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‘बॉयकॉट भाजपा’ पोस्ट कर इस्तीफा देने वाले सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री निलंबित

बरेली. बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे से प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति है। देर रात तक उन्हें जिले के आला अधिकारी समझाते और मान मनौव्वल करते रहे लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रहे। इसके बाद आधी रात उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया। प्रशासनिक हलकों में अब यह सवाल तैर रहा है कि 10 साल तक आईटी सेक्टर में कॉर्पोरेट अनुभव रखने वाले और पहली बार में ही पीसीएस क्लियर करने वाले अलंकार अग्निहोत्री आखिर इस्तीफा देते समय कहां चूक गए? उनके इस्तीफे के बाद शासन ने न केवल उन्हें निलंबित किया, बल्कि शामली अटैच कर विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश भी दे दिए हैं। सर्विस कंडक्ट रूल्स की अनदेखी बताया जा रहा है कि अलंकार अग्निहोत्री की सबसे बड़ी चूक 'उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली' की अनदेखी मानी जा रही है। किसी भी सरकारी पद पर रहते हुए कोई अधिकारी सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल के विरुद्ध मोर्चा नहीं खोल सकता। अलंकार ने अपनी पोस्ट में बॉयकॉट भाजपा लिखकर सीधे अनुशासन की लक्ष्मण रेखा लांघ दी। इसने शासन को सख्त कार्रवाई का ठोस आधार दे दिया। इस्तीफे की प्रक्रिया और माध्यम इसके साथ ही सरकारी सेवा में इस्तीफा देने का एक तय प्रोटोकॉल होता है, जिसे नियुक्ति प्राधिकारी (Appointing Authority) के पास भेजा जाता है। अलंकार ने इस्तीफे को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किया और सरकार की नीतियों को 'काला कानून' बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वे केवल व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा देते तो शायद मामला इतना तूल न पकड़ता, लेकिन राजनीतिक नारेबाजी ने इसे 'विद्रोह' का रूप दे दिया। 'गणतंत्र' दिवस का चुनाव जिस दिन मुख्यमंत्री और राज्यपाल संविधान और कानून के शासन की दुहाई दे रहे थे, उसी दिन एक अधिकारी द्वारा व्यवस्था को 'गनतंत्र' बताना शासन की छवि को वैश्विक स्तर पर प्रभावित करने वाला कदम लगा। गणतंत्र दिवस के मौके पर इस तरह का प्रदर्शन 'अति-उत्साह' और 'अनुशासनहीनता' की श्रेणी में आ गया है। पद की गरिमा बनाम व्यक्तिगत विचारधारा अलंकार अग्निहोत्री काफी सुलझे हुए और लक्ष्य के प्रति समर्पित व्यक्ति रहे माने जाते हैं। लेकिन, प्रयागराज की घटना (शंकराचार्य के शिष्यों से व्यवहार) और यूजीसी के मुद्दे पर उन्होंने अपनी व्यक्तिगत विचारधारा और धार्मिक संवेदनशीलता को अपने प्रशासनिक दायित्वों के ऊपर रखा। प्रशासन में 'तटस्थता' (Neutrality) सबसे अनिवार्य गुण है, जिसकी कमी यहां साफ नजर आई। जांच का शिकंजा: अब आगे क्या? बरेली कमिश्नर को सौंपी गई जांच में अब अलंकार के पिछले रिकॉर्ड और उनके सोशल मीडिया व्यवहार की बारीकी से जांच होगी। निलंबन के दौरान वे शामली डीएम कार्यालय में उपस्थिति देंगे और उन्हें केवल आधा वेतन (गुजारा भत्ता) मिलेगा। यदि जांच में यह सिद्ध हो गया कि उन्होंने जानबूझकर सरकार की छवि खराब करने के लिए ऐसा किया तो उनकी सेवा स्थायी रूप से समाप्त भी की जा सकती है। अलंकार अग्निहोत्री का मामला बताता है कि व्यवस्था के भीतर रहकर सुधार की गुंजाइश तो होती है, लेकिन व्यवस्था के विरुद्ध 'सत्याग्रह' का रास्ता एक सरकारी अधिकारी के लिए करियर के अंत की शुरुआत हो सकता है।

