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चेयरमैन बनने के लिए 13 सदस्य चाहिए, AAP की जीत पर भगवंत मान की जमकर सराहना

लुधियाना पंजाब के लुधियाना में जिला परिषद चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अन्य पार्टियों से बेहतर प्रदर्शन तो किया लेकिन जिला परिषद का चेयरमैन बनाने के लिए जरूरी संख्या को वो भी हासिल नहीं कर सके। आम आदमी पार्टी ने जिला परिषद की 11 सीटें जीती हैं।  चेयरमैन बनाना आम आदमी पार्टी के लिए भी आसान नहीं होगा। आम आदमी पार्टी को अपना चेयरमैन बनाने का सारा दारोमदार अब विधायक मनप्रीत सिंह अयाली के हाथ में है। आम आदमी पार्टी को चेयरमैन बनाने के लिए दो सदस्यों की जरूरत है और मनप्रीत अयाली के पास तीन सदस्य हैं। कांग्रेस के पास 8 और शिअद के पास 3 सीटें कांग्रेस के पास 8 और शिअद के पास 3 सीटें हैं। कांग्रेस और शिअद आम आदमी पार्टी को समर्थन नहीं देंगे। अगर मनप्रीत अयाली ने आप को समर्थन नहीं दिया तो लुधियाना में जिला परिषद का चेयरमैन बनाने के लिए कांग्रेस में सेंधमारी करनी होगी। हालांकि इस समय कांग्रेस के सदस्य भी पार्टी नहीं छोड़ेंगे क्योंकि एक साल बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। अयाली ने समर्थन दिया तो विधानसभा चुनाव में होगी मुश्किल हलका दाखा में मनप्रीत सिंह अयाली का वर्चस्व लंबे समय से है। उनकी मेहनत से ही उनके समर्थकों ने शानदार जीत हासिल की। अयाली अगर चेयरमैन बनाने के लिए आप को समर्थन देते हैं तो आने वाले विधानसभा चुनाव में उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं क्योंकि 2027 में उन्हें फिर से विधानसभा चुनाव में उतरना है और सामने उनका मुकाबला आप के उम्मीदवार से होगा। मेरे समर्थक दो चेयरमैन के लिए समर्थन मनप्रीत अयाली को पता है कि उनके समर्थन के बिना जिला परिषद का चेयरमैन नहीं बन सकता। ऐसे में अयाली ने अब नया दाव चल दिया है। अयाली ने कहा कि उनके तीन समर्थक चुनाव जीते हैं उनमें से एक को चेयरमैन बनाने के लिए जो समर्थन देना चाहते हैं वो साथ आएं। हम पूरे जिले में विकास करके दिखाएंगे। हमारे पास विकास करवाने का पूरा अनुभव है। लुधियाना जिला परिषद के जीते उम्मीदवार ललहेड़ी से जतिंदर सिंह औजला (अकाली दल), बीजा से अवतार सिंह (आम आदमी पार्टी), मटण से जगरूप सिंह (AAP), नीलों कलां से हरजोत सिंह मंगत (अकाली दल), खिरनियां से बरिंदरदीप कौर (AAP), मत्तेवाड़ा से ज्ञानप्रीत कौर ग्रेवाल (AAP), चक सरवां नथ से हरजीत कौर (अकाली दल), कद्दों से गुरविंदर सिंह गिल (कांग्रेस), रामगढ़ सरदारां से अवतार सिंह (कांग्रेस) जीते हैं। किला रायपुर से सिकंदर सिंह (AAP)। नारंगवाल से जसवीर कौर (AAP), पक्खोवाल से राजविंदर कौर बराड़ (कांग्रेस), सुधार से सतवंत सिंह (कांग्रेस), हंसकलां से अमनदीप कौर रूमी (निर्दलीय), बिंजल से सुखभिंदर सिंह (कांग्रेस), मानूके से शहरीन कौर (AAP), सिधवां कलां से गुरप्रीत कौर (AAP), गालिब कलां से हरिंदरजीत सिंह चाहल (कांग्रेस), पुड़ैन से गुरमीत सिंह (निर्दलीय) जीत दर्ज की है। इसके साथ ही हंबड़ा से अजीतपाल कौर (AAP), मोही से प्रो. प्रदीप कौर लटाला (निर्दलीय), गिल से बलराज सिंह (AAP), धांधरा से लखवीर कौर (AAP), आलमगीर से हरजीवन कौर (कांग्रेस), मांगट से तजपरविंदर सिंह (कांग्रेस) ने जीत हासिल की। ब्लॉक समिति के नतीजों का गणित ब्लॉक