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भारतीय संस्कृति में एकल शोध नहीं, समग्र कल्याण आधारित है शोध की परंपरा

संस्थान द्वारा प्रकाशित 7 पुस्तकों का किया गया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) में की सहभागिता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शोध अकादमिक गतिविधि मात्र नहीं, यह समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली शक्ति है। कोई भी शोध इतना उच्च कोटि का होना चाहिए जो हम सबकी सोच को एक नई दृष्टि, नई दिशा भी दे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे देश के विकास के लिए अपनी जिज्ञासा और रुचि के अनुसंधान क्षेत्रों में निर्भीक होकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जैसे आवश्यकता आविष्कार की जननी है, वैसे ही शोध विज्ञान और सभी वैज्ञानिक पद्धतियों का जनक है। मानवीय प्रज्ञा में जब वैज्ञानिक ज्ञान का समावेश हो जाता है, तब वह ‘प्रज्ञान’ का रूप ले लेती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के विज्ञान भवन में श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (नेशनल रिसर्चर्स मीट) 2026 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के विकास में ही देश का समग्र विकास निहित है। मध्यप्रदेश को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शोध समाज के विकास का आधार है और इसे आधुनिक, परिष्कृत तथा परिमार्जित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे परंपरागत धारणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि नवीन विचारों और वैज्ञानिक दृष्टि के साथ ऐसे शोध प्रस्तुत करें, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शोध सिर्फ़ एक शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, सामाजिक परिवर्तन और विकास का सशक्त माध्यम भी है। दुनिया के ज्ञान पर पश्चिम का प्रभाव पड़ा है। भारतीय संस्कृति भी इससे प्रभावित हुई। हमारी संस्कृति में एकल शोध की परंपरा कभी नहीं रही। शोध समाज आधारित होना चाहिए, जिसमें राष्ट्र के कल्याण की बात कही जाए। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान राष्ट्रीय शोधार्थी समागम के माध्यम से देश के शोधार्थियों को नई दिशा प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "Mahakal: The master of time" वेबसाइट का शुभारंभ, महाकाल ब्रोशर सहित मैपकास्ट द्वारा आयोजित होने वाले "41वें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन एवं विज्ञान उत्सव" के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा अनुसंधान परक लेखन पर आधारित सात पुस्तकों का भी विमोचन भी किया। राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की सहभागिता रही। आगामी 14 फरवरी तक चलने वाले इस समागम में शोध, विज्ञान और नवाचार के विविध आयामों पर विमर्श होगा। पूज्य आचार्य श्री मिथलेशनन्दिनीशरण महाराज ने कहा कि मध्यप्रदेश ने महाकाल की प्रतिष्ठा से विश्व को अवगत कराया है। हम दुनिया को सर्वस्व दे रहे हैं, क्योंकि हमारे पास महाकाल हैं। शोधार्थी एक प्रकार से बोधार्थी भी हैं, जो शोध हमें बोध तक न ले जाए, वो व्यर्थ है। मनुष्य का ज्ञान चिंतन आधारित है, न कि डाटा आधारित। डाटा का विश्लेषण करना तो मशीनों का काम है। हम पश्चिमी देशों से क्यों डरते हैं। पश्चिम की केवल आलोचना करने से कुछ नहीं होने वाला। हमें समग्र रूप से सभी दिशाओं में सोचते हुए शोध करना है। हमारे शोध को भारतीय संस्कृति और चरित्र मूलक होना चाहिए, प्रतिक्रिया पराणय न हो। कोई भी नया विचार नवाचार नहीं होता है। परंपराओं को अंगीकार करते हुए नया काम करना ही नवाचार है। वरिष्ठ लेखक एवं चिंतक श्री सुरेश सोनी ने बीज वक्तव्य में कहा कि भारत के भौगोलिक स्वरूप में वेद आधारित सांस्कृतिक परिदृश्य नजर आता है। भारत के पुनरोत्थान के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि इसमें विदेशी मूल्यों का प्रकटीकरण नहीं होना चाहिए। भारत में पिछले 150 से 200 सालों में यूरोप आधारित अकादमिक शिक्षा व्यवस्थाएं लागू की गईं। अब हमारे शोधार्थी कला, संस्कृति, न्याय, अर्थव्यवस्था जैसे अन्य विषयों पर भारतीय शिक्षा पद्धति आधारित शोध पर कार्य करें। इसमें भारतीय समग्रता को भी ध्यान में रखा जाए। अभी हमारी चिकित्सा पद्धति भौतिक है। आयुर्वेद शास्त्र में महर्षि चरक कहते हैं कि किसी पदार्थ के 5 स्तर- स्थूल, स्वरूप, सूक्ष्म, अवयव और अर्थत्व होते हैं। भारतीय दृष्टि के आधार पर हमें अध्ययन करना है और पूर्व की व्यवस्थाओं को वर्तमान मे कैसे नवाचारों के साथ उसे उपयोग करें। शोध करते समय इसी पर ध्यान देना है। भारतीय समाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष और भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मधुकर एस पड़वी ने कहा कि भारत के पुनरोत्थान के लिए हमारी सभ्यता और ज्ञान की पुन: प्रतिष्ठा करने की आवश्यकता है। हम अपने शोध कार्यों में किसी दूसरे देश की दृष्टि का अनुसरण न करें और स्वदेशी दृष्टि को अपनाएंगे। अनुसंधान व्यक्तिगत न होकर सहयोगात्मक होना चाहिए। उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान ने इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर के शोधार्थी शामिल हुए हैं। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारत केंद्रित परंपरा, संस्कृति और विरासत के शोध को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत @2047 का संकल्प लिया गया है। भारत केंद्रित शोध और शिक्षा के माध्यम से हम पुन: विश्व गुरू बनेंगे।  