Windows 11 यूज़र्स के लिए Microsoft Paint और Notepad में AI फीचर्स का आगाज

मुंबई   Microsoft ने Windows 11 इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स के लिए Paint और Notepad में कई नए और दिलचस्प फीचर्स जोड़ने शुरू कर दिए हैं. ये अपडेट फिलहाल Windows Insider प्रोगाम Canary और Dev चैनल में शामिल टेस्टर्स को मिल रहे हैं, लेकिन आने वाले महीनों में इन्हें सभी यूज़र्स के लिए रोलआउट किया जाएगा. इसकी खास बात यह है कि इन नए फीचर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया है. सबसे ज्यादा चर्चा Microsoft Paint में आए नए AI Colouring Book फीचर को लेकर हो रही है. इस फीचर की मदद से यूज़र सिर्फ टेक्स्ट लिखकर अपनी पसंद का कलरिंग पेज बना सकते हैं. जैसे ही यूज़र पेंट खोलकर Colouring Book ऑप्शन चुनते हैं, वहां एक टेक्स्ट बॉक्स दिखाई देता है. इसमें मनचाहा प्रॉम्प्ट टाइप करते ही AI अपने आप बच्चों की कलरिंग बुक जैसा सिंपल लाइन आर्ट तैयार कर देता है. इस आर्ट को यूज़र डिजिटल तरीके से कलर कर सकते हैं या फिर प्रिंट निकालकर हाथ से रंग भर सकते हैं. हालांकि, यह फीचर सिर्फ Copilot+ PCs पर ही उपलब्ध होगा और इसे इस्तेमाल करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट अकाउंट से साइन-इन करना जरूरी है. माइक्रोसॉफ्ट के द्वारा जारी किए गए आधिकारिक ब्लॉग के मुताबिक, Paint में एक और छोटा लेकिन काम का अपडेट Fill Tolerance Slider के रूप में आया है. इसकी मदद से यूज़र यह कंट्रोल कर सकते हैं कि Fill Tool रंग को कितनी सटीकता से भरे. स्लाइडर को एडजस्ट करके यूज़र चाहें तो छोटे हिस्से में रंग भर सकते हैं या बड़े एरिया में, जिससे डिटेल्ड आर्टवर्क बनाना आसान हो जाता है. Notebook में भी आए नए एआई फीचर्स वहीं Notepad को भी इस अपडेट में काफी स्मार्ट बनाया गया है. माइक्रोसॉफ्ट ने इसमें Markdown सपोर्ट को और बेहतर किया है. अब नोटबुक में स्ट्राइकथ्रू, नेस्टेड लिस्ट जैसे फीचर्स भी मिलेंगे, जिन्हें कीबोर्ड शॉर्टकट, टूलबार या सीधे मार्कडाउन सिंटैक्स से इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा नोटबुक में एक नया Welcome Experience भी जोड़ा गया है, जो ऐप खोलते ही नए फीचर्स की जानकारी देता है. Notepad के AI फीचर्स जैसे Write, Rewrite और Summarise को भी पहले से तेज बनाया गया है. अब इनका रिज़ल्ट स्ट्रीमिंग प्रीव्यू के रूप में दिखता है, यानी पूरा टेक्स्ट बनने का इंतजार नहीं करना पड़ता. ये एआई फीचर्स लोकल डिवाइस या क्लाउड दोनों पर काम करते हैं, लेकिन इनके लिए भी माइक्रोसॉफ्ट अकाउंट से लॉग-इन जरूरी होगा.

