जारी कराएं। रेस्टहाउस के समीप बनाई जा रही नवीन गौशाला और दो पुरानी गौशालाओं में सुधार करके गौवंश रखने की व्यवस्था करें। अन्य गौशालाओं का निर्माण कार्य भी तेजी से पूरा कराएं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने गौशाला भ्रमण के दौरान गौमाता का पूजन किया तथा गुड़ और चना खिलाया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि हिनौती गौधाम में गौवंश को रखने के लिए 34 गौशालाएं बनाई जानी हैं। इनमें से 47 हेक्टेयर क्षेत्र में निजी पूंजी निवेश के माध्यम से गौशालाओं का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए भूमि का चिन्हांकन करें। गौशाला के पूरे क्षेत्र का सीमांकन कराकर सीमा चिन्ह लगवाएं, जिससे निजी और शासकीय भूमि में किसी भी तरह का विवाद न रहे। हिनौती गौधाम को मॉडल गौशाला के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें दो एकड़ जमीन प्राकृतिक खेती के लिए भी निर्धारित करें। गौशाला के विकास का मास्टर प्लान बनाकर उसे प्रदर्शित कराएं, जिससे विकास कार्यों की पूरी जानकारी मिल सके। एसडीएम सिरमौर सुश्री दृष्टि जायसवाल ने गौधाम में चल रहे निर्माण कार्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष गंगेव श्री विकास तिवारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।  

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में AAP और कांग्रेस का गठबंधन टूटने के बाद, पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का किया ऐलान

चंडीगढ़. चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर बड़ी खबर है. यहां पर जहां कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी से गठबंधन करते हुए चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. लेकिन अब पार्टी अकेले मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव अकेले लड़ेगी. चंडीगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष लक्की ने यह ऐलान किया है. इससे पहले, कांग्रेस ने आप के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था और चुनावी फार्मूला भी शेयर किया था, जिस पर सांसद मनीष तिवारी ने भी सहमति जताई थी. आम आदमी पार्टी के नेता अनुराग ढांडा ने कहा कि कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी का ना कहीं कोई गठबंधन है, न कोई गठबंधन हो सकता है. कांग्रेस ने बीजेपी के साथ मिलकर इस देश को लूटा है। देश को लूटने वाली इन दोनों पार्टियों के खिलाफ AAP ही आम आदमी के संघर्ष की असली आवाज़ है. उधर, आम आदमी पार्टी ने चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों के लिए मेयर पद पर योगेश ढींगरा (वार्ड25), सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए  मुन्नवर ख़ान (वार्ड-29) और डिप्टी मेयर पद के लिए जसविंदर कौर  ( वार्ड-1) को प्रत्याशी बनाया और अब ये सभी उम्मीदवार शाम 4 बजे अपने-अपने नामांकन पत्र दाखिल करेंगे. वहीं, कांग्रेस के प्रधान एचएस लकी ने न्यूज़ 18 से कहा कि हमारा आम आदमी पार्टी से कोई गठबंधन नहीं है और  हम तीनों पदों पर अपना उम्मीदवार खड़ा कर रहे हैं. अहम बात है कि तीन दिन पहले पार्टी ने गठबंधन पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था और फार्मूला भी बताया था. इस फार्मुले के तहत मेयर का पद आम आदमी पार्टी को दिया गया था और बाकी दो पदों पर कांग्रेस चुनाव लड़ने जा रही थी. क्या है पूरा समीकरण उधर, आम आदमी पार्टी का एक पार्षद गायब हो गया है. अगर गयाब पार्षद बीजेपी में ज्वाइन करता है तो उनकी जीत पक्की हो सकती है. फिलहाल कोई भी आप काउंसलर या नेता उस गायब पार्षद के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहा है. निगम में कुल 35 पार्षद हैं और एक वोट सांसद का है. भाजपा के पास 18 वोट हैं, जबकि कांग्रेस के पास 7 और आम आदमी पार्टी के पास 11 पार्षद हैं. बहुमत का आंकड़ा 19 है. अगर कांग्रेस और आप में गठबंधन होता तो मुकाबला 18-18 की बराबरी पर अटक सकता था. लेकिन अब गठबंधन नहीं होगा और भाजपा का पलड़ा अब भारी हो गया है. गौर रहे कि 29 जनवरी को इन तीन पदों पर पार्षद वोट डालेंगे और इस बार गुप्त मतदान नहीं बल्कि हाथ उठाकर वोटिंग होगी.

दावोस में नजर आया मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास की गति का सकारात्मक प्रभाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश सरकार की उद्योग हितैषी नीतियों से दावोस बैठक बनी महत्वपूर्ण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पिछले 2 वर्ष में जितनी तीव्र गति से औद्योगिक विकास हुआ है उसका सकारात्मक प्रभाव दावोस में दिखाई दिया है। दावोस में विभिन्न क्षेत्रों के बड़े उद्योगपतियों और व्यापार प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें और चर्चा हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में विभिन्न इंटरशेनल कम्पनियों के साथ हुई बैठकों के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त की। नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में देश का पावर हब बन चुका है मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम-2026 में भारत का सबसे बड़ा दल पहुंचा है। आज भारत सभी क्षेत्रों में तेज गति से आगे बढ़ रहा है और बहुत जल्द चौथी सबसे सशक्त आर्थिक ताकत से एक से डेढ़ वर्ष में विश्व में तीसरा स्थान हासिल कर लेगा। बदलाव के इस दौर में मध्यप्रदेश में सोलर एनर्जी, आईटी, टूरिज्म सहित सभी सेक्टर्स में विकास की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों के सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश का पावर हब बन चुका है। प्रदेश में पंप स्टोरेज, सोलर एनर्जी और विंड एनर्जी उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है। ओंकारेश्वर में बांध के पानी पर सोलर प्लेट बिछाकर बिजली उत्पादन किया जा रहा है। राज्य में 32 लाख किसानों को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोलर पंप बांटे जा रहे हैं। इसी का परिणाम है कि देश में नवकरणीय ऊर्जा के माध्यम से उत्पादित सबसे सस्ती बिजली मध्यप्रदेश उपलब्ध करवा रहा है। प्रदेश के इस मॉडल को समझने और अध्ययन करने के लिए लोग काफी उत्साहित हैं। मालदीव के साथ मिलकर आगे बढ़ने के लिए तैयार है मध्यप्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दावोस इकोनॉमिक फोरम में मालदीव के मंत्री और अर्थशास्त्री डॉ. मोहम्मद सईद के साथ अलग-अलग विषयों पर चर्चा हुई। उद्योग क्षेत्र में साझोदारी के लिए डॉ. सईद ने बताया कि उनके देश में टूरिज्म के अलावा मत्स्य पालन, आईटी, हेल्थ जैसे अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति ने पूर्व में काफी ठोस निर्णय लिए हैं। मध्यप्रदेश सरकार मालदीव के साथ मिलकर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आगामी समय में वे स्वयं मालदीव की यात्रा करेंगे और वहां विकास के लिए परस्पर साझेदारी की संभावनाओं को तलाशेंगे। मालदीव भी भारत के साथ मिलकर आगे बढ़ने में रुचि रखता है। मालदीव के स्थानीय लोगों और वहां रहने वाले भारतवंशियों के परस्पर बेहतर सांस्कृतिक संबंध हैं। मध्यप्रदेश तेज गति से औद्योगिक विकास करने वाला सबसे युवा राज्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में एग्रीकल्चर पॉल्ट्री के क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं हैं। भविष्य में इस दिशा में भी अन्य राज्यों के साथ व्यापार को आगे बढ़ाएंगे। मध्यप्रदेश के पास पर्याप्त लैंड बैंक है, पर्याप्त बिजली है। ट्रांसपोर्टेशन के मामले में भी हमारा राज्य, भारत के मध्य में स्थित होने के कारण अनुकूल है। अब कई क्षेत्रों के निवेशक मध्यप्रदेश का रुख कर रहे हैं। उद्योग एवं व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए एमओयू हस्ताक्षरित हुआ है। मध्यप्रदेश सबसे तेज गति से औद्योगिक विकास करने वाला राज्य बना है। देश के 3 प्रमुख राज्यों ने औद्योगिक गति को बढ़ाया है, उनमें मध्यप्रदेश सबसे युवा राज्य है। बीते 2 वर्ष में राज्य सरकार के इन प्रयासों से प्रदेश में बेरोजगारी दर एक प्रतिशत के आसपास आ गई है। प्रदेश के युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए हो रहे प्रयासों के सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं।  