टीम इंडिया का तूफानी प्रदर्शन, दूसरे मैच में नामीबिया के सामने 210 रनों की चुनौती

नई दिल्ली दिल्ली के अरुण जेलटी स्टेडियम में भारत और नामीबिया के बीच खेले जा रहे विश्व कप के मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 209 रन बनाए हैं। नामीबिया को अब निर्धारित 20 ओवरों में 210 रनों का विशाल स्कोर बनाना है। नामीबिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया लेकिन उसका यह फैसला सही साबित नहीं हुआ। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने शानदार शुरुआत की। संजू सैमसन ने आते ही 3 गगनचुंबी छक्के लगाए। वे 8 गेंदों में 22 रन बनाकर आउट हुए। उसके बाद ईशान किशन ने मोर्चा संभाला जिन्होंने 20 गेंदों में ताबड़तोड़ अर्धशतक जड़ा। वे 61 रन बनाकर आउट हुए। भारत की ओर से हार्दिक पांड्या ने 28 गेंदों में 52 रनों की पारी खेली। तिलक वर्मा ने 25 रन बनाए वहीं, सूर्यकुमार यादव 12 रन बनाकर आउट हुए। भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 9 विकेट के नुकसान पर 209 रन बनाए हैं। नामीबिया ने आखिरी दो ओवरों में शानदार गेंदबाजी की और भारत के एक के बाद एक विकेट लिए जिससे भारतीय टीम 209 रनों पर ही रुक गई। अब क्या 210 रनों के स्कोर का नामीबिया पीछा कर पाएगी जानने के लिए बने रहिए हमारे साथ।   पिछले मैच में कठिन पिच पर संघर्ष करने के बाद, भारतीय बल्लेबाज दिल्ली के छोटे मैदान पर अपनी छक्के लगाने की लय वापस पाने के लिए बेताब होंगे। संजू सैमसन को आज ओपनिंग का मौका मिल सकता है क्योंकि अभिषेक शर्मा पेट की बीमारी के कारण शायद न खेलें। वहीं, दूसरी ओर नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस ने अपनी टीम को बिना किसी डर के नामीबियाई अंदाज में लड़ने का आह्वान किया है। दर्शकों को एक हाई-स्कोरिंग मुकाबले की उम्मीद है।

