samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री साय कृषि और ग्रामीण विकास के सभी पहलू पर कर रहे हैं बेहतर कार्य

रायपुर. मुख्यमंत्री साय कृषि और ग्रामीण विकास के सभी पहलू पर कर रहे हैं बेहतर कार्य केन्द्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को कृषि के क्षेत्र में उन्नत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों और राज्य सरकार के अधिकारियों की टीम अगले एक हफ्ते में छत्तीसगढ़ के एग्रोक्लाइमेट के अनुरूप विशेष नीति बनाएंगे। बैठक में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त व सचिव श्रीमती शहला निगार, सहित केन्द्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मंत्रालय महानदी भवन में कृषि विभाग के कामकाज की उच्च स्तरीय समीक्षा उपरांत अधिकारियों को संबोधित करते हुए यह बातें कही। उन्होंने बैठक में यह भी कहा कि प्रदेश में फसल विविधिकरण को बढ़ावा देना है ताकि किसानों की आय बढ़े। साथ ही छोटी जोत के किसानों को कृषि से इतर पशुपालन, मत्स्यपालन, वानिकी जैसे सहायक गतिविधियों को भी बढ़ावा देना है। केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा कि प्रदेश में रिसर्च की समस्या, वैरायटी की समस्या को दूर किया जाएगा और फसलों के वैविध्य पर काम किया जाएगा। चौहान ने कहा जिस मंशा से मैं यहाँ आया हूँ, वह यह है कि अच्छा काम हो रहा है, लेकिन और बेहतर करने की अनंत संभावनाएं हैं। अलग-अलग प्रयोग कर कृषि को और सशक्त बनाएंगे। उन्होंने कहा कि अनुसंधान ऐसा होना चाहिए, जिससे सीधे किसानों को लाभ मिले। उन्होंने फॉर्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन को मजबूत करने, कृषि यंत्रों के वितरण के फिजिकल वेरिफिकेशन और प्रधानमंत्री धन-धान्य जिला योजना की समीक्षा की। केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ के कृषि अधिकारियों और सहयोगियों से संवाद कर टीम वर्क के साथ नवाचार पर ज़ोर दिया और कहा कि अच्छा काम करने वालों को सम्मान मिलेगा। मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ में कृषि विकास एवं किसानों के सशक्तिकरण को लेकर केन्द्र एवं राज्य सरकार के योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। केन्द्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि विविध फसलों के लिए छत्तीसगढ़ में उपयुक्त जलवायु क्षेत्र है। उन्होंने फसल विविधिकरण पर जोर देते हुए यहां के जलवायु के अनुरूप अलग-अलग जिलों व क्षेत्रों में अलग-अलग फसलों को बढ़ावा देने की बात कही। केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के किसानों के आय को बढ़ाने की दिशा में निरंतर सार्थक प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि उपकरणों एवं कृषि तकनीकों को अपनाकर नवाचार के साथ खेती करने से फसलों के उत्पादन में वृद्धि होगी, किसान सशक्त होंगे और देश समृद्ध होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में बेहतर कार्य हो रहे हैं। दलहन-तिलहन सहित बागवानी फसलों के लिए भी राज्य में उपयुक्त जलवायु है। इससे फसल परिवर्तन तथा विविधिकरण से किसानों के आय में वृद्धि होगी।  केन्द्रीय मंत्री चौहान ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना, कृषि सिंचाई योजना, मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेस योजना, कृषि उन्नति, प्रधानमंत्री जनधन योजना, बागवानी मिशन योजना सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पीएम सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को शत-प्रतिशत लाभ मिले यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंन पॉम ऑयल और मखाना की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में केन्द्र सरकार की ओर से तत्परता से मिलने वाले सहायोग के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को उम्मीद से अधिक मद्द केन्द्र सरकार से मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से राज्य में ग्रामीण विकास एवं कृषि के क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए मिले दिशा-निर्देश से इन क्षेत्रों के विकास को गति मिलेगी। 

