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आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

मेष: आज के दिन तनाव दूर करने के लिए वॉक पर जा सकते हैं। भले ही आपकी शादी को काफी समय हो गया हो लेकिन साथ में समय व्यतीत करना जरूरी है। ऑफिस का काम घर लेकर न आएं। सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है। वृषभ: आज के दिन अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए समय निकालें। स्ट्रेस से दूर रहें। धन संबंधी मामलों में आप सफलता देखेंगे। डाइट को हेल्दी रखें। इन्वेस्टमेंट करना आज ठीक नहीं रहेगा। मिथुन: आज के दिन जीवन में थोड़ी-बहुत हलचल रहेगी। अपने साथी से जुड़ने और प्यार बांटने के लिए अपने अट्रैक्शन और कम्यूनिकेशन का इस्तेमाल करें। आज खर्च करते वक्त आपको सावधानी बरतनी जरूरी है। कर्क: आज का दिन आपके लिए मिले-जुले परिणाम लेकर आया है। आपकी सेहत ही आपका धन है। फाइनेंशियल सिचूऐशन थोड़ी गड़बड़ा सकती है। आपकी कड़ी मेहनत और समर्पण बड़े पैमाने पर फल देंगे। सिंह: आज के दिन आप अपने धन संबंधी मामलों में सफलता देखेंगे। अपनी मां की सेहत पर ध्यान दें। हाइड्रेटेड रहें। फिटनेस को मेंटेन करने के लिए रेगुलर एक्सरसाइज करें। कुछ लोगों को राजनीतिक लाभ मिल सकता है। कन्या: आर्थिक दृष्टि से अच्छा अवसर आज दरवाजे पर दस्तक दे सकता है। आज आपको अपने स्वास्थ्य की देख-रेख करनी चाहिए। बॉस की सलाह पर ध्यान दें। हेल्दी डाइट लें। तुला: जीवन की चुनौतियों को हंस कर पार करें। अपनी फाइनेंशियल बॉउन्डरी को मेन्टेन करने पर ध्यान दें। आज की एनर्जी आपको अपने सपनों की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। वृश्चिक: आज के दिन फाइनेंशियली आप अच्छे रहेंगे। प्रोफेशनल लाइफ में खुद पर फीलिंग्स को हावी न होने दें। जल्दबाजी में आकर आज कोई जरूरी डिसीजन न ही लें तो बेहतर है। शाम रोमांटिक रहने वाली है। धनु: आज के दिन आपका शरीर और दिमाग दोनों तालमेल में रहने वाले हैं। अपनी फीलिंग्स को पार्टनर के साथ शेयर करना अच्छा साबित होगा। स्ट्रेस दूर करने के लिए मेडिटेशन या योग का सहारा लें। मकर: सीनियर्स के साथ किसी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकते हैं। वित्तीय स्थिति आज पॉजिटिव रहने वाली है। वर्क और लाइफ के बीच बैलेंस मेन्टेन करके रखना बेहद जरूरी है। कुंभ: आज के दिन ब्रेक लेते रहें, जो आपको पूरी लगन से अपना प्रदर्शन दिखाने में मदद करेगा। ऑफिस का काम आपके दिन को व्यस्त बना सकता है। हाइड्रेटेड रहना न भूलें। लाइफ में बैलेंस बनाए रखें। मीन: आज के दिन ब्रह्मांड आपके जुनून को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। थोड़ा स्ट्रेस फील कर सकते हैं। आज का राशिफल नए विचारों को लाइफ में लाने की अड्वाइस दे रहा है। करियर तौर पर प्रोडक्टिव रहेंगे।