डिजिटल जंग तेज: रूस ने अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कसा शिकंजा

रूस टेलीग्राम पर रोक लगाने के बाद रूस की पुत‍िन सरकार ने अमेर‍िकी सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म्‍स पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मीड‍िया र‍िपोर्टों के अनुसार, रूस में वॉट्सऐप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे लोकप्रिय अमेर‍िकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगा दी गई है। कहा जा रहा है क‍ि वहां लोग इन पॉपुलर ऐप्‍स को इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। बुधवार को रूस ने पॉपुलर मैसेजिंग ऐप Telegram पर रोक लगा दी थी। सरकार ऐसा इसलिए कर रही है, ताकि लोग सरकारी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने लगें। रूस की नियामक संस्था 'रोसकोमनाडजोर' ने सुरक्षा का हवाला देते हुए टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था। अब अमेरिका के बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी रोक लग गई है। इन वेबसाइट्स के डोमेन नाम को रूस के राष्ट्रीय डोमेन नेम सिस्टम (DNS) से हटा दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पुतिन सरकार ने सिर्फ अमेरिका के बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों पर भी रोक लगाई है। इससे प्रभावित हुई वेबसाइट्स में बीबीसी, डॉउचा वेले, रेडियो फ्री यूरोप रेडियो लिबर्टी शामिल हैं। इसके अलावा, टॉर ब्राउजर (Tor Browser) को भी ब्लॉक कर दिया गया है, जिसका इस्तेमाल गुमनाम ब्राउजिंग के लिए किया जाता था। राष्ट्रीय DNS सिस्टम इस्तेमाल करना हुआ अनिवार्य बता दें कि रूस में इंटरनेट सेवा देने वालों के लिए देश के राष्ट्रीय DNS सिस्टम का इस्तेमाल करना अनिवार्य हो गया है। यह सिस्टम Roskomnadzor नाम की सरकारी एजेंसी की निगरानी में काम करता है। सिस्टम का काम “सॉवरेन इंटरनेट” कानून के तहत इंटरनेट कंट्रोल को लागू करना है। क्यों उठाया रूस ने ये कदम? कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि रूस ने यह कदम देश में विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मीडिया वेबसाइट्स के इस्तेमाल को लगभग खत्म कर देने के लिए उठाया है। हालांकि, इससे रूस में रहने वाले लोग कई ग्लोबल सर्विस और खबरों के सोर्स से दूर हो गए हैं। वॉट्सऐप कॉल‍िंंग फीचर पर पहले से बैन बता दें कि रूस में पहले से ही वॉट्सऐप की कई सर्विस पर बैन लगा हुआ है। पिछले साल WhatsApp और Telegram की कॉलिंग फीचर पर रोक लगा दी गई थी। इसके अलावा, रूस ने दिसंबर में ऐपल के फेसटाइम और स्नैपचैट को भी देश में बैन कर दिया था।

पुलिस अधिकारियों की विधिक दक्षता बढ़ाने के लिये मध्‍यप्रदेश पुलिस अकादमी भोपाल में 2 दिवसीय सेमिनार संपन्न

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी भोपाल में विगत दिनों अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा सूचना का अधिकार अधिनियम विषयों पर आयोजित 2 दिवसीय सेमिनार का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस सेमिनार का मुख्‍य उद्देश्य अधिकारियों की विधिक समझ को सुदृढ़ करना, संवेदनशील प्रकरणों में विधि अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित करना तथा सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रभावी पालन के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। सेमिनार में मध्यप्रदेश पुलिस की विभिन्न इकाइयों से आए अधिकारियों को अधिनियमों के नवीनतम संशोधनों और माननीय न्यायालयों द्वारा दी गई कानूनी व्याख्याओं से अवगत कराया गया।साथ ही केस स्टडीज के माध्यम से जटिल प्रकरणों के प्रभावी क्रियान्वयन और विधिक प्रक्रियाओं के व्यावहारिक पक्षों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के उप निदेशक डॉ.  संजय कुमार अग्रवाल ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंटरनेशनल पैरा स्विमर श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया को दी बधाई

