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बिहार बोर्ड इंटर परीक्षा में पहले दिन कई जगह हंगामा

पटना. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षा सोमवार से प्रारंभ हो गई। यह परीक्षा 13 फरवरी तक चलेगी। राजधानी के परीक्षा केंद्रों पर सुबह 7.30 बजे से ही विद्यार्थी आने लगे थे। सुबह आठ बजे तक गेट पर विद्यार्थियों की काफी भीड़ जुट गई। विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्रों में सुबह 8.30 से 8.59 बजे तक प्रवेश दिया गया। ठीक सुबह नौ बजते ही केंद्रों का गेट बंद कर दिया गया। उसके बाद भी विद्यार्थियों के आने का सिलसिला जारी रहा। हालांकि, काफी प्रयास करने के बाद भी विद्यार्थियों को नौ बजे के बाद केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया। राजधानी में स्थित बांकीपुर बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय केंद्र पर तीन छात्राएं नौ बजे के बाद केंद्र पर पहुंचीं, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं मिला। कुछ देर बाद दो छात्राएं गेट फांदकर अंदर प्रवेश कर गई। इसी तरह रघुनाथ बालिका उच्च माध्यमिक, कंकड़बाग में 10, कमला नेहरू बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में 10, राजेंद्र बालक उच्च माध्यमिक विद्यालय में चार, पटना कोलजिएट में तीन और बीएन कालेजिएट स्कूल में चार छात्र विलंब से आने के कारण परीक्षा देने से वंचित हो गए। परीक्षा से वंचित छात्राओं का रो-रोकर बुरा हाल बांकीपुर बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय परीक्षा केंद्र पर उत्क्रमित सेकेंडरी स्कूल कुकरी, फुलवारीशरीफ की एक और कमला नेहरू बालिका उच्च माध्यमिक माध्यमिक विद्यालय, यारपुर, गर्दनीबाग की दो छात्राएं पांच मिनट विलंब से परीक्षा देने पहुंची। उनके आते-आते परीक्षा केंद्र का गेट बंद हो चुका था। केंद्र के अंदर प्रवेश नहीं मिलने पर तीनों छात्राएं रोने लगीं। छात्राओं को रोते देख अभिभावकों ने हंगामा किया, लेकिन उनकी एक नहीं चली, तब तक सुबह 9.30 परीक्षा प्रारंभ हो चुकी थी। परीक्षा केंद्र के अंदर लाउडस्पीकर से घोषणा की गई कि परीक्षा प्रारंभ हो चुकी है, अभिभावक गेट से हट जाएं। तैनात पुलिस कर्मियों ने हंगामा कर रहे अभिभावकों को वहां से हटाया। दो बार परीक्षार्थियों की हुई जांच, 15 मिनट दिया अतिरिक्त समय परीक्षार्थियों को जांच के बाद ही परीक्षा केंद्रों में जाने की इजाजत दी गई। गेट पर ही मजिस्ट्रेट की देखरेख में चिट-पुर्जे व मोबाइल की तलाशी ली गई। जिन छात्रों के पास चिट-पुर्जे मिले, उन्हें अगली बार ऐसी गलती नहीं करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया। इंटर परीक्षा में पहले दिन 26 विद्यार्थी किए गए निष्कासित इंटरमीडिएट परीक्षा पहले दिन पूरे राज्य से कदाचार के आरोप में 26 विद्यार्थियों को परीक्षा से निष्कासित किया गया। वहीं, शेखपुरा जिले से एक छात्र को दूसरे के बदले परीक्षा देते हुए पकड़ा गया। बिहार बोर्ड के अनुसार गया से एक, जहानाबाद से तीन, नवादा से 13, गोपालगंज से तीन, मधेपुरा से दो, भागलपुर से दो, अररिया और कटिहार से एक-एक विद्यार्थी को कदाचार के आरोप में परीक्षा से निष्कासित किया गया है। हेलमेट से डीईओ की गाड़ी का शीशा तोड़ा इंटरमीडिएट परीक्षा का निरीक्षण करने पहुंचे जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) साकेत रंजन को अभिभावकों के गुस्सा का शिकार होना पड़ा। डीईओ कमला नेहरु बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, यारपुर गर्दनीबाग केंद्र परीक्षा का निरीक्षण करने पहुंचे। इस बीच जिनकी बच्चों की परीक्षा छूटी उनके अभिभवकों ने उनके गाड़ी की पीछे वाले हिस्से पर हेलमेट से हमला कर दिया। इस वजह से गाड़ी के पीछे का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया। अभिभावकों का आरोप था कि प्रवेश पत्र पर परीक्षा केंद्र का गलता पता अंकित होने के कारण केंद्र खोजने में विलंब हो गया और परीक्षा छूट गई। इसके बाद दर्जनों अभिभावकों ने डीईओ की गाड़ी घेर लिया।  डीईओ ने आश्वासन दिया कि जिनकी परीक्षा छूटी उनको फिर से मौका दिया जाएगा। अभिभावकों ने डीईओ की बातों को मानने से इन्कार दिया। कोई बड़ी घटना घटती इससे पहले डीईओ यहां चले गए।

आर्द्रभूमि संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन हेतु जागरूकता कार्यक्रम

रायपुर. कार्यशाला में 46 पक्षी प्रजातियों की हुईं पहचान आर्द्रभूमियाँ अविश्वसनीय जैव विविधता का घर हैं और पृथ्वी पर सबसे समृद्ध और विविध पारिस्थितिक तंत्रों में से हैं। ये कई लुप्तप्रायए संकटग्रस्त और स्थानिक प्रजातियों को आश्रय देती हैं जो केवल कुछ निश्चित आर्द्रभूमि आवासों में ही जीवित रह सकती हैं। विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 के अवसर पर 2 फरवरी को बालसमुंद जलाशय, पलारी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बलौदाबाजार द्वारा आर्द्रभूमि संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम सह- कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर, बालसमुंद जलाशय क्षेत्र में संपन्न हुआ। बारनवापारा अभ्यारण्य में 46 पक्षी प्रजातियों की पहचान  इस विशेष आयोजन का उद्देश्य पृथ्वी के लिए आर्द्रभूमि की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है, क्योंकि ये पारिस्थितिकी तंत्र जंगलों की तुलना में तीन गुना तेजी से लुप्त हो रहे हैं। इस आयोजन में लगभग 60 प्रतिभागियों, 5 विशेषज्ञों तथा जिले के विभिन्न महाविद्यालयों से 49 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक महत्व, जैव विविधता संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर समुदाय की सहभागिता को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान पक्षी अवलोकन  एवं आर्द्रभूमि अध्ययन की व्यावहारिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। छात्र-छात्राओं द्वारा जलाशय से जल नमूने एकत्रित किए गए तथा बारनवापारा अभ्यारण्य के फॉरेस्ट गाइड्स के सहयोग से 46 पक्षी प्रजातियों की पहचान की गई। प्रतिभागियों को तालाब में पाए जाने वाले जलीय जीव-जंतुओं, जल गुणवत्ता तथा आसपास के पारिस्थितिक तंत्र की जानकारी दी गई। बालसमुंद जलाशय स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में बताया कि आर्द्रभूमियाँ न केवल पक्षियों एवं जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास हैं, बल्कि ये भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण, जल शुद्धिकरण, स्थानीय जलवायु संतुलन एवं आजीविका समर्थन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बालसमुंद जलाशय जैसे जलस्रोत क्षेत्रीय स्तर पर स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम में वनमंडलाधिकारी,  धम्मशील गणवीर के मार्गदर्शन में जिले की आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर उप-विभागीय अधिकारी (वन)  निश्चचल चंद शुक्ला, वन परिक्षेत्र अधिकारी  प्रखर नायक, एवं कार्यक्रम संयोजक सहायक प्राध्यापक प्रो. अजय मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में नगर पंचायत पलारी के अध्यक्ष गोपी साहू, उपाध्यक्ष  पिंटू वर्मा, हितेंद्र ठाकुर एवं शोधार्थी दीपक तिवारी रहे। इसके अतिरिक्त डिप्टी रेंजर सर्व धर्म सिंह बरिहा, बीट प्रभारी  मनबोधन टंडन, आबिद अली खान, रामनारायण यादव सहित वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारीगण और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

HSSC की भर्ती में स्टेनो टाइपिस्ट और स्टेनोग्राफर के पद बढ़े

चंडीगढ़. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) ने तृतीय श्रेणी पदों की भर्तियों में फेरबदल करते हुए पदों में बढ़ोतरी कर दी है। इन पदों के लिए पहले जहां सोमवार से आवेदन प्रक्रिया शुरू होनी थी, वहीं अब छह फरवरी से ऑनलाइन आवेदन फार्म भरे जाएंगे। आयोग ने विज्ञापन संख्या 03/2026 के तहत निकाली गई भर्तियों में यह बदलाव किया है। अलग-अलग कैटेगरी में पदों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। संशोधन के बाद ग्रुप-2 के अंतर्गत स्टेनो टाइपिस्ट के पदों की संख्या 486 से बढ़ाकर 586 की गई है। वहीं ग्रुप-3 के अंतर्गत स्टेनो टाइपिस्ट के पद 696 से बढ़कर 702 किए गए हैं। 260 हुई पदों की संख्या ग्रुप-3 में जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर के पदों की संख्या 173 से बढ़ाकर 260 कर दी गई है। इसके लावा आयोग ने आवेदन प्रक्रिया की तारीख में भी बदलाव किया है। पहले आवेदन दो फरवरी से शुरू होने थे, मगर अब यह छह फरवरी से शुरू होंगे। आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वह आवेदन करने से पहले संशोधित विज्ञापन और सभी दिशा- निर्देशों को ध्यान से पढ़ लें ताकि किसी भी तरह की गलती से बचा जा सके। भर्ती से जुड़ी विस्तृत जानकारी हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की वेबसाइट पर दी गई है। इस भर्ती के तहत ग्रुप संख्या-3 के अंतर्गत आने वाले जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर के पदों में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इसमें पहले पदों की संख्या 173 थी, जिसे बढ़ाकर 260 कर दिया गया है।

स्कूल स्वास्थ्य की दिशा में एनएचएआई की पहल, 1500 बच्चों की नेत्र जांच

रायपुर. एनएचएआई की पहल : 1500 स्कूली बच्चों की हुई नेत्र जांच, 102 को मिलेंगे मुफ्त चश्मे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और नेशनल हाईवे इन्फ्रा ट्रस्ट (एनएचआईटी) की संयुक्त पहल से रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना मार्ग पर स्थित विद्यालयों में नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस अभियान के तहत कुल 1498 छात्र-छात्राओं की आंखों की जांच की गई। रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित तरपोंगी, भोजपुरी एवं मुढ़ीपार टोल प्लाजा के समीप संचालित शासकीय विद्यालयों में ये शिविर लगाए गए थे, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने बच्चों की दृष्टि का बारीकी से परीक्षण किया। जांच के दौरान 102 विद्यार्थियों में दृष्टि दोष पाया गया, जिन्हें जल्दी ही निःशुल्क चश्मे प्रदान किए जाएंगे। रायपुर परियोजना निदेशक श्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि एनएचएआई राजमार्गों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास निवास करने वाले समुदायों के सामाजिक और स्वास्थ्य कल्याण के प्रति भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इन्हीं प्रतिबद्धताओं के चलते आज स्कूलों में नेत्र जांच शिविरों का आयोजन किया गया है।

इतिहास रचती धामी सरकार — उत्तराखंड में पहली बार साल भर का आंकड़ा 6 करोड़ से ज्यादा

देहरादून पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल रंग लाई है। प्रदेश में पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने नया कीर्तिमान बनाया है। वर्ष 2025 में छह करोड़ तीन लाख से अधिक पर्यटक उत्तराखंड आए हैं, जो राज्य गठन के बाद से अब तक की सर्वाधिक संख्या है। हरिद्वार में सबसे अधिक तीन करोड़ 42 लाख 49 हजार 380 पर्यटक और तीर्थयात्री पहुंचे हैं, जबकि देहरादून में 67 लाख 35 हजार 71 और टिहरी जनपद में 53 लाख 29 हजार 759 सैलानी आए हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में पर्यटन को नई गति मिली है। पर्यटन विकास के लिए जहां कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की गई हैं, वहीं पर्यटन-तीर्थ स्थलों में बुनियादी सुविधाओं के विकास पर खास जोर दिया गया है। पर्यटकों-तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सुरक्षा प्रबंध भी किए गए हैं। धामी सरकार के इन प्रयासों का ही परिणाम है कि उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पर्यटन विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 6 करोड़ 3 लाख 21 हजार 194 पर्यटक उत्तराखंड आए हैं। इनमें एक लाख 92 हजार 533 विदेशी सैलानी शामिल हैं। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहली बार पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों की संख्या छह करोड़ के पार पहुंची है। पूर्व के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 में 2,00,18,115, 2022 में 5,39,81,338, 2023 में 5,96,36,601 और वर्ष 2024 में 5,95,50,277 पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों ने उत्तराखंड का रुख किया है। इसे से लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है। हमारी सरकार राज्य में पूरे वर्ष पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है, ताकि पर्यटन कारोबार से जुड़े स्थानीय निवासियों और युवाओं को सालभर रोजगार के अवसर उपलब्ध हों। शीतकालीन यात्रा इसी की एक कड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मां गंगा जी के दर्शन को उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा की यात्रा पर आने के बाद राज्य में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा मिला है और बड़ी संख्या में यात्री उत्तराखंड पहुंचे हैं। हमने पर्यटक सुविधाएं बढ़ाने के साथ उनकी सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और इन्हीं सब प्रयासों का परिणाम है कि उत्तराखण्ड में पर्यटकों की बढ़ती संख्या हर वर्ष नया रिकॉर्ड बना रही है।

पंजाब के जलशक्ति मंत्री बोले- 57 फीसदी कुओं में बढ़ा भूमिगत जलस्तर

बठिंडा. पंजाब में मानसून के बाद की अवधि में किए गए विश्लेषण के मुताबिक, 185 कुओं में से, 106 में यानी करीब 57 फीसदी (कुओं) में भूजल स्तर में 0 से 4 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि 78 कुओं (42.2%) में पानी के स्तर में 4 मीटर तक की गिरावट दर्ज की गई। एक कुएं में कोई बदलाव नहीं हुआ। जल शक्ति राज्य मंत्री, राज भूषण चौधरी ने सोमवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। मंत्री पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य विक्रमजीत सिंह साहनी के एक सवाल का जवाब दे रहे थे। फाजिला में भूजल स्तर में सबसे अधिक बढ़ोतरी मंत्री ने जवाब दिया कि फाजिल्का में भूजल स्तर में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई, क्योंकि जिले में विश्लेषण किए गए सभी 10 कुओं में वृद्धि दर्ज की गई। इस बीच, होशियारपुर में विश्लेषण किए गए 19 में से 10 कुओं में पानी के स्तर में वृद्धि दर्ज की गई। रोपड़ में भी 100 फीसदी कुओं में वृद्धि दर्ज की गई, क्योंकि विश्लेषण किए गए सभी सात कुओं में पानी के स्तर में वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक कमी बठिंडा में दर्ज की गई, जहां विश्लेषण किए गए 17 में से 13 कुओं में गिरावट दर्ज की गई, इसके बाद फरीदकोट में 13 में से नौ कुओं में गिरावट दर्ज की गई। लुधियाना में, विश्लेषण किए गए नौ में से आठ कुओं में गिरावट दर्ज की गई, जबकि पटियाला में, विश्लेषण किए गए 12 में से आठ कुओं में भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। 106 कुओं में बढ़ोतरी देखी गई चौधरी ने कहा कि 106 कुओं में से जिनमें वृद्धि दर्ज की गई, 80 में 0 से 2 मीटर की वृद्धि देखी गई, 17 में 2 से 4 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि नौ कुओं में दशक में 4 मीटर से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 78 कुओं में से जिनमें गिरावट दर्ज की गई, 38 में 0 से 2 मीटर की गिरावट दर्ज की गई, 17 में 2 से 4 मीटर के बीच गिरावट और 23 कुओं में दशक में 4 मीटर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। मंत्री ने बताया कि भूजल स्तर में लंबे समय के उतार-चढ़ाव का आकलन करने के लिए, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड द्वारा पंजाब के लिए मानसून के बाद (2025) इकट्ठा किए गए पानी के स्तर के डेटा की तुलना 2015 से 2024 तक मानसून के बाद के स्तरों के दस साल के औसत (2015 से 2024 तक नवंबर का डेटा) से की गई।

नेशनल ताइक्वांडो प्रतियोगिता में 9 खिलाड़ियों ने लहराया परचम

बिलासपुर कलेक्टर-एसएसपी ने नेपाल में होने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए दी शुभकामनाएं राजस्थान के जयपुर में आयोजित दो दिवसीय नेशनल ताइक्वांडो प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों ने जिले के साथ-साथ प्रदेश का भी नाम रौशन किया है। 30 जनवरी एवं 1 फरवरी की हुए इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ से खेलो ताइक्वांडो यूथ स्पोर्ट्स फेडरेशन के 11 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 खिलाड़ियों का नेपाल में होने वाले अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिमा के लिए चयन हुआ है। खिलाड़ियों ने कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह से मुलाकात की। कलेक्टर एवं एसएसपी ने खिलाड़ियों का हौंसला बढ़ाते हुए कहा कि उन्होंने जिले सहित पूरे प्रदेश का नाम रौशन किया है। कलेक्टर एवं एसएसपी ने नेपाल में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कोच रिमझिम गुप्ता, मैनेजर चंद्र प्रकाश एवं अंतरराष्ट्रीय मास्टर गणेश सागर ने खिलाड़ियों का नेतृत्व किया। विजेता खिलाड़ी अमन गेंडारे, ऋषभ पटेल, कान्हा गुप्ता, संजनी, नीलिमा, विमल साहू, आर्यन सागर अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपना दमखम दिखाएंगे। जयपुर राजस्थान से वापसी के दौरान रेलवे स्टेशन पर सभी चयनित खिलाड़ी, कोच एवं मैनेजर का फूल-मालाओं, के साथ भव्य स्वागत किया गया। 

सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों के आवासीय भूखंडों का पंजीकरण होगा नि:शुल्क

सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को आवंटित आवासीय भूखंडो का पंजीयन नि:शुल्क कराये जाने का निर्णय 6 विभागों की 10 योजनाओं की निरंतरता के लिए 15,009 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति मैहर एवं कटनी जिले की 620 करोड़ रूपये से अधिक की 2 सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा नर्मदा घाटी की सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को आवंटित किये गए आवासीय भूखंडो का पंजीयन नि:शुल्क कराये जाने का निर्णय लिया गया। मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अनुसार देय पंजीयन शुल्क एवं स्टॉम्य ड्यूटी की प्रतिपूर्ति नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा की जायेगी। इससे 25,600 से अधिक परिवारों को लाभ होगा। इस निर्णय से राज्य शासन पर 600 करोड़ रूपये का वित्तीय भार आयेगा। मैहर एवं कटनी जिले की 2 सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा मैहर एवं कटनी जिलें में 2 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 620 करोड़ 65 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार मैहर एवं कटनी की धनवाही सूक्ष्म दबाव सिंचाई परियोजना लागत 53 करोड़ 73 लाख रूपये की स्वीकृति दी गयी है। इससे 3500 हेक्टयर में सिंचाई की सुविधा प्राप्त होंगी और मैहर एवं कटनी जिले के 9 ग्राम के 2810 कृषक लाभान्वित होंगे। कटनी जिलें की बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना लागत 566 करोड 92 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इससे, कटनी जिले की बरही एवं विजयराघवगढ़ तहसील के 27 ग्राम के 11,500 कृषक लाभान्वित होंगे और 20 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होंगी। 10 योजनाओं की निरंतरता की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा 6 विभागों की 10 योजनाओं की वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक निरंतरता के लिए 15,009 करोड़ रूपये से अधिक की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार वित्त विभाग की लोक वित्त पोषित 500 करोड़ से कम की 8 योजनाओं के लिए 115 करोड़ 6 लाख रुपये, श्रम विभाग की मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना के लिए 5 हजार करोड़ रुपये, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की विधानसभा क्षेत्र निर्वाचन योजना और स्थापना एवं कार्यालयीन योजनाओं के लिए 3 हजार 376 करोड़ 66 लाख रूपये, पशु पालन एवं डेयरी विभाग की डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना, पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर ब्लॉकग्रांट योजना एवं पशुपालन, पशु विकास और गौ संवर्धन योजना के लिए 6 हजार 472 करोड़ 18 लाख रुपये, महिला एवं बाल विकास की किशोर कल्याण निधि योजना और घरेलू हिंसा पीड़िता के लिए सहायता योजना के लिए 24 करोड़ 70 लाख रूपये और पिछड़ा वर्ग एवं अन्य कल्याण की अल्पसंख्यक स्वरोजगार/उद्यम योजना के लिए 21 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। अन्य निर्णय मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग कर कर्मचारियों का संविलयन महिला बाल विकास विभाग में करने की स्वीकृति प्रदान की गई।  

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से बढ़ी कनेक्टिविटी, सफर हुआ सफल

रायपुर. मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से सफर हुआ सफर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का उद्देश्य सुदूर वनांचल, विशेषकर बस्तर और सरगुजा क्षेत्रों में, ग्रामीणों को सुलभ और सुरक्षित परिवहन प्रदान करना है। इस योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों को जिला मुख्यालयों, स्कूलों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों से जोड़ा जा रहा है। दूरस्थ अंचलों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस की पहुंच से राह हुई आसान  मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना न केवल सड़कों पर दौड़ रही है, बल्कि यह ग्रामीणों के समय, सुविधा और सपनों को सहेजने का माध्यम बन गई है। सरगुजा जिले के बादा से बरियों, चारपारा, ककना, सिधमा, अखोराखुर्द, रूखपुर, चिखलाडीह, नर्मदापारा, सरगवां और अम्बिकापुर तक बस सेवा शुरू होने से ग्रामीणों में भारी उत्साह है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की दूरगामी सोच और संवेदनशीलता का परिणाम है कि आज सरगुजा जिले के उन दूरस्थ अंचलों में भी विकास की गूंज सुनाई दे रही है, जहां कभी परिवहन एक बड़ी चुनौती थी।  मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से सफर हुआ सुगम हुआ सफर, समय की हुई बचत  शहरी स्वास्थ्य अस्पताल में कार्यरत श्रीमती परमानिया पैकरा ने अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि इस मार्ग पर यह पहली बस सेवा है। उन्होंने कहा कि, पहले ड्यूटी पर समय से पहुंचना और फिर सुरक्षित घर वापस आना एक बड़ी चिंता होती थी। लेकिन जब से यह बस शुरू हुई है, हमें बहुत सुविधा मिल रही है। अब हम समय पर अस्पताल पहुंचते हैं और वक्त पर घर भी लौट आते हैं। इसी तरह स्वास्थ्य कर्मी चंदा टोप्पो ने बताया कि बांदा क्षेत्र से होने के कारण पहले आवागमन के साधन न के बराबर थे। बस सेवा शुरू होने से अब उनकी पेशेवर जिंदगी आसान हो गई है और इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का तहे दिल से आभार व्यक्त किया है। वरदान साबित हो रही बस सेवा विद्यार्थियों के लिए        विद्यार्थियों के जीवन में इस योजना से क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई है। पुष्पेंद्र कॉलेज ऑफ नर्सिंग की फाइनल ईयर की छात्रा लक्ष्मी कहती हैं कि पहले मुझे बस पकड़ने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन अब बस मेरे घर के सामने से ही गुजरती है। इससे मैं पढ़ाई के लिए बहुत सहज महसूस करती हूँ। वहीं पीजी कॉलेज की छात्रा निशा ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले उसे बस पकड़ने के लिए 5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। अब सिदमा गाँव से ही बस मिलने के कारण वह सीधे गाँधी चौक तक का सफर बिना किसी परेशानी के तय कर रही है। सरगुजा जिले के सिदमा गाँव के निवासी दिव्यांशु सिंह ने बताया कि बस सुविधा न होने के कारण उन्हें प्रतिदिन 5 किलोमीटर तक बाइक या पैदल सफर तय करना पड़ता था। दिव्यांशु कहते हैं कि अब गाँव से ही बस चलने लगी है, जिससे मैं अपने स्कूल समय पर पहुँच जाता हूँ। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय को इस सराहनीय पहल के लिए आभार व्यक्त किया। विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे सुदूर वनांचल के गाँव       मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना एक वाहन नहीं, बल्कि सुशासन का वह भरोसा है जिसने सुदूर क्षेत्रों को शहर की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है। नियमित बस के संचालन से व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की पहल से अंतिम पंक्ति पर खड़े व्यक्ति सशक्त बन रहे हैं। आज सरगुजा के सुदूर वनांचल की सड़कों पर दौड़ती मुख्यमंत्री ग्रामीण बस प्रदेश की प्रगति की नई कहानी गढ रही हैं।

पाकिस्तान की ड्रामेबाजी का ICC पर भारी असर, एक IND-Pak मैच ने 7 साल की PCB कमाई बराबर नुकसान पहुँचाया

 नई दिल्ली टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान ने भारत के साथ खेलने से इनकार किया है. दोनों के बीच 15 फरवरी को कोलंबो में ग्रुप स्टेज का मैच था. पाकिस्तान सरकार ने ये कदम वर्ल्ड कप शुरू होने के 5 दिन पहले उठाया है, जिसने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है. ऐसा इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान के इस कदम से आईसीसी को भारी आर्थिक घाटा होगा. आईसीसी टूर्नामेंट में भारत-पाकिस्तान मुकाबला करीब 250 मिलियन डॉलर (2200 करोड़ रुपये से अधिक) का राजस्व पैदा करता है. कई रिपोर्ट्स में इस रेवन्यू को 3 हजार करोड़ से ज्यादा का बताया गया है. ऐसे में अगर ये मैच नहीं होता है तो इसका खामियाजा सभी हितधारकों को भारी आर्थिक नुकसान के रूप में उठाना पड़ेगा. पाकिस्तान की सालाना कमाई से समझें नुकसान का गणित पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की साल भर की कमाई की बात करें तो वह 35-45 मिलियन डॉलर के बीच आती है. यानी 300 से 400 करोड़ रुपये की कमाई पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की सालाना है. इसमें आईसीसी से पाकिस्तान को मिलने वाले रेवन्यू, PSL की कमाई, सीरीज और टिकट की कीमत से लेकर स्पॉनसरशिप से मिलने वाली आमदनी का लेखा-जोखा है. हालांकि, पीसीबी की कमाई का मुख्य जरिया आईसीसी से मिलने वाला रेवन्यू शेयर है, जो उसकी कुल कमाई का 80 फीसदी से ज्यादा बताया जाता है. अब भारत-पाक मैच की कमाई जान लीजिए अब अगर भारत पाकिस्तान के एक आईसीसी मुकाबले की कमाई की बात करें तो ये 2200 करोड़ रुपये से ज्यादा की है. कई बार इसे 3 हजार करोड़ से ज्यादा भी आंका गया है. यानी साफ है कि पाकिस्तान 7 साल में जितना पैसा कमाता है उतना रेवन्यू भारत-पाक के एक मैच से ही पैदा होता है.  ये बात भी किसी से छिपी नहीं है कि आईसीसी की कमाई का सबसे बड़ा जरिया भारत-पाकिस्तान का मैच है. क्योंकि इसे पूरी दुनिया में लोग देखते हैं और कई करोड़ों का विज्ञापन भी मिलता है. यही कारण है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सीरीज न होने के बावजूद भी आईसीसी इन्हें मल्टी नेशनल्स टूर्नामेंट में एक ही ग्रुप में रखता है. ताकि दोनों के बीच टक्कर हो.   10 सेकेंड के स्लॉट की कीमत 40 लाख अगर वर्ल्ड कप में दोनों के बीच टक्कर नहीं हुई तो मेजबान ब्रॉडकास्टर को सिर्फ विज्ञापन से ही 200 से 250 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है. भारत-पाकिस्तान जैसे बड़े मुकाबले में 10 सेकंड का विज्ञापन स्लॉट 40 लाख रुपये तक में बिकता है. ऐसे में ये तो साफ है कि अगर पाकिस्तान ने ये मैच बायकॉट करने की हिमाकत की तो आईसीसी को भारी नुकसान होगा. फिर आईसीसी इसकी भरपाई का आदेश पाकिस्तान को दे सकता है या उसपर कड़े प्रतिबंध लगा सकता है. इससे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पूरी तरह से तबाह हो सकता है.  भारत को बिना खेले मिलेगा दो अंक अगर भारत-पाकिस्तान के बीच मैच नहीं होता है तो टीम इंडिया को बिना खेले ही वॉक ओवर मिल जाएगा. उसे फ्री में दो अंक मिल जाएंगे और पाकिस्तान को नेट रन रेट का भी भारी नुकसान होगा. जिससे वर्ल्ड कप में उसकी आगे की राह खतरे में पड़ सकती है. पाकिस्तान ने तोड़ा है समझौता पाकिस्तान की ड्रामेबाजी पिछले कई दिनों से जारी है. एशिया कप में भी टीम ने टूर्नामेंट बहिष्कार की धमकी दी थी. लेकिन फिर खुद ही खेलने आ गया था. इस बार भी बांग्लादेश और भारत के क्रिकेट बोर्ड में चल रही तनातनी में वह बीच में कूद गया.  पाकिस्तान ने ही बांग्लादेश को भड़काया और आखिरकार उसे टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा. फिर उसके बाद पाकिस्तान ने भी बायकॉट की धमकी दी. और फिर खुद ही केवल भारत के साथ मैच को न खेलने की बात कहने लगा. पाकिस्तान ने ऐसा कदम उठाने की हिमाकत तब की है जब आईसीसी, पीसीबी और बीसीसीआई के बीच 2027 तक भारत-पाकिस्तान मैचों के लिए हाइब्रिड मॉडल पर सहमति बनी हुई है. ये साफतौर पर सहमति है कि दोनों देश आईसीसी टूर्नामेंट्स में न्यूट्रल वेन्यू पर खेलेंगे. ऐसे में पाकिस्तान बोर्ड के लिए इस तरह के चयनात्मक बहिष्कार को सही ठहराना आसान नहीं होगा. अब आईसीसी ने इस पूरे प्रकरण को लेकर एक मीटिंग बुलाई है. कहा जा रहा है की पाकिस्तान पर कड़े  एक्शन को लेकर इसमें चर्चा हो सकती है.   संभावित आईसीसी प्रतिबंध क्या हो सकते हैं? * पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) में विदेशी खिलाड़ियों की भागीदारी पर रोक, साथ ही लीग से अंतरराष्ट्रीय मान्यता और व्यावसायिक समर्थन वापस लेना. * आईसीसी के राजस्व पूल से पाकिस्तान को मिलने वाली राशि में भारी कटौती, जिस पर पीसीबी की आर्थिक निर्भरता काफी हद तक है. * भारत-पाकिस्तान मैच नहीं होने से हुए भारी राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए ब्रॉडकास्टर को मुआवजा देने का निर्देश. * एशिया कप से बाहर किया जाना * पाकिस्तान से जुड़ी सभी द्विपक्षीय सीरीज़ पर रोक.