समिति की कुल 2838 सीटों में से 352 पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे और 2486 जोन के लिए मतदान हुआ. अब तक कुल 2097 सीटों के नतीजे आधिकारिक तौर पर घोषित किए गए हैं. इनमें AAP ने 892 सीटों पर जीत और 339 निर्विरोध सीटों के साथ कुल 1231 सीटों पर कब्जा किया है. कांग्रेस को 419 जीत और 3 निर्विरोध सीटों के साथ 422 सीटें मिली हैं. अकाली दल को 253, बीजेपी को 49 और बसपा को 26 सीटें हासिल हुई हैं. निर्दलीय उम्मीदवारों ने कुल 116 सीटें जीती हैं. अंतिम आंकड़ों का इंतजार चुनाव परिणामों की अंतिम तालिका का अभी भी इंतजार किया जा रहा है. मतगणना जारी रहने के कारण बाकी सीटों के नतीजे धीरे-धीरे स्पष्ट हो रहे हैं. अब तक के रुझानों और नतीजों ने पंजाब की राजनीति में AAP के बढ़ते प्रभाव को साफ कर दिया है. बीजेपी और अन्य छोटी पार्टियों के लिए ये नतीजे चुनौतीपूर्ण रहे हैं. 6 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जिला परिषद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. अंतिम आंकड़े घोषित होने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी. जिला परिषद लुधियाना: पार्टी-वाइज कुल सीटें आम आदमी पार्टी: 11 कांग्रेस : 8 शिअद: 3 आजाद(मनप्रीत अयाली गुट): 3 कुल सीटें 25 2018 में कांग्रेस ने जीती थी 25 की 25 सीटें 2018 में हुए जिला परिषद चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने जिले की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल करके अपना चेयरमैन बनाया था। तब पंजाब में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी और कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे। जिला परिषद का कार्यकाल 2023 में समाप्त हो गया था और तब से चुनाव नहीं करवाए गए। उससे पहले लुधियाना में अकाली दल का चेयरमैन रहा है। केजरीवाल ने की भगवंत मान की तारीफ आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब जिला पंचायत चुनाव पर में पार्टी की जीत के लिए मान सरकार की तारीफ की है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में निष्पक्ष चुनाव हुए। इससे ज्यादा निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकता है। निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बढ़िया प्रदर्शन किया। पंजाब की भगवंत मान सरकार से जनता खुश है। जनता ने आप सरकार के काम पर मुहर लगाई है। कल देर रात तक डेटा के अनुसार, पंजाब में ज़िला परिषद चुनावों के नतीजे इस प्रकार हैं: आप: 145 कांग्रेस: 30 अकाली दल: 26 बीजेपी: 6 बीएसपी: 3 अन्य: 7  बठिंडा जिला परिषद पर अकाली दल का कब्जा बठिंडा में 137 ब्लॉक समिति सीटों में से SAD ने 79 सीटें जीतीं, उसके बाद AAP (35) रही। जिला परिषद चुनावों में, SAD ने इस जिले में 17 में से 13 सीटें जीतीं। इस तरह, इस जिले में अपने जिला परिषद चेयरमैन को चुनने पर नियंत्रण हासिल कर लिया, जो पारंपरिक रूप से अकाली दल का गढ़ रहा है। : अबोहर जिला परिषद पर बीजेपी का दबदबा राज्य बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ के निर्वाचन क्षेत्र अबोहर में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला। उन्होंने इस विधानसभा क्षेत्र की दोनों जिला परिषद सीटों पर जीत हासिल की। ​​16 ब्लॉक समितियों में से बीजेपी ने 8 सीटें जीतीं, उसके बाद AAP और … Read more