खुशहाल जिंदगी के लिए जानें ये 5 कड़वे सच

हर इंसान अपनी लाइफ में खुश रहना चाहता है, लेकिन फिर भी कई बार दुख, परेशानी और तनाव हमें घेर ही लेते हैं। दरअसल, ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि हम जीवन के कुछ बेहद सरल लेकिन गहरे सच को नजरअंदाज कर देते हैं। जो व्यक्ति इन बातों को समझ लेता है, वो छोटी-छोटी बातों में उलझता नहीं और हर हाल में खुश रहना सीख जाता है। जबकि जो इंसान इन सच्चाइयों को नजरअंदाज करके बेवजह की उम्मीद लगाए बैठा रहता है, उसे दुख और परेशानी के सिवा कुछ नहीं मिलता है। यकीन मानिए खुश रहना इतना भी मुश्किल नहीं है। बस जरूरत है तो कुछ चीजों को जानने की और उन्हें एक्सेप्ट करने की। आइए जानते हैं जीवन से जुड़े इसी सच को। हर चीज पर हमारा कंट्रोल नहीं हो सकता हम अक्सर सोचते हैं कि सब कुछ हमारे हिसाब से हो, हर परिस्थिति वैसी बने जैसी हम चाहें। लेकिन सच्चाई तो यही है कि जीवन में बहुत सी चीजें हमारे हाथ में नहीं होतीं, जैसे-पूरी मेहनत के बाद भी फल ना मिलना, किसी दूसरे का आपके साथ बुरा व्यवहार करना या अचानक कोई मुश्किल खड़ी हो जाना। जब हम ये मान लेते हैं कि हर चीज को नियंत्रित करना नामुमकिन है, तो मन को शांति मिलने लगती है। नियंत्रण की जरूरत कम हो जाती है और हम चीजों को स्वीकार करना सीख जाते हैं। यही बात हमारी चिंता को घटाकर खुश रहने की राह खोलती है। परिवर्तन संसार का नियम है कहने को तो ये बात बेहद छोटी है, लेकिन इसमें एक गहरी सच्चाई छुपी हुई है। लोग ये बात सुन तो लेते हैं लेकिन मानने को तैयार नहीं होते कि समय के साथ चीजें बदल जाती हैं। अच्छे दिन आते हैं और चले भी जाते हैं, वैसे ही बुरे वक्त भी हमेशा के लिए नहीं होते। अगर हम इन बातों को समझ लें कि हर चीज बदलने वाली है, तो हम दुख के समय टूटते नहीं और सुख के समय घमंड नहीं करते। परिवर्तन को जीवन का हिस्सा मानना हमें संतुलित बनाए रखता है और लाइफ के इस बैलेंस में ही सच्चा सुख छिपा हुआ है। तुलना करना दुख की सबसे बड़ी जड़ है इंसान के दुख की सबसे बड़ी वजह है कि वह दूसरों से अपनी तुलना करता है। किसी और की जिंदगी को देखकर, खुद को कम आंकने लगता है। आजकल सोशल मीडिया के दौर में तो ये चीजें और भी बढ़ गई हैं। अगर सुखी जीवन जीना है तो दूसरों से तुलना करना बंद करना होगा। हर इंसान को यह समझना चाहिए कि हर इंसान की जिंदगी का सफर अलग-अलग होता है। जब दो लोगों के चेहरे एक से नहीं होते तो भला दो इंसानों की जिंदगी एक जैसी कैसे हो सकती है। बस ये छोटी सी बात जो समझ जाता है, उसका जीवन बहुत आसान और सुलझा हुआ हो जाता है। सब कुछ हमेशा परफेक्ट नहीं होता जीवन में सब कुछ ठीक हो, हर काम बिना रुकावट के पूरा हो, ऐसी उम्मीद करना भी दुख का एक कारण है। असल जिंदगी में अधूरे काम, अधूरे सपने और उलझने हमेशा रहेंगी। कई बार परफेक्शन का पीछा करना ही दुख का कारण बन जाता है। जब हम लाइफ की इसी अनसर्टेनिटी को अपनाते हैं, तो हम प्रेजेंट में जीना सीखते हैं और यही प्रेजेंट हमें खुश रहने का रास्ता दिखाता है। हर नया दिन ईश्वर का दिया हुआ एक तोहफा है हम अक्सर भविष्य की चिंता में या बीते कल के पछतावे में खो जाते हैं, जो हमारे दुख का एक बड़ा कारण बन जाता है। लेकिन हर किसी को समझना चाहिए कि हर नया दिन, जीवन की नई शुरुआत है। ईश्वर हमें एक नया दिन जीने का मौका दे रहे हैं, इसके लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहिए और उसे भगवान का एक खूबसूरत तोहफा समझकर नई एनर्जी के साथ जीना चाहिए। जो इंसान हर नए दिन को नई शुरुआत मानकर जीना शुरु कर देता है, उसके जीवन के दुख खुद ब खुद कम हो जाते हैं।  