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के इंटरनेशनल पैरा स्विमर श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया को दुनिया के सबसे मुश्किल समुद्री चैनलों में से एक, न्यूज़ीलैंड के कुक स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार करने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पद्मश्री और तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड जीतने वाले श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया ने इतिहास रच दिया है। इस शानदार कामयाबी के साथ, वे कुक स्ट्रेट को जीतने वाले एशिया के पहले पैरा स्विमर बन गए हैं। उनकी यह असाधारण कामयाबी देश और मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। श्री सत्येन्द्र सिंह लोहिया के ज़बरदस्त जज़्बा और पक्का इरादा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत रहेगा।  

मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थ के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में मादक पदार्थों के अवैध निर्माण, तस्करी एवं खेती के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लगातार सख्त कार्यवाही की जा रही है। इसी कार्यवाही के परिणामस्वरूप राजगढ़ एवं नीमच जिले में की गई दो अलग-अलग बड़ी कार्रवाइयों में पुलिस ने 21 करोड़ 97 लाख रूपए से अधिक के मादक पदार्थ (एमडी ड्रग्‍स एवं अफीम के पौधे) जब्‍त किए है। नीमच- 9.76 क्विंटल अवैध अफीम के हरे पौधे जब्‍त — कीमत लगभग 97 लाख 60 हजार रूपए जिले की पुलिस चौकी जाट को 11 फरवरी को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि ग्रामलुहारिया जाटमें कपास की फसल की आड़ में अवैध अफीम की खेती की जा रही है। सूचना पर पुलिस द्वारा तकनीकी साधनों एवं ड्रोन सर्चिंग के माध्यम से पुष्टि कर कार्रवाई की गई।पुलिस टीम द्वारा मौके से 11,600 नग हरे पौधे (कुल वजन 09 क्विंटल 76 किलोग्राम) अफीम के पौधे जब्‍त किए गए। कुल बरामद किए गए है। जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 97 लाख 60 हजार रुपयेहै। आरोपी के विरूद्ध एनडीपीएस एक्‍ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। 

ढाका-वॉशिंगटन की डील ने बढ़ाई दिल्ली की चिंता? क्षेत्रीय राजनीति में हलचल

नई दिल्ली कपड़ा उद्योग बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इस रीढ़ को सहारा देते हैं भारत समेत सेंट्रल एशिया के कुछ देश. बांग्लादेश कपड़े बनाता है लेकिन इसके लिए कपास (Cotton) भारत सप्लाई करता है, लेकिन अब बांग्लादेश ने इसमें बड़े बदलाव की घोषणा कर दी है. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने 9 फरवरी को अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता किया था. आज यानी गुरुवार को बांग्लादेश में चुनाव हो रहे हैं और इस चुनाव से ठीक तीन दिन पहले यूनुस सरकार ने अमेरिका से व्यापार समझौता कर लिया. समझौते की वैधता पर कई सवाल खड़े हुए क्योंकि यूनुस सरकार ने समझौते को काफी सीक्रेट रखा और इसका ड्राफ्ट किसी के साथ शेयर नहीं किया गया. अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत बांग्लादेश भारत से कपास की खरीद को धीरे-धीरे कम करने जा रहा है. बांग्लादेश ने घोषणा की है कि भारत की जगह अब अमेरिका से कपास खरीदी जाएगी.   'बांग्लादेश के लिए गेमचेंजर साबित होगा अमेरिका से कपास की खरीद' बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के सूचना सलाहकार शफीकुल आलम ने एक इंटरव्यू में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को 'गेम चेंजर' बताया. उन्होंने कहा कि इससे बांग्लादेश को अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जो उसके लिए बेहद अहम है. अमेरिका ने बांग्लादेश से व्यापार समझौते के तहत टैरिफ में एक प्रतिशत की कटौती कर उसे 19% कर दिया है. कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देश वस्त्र उद्योग में बांग्लादेश के प्रतिस्पर्धी हैं और इन देशों पर भी अमेरिका ने 19% का ही टैरिफ लगाया है. साथ ही, अमेरिका ने कहा है कि अगर बांग्लादेश अपने कपड़े अमेरिकी कपास या मानव निर्मित फाइबर से बनाता है तो उस पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा यानी बांग्लादेश बिना किसी फीस के उसे अमेरिका में बेच सकेगा. भारत से बड़ी मात्रा में कपास खरीदता है बांग्लादेश बांग्लादेश का वस्त्र उद्योग काफी बड़ा है लेकिन वो कपड़ों के लिए पर्याप्त कपास या जरूरी धागे का उत्पादन नहीं कर पाता. इसके लिए वो भारत और सेंट्रल एशिया के देशों पर निर्भर है. लेकिन माना जा रहा है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद अब उसके सप्लायर्स में अमेरिका शीर्ष के देशों में शामिल हो जाएगा. 2024 में भारत ने बांग्लादेश को 1.6 अरब डॉलर का कपास धागा और लगभग 8.5 करोड़ डॉलर का मानव निर्मित फाइबर धागा बेचा था. इनका बड़ा हिस्सा जमीनी बंदरगाहों के रास्ते भेजा गया. लेकिन 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के तख्तापलट के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया. भारत ने शेख हसीना को राजनीतिक शरण दी जिसके बाद से रिश्ते और खराब हुए. इसे देखते हुए 13 अप्रैल 2025 को बांग्लादेश ने जमीनी रास्ते से भारतीय कपास के आयात पर रोक लगा दी. इसके जवाब में भारत ने 16 मई 2025 से बांग्लादेश के रेडीमेड गारमेंट्स समेत कई उत्पादों के जमीनी रास्ते से देश में एंट्री पर रोक लगा दी. बांग्लादेश भारत को सबसे अधिक रेडीमेड गारमेंट्स बेचता है. तनावपूर्ण रिश्तों के बीच बांग्लादेश ने भारत के बजाए अब अमेरिका से कपास खरीदने की योजना बनाई है. अमेरिका बांग्लादेशी कपड़ों का सबसे बड़ा बाजार भी है. ऐसे में बांग्लादेश मान रहा है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में कपास खरीद को शामिल करना टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए बहुत अच्छा फैसला साबित होगा. ब्रैक यूनिवर्सिटी के प्रमुख अर्थशास्त्री प्रोफेसर सलीम जहान ने द हिंदू से बात करते हुए कहा कि इस समझौते से अमेरिका के कपास उत्पादकों के लिए बांग्लादेश अब आकर्षक जगह बन गया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका का कपास भारत और मिस्र के कपास जैसी क्वालिटी वाला होगा या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है. उन्होंने कहा, 'टेक्सटाइल सेक्टर में कपास की क्वालिटी सबसे ज्यादा मायने रखती है. अगर अमेरिकी कपास स्टैंडर्ड पर खरी नहीं उतरी, तो अमेरिकी खरीदार भी हमारे कपड़े पसंद नहीं करेंगे.' प्रोफेसर जहान ने यह भी कहा कि अमेरिका बांग्लादेश से काफी दूर है और वहां से कपास के आने की वजह से उसका शिपिंग चार्ज काफी बढ़ सकता है जिससे टैरिफ में मिली छूट का फायदा कम हो जाएगा.

टी20 वर्ल्ड कप में सर्वाधिक विकेट लेने वाले नंबर-2 गेंदबाज बने एडम जांपा

कोलंबो एडम जांपा टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ियों की सूची में संयुक्त रूप से दूसरे पायदान पर पहुंच गए हैं। इस लेग स्पिनर ने अब तक टी20 वर्ल्ड कप में 40 विकेट हासिल किए हैं, जिसके साथ उन्होंने वानिंदु हसरंगा और राशिद खान की बराबरी कर ली है। इन तीनों ही गेंदबाजों ने टी20 वर्ल्ड कप में 40-40 विकेट हासिल किए हैं, जबकि शाहिद अफरीदी 39 विकेट के साथ इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर हैं। शीर्ष पर बांग्लादेश के शाकिब अल हसन हैं, जिन्होंने 50 विकेट अपने नाम किए। आयरलैंड के खिलाफ इस मुकाबले में एडम जांपा ने 4 ओवर गेंदबाजी करते हुए 23 रन देकर 4 विकेट निकाले। यह जांपा का टी20 वर्ल्ड कप में दूसरा ‘फोर-विकेट हॉल’ है। उन्होंने टूर्नामेंट में एक बार मैच में 5 विकेट भी निकाले हैं। कुल मिलाकर, जांपा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के 112 मुकाबलों में 20.56 की औसत से 143 विकेट लिए हैं। इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 विकेट खोकर 182 रन बनाए। इस टीम के लिए मार्कस स्टोइनिस ने सर्वाधिक 45 रन बनाए, जबकि मैट रेनेशॉ और जोश इंगलिस ने 37-37 रन का योगदान टीम के खाते में दिया। विपक्षी खेमे से मार्क अडायर ने सर्वाधिक 2 विकेट हासिल किए, जबकि मैथ्यू हम्फ्रीज, जॉर्ज डॉकरेल और हैरी टेक्टर ने 1-1 विकेट निकाला। इसके जवाब में आयरलैंड की टीम 16.5 ओवरों में 115 रन पर सिमट गई। इस टीम के लिए जॉर्ज डॉकरेल ने सर्वाधिक 41 रन बनाए, जबकि लॉरेन टकर ने 24 रन का योगदान टीम के खाते में दिया। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से नाथन एलिस और एडम जांपा ने 4-4 विकेट निकाले। एक विकेट मैथ्यू कुहनेमन के हाथ लगा। ऑस्ट्रेलियाई टीम 13 फरवरी को अपने अगले मुकाबले में इसी वेन्यू पर जिम्बाब्वे से भिड़ेगी, जो टी20 वर्ल्ड कप 2026 के उनके ग्रुप स्टेज का दूसरा मैच होगा। इस मुकाबले में जांपा के पास राशिद और हसरंगा से आगे निकलने का मौका होगा।  

अंतर्राष्ट्रीय बाघ शिकारी आदिन सिंह उर्फ कल्ला बावरिया को 4 वर्ष की सजा

भोपाल. अंतर्राष्ट्रीय बाघ शिकारी आदिन सिंह उर्फ कल्ला बावरिया को 4 वर्ष की सजा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर वन एवं वन्य-जीव संरक्षण के लिये लगातार समग्र प्रयास किये जा रहे हैं। इसी दिशा में कार्रवाई करते हुए स्टेट टाइगर फोर्स मध्यप्रदेश को वन्य-जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो भारत सरकार, नई दिल्ली से प्राप्त इन्टेलिजेंस इनपुट के आधार पर 18 अगस्त, 2023 को ग्यारसपुर विदिशा से कुख्यात अंतर्राष्ट्रीय बाघ शिकारी एवं तस्कर आदिम सिंह उर्फ कल्ला बावरिया को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ द्वारा की गयी सटीक विवेचना एवं वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर एकत्रित किये गये सबूतों तथा सहायक जिला अभियोजन अधिकारी नर्मदापुरम द्वारा ठोस पक्षों के आधार पर न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नर्मदापुरम द्वारा 11 फरवरी को सभी 3 आरोपियों को दोषी मानते हुए 4-4 वर्ष का सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने से दण्डित किया गया। वन विभाग द्वारा केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर तस्कर कल्ला बावरिया को नेपाल को सौंपने की कार्यवाही की जायेगी। इससे दक्षिण एशिया महाद्वीप में फैले इस अंतर्राष्ट्रीय गिरोह द्वारा बाघों के शिकार एवं उनके अवयवों की तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा भारत सरकार के माध्यम से एसएडब्ल्यूईएन (साउथ एशिया वाइल्ड लाइफ इन्फोर्समेंट नेटवर्क) मुख्यालय काठमांडू नेपाल से संपर्क कर कल्ला व उसके गिरोह के अन्य सदस्यों तथा अपराधों के संबंध में पड़ोसी देश नेपाल से जानकारी एकत्रित की, जिसमें नेपाल में भी वर्ष 2012 में कल्ला के विरुद्ध बाघ के शिकार व उसके अवयवों की तस्करी का प्रकरण दर्ज होना पाया गया। साथ ही पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में भी बाघ के शिकार एवं उसके अवयवों के अवैध व्यापार का एक प्रकरण वर्ष 2013 का पाया गया। कल्ला बावरिया को विगत कई वर्षों से कई राज्यों की पुलिस, वन विभाग एवं नेपाल सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (सीआईबी) तलाश रही थी। एसटीएसाएफ द्वारा उक्त आरोपी को प्रोडक्शन वारंट पर वन विभाग जिला अकोला महाराष्ट्र को सौंपा गया था। प्रकरण की अग्रिम विवेचना के दौरान पुजारी सिंह वल्द रामकुमार सिंह बावरिया निवासी होशियारपुर पंजाब एवं गिरोह की मुख्य कड़ी बाघ तस्कर एक महिला रिंडिक टेरोंपी निवासी असम को एसटीएसएफ द्वारा वर्ष 2025 में गिरफ्तार किया गया था।  