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

हिंदू धर्म में बेलपत्र (बिल्व पत्र) को भगवान शिव का सबसे प्रिय पत्र माना जाता है। शिव पूजा बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है। इसे शिवद्रुम भी कहा जाता है। बेलपत्र के तीन पत्ते त्रिशूल और त्रिनेत्र का प्रतीक हैं। शास्त्रों में बेलपत्र को मोक्षदायी बताया गया है। मान्यता है कि अगर किसी की शवयात्रा बेल वृक्ष की छाया से गुजर जाए, तो उसे मोक्ष मिल जाता है। बेल वृक्ष को सींचने से पितरों को तृप्ति मिलती है। लिंग पुराण के अनुसार, बेल वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु, शाखाओं में ऋषि-मुनि और पत्तियों में शिव का वास है। इसलिए बेलपत्र अर्पित करना त्रिदेवों की संयुक्त पूजा के समान फल देता है। लेकिन भगवान शिव को बेलपत्र इतना प्रिय क्यों है? इसका जवाब जानने के लिए बेलपत्र की पौराणिक उत्पत्ति की कहानी जाननी जरूरी है। बेलपत्र की पौराणिक उत्पत्ति कथा शिवपुराण और अन्य पुराणों में बेलपत्र की उत्पत्ति की कथा वर्णित है। एक बार देवी पार्वती तपस्या में लीन थीं। तपस्या के दौरान उनके शरीर से पसीने की बूंदें धरती पर गिरीं। उन्हीं बूंदों से बेल वृक्ष की उत्पत्ति हुई। चूंकि बेल वृक्ष माता पार्वती के पसीने से उत्पन्न हुआ, इसलिए इसमें माता पार्वती के अनेक दिव्य स्वरूपों का वास माना गया है। जड़ में माता गिरिजा, तने में माहेश्वरी, शाखाओं में दक्षिणायनी, पत्तियों में स्वयं पार्वती, फलों में कात्यायनी और फूलों में माता गौरी का रूप निवास करता है। इतना ही नहीं, इस वृक्ष में मां लक्ष्मी की कृपा भी व्याप्त है। इस कारण बेलपत्र को अत्यंत पवित्र और मोक्षदायी माना गया। भगवान शिव को बेलपत्र क्यों इतना प्रिय है? बेलपत्र में माता पार्वती का अंश होने के कारण यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। शिव-पार्वती की संयुक्त ऊर्जा का प्रतीक होने से बेलपत्र चढ़ाने पर शिव-पार्वती दोनों प्रसन्न होते हैं। शिवपुराण में कहा गया है कि बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। बेलपत्र के तीन पत्ते त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का प्रतीक हैं। इसे अर्पित करना त्रिदेवों की पूजा के समान फल देता है। जो भक्त श्रद्धा से बेलपत्र चढ़ाता है, उसे पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और कालसर्प दोष से छुटकारा मिलता है। शिव जी को बेलपत्र इसलिए प्रिय है, क्योंकि यह माता पार्वती का अंश है और शिव-पार्वती का प्रेम इस पत्र में समाहित है। बेलपत्र का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बेलपत्र पाप नाशक और मोक्षदायी माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि बेलपत्र चढ़ाने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं। अगर किसी की शवयात्रा बेल वृक्ष की छाया से गुजर जाए, तो उसे मोक्ष प्राप्ति होती है। बेल वृक्ष को सींचने से पितरों को तृप्ति मिलती है और पितृ दोष दूर होता है। आयुर्वेद में भी बेल वृक्ष को औषधीय माना गया है। बेल का फल पाचन तंत्र को मजबूत करता है, पेट रोगों में लाभकारी है और पत्ते-जड़ भी औषधीय गुणों से युक्त हैं। बेलपत्र चढ़ाने से ग्रह बाधाएं, कालसर्प दोष और शनि-राहु के प्रभाव शांत होते हैं। यह पत्र शिव भक्ति का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है। बेलपत्र चढ़ाने की विधि और लाभ बेलपत्र चढ़ाने की विधि बहुत सरल है। शिवलिंग पर बेलपत्र उल्टी तरफ (तने की ओर) चढ़ाएं। तीन पत्ते एक साथ चढ़ाने चाहिए। श्रावण मास में रोज बेलपत्र चढ़ाने से विशेष फल मिलता है। अगर तीर्थ यात्रा ना कर पाएं, तो श्रावण में बेल वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करने से समस्त तीर्थों का पुण्य मिलता है। बेलपत्र चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, पाप नष्ट होते हैं और शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। यह पत्र भक्त को मोक्ष मार्ग पर ले जाता है। भगवान शिव को बेलपत्र इसलिए प्रिय है, क्योंकि यह माता पार्वती के पसीने से उत्पन्न हुआ और शिव-पार्वती की संयुक्त ऊर्जा का प्रतीक है। श्रद्धा से बेलपत्र चढ़ाएं तो जीवन में सुख, शांति और मोक्ष प्राप्ति होती है।

एम्स भोपाल के शोध में बड़ा अलर्ट: रात को जागना और मोबाइल की लत कैंसर के जोखिम को बढ़ा रहे

 भोपाल  अगर आप भी ऐसे लोगों में शुमार हैं जो रात में घंटों मोबाइल की स्क्रीन से चिपके रहते हैं या फिर आपकी नींद का कोई तय समय नहीं है, तो अपनी जीवन शैली बदल डालिए। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के शोध में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि नींद की गड़बड़ी सीधे तौर पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को न्योता दे रही है। शोध के मुताबिक, नींद प्रभावित होने से शरीर का सुरक्षा तंत्र इस कदर कमजोर हो जाता है कि कैंसर कोशिकाएं पैर पसारने लगती हैं। 'कुदरती अलार्म' की महत्ता बताई एम्स भोपाल में जैव रसायन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार और उनकी टीम ने इस शोध के जरिए शरीर में चलने वाले उस 'कुदरती अलार्म' की महत्ता बताई है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'सर्कैडियन रिद्म' यानी जैविक घड़ी कहते हैं। डॉ. अशोक ने बताया कि हमारा शरीर दिन और रात के एक चक्र में काम करने के लिए बना है। यही चक्र हमारी नींद, पाचन, हार्मोन और सबसे महत्वपूर्ण रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को कंट्रोल करता है। देर रात तक जागने, नाइट शिफ्ट में काम करने और अनियमित दिनचर्या से जैविक घड़ी पटरी से उतर जाती है। शरीर की रक्षा कोशिकाएं भी 'सुस्त' पड़ जाती हैं ऐसी स्थिति में शरीर की रक्षा कोशिकाएं भी 'सुस्त' पड़ जाती हैं और कैंसर कोशिकाएं हमारी ऊर्जा प्रणाली पर कब्जा कर लेती हैं। धीरे-धीरे कैंसर कोशिकाएं इतनी शक्तिशाली हो जाती हैं कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें पहचान कर नष्ट ही नहीं कर पाती। इंटरनेशनल जर्नल में मिली पहचान, मिला सम्मान डॉ. अशोक कुमार ने यह शोध डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव (केजीएमयू लखनऊ), मनेन्द्र सिंह तोमर और मोहित के सहयोग से पूरा किया है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित जर्नल 'स्लीप मेडिसिन रिव्यूज' में प्रकाशित किया गया है। साथ ही डॉ. अशोक कुमार को 'बेस्ट पेपर अवार्ड' से नवाजा गया। आमजन के लिए 'सुरक्षा मंत्र'     सोने का समय तय करें रोज एक तय समय पर सोएं और जागें ताकि जैविक घड़ी संतुलित रहे।     सोने से एक घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन से दूरी बना लें।     अनियमित खान-पान शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ता है। समय पर भोजन करें।     नींद और कैंसर के बीच छुपे संबंध पर यह शोध समाज के लिए एक वेक-अप कॉल है। यह वैज्ञानिक उपलब्धि न केवल चिकित्सा जगत के लिए मूल्यवान है, बल्कि आम लोगों को यह समझाने में भी कारगर होगी कि स्वस्थ जीवनशैली ही कैंसर के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।     -डॉ. माधवानन्द कर, कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ, एम्स भोपाल।  

