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पंजाब में ED रेड पर सियासत तेज: केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

चंडीगढ़. पंजाब में लगातार हो रही प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारियों को लेकर आम आदमी पार्टी और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। केजरीवाल ने इंटरनेट मीडिया पोस्ट में कहा- जैसे ही बंगाल चुनाव खत्म हुए, मोदी ने पंजाब में रोज ईडी की रेड करना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ सालों में मोदी जी ने पंजाब के साथ बहुत धक्का किया है। पंजाबियों को तरह तरह से प्रताड़ित किया है। केजरीवाल ने आरोप लगाए कि पंजाब के पानी पर हमला किया, पंजाब यूनिवर्सिटी को लेने की कोशिश की, ग्रामीण विकास का पैसा रोक लिया और अब ईडी की ताबड़ तोड़ रेड शुरू कर दी। अशोक मित्तल के यहां रेड हुई, अगले दिन उनको बीजेपी में शामिल करवा लिया। रेड करवा मित्तल को पार्टी से तोड़ने के आरोप केजरीवाल ने कहा कि इसका मतलब ईडी की रेड का मकसद चोरी का पैसा ढूंढना नहीं था। केवल अशोक मित्तल को तोड़कर उन्हें बीजेपी में शामिल करवाना था। कुछ दिन पहले संजीव अरोड़ा के यहां भी रेड हुई। वो बीजेपी में शामिल नहीं हुए तो उनके यहां फिर से रेड करवा दी। पंजाब गुरुओं की धरती है। कई सौ साल पहले औरंगजेब ने जुर्म और अत्याचार के जरिए देश के कई भागों पर कब्जा कर लिया। प्रधानमंत्री ने भी बेईमानी से देश के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया है। उसके बाद औरंगजेब पंजाब पहुंचा। मोदी भी अब पंजाब पहुंचे हैं। पंजाबियों पर अत्याचार कर रहे मोदी केजरीवाल ने कहा कि औरंगजेब ने गुरुओं पर बहुत अत्याचार किए। प्रधानमंत्री भी पंजाबियों पर अत्याचार कर रहे हैं। पर गुरुओं ने कुर्बानी देकर औरंगजेब का सामना किया और लोगों को बचाया। आज गुरुओं की कुर्बानी से प्रेरणा लेकर पंजाब पीएम मोदी के अत्याचार का सामना करेगा और पूरे देश को उनके अत्याचार से बचाएगा। कुछ वर्ष पहले पीएम मोदी ने पंजाब के किसानों को ललकारा था और उन्हें किसानों के आगे झुकना पड़ा। आज मोदी जी ने पूरे पंजाब को ललकारा है।

केजरीवाल का बड़ा कदम: जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में नहीं होंगे पेश, सत्याग्रह शुरू

 नई दिल्ली दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में निचली अदालत ने बरी कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ जांच एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है. दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. अब अरविंद केजरीवाल ने यह ऐलान किया है कि वह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में पेश नहीं होंगे।  उन्होंने इसे लेकर जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र भी लिखा है. अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर कहा है कि वह खुद या वकील के जरिये उनके सामने पेश नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है. इसलिए मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह की राह पर चलने का फैसला लिया है।  दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा है कि जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले की अपील में सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रखूंगा. गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बेंच बदलने की अपील की थी. उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से यह केस सुनना बंद करने की अपील करते हुए दलील दी थी कि उनके मन में पहले से ही अरविंद केजरीवाल के मन में राय बन चुकी है।  अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में हिस्सा लेने का हवाला देते हुए कहा था कि जज अगर उस विचारधारा की समर्थक है और मैं विरोधी, तो क्या मुझे इंसाफ मिलेगा?  जस्टिस शर्मा के बहिष्कार को बताया सत्याग्रह आखिरकार सत्य की जीत हुई। अदालत ने मुझे निर्दोष बता दिया। अदालत ने कहा कि केजरीवाल निर्दोष है, केजरीवाल ने कोई भ्रष्टाचार किया। कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर सवाल खड़ा कर दिया। जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। यह केस जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा जी के सामने लगा। तब मेरे मन में बहुत बड़ा सवाल उठा कि क्या मुझे इनके सामने न्याय मिलेगा। इसके कई कारण हैं, लेकिन दो कारण मुख्य हैं, पहला कारण यह है कि आरएसएस की जिस विचारधारा वाली सरकार ने झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल में डाला, जज साहिबा ने माना कि उससे जुड़े संगठन के मंचों पर वह जाती रही हैं। मैं और आम आदमी पार्टी उस विचारधारा के घोर विरोधी हैं,ऐसे में क्या मुझे अन्या मिल सकता है। दूसरा कारण हैं हितों का टकराव। कोर्ट में मेरे खिलाफ सीबीआई है, और जस्टिस के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं। हमारे सामने दूसरी तरफ से वकील हैं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वह उनके दोनों बच्चों को केस देते हैं। कितने और कौन से केस मिलेंगे यह तय करते हैं। पैनल में 700 वकील हैं लेकिन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बेटे सबसे ज्यादा केस हासिल करने वाले वकीलों में हैं। उनको करोड़ों रुपये फीस में मिले। उनके बच्चों का भविष्य और कमाई तुषार मेहता पर निर्भर है। किसी के मन में स्वभाविक है कि यदि जज साहब के बच्चों का भविष्य वकील तय कर रहा है तो क्या वह उस वकील के खिलाफ फैसला कर पाएंगी। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, बहुत सम्मान करता हूं। जब मेरे खिलाफ गलत साजिश हुई तो न्यायपालिका ने ही न्याय दिया। इसी ने बेल दी। दोषमुक्त करार किया। जब जब देश पर आंच आई न्यायापालिका ने ही बचाया। मैं जस्टिस स्वर्ण कांता का भी बहुत सम्मान करता हूं। मुझे उनसे कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। लेकिन न्याय का बहुत बड़ा सिद्धांत है कि ना सिर्फ न्याय हो बल्कि न्याय होता दिखे। इसलिए मैंने उनसे अपील की थी कि वबह खुद को इस केस से अलग कर लें। लेकिन उन्होंने मेरी दलीलें खारिज कर दीं और कहा कि वह खुद सुनेंगी। मेरे सामने आसान रास्ता है कि मैं उनका आदेश मान लूं और एक बड़ा वकील खड़ा करके अपना केस लड़ूं। लेकिन यह मुद्दा सिर्फ मेरे केस का नहीं आम लोगों के न्यायपालिका पर भरोसे का है। दिविधा के मौके पर बापू ने हमें सत्याग्रह का रास्ता दिया था। अन्याय का सामना करो तो पहला कदम विरोध नहीं बातचीत हो। पूरी विनम्रता से बात रखनी चाहिए। सारी कोशिशों के बाद भी न्याय ना मिले तो अंतरात्मा की बात सूनो। शांति और विनम्रता के साथ सत्याग्रह करना चाहिए, फिर उसके जो भी परिणाम हो। इस पूरे प्रकरण में अन्याय करने वाले के प्रति गुस्सा, नफरत नहीं होना चाहिए। मैंने भी अपनी बात जस्टिस के सामने रखी, उनसे आग्रह किया कि किसी और जज के द्वारा सुन लिया जाए। उन्होंने मेरी प्रार्थना अस्वीकार कर दीं। उन्होंने कहा कि वह खुद को अलग नहीं करेंगी। उनके इस फैसले से मैं असहमत हूं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेरी आशंका और गहरी हो गई है कि क्या मुझे न्याय मिलेगा। बापू के रास्ते पर चलते हुए मैंने फैसला लिया है कि मैं इस केस में जस्टिस स्वर्ण कांता जी के सामने पेश हूंगा और ना ही कोई वकील जाएगा। वह जो भी फैसला सुनाएंगी, मैं सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र हूं। मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। यदि उनके सामने कोई केस लगता है जिसके विरोध में बीजेपी, केंद्र सरकार या तुषार मेहता नहीं हैं तो मैं उनके सामने पेश होऊंगा। आप पूछ सकते हैं कि मैं उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं जा रहा हूं। मैं तैयारी कर रहा हूं। कानून और न्यायपालिका के सम्मान को ध्यान में रखकर एक एक कदम उठाना है। मैं यह कदम अहंकार और विद्रोह में नहीं उठा रहा हूं। कानून को चुनौती देना नहीं है। इसी केस में मैंने हर अदालत में सहयोग दिया है। मैं न्यायपालिका का बहुत सम्मान करता हूं। देश के न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को बढ़ाना।

केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से कहा जस्टिस का मिसकैरिज होगा, जज ने नियम का हवाला देते हुए टाला फैसला

नई दिल्ली जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लेना चाहिए, इसके लिए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को एक बार फिर हाई कोर्ट में पेश हुए और सीबीआई के लिखित जवाब को लेकर अपना रिजॉइंडर स्वीकार किए जाने की गुजारिश की। अदालत ने केजरीवाल को प्रक्रिया की याद दिलाई पर उनके जवाब को स्वीकार कर लिया है और फैसले को दो घंटे के लिए टाल दिया। केजरीवाल ने कहा, ‘आपने अनुमति दी थी मैम की रिजॉइंडर फाइल कर दो। रजिस्ट्री स्वीकार नहीं कर रही है। वह आदेश में नहीं आया। अगर हमारे रिजॉइंटर को रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया। ’मिसकैरिज ऑफ जस्टिस' हो जाएगा।' जज ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा, 'बार बार ये नहीं बोलना चाहिए कि 'मिसकैरिज ऑफ जस्टिस' हो जाएगा, क्योंकि अदालत ने प्रक्रिया से बाहर जाकर आपका हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल को नियमों की याद दिलाते हुए कहा, 'रजिस्ट्री आपकी याचिका इसलिए स्वीकार नहीं करती क्योंकि खुद आप अपनी पैरवी कर रहे हैं। इसलिए आपको ही पेश होना पड़ेगा। रिजस्ट्री का एक नियम है और आपको फॉलो करना पड़ेगा। आपको पहले यहां से मंजूरी लेनी पड़ेगी। यह कोई असाधारण केस नहीं है। हमने आपको लिखित जवाब की कॉपी दी। रिजॉइंडर कभी उसका फाइल नहीं होता है। जिस दिन आप कोर्ट से गए थे अनुमति लेकर गए थे। आपने कहा कि आप मेरा सम्मान करते हैं। मैं हर वादी का सम्मान करती हूं। मैं इसे लिखित जवाब के रूप में रिकॉर्ड पर लूंगी। चूंकि फैसला 2:30 तक सुरक्षित है, मैं उसमें विचार करूंगी।' दो घंटे के लिए टला फैसला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, 'मैं इसे लिखित दलीलों के रूप में रिकॉर्ड पर ले रही हूं। केजरीवाल द्वारा पक्षपात का आरोप लगाने के कारण उन्हें यह छूट दी जा रही है। चूंकि फैसला 2:30 बजे सुनाया जाना है, और उनके द्वारा हलफनामा दिए जाने के मद्देनजर, फैसला अब 4:30 बजे सुनाया जाएगा।' केजरीवाल ने रिजॉइंडर में क्या कहा है? अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई की ओर से दाखिल जवाब के प्रत्युत्तर (रिजॉइंडर) में कहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने अटकलों, डर फैलने वाले बयानों और अपमानजनक आरोपों का सहारा लिया लेकिन जस्टिस शर्मा के बच्चों के सरकारी पैनल में होने को लेकर पक्षपात के आरोपों पर कुछ नहीं कहा है। उन्होंने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीबीआई इस मामले की सुनवाई केवल एक माननीय जज से करवाकर पूरी न्यायपालिका को बदनाम करना चाहती है।' केजरीवाल ने सीबीआई के उन आरोपों का विरोध किया कि वह 'दबाव बनाना चाहते हैं' और 'मामलों को लंबित रखना चाहते हैं' और 'बदनाम करने के लिए कैंपेन चला रहे हैं।'उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया है। केजरीवाल ने अपने रिजॉइंडर में कहा है कि सीबीआई ने खुद स्वीकार किया है कि केंद्र सरकार की कानूनी व्यवस्था और जस्टिस शर्मा के परिवार के बीच सक्रिय व्यावसायिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि खुद सीबीआई के मुताबिक, जस्टिस शर्मा के बच्चे पैनल में निष्क्रिय नाम नहीं है बल्कि सरकार से कानूनी काम हासिल कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने सीबीआई की उन दलीलों का भी विरोध किया कि जिसमें एजेंसी ने कहा कि केजरीवाल की दलीलों के आधार पर तो 'सभी जज अयोग्य हो जाएंगे।' उन्होंने कहा, 'तथ्यों पर जवाब देने के बजाय सीबीआई ने कहा कि 'देश के सभी जज अयोग्य हो जाएंगे' यह विवाद को बढ़ाने और पूरी न्यायपालिका को घसीटने की कोशिश है।'