कांग्रेस नेता बाजवा का हमला: पंजाब में सिर्फ भगवंत मान और केजरीवाल ही सुरक्षित

  चंडीगढ़, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कपूरथला में कांग्रेस नेता हरजिंदर सिंह पर हुए जानलेवा हमले के बाद राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब में अब भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के अलावा कोई भी सुरक्षित नहीं है। प्रताप सिंह बाजवा ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सुल्तानपुर लोधी की घटना दिल दहला देने वाली है। कपूरथला जिला परिषद के उपाध्यक्ष और कांग्रेस नेता हरजिंदर सिंह जिंदा, शाहजहांपुर गांव में अपने घर के बाहर गोलियों की बौछार में बाल-बाल बचे।” उन्होंने आगे कहा, “आम आदमी पार्टी सरकार में राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पंजाब में अब भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के अलावा कोई भी सुरक्षित नहीं है।” बताया जाता है कि कांग्रेस नेता हरजिंदर सिंह पर दो नकाबपोश हमलावरों ने फायरिंग की थी। इस ताबड़तोड़ गोलीबारी में उन्होंने भागकर अपनी जान बचाई। कांग्रेस नेता पर यह हमला घर के नजदीक हुआ था। फायरिंग के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। हालांकि, फायरिंग के कारण और हमलावरों के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी है। इससे पहले भी कांग्रेस की पंजाब इकाई ने राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाए कि पंजाब में दिन-प्रतिदिन बिगड़ती कानून-व्यवस्था के कारण गैंगवार और गोलीबारी की घटनाएं आम हो गई हैं और बदलाव के बड़े-बड़े नारे लगाने वाली झाड़ू पार्टी के मंत्री हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। आम आदमी पार्टी को पंजाब की जनता ने अपनी सुरक्षा के लिए चुना था, इस खून-खराबे के लिए नहीं। कांग्रेस इकाई ने मानसा, जालंधर, जगराओं, मोहाली और अमृतसर की हालिया घटनाओं का उदाहरण दिया। अमृतसर में मेडिकल शॉप और मानसा में आरटीआई कार्यकर्ता की दुकान पर गोलीबारी हुई थी। जालंधर में सुनार की दुकान को बंदूक के बल पर लूटा गया। जगराओं में कबड्डी खिलाड़ी की गोली मारकर हत्या की गई थी। इसके अलावा, मोहाली में रियल एस्टेट व्यापारी पर फायरिंग की घटना हुई थी।  

अंता उपचुनाव में आम आदमी पार्टी की एंट्री! केजरीवाल ने नरेश मीणा का साथ दिया

जयपुर अंता विधानसभा उपचुनाव से पहले सियासत में बड़ा उलटफेर हुआ है। आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा को समर्थन देने की घोषणा की है। इससे अब तक बीजेपी और कांग्रेस के बीच चल रही सीधी जंग त्रिकोणीय मुकाबले में बदल गई है। नरेश मीणा ने कुछ दिन पहले एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर केजरीवाल और आप से समर्थन की अपील की थी। मीणा ने लिखा था, “नए और निष्पक्ष राजनीतिक बदलाव के लिए मैं अंता उपचुनाव निर्दलीय के रूप में लड़ रहा हूं। कांग्रेस और बीजेपी के विकल्प के तौर पर मैं आप पार्टी से समर्थन की अपेक्षा करता हूं।” इसके जवाब में केजरीवाल ने लिखा — “नरेश जी, आम आदमी पार्टी आपके साथ पूरी तरह खड़ी है।” इसके बाद AAP ने औपचारिक रूप से मीणा को समर्थन देने की घोषणा कर दी। AAP के राजस्थान सह-प्रभारी घनेन्द्र भारद्वाज ने कहा, “बीजेपी और कांग्रेस ने दशकों से राजस्थान को लूटा है। अब जनता को नया विकल्प चाहिए। पूरे प्रदेश के AAP कार्यकर्ताओं से अपील है कि नरेश मीणा के समर्थन में जुटें।” उन्होंने बताया कि अंता उपचुनाव के लिए 31 सदस्यीय समन्वय समिति बनाई जाएगी और संभावना है कि केजरीवाल खुद भी चुनाव प्रचार के लिए अंता आ सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम राजस्थान में AAP के संगठनात्मक विस्तार की रणनीति का हिस्सा है। 2023 विधानसभा चुनाव में अंता से AAP को मात्र 0.76% वोट (1334 वोट) मिले थे, लेकिन केजरीवाल का समर्थन अब मीणा को एंटी-एस्टैब्लिशमेंट वोट दिला सकता है। अंता उपचुनाव में अब मुख्य मुकाबला कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया, बीजेपी के मोरपाल सुमन और निर्दलीय नरेश मीणा के बीच है। चुनाव 11 नवंबर को होगा और नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।  

केजरीवाल का पंजाब दौरा: जालंधर में शुरू होंगे 5000 करोड़ के बिजली ट्रांसमिशन कार्य

 जालंधर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पंजाब के दो दिवसीय दौरे पर हैं। केजरीवाल जालंधर और बठिंडा के दौरे पर रहेंगे।केजरीवाल आज जालंधर में मुख्यमंत्री मान के साथ बतौर मुख्य अतिथि शामिल होकर 5000 करोड़ के निवेश के साथ पंजाब में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कार्यों की शुरुआत करेंगे। इसी के साथ लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में आयोजित होने वाले वन इंडिया 2025 राष्ट्रीय सांस्कृतिक उत्सव में शिरकत करेंगे। गुरुवार को वह सीएम मान के साथ बठिंडा में 3100 नए खेल मैदानों का नींव पत्थर रखेंगे। यह पूरे पंजाब में विश्वस्तरीय खेल मैदान बनाने की परियोजना है। इनकी लागत 1184 करोड़ रुपये रखी है। इसके बाद वीरवार दोपहर को चंडीगढ़ में आयोजित एंटरप्रेन्योरशिप माइंडसेट कोर्स का मुख्यमंत्री मान के साथ शुभारंभ करेंगे।   

केजरीवाल को सरकारी बंगला मिला, बिना पद के आवंटन पर उठे सवाल

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आखिरकार एक साल की लंबी प्रतीक्षा और दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती के बाद केंद्र सरकार ने लोधी एस्टेट में टाइप-VII श्रेणी का बंगला आवंटित कर दिया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को आवंटित हुए 95, लोधी एस्टेट के इस भव्य निवास ने केजरीवाल की दिक्कत दूर कर दी है. यह आवंटन राष्ट्रीय पार्टी के संयोजक के तौर पर केजरीवाल के हक को मान्यता देता है, लेकिन इसकी प्रक्रिया ने राजनीतिक विवादों और न्यायिक हस्तक्षेप को जन्म दिया. केजरीवाल ने सितंबर 2024 में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद अक्टूबर में वे अपने आधिकारिक निवास 6, फ्लैगस्टाफ रोड से बाहर निकल आए. तब से वे आप के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के सरकारी बंगले पर रह रहे थे. फ्लैगस्टाफ रोड वाले बंगले के नवीनीकरण में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा ने आप पर शीश महल बनाने का आरोप लगाया था, जो राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बिंदु बना. क्यों मिला बंगला? राष्ट्रीय पार्टी के संयोजक के रूप में केजरीवाल को दिल्ली में सरकारी आवास का अधिकार था, लेकिन आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के भूमि निदेशालय (डायरेक्टोरेट ऑफ एस्टेट्स) की ओर से देरी के कारण मामला अदालत पहुंच गया. जुलाई 2014 की डायरेक्टोरेट ऑफ एस्टेट्स की नीति स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय पार्टियों के अध्यक्षों या संयोजकों को आवास का प्रावधान करती है, लेकिन प्रकार निर्दिष्ट नहीं है. केजरीवाल के वकील सीनियर एडवोकेट राहुल मेहरा ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि ऐतिहासिक रूप से राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्षों को टाइप-VII बंगला मिलता रहा है. उन्होंने कहा कि आज वे मुझे टाइप-VI में नहीं धकेल सकते. क्या उचित है? मुझे स्पष्ट निर्देश चाहिए. मैं कोई चहेता नहीं हूं, बीएसपी की तरह नहीं. लेकिन नीति में निष्पक्षता होनी चाहिए. उनका इशारा बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की अध्यक्ष मायावती की ओर था, जिन्हें 35, लोधी एस्टेट आवंटित किया गया था. मायावती ने मई 2025 में यह बंगला खाली कर दिया, जबकि फरवरी 2024 में 29, लोधी एस्टेट को बीएसपी कार्यालय के रूप में बदल दिया गया था. हाईकोर्ट में चला केस दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र की इस देरी पर कड़ी नाराजगी जताई. 16 सितंबर 2025 को जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि आवंटन किसी की मनमानी पर नहीं हो सकता, बल्कि पारदर्शी नीति पर आधारित होना चाहिए. कोर्ट ने केंद्र से नीति, वर्तमान वेटिंग लिस्ट और आवंटनों का हलफनामा मांगा. 18 सितंबर को सुनवाई के दौरान पता चला कि आप द्वारा सुझाए गए 35, लोधी एस्टेट को जुलाई में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को आवंटित कर दिया गया था. कोर्ट ने इसे “स्वतंत्र प्रणाली” करार दिया और चेतावनी दी कि आवंटन चुनिंदा नहीं हो सकता. 25 सितंबर को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आश्वासन दिया कि 10 दिनों में “उचित” आवास आवंटित हो जाएगा. सोमवार को यह वादा पूरा हुआ.यह मामला केवल केजरीवाल की व्यक्तिगत सुविधा का नहीं, बल्कि राजनीतिक आवास नीति की पारदर्शिता का प्रतीक बन गया. विपक्ष ने इसे केंद्र की “राजनीतिक बदले की भावना” बताया, जबकि भाजपा ने आप की “विलासिता” पर सवाल उठाए. आप नेता ने इसे “न्याय की जीत” कहा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं की. लोधी एस्टेट, दिल्ली का प्रतिष्ठित इलाका, जहां टाइप-वीआईआई बंगला सरकारी आवासों की दूसरी सबसे बड़ी श्रेणी है, अब केजरीवाल का नया ठिकाना बनेगा. यह घटना राष्ट्रीय पार्टियों के नेताओं के लिए आवास नीति में सुधार की मांग को तेज कर सकती है.  

अरविंद केजरीवाल का गोवा ऐलान: मंच से माफी और दिल्ली की रणनीति एक साथ!

गोवा  आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को गोवा के माएम में आम आदमी पार्टी के ऑफिस का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोवा की बीजेपी पर सरकार पर खूब निशाना साधा और गोवा की जनता को लूटने का आरोप लगाया। इसी के साथ उन्होंने एक दिल्ली वाला एक दांव भी खेला। उन्होंने दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक की तर्ज पर मायेम में भी एक क्लिनिक खोलने का वादा किया है जिसमें इलाज से लेकर दवा तक हर चीज फ्री होगी। अरविंद केजरीवाल ने कहा, आपको कोई भी समस्या हो, आप हमारे पास आइए। हम आपकी समस्याओं को दूर करायेंगे। अब 2 सप्ताह बाद माएम विधानसभा में एक क्लीनिक भी खोला जाएगा, यहां बीमारियों का मुफ्त इलाज किया जाएगा। आज यहां हमारा विधायक और सरकार नहीं है तो इतना काम कराया जा रहा है तो जब हमारी सरकार होगी तब कितना काम कराया जाएगा। अपने भाषण के दौरान अरविंद केजरीवाल ने भरे मंच से माफी भी मांगी। ये माफी कार्यक्रम में उनके देरी से पहुंचने को लेकर थी। उन्होंने कहा, मुझे पता है कि आप लोग काफी देर से इंतजार कर रहे थे लेकिन वह सही समय पर इसलिए नहीं पहुंच पाए क्योंकि जिस रास्ते से उन्हें आना था वहां सड़क की हालत बहुत खराब थी। अरविंद केजरीवाल ने आगे गोवा के सीएम पर निशाना साधते हिए आरोप लगाया कि माएम से वह अपनी पत्नी को चुनाव में उतार सकते हैं। उन्होंने कहा, अब सुनने में आ रहा है कि CM प्रमोद सावंत अपनी पत्नी को माएम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाने वाले हैं। इन्हें वोट तो जनता से चाहिए लेकिन MLA बनाने के लिए इन्हें केवल अपना परिवार दिखाई देता है। गोवा के ऊपर कुछ चंद परिवारों ने कब्जा किया हुआ है। यह गोवा के लोगों के लिए नहीं बल्कि अपनी जेबें भरने और जनता को लूटने के लिए चुनाव लड़ते हैं।  

कई दिल्ली स्कूलों को मिली बम की धमकी, केजरीवाल बोले- सुरक्षा का सवाल, अभिभावक चिंतित