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

हिंदू ज्योतिष और मान्यताओं में गंडमूल नक्षत्र का विशेष महत्व माना गया है. जब भी किसी घर में बच्चे की किलकारी गूंजती है, तो खुशियों के साथ-साथ ग्रह-नक्षत्रों की गणना भी शुरू हो जाती है. इसी गणना में अगर गंडमूल का जिक्र आता है, तो अक्सर बड़े-बुजुर्ग पिता को बच्चे का चेहरा 27 दिन तक देखने से मना कर देते हैं. आइए जानते हैं कि इस परंपरा के पीछे की असल कहानी क्या है और इसमें पिता की ममता और ज्योतिष का क्या मेल है. क्या होते हैं गंडमूल नक्षत्र? ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं. इनमें से 6 नक्षत्रों को गंडमूल नक्षत्र की श्रेणी में रखा गया है, अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती. माना जाता है कि जब राशि और नक्षत्र दोनों एक साथ समाप्त हो रहे हों और नए शुरू हो रहे हों (संधि काल), तो उस समय पैदा होने वाले बच्चों पर ग्रहों का प्रभाव थोड़ा भारी होता है. इसे ही गंड दोष कहा जाता है. पिता को चेहरा न दिखाने के पीछे का तर्क! अनिष्ट की आशंका: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन नक्षत्रों में जन्मे बच्चे का तेज इतना प्रबल और अलग होता है कि यदि पिता तुरंत उसे देख ले, तो पिता के स्वास्थ्य, मान-सम्मान या आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है. 27 दिनों का विज्ञान: चंद्रमा को सभी 27 नक्षत्रों का चक्र पूरा करने में लगभग 27 दिन लगते हैं. जब 27 दिन बाद वही नक्षत्र दोबारा आता है जिसमें बच्चे का जन्म हुआ था, तब गंडमूल शांति पूजा की जाती है. इस पूजा के बाद ही ग्रह शांत माने जाते हैं और पिता-पुत्र का मिलन शुभ माना जाता है. भावनात्मक सुरक्षा: पुराने समय में इस नियम को इसलिए भी कड़ाई से माना जाता था ताकि परिवार पूरी सावधानी बरते और बच्चे व पिता के बीच एक सुरक्षा कवच बना रहे. क्या वाकई यह डराने वाली बात है? आज के आधुनिक दौर में कई लोग इसे अंधविश्वास मान सकते हैं, लेकिन गंडमूल में जन्मा बच्चा अशुभ नहीं होता होता है बस ज्योतिष के जानकार इसे सावधानी का नाम देते हैं. पूजा और समाधान नक्षत्र शांति: इसके नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए 27वें दिन मूल शांति’ या ‘सतैसा पूजा की जाती है. दान-पुण्य: इस दौरान छाया दान कांसे की कटोरी में घी भरकर चेहरा देखना और दान करना का विशेष महत्व है. पिता का मिलन: पूजा पूरी होने के बाद पिता शुभ मुहूर्त में अपने बच्चे को देख सकते हैं और उसे अपनी गोद में ले सकते हैं.