झारखंड निकाय चुनाव में BJP के आज घोषित होंगे मेयर उम्मीदवार

रांची. झारखंड में 23 फरवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों की सरगर्मी तेज हो गई है। पार्टियों में जमीनी स्तर पर विधानसभा व लोकसभा चुनाव की तरह विद्रोह की स्थिति भी दिखने लगी है। धनबाद, रांची, देवघर सहित ज्यादातर जगहों पर पार्टी की अनुमति के बगैर नामांकन दाखिल किया जाना शुरू हो गया है। कैंडिडेट्स के पोस्टर लगने शुरू हो गए हैं। पर्चे ले लिए गए हैं। आज (31 जनवरी) मेयर और अन्य प्रमुख पदों के लिए अपने समर्थित उम्मीदवारों के नाम तय कर सकती है, जबकि कांग्रेस ने सभी जिला अध्यक्षों से 1 फरवरी तक उम्मीदवारों की सूची मांगी है। वहीं, राजद ने ज्यादातर जगहों पर सहयोगी दलों जेएमएम और कांग्रेस के उम्मीदवारों को समर्थन देने की घोषणा की है और खुद उम्मीदवार नहीं उतारेगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने 48 नगर निकायों के लिए चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है, जिसमें नामांकन 29 जनवरी से 4 फरवरी तक चलेगा। भाजपा की रणनीति: आंतरिक समर्थन भाजपा प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया गया। संगठन महामंत्री ने सभी प्रमुख नेताओं को बैठक की जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, शनिवार (31 जनवरी) को होने वाली बैठक में मेयर और नगर परिषद अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों पर चर्चा होगी, और रविवार को नामों की घोषणा संभव है। हालांकि, भाजपा ने स्पष्ट किया है कि चुनाव दलीय आधार पर नहीं होने के कारण पार्टी आधिकारिक रूप से उम्मीदवारों की घोषणा नहीं करेगी। इसके बजाय, मजबूत और राष्ट्रवादी सोच वाले उम्मीदवारों को आंतरिक समर्थन दिया जाएगा। भाजपा सांसद दीपक प्रकाश ने कहा, "पार्टी ने चुनाव को गंभीरता से लिया है। हर निकाय में राष्ट्रवादी व्यक्ति जीते, इसके लिए कार्ययोजना बनाई गई है।" भाजपा ने पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर 31 जनवरी तक नाम फाइनल करने की योजना बनाई है, ताकि समर्थित उम्मीदवार समय पर नामांकन दाखिल कर सकें। दुमका जैसे जिलों में छह जिलों की संचालन समितियों से रायशुमारी की गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पार्टी विकास-उन्मुख व भ्रष्टाचार-मुक्त उम्मीदवारों को समर्थन देगी। कांग्रेस की तैयारी: जिला स्तर से अनुशंसा कांग्रेस ने निकाय चुनाव के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर को प्रभारी बनाया है। उन्होंने सभी जिला अध्यक्षों को निर्देश दिया है कि वार्ड सदस्य से लेकर निकाय अध्यक्ष पद तक के उम्मीदवारों की अनुशंसा 1 फरवरी तक भेजें। पार्टी 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है, जिसमें रांची मेयर सीट पर दावा मजबूत है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, हम गठबंधन समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करेंगे। हालांकि, गठबंधन में जेएमएम के साथ मेयर सीट पर टकराव की आशंका है, क्योंकि दोनों पार्टियां रांची मेयर पद पर दावा ठोक रही हैं। राजद : सहयोगियों को समर्थन राजद ने ज्यादातर जगहों पर जेएमएम और कांग्रेस के उम्मीदवारों को समर्थन देने का ऐलान किया है। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि गठबंधन की एकजुटता के लिए राजद खुद उम्मीदवार नहीं उतारेगी, लेकिन कुछ चुनिंदा जगहों पर मजबूत दावेदारों को बैकअप देगी। यह फैसला हालिया विधानसभा चुनावों में गठबंधन की सफलता के बाद लिया गया है। राजद नेता तेजस्वी यादव के करीबी सूत्रों के अनुसार, पार्टी का फोकस 2026 में मजबूत विपक्षी भूमिका निभाने पर है। 43 लाख से ज्यादा वोटर, बैलेट पेपर से मतदान झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग की आयुक्त अलका तिवारी ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। 48 निकायों (9 नगर निगम समेत) में 23 फरवरी को मतदान होगा, 27 फरवरी को नतीजे आएंगे। कुल 43,33,574 वोटर हैं, जिसमें 22 लाख पुरुष, 21 लाख महिलाएं और 144 थर्ड जेंडर शामिल हैं। चुनाव बैलेट पेपर से होगा, जिस पर भाजपा ने आपत्ति जताई है और कहा कि इससे सत्ता का दुरुपयोग हो सकता है। मेयर/अध्यक्ष पद का चुनाव सीधा होगा, जबकि उप मेयर अप्रत्यक्ष। पहली बार ओबीसी आरक्षण लागू होगा। नामांकन जांच 5 फरवरी को, नाम वापसी 6 फरवरी तक। जेएमएम के लिए लोकप्रियता का आकलन वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क कहते हैं, यह चुनाव दलीय पर कागज पर नहीं है।हकीकत में सभी पार्टियां पूरा जोर लगा रही है। जमीनी पकड़ मजबूत करने के लिए यह जरूरी भी है। यह चुनाव झारखंड की सियासत के लिए अहम है, क्योंकि यह हेमंत सोरेन सरकार की लोकप्रियता का टेस्ट होगा। भाजपा ने आरोप लगाया कि ईवीएम की बजाय बैलेट से चुनाव कराना साजिश है, जबकि कांग्रेस ने जनता की सीधी वोटिंग बताया। गठबंधन में सीट बंटवारे पर खासकर रांची जैसे बड़े शहरों में तनाव संभव है।