अमेरिका की नई पहल में पाकिस्तान शामिल, ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को मिला 9 मुस्लिम देशों का साथ

वाशिंगटन पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के निमंत्रण को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। यह संस्था मुख्य रूप से गाजा में युद्ध विराम लागू कराने और युद्ध से तबाह हुए क्षेत्र के पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए बनाई गई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस बोर्ड में शामिल होने के फैसले की पुष्टि की।   मंत्रालय ने कहा, 'पाकिस्तान का यह कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के तहत गाजा शांति योजना का समर्थन करने के प्रयासों का हिस्सा है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस मंच के जरिए स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता में वृद्धि और गाजा का पुनर्निर्माण सुनिश्चित होगा।' बयान में स्पष्ट किया गया कि पाकिस्तान 1967 से पहले की सीमाओं और 'अल-कुद्स अल-शरीफ' (यरूशलेम) को राजधानी मानकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश के गठन का पक्षधर है। क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस'? राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में गाजा युद्ध को समाप्त करने की अपनी योजना के तहत इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। इसमें कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया गया है। ट्रंप खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। हालांकि शुरुआत गाजा से हुई, लेकिन अब इसके जरिए अन्य वैश्विक संघर्षों को सुलझाने का लक्ष्य भी रखा गया है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, बोर्ड में स्थायी सीट के लिए 1 अरब डॉलर (करीब 8300 करोड़ रुपये) के योगदान का अनुरोध किया गया है, हालांकि पाकिस्तान या सऊदी अरब के आधिकारिक बयानों में इस भुगतान का जिक्र नहीं है। मुस्लिम देशों का बड़ा समर्थन पाकिस्तान के साथ ही अब तक 9 मुस्लिम बहुल देश इस बोर्ड का हिस्सा बनने पर सहमत हुए हैं। इनमें गाजा मध्यस्थता में अहम भूमिका निभाने वाले कतर और तुर्किये भी शामिल हैं। सऊदी अरब ने एक साझा फैसले की घोषणा करते हुए बताया कि सऊदी अरब, कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों ने इसका समर्थन किया है। इसके अलावा, कुवैत ने भी अलग से इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि की है। इजरायल और हमास के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए यह बोर्ड एक प्रशासक की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान का मानना है कि इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी मौजूदगी फिलिस्तीन के भाइयों और बहनों की पीड़ा को कम करने और उनके आत्मनिर्णय के अधिकार को दिलाने में मददगार साबित होगी।