नए ट्रैफिक नियम: साल में 5 बार उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस होगा रद्द, केंद्र का आदेश

नईदिल्ली  सड़क पर बार-बार लापरवाही करने वाले चालकों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर वाहन नियमों (Motor Vehicles Rules) में एक नया संशोधन किया है। अब यदि कोई चालक एक साल के भीतर 5 या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस (DL) 3 महीने के लिए निलंबित या रद्द किया जा सकता है। नया नियम 1 जनवरी से लागू हुआ है। मंत्रालय द्वारा  जारी अधिसूचना के अनुसार, यह नया नियम 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा। इसके मुताबिक, लाइसेंस निलंबित करने का अधिकार क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) या जिला परिवहन अधिकारी के पास होगा। लाइसेंस रद्द करने से पहले संबंधित अधिकारी को लाइसेंस धारक का पक्ष सुनना अनिवार्य होगा। पिछले साल के अपराधों को अगले साल की गिनती में नहीं जोड़ा जाएगा। यानी हर साल की गिनती नए सिरे से होगी। मामूली गलतियां भी पड़ेंगी भारी अब तक केवल 24 गंभीर मामलों (जैसे गाड़ी की चोरी, अपहरण, तेज रफ्तार या ओवरलोडिंग) में ही लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान था। लेकिन नए नियम के बाद अब हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना और रेड लाइट जंप करना जैसे नियमों को 5 बार तोड़ने पर भी आपका लाइसेंस छीना जा सकता है। ई-चालान और भुगतान के नए नियम अधिसूचना में चालान की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। वर्दीधारी पुलिस अधिकारी या अधिकृत अधिकारी चालान जारी कर सकेंगे। CCTV के जरिए ऑटो-जेनरेटेड ई-चालान भी भेजे जाएंगे। चालक को 45 दिनों के भीतर चालान भरना होगा या उसे अदालत में चुनौती देनी होगी। यदि 45 दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो माना जाएगा कि चालक ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। इस कानून को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई है। कुछ का मानना है कि इससे सड़क सुरक्षा बढ़ेगी, वहीं कुछ इसे दमनकारी बता रहे हैं। पूर्व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अनिल छिकारा ने इसे सही दिशा में उठाया कदम बताया, लेकिन यह भी कहा कि सीसीटीवी कैमरों से होने वाले चालान अक्सर विवादों में रहते हैं और इसके लिए एक ठोस मानक प्रक्रिया (SOP) की जरूरत है।

होली पर बिहारवासी अब बिना ट्रेन के धक्के खाए पहुंचेंगे घर, लग्जरी बसें होंगी उपलब्ध!

पटना  होली के मौके पर बिहार से बाहर काम या पढ़ाई करने वाले लाखों प्रवासी बिहारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. ट्रेन में भारी भीड़ और कन्फर्म टिकट न मिलने की परेशानी से जूझ रहे लोगों को इस बार बिहार सरकार ने सीधा और सुरक्षित विकल्प दिया है. होली के त्योहारी सीजन में यात्रियों को घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अब राज्य सरकार भी उठाएगी. दरअसल, बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) ने होली के अवसर पर अलग-अलग राज्यों से बिहार के लिए होली स्पेशल बसों के संचालन की तैयारी शुरू कर दी है. 15 फरवरी से 15 मार्च तक कुल लगभग 200 अंतरराज्यीय बसें चलाई जाएंगी. इन बसों के लिए टिकटों की बुकिंग ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन भी होगी. तीन कैटेगरी की बस बीएसआरटीसी की ओर से चलाई जाने वाली ये फेस्टिवल स्पेशल बसें एसी डीलक्स और नॉन-एसी डीलक्स श्रेणी की होंगी. हर बस में 50 से 60 सीटों की क्षमता होगी, ताकि यात्रियों को आरामदायक सफर मिल सके. यात्रियों को अतिरिक्त राहत देने के लिए राज्य सरकार इन बसों के किराये पर विशेष छूट भी देगी. टिकट बुकिंग की शुरुआत एक फरवरी से हो जाएगी. ये विशेष बसें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर चलाई जाएंगी. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड के प्रमुख रूटों पर इनका संचालन किया जाएगा. फिलहाल विभाग रूट निर्धारण और किराये को अंतिम रूप देने में जुटा है. इनमें से सबसे अधिक बसें दिल्ली के लिए होंगी. यहां से कर सकेंगे टिकट बुक यात्री बीएसआरटीसी की आधिकारिक वेबसाइट https://bsrtc.bihar.gov.in/ पर जाकर आसानी से टिकट बुक कर सकेंगे. भुगतान के लिए यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी. यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चिन्हित बस पड़ावों पर महिला और पुरुष यात्रियों के लिए स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था भी की जाएगी. पहले भी हुई थी पहल बीएसआरटीसी ने पिछले साल भी त्योहारी सीजन में इसी तरह की पहल की थी. 20 सितंबर से 19 नवंबर 2025 तक करीब 220 अंतरराज्यीय फेस्टिवल बसों का संचालन किया गया था. इससे लगभग 2.50 लाख यात्रियों को लाभ मिला. उस दौरान औसतन रोजाना 107 बसें एकतरफा चलीं, जिनमें 81 प्रतिशत सीटें भरी रहीं और आठ हजार से अधिक टिकट ऑनलाइन बुक हुए थे. होली के बाद बिहार से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के लिए सीधी सरकारी बस सेवा शुरू करने की भी तैयारी है. बिहार के अलग-अलग जिलों से कुल 150 नई अंतरराज्यीय बसों का परिचालन किया जाएगा. इसके लिए संबंधित राज्यों की सरकारों के साथ अंतरराज्यीय परिवहन समझौते की प्रक्रिया चल रही है. यह अगले महीने तक पूरी होने की उम्मीद है.

पावरफुल इंजन और स्टाइलिश डिजाइन के साथ MG Majestor जल्द बाजार में

 नई दिल्ली MG Motor इंडियन एसयूवी मार्केट में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है. कंपनी अपनी नई फ्लैगशिप फुल साइज एसयूवी MG Majestor को लॉन्च करने जा रही है. नए MG Majestor को आगामी 12 फरवरी 2026 को लॉन्च किया जाएगा. यह एसयूवी मौजूदा Gloster से ऊपर पोजिशन करेगी. जाएगी और उन ग्राहकों को टारगेट करेगी जो दमदार, प्रीमियम और मजबूत SUV की तलाश में हैं. लॉन्च से पहले ही MG Majestor को लेकर ऑटो इंडस्ट्री में काफी चर्चा शुरू हो चुकी है. लुक और डिजाइन MG Majestor का डिजाइन इंटरनेशनल मार्केट में बिकने वाली Maxus D90 एसयूवी से काफी हद तक इंस्पायर्ड है. इसके फ्रंट में बड़ा ग्रिल दिया गया है, जिसमें ग्लॉस ब्लैक एलिमेंट्स देखने को मिलते हैं. वर्टिकल LED हेडलैंप और पतले आइब्रो स्टाइल DRL इसे एग्रेसिव लुक देते हैं. ब्लैक बंपर और सिल्वर इंसर्ट SUV के स्ट्रांग कैरेक्टर को और उभारते हैं. साइड प्रोफाइल की बात करें तो इसमें मोटी बॉडी क्लैडिंग, ड्यूल टोन 19 इंच अलॉय व्हील, ब्लैक डोर हैंडल और ब्लैक रूफ रेल्स मिलते हैं. रियर में कनेक्टेड LED टेललाइट, ब्लैक बंपर, सिल्वर स्किड प्लेट और ट्विन एग्जॉस्ट स्टाइल एलिमेंट्स इसे प्रीमियम फिनिश देते हैं. इंटीरियर और फीचर्स  ऑटो एक्सपो में MG Majestor का पूरा इंटीरियर सामने नहीं आया, लेकिन स्पाई तस्वीरों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि इसका केबिन Maxus D90 जैसा हो सकता है. इसमें 12.3 इंच का फ्लोटिंग टचस्क्रीन, डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले और 3 स्पोक स्टीयरिंग व्हील मिलने की उम्मीद है. गियर सेलेक्टर स्टीयरिंग कॉलम पर दिया जा सकता है. MG Majestor को Gloster से ऊपर रखा जाएगा, इसलिए इसमें और भी एडवांस फीचर्स मिलने की संभावना है. Gloster में पहले से ही पैनोरमिक सनरूफ, थ्री जोन क्लाइमेट कंट्रोल, वायरलेस चार्जिंग, 12 स्पीकर साउंड सिस्टम, मसाज फंक्शन वाली पावर सीट्स और पावर्ड टेलगेट जैसे फीचर्स मिलते हैं. Majestor में इनसे भी ज्यादा प्रीमियम टेक्नोलॉजी देखने को मिल सकती है. इंजन और परफॉर्मेंस  इस एसयूवी में 2.0 लीटर ट्विन टर्बो डीजल इंजन मिलने की उम्मीद है. यह इंजन करीब 216 hp की पावर और 479 Nm का टॉर्क जनरेट करता है. इसे 8 स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स और 4WD सिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा. कुल मिलाकर MG Majestor भारत के फुल साइज SUV सेगमेंट में कड़े प्रतिद्वंदी के तौर पर उतरेगी. क्या होगी कीमत हालांकि लॉन्च से पहले कीमत के बारे में कुछ भी कहना थोड़ा जल्दबाजी होगी. लेकिन इसे 40 लाख रुपये की शुरुआती कीमत में पेश किया जा सकता है. बाजार में MG Majestor का मुकाबला टोयोटा फॉर्च्यूनर, जीप मेरिडियन, स्कोडा कोडियाक जैसी लोकप्रिय SUV मॉडलों से होगी.

गुजरात के अनोखे NRI गांव की हैरान कर देने वाली कहानी, जहां 10 हजार लोग और अरबों का कारोबार, फिर भी पुलिस नहीं

 आणंद देश के गांवों की जो तस्वीर आमतौर पर हमारे जहन में होती है, यह रिपोर्ट उसे पूरी तरह बदल देने वाली है. कच्ची सड़कें, सीमित सुविधाएं और सरकारी मदद पर निर्भर गांव… लेकिन गुजरात के आनंद जिले का धर्मज गांव इन सब धारणाओं को तोड़ता है. यह एक ऐसा गांव है, जहां खेतों से ज्यादा बैंकों की चर्चा होती है, जहां गलियों में धूल नहीं, बल्कि तरक्की की चमक दिखाई देती है.  सबसे हैरान करने वाली बात… करीब 10 हजार की आबादी वाले इस गांव में एक भी पुलिस थाना नहीं है. इसके बावजूद यहां अपराध नहीं, बल्कि अनुशासन और भाईचारा कायम है. यही वजह है कि धर्मज को आज देश ही नहीं, दुनिया भर में NRI गांव के नाम से जाना जाता है. आनंद जिले के चरोतर क्षेत्र में स्थित धर्मज गांव में कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है मानो आप किसी विकसित यूरोपीय कस्बे में आ गए हों. चौड़ी और साफ सड़कें, शानदार ड्रेनेज सिस्टम, दूधिया स्ट्रीट लाइट्स और हर कोने में आधुनिक सुविधाएं. इस गांव की आर्थिक ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां मौजूद बैंकों में 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की फिक्स्ड डिपॉजिट जमा है. यही कारण है कि धर्मज जैसे गांव में 13 से अधिक नेशनल और प्राइवेट बैंकों की शाखाएं हैं. यहां का किसान भी करोड़पति है और गांव की अर्थव्यवस्था किसी शहर से कम नहीं. 19वीं सदी में पड़ी तरक्की की नींव धर्मज की इस बेमिसाल तरक्की की नींव 19वीं सदी में ही पड़ गई थी. समय के साथ यहां के लोग रोजगार और व्यापार के लिए विदेश गए, लेकिन अपनी मिट्टी से नाता कभी नहीं तोड़ा. आज इस गांव का शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जिसका कोई सदस्य विदेश में न रहता हो. ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और अफ्रीका जैसे देशों में करीब 3,000 परिवार बसे हुए हैं. लेकिन ये प्रवासी भारतीय सिर्फ पैसा कमाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अपने गांव के विकास को ही अपना असली मिशन बना लिया. हर साल धर्मज डे मनाया जाता है, जहां दुनियाभर से NRI अपने गांव लौटते हैं और गांव के विकास के लिए खुलकर योगदान देते हैं. स्कूल, अस्पताल, सड़क, पानी, शिक्षा… हर क्षेत्र में यह सहयोग साफ दिखाई देता है. बिना पुलिस, फिर भी पूरी शांति धर्मज की सबसे बड़ी और अनोखी पहचान है यहां की शांति. 10 हजार से ज्यादा की आबादी, लेकिन गांव में न तो कोई पुलिस थाना है और न ही अपराध का डर. यहां न एफआईआर होती है, न मुकदमेबाजी. अगर कभी कोई विवाद उत्पन्न भी हो जाए, तो गांव के बुजुर्ग, पंचायत और युवा आपसी सहमति से उसे सुलझा लेते हैं. यहां पुलिस की लाठी से ज्यादा असर आपसी विश्वास और भाईचारे का है. स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके पूर्वजों ने उन्हें सिखाया कि चाहे आप दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न चले जाएं, अपनी जड़ों को कभी मत भूलिए. यही संस्कार आज धर्मज की पहचान बन चुके हैं. सुविधाएं जो शहरों को भी मात दें धर्मज में मौजूद सुविधाएं कई मेट्रो शहरों को भी शर्मिंदा कर दें. गांव में हाई-स्पीड वाई-फाई, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, और 24 घंटे साफ पानी की व्यवस्था है. स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो यहां आई हॉस्पिटल, गायनेक सेंटर, फिजियोथेरेपी क्लिनिक और अन्य चिकित्सा सुविधाएं बेहद कम खर्च में उपलब्ध हैं. आस्था और सेवा का केंद्र है जलाराम मंदिर, जहां की रसोई से कोई भी भूखा नहीं लौटता. यहां सेवा को धर्म माना जाता है और यह भावना गांव के हर व्यक्ति में दिखाई देती है. 100 साल पुरानी विरासत आज भी जीवित धर्मज सिर्फ आधुनिकता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी 100 साल पुरानी हेरिटेज के लिए भी जाना जाता है. गांव में आज भी ऐसे पुराने घर मौजूद हैं, जिन्हें देखकर लगता है मानो वे अभी-अभी बनाए गए हों. इन घरों की दीवारों पर मोर, कृष्ण, हाथी और पौराणिक कथाओं की अद्भुत कलाकृतियां उकेरी गई हैं. यह गांव इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता और परंपरा साथ-साथ चल सकती हैं. यही वजह है कि यहां काम करने वाले बैंक कर्मचारी, शिक्षक और डॉक्टर भी धर्मज में रहना पसंद करते हैं. साफ वातावरण, सुरक्षित माहौल और बेहतर सुविधाएं इसे रहने के लिए आदर्श बनाती हैं. गांव के लोगों ने क्या कहा? गांव में रहने वाले घनश्याम पटेल ने कहा कि मैं अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी से आया हूं. मुझे तीन दिन हुए हैं. आज धर्मज डे सेलिब्रेशन है. उसके लिए हमारे मन में स्पेशल प्लेस है. हम चाहते हैं कि हमारी जेनरेशन यहां आए और देखे कि हमारी धरोहर क्या है, हमारी संस्कृति क्या है. आज करीब 650 एनआरआई यहां आने वाले हैं. मुंबई, बेंगलुरु आदि शहरों से भी लोग आ रहे हैं. हमारा उद्देश्य है कि हम सब एक जगह मिलें. धर्मज में दस हजार की आबादी के बीच मेट्रो सिटी जैसी सुविधाएं हैं. वहीं मीना पटेल ने कहा कि हमारा गांव पहले से ही काफी एडवांस है. हर साल जनवरी में हम धर्मज डे सेलिब्रेट करते हैं. इस मौके पर एनआरआई इकट्ठे हो जाते हैं. यहां सभी एजुकेशन, मेडिकल जैसी सभी सुविधाएं हैं. घर-घर में फिल्टर वॉटर सप्लाई होता है. धर्मज का मैसेज… एक गांव, एक सोच धर्मज ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि अगर प्रवासी भारतीय और स्थानीय समुदाय एकजुट हो जाएं, तो बिना सरकारी इमदाद के भी विकास का स्वर्ग रचा जा सकता है. धर्मज सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि एक सोच है- ऐसी सोच जो बताती है कि पैसा कमाना बड़ी बात नहीं, लेकिन उस पैसे से अपनी जड़ों को सींचना ही असली कामयाबी है. आज धर्मज की चकाचौंध के पीछे सिर्फ डॉलर नहीं, बल्कि हर धर्मजवासी का समर्पण, एकता और अपने गांव के प्रति अटूट प्रेम है. यही वजह है कि बिना पुलिस थाने के भी यह गांव शांति, समृद्धि और विकास की मिसाल बना हुआ है.

राज्य स्तरीय पुष्प महोत्सव वाइब्रेंट की थीम पर, प्रदेश में उगाए गए फूलों का होगा प्रदर्शन

भोपाल  "वाइब्रेंट" की थीम पर 30 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाला "राज्य स्तरीय पुष्प महोत्सव" बहुउदेशीय होगा। पुष्प महोत्सव के भव्य आयोजन के लिये तैयारियों की समीक्षा बैठक आयुक्त अरविंद दुबे की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें राज्य स्तरीय रोज सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष सच्चिदानंद गर्दे सहित अन्य पदाधिकारी और विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। आयुक्त दुबे ने कहा कि प्रदेश में फूलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने और कृषकों की आय में वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिये पुष्प महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राज्य सरकार वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मना रही है। इसमें कृषि, एवं उद्यानिकी फसल उत्पादन और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना सरकार का मूल लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश, देश का प्रमुख पुष्प उत्पादन राज्य है। मध्यप्रदेश में मुख्यत: गुलाब, जरबेरा, गेंदा, सेवंती, रजनीगंधा, ग्लेडियोलस, आर्किड, लिलियम, एंथुरियम, कारनेशन, गुडहल, बोगनवेलिया आदि फूलों का उत्पादन होता है। पुष्प महोत्सव का उद्देश्य प्रदेश वासियों को ध्यान इस ओर आकर्षित कराना भी है। इस पुष्प महोत्सव के सफल आयोजन के लिये उद्यानिकी विभाग द्वारा पुष्प उत्पादन कृषकों, नर्सरी संचालकों, फूलों का व्यवसाय करने वाले व्यपारियों, रोज सोसाइटी सहित अन्य सामाजिक संस्थाओं, क्लबों को जोड़ा गया है। दुबे ने कहा कि महोत्सव में भाग लेने सभी प्रतिभगियों को विभाग द्वारा पूर्ण सहयोग और समर्थन दिया जाएगा। पुष्प उत्पादकों के मध्य स्वस्थ्य प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी, उत्कृष्ठ स्थान पाने वालों को पुरस्कृत और सम्मानित किया जाएगा।