केजरीवाल दिल्ली HC में फिर होंगे पेश, जज को हटाने की उठाई थी मांग

  नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक बार फिर वर्चुअल रूप से पेश होंगे. केजरीवाल दिल्ली आबकारी नीति मामले में निचली अदालत द्वारा उन्हें और अन्य आरोपियों को डिस्चार्ज करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान हितों के टकराव (conflict of interest) का मुद्दा एक बार फिर उठाएंगे।  केजरीवाल ने सीबीआई के हलफनामे पर अपना जवाबी हलफनामा पहले ही दाखिल कर दिया है. इसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के साथ हितों के टकराव के मुद्दा फिर से उठाया है।  केजरीवाल का तर्क है कि इस मामले की सुनवाई कर रहीं जज के बच्चे (बेटा ईशान शर्मा और बेटी शंभवी शर्मा) केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में शामिल हैं और उन्हें सरकारी काम मिलता है. उन्होंने इसे हितों का टकराव बताया है।  'जजों को बदनाम करने की कोशिश' वहीं, सीबीआई ने केजरीवाल के इस अतिरिक्त हलफनामे का तीखा विरोध किया है. CBI ने इसे अनावश्यक, जजों को बदनाम करने का प्रयास और न्यायिक इतिहास तथा भविष्य के लिए खतरनाक मिसाल (Dangerous Precedent) करार दिया है।  सीबीआई का कहना है कि अगर केजरीवाल की इस दलील को स्वीकार कर लिया गया तो केंद्र सरकार से जुड़े किसी भी मामले में लगभग कोई भी जज सुनवाई नहीं कर पाएगा, क्योंकि जजों के रिश्तेदार अक्सर सरकारी पैनल में वकील होते हैं. CBI ने इसे न्यायपालिका पर अनुचित हमला बताया है।  हालांकि, कोर्ट ने पिछला जवाब रिकॉर्ड लेने से इनकार किया था. अब केजरीवाल सोमवार को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के इजलास में पेश होकर अपना जवाब रिकॉर्ड पर लेने के लिए अपील करेंगे।  दरअसल, केजरीवाल ने 14 अप्रैल के अपने अतिरिक्त हलफनामे में दावा किया है कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में वकील हैं. आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जज के बेटे को साल 2023 में 2487, साल 2024 में 1784 और साल 2025 में 1633 केस आवंटित किए गए. केजरीवाल का तर्क है कि ये सीधा हितों का टकराव है, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल इस मामले में सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं।  AAP ने किया विरोध वहीं, अदालत के बाहर आम आदमी पार्टी ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी. पार्टी ने सवाल उठाया है कि आखिर उनके नेता का जवाब बार-बार रिकॉर्ड पर क्यों नहीं लिया जा रहा है. केजरीवाल ने 13 अप्रैल को भी जज के सुनवाई करने पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि जस्टिस शर्मा ने पहले उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका और मनीष सिसोदिया व के कविता की जमानत अर्जियां खारिज कर दी थीं।  क्या है मामला आपको बता दें कि ये पूरा कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति मामले में केजरीवाल और सिसोदिया को डिस्चार्ज कर दिया था. निचली अदालत ने कहा था कि सीबीआई का मामला न्यायिक जांच में टिकने के लायक नहीं है और पूरी तरह से बदनाम हो चुका है. इसी आदेश के खिलाफ सीबीआई ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर आज सुनवाई होनी है। 

