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MP में रेल विकास को रफ्तार, उज्जैन बाइपास सहित कई योजनाएं स्वीकृत

भोपाल मध्य प्रदेश में रेल नेटवर्क को मजबूत करने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय रेलवे ने राज्य में कई महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन योजनाओं से न केवल ट्रेनों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि माल ढुलाई, क्षेत्रीय संपर्क और धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। उज्जैन बाइपास रेलवे लाइन को मंजूरी भारतीय रेलवे के अंतर्गत पश्चिमी रेलवे ने नईखेरी-चिंतामन गणेश को जोड़ने वाली 8.60 किलोमीटर लंबी उज्जैन बाईपास रेलवे लाइन को 189.04 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी है। यह परियोजना विशेष रूप से उज्जैन जंक्शन पर ट्रेनों के रिवर्सल की समस्या को समाप्त करेगी। अभी कई ट्रेनों को दिशा बदलने के लिए उज्जैन स्टेशन पर रुककर रिवर्सल करना पड़ता है, जिससे समय और परिचालन क्षमता दोनों प्रभावित होते हैं। बाईपास लाइन बनने से यह प्रक्रिया खत्म होगी और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी। सिंहस्थ 2028 और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा यह परियोजना वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के दौरान बेहतर रेल प्रबंधन और निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होता है। बायपास लाइन बनने से तीर्थयात्रियों को सीधे और तेज रेल संपर्क मिलेगा। साथ ही महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच और सुगम होगी। पितृ पर्वत से उज्जैन बायपास तक नया फोरलेन, सिंहस्थ से पहले तैयार होगी इंदौर-उज्जैन की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बल रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं से मालगाड़ियों की आवाजाही भी अधिक व्यवस्थित होगी, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। यात्रा समय में कमी, समयपालन में सुधार और भीड़भाड़ में कमी जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।  इन स्वीकृतियों को मध्य प्रदेश के रेल ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है  बेहतर संपर्क और विश्वसनीय सेवा से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।  

औषधीय पौधे में कैंसर का उपचार ढूंढने वाटिका पर खर्च होंगे 30 करोड़

भागलपुर. जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सूबे का पहला मेडिकल कॉलेज होगा, जहां हर्बल वाटिका बनेगी। दो माह के अंदर हर्बल वाटिका तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। हर्बल वाटिका तैयार होने के बाद छात्र आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच के संबंध पर शोध करेंगे। औषधीय पौधों पर अध्ययन कर कैंसर, हृदय रोग सहित अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार की संभावनाएं तलाशेंगे। कॉलेज परिसर में बनने वाली हर्बल वाटिका में बीएयू का सहयोग लिया जा रहा है। यह वाटिका बीएयू के वानिकी विभाग के अध्यक्ष की देखरेख में लगाई जा रही है। चालीस डिस्मिल जमीन पर लगेगी वाटिका मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अविलेश कुमार ने बताया कि कॉलेज के मुख्य भवन के पीछे, जहां एनिमल हाउस बनाया गया है, वहीं लगभग 40 डिस्मिल खाली जमीन है। इसी जमीन पर हर्बल वाटिका लगाने की योजना है। फार्माकोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. जीतेंद्र कुमार ने बताया कि हर्बल वाटिका में एलोवेरा, पुदीना, लेमनग्रास, लौंग, हरसिंगार, सप्तपर्णी, अजवाइन, अश्वगंधा, शतावर, तितराज, कपूर, शंखपुष्पी, शुगर क्योर, पत्थरचूर समेत 100 से अधिक औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। यहां लगाया जाने वाला प्रत्येक पौधा किसी न किसी रोग के उपचार में उपयोगी साबित होगा। आयुर्वेद एवं एलोपैथी के संबंधों पर होगा शोध इस वाटिका को बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद और एलोपैथी के संबंध को समझना है। डॉ. जीतेंद्र ने बताया कि यह वाटिका एमबीबीएस एवं फार्माकोलॉजी में पीजी कर रहे छात्रों के लिए बेहतर अनुभव लेकर आएगी। वाटिका की देखरेख की जिम्मेदारी फार्माकोलॉजी विभाग की होगी। फार्माकोलॉजी के छात्र यह अध्ययन करेंगे कि औषधीय पौधों से किस प्रकार की दवाएं बनाई जा सकती हैं। कई अंग्रेजी दवाएं भी औषधीय पौधों से बनती हैं। हृदय रोग के लिए दी जाने वाली दवा डिजिटलिस, फाक्सग्लोव नामक औषधीय पौधे की पत्तियों से बनती है। वहीं, यहां इस बात पर भी शोध होगा कि क्या औषधीय पौधों से कैंसर की दवा बनाई जा सकती है।

हर घर जल योजना से ग्राम कन्हारी में बदली पेयजल की तस्वीर

रायपुर. जल जीवन मिशन के तहत चल रही हर घर जल योजना से ग्रामीणों का जीवन काफी आसान हो गया है। कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल और बैगा जनजाति बहुल ग्राम कन्हारी में अब गांव के हर घर तक नल कनेक्शन के माध्यम से साफ और पर्याप्त पानी मिल रहा है, जिससे कई सालों पुरानी पेयजल की समस्या दूर हो गई है। इससे लोगों के जीवन में सुविधा