राजस्थान में कल से ओलावृष्टि के साथ बारिश का अलर्ट

जयपुर. राजस्थान समेत शेखावाटी में उत्तरी हवाएं चलने का असर लगातार दूसरे दिन भी नजर आया। सुबह कडाके की सर्दी के बाद दिनभर तल्ख धूप खिली। केन्द्रों पर दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार चौबीस घंटे में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से शेखावाटी के तीनों जिलों सहित अजमेर, भरतपुर जयपुर संभाग में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। 1-2-3-4 फरवरी को इन जिलों में अलर्ट मौसम विभाग ने राजस्थान के कई हिस्सों जैसे भीलवाड़ा, राजसमंद, पाली में आज ओलावृष्टि और गरज चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। जिसमें अजमेर, कोटा, जयपुर, भरतपुर संभाग सहित शेखावाटी क्षेत्र के जिले शामिल है। वहीं 1 और 2 फरवरी को भी अजमेर, कोटा, जयपुर और भरतपुर संभाग में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश (मावठ) का दौर जारी रहेगा। वहीं 1 अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, धौलपुर, जयपुर, झुंझुनूं, करौली, खैरथल-तिजारा, टोंक, कोटा, बूंदी, बारां कोटपूतली-बहरोड़, सीकर, हनुमानगढ़ और चूरू में मेघगर्जन-वज्रपात का येलो अलर्ट भी जारी किया है।

जमशेदपुर से कोलकाता और भुवनेश्वर के लिए जल्द आएगा नया 9-सीटर प्लेन

जमशेदपुर. लौहनगरी के हवाई यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। सोनारी एयरपोर्ट से भुवनेश्वर और कोलकाता के लिए संचालित होने वाली इंडिया वन एयर की विमान सेवा भविष्य में भी जारी रहेगी। केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (RCS-Udan) के तहत कंपनी के लाइसेंस नवीकरण को मौखिक स्वीकृति दे दी है। लाइसेंस की मियाद और विस्तार सोनारी एयरपोर्ट से विमान सेवा की शुरुआत तीन साल पहले हुई थी, जिसकी समय-सीमा 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो रही है। हालांकि, तकनीकी प्रक्रियाओं के बीच मंत्रालय से अवधि विस्तार की हरी झंडी मिल चुकी है। कंपनी प्रबंधन को अब केवल औपचारिक लिखित आदेश का इंतजार है। टाटा स्टील प्रबंधन ने भी अपने एयरपोर्ट से विमानों के परिचालन के लिए पहले ही सहमति दे दी है। दुर्घटना के बाद रुकी थी सेवा, अब नए विमान की तैयारी  बता दें कि 10 जनवरी 2026 को राउरकेला में इंडिया वन एयर का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसके बाद से सोनारी एयरपोर्ट से नियमित सेवाएं बाधित हैं। राहत की बात यह है कि कंपनी ने पहले ही एक नया 9-सीटर कैरावेन (Caravan) विमान ऑर्डर कर रखा है।  हवाई सेवा की स्थिति: नया विमान: मार्च 2026 तक बेड़े में शामिल होने की संभावना।  रूट: नया विमान आते ही जमशेदपुर-भुवनेश्वर और जमशेदपुर-कोलकाता रूट पर नियमित उड़ानें फिर से बहाल हो जाएंगी। वर्तमान संचालन: वर्तमान में कंपनी का परिचालन भुवनेश्वर-जयपुर और भुवनेश्वर-राउरकेला के बीच जारी है।  झारखंड सरकार की मंजूरी का इंतजार  एक ओर जहां केंद्र और टाटा स्टील प्रबंधन ने अपनी ओर से प्रक्रिया पूरी कर ली है, वहीं झारखंड सरकार के स्तर पर अब भी मंजूरी लंबित है। कंपनी प्रबंधन द्वारा कई दिनों पहले आवेदन दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। 

मप्र अपडेट: 10 साल से सेवा देने वाले संविदा कर्मचारी अब होंगे नियमित, मोहन यादव ने किया ऐलान

भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने प्रदेश के ढाई लाख संविदाकर्मियों को बड़ी सौगात दी है. राज्य सरकार ने 10 साल से अधिक अनुभव रखने वाले संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन की प्रक्रिया और आगे बढ़ाने जा रही है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह घोषणा मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मंच से की है. यह प्रक्रिया अभी खाली पदों में से 50 फीसदी पदों के लिए जारी है. सीएम ने कहा कि 10 साल से अधिक अनुभवी संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन की अभी तक 50 फीसदी पदों के लिए प्रक्रिया जारी है, इस दिशा में आगे और काम किया जाएगा. कार्यक्रम में संविदाकर्मियों को कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता और सेवा समाप्ति के मामलों में सीसीए नियम लागू करने पर भी सहमति बनी है. संविदाकर्मियों के लिए यह लिए गए निर्णय भोपाल के टीटी नगर दशहरा मैदान में हुए मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मंच के संविदा अधिकारी कर्मचारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि "संविदाकर्मियों की भूमिका हनुमान जी के समान है. उनके श्रम और साझेदारी की मदद से ही शासन प्रशासन की व्यवस्था बनाई गई है. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने संविदाकर्मियों से जुड़ी कई मांगों को लेकर बात की. मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 सालों से अधिक अनुभवी संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन की अभी 50 प्रतिशत पदों के लिए प्रक्रिया चल रही है, इस दिशा में और काम किया जाएगा. सामान्य प्रशासन विभाग संविदा नीति-2023 के अंतर्गत सभी कंडिकाओं का केंद्र और राज्य पोषित परियोजनाओं में लागू किया जाएगा. राज्य शासन के निगम मंडल इसे लागू करेंगे. संविदा नीति-2023 के अंतर्गत सभी विभागों में संविदा कर्मियों के लिए एनपीएस, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य बीमा लाभ, अनुकंपा नियुक्ति के लिए केंद्र पोषित-राज्य पोषित समस्त योजनाओं-परियोजनाओं में एक साथ क्रियान्वयन व संविदा कर्मियों के लिए प्रावधान सीसीए रूल 1965, 1966 को पूरी तरह से लागू करने के लिए निर्णय लिया जाएगा. विभागों में पदस्थ संविदा कर्मचारियों की विसंगतियों को दूर करने के लिए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित की गई समिति द्वारा इस पर विचार किया जाएगा. संविलियन से यह होगा फायदा अनुभवी संविदाकर्मियों को नियमित किए जाने की प्रक्रिया और बढ़ाए जाने से संविदाकर्मियों को बड़ा लाभ होगा. प्रदेश में अभी संविदाकर्मियों की संख्या करीबन ढाई लाख है. इसमें से आधे को नियमित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है. संविलियन होने से वे सरकारी विभाग में स्थायी कर्मचारी बन जाएंगे. इससे आम कर्मचारियों के समान सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा. इसके बाद ऐसे सभी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता मिल सकेगा. अभी संविदा कर्मचारियों को साल में एक बार मूल्य सूंचकांत पर भत्ता दिया जाता है, जो बहुत मामूली होता है. संविदा अधिकारी या कर्मचारियों को नियमित पदों के समकक्ष संविदा पद पर लगातार 10 साल सेवा पूरी कर चुके हैं, उनके लिए विभाग में सीधी भर्ती के तहत अधिकतम 50 पद या रिक्त पदों के 50 फीसदी तक नियुक्तियां आरक्षित रखी जाती हैं. उन्हें भी अन्य अभ्यर्थियों के साथ सीधी भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना पड़ता था और कम से कम 50 फीसदी कटऑफ अंक लाना जरूरी था.

‘गालियां देने से नहीं बनेगा हिंदू राष्ट्र’, धीरेंद्र शास्त्री का संदेश साफ

बांदा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बांदा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में हिंदू समाज को महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को गाली देने या किसी दूसरे समुदाय को निशाना बनाने से भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता। अपने संबोधन में शास्त्री ने कहा कि पहले हिंदुओं को अपनी कुरीतियों और आंतरिक खामियों को सुधारने की जरूरत है। तभी समाज में शांति, एकता और सौहार्द स्थापित हो सकता है। दिव्य हनुमंत कथा के दस दिन बाद एक बार फिर से धीरेंद्र शास्त्री शुक्रवार को बांदा पहुंचे। वह खुरहंड स्टेशन स्थित सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के आवास पर आयोजित सुंदरकांड व हनुमान चालीसा पाठ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा, 'हिंदू मेरी एक बात नोट कर लें, मुसलमानों को गालियां देकर हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा। हिंदुओं को अपनी कुरितियां सुधारी पड़ेंगी, तभी भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा। जो हमारे सनातन में कमियां है उसे दूर करेंगे तभी बनेगा और भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का एक ही उपाय है। वह है, जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई।' हमारे यहां 25 बार पेशी न हो तब तक नहीं होता तलाक बागेश्वरधाम ने कहा कि उनके यहां तो तीन बार हूं.. हूं.. और तलाक, हमारे यहां तो जब तक 20 से 25 बार पेशी न हो जाए तब तक तलाक नहीं होता है। उनमें कोई बुराई नहीं है। अच्छी बात है कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे। चादर चढ़ाओगे कभी कैंडिल जलाओगे तो कैसे होगी कृपा? धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हमारा काम है दर पर जाना, उनका काम है बिगड़ी बनाना और परमात्मा का काम है सब कुछ संभालना। एक बात याद रखना, अगर तुम भगवान पर भरोसा रखोगे तो वह तुम्हारा भरोसा कभी टूटने नहीं देगा। अगर तुम बीच में अलीउल्लाह वालों के पास चले जाओ, कभी चादर चढ़ाने लगो, कभी कैंडिल जलाने लगो और फिर कहो कि हनुमान कृपा नहीं कर रहे। पूरी तरह भगवान पर छोड़ दो या फिर सच में भगवान पर ही छोड़ दो।

किसानों का जीवन संवारना हमारा कर्तव्य, कृषक कल्याण वर्ष का करें प्रभावी क्रियान्वयन

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जो हम सबके अन्नदाता हैं, उनके दुख-दर्द की चिंता करना हमारा कर्तव्य है। किसानों का समग्र कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यह सरकार के लिए एक मिशन है। सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। किसानों का जीवन संवारने और इनकी बेहतरी के लिए पूर्ण समर्पित भाव से मिशन मोड में कृषक कल्याण वर्ष का बेहद प्रभावकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रदेश के सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। किसान रथ चलाये जाएं। इनका शुभारंभ स्थानीय सांसद/विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से ही कराएं। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में किसानों से विभिन्न स्थानों पर को निरंतर संवाद करें। उन्हें ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर अधिकाधिक रकबे/मात्रा में मूंगफली और उड़द की फसल लेने के लिए प्रोत्साहित करें। प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करें। जलवायु, ऊर्जा एवं सतत् कृषि को बढ़ावा देने के लिए ई-विकास पोर्टल एवं किसानों को संतुलित मात्रा में भी उर्वरकों का उपयोग के लिए जागरूक किया जाए। आकांक्षी जिलों में चल रही प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना से अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित किया जाए। दलहनी और तिलहनी फसलों का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए हर जरूरी प्रयास किए जाएं। कृषि से जुड़े विभागों और इस क्षेत्र में प्रगतिशील स्वयं सेवी संगठनों एवं संस्थाओं के साथ मिलकर किसानों के कल्याण के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष मनाने में किसान कल्याण एवं कृषि विकास के नेतृत्व में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं डेयरी, मत्स्य पालन, जल संसाधन, सहकारिता, ऊर्जा, राजस्व, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित 15 से अधिक विभाग सक्रिय भूमिका निभायेंगे। पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर लगाएं रोक, किसानों को जागरूक किया जाए कि वे खेत का भूसा गौशालाओं में पहुंचाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिले में पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से अकुंश लगाएं। अपने-अपने जिले का नरवाई प्रबंधन प्लान बनाएं। खेतों से निकलने वाली पराली/भूसे का समुचित उपयोग होना चाहिए। फसलों के अवशेष से गोबर से कंपोजिट बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की जाए। सभी कलेक्टर्स यह तय करें कि किसानों द्वारा खेत से निकली पराली और भूसा निकटतम छोटी-बड़ी गौशालाओं में ही पहुंचाया जाए। इससे गौवंश को लाभ मिलेगा। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए करें समन्वित प्रयास – पशुपालकों के लिए तैयार हो रहा एक ऐप मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे अपने जिले में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए समन्वित प्रयास करें। पशुपालकों को नस्ल सुधार, पशु पोषण एवं पशु स्वास्थ्य पर ध्यान देने से होने वाले आर्थिक लाभों के बारे में जागरूक करें। मत्स्य बीज उत्पादन के लिए जिला स्तर पर अधिकाधिक मत्स्य प्रक्षेत्र विकसित किए जाएं। हर नगरीय निकाय क्षेत्र में फिश पार्लर स्थापित किए जाएं और यह सुनिश्चित करें कि मछली विक्रेता तय फिश पार्लर/मार्केट में ही मछली बेंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों में फिश पार्लर बनाये जायेंगे। इसके लिए पृथक से राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर्स किसानों से लगातार संवाद करते रहें। कृषक कल्याण वर्ष की तय गतिविधियों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करें। रोस्टर तैयार कर कृषि उपज मंडियों का सतत् निरीक्षण करें और कृषि उत्पादों पर विपणन पर विशेष ध्यान देकर इनके मूल्य संवर्धन के लिए पूरी कमर्शियल चेन का निर्माण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए विभाग को नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को दुग्धोत्पादन बढ़ाने के सभी नए-नए तरीके और उपाय बताएं जाएं। प्रमुख सचिव पशुपालन ने बताया कि पशुपालकों के ज्ञान संवर्धन के लिए एक ऐप तैयार किया जा रहा है। यह ऐप पशुपालकों को बताएगा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए किस प्रकार की गाय/भैंस को कैसा आहार खिलाना चाहिए। इससे पशुपालक सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। कृषक कल्याण वर्ष की कार्य योजना पर करें अमल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स को निर्देशित करते हुए कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के लिये तय की गई कार्य योजना का फील्ड में बेहतर तरीके से अमल किया जाए। इस अवधि में विशेष अभियान चलाया जाए। छोटे-बड़े कार्यक्रम भी किए जाएं। निचले स्तर पर किसानों से सघन सम्पर्क स्थापित किया जाए। सभी हितग्राहियों का सत्यापन एवं सहयोग भी लिया जाए। नए हितग्राहियों का चयन भी इस दौरान किया जाए। प्रचलित सभी योजनाओं, नीति-नियम एवं निर्देशों का सरलीकरण एवं सुधार की कार्यवाही की जाए। विभाग या संस्था की जरूरत के अनुसार नई योजना या कार्यक्रम भी इस दौरान प्रारंभ किए जाएं। विभिन्न प्रकार की नवाचारी गतिविधियां भी की जाएं। कृषि सेक्टर के विकास के लिए नए वित्तीय स्त्रोतों जैसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी), पुनर्घत्वीकरण एवं कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर फंड) का उपयोग भी किया जाए। केन्द्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से अनुदान या मंजूरी पाने के लिए भी कृषक कल्याण वर्ष में विशेष प्रयास किए जाएं। फरवरी में डिण्डोरी में होगा कोदो-कुटकी बोनस वितरण कार्यक्रम, मार्च में होगा राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन मुख्यमंत्री ने कृषक कल्याण वर्ष में होने वाली मासिक गतिविधियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फरवरी के पहले सप्ताह में डिंडोरी जिले में कोदो-कुटकी का बोनस वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के 16 से अधिक जिलों में कोदो-कुटकी उत्पादन होता है। वर्ष 2025 में 2800 टन कोदो-कुटकी की शासकीय खरीदी की गई है। दूसरे सप्ताह में गुलाब महोत्सव आयोजित होगा। तीसरे सप्ताह में शत-प्रतिशत किसानों के आईडी पंजीयन तथा किसान उन्मुखी योजनाओं के एग्रीस्टैक से एकीकरण के लिए निमाड़ क्षेत्र के किसी जिले में राज्यस्तरीय एग्रीस्टैक एवं डिजिटल कृषि प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसी तरह इस माह के अंतिम सप्ताह में कृषि मंथन के नाम से अलग-अलग जिलों में दो बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मार्च में राज्यस्तरीय सहकारिता सम्मेलन के जरिए किसानों को नये कृषि ऋण देने के अलावा कृषक न्याय मित्र योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया जाएगा। इस … Read more

राज्य मंत्री श्री पटेल बोले—बकरी पालन और जीरो वेस्टेज मॉडल है बेहतर विकल्प

भोपाल. पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने धार जिले की तहसील धमरपुरी के अंतर्गत आने वाले ग्राम सुंदरैल स्थित गोटवाला फार्म का भ्रमण किया। यह मध्यप्रदेश की सबसे पुरानी बकरी पालन एवं प्रजनन केंद्र इकाई है। बकरी पालन के क्षेत्र में फार्म के संस्थापक दीपक पाटीदार को भारत सरकार द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। राज्यमंत्री पटेल ने पाटीदार द्वारा संचालित उन्नत नस्लों की इकाइयों का अवलोकन किया। उन्होंने सिरोही, सोजत, बीटल, करौली, बरबरी सहित अन्य नस्लों की गुणवत्ता, प्रजनन प्रणाली एवं प्रबंधन मॉडल की जानकारी प्राप्त की। साथ ही फार्म पर विकसित जीरो वेस्टेज मॉडल का भी निरीक्षण किया, जिसमें बकरी के मल से वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर ऑर्गेनिक सब्जी उत्पादन सहित संसाधनों के समुचित उपयोग की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मंत्री पटेल ने संस्थापक दीपक पाटीदार से प्रदेश में बकरी पालन की संभावनाओं, इसके विस्तार, उद्यमिता विकास तथा शासन एवं उद्यमियों के संयुक्त सहयोग से पीपीपी मॉडल विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद उन्होंने शिव नर्सरी का भी भ्रमण किया, जहां संस्थापक शिवजी पाटीदार द्वारा नर्सरी की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही यहां पर टमाटर, मिर्च, पपीता, तरबूज सहित विभिन्न फसलों की जा रही खेती का भी अवलोकन किया। ग्राम पंचायत द्वारा विकसित पशु बाजार में गिर नस्ल की उन्नत गायों का अवलोकन कर राज्यमंत्री पटेल ने पंचायत एवं व्यापारी बंधुओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने दीपक पाटीदार के कार्यों की प्रशंसा करते हुए बकरी पालन एवं ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। इस दौरान उपसंचालक पशुपालन डॉ. आर.एस. सिसोदिया सहित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।  

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अंपायर प्रोफेसर रघुवीर सिंह राठौड़ की मौत

उदयपुर. लेक सिटी उदयपुर और क्रिकेट जगत के लिए एक दुखद खबर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले दिग्गज अंपायर और प्रख्यात शिक्षाविद् प्रोफेसर रघुवीर सिंह राठौड़ (88) का निधन हो गया। वे पिछले 15 दिनों से अस्वस्थ थे और उदयपुर के एक अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था, जहां शाम करीब चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। बता दें कि प्रोफेसर राठौड़ का व्यक्तित्व बहुआयामी था। जहां एक ओर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की पिच पर सख्त अंपायरिंग की, वहीं दूसरी ओर मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (MLSU) में भूगोल के प्रोफेसर के रूप में हजारों छात्रों का भविष्य संवारा। उनके शिष्यों की सूची में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, पूर्व सांसद नमोनारायण मीणा और पूर्व आईएएस धर्मसिंह सागर जैसी दिग्गज हस्तियां शामिल हैं। अंपायरिंग करियर की प्रमुख उपलब्धियां प्रो. राठौड़ सेंट्रल जोन (राजस्थान, यूपी, एमपी, विदर्भ और रेलवे) से निकलने वाले अग्रणी अंतरराष्ट्रीय अंपायरों में से एक थे। करियर के मुख्य पड़ाव में अपना पहला टेस्ट मैच 1992 में चंडीगढ़ में भारत बनाम श्रीलंका के बीच कराया। साल 1993 में चेन्नई में भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट मैच में भी उन्होंने अंपायर की कमान संभाली। उन्होंने कुल सात अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैचों में अंपायरिंग की, जिसमें पहला मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच था। तीन दशक तक संभाली उदयपुर क्रिकेट की कमान उनके घनिष्ठ मित्र और पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर बलवंत शर्मा ने बताया कि प्रो. राठौड़ का क्रिकेट प्रशासन में भी अतुलनीय योगदान रहा। वे 1966 से 1996 तक लगातार 30 वर्षों तक उदयपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव रहे। इसके बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी बलवंत शर्मा को सौंपी थी। खेल जगत में शोक की लहर उनके निधन की खबर मिलते ही वंडर क्रिकेट एकेडमी परिसर में एक शोक सभा आयोजित की गई। जिला क्रिकेट संघ के सचिव मनोज चौधरी, कोच और खिलाड़ियों ने मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उदयपुर के खेल प्रेमियों का कहना है कि प्रो. राठौड़ के निधन से एक युग का अंत हो गया है, जिन्होंने शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों को समान रूप से समृद्ध किया।

राज्यस्तरीय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग की झांकी को दूसरा स्थान, मंत्री परमार ने दी शुभकामनाएं

भोपाल. उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने, गणतंत्र दिवस के अवसर पर भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा "शोध एवं अनुसंधान, समृद्ध मध्यप्रदेश की पहचान" थीम पर प्रस्तुत आकर्षक झांकी को राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान अर्जित करने की महत्वपूर्ण उपलब्धि मिलने पर, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों को बधाई दी है। अनुसंधान, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमता पर आधारित रही उच्च शिक्षा विभाग की झांकी राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा रविंद्र भवन में आयोजित लोकरंग कार्यक्रम के दौरान, गणतंत्र दिवस के अवसर पर भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तुत "शोध एवं अनुसंधान, समृद्ध मध्यप्रदेश की पहचान" थीम पर आकर्षक झांकी को द्वितीय स्थान मिलने पर सम्मानित किया गया। ज्ञातव्य है कि राज्य स्तरीय समारोह में प्रस्तुत 23 विभागों की झांकियों में, उच्च शिक्षा विभाग की झांकी ने राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। उच्च शिक्षा विभाग की यह झांकी प्रदेश को अनुसंधान, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमता आधारित ज्ञान-व्यवस्था के अग्रणी राज्य के रूप में प्रस्तुत कर रही थी। इसका मूल भाव यह प्रतिपादित करता है कि उच्च शिक्षा में शोध, तकनीकी नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही समृद्ध, आत्मनिर्भर और सतत विकासशील मध्यप्रदेश की सुदृढ़ आधारशिला हैं। प्रदेश की प्रगति का मार्ग ज्ञान-सृजन, नवाचार और अनुसंधान आधारित समाधानों से होकर गुजरता है, यही इस झांकी का केन्द्रीय संदेश रहा है। झांकी के अग्र भाग में रिसर्च एवं एआई इनोवेशन जोन का सजीव चित्रण किया गया, जहाँ अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमता, रोबोटिक्स, डेटा एनालिक्स और डिजीटल डैशबोर्ड के माध्यम से विद्यार्थी एवं शोधकर्ता नवाचार करते हुए दिखाई दे रहे थे। यह दृश्य, उच्च शिक्षा संस्थानों में विकसित होती अनुसंधान संस्कृति, स्टार्टअप इकोसिस्टम और तकनीक आधारित समाधान निर्माण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को प्रभावी रूप से रेखांकित करता दिखाई दिया। झांकी का मध्य भाग प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के प्रतीकात्मक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। स्मार्ट कक्षाएँ, डिजीटल प्रयोगशालाएँ, इनोवेशन हब, सोलर पैनल और हरित संरचनाएँ यह दर्शाती दिखीं कि राज्य में उच्च शिक्षा को शोध-आधारित, कौशल-उन्मुख और सतत विकास से जोड़ा जा रहा है। झांकी के अगले भाग में व्यावहारिक अनुप्रयोगों को दर्शाया गया, जहाँ ड्रोन तकनीक, स्मार्ट कृषि, डेयरी विकास और जल-प्रबंधन जैसे दृश्य स्पष्ट करते हैं कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विकसित शोध सीधे ग्रामीण विकास और किसान सशक्तीकरण से जुड़ रहा है। झांकी के साथ चलते विद्यार्थी, युवा वैज्ञानिक और भावी उद्यमी, यह स्पष्ट संदेश देते दिखे कि ये ही राज्य की युवा शक्ति का प्रतीक हैं, जो ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से प्रदेश को विकास के नए शिखर पर ले जाने के लिए संकल्पित है।