केजरीवाल की दलीलों पर सॉलिसिटर जनरल का बयान, अदालत को नौटंकी का मंच नहीं बनने देना चाहिए

नई दिल्ली अरविंद केजरीवाल सोमवार को शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में हाजिर हुए और न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से आग्रह किया कि वह मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ CBI की याचिका पर होने वाली सुनवाई से वह खुद को अलग कर लें। दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति शर्मा ने सुनवाई से खुद को अलग करने के अनुरोध वाली केजरीवाल की याचिका को रिकॉर्ड में लिया। अदालत ने इस मामले में सीबीआई से जवाब भी मांगा और सुनवाई 13 अप्रैल को सूचीबद्ध की। केजरीवाल की याचिका पर सोमवार को सुनवाई में जोरदार दलीलें रखी गईं। मामले में अरविंद केजरीवाल ने खुद दलीलें रखनी शुरू की। केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने रिक्यूजल याचिका दाखिल की है। इसे रिकॉर्ड में लिया जाए। याचिका में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से आग्रह किया गया है कि वह मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लें। अदालत कोई नौटंकी का मंच नहीं- एसजी इस पर सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की अपील का विरोध किया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल के आरोप बेबुनियाद और अपमानजनक हैं। केजरीवाल के आरोप बेबुनियाद और कोर्ट की अवमानना ​​करने वाले हैं। अदालत कोई नौटंकी का मंच नहीं है। यदि अरविंद केजरीवाल खुद पेश होकर बहस करना चाहते हैं तो उनको अपने वकील को हटा देना चाहिए। 7 अन्य आरोपियों ने भी जज को हटाने की लगाई गुहार सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को यह भी बताया कि बरी किए गए 7 अन्य आरोपियों ने भी जज को सुनवाई से हटाने की याचिका दी है। वहीं जस्टिस शर्मा ने कहा कि यदि कोई और भी ऐसी अर्जी देना चाहता है तो दे सकता है ताकि मैं सभी अर्जियों पर एक ही बार में कोई फैसला ले सकूं। क्या है पूरा मामला? बता दें कि 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को बरी कर दिया था। अदालत ने CBI को फटकार लगाते हुए कहा था कि उसका केस न्यायिक जांच में बिल्कुल भी टिकने लायक नहीं है। केस पूरी तरह से खारिज हो चुका है। फैसले के खिलाफ मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने CBI की याचिका पर सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया। सीबीआई ने आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने भेजा था नोटिस न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने नोटिस जारी करने के साथ ही कहा था कि आरोप तय करने के चरण में ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष पहली नजर में गलत मालूम पड़ रहे हैं। इसके साथ ही न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले में CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की ट्रायल कोर्ट की सिफारिश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद केजरीवाल की ओर से एक याचिका में मामला किसी दूसरे जज के हवाले करने की मांग की गई। मुख्य न्यायाधीश भी ठुकरा चुके हैं गुजारिश बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने जस्टिस शर्मा से किसी दूसरे जज को सौंपने की केजरीवाल की गुजारिश को ठुकरा दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि खुद को सुनवाई से हटाने का फैसला संबंधित जज को ही लेना होता है। फिर अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई से न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को खुद को अलग करने का अनुरोध करते हुए अदालत का रुख किया। मामले में केजरीवाल ने खुद पेश होकर अपनी ओर से दलीलें रखीं।

