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टीम इंडिया की टेंशन बढ़ी? आखिरी टी20 से पहले सैमसन का बल्ला और अक्षर की फिटनेस बड़ी चिंता

तिरुवनंतपुरम खिताब का प्रबल दावेदार भारत टी20 विश्व कप से पहले शनिवार को यहां जब न्यूजीलैंड के खिलाफ पांचवें और अंतिम टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में खेलने के लिए उतरेगा तो उसे उम्मीद रहेगी कि संजू सैमसन अपने घरेलू दर्शकों के सामने फॉर्म में वापसी करने और अक्षर पटेल फिटनेस हासिल करने में सफल रहेंगे। विशाखापत्तनम में खेले गए चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में भारत ने प्रयोग करते हुए पांच मुख्य गेंदबाजों को ही खिलाया तथा ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या और शिवम दुबे से गेंदबाजी नहीं करवाई। भारत यह मैच हार गया था लेकिन इससे श्रृंखला के परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा क्योंकि भारतीय टीम पहले ही इसे अपने नाम कर चुकी थी। जैसा कि श्रृंखला के पिछले मैचों में देखा गया, भारत अपने गेंदबाजी विभाग में एक बार फिर फेरबदल कर सकता है। भारतीय टीम प्रबंधन पिछले दो मैचों में आराम देने के बाद मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती को मौका दे सकता है। बल्लेबाजी विभाग में शायद ज्यादा बदलाव न हों, लेकिन टीम प्रबंधन सैमसन पर नजर रखेगा। अपनी निर्भीक बल्लेबाजी के लिए मशहूर सैमसन इस श्रृंखला में रन बनाने के लिए जूझ रहे हैं। उनकी फॉर्म के बजाय उनकी तकनीकी कमजोरी चिंता का विषय है जिससे उनका आत्मविश्वास भी डगमगा गया है। वह सात फरवरी से शुरू होने वाले विश्व कप से पहले बड़ी पारी खेलने के लिए बेताब होंगे। सैमसन अब अपनी गृह नगर में खेलेंगे और यहां के अपने समर्थकों के सामने शायद वह अपनी खोई हुई लय को फिर से प्राप्त कर लें। टीम के आगमन के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा साझा किए गए एक वीडियो से यह स्पष्ट हो गया कि वह देश के इस हिस्से में सुपरस्टार हैं। कप्तान सूर्यकुमार यादव को हवाई अड्डे के निकास द्वार पर अपने ‘चेट्टा’ (बड़े भाई) के लिए मजाक में रास्ता साफ करते हुए देखा गया, जहां सैकड़ों प्रशंसक सैमसन और उनके साथियों की एक झलक पाने के लिए कतार में खड़े थे। ईशान किशन के रूप में भारतीय टीम के पास सैमसन का मजबूत विकल्प मौजूद है। उन्होंने इस श्रृंखला में शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन इस विकेटकीपर बल्लेबाज को अज्ञात चोट के कारण पिछले मैच से बाहर बैठना पड़ा था। ऑलराउंडर अक्षर भी नागपुर में खेले गए पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में उंगली में चोट लगने के बाद से नहीं खेले हैं। बाएं हाथ के इस स्पिनर ने विशाखापत्तनम में खेले गए चौथे मैच से पहले नेट पर गेंदबाजी की थी। भारत टी20 विश्व कप में अपना पहला मैच सात फरवरी को मुंबई में खेलेगा और वह उससे पहले जीत हासिल करना चाहेगा। इस तरह से देखा जाए तो भारत इस मैच को औपचारिकता नहीं मानेगा। न्यूजीलैंड के खिलाफ 4-1 की शानदार जीत से शैली, ताकत और गहराई से भरपूर टीम का आत्मविश्वास और भी बढ़ेगा। न्यूजीलैंड की टीम बिल्कुल यह नहीं चाहेगी कि ऐसा हो। उसकी टीम पहले तीन मैचों में वे भारत के आक्रामक रवैये के सामने बेबस नजर आई, लेकिन विशाखापत्तनम में उन्होंने भारत के प्रमुख बल्लेबाजों पर अंकुश लगाने में कामयाबी हासिल की। अभिषेक शर्मा और सूर्यकुमार यादव को आउट करने के बाद, न्यूजीलैंड के गेंदबाज शिवम दुबे की तूफानी बल्लेबाजी के बावजूद बाकी बल्लेबाजों को रोकने में सफल रहे। अब उन्हें पता चल गया है कि यह भारतीय टीम अजेय नहीं है और 3-2 का अंतर उन्हें आगामी बड़े मुकाबलों से पहले मानसिक रूप से मजबूत करेगा। ग्रीनफील्ड स्टेडियम में ढेरों रन बनते रहे हैं। भारत ने यहां खेले गए अपने चार टी20 मैचों में से तीन जीते हैं, जिसमें 2017 में न्यूजीलैंड के खिलाफ जीता गया एक मैच भी शामिल है। लेकिन जैसा कि कप्तान मिचेल सैंटनर ने कहा, कीवी टीम अब जानती है कि भारत को हराने के लिए क्या करना जरूरी है। ऐसे में यहां एक रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। सलामी बल्लेबाज टिम सीफर्ट के टीम में शामिल होने से न्यूजीलैंड के शीर्ष क्रम को काफी मजबूती मिली है। न्यूजीलैंड की टीम हालांकि गेंदबाजी में सुधार की उम्मीद कर रही होगी। उसके प्रमुख तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन टीम में शामिल है लेकिन वह अंतिम एकादश में जगह बना पाते हैं या नहीं, यह उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगा। टीम इस प्रकार हैं: भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल (उप-कप्तान), रिंकू सिंह, जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती, ईशान किशन (विकेटकीपर), रवि बिश्नोई। न्यूजीलैंड: मिचेल सैंटनर (कप्तान), माइकल ब्रैसवेल, मार्क चैपमैन, डेवोन कॉनवे (विकेटकीपर), जैकब डफी, जैक फाक्स, मैट हेनरी, काइल जैमीसन, बेवन जैकब्स, डैरिल मिचेल, जेम्स नीशम, ग्लेन फिलिप्स, रचिन रविंद्र, ईश सोढ़ी, लॉकी फर्ग्यूसन। मैच शाम सात बजे शुरू होगा।  

DRDO का नया एयर डिफेंस हथियार, S-400 obsolete, JF-17 और J-10 की क्षमता पर असर

बेंगलुरु  भारत डिफेंस सेक्‍टर में खुद को आत्‍मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है. मिसाइल, तोप-टैंक, फाइटर जेट, एंटी मिसाइल सिस्‍टम के साथ ही अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस एयर डिफेंस सिस्‍टम भी डेवलप किया जा रहा है. 21वीं सदी में टेक्‍नोलॉजी ने बड़ी छलांग लगाई है. रक्षा क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. तकनीक ने युद्ध और सशस्‍त्र संघर्ष के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है. अब ड्रोन वॉरफेयर का समय आ गया है. इसके अलावा लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों ने पूरी दुनिया की चिंताओं को बढ़ा दिया है. सामरिक तौर पर भारत की स्थिति काफी संवेदनशील है. हमारी देश की सीमाएं एक तरफ पाकिस्‍तान तो दूसरी तरफ चीन से लगती हैं. इस्‍लामाबाद और बीजिंग की नीतियों से हर कोई वाकिफ है, ऐसे में भारत के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित करना जरूरी ही नहीं, बल्कि अनिवार्य हो चुका है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन-पाकिस्‍तान की युगलबंदी देखने को मिली थी. चीनी फाइटर जेट और मिसाइल के साथ ही तुर्की निर्मित ड्रोन का इस्‍तेमाल भारत पर अटैक करने में किया गया था. इन सब सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत ने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम विकसित करने पर काम कर रहा है. इस प्रोजेक्‍ट को साल 2035 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है. इसके पूरी तरह से अस्तित्‍व में आने के बाद देश के हर हिस्‍से को किसी भी एरियल थ्रेट से सुरक्षित रखा जा सकेगा. मिशन सुदर्शन चक्र के तहत प्रोजेक्‍ट कुश (Project Kusha) पर काम चल रहा है. बताया जा रहा है कि प्रोजेक्‍ट कुश इस तक पावरफुल होगा कि कई मायनों में रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम भी इसके सामने बौना पड़ जाएगा. भारत अपनी वायु रक्षा क्षमताओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी क्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के तहत चल रहा प्रोजेक्ट कुश देश के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल बनकर उभर रहा है. आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) के प्रमुख अंकथि राजू ने इस कार्यक्रम से जुड़ी अहम जानकारियां साझा करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य स्वदेशी इंटरसेप्टर मिसाइल प्रणाली विकसित करना है, जिसकी क्षमता रूस के अत्याधुनिक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के बराबर या कुछ मामलों में उससे भी बेहतर होगी. प्रोजेक्ट कुशा के तहत तीन प्रकार की इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित की जा रही हैं, जिन्हें M1, M2 और M3 नाम दिया गया है. ये तीनों मिलकर एक लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड बनाएंगी, जो लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और हाई-वैल्यू एयरबोर्न एसेट्स जैसे खतरों से देश की सुरक्षा करने में सक्षम होगी. यह प्रणाली भारत को लंबी दूरी की वायु रक्षा में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.   इतना खास क्‍यों है प्रोजेक्‍ट कुश? डिफेंस प्रोग्राम की पहली कड़ी M1 इंटरसेप्टर मिसाइल होगी, जिसकी मारक क्षमता लगभग 150 किलोमीटर तय की गई है. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोट के अनुसार, यह रेंज मौजूदा कई मध्यम दूरी की एयर डिफेंस मिसाइलों से अधिक है. उदाहरण के तौर पर S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम में इस्‍तेमाल की जाने वाली 9M96E2 मिसाइल की अधिकतम रेंज करीब 120 किलोमीटर मानी जाती है. ऐसे में M1 न केवल दूर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम होगी, बल्कि हाई-प्रिसिजन और इंस्‍टेंट रिएक्‍शन समय के साथ हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. दूसरी मिसाइल M2 को 250 किलोमीटर की रेंज के साथ विकसित किया जा रहा है. यह क्षमता इसे S-400 प्रणाली में इस्तेमाल होने वाली 48N6DM और 48N6E3 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों की श्रेणी में खड़ा करती है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, M2 प्रोजेक्ट कुश की रीढ़ साबित होगी, क्योंकि यह हाई-स्‍पीड और हाई-अल्‍टीट्यूड पर उड़ रहे टार्गेट को भी प्रभावी ढंग से नष्ट करने में सक्षम होगी. इससे इंडियन एयर डिफेंस नेटवर्क की पहुंच और विश्वसनीयता दोनों में बड़ा इजाफा होगा. सबसे महत्वाकांक्षी घटक M3 इंटरसेप्टर है, जिसकी वर्तमान रेंज 350 किलोमीटर बताई गई है. हालांकि, पहले सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक इसके दायरे को 400 किलोमीटर तक बढ़ाने पर भी काम चल रहा है. यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह मिसाइल रूस की S-400 प्रणाली में इस्‍तेमाल 40N6E मिसाइल के बराबर पहुंच प्रदान करेगी. इतनी लंबी दूरी तक लक्ष्य भेदने की क्षमता भारत को दुश्मन के हवाई क्षेत्र के भीतर गहराई तक निगरानी और प्रतिरोध का अवसर देगी, जिससे सामरिक बढ़त और डेटरेंस पावर दोनों में इजाफा होगा. DRDO अधिकारियों के अनुसार, M3 इंटरसेप्टर का पहला परीक्षण 2028 तक किए जाने की संभावना है. इस अवधि में इसके प्रोपल्शन सिस्टम, गाइडेंस तकनीक और रडार इंटीग्रेशन को और अधिक अपग्रेड किया जाएगा, ताकि यह मिसाइल अपने तय प्रदर्शन मानकों को पूरा कर सके या उनसे आगे निकल सके. विशेषज्ञों का मानना है कि जब M3 का पहला परीक्षण होगा, तब तक इसकी क्षमताएं लगभग 400 किलोमीटर की रेंज के आसपास पहुंच सकती हैं. चीन-पाकिस्‍तान का हमला होगा बेकार प्रोजेक्ट कुश केवल तकनीकी उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की रक्षा नीति में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करता है. अब तक भारत को लंबी दूरी की वायु रक्षा के लिए काफी हद तक इंपोर्टेड सिस्‍टम्‍स पर निर्भर रहना पड़ा है. प्रोजेक्‍ट कुश के सफल होने से न केवल विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी नई तकनीक, रोजगार और निर्यात के अवसर मिलेंगे. रणनीतिक दृष्टि से देखें तो यह परियोजना भारत के मल्‍टी-लेयर्ड एयर डिफेंस नेटवर्क को और सशक्त बनाएगी. M1, M2 और M3 की संयुक्त तैनाती से देश को मध्यम, लंबी और लंबी दूरी तक व्यापक सुरक्षा कवच मिलेगा. इससे सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और किसी भी संभावित हवाई खतरे के खिलाफ त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी. प्रोजेक्ट कुश भारत की रक्षा अनुसंधान क्षमताओं और रणनीतिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनता जा रहा है. यदि यह कार्यक्रम तय समयसीमा और लक्ष्यों के अनुरूप सफल होता है, तो भारत न केवल अपनी जरूरतों को स्वदेशी तकनीक से पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी एक सशक्त खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है. … Read more

महाशिवरात्रि 2026: बन रहे हैं विशेष योग, चार प्रहर पूजा से मिलेगा महाफल

फरवरी महीने में इस बार महाशिवरात्रि पड़ रही है, जो भगवान भोलेनाथ का बहुत ही विशेष दिन है. इस दिन भगवान भोलेनाथ के भक्त विशेष पूजा अर्चना करते हैं. आखिर फरवरी में किस दिन महाशिवरात्रि मनाई जाएगी, कितने बजे से शुरू हो रही है और साथ ही इस बार के महाशिवरात्रि में कौन से तीन विशेष योग बन रहे हैं, जो भोलेनाथ के भक्तों के लिए काफी फलदाई साबित हो सकते हैं. महाशिवरात्रि कब है ? ज्योतिष आचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री बताते हैं कि "इस बार महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी 15 फरवरी 2026 को है. महाशिवरात्रि यानी त्रयोदशी और चतुर्दशी के मध्य का जो समय होता है, वो बहुत शुभ माना जाता है. दिन में 3 बजके 59 मिनट के बाद महाशिवरात्रि का पर्व प्रारंभ हो रहा है. महाशिवरात्रि का पर्व जैसे ही शुरू होगा. इसमें उदया तिथि नहीं लिया जाता है. उदित पारण करना चाहिए. महाशिवरात्रि में ऐसे करें दिन की शुरुआत ज्योतिष आचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री कहते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन प्रातकालीन उठें स्नान करें, एक पवित्र कलश में शुद्ध जल भर लें, साथ में शहद, शक्कर, घी, गुड और कुछ प्रसाद ले लें. किसी शिवालय में जाकर भगवान भोलेनाथ को स्नान कराएं. दूध, दही, गंगाजल, शहद और शक्कर से स्नान कराएं, बेलपत्र धतूर का पत्ता धतूर के फल, फूल, आम के बौर और तरह-तरह के ऐसे फूल जो भगवान भोलेनाथ को बहुत प्रिय हैं, ओम नमः शिवाय का जाप करते हुए उन्हें अर्पित करें. फिर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना-आरती करें, जिससे भगवान भोलेनाथ बहुत प्रसन्न होते हैं. बन रहे तीन योग इस बार महाशिवरात्रि में 3 प्रकार के विशेष योग भी बन रहे हैं, जो इस महाशिवरात्रि को बहुत विशेष बनाती है. इस बार की महाशिवरात्रि में जो योग बन रहा है, उसमें पहला व्यतिपात योग है. ये विशेष योग होने के कारण जो भी भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं, इस दौरान साधना, दान, पूजा के लिए अत्यंत फलदाई माना गया है. आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है. ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ समय होता है. इस योग में मन को एकाग्र करना आसान होता है, इसलिए ध्यान के लिए उत्तम समय है. महाशिवरात्रि में दूसरा योग अमृत सिद्धि योग का बन रहा है. इस दिन शिवजी की कृपा बरसती है. समुद्र, पवित्र नदियों, गंगा या घर में स्नान करें और शिवजी की पूजन कर लें तो अमृत की प्राप्ति होती है. इसके अलावा इसी दिन सर्वार्थ सिद्ध योग भी बन रहा है. मतलब इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए बेहतर समय होता है. कोई नया व्यापार, दुकान शुरू करना है, सोना-चांदी, जमीन खरीदना है, मकान बनाना है तो यह बहुत ही शुभ समय माना जाता है. चार प्रहर की पूजा से भोलेनाथ होंगे प्रसन्न ज्योतिष आचार्य कहते हैं कि महाशिवरात्रि में 4 प्रहर की जो पूजा होती है. जो विशेष मानी गई है. बहुत लोग दिन-रात मिलाकर चार पहर पूजा करना पसंद करते हैं, ऐसे लोग सुबह 15 तारीख की सुबह 6:00 से लेकर के 12:00 तक प्रथम प्रहर की पूजन करें, दोपहर में 12:00 से लेकर के शाम को 6:00 तक दूसरे प्रहर की पूजा करें, इसके बाद शाम 6:00 बजे से 12:00 बजे रात तक तृतीय प्रहर की पूजा करें और फिर रात को 12:00 से सुबह 6:00 बजे तक चतुर्थ प्रहर की पूजा करें. शास्त्रों में यह भी वर्णित है कि अगर रात्रि के समय चार प्रहर की पूजा करते हैं, तो यह विशेष फलदाई होता है. जो रात्रि कालीन चार प्रहर की पूजा करना चाहते हैं, वो शाम के समय लगभग 6:00 से लेकर के 9:00 बजे के बीच में प्रथम प्रहर की पूजा करें. 9:00 से लेकर के 12:00 के बीच में दूसरे प्रहर की पूजा करें, 12:00 रात्रि से लेकर के सुबह 3:00 बजे तक तृतीय प्रहर की पूजा करें और तड़के 3:00 से लेकर के सुबह 6:00 बजे तक चौथे प्रहर की पूजा करें. चार प्रहर की पूजा के बाद आरती, हवन करें और ब्राह्मण भोज कराएं. इसके बाद खुद का भी पारण करें. जिससे भगवान शिव की कृपा आप पर बरसती है. मन को शांति मिलती है घर में शांति आती है. 

शरद पवार के बड़े नेता बोले, NCP का विलय तय, ऐलान मात्र समय की बात

 मुंबई महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा खुलासा करते हुए एनसीपी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे ने कहा है कि दोनों एनसीपी के एक साथ विलय की बातचीत लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी. खडसे के मुताबिक पिछले तीन से चार महीनों से अजित पवार और अन्य नेताओं के साथ लगातार चर्चा चल रही थी और विलय को लेकर सहमति बन चुकी थी. एकनाथ खडसे ने कहा कि शरद पवार गुट की ओर से यह तय किया गया था कि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह पर लड़े जाएंगे. औपचारिक रूप से मर्जर की घोषणा करने की भी पूरी योजना थी. हालांकि इसी बीच यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो गई, जिसके चलते यह प्रक्रिया रुक गई. प्लेन क्रैश में अजित पवार का निधन बुधवार सुबह महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी के मुखिया अजित पवार का एक प्लेन क्रैश में निधन हो गया था. उनका विमान बारामती में लैंड करने की कोशिश कर रहा था. हादसे में कोई नहीं बचा और प्लेन में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई. गुरुवार को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान के मैदान पर उनका अंतिम संस्कार हुआ.  एनसीपी के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख ने भी कहा कि दोनों एनसीपी गुटों के विलय को लेकर लगातार बैठकें हुई थीं. उन्होंने बताया कि यह अजित पवार की आखिरी इच्छा थी कि एनसीपी के दोनों गुट एक साथ आएं और अब इस इच्छा को पूरा किया जाना चाहिए. नगर निगम चुनाव में मिलाया था हाथ जनवरी में हुए महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में कुछ सीटों पर अजित पवार और शरद पवार साथ मिलकर लड़े थे, जिनमें पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ शामिल हैं. हालांकि किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई थी. अब खडसे ने दावा किया है कि दोनों दलों के विलय की बातचीत अंतिम चरण में थी.

क्या बॉडीगार्ड संग इश्क बना वजह? जानिए क्यों महल छोड़ गांव में रहने को मजबूर हुईं जॉर्डन की प्रिंसेस

लंदन  दुबई के गर्म रेगिस्तानऔर विशाल संगमरमर के महलों से हजारों मील दूर, अरब की एक राजकुमारी ने ब्रिटेन के एक छोटे से गांव को अपना घर बना लिया है. यहां वह पुरानी हवेली को अपना आशियाना बना रही हैं. राजकुमारी अपने पति से डरकर दुबई से भागी थीं. उनके पति दुबई के शासक हैं. अब उन्होंने आलीशान महलों से दूर एक खंडहर को अपने रहने लायक बनाने का काम शुरू किया है.  यहां बात हो रही है हाया बिन्त हुसैन की, जिन्होंने 2019 में दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम से तलाक के बाद ब्रिटेन में रहने का फैसला किया. इस कपल का तलाक अब तक के सबसे बड़े तलाक समझौते में से एक हैं. जिसमें राजकुमारी को 554 मिलियन पाउंड मिले थे. इस प्रिंसेस ने दुबई के अपने संगमरमर के आलीशान महलों वाली  जीवनशैली को छोड़कर वेल्स के ग्रामीण इलाके के एक जर्जर हवेली को अपना ठिकाना बनाने का फैसला किया. जॉर्डन के राजा की बेटी, 51 साल की इस राजकुमारी ने वेल्स के सुदूर गांव पॉविस में स्थित ईस्ट कंट्री के एक होटल पर 3.5 मिलियन पाउंड खर्च किए हैं.  वेल्स के गांव में आशियाना बना रही राजकुमारी कहा जा रहा है कि वह इस होटल का रेनोवेशन कराने में लाखों पाउंड और खर्च कर रही हैं, ताकि यह उस स्तर का हो सके जिसकी उम्मीद बेहद अमीर शाही परिवार से की जाती है.स्थानीय लोगों ने द सन को बताया कि राजकुमारी का यह नया आशियाना पुराना होने के बावजूद हाई सिक्योरिटी वाला ठिकाना है जो ज़्यादा समय तक खंडहर नहीं रहेगा, क्योंकि बिना किसी खर्च की परवाह किए इसका रेनोवेशन शुरू हो गया है. हाया बिंत हुसैन ने अप्रैल 2019 में, अपने पति से खुद को 'जान का खतरा' बताकर दुबई छोड़कर भाग आई थीं. वह उनसे अलग हो गई, क्योंकि उनके पति को एक ब्रिटिश बॉडीगार्ड के साथ उनके रिश्ते पर संदेह होने लगा था और इसी वजह से उनका वैवाहिक जीवन टूट गया. तलाक के निपटारे के दौरान, उच्च न्यायालय के एक जज ने कहा कि दुबई के शासक, जो अब 76 वर्ष के हैं, उनके खिलाफ 'डर, धमकी और उत्पीड़न का आरोप' लगाया गया था, जिसमें उन पर राजकुमारी, उनके बॉडीगार्ड और अन्य कर्मचारियों  के फोन को हैक करने का आरोप शामिल था, जो एक दुर्व्यवहार के बराबर है. तब से हाया अपना समय मध्य लंदन स्थित अपने घर और सरे के एघम में स्थित 12 कमरों वाले आलीशान बंगले के बीच गुजार रही हैं. लेकिन अदालती मुकदमे के बाद राजकुमारी के लिए प्राइवेसी और सुरक्षा पहली प्रायोरिटी बन गई थी. यही वजह है कि वेल्स में स्थित 33 एकड़ की एक प्रॉपर्टी को अपने रहने लायक बनाने का फैसला किया. यहां पहले से ही हाई लेवल सिक्योरिटी अरेंजमेंट थे. इसमें हाई-टेक कैमरे, इंट्री गेट पर आतंकवाद-रोधी शैली के उठने वाले बोलार्ड और एक्स आर्म्ड फोर्स के सुरक्षा गार्डों द्वारा संचालित एक सिक्योरिटी ऑफिस भी शामिल है. 1888 का बना है ये पैलेशियल हाउस 1888 में निर्मित यह पूर्व चार सितारा कंट्री हाउस आवास, वेल्स के सबसे अच्छे छिपे प्रॉपर्टी में से एक के रूप में जाना जाता है. इसमें टेनिस कोर्ट , एक क्रोकेट लॉन, 100 से अधिक प्रकार के पेड़ों वाला एक बागीचा, एक बिलियर्ड्स कक्ष और एक लाइब्रेरी है. हाया, जो घुड़सवारी की शौकीन हैं और एक समय सिडनी ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा कर चुकी हैं.  घुड़सवारी की शौकीन राजकुमारी अब यहां एक अस्तबल बनवा रही हैं ताकि वह घुड़सवारी के अपने शौक को बरकरार रख सकें. वहां के लोकल्स ने बताया कि हमें उस पुराने पैलेस में काम करने वाले कर्मचारियों, मुख्य रूप से बिल्डरों और कारीगरों के दोस्तों और परिवार के माध्यम से इन यात्राओं के बारे में पता चलता है.हैरानी की बात यह है कि राजकुमारी ने वर्तमान इमारतों में से किसी का भी विस्तार करने या उन्हें परिवर्तित करने के लिए किसी भी प्लानिंग का कोई आवेदन नहीं दिया है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि वह भविष्य में स्विमिंग पूल बनवाने के लिए आवेदन करेंगी. रखरखाव की लागत कथित तौर पर प्रति वर्ष 100,000 पाउंड से अधिक है. एक ग्रामीण ने द सन को बताया कि राजकुमारी हर महीने लंदन के केंसिंग्टन पैलेस गार्डन में स्थित अपने 10 मिलियन पाउंड के आलीशान बंगले से हेलीकॉप्टर से यहां आती हैं. ताकि चल रहे रेनोवेशन के कार्यों पर नजर रख सकें.यह संपत्ति राजधानी से 160 मील या तीन घंटे की ड्राइव की दूरी पर है, लेकिन हेलीकॉप्टर से एक घंटे से भी कम समय में वहां पहुंचा जा सकता है.महीने में लगभग एक बार, आमतौर पर वीकेंड में आते हुए देखते हैं. फिर हम उन्हें सोमवार सुबह जाते हुए देखते हैं.

Apple की भारत रणनीति तेज, मुंबई में नया स्टोर और चेन्नई में ऑफिस जल्द

 मुंबई  एप्पल भारत में अपने बिजनेस को नेक्स्ट लेवल पर लेकर जाने की कोशिश कर रहा है. भारत में एप्पल अब सिर्फ आईफोन मैन्युफैक्चरिंग तक की सीमित नहीं रहना चाहती है, बल्कि रिटेल और कॉरपोरेट दोनों तरफ से अपनी पकड़ को मजबूत कर रहा है. इस दिशा में एप्पल ने मुंबई में दूसरा रिटेल स्टोर खोलने की तैयारी कर ली है और चेन्नई में अपना पहला डेडिकेटेड कॉरपोरेट ऑफिस भी शुरू करने की तैयारी की जा रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल के सीईओ टिम कुक ने अपनी की फिस्कल Q1 2026 की अर्निंग कॉल के दौरान बताया कि भारत में कंपनी का बिज़नेस रिकॉर्ड ग्रोथ के साथ आगे बढ़ रहा है. इसके कारण एप्पल मुंबई में एक और रिटेल स्टोर खोलने की प्लानिंग कर रहा है. हालांकि, स्टोर की सटीक लोकेशन और ओपनिंग डेट को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. फिलहाल, भारत में एप्पल के कुल पांच ऑफिशियल रिटेल स्टोर हैं. हाल ही में दिसंबर तिमाही के दौरान एप्पल ने नोएडा में अपना पांचवां स्टोर खोला था, जो दिल्ली-एनसीआर का दूसरा स्टोर है. यह स्टोर दिल्ली मॉल ऑफ इंडिया (DLF), नोएडा सेक्टर 18 में स्थित है. यहां एप्पल प्रोडक्ट्स की बिक्री के साथ-साथ Today at Apple सेशन्स, टेक्निकल सपोर्ट और रिपेयर सर्विस भी मिलती है. मुंबई और चेन्नई में एप्पल की बड़ी प्लानिंग इससे पहले अगस्त 2023 में एप्पल ने मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में स्थित जियो वर्ल्ड ड्राइव मॉल में अपना पहला ऑफिशियल स्टोर खोला था, जिसका नाम Apple BKC है. अब कंपनी मुंबई में दूसरा स्टोर खोलने जा रही है, जिससे कंपनी की रिटेल पहुंच और भी बढ़ेगी. कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा कहा जा रहा था कि मुंबई का दूसरा एप्पल स्टोर बोरीवली के ओबेरॉय स्काई सिटी मॉल में खुल सकता है, लेकिन एप्पल के आधिकारियों ने अभी तक मुंबई के दूसरे एप्पल स्टोर की लोकेशन पर कोई कमेंट नहीं किया है. वहीं, दूसरी ओर, एप्पल चेन्नई में एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने पोरुर में स्थित डीएलएफ साइबर सिटी आईटी पार्क में करीब 20,000 स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है. यह एप्पल का भारत में पहला ऐसा कॉरपोरेट ऑफिस हो सकता है, जहां सीधे कंपनी के कॉरपोरेट ऑपरेशंस चलाए जाएंगे. आपको बता दें कि अभी तक चेन्नई एप्पल के लिए खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग हब बना हुआ है, लेकिन नया ऑफिश खुलने से चेन्नई कंपनी के स्ट्रैटेजिक और मैनेजमेंट ऑपरेशंस का भी हिस्सा बन सकता है. एप्पल के CFO केविन परेख के मुताबिक, भारत में कंपनी का इंस्टॉल्ड यूज़र बेस भी डबल-डिजिट ग्रोथ दिखा रहा है, जो आने वाले सालों में एप्पल के लिए भारत को एक बेहद अहम मार्केट बनाता है.

भारत पर गर्मी का कहर, ऑक्सफोर्ड ने दी खौफनाक वॉर्निंग

नईदिल्ली  सूरज आग उगलेगा, सड़कें पिघलने लगेंगी, आपका अपना घर एक ‘भट्टी’ बन जाएगा…ये कोई डरावनी कहानी नहीं, बल्कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वो ताजा रिसर्च है जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. 2026 की इस सबसे खौफनाक रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक दुनिया की 40% आबादी यानी लगभग 4 अरब लोग ऐसी गर्मी झेलने को मजबूर होगी, जिसे सहना इंसानी शरीर के बस ककी बात नहीं होगी. दिल दहलाने वाली बात ये है कि वैज्ञानिकों ने भारत के लिए भी रेड अलर्ट जारी किया है. बताया गया है कि ऐसी गर्मी आने वाली है कि धरती पानी की तरह उबलने लगेगी. भारत में क्या होने वाला है? ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों ने भारत के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत, नाइजीरिया और इंडोनेशिया उन देशों में सबसे आगे होंगे जहां गर्मी का सबसे भयानक रूप देखने को मिलेगा. दावा किया जा रहा है कि पारा 45 से 50 डिग्री सेल्सियस को पार करेगा, इंसानों का शरीर अंदरूनी अंगों को ठंडा रखने में नाकाम हो जाएगा. भारत की करोड़ों की आबादी के पास एयर कंडीशनिंग की सुविधा नहीं है. वैज्ञानिकों का दावा है कि आने वाले दशकों में गर्मी से होने वाली मौतों का आंकड़ा सुनामी की तरह बढ़ेगा. 2010 में केवल 1.5 अरब लोग इस खतरे में थे, लेकिन 2050 तक यह संख्या दोगुनी से भी ज्यादा होकर 3.8 अरब पहुंच जाएगी. हम एक ऐसे ग्रह की ओर बढ़ रहे हैं जिसकी पहचान सिर्फ ‘आग और धुआं’ होगी. गैस चेंबर बन जाएंगे ये देश अगर आपको लगता है कि रूस, कनाडा या फिनलैंड जैसे ठंडे देश सुरक्षित हैं, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं. इन देशों के घर गर्मी सोखने और सर्दी से बचाने के लिए बनाए गए हैं. जैसे ही तापमान बढ़ेगा, ये घर ‘गैस चैंबर’ में तब्दील हो जाएंगे. यहां का ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य ढांचा भीषण गर्मी के लिए तैयार ही नहीं है. ऑक्सफोर्ड की रिसर्चर राधिका खोसला ने चेतावनी दी है कि 1.5 डिग्री की सीमा पार होते ही शिक्षा, स्वास्थ्य और खेती सब कुछ तबाह हो जाएगा. खाने का संकट आएगा, फसलें या तो जल जाएंगी या सूख जाएंगी और भूखमरी फैल जाएगी. करोड़ों लोग रहने लायक जगहों की तलाश में घर छोड़ेंगे.

FTA डील के बाद Fortuner जैसी कीमत में मिल सकती है Defender, जानें आंकड़े

नई दिल्ली  भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच बीते 27 जनवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA Deal) फाइनल हुआ है. इस डील के सील होते ही इस बात की चर्चा ने जोर पकड़ लिया कि, अब भारत में लग्जरी कारें सस्ती हो जाएंगी. खास तौर पर चर्चा में है दमदार एसयूवी लैंड रोवर डिफेंडर. हालांकि, इससे पहले भारत-यूके एफटीए के समय भी ऐसे ही कयास लगाए गए थे, लेकिन तब डिफेंडर की कीमतों में कोई राहत नहीं मिली थी. लेकिन इस बार मामला कहीं, आगे बढ़ गया है. आइये समझते हैं कि इस बार क्या बदलेगा और क्या नहीं. भारत-यूके एफटीए लागू होने के बाद कुछ रेंज रोवर मॉडल्स की कीमतों में कटौती जरूर हुई थी, लेकिन डिफेंडर इससे बाहर रही. इसकी वजह साफ थी. लैंड रोवर डिफेंडर यूके में नहीं, बल्कि स्लोवाकिया में बनती है. इसलिए उस पर यूके एफटीए का फायदा लागू ही नहीं हो सका. अब भारत-ईयू एफटीए के बाद उम्मीद जगी है कि डिफेंडर पर आयात शुल्क कम हो सकता है. नए समझौते के तहत आयात शुल्क में बड़ी कटौती जरूर की गई है, लेकिन यह फायदा सिर्फ उन कारों को मिलेगा जो पूरी तरह बनी हुई गाड़ियां यानी सीबीयू के रूप में भारत आती हैं. लैंड रोवर डिफेंडर भी इसी कैटेगरी में आती है. यही वजह है कि इस एसयूवी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. लैंड रोवर डिफेंडर की मौजूदा कीमत  भारत में लैंड रोवर डिफेंडर 110 की एक्स-शोरूम कीमत करीब 1.03 करोड़ रुपये है. इसकी बेस कॉस्ट एंड फ्रेट यानी BCF करीब 35 लाख रुपये मानी जाती है. इस पर फिलहाल 110 फीसदी का इंपोर्ट ड्यूटी लगती है, जो करीब 38.5 लाख रुपये के आसपास बैठती है. इसके बाद पूरी रकम पर लगभग 40 फीसदी जीएसटी लगता है, जो करीब 29 लाख रुपये होता है. इसी वजह से इसकी कीमत 1 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाती है. अगर इंपोर्ट ड्यूटी 40 फीसदी कर दिया जाता है, तो डिफेंडर पर करीब 14 लाख रुपये का ड्यूटी चार्ज लगेगा और जीएसटी करीब 19.6 लाख रुपये हो जाएगी. ऐसे में इसकी एक्स-शोरूम कीमत घटकर लगभग 68.6 लाख रुपये हो सकती है. वहीं, एफटीए के अंतिम चरण में जब इंपोर्ट ड्यृटी 10 फीसदी तक आ जाएगा, तब डिफेंडर की एक्स-शोरूम कीमत करीब 53.9 लाख रुपये तक आ सकती है. क्या Fortuner के दाम में आएगी Defender? इतनी बड़ी कटौती के बाद भी लैंड रोवर डिफेंडर पूरी तरह से टोयोटा फॉर्च्यूनर से सस्ती नहीं होगी. फिलहाल फॉर्च्यूनर की कीमतें 34.16 लाख रुपये से शुरू होकर टॉप मॉडल के लिए 49.59 लाख रुपये तक जाती हैं. यानी 10 फीसदी टैरिफ के बावजूद डिफेंडर उससे थोड़ी महंगी ही रहेगी. यह समझना जरूरी है कि आयात शुल्क में यह कटौती एकदम से लागू नहीं होगी. अभी ड्यूटी 110 फीसदी से घटकर 40 फीसदी हुई है और आगे चलकर यह 10 फीसदी तक जाएगी, लेकिन यह फेज़्ड मैनर (चरणबद्ध तरीके से) में लागू होगी. साथ ही, यह छूट सिर्फ शुरुआती 2.5 लाख इंपोर्टेड कारों ही मिलेगी. इसके अलावा, यह फायदा केवल CBU मॉडल्स को ही मिलेगा. इंडिया–ईयू एफटीए को पूरी तरह लागू होने में एक साल से ज्यादा का समय लग सकता है और नई कीमतों का असर 2028 के आसपास ही दिखने की उम्मीद है.      

देश में इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे की तैयारी, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को मिलेगा बड़ा फायदा

सागर देश में बिछाए जा रहे नेशनल हाइवे और एक्सप्रेस वे के जाल बाद अब सरकार ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे बनाने पर फोकस करेगी. सरकार आगामी बजट में नीतिगत बदलाव करते हुए ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे को प्राथमिकता देने जा रही है. चर्चा है कि आगामी बजट में इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे के लिए 5000 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान किया जा रहा है. इसके तहत दिल्ली जयपुर और दिल्ली मुंबई एक्स्प्रेस के विशेष सेक्शन का चयन करके पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे विकसित करने के लिए प्रोत्साहन देने की तैयारी है. केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी पिछले दिनों इस बात के संकेत दे चुके हैं. इस प्रोजेक्ट के तहत स्वीडन और जर्मनी की तर्ज पर ओव्हरहैड केबल तकनीक और भारी वाहनों के लिए ओव्हरहैड इलेक्ट्रिक लाइन डाली जाएगी. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे को बढ़ावा देने के पीछे प्रदूषण कम करना और पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भरता कम करना है. क्या होता है इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे में ऐसे नेशनल हाइवे तैयार किए जाएंगे. जहां विशेष रूप से ई व्हीकल को चार्ज किया जा सकेगा. यहां पर केबल तकनीक के जरिए ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन बिछाकर भारी वाहनों की चार्जिंग सड़क पर हो सकेगी. इसके अलावा चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे, जहां छोटे ई व्हीकल चार्ज हो सकेंगे और बैटरी एक्सचेंज कर सकेंगे. ये हाइवे विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विकसित किए जाने की तैयारी है. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे से देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण सुधार और ईधन की खपत कम होगी. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे से प्रदूषण की समस्या कम होगी. देश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर होगा और विदेश से कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी. इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों के उद्योग को पंख लगेंगे. सरकार देश के बडे़ शहरों के बीच के सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस प्रोजेक्ट पर फोकस कर रही है. स्वीडन और जर्मनी की तर्ज पर विकसित होंगे इलेक्ट्रिक हाइवे इसके लिए सरकार ने स्वीडन और जर्मनी में विकसित की गई इलेक्ट्रिक हाइवे तकनीक को आधार बनाए गया है. इस तकनीक के तहत हाइवे पर ओव्हरहैड इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने का काम किया जाएगा. हर 40-50 किमी पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. बड़े और भारी वाहन सड़क पर ही ओव्हरहैड केबल के जरिए चार्ज हो सकेंगे. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे पर ग्रीन एनर्जी से चलने वाले चार्जिंग स्टेशन विकसित होंगे. 2030 तक पायलट प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य है इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस वे और दिल्ली जयपुर नेशनल हाइवे पर चुनिंदा सेक्शन में ये विकसित किए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य नेशनल हाइवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग के ढांचे को मजबूत करना है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भारत का ऐसा इलेक्ट्रिक हाइवे होगा, जो दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक हाईवे बन सकता है.

भोपाल से बड़ी संख्या में बेटियां शामिल, 23 फरवरी को अग्निवीर परेड में दमखम दिखाएंगी

ग्वालियर  सेना की वर्दी का जुनून….सिर्फ बेटों ही नहीं बल्कि बेटियों में भी है। मप्र और छत्तीसगढ़ की बेटियां देशसेवा की राह चुन रही हैं। इसके लिए दिन-रात मैदान में पसीना बहा रही हैं। 23 फरवरी को मप्र और छत्तीसगढ़ राज्य की बेटियां कटनी के पुलिस परेड ग्राउंड पर दम दिखाएंगी। इसमें मप्र के भोपाल से सबसे ज्यादा बेटियां भर्ती में शामिल होंगी। मप्र से 206 और छत्तीसगढ़ से 69 बेटियां अग्निवीर बनने के लिए 23 फरवरी को मैदान में दौड़ेंगी। शारीरिक परीक्षा में शामिल होने के लिए इन्हें सुबह छह बजे रिपोर्ट करनी होगी। इसके बाद 1600 मीटर की दौड़ होगी। पहली बार इतनी अधिक संख्या में बेटियां सेना में जाने के लिए शारीरिक परीक्षा देंगी। सेना के अधिकारी बताते हैं- अब मप्र और छत्तीसगढ़ में बेटियों में सेना में जाने के प्रति रुझान बढ़ रहा है। लगातार अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ रही है। कहां से कितनी अभ्यर्थी होंगी शामिल मप्र: भोपाल- 86 ग्वालियर- 40 जबलपुर- 44 महू- 46 छत्तीसगढ़ रायपुर- 69 7.30 मिनट से 8 मिनट में पूरी करनी होगी 1600 मीटर दौड़     सेना के अधिकारियों ने बताया कि पुरुष अभ्यर्थियों की तरह अग्निवीर के लिए शारीरिक परीक्षा महिला अभ्यर्थियों की भी होगी।  1600 मीटर दौड़ भी पूरी करनी होगी। महिला अभ्यर्थियों को 1600 मीटर दौड़ पूरी करने के लिए अधिक समय दिया जाएगा। महिला अभ्यर्थियों को 7.30 मिनट से लेकर 8 मिनट के बीच में दौड़ पूरी करनी होगी।     7.30 मिनट में दौड़ पूरी करने वाली महिला अभ्यर्थियों को ग्रुप-1 और 7.31 मिनट से 8 मिनट के बीच 1600 मीटर दौड़ पूरी करने वाली महिला अभ्यर्थियों को ग्रुप-2 में रखा जाएगा।     ऊंची-लंबी कूद नहीं होगी: पुरुष अभ्यर्थियों को दौड़ के बाद 10 फीट लंबी कूद और 3 फीट ऊंची कूद चरण भी पार करना होता है, लेकिन महिला अभ्यर्थियों को ऊंची-लंबी कूद नहीं करनी होगी।     चयनित महिला अभ्यर्थियों का होगा मेडिकल, फिर बनेगी मेरिट लिस्ट: शारीरिक परीक्षा में चयनित महिला अभ्यर्थियों का मेडिकल परीक्षण होगा। इसके बाद मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी।     सुबह 6 बजे रिपोर्टिंग, फिर होगी शारीरिक परीक्षा: सभी महिला अभ्यर्थियों को इ-मेल के जरिये प्रवेश पत्र जारी कर दिए गए हैं। सुबह छह बजे इन्हें शारीरिक परीक्षा स्थल पर रिपोर्टिंग करनी होगी। इसके बाद शारीरिक परीक्षा होगी। महिला अभ्यर्थियों को दिए प्रवेश पत्र मप्र और छत्तीसगढ़ की महिला अभ्यर्थियों की शारीरिक परीक्षा 23 फरवरी को होगी। कटनी में शारीरिक परीक्षा आयोजित होगी। मप्र में सबसे ज्यादा महिला अभ्यर्थी भोपाल से शामिल हो रही हैं, ग्वालियर एआरओ से भी 40 महिला अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगी। सभी को प्रवेश पत्र जारी कर दिए गए हैं।  कर्नल पंकज कुमार, निदेशक, सेना भर्ती कार्यालय