नई दिल्ली  दिल्ली के कई स्कूलों को शनिवार सुबह बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिसके बाद स्कूलों को तुरंत खाली करवाया गया और बड़े पैमाने पर सुरक्षा की जांच की जा रही है. स्कूलों को मिली धमकी को लेकर अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चार इंजन वाली BJP सरकार दिल्ली की सुरक्षा नहीं संभाल पा रही है. बच्चों के मां-बाप हर रोज डर के जीते हैं. स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी एक फोन कॉल के जरिए मिली. जिन स्कूलों को धमकियां मिलीं उनमें द्वारका का दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), कृष्णा मॉडल पब्लिक स्कूल और सर्वोदय विद्यालय शामिल हैं. सूचना मिलने पर पुलिस और बम स्क्वाड घटनास्थल पर पहुंचे और सर्च अभियान शुरू किया. चार इंजन वाली सरकार नहीं संभाल पा रही दिल्ली: केजरीवाल दिल्ली के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर बीजेपी पर निशाना साधा. केजरीवाल ने लिखा, ‘दिल्ली के स्कूलों को बार-बार बम धमकी मिल रही है. हर तरफ अफरा-तफरी हो जाती है, स्कूलों की छुट्टी होती है, बच्चों और अभिभावकों में डर फैलता है. लेकिन एक साल से न कोई पकड़ा गया, न कोई कार्रवाई हुई.’ इसके आगे उन्होंने लिखा कि चार इंजन वाली BJP सरकार राजधानी की सुरक्षा तक नहीं संभाल पा रही. माता-पिता रोज डर में जी रहे हैं. स्कूल प्रबंधक ने अभिभावकों को दी सूचना द्वारका के डीपीएस स्कूल के प्रबंधक ने तत्काल ऐलान किया कि स्कूल आज बंद रहेगा. इसके अलावा, शनिवार को स्कूल में होने वाली परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई. स्कूल ने बच्चों के अभिभावकों को जारी एक नोटिस में लिखा कि कुछ कारणों की वजह से आज यानी 20 सितंबर को स्कूल बंद रहेगा. स्कूलों की सभी बसों और वैन को तुरंत वापस भेजा जा रहा है. सभी अभिभावक अपने बच्चों को लेने स्टॉप पर पहुंच जाएं. इसके आगे लिखा गया कि आज होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी गई है. नई तारीखों की सूचना जल्द दी जाएगी. इस महीने में ऐसा दूसरी बार नहीं हुआ है जब किसी शिक्षण संस्थान को बम से उड़ाने की धमकी मिली हो. इससे पहले 9 सितंबर को नई दिल्ली के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली थी. धमकी मिलने के बाद कॉलेज कैंपस को खाली करा दिया गया था. इसके अलावा, मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज और मुख्यमंत्री सचिवालय को भी ऐसी धमकियां मिल चुकी हैं. हालांकि, ये सारी धमकियां झूठ साबित हुईं.  

राहत शिविर का दौरा करने पहुंचे केजरीवाल, लोगों ने जताई असंतोष की भावना

नई दिल्ली  दिल्ली में बाढ़ और जलभराव ने एक बार फिर राजधानी की तैयारियों की पोल खोल दी है। जिन इलाकों में पहले राहत शिविरों में समय पर टेंट लगते थे, मच्छरदानी, खाना, पीने का पानी और डॉक्टरों की व्यवस्था रहती थी, आज उन्हीं शिविरों में बदइंतज़ामी और लापरवाही साफ देखी जा सकती है। बढ़ते संकट के बीच लोग खुद यह कहते नजर आ रहे हैं कि जब अरविंद केजरीवाल की सरकार थी, तो राहत का इंतज़ाम तेज़ और मानवीय होता था। कहीं पानी भरने से पहले पंप लगाए जाते थे, नाले समय से साफ होते थे, और राहत शिविरों में व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जाता था। अब जबकि दिल्ली की सत्ता में आम आदमी पार्टी नहीं है, और MCD व केंद्र दोनों जगह बीजेपी की सरकार है, ऐसे में हालात काबू से बाहर होते दिख रहे हैं। टेंट समय पर नहीं लगे, लोगों को खाना नहीं मिला, पीने का साफ पानी नहीं है और मच्छरों से परेशान लोग खुद दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं। लोगों की नाराज़गी इस बात से भी है कि जिन समस्याओं को पहले खुद मुख्यमंत्री और मंत्री मौके पर पहुंचकर हल करते थे, अब उन पर ध्यान देने वाला कोई नहीं दिखता। न तो कोई ज़िम्मेदार मंत्री हालात का जायज़ा लेने आया, न कोई ठोस कार्रवाई की गई। हर ओर एक किस्म की ‘प्रशासनिक चुप्पी’ पसरी हुई है।   केजरीवाल ने राहत शिविरों में जाकर जो हालात देखे, वो बताने के लिए काफी हैं कि आज की सरकारें सिर्फ बयानबाज़ी में व्यस्त हैं, ज़मीन पर कुछ नहीं कर पा रहीं। उन्होंने सरकारों से अपील की कि राहत व्यवस्था को राजनीति से ऊपर रखकर देखें, क्योंकि यह मानवीय संकट है, और इसमें देरी का मतलब है जनता को और तकलीफ़ देना। दिल्ली के लोगों को अब वो दिन याद आ रहे हैं जब अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में हर संकट को तुरंत जवाब मिलता था। अब जबकि सत्ता में वे नहीं हैं, तो लोग कह रहे हैं, "आज के हालात देखकर समझ आता है कि पहले अरविंद केजरीवाल की सरकार वाकई हमारे लिए काम करती थी।