आरक्षण पर दोगलापन? योगी के मंत्री संजय निषाद का UGC पर हमला

लखनऊ यूपी की योगी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से जुड़े विरोध प्रदर्शन पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में कोई भी कानून अचानक नहीं आ जाता है। इसके पीछे एक लंबी और संवैधानिक प्रक्रिया होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनरल कैटेगरी को 10 प्रतिशत आरक्षण मिला तब विरोध नहीं हुआ। मंत्री संजय निषाद ने कहा कि किसी भी कानून के निर्माण से पहले संबंधित आयोगों का गठन किया जाता है, उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार होती है और विशेषज्ञों की राय ली जाती है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और संवैधानिक प्रावधानों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। UGC को लेकर हो रहे विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि हर फैसले का उद्देश्य समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखकर किया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब आयोग की रिपोर्ट के आधार पर जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया गया था, तब देश में इसका व्यापक विरोध नहीं हुआ। उस समय भी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया गया था, जिसे सभी ने स्वीकार किया। संजय निषाद ने कहा कि सरकार की मंशा किसी वर्ग के साथ अन्याय करने की नहीं होती, बल्कि सभी को समान अवसर देने की होती है। उन्होंने अपील की कि किसी भी मुद्दे पर विरोध करने से पहले तथ्यों और प्रक्रिया को समझना जरूरी है। मंत्री ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन संवाद और संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे में रहकर ही अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार द्वारा लिए गए फैसले देश के शिक्षा तंत्र और समाज के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में होंगे।  

धार्मिक विवाद: गंगोत्री में गैर हिंदुओं पर प्रतिबंध, इमाम ने दी ठोस वजह

देहरादून उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने की तैयारी है। बद्रीनाथ, केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी हितधारकों के साथ इस पर सहमति बना ली है। जल्द ही बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाएगा। गंगोत्री मंदिर समिति ने निर्णय कर लिया है। हालांकि सनातन धर्म में आस्था रखने वालों का स्वागत जारी रहेगा। इस घटनाक्रम पर मुस्लिम उलेमा की अलग-अलग राय सामने आई है। मुस्लिमों का वहां कोई काम नहीं ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि यह धर्म और आस्था का विषय है। यदि मंदिर कमेटी यह तय करती है कि गैर-हिंदू अंदर नहीं आ सकते हैं तो इस फैसले पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हर जगह के अपने नियम होते हैं। वैसे भी मुस्लिमों का गंगोत्री में कोई काम नहीं है। ऐसे में यदि कोई मुस्लिम वहां जाता है तो इससे टकराव होगा। मक्का और मदीना में भी तो ऐसे ही नियम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने आगे कहा कि मुसलमानों को दूसरे धर्मों की पवित्र जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। खासकर जिन जगहों पर हिन्दुओं की आस्था और सनातन का विषय है तो वहां से मुसलमानों को बचना बेहतर है। हमारे यहां मक्का और मदीना में भी गैर-मुसलमानों के प्रवेश की इजाजत नहीं है। यह वहां का नियम है। इस पर भी तो किसी को आपत्ति नहीं है। पवित्र जगहों के अपने नियम कायदे डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने तिरुपति बाला जी मंदिर में भी यही नियम हैं। इसी तरह अन्य धर्म स्थल हैं जहां गैर समुदाय के लोगों के जाने की मनाही है। सभी पवित्र जगहों के अपने नियम कायदे हैं। यह आस्था का विषय है। इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस पर कोई राजनीति भी नहीं की जानी चाहिए। सभी को दूसरे धर्मों के पवित्र स्थलों के नियम कायदों का पालन करना चाहिए। गैर हिंदुओं का प्रवेश रोकने का फैसला बता दें कि बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित हो जाएगा। इस मुद्दे पर बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर समिति ने आम सहमति बना ली है। प्रस्ताव अब बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। वहीं गंगोत्री मंदिर समिति ने पूरी तरह निर्णय कर लिया है। यमुनोत्री मंदिर समिति का फैसला अभी नहीं आया है। वहीं हरिद्वार में हर की पौड़ी का प्रबंधन करने वाली संस्था गंगा सभा ने भी गैर हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित किए जाने की मांग की है। सियासत गर्म, कांग्रेस ने किया विरोध, भड़के इमरान मसूद इस प्रकरण पर सियासत गर्म है। उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि मंदिर समितियों की बात सुनने के बाद उक्त मुद्दे पर फैसला लेगी। वहीं फैसले का कांग्रेस नेता विरोध कर रहे हैं। उत्तराखंड कांग्रेस ने कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार जनसमस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस प्रकार के काम कर रही है। वहीं कांग्रेस के स्थानीय सांसद इमरान मसूद ने कहा कि गंगोत्री धाम हिंदुओं का पवित्र स्थल है वहां पहले से कोई मुसलमान नहीं जाता है लेकिन पहचान साबित करने जैसी शर्तें लगाकर समाज में जहर धोला जा रहा है।

