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PM Kisan Yojna में किसानों को मिलेगी 4,000 रुपये की किस्त, जानें क्या है नई अपडेट

नई दिल्ली देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan) की 22वीं किस्त का इंतजार अब खत्म होने वाला है। इस बार कई किसानों के बैंक खातों में खुशियां दोगुनी होकर आने वाली हैं, क्योंकि उन्हें 2,000 रुपये के बजाय सीधे 4,000 रुपये मिलने की संभावना है। आइए समझते हैं कि इस बार किस्त का गणित क्या है और किन किसानों को इसका विशेष लाभ मिलेगा। किसे मिलेंगे 4,000 रुपये? योजना के नियमानुसार, सरकार हर साल किसानों को 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता देती है, जो 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्तों में आती है। 22वीं किस्त में 4,000 रुपये केवल उन चुनिंदा किसानों को मिलेंगे जिनकी 21वीं किस्त किसी तकनीकी कारण या वेरिफिकेशन की वजह से रुक गई थी। सरकार ऐसे मामलों में पिछली बकाया राशि को अगली किस्त के साथ जोड़कर भेजती है। बजट 2026 पर टिकी हैं निगाहें 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से भी अन्नदाताओं को काफी उम्मीदें हैं। चर्चा है कि सरकार पीएम किसान योजना के बजट में बढ़ोतरी कर सकती है। यदि बजट में राशि बढ़ाई जाती है, तो भविष्य में सभी किसानों की किस्त राशि में इजाफा देखने को मिल सकता है। इन गलतियों के कारण अटक सकती है आपकी किस्त सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि आपकी प्रोफाइल में नीचे दी गई जानकारियां अधूरी हैं, तो 22वीं किस्त आपके खाते में नहीं आएगी:     ई-केवाईसी (e-KYC): जिन किसानों ने अपना ई-केवाईसी अपडेट नहीं कराया है, उनका पैसा अटक जाएगा।     आधार सीडिंग: आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है। चूंकि पैसा DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए भेजा जाता है, इसलिए आधार लिंक न होने पर ट्रांजैक्शन फेल हो सकता है।     बैंक विवरण: गलत अकाउंट नंबर या गलत IFSC कोड होने पर भी राशि क्रेडिट नहीं हो पाएगी। कब आएगी 22वीं किस्त? आमतौर पर पीएम किसान की किस्तें चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं। पैटर्न को देखते हुए, फरवरी 2026 में बजट सत्र के आसपास 22वीं किस्त जारी होने की प्रबल संभावना है। हालांकि, आधिकारिक तारीख की घोषणा होना अभी बाकी है। कैसे चेक करें अपना स्टेटस? किसान भाई पीएम किसान पोर्टल (pmkisan.gov.in) पर जाकर अपना 'Beneficiary Status' चेक कर सकते हैं। वहां आपको पता चल जाएगा कि आपका ई-केवाईसी पूरा है या नहीं और पिछली किस्त का क्या स्टेटस है।  

मध्य प्रदेश सरकार ने ट्रांसफर पॉलिसी में किया बदलाव, उच्च शिक्षा विभाग को मिली राहत

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग ने असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति और स्थानांतरण नीति में बड़ा बदलाव कर वर्षों से चली आ रही व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। अब तक नव नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर को प्रोबेशन पीरियड के दो साल पूरे करने के बाद ही स्थानांतरण के लिए पात्रता मिलती थी, लेकिन अब नियमों में संशोधन के बाद विश्वविद्यालय या कॉलेज प्रबंधन जरूरत के हिसाब से उनका स्थान निर्धारण कर सकेंगे। इस फैसले से विशेष रूप से महिला असिस्टेंट प्रोफेसरों, पारिवारिक कारणों से दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों को राहत मिलेगी। विभाग का दावा है कि इससे शिक्षण कार्य भी प्रभावित नहीं होगा, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। इसलिए बदली पॉलिसी उच्च शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश के अनुसार, कॉलेजों की आवश्यकता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। कई बार नए नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों को ऐसे कॉलेजों में पदस्थ किया जाता है, जहां जरूरत कम होती है, जबकि अन्य कॉलेजों में कमी बनी रहती है। नई व्यवस्था से इसमें असंतुलन दूर होगा। वहीं शिक्षाविदें का कहना है कि इससे कॉलेजों मे स्थायित्व प्रभावित हो सकता है।

सागर के विकास को नई गति देगा 16000 करोड़ का एक्सप्रेस-वे, 75 किमी दूरी कम होगी

 सागर  आने वाले कुछ सालों में मध्य प्रदेश के सागर से हाईवे का जाल गुजरेगा. करीब चार हाईवे की सुविधा जिले को मिलेगी. इसका फायदा व्यापार में तो मिलेगा ही, शहर में विकास भी तेजी से होगा. जहां से नेशनल हाईवे गुजरेंगे, वहां पर उद्योग की नई-नई यूनिट स्थापित होंगी. होटल, रिसोर्ट, मॉल और बड़ी-बड़ी कालोनियां विकसित होंगी. जमीन के दाम बढ़ेंगे. इसी क्रम में एक और खुशखबरी सामने आई है. सागर, विदिशा और कोटा के बीच ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे बनने जा रहा है. इससे दोनों शहरों के बीच की दूरी में 75 किलोमीटर की कमी आ जाएगी. एक्सप्रेस-वे पर वाहन फर्राटा भरेंगे. जिससे 8 घंटे 45 मिनट का सफर 6 घंटे में ही पूरा हो जाएगा. बुंदेलखंड के मुख्यालय सागर, विदिशा होते हुए यह फोरलेन हाईवे कोटा तक जाएगा, जिससे सैकड़ों गांव से भी कनेक्टिविटी होगी. 405 किलोमीटर लंबा यह रास्ता महज 320 किलोमीटर का रह जाएगा. एक्सप्रेसवे बनने से यहां वाहनों की रफ्तार भी बढ़ेगी, जिससे समय की काफी बचत होगी. केंद्र सरकार के द्वारा 16,000 करोड़ के बजट से यह एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है. बता दें, 17 जनवरी को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी विदिशा जिले में पहुंचे थे, जहां उन्होंने मध्य प्रदेश के लिए एक लाख करोड़ के नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. साथ ही उन्होंने 16,000 करोड़ से बनने वाले ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे की घोषणा की है. इस एक्सप्रेसवे के लिए सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है. बीना-सिरोंज के बीच 52 km लंबी फोरलेन सड़क इसके अलावा ग्वालियर, भोपाल, नागपुर ग्रीन एक्सप्रेस-वे का भी निर्माण किया जाएगा. इस परियोजना में 40 हजार करोड़ की लागत आएगी. यह दोनों एक्सप्रेस-वे बनने से एमपी और राजस्थान, एमपी और नागपुर के बीच में बेहतर सड़क संपर्क हो सकेगा. साथ ही 1200 करोड़ की लागत से बीना से सिरोंज 52 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण होगा. इसके बनने से दोनों एक्सप्रेस-वे से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी. सड़कों के जाल से इतने फायदे  सागर की जनता को इन दोनों ही एक्सप्रेसवे का सीधे तौर पर फायदा मिलेगा. क्योंकि, राजस्थान के कोटा जाने के लिए सीधा सागर से एक्सप्रेस-वे होगा तो वहीं सागर से 75 किलोमीटर दूर बीना से सिरोंज मार्ग का इस्तेमाल कर ग्वालियर, भोपाल, नागपुर हाईवे पर पहुंच सकेंगे. इससे यात्रा बेहद सुगम और आरामदायक होगी. इसके अलावा सागर से देश का सबसे लंबा नेशनल हाईवे 44 करीब 154 किलोमीटर का हिस्सा गुजरता है, जिससे उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र पहुंच सकते हैं. इसी के साथ सागर कानपुर 4+2 लाइन का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसका करीब 40 प्रतिशत काम भी पूरा हो चुका है. सागर दमोह के करीब 76 किलोमीटर हाईवे के लिए राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है. इधर भोपाल-सागर नेशनल हाईवे का निर्माण कार्य भी जोरों पर है.

अटल पेंशन योजना में बदलाव, मोदी सरकार ने किया बड़ा फैसला, ज्यादा लोग होंगे लाभान्वित

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने अटल पेंशन योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है. बुधवार को लिए गए इस फैसले के बाद सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि इस योजना के प्रचार, विकास और जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता देने का सिलसिला भी आगे जारी रहेगा. इस फैसले का मकसद असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में नियमित आमदनी की सुरक्षा देना और देश में वित्तीय समावेशन को और मजबूत करना है. मंजूरी के तहत सरकार जागरूकता अभियान चलाने, कर्मचारियों और संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने और दूसरी विकास से जुड़ी गतिविधियों पर खर्च करती रहेगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा गरीब और कम आय वाले लोग इस योजना से जुड़ सकें. इसके अलावा, जहां योजना को चलाने में आर्थिक कमी महसूस होगी, वहां गैप फंडिंग के जरिए उसे पूरा किया जाएगा, ताकि योजना लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे. केंद्र सरकार का कहना है कि इस कदम से उन लाखों लोगों को बुढ़ापे में स्थायी आमदनी मिलेगी, जो औपचारिक सेक्टर से बाहर काम करते हैं. साथ ही यह देश के उस बड़े लक्ष्य को भी आगे बढ़ाएगा, जिसे ‘विकसित भारत @2047’ का विजन कहा गया है, यानी ऐसा भारत जहां ज्यादा से ज्यादा नागरिक पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में हों. कब शुरू हुई थी ये पेंशन योजना अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को हुई थी. इसका उद्देश्य था असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को पक्की पेंशन का लाभ देना, ताकि 60 साल की उम्र के बाद उन्हें किसी पर निर्भर न रहना पड़े. इस योजना में जुड़ने वाले व्यक्ति अपनी उम्र और जमा राशि के हिसाब से हर महीने एक तय पेंशन पाने के हकदार होते हैं. योजना के नियमों के अनुसार, 60 साल की उम्र पूरी होने के बाद लाभार्थी को कम से कम 1,000 रुपये और अधिकतम 5,000 रुपये तक की मासिक पेंशन मिल सकती है. कितनी पेंशन मिलेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति ने कितनी उम्र में योजना जॉइन की और कितना योगदान किया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अटल पेंशन योजना आज देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की एक मजबूत नींव बन चुकी है. 19 जनवरी 2026 तक इस योजना से 8.66 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं. यह संख्या दिखाती है कि आम लोगों के बीच इस योजना को लेकर भरोसा लगातार बढ़ रहा है. सरकार का मानना है कि नामांकन की रफ्तार बनाए रखने, पात्र लोगों में जागरूकता बढ़ाने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए नीति और वित्तीय सहयोग लगातार जरूरी है. वित्त वर्ष 2031 तक योजना और उससे जुड़ी फंडिंग बढ़ाने से असंगठित क्षेत्र तक इसकी पहुंच और मजबूत होगी और कमजोर वर्गों को लंबे समय तक पेंशन की सुरक्षा मिलती रहेगी. अटल पेंशन योजना की पात्रता     भारतीय नागरिक होना चाहिए.     उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए (40 वर्ष से अधिक उम्र वाले नहीं जुड़ सकते).     आपके पास बैंक या पोस्ट ऑफिस में सेविंग्स बैंक अकाउंट होना चाहिए (आधार और मोबाइल नंबर लिंक होना बेहतर).     1 अक्टूबर 2022 से: यदि आप इनकम टैक्सपेयर हैं या रहे हैं, तो इस योजना में शामिल नहीं हो सकते.     कोई भी व्यक्ति जो पहले से NPS या अन्य पेंशन स्कीम में नहीं है, वह जुड़ सकता है. कितना निवेश करना पड़ता है? पेंशन की राशि आप चुन सकते हैं, जैसे ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 या ₹5,000 प्रति माह. योगदान की राशि आपकी उम्र और चुनी गई पेंशन पर निर्भर करती है. जितनी कम उम्र में शुरू करेंगे, उतना कम मासिक योगदान देना पड़ेगा (क्योंकि निवेश की अवधि लंबी हो जाएगी). यहां कुछ उम्र के अनुसार, मासिक योगदान का इंडिकेटिव चार्ट है. 2025-26 के अनुसार, सरकारी दस्तावेजों और कैलकुलेटर से आधारित:   एंट्री की आयु (वर्ष) ₹1,000 पेंशन के लिए मासिक योगदान ₹2,000 पेंशन ₹3,000 पेंशन ₹4,000 पेंशन ₹5,000 पेंशन 18 ₹42 ₹84 ₹126 ₹168 ₹210 20 ₹50 ₹100 ₹150 ₹198 ₹248 25 ₹76 ₹151 ₹226 ₹301 ₹376 30 ₹126 (लगभग) ₹252 ₹378 ₹504 ₹630 (लगभग) 35 ₹231 (लगभग) ₹462 ₹693 ₹924 ₹1,154 40 ₹471 (लगभग) ₹942 ₹1,413 ₹1,884 ₹2,354 नोट: ये राशि इंडिकेटिव है और थोड़ी बदल सकती हैं. सटीक राशि के लिए बैंक में जाएं या आधिकारिक APY कैलकुलेटर इस्तेमाल करें (npstrust.org.in या PFRDA वेबसाइट पर उपलब्ध) है. अटल पेंशन योजना में निवेश कैसे करें? नजदीकी बैंक या पोस्ट ऑफिस जाएं, जहां आपका सेविंग्स अकाउंट है (SBI, PNB, Bank of India, Union Bank, India Post आदि सभी भागीदार बैंक). APY आवेदन फॉर्म भरें (बैंक में उपलब्ध या ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं). व्यक्तिगत विवरण, आधार नंबर, मोबाइल नंबर, नॉमिनी विवरण भरें. पेंशन राशि चुनें. आधार कार्ड की कॉपी और बैंक अकाउंट डिटेल्स जमा करें. बैंक आपके अकाउंट से ऑटो-डेबिट सेट करेगा और PRAN (Permanent Retirement Account Number) जारी करेगा. ऑनलाइन विकल्प: कुछ बैंक ऐप्स (जैसे SBI YONO, HDFC, आदि) या NSDL/NPS पोर्टल से भी चेक कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में बैंक ब्रांच से ही शुरू होता है.        

नौरादेही अभ्यारण्य में अफ्रीकी चीते के लिए काले हिरणों की खास डिश, शिकार की तैयारी शुरू

सागर   नौरादेही मध्यप्रदेश सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व के रूप में पहचान बना रहा है. यहां चीतों को भी शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है. इससे पहले नौरादेही से खबर ये आ रही है चीतों के आगमन से पहले उनके शानदार भोजन की व्यवस्था हो गई है. नौरादेही में बड़ी संख्या में काले हिरणों के झुंड विचरण करने लगे हैं. कई जिलों से रेस्क्यू कर इन काले हिरणों को यहां छोड़ा गया है. नौरादेही में साल 2017 में सिर्फ 5 काले हिरण थे, जो अब बढ़कर 153 हो गए हैं. नौरादेही में घास के खुले मैदान काले हिरणों को पसंद साल 1975 में जब नौरादेही के जंगलों को वन्यजीव अभ्यारण्य का दर्जा दिया गया था, उससे पहले ही ये इलाका भारतीय भेडिया और काले हिरणों के गढ़ के तौर पर जाना जाता था. यहां के विशाल घास के मैदानों के कारण काले हिरणों की संख्या काफी ज्यादा थी, लेकिन धीरे-धीरे यहां काले हिरण दिखना बंद हो गए. 2014 में जब यहां विस्थापन की प्रक्रिया शुरू हुई तो अभ्यारण्य के भीतर के गांव खाली होने लगे और घास के मैदान विकसित किए गए. अब यहां से ऐसी तस्वीरें सामने आई है, जो नौरादेही का इतिहास दोहराती नजर आ रही हैं. यहां घास के मैदानों के बीच काले हिरणों के झुंड नजर आने लगे हैं. सबसे पहले एक बाघ और बाघिन को बसाया नौरादेही में जब 2010 में अफ्रीकन चीतों को बसाने के लिए सर्वे किया गया था. उसी समय तय कर लिया गया कि भविष्य में यहां अफ्रीकन चीते बसाए जाएंगे. इसी योजना के तहत 2014 में नौरादेही वन्य जीव अभ्यारण्य में विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की गई. विस्थापन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद 2018 में पहले नौरादेही वन्य जीव अभ्यारण्य को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण परियोजना में शामिल किया गया. यहां पर एक बाघ और बाघिन को बसाया गया. विस्थापन के बाद नौरादेही में घास के बड़े मैदान विस्थापन की प्रक्रिया चालू होने से अभयारण्य के भीतर के गांव खाली होने लगे. इन गांवों के लोग यहां खेती करते थे. ये खेती की जमीन अभयारण्य प्रबंधन द्वारा घास के मैदानों में तब्दील की गई. सितंबर 2023 में वन्य जीव अभ्यारण्य को टाइगर रिजर्व का दर्जा दे दिया गया और विस्थापन की प्रक्रिया और तेज हो गयी. आज नौरादेही टाइगर रिजर्व के ज्यादातर गांव खाली हो चुके हैं और खेती की जमीन को बड़े-बड़े घास के मैदानों में तब्दील किया जाने लगा है. इससे यहां शाकाहारी जानवरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. नौरादेही के इतिहास को याद करते हुए यहां काले हिरणों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया और दूसरे टाइगर रिजर्व या संरक्षित वन जहां काले हिरणों की संख्या ज्यादा थी, वहां से यहां शिफ्ट किया गया. टाइगर रिजर्व प्रबंधन भी खुश नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए.ए. अंसारी कहते हैं "काले हिरण का विशेष आवास खुले मैदान में होता है. हाल ही में यहां शाजापुर से रेस्क्यू किए गए हिरण यहां छोडे गए. इसके पहले भी यहां काले हिरण रहे हैं. यहां जो काले हिरण आए हैं, वो ब्रीडिंग कर रहे हैं. उनके लिए बड़ा खुला मैदान है. हम उम्मीद कर रहे हैं कि ये यहां अच्छी तरह से रहेंगे और अपनी संख्या भी बढाएंगे और एक बेहतर आवास के रूप में नौरादेही जाना जाएगा." 

16 फरवरी से शुरू होगा मध्यप्रदेश विधानसभा सत्र, 6 मार्च को होगा समापन

भोपाल मध्य प्रदेश की सोलहवीं विधानसभा का नौवां सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा। यह सत्र भोपाल में सुबह 11 बजे राज्यपाल के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। इस सत्र में वार्षिक बजट, अनुपूरक मांगें और विधायी कार्यों पर चर्चा होने की संभावना है। मुख्य रूप से विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं और आर्थिक सुधारों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा और धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस 17 और 18 फरवरी को होगी। इससे संबंधित संशोधन 16 फरवरी शाम 5 बजे तक जमा किए जा सकेंगे। निजी सदस्यों के विधेयक और प्रस्तावों पर शुक्रवार को अंतिम ढाई घंटे चर्चा होगी। यह कार्य 20 फरवरी, 27 फरवरी और 6 मार्च को होगा। इसके लिए नोटिस 4 और 5 फरवरी तक देने होंगे। सत्र से पहले स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े नोटिस 10 फरवरी से स्वीकार किए जाएंगे। विधानसभा सत्र 6 मार्च तक चलेगा। बैठकें 16 से 20 फरवरी, 23 से 27 फरवरी और 5 व 6 मार्च को होंगी। हर दिन प्रश्नकाल होगा। मंगलवार से गुरुवार तक सरकारी कामकाज पर चर्चा होगी, जबकि शुक्रवार को निजी सदस्यों के विधेयक और प्रस्ताव लिए जाएंगे। शनिवार और रविवार को अवकाश रहेगा। होली के कारण 3 मार्च को छुट्टी होगी, जबकि 2 और 4 मार्च को कोई बैठक नहीं होगी। विधानसभा सचिवालय ने सभी सदस्यों को आचरण नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। व्यक्तिगत आरोप लगाने और नोटिस की समय से पहले सार्वजनिकता पर रोक लगाई गई है। सुरक्षा व्यवस्था और मतदान प्रक्रिया को लेकर भी सख्ती बरतने को कहा गया है। विधायकों से अपने पते अपडेट रखने और नोटिस जमा करने के नियमों का पालन करने का आग्रह किया गया है, ताकि सत्र सुचारू रूप से चल सके। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के तहत होने वाला यह सत्र राज्य से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य प्रदेश की बड़ी आदिवासी और ग्रामीण आबादी को ध्यान में रखते हुए, इस सत्र में समावेशी विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और कृषि सहायता योजनाओं जैसे पीएम-किसान और आयुष्मान भारत पर जोर रहने की उम्मीद है। पिछले विधानसभा सत्रों में महिला सशक्तीकरण और डिजिटल शासन से जुड़े महत्वपूर्ण कानून पारित हुए हैं और इस सत्र में भी उसी दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। यह आदेश 13 जनवरी को जारी किया गया था और 15 जनवरी को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इसे सभी 230 विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 का यह पहला बड़ा विधानसभा सत्र होगा। विधानसभा में भाजपा के 163 और कांग्रेस के 66 विधायक हैं। कांग्रेस से उम्मीद है कि वह महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी।

निवेशकों की नजर Budget 2026 पर: ट्रांजेक्शन टैक्स और STCG में कमी की उम्मीद

नई दिल्ली अगले महीने पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से पहले शेयर बाजार के निवेशकों और एक्सपर्ट्स ने सरकार के सामने अपनी मांगों की लिस्ट रख दी है। बाजार के जानकारों का कहना है कि रिटेल इनवेस्टर्स को प्रोत्साहित करने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। फिलहाल साल भर में 1.25 लाख रुपए तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता, जिसे बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, निवेशक सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) की ऊंची दरों को लेकर भी चिंतित हैं। बाजार का मानना है कि ट्रांजैक्शन पर लगने वाले टैक्स को कम करने से लिक्विडिटी बढ़ेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग शेयर बाजार से जुड़ सकेंगे। टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने पर जोर मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि पिछले कुछ सालों में शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में मौजूदा 1.25 लाख रुपए की LTCG छूट सीमा काफी कम है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 2 लाख रुपए किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे मिडिल क्लास निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर बेहतर रिटर्न मिलेगा और वे लंबी अवधि के लिए निवेश करने को प्रेरित होंगे। STT कम करने की मांग पिछले बजट में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर STT की दरें बढ़ा दी गई थीं। ब्रोकरेज हाउस और ट्रेडर्स का कहना है कि ट्रांजैक्शन टैक्स ज्यादा होने की वजह से ट्रेडिंग की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर बाजार के वॉल्यूम पर पड़ रहा है। निवेशकों की मांग है कि कैश मार्केट में होने वाली खरीदारी पर STT की दरें कम रखी जाएं ताकि सट्टेबाजी के बजाय निवेश को बढ़ावा मिले। होल्डिंग पीरियड में बदलाव की उम्मीद फिलहाल अलग-अलग एसेट क्लास जैसे इक्विटी, डेट, गोल्ड और रियल एस्टेट के लिए 'लॉन्ग टर्म' की परिभाषा अलग-अलग है। बजट 2026 में उम्मीद की जा रही है कि सरकार इसे सरल बनाने के लिए सभी एसेट्स के लिए 12 महीने का एक समान होल्डिंग पीरियड तय कर सकती है। इससे टैक्स कैलकुलेशन आसान हो जाएगा और निवेशकों के बीच किसी तरह का कन्फ्यूजन नहीं रहेगा। इंडेक्सेशन का लाभ फिर से मिले रियल एस्टेट और गोल्ड जैसे एसेट्स पर से इंडेक्सेशन बेनिफिट हटने के बाद से निवेशकों में नाराजगी है। मार्केट एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि सरकार कम से कम गैर-वित्तीय एसेट्स (नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स) पर इंडेक्सेशन का लाभ फिर से शुरू करे या फिर टैक्स की दर को 12.5% से घटाकर 10% कर दे। इससे लंबी अवधि के निवेशकों को महंगाई के अनुपात में राहत मिल सकेगी। निवेश बढ़ेगा तो इकोनॉमी को फायदा होगा टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कैपिटल गेन टैक्स के ढांचे को उदार बनाती है, तो इससे घरेलू बचत का फ्लो शेयर बाजार की तरफ बढ़ेगा। विदेशी निवेशकों (FPIs) की बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों का पैसा बाजार को मजबूती दे सकता है। सरकार के लिए चुनौती रेवेन्यू और निवेशकों की उम्मीदों के बीच बैलेंस बनाने की होगी।

घर की ये 8 जगहें टॉयलेट से भी ज्यादा गंदी होती हैं, सफाई ना करने से बढ़ सकते हैं बीमारियों के खतरे

 नई दिल्ली सभी लोग अपने घरों की खूब साफ-सफाई करते हैं. लेकिन सफाई सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं होती, बल्कि घर साफ होने या ना होने आपकी सेहत से भी सीधा जुड़ा होता है. आपके घरों में रोज झाड़ू-पोछा किया जाता है, फर्श चमकाया जाता है, फिर भी कई बार घर में बदबू महसूस होती है. कई बार घर के लोगों में इंफेक्शन फैल जाता है और वो बीमारी पड़ जाते हैं. इसकी बड़ी वजह है घर की कुछ ऐसी जगहें जो रोज इस्तेमाल होती हैं, जिन्हें साफ करना आप लोग अक्सर भूल जाते हैं. ये जगहें गंदी इसलिए नहीं होतीं क्योंकि आप सफाई नहीं करते, बल्कि इसलिए क्योंकि यहां सबसे ज्यादा हाथ लगते हैं. ऐसे में इन्हें हर रोज साफ करने की जरूरत होती है. आइए जानते हैं घर की उन 8 सबसे गंदी जगहों के बारे में, जिन्हें रोज साफ करना बेहद जरूरी है. 1. किचन सिंक और नल के हैंडल किचन सिंक में लगातार बर्तन धुलते हैं, जिसकी वजह से अक्सर लोग सोचते हैं कि ये तो पानी से धुलता रहता है इसलिए ये साफ ही होगा. लेकिन सच्चाई ये है कि किचन सिंक घर की सबसे गंदी जगहों में से एक होता है. कई रिसर्च के मुताबिक, इसमें टॉयलेट सीट से भी ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: कच्ची सब्जी हो, मीट हो या फिर नमी..ये सभी बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका देते हैं. रोज सफाई से बदबू और इंफेक्शन से बचा जा सकता है. ऐसे में गर्म पानी और डिसइंफेक्टेंट से सिंक और नल जरूर साफ करें. 2. चॉपिंग बोर्ड चॉपिंग बोर्ड, बाजारों में लकड़ी और प्लास्टिक दोनों तरह के मौजूद होते हैं. इन पर रोज सब्जी, फल से लेकर नॉन-वेज भी काटा जाता है. इसमें छोटे-छोटे कट्स बन जाते हैं, जिनमें खाना फंस जाता है और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: रोज सफाई से फूड पॉइजनिंग का खतरा कम होता है और बदबू नहीं आती. हर बार इस्तेमाल के बाद गर्म पानी और साबुन से धोएं. अगर आप इस पर कुछ नॉन-वेज चॉप कर रहे हैं तो इसे नींबू या सिरके के पानी से साफ करें. 3. मोबाइल फोन और रिमोट  मोबाइल फोन, टीवी या एसी के रिमोट दिनभर आपके हाथ में रहते हैं. आप इन्हें खाते समय, बाहर से आकर और कभी-कभी बिना हाथ धोए भी छूते हैं. रिसर्च के अनुसार मोबाइल फोन पर टॉयलेट सीट से ज्यादा कीटाणु हो सकते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: अगर आप इन्हें रोज पोंछते हैं तो हाथों से चेहरे तक पहुंचने वाले कीटाणु कम होते हैं. ऐसे में इन्हें माइक्रोफाइबर कपड़े और 70% अल्कोहल से हल्के हाथों से रोज साफ करना चाहिए. 4. किचन स्पॉन्ज और डिशक्लॉथ बर्तन धोने वाला स्पॉन्ज और कपड़ा बहुत ज्यादा गंदे होते हैं. ये हमेशा गीले रहते हैं और इनमें खाने के कण फंस जाते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: इन्हें जब आप रोज साफ करते हैं तो इनमें बदबू नहीं आती और बैक्टीरिया भी नहीं बढ़ते हैं. इन्हें गर्म पानी और डिटर्जेंट में उबालें. स्पॉन्ज हफ्ते में बदलें और डिशक्लॉथ रोज धोएं. 5. बाथरूम के नल और हैंडल जब बाथरूम की बात आती है तो सबसे पहले दिमाग में पानी का नाम आता है. बाथरूम में नमी ज्यादा होती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस जल्दी बढ़ते हैं. नल, हैंडल और साबुन डिस्पेंसर बार-बार छुए जाते हैं, जिससे इंफेक्शन फैलने का खतरा रहता है. क्यों जरूरी है सफाई: अगर आप उन्हें रोज पोंछते हैं तो उससे कीटाणु फैलने से रुकते हैं और फंगस नहीं जमता. दिन के आखिर में डिसइंफेक्टेंट वाइप से साफ करें. 6. टॉयलेट फ्लश हैंडल टॉयलेट फ्लश हैंडल भी कीटोणुओं का घर होता है. वो बहुत ज्यादा गंदा होता है, क्योंकि इसे हाथ धोने से पहले छुआ जाता है. क्यों जरूरी है सफाई: रोज सैनिटाइज करने से खतरनाक बैक्टीरिया खत्म होते हैं. इसे डिसइंफेक्टेंट स्प्रे या वाइप से रोज साफ करें. बाथरूम के दरवाजों के हैंडल भी जरूर साफ करें. 7. पालतू जानवरों के खाने के बर्तन अगर आपके घर में पेट डॉग या और कोई पेट है तो उनके खाने के बर्तन भी जरूर होंगे. जानवरों के खाने और पानी के बर्तनों में लार और खाना जमा हो जाता है, जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं. ऐसे में वो बीमारी की वजह बन सकते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: रोज पालतू जानवरों के बर्तन धोने से ना केवल उनकी सेहत अच्छी रहती है, बल्कि आपकी भी. उनमें बदबू भी नहीं आती है. हर बार खाने के बाद गर्म पानी और साबुन से बर्तन धोएं और आसपास की जगह भी साफ रखें. 8. लाइट स्विच लाइट स्विच ऐसी चीज है जिसे हर कोई छूता है, लेकिन साफ करने का ध्यान कम ही आता है. क्यों जरूरी है सफाई: जब आप इन्हें रोज साफ करते हैं, पोंछते हैं तो उससे वायरस और बैक्टीरिया फैलने से रुकते हैं. डिसइंफेक्टेंट वाइप से लाइट स्विच और दरवाजों के हैंडल साफ करें.

एमपी के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में अब होगी हाईटेक और प्रैक्टिकल आधारित शिक्षा, प्राचार्य तैयार करेंगे भविष्य की नर्सें

 भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे। राज्य सरकार और एम्स भोपाल ने मिलकर एक मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसके तहत नर्सिंग छात्रों को आधुनिक मशीनों के संचालन और गंभीर मरीजों की देखभाल में दक्ष बनाया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत एम्स भोपाल के विशेषज्ञ प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्यों और शिक्षकों को हाईटेक मेंटर के रूप में प्रशिक्षित करेंगे। वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ाई का ढांचा पारंपरिक है। छात्रों का अधिक समय थ्योरी पढ़ने और ब्लैकबोर्ड आधारित शिक्षण में ही निकल जाता है। उन्हें बड़े अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनों और जटिल मेडिकल केसों को नजदीक से देखने का अवसर बहुत कम मिलता है। व्यावहारिक अनुभव की यही कमी दूर करने के लिए यह नई पहल शुरू की गई है। सात दिनों के प्रशिक्षण में सीखेंगे प्रबंधन और तकनीक मास्टर प्लान के पहले चरण में 24 जिलों के नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्यों और शिक्षकों के लिए सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में ‘एडवांस सिमुलेशन लैब’ के माध्यम से डमी (पुतलों) पर वेंटिलेटर, डायलिसिस मशीन और कार्डियक मॉनिटर जैसे उपकरणों का अभ्यास कराया गया। साथ ही कॉलेज प्रबंधन और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं, जो अब तक केवल एम्स जैसे बड़े संस्थानों तक सीमित थीं। इस नई पद्धति के जरिए भारतीय नर्सिंग परिषद के नए ‘दक्षता-आधारित पाठ्यक्रम’ को जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है, ताकि मध्य प्रदेश की नर्सिंग शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाया जा सके। छात्रों को ये होगा फायदा इस पहल से छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही इमरजेंसी केयर में इस्तेमाल होने वाली मशीनें चलाना आ जाएगा। अस्पताल में ड्यूटी ज्वाइन करते समय उन्हें अलग से प्रशिक्षण लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हाथों-हाथ प्रैक्टिस से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे मरीजों को बेहतर इलाज दे सकेंगे। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मिलने से उनके लिए देश के बड़े निजी अस्पतालों और विदेशों में नौकरी के अवसर भी खुलेंगे। आम नागरिकों को मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक डॉ माधवानंद कर ने कहा कि मप्र के नर्सिंग शिक्षकों और प्राचार्यों को नई तकनीकों और पाठ्यक्रमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

दिल्ली में यमुना अब गंगा जैसी होगी, मेगा प्लान के तहत डेढ़ साल में बदल जाएगी नदी की तस्वीर

नई दिल्ली दिल्ली में प्रदूषण से अंतिम सांसें गिन रही यमुना नदी को जीवनदान देने की तैयारी हो चुकी है. प्रदूषण से गंदी हो चुकी यमुना को गंगा की तरह साफ करने के लिए मेगा प्लान तैयार कर लिया गया है. यमुना की सफाई योजना के तहत दिल्ली सरकार 518.88 करोड़ रुपये की एक बड़ी परियोजना शुरू करने जा रही है. इस प्रोजेक्ट के तहत न केवल यमुना नदी को साफ किया जाएगा बल्कि गंदे पानी को ट्रीट कर दोबारा उसे यमुना छोड़ने और नदी में पानी का स्तर बनाए रखने की व्यवस्था की जाएगी. दिल्ली सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक यमुना की सफाई योजना में नदी में पैरेलल वाटर सिस्टम, पंपिंग स्टेशन और ऊंचे (एलिवेटेड) चैनल बनाए जाएंगे, ताकि कोरोनेशन पिलर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पूरी तरह साफ किया गया पानी यमुना नदी तक दोबारा पहुंचाया जा सके. इस परियोजना में जहांगीरपुरी नाले से रोजाना 30 मिलियन गैलन प्रति दिन गंदे पानी को पाइपलाइन के जरिए कोरोनेशन पिलर प्लांट तक लाया जाएगा, जहां उसका ट्रीटमेंट किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार इस काम के लिए बंद पाइप सिस्टम (क्लोज डक्ट सिस्टम), पंपिंग स्टेशन और ऊंचे चैनल बनाए जाएंगे. इससे साफ किया गया पानी वजीराबाद बैराज तक पहुंचाया जाएगा, ताकि यमुना में पानी का बहाव बढ़ सके. यह बहाव ई-फ्लो (पर्यावरणीय प्रवाह) कहलाता है, यानी नदी को जीवित और स्वस्थ रखने के लिए जरूरी न्यूनतम पानी का स्तर बनाए रखा जाएगा. कौन उठा रहा खर्च?  प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना की निर्माण लागत केंद्र सरकार देगी, जबकि इसके संचालन और रखरखाव का खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी. परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और सबसे बड़ी बात है कि इसे डेढ़ साल में पूरा किया जाएगा. यह फंड राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत दिया गया है. परियोजना में क्या-क्या होगा? . जहांगीरपुरी नाले से बिना साफ किया गया गंदा पानी पाइपलाइन से लाना . 64 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता का पंपिंग स्टेशन बनाना . ट्रीटमेंट के बाद साफ पानी को पाइप से यमुना तक पहुंचाना  खबर के मुताबिक जहांगीरपुरी नाले को पार करने के लिए ऊंचे RCC चैनल बनाए जाएंगे. इसके लिए दो पंपिंग स्टेशन होंगे. एक 64 MLD का स्टेशन होगा जो गंदा पानी STP तक लाएगा. जबकि दूसरा 318 MLD का पंप हाउस जो साफ पानी को यमुना तक पहुंचाएगा. इसके अलावा, वजीराबाद तक पानी ले जाने के रास्ते में दो ट्रस ब्रिज भी बनाए जाएंगे. केंद्र सरकार के प्लान में थी यमुना की सफाई 24 जून 2025 को एक रिपोर्ट में बताया गया था कि केंद्र सरकार यमुना को फिर से साफ करने की योजना पर नजर रखे हुए है. खासकर कोरोनेशन पिलर और यमुना विहार प्लांट के जरिए ई-फ्लो बढ़ाने पर. दिल्ली में यमुना का कितना हिस्सा है प्रदूषित? वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज तक यमुना का 22 किमी का हिस्सा जो कि पूरी नदी का सिर्फ 2 फीसदी है सबसे ज्यादा प्रदूषित है. नदी में इसी हिस्से से सबसे ज्यादा 76 फीसदी प्रदूषण होता है. विशेषज्ञों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के अनुसार यमुना को स्वस्थ रखने के लिए 23 क्यूमेक्स पानी की जरूरत है, जबकि अभी सिर्फ 10 क्यूमेक्स पानी ही बह रहा है. ऐसे में पानी को साफ कर फिर से पानी पहुंचाने से पानी के स्तर को बनाए रखने में सहायता मिलेगी. अधिकारियों ने बताया कि नया सिस्टम खुले नालों को बायपास करेगा, क्योंकि खुले नाले साफ पानी को दोबारा गंदा कर देते हैं. यमुना कार्यकर्ता भीम सिंह रावत ने कहा कि इससे थोड़ा प्रदूषण जरूर कम होगा, लेकिन पानी की मात्रा अभी भी कम है. उन्होंने कहा, ‘साफ किए गए पानी की गुणवत्ता पर खास ध्यान देना होगा. नदी में छोड़ा जाने वाला पानी इनलैंड वाटर स्टैंडर्ड के अनुसार और ज्यादा शुद्ध होना चाहिए.’