‘हिंदू अनुष्ठान रोके जाएं’ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दरगाह मैनेजमेंट को क्या मिला जवाब?

कर्नाटक सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (12 फरवरी) को कर्नाटक स्थित अलंद लाडले मशाइक दरगाह प्रबंधन की उस अर्जी पर सुनवाई करने से मना कर दिया जिसमें जिसमें दरगाह परिसर में हिंदू महाशिवरात्रि पूजा और दूसरे हिंदू रीति-रिवाजों पर रोक लगाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। दरगाह मैनेजमेंट ने भारत के संविधान के आर्टिकल 32 के तहत अर्जी दी थी, जो उन पार्टियों को राहत के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने की इजाज़त देता है जिनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। दरगाह प्रबंधन याचिका में दावा किया था कि दरगाह के धार्मिक स्वरूप को बदलने के लिए हर साल रणनीतिक तरीके से पूजा की अनुमति लेने की कोशिश की जा रही है। प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप कर दरगाह के मूल धार्मिक चरित्र को बनाए रखने की भी मांग की थी। हालांकि, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भी टिप्पणी की थी कि हर मामला सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट लाना उचित नहीं है, क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि हाई कोर्ट प्रभावी नहीं हैं। जब कल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची के सामने यह मामला आया, तो इस बेंच ने यह भी सवाल उठाया था कि पहले हाई कोर्ट जाने के बजाय आर्टिकल 32 की पिटीशन क्यों फाइल की गई। यह विवाद उस दरगाह से जुड़ा है जो 14वीं सदी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी (लाडले मशाइक) और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से संबंधित मानी जाती है। दरगाह परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग नाम से पहचानी जाने वाली एक संरचना भी मौजूद बताई जाती है। ऐतिहासिक रूप से इस स्थल पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय पूजा-अर्चना करते रहे हैं, हालांकि 2022 में यहां पूजा अधिकार को लेकर तनाव की स्थिति बनी थी। गौरतलब है कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2025 में 15 हिंदू श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि पर पूजा की अनुमति दी थी, जो भारी सुरक्षा के बीच सम्पन्न हुई थी। इससे पहले भी कोर्ट के आदेश पर सीमित संख्या में पूजा कराई गई थी। दरगाह प्रबंधन का कहना था कि बार-बार अंतरिम आदेश लेकर धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदलने की कोशिश की जा रही है, जो Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 के खिलाफ हो सकता है। इस कानून के तहत 15 अगस्त 1947 को किसी धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखना जरूरी माना गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई हाई कोर्ट में होने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला धार्मिक अधिकार, ऐतिहासिक दावों और कानून के संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।