ममता बनर्जी दे रही BJP को जवाब, अखिलेश का डबल स्ट्राइक; कांग्रेस की चिंता बढ़ी

कोलकाता उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार (27 जनवरी) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि इस देश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हमलों का मुकाबला सिर्फ ‘दीदी’ ही कर सकती हैं। अपनी पत्नी और लोकसभा सांसद डिंपल यादव के साथ अखिलेश यादव कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ पहुंचे, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी से लगभग 40 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत की।   बैठक के बाद ममता बनर्जी के साथ मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि ममता बनर्जी ने जिस साहस और दृढ़ता के साथ भाजपा की नीतियों और राजनीतिक दबावों का सामना किया है, वह पूरे देश के लिए मिसाल है। उन्होंने कहा, “सिर्फ दीदी ही हैं जो भाजपा के हर राजनीतिक हमले का मजबूती से जवाब दे सकती हैं।” उन्होंने कहा, “भाजपा वाले हमारे देश के सेकुलरिज्म से खिलवाड़ कर रहे हैं और वह भी इलेक्शन कमीशन से मिलकर। यहां तो हो ही रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश में इससे ज्यादा वोट काटने का काम कर रहे हैं।” NRC और वोटर लिस्ट संशोधन पर आरोप अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में हुए मतदाता सूची संशोधन के दौरान करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए, जिससे आम लोगों को परेशान किया गया।अखिलेश ने कहा, “मतदाता सूची के बहाने लोगों को डराने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।” लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में समर्थन समाजवादी पार्टी प्रमुख ने साफ कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में ममता बनर्जी को पूरा समर्थन देगी। उन्होंने कहा, “हम ममता बनर्जी के साथ हैं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर स्तर पर सहयोग करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की यह मुलाकात विपक्षी दलों के बीच बढ़ती नजदीकियों और आगामी चुनावों से पहले संभावित रणनीतिक तालमेल का संकेत मानी जा रही है। हालांकि, बैठक में किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई, लेकिन दोनों नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट है कि भाजपा के खिलाफ साझा मोर्चे की जमीन तैयार की जा रही है। कांग्रेस पर भी निशाना और संदेश अखिलेश का यह बयान तब आया है, जब राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस TMC के खिलाफ ताल ठोक रही है। राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि अखिलेश ने कोलकाता से कांग्रेस को भी बड़ा संदेश दिया है। यानी उन्होंने एक बयान से दो दलों को साधने की कोशिश की है। पहले तो ममता और टीएमसी का साथ देने और उसे अपना समर्थन दिया है, वहीं दूसरी ओर अखिलेश ने कांग्रेस को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर और उन्हें तवज्जो देकर ही चुनावी राजनीति में आगे कदम बढ़ाए। चूंकि अगले साल यूपी में भी विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए ऐसे बयान से अखिलेश ने कांग्रेस को संदेश कम टेंशन ज्यादा देने की कोशिश की है।  

UGC Equity नियमों की सिफारिश किस समिति ने की? दिग्विजय सिंह की कमेटी और उसके 29 सांसद सदस्य

नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है, जिसके मुताबिक सभी यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने संस्थानों के अंदर एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी। ये कमेटी उस संस्थान के अंदर SC/ST या OBC कैटगरी के छात्रों, शिक्षकों या गैर शिक्षण कर्मियों के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी शिकायतें सुनेंगी और तय समय-सीमा में उसका निपटारा करेगी। देश भर का सवर्ण समाज UGC के इस नियम का विरोध कर रहा है। बड़ी बात यह है कि जिस संसदीय समिति की सिफारिश पर UGC ने यह कानून बनाया है, उसके अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह है। उनके साथ इस समिति में कुल 30 सदस्य हैं जो संसद के दोनों सदनों के सदस्य हैं। इनमें कई भाजपा के सांसद हैं और सवर्ण समाज से आते हैं।   दरअसल, यह सिफारिश शिक्षा, महि्ला, बच्चों, युवा और खेल पर संसद की स्थाई समिति ने की है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस समिति के अध्यक्ष हैं। इस समिति में 21 लोकसभा और 9 राज्यसभा के सांसद हैं। कुछ नाम तो चौंकाने वाले हैं। दलगत संख्या और प्रतिनिधित्व की बात करें तो इस समिति में भाजपा के 16, कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी के 3, तृणमूल के 2, सीपीएम के 1, डीएमके के 1, एनसीपी (अजीत गुट) के 1, एनसीपी (शरद गुट) के 1 और आम आदमी पार्टी की 1 पूर्व सदस्य हैं। इसे यूं कहें तो इस समिति में सत्ताधारी भाजपा के सदस्यों की संख्या 50 फीसदी से अधिक है। समिति के सदस्यों में कौन-कौन? संसद की वेबसाइट पर उपलब्ध नामों के मुताबिक इस समिति में राज्यसभा से दिग्विजय सिंह के अलावा भीम सिंह (भाजपा नेता, बिहार से राज्यसभा के सांसद) बिकास रंजन भट्टाचार्य (CPM नेता और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद), घनश्याम तिवाड़ी(भाजपा नेता, राजस्थान कोटे से राज्यसभा सांसद), रेखा शर्मा (भाजपा नेता और हरियाणा से राज्यसभा सांसद और महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष), सी. सदानंदन मास्टर (केरल भाजपा के उपाध्यक्ष और केरल से राज्यसभा सांसद), सिकंदर कुमार (भाजपा नेता, हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद), सुनेत्रा पवार (एनसीपी नेता और अजीत पवार की पत्नी, महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद) और स्वाती मालीवाल (AAP की पूर्व नेता और दिल्ली से राज्यसभा सांसद) हैं। लोकसभा से 21 चेहरे कौन-कौन? इस समिति में लोकसभा सांसदों में कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज अभिजित गंगोपाध्याय (भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल से सांसद), पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से सांसद और भाजपा के कद्दावर नेता रविशंकर प्रसाद, भाजपा नेता, प्रवक्ता और ओडिशा की पुरी सीट से सांसद संबित पात्रा भी हैं। इनके अलावा बांसुरी स्वराज (भाजपा नेता और नई दिल्ली सीट से सांसदष, अमर शरदराव काले (एनसीपी (शरद पवार गुट) नेता), अंगोमचा बिमोल अकोईजाम (कांग्रेस पार्टी के नेता और मणिपुर से सांसद), बृजमोहन अग्रवाल (छत्तीसगढ़ से भाजपा के नेता और रायपुर लोकसभा सीट से सांसद), दग्गुबाती पूरनदेश्वरी(आंध्र प्रदेश में भाजपा की कद्दावर नेता और राजमुंद्र सीट से सांसद) दर्शन सिंह चौधरी (भाजपा नेता और मध्य प्रदेश की होशंगाबाद सीट से सांसद) के नाम भी शामिल हैं।   अन्य चेहरों का हाल इनके अलावा अन्य सांसदों में डीएन कुरियाकोसे(कांग्रेस नेता और केरल की इडुक्की सीट से सांसद) वर्षा एकनाथ गायकवाड़ (कांग्रेस नेता और मुंबई की उत्तर-मध्य सीट से सांसद), हेमांग जोशी (भाजपा नेता और गुजरात की वडोदरा सीट से सांसद), जितेंद्र कुमार दोहरे (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की इटावा सीट से सांसद), जियाउर्रहमान बर्क (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की संभल सीट से सांसद), राजीव राय( समाजवादी पार्टी के नेता, यूपी की घोसी सीट से सांसद), कालिपाड़ा सरेन खेरवाल (तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की झारग्राम सीट से सांसद), कामाख्या प्रसाद तासा (भाजपा नेता और असम की काजीरंगा सीट से सांसद), करण भूषण सिंह (भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से सांसद), रचना बनर्जी (TMC नेता और पूर्व अभिनेत्री, पश्चिम बंगाल की हुगली सीट से सांसद), शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया (भाजपा नेता, गुजरात की साबरकांठा सीट से सांसद) और थमिझाची थंगापांडियन उर्फ टी. सुमथि. (तमिलनाडु में डीएमके नेता और चेन्नई दक्षिण सीट से सांसद) के नाम शामिल हैं।  