मैं राजनीति छोड़ दूंगा… केजरीवाल का बड़ा बयान, आरोप लगाने वालों को ललकार

नई दिल्ली दिल्ली कोर्ट की तरफ से कथित शराब घोटाला मामले में आरोपमुक्त किए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जंतर मंतर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने खुद को कट्टर ईमानदार बताते हुए चैलेंज दे दिया कि अगर कोई ये साबित कर दे कि उन्होंने रिश्वत ली है तो वह राजनीति छोड़ देंगे। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी उनसे नफरत करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं 10 साल दिल्ली का सीएम रहा और इस दौरान पीएम मोदी ने मेरे खिलाफ जांच बैठा दी। उन्होंने कहा, दिल्ली सरकार का एक भी ठेकेदार अगर ये कह दे कि मैंने पैसे मांगे और फाइलों पर साइन किए, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि बीजेपी की सरकार ने 12 साल में देश को बर्बाद कर दिया। उन्होंने पीएम मोदी को को नौटंकीबाज कहते हुए कहा कि पूरे देश में पेपर लीक हो रहे हैं, और ये परीक्षा पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, मोदीजी कहते हैं केजरीवाल भ्रष्ट है। कोर्ट ने कह दिया, केजरीवाल कट्टर ईमानदार है। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी सोनम वांगचुक से डरते हैं। सोनम वांगचुक को जेल में डाल दिया। उन्हें तो पद्म भूषण और विभूषण मिलना चाहिए। अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, बस मार्शलों, महिलाओं के खाते में पैसे ट्रांसफर करने को लेकर कई वादे किए गए लेकिन कोई भी भी पूरा नहीं हुआ। उन्होंने बीजेपी की सरकार को धोखेबाज बताते हुए कहा कि आज लोग केजरीवाल की सरकार को याद करते हैं कि इससे तो अच्छा अरविंद केजरीवाल था।

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बरी किया केजरीवाल को, CBI हाईकोर्ट जाएगी

नई दिल्ली दिल्ली की शराब नीति से जुड़े मामले में अदालत से बरी होने के बाद अरविंद केजरीवाल भावुक नजर आए. फैसले के बाद उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पूरा का पूरा फर्जी केस बनाया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मिलकर आजाद भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा, ताकि आम आदमी पार्टी को खत्म किया जा सके. उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के पांच बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया. यहां तक कि एक सिटिंग मुख्यमंत्री को उनके घर से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जो भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ. उन्होंने दावा किया कि उन्हें छह महीने तक जेल में रखा गया और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को लगभग दो साल तक जेल में रहना पड़ा. केजरीवाल ने कहा कि यह पूरा मामला फर्जी था और उनकी छवि खराब करने के लिए उनके ऊपर कीचड़ उछाला गया. उन्होंने आरोप लगाया कि टीवी चैनलों पर लगातार उन्हें भ्रष्ट बताया गया. प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता के लिए देश और संविधान के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर सत्ता चाहिए तो अच्छे काम करके हासिल कीजिए. देश में महंगाई, बेरोजगारी, टूटी सड़कें और प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं हैं, जिनका समाधान किया जाना चाहिए. राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगी मनीष सिसोदिया को आरोपों से क्लीन चीट देते हुए बरी कर दिया है. कोर्ट ने साफ कर दिया कि केवल बिना ठोस और पर्याप्त सबूत के लगाए गए आरोपों पर विश्वास नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि विपक्ष के खिलाफ झूठे केस करना और उन्हें जेल में डालना प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता. देश तभी आगे बढ़ेगा जब जनता की समस्याओं का समाधान किया जाएगा. केजरीवाल ने इसे सत्य की जीत बताया और कहा कि संविधान, जिसे बाबा साहेब आंबेडकर ने देश को दिया, उसकी भावना अंततः विजयी होती है. इस मामले में सबसे पहले अदालत ने आबकारी विभाग के पूर्व कमिश्नर कुलदीप सिंह को बरी किया. इसके बाद मनीष सिसोदिया और अंत में अरविंद केजरीवाल को भी आरोपों से मुक्त कर दिया. कोर्ट ने टिप्पणी की कि सीबीआई द्वारा दायर की गई चार्जशीट में कई खामियां थीं और उसमें कई ऐसे सवाल थे जिनका संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया. जांच एजेंसी के सबूत कमजोर और अपर्याप्त पाए गए, इसलिए राहत दी गई. कोर्ट ने कहा कि जब किसी संवैधानिक पद या सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाये जाते हैं, तो उनके समर्थन में ठोस सबूत होना अनिवार्य है. केवल आरोप लगाने भर से मामला नहीं बन सकता. हालांकि, जांच एजेंसी सीबीआई इस फैसले से असंतुष्ट है और उन्होंने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देने का इशारा किया है. सीबीआई के वकील आदेश का विस्तृत अध्ययन कर अपील दायर करेंगे. यह मामला 2022-23 की दिल्ली एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा था, जिस आधार पर सीबीआई ने केस दर्ज किया था. बाद में ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में भी मामला दर्ज किया गया था. इस केस में कई आम आदमी पार्टी के नेताओं को जेल जाना पड़ा और जमानत भी कई बार खारिज हुई. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के लिए यह फैसला एक बड़ी राहत माना जा रहा है और इससे पार्टी पर लगे कई कानूनी दबावों से उन्हें मुक्ति मिली है.    

ED का बड़ा दांव: केजरीवाल को मिली राहत के खिलाफ अदालत में करेगी अपील

नई दिल्ली ईडी ने समन की अनदेखी करने के मामले में अरविंद केजरीवाल की दोबारा कानूनी घेरेबंदी करने की तैयारी कर ली है। ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया गया कि वह दिल्ली आबकारी मामले में समन का पालन नहीं करने के आरोप में अरविंद केजरीवाल को दो मामलों में बरी करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देगी। केजरीवाल को मिली राहत को देंगे चुनौती ईडी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि एजेंसी ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी। इसी साल 22 जनवरी को ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को उनके खिलाफ दर्ज दो अलग-अलग मामलों में बरी कर दिया था। ये मामले कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले की जांच में शामिल होने के लिए भेजे गए समन के बाद ईडी के सामने पेश नहीं होने को लेकर दर्ज किए गए थे। याचिका वापस लेने की परमिशन दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के सिलसिले में ईडी की ओर से उन्हें जारी समन को चुनौती देने वाली अपनी याचिका वापस लेने की परमिशन दे दी। केजरीवाल के वकील ने कहा कि वह इस मामले को नहीं बढ़ाना चाहते हैं क्योंकि समन के बाद एजेंसी के सामने पेश नहीं होने के कारण दर्ज मामले में उनको पहले ही बरी कर दिया गया है। निचली अदालत ने फैसले में क्या कहा? समन की अनदेखी मामले में यह देखते हुए कि आरोपी एक मौजूदा मुख्यमंत्री थे। उन्हें भी आने-जाने का अपना मौलिक अधिकार था… ट्रायल कोर्ट ने कहा कि समन की सही सेवा को कानूनी चुनौती दी जा सकती है। जांच एजेंसी ईडी यह साबित करने में नाकाम रही है कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन की अवहेलना की। नौवें समन के बाद पहुंचे थे हाईकोर्ट बता दें कि केजरीवाल ने ईडी नौवें समन के बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने 20 मार्च, 2024 को ईडी से जवाब मांगा था। हालांकि अदालत का कहना था कि वह इस स्टेज पर केजरीवाल को कोई अंतरिम राहत नहीं देगी। केजरीवाल को उसी शाम ईडी की ओर से गिरफ्तार कर लिया गया था। फिलहाल केजरीवाल मनी लॉन्ड्रिंग केस में अंतरिम बेल पर हैं। ईडी के क्या हैं आरोप? ईडी का आरोप है कि केस के दूसरे आरोपी पूर्व की एक्साइज पॉलिसी बनाने के लिए केजरीवाल के संपर्क में थे। इससे उन्हें गलत फायदा हुआ। वहीं अपनी अर्जी में केजरीवाल ने गिरफ्तारी, पूछताछ और बेल देने के संबंध में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी है। उन्होंने कई मुद्दे उठाए हैं जिसमें शामिल है कि क्या कोई पॉलिटिकल पार्टी एंटी मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत आती है।

दिल्ली शराब नीति मामला: केजरीवाल को दो केसों में क्लीन चिट, कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली कथित शराब घोटाले से जुड़े दो केस में आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल को राहत मिल गई है। समन को दरकिनार किए जाने की वजह से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज किए गए मुकदमों में दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री को बरी कर दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) पारस दलाल ने गुरुवार को आदेश पारित किया। विस्तृत आदेश का इंतजार है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएल) की धारा 50 के तहत दिए गए समन को दरकिनार किए जाने पर फरवरी 2024 में ईडी ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।  

गुजरात में केजरीवाल का तीखा संदेश: जेल जाने की बात कही, कार्यकर्ताओं को दिलाई शपथ

वडोदरा गुजरात के वडोदरा में आम आदमी पार्टी का सम्मेलन हुआ। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी इस सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर जोरदार हमला बोला सभी पार्टी के सभी एकजुट होकर बीजेपी का सामना करने के लिए कहा। अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि जैसे-जैसे गुजरात के चुनाव पास आएंगे, बीजेपी सबको भेजना शुरू होगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, जेल जाने के लिए तैयार रहना होगा। इसी के साथ उन्होंने ये भी कहा कि ये लोग जेल भेजेंगे और मैं 2 महीने में छुड़ा कर ले कर आउंगा।   इस दौरान उन्होंने कहा, अगर 30 साल में बीजेपी ने अच्छी सरकार चलाई होती तो आज यहां एक भी आदमी नहीं आता। आप यहां आए हैं, इसका मतलब आप बहुत दुखी है। उन्होंने कहा, सब मिलकर 2027 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनाएंगे और ऐसी सरकार बनाएंगे जहां हर कोई खुशहाल होगा और सारी सुविधा मिलेगी। कोई डराएगा नहीं और कोई डरेगा नहीं। अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर सबको जेल भेजने का आरोप लगाया।। उन्होंने कहा, 2 साल के अंदर ये सबको जेल भेजेंगे और जेल जाने के लिए तैयार रहना होगा। अरविंज केजरीवाल ने कहा, मैं 6 महीने जेल रहकर आया, मेरा क्या कसूर था। केजरीवाल ने आगे कहा, ये लोग कार्यकर्ताओं को भी जेल भेजेंगे लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, मैं 2-3 महीने में छुड़वा कर ले कर आउंगा। इसी के साथ केजरीवाल ने कार्यकर्ताओं से एक कसम भी खिलवाई। अरविंद केजरीवाल ने कहा, अब बस दो साल बचे हैं और इस दौरान खूब मेहनत करनी होगी। लोगों को जोड़नाी होगा। सब कसम खाकर जाएंगे कि हर कार्यकर्ता हर रोज पांच वोट बनाएगा।