एमएसएमई की स्टार्टअप आइडिया टू स्केल थीम पर आधारित झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

भोपाल गणतंत्र दिवस पर राज्य स्तरीय समारोह में लाल परेड मैदान पर के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा “Startup – Idea to Scale” थीम पर आधारित झांकी का प्रदर्शन किया गया। झांकी दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र रही। झांकी के प्रथम दृश्य में यूनिकॉर्न (Unicorn) को प्रदर्शित किया गया, जो राज्य में स्टार्टअप्स की वैश्विक सफलता, नवाचार आधारित उद्यमिता एवं सतत (Sustainable) विकास का प्रतीक है। यह दृश्य मध्यप्रदेश में विकसित हो रहे सशक्त स्टार्टअप इकोसिस्टम को दर्शाता है। झांकी में आगे आधुनिक इलेक्ट्रिक परिवहन, रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन, मेगा इनक्यूबेशन/इनोवेशन सेंटर, हेल्थ-टेक, शिक्षा एवं कौशल विकास में एआर/वीआर तकनीक तथा स्टार्टअप्स की विकास यात्रा को IDEA → PROTOTYPE → GTM (Go-To-Market) → SCALE चरणों के माध्यम से प्रभावी रूप से प्रदर्शित किया गया। अंतिम दृश्य में आधुनिक बुलेट ट्रेन के माध्यम से तेज, सतत एवं भविष्य उन्मुख औद्योगिक विकास का प्रतीकात्मक चित्रण किया गया। यह सम्पूर्ण झांकी आयुक्त उद्योग श्री दिलीप कुमार के नेतृत्व में विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा तैयार एवं प्रस्तुत की गई, जिसके माध्यम से एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स की भूमिका को रेखांकित करते हुए वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर एवं विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य का सशक्त संदेश दिया गया।  

प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़: एंटोनियो कोस्टा हैं पुर्तगाल में गांधी, बोले- मुझे गर्व है प्रवासी भारतीय होने पर

नई दिल्ली भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों में एक नए ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हो गई है। इस मौके पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच न केवल कूटनीतिक बल्कि व्यक्तिगत और भावनात्मक रिश्ते भी देखने को मिले। इस मौके पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी मौजूद थीं।   'भारत से मेरा रिश्ता व्यक्तिगत है': एंटोनियो कोस्टा समझौते की घोषणा के दौरान, यूरोपीय नेता एंटोनियो कोस्टा ने अपनी भारतीय जड़ों को याद करते हुए एक भावुक बयान दिया। उन्होंने गर्व से कहा- 'मैं यूरोपियन काउंसिल का प्रेसिडेंट हूं, लेकिन मैं एक प्रवासी भारतीय नागरिक भी हूं। तो, जैसा कि आप सोच सकते हैं, मेरे लिए इसका एक खास मतलब है।' कोस्टा ने अपने गोवा कनेक्शन का जिक्र करते हुए कहा- 'मुझे अपनी जड़ों पर गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आता है। इसलिए, यूरोप और भारत के बीच का कनेक्शन मेरे लिए बहुत पर्सनल है।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनने को अपना सौभाग्य मानते हैं। कोस्टा ने कहा, 'इस खास मौके पर हमारा स्वागत करने के लिए प्यारे प्रधानमंत्री मोदी, आपका धन्यवाद। कल गणतंत्र दिवस समारोह में आपके मुख्य अतिथि बनकर हम सम्मानित महसूस कर रहे थे। भारत की क्षमताओं और विविधता का यह बहुत प्रभावशाली प्रदर्शन था। आज एक ऐतिहासिक क्षण है। हम व्यापार, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों में अपने रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं।' पीएम मोदी ने बताया 'पुर्तगाल का गांधी' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एंटोनियो कोस्टा का गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके विचारों और सादगी की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने उन्हें 'पुर्तगाल का गांधी' कहकर संबोधित किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- मुझे अपने दो करीबी दोस्तों, प्रेसिडेंट कोस्टा और प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन का इस अभूतपूर्व भारत की यात्रा में स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। कोस्टा जी अपनी सलर जीवनशैली और समाज के प्रति प्यार के आधार पर 'लिस्बन के गांधी' के नाम से जाने जाते हैं। प्रेसिडेंट उर्सुला जर्मनी की पहली रक्षा मंत्री ही नहीं, यूरोपीय यूनियन कमीशन की भी पहली महिला अध्यक्ष बनकर पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा हैं।' कौन हैं एंटोनियो कोस्टा? एंटोनियो कोस्टा पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री (2015-2023) और एक वरिष्ठ यूरोपीय नेता हैं। वर्तमान में वे यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। कोस्टा का जन्म 1961 में लिस्बन में हुआ था, लेकिन उनका खून भारतीय है। उनके पिता, ओरलैंडो द कोस्टा गोवा के एक प्रसिद्ध लेखक और कवि थे। गोवा में उनके पिता के परिवार के लोग उन्हें प्यार से 'बाबुश' बुलाते हैं, जिसका कोंकणी में अर्थ होता है- छोटा बच्चा या प्यारा लड़का। वे उन गिने-चुने पश्चिमी नेताओं में से हैं जिनके पास OCI कार्ड है। उन्हें 'लिस्बन का गांधी' क्यों कहा जाता है? उन्हें यह उपाधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 में उनकी भारत यात्रा के दौरान दी थी, लेकिन इसके पीछे की वजह उनके लिस्बन के मेयर रहने के दौरान किए गए काम और उनकी जीवनशैली है। गांधीजी की तरह ही कोस्टा को अपनी सादगी के लिए जाना जाता है। जब पुर्तगाल आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब मेयर रहते हुए उन्होंने फिजूलखर्ची कम करने और बहुत ही साधारण जीवन जीने की मिसाल पेश की थी। उन्होंने सरकारी तामझाम से दूर रहकर जनता के बीच काम करना पसंद किया। 'इतेंदेंते' का कायाकल्प – यह सबसे बड़ा कारण है। लिस्बन में 'इतेंदेंते' नाम का एक इलाका था, जो ड्रग्स, वेश्यावृत्ति और अपराध के लिए बदनाम था। लोग वहां जाने से डरते थे। कोस्टा ने वहां पुलिस भेजने के बजाय एक गांधीवादी कदम उठाया। उन्होंने अपना मेयर कार्यालय ही उस बदनाम इलाके में शिफ्ट कर दिया। उनका मानना था कि अगर प्रशासन वहां बैठेगा, तो सुधार अपने आप होगा। यह कदम सफल रहा और वह इलाका लिस्बन का एक सुरक्षित और जीवंत पर्यटन केंद्र बन गया। इस 'हृदय परिवर्तन' वाली नीति ने उन्हें 'गांधी' की छवि दी। उनकी राजनीति को आक्रामक नहीं, बल्कि धैर्यवान और सबको साथ लेकर चलने वाला माना जाता है। यूक्रेन संकट पर पीएम मोदी से मांगी मदद यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने कहा- हमारी समिट में, हमने यूक्रेन में एक व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए प्रयासों का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जो यूक्रेन की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह से सम्मान करती है। यह एक महत्वपूर्ण क्षण है। हम न्यायपूर्ण और स्थायी शांति तक पहुंचने के सभी प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। यूक्रेन ने मुश्किल समझौते की कीमत पर भी अपनी तत्परता दिखाई है। मुझे पता है, प्रिय प्रधानमंत्री कि हम बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांति के लिए स्थितियां बनाने में आपकी मदद पर भरोसा कर सकते हैं…  

मध्य प्रदेश में ओलावृष्टि का असर, 28 जिलों में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी

भोपाल मध्यप्रदेश में ठंड के बीच बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरु हो गया है। मंगलवार को शाजापुर, आगर-मालवा और गुना में ओले गिरे। वहीं, करीब 18 जिलों में तेज आंधी के साथ बारिश देखने को मिली। मौसम विभाग ने 28 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। यहां-यहां ओले-बारिश का असर आगर-मालवा, शाजापुर और गुना में ओले गिरे हैं। वहीं, गुना, शाजापुर, बड़वानी, छतरपुर, मंदसौर, रतलाम, राजगढ़, शिवपुरी, ग्वालियर, टीकमगढ़, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, आगर-मालवा और शाजापुर में बारिश भी हुई। साथ ही रतलाम, शाजापुर और आगर जिलों में तेज आंधी भी चली। जिससे किसानों की फसलों बुरी तरह नुकसान पहुंचा है।   इन 28 जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि भोपाल, विदिशा, रायसेन, सिहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, देवास, शाजापुर, आगर, मंदसौर, नीमच, दतिया, रीवा, सतना, नरसिंहपुर, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर जिलों बारिश हो सकती है।   मौसम विभाग के द्वारा जारी बुलेटिन अनुसार, ग्वालियर, भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों में घने कोहरे और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। कैसा रहेगा मौसम वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ उत्तर पाकिस्तान एवं निकटवर्ती क्षेत्रों पर चक्रवातीय परिसंचरण के रूप में माध्य समुद्र तल से 3.1 से 4.5 किमी की ऊँचाई पर अवस्थित है। एक ट्रफ मध्य एवं ऊपरी क्षोभमंडल की पछुआ पवनों में माध्य समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊँचाई पर लगभग देशांतर 65° पू. से अक्षांश 22° उ. के उत्तर की ओर विस्तृत है। इसके अलावा एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन दक्षिण-पश्चिम राजस्थान एवं निकटवर्ती क्षेत्रों पर माध्य समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊंचाई पर सक्रिय है। ट्रफ लाइन वर्तमान में पूर्वोत्तर अरब सागर से उत्तर पंजाब तक, सौराष्ट्र, कच्छ तथा पश्चिम राजस्थान से होकर माध्य समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊँचाई तक विस्तृत है। वहीं, 30 जनवरी की रात से उत्तर-पश्चिम भारत पर एक नया पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव होगा।

विकास, विश्वास और दूरदर्शिता के साथ आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि शासन का मूल उद्देश्य जनता की सेवा है। सत्ता में रहकर यदि जनता के कार्य न किए जाएँ, तो सत्ता का कोई औचित्य नहीं रह जाता। यही भावना वर्तमान राज्य सरकार के प्रत्येक निर्णय की आधारशिला है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने मंगलवार को एक निजी चैनल को दिये साक्षात्कार में मध्यप्रदेश की आर्थिक प्रगति, राज्य सरकार के 2 वर्षों की उपलब्धियों, आगामी बजट दृष्टि, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, सड़क कनेक्टिविटी तथा जनकल्याणकारी योजनाओं पर विस्तार से अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व की सराहना करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि बीते 2 वर्षों में प्रदेश ने विकास का नया अध्याय लिखा है। इस अवधि में रोजगार सृजन, ग्रामीण एवं शहरी कनेक्टिविटी, शिक्षा ढांचे के विस्तार, सिंचाई सुविधाओं के व्यापक विकास तथा बुनियादी अधोसंरचना में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि यह विकास यात्रा जनता के विश्वास की शक्ति से आगे बढ़ रही है। आगामी बजट, जनभागीदारी और दूरदर्शिता पर आधारित उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने बताया कि राज्य सरकार आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अधिक परिणाम वाले बजट ढांचे की दिशा में कार्य कर रही है। यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि जनता की मूलभूत आवश्यकताओं पर आधारित विकास का रोडमैप बनेगा। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य में रोलिंग बजट प्रणाली लागू करने की दिशा में भी कार्य कर रही है, जिससे योजनाओं को लचीला और परिणाम-केंद्रित बनाया जा सके। साथ ही, जनता से सुझाव लेकर उन्हें बजट प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा रहा है। केंद्र के साथ प्रभावी समन्वय उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने जानकारी दी कि वे हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के साथ प्री-बजट बैठक में सम्मिलित हुए, जहाँ उन्होंने मध्यप्रदेश की विकास आवश्यकताओं को मजबूती से रखा। विशेष रूप से आगामी सिंहस्थ/कुंभ आयोजन से जुड़े पूंजीगत विकास कार्यों के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपये के प्रावधान का विषय प्रमुखता से उठाया गया। विकसित भारत@2047 में मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का “विकसित भारत@2047” का संकल्प देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला है। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य, सिंचाई और कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रदेश की तस्वीर तेजी से बदली है। प्रत्येक जिले में स्वास्थ्य ढांचा मजबूत किया जा रहा है और चिकित्सा शिक्षा का विस्तार हो रहा है। आयुष्मान भारत योजना गरीबों के लिए वरदान सिद्ध हुई है, जिससे लाखों परिवारों को मुफ्त इलाज का लाभ मिल रहा है। सिंचाई के क्षेत्र में योजनाबद्ध विस्तार से खेतों तक पानी पहुँचा है, कृषि उत्पादन बढ़ा है और किसानों की आय में सुधार हुआ है। वहीं सड़क और कनेक्टिविटी विकास की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत कर रही है। शिक्षा और बच्चों से संवाद सरकार की प्राथमिकतता। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि बच्चों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं को समझना सरकार की प्राथमिकता है। विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। कर व्यवस्था पर स्पष्ट संदेश उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने स्पष्ट किया कि जनता से लिया गया कर जनता की सुविधाओं और विकास कार्यों पर ही खर्च किया जाता है। सरकार का हर निर्णय जनहित केंद्रित है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विकास, सुशासन और पारदर्शिता के साथ निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।  

स्वास्थ्य, शिक्षा और अधोसंरचना में ऐतिहासिक प्रगति की ओर मध्यप्रदेश : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

बिल्डिंग न्यू इंडिया (एमपी चैप्टर) कार्यक्रम में हुए शामिल भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा और अधोसंरचना को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजनाबद्ध एवं तेज़ गति से आगे बढ़ रही है। प्रदेश में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सिविल अस्पतालों, जिला अस्पतालों सहित ग्रामीण शहरी हर स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों तक व्यापक उन्नयन कार्य निरंतर जारी है, जिससे आम नागरिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल भोपाल में निजी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के "बिल्डिंग न्यू इंडिया (एमपी चैप्टर)" कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास, स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण सहित विभिन्न समसामयिक विषयों में अपने विचार साझा किए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि आईपीएचएस मानकों के अनुरूप लगभग 30 हजार मानव संसाधनों की स्वीकृति दी गई है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। इसके माध्यम से कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों को फर्स्ट रेफरल यूनिट के रूप में सशक्त किया जा रहा है, जिससे जिला अस्पतालों पर दबाव कम होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में ही गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि निरोगी काया अभियान के अंतर्गत अब तक 1.5 करोड़ से अधिक नागरिकों की निःशुल्क स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है तथा राष्ट्रीय औसत के स्तर तक पहुंचने की दिशा में राज्य तेजी से अग्रसर है। स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि की जा रही है। साथ ही ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए टेलीमेडिसिन व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिससे ग्रामीण स्तर पर ही विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध हो रहा है। विंध्य क्षेत्र के विकास पर प्रकाश डालते हुए उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि जो क्षेत्र कभी पिछड़ेपन का प्रतीक माना जाता था, आज वह सिंचाई, सड़क, रेल, एयर कनेक्टिविटी, पर्यटन एवं औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। रीवा एयरपोर्ट, फोरलेन सड़कों का विस्तार तथा नई रेल परियोजनाएं विंध्य क्षेत्र की प्रगति का प्रतीक बन चुकी हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप योग, प्राणायाम, प्राकृतिक खेती एवं गौ संरक्षण को बढ़ावा देना समाज के समग्र स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्राकृतिक खेती से न केवल भूमि की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि मानव स्वास्थ्य भी सुरक्षित होता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य स्वस्थ नागरिक, सशक्त प्रदेश और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश है, और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ठोस रोडमैप के साथ निरंतर कार्य किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्थानों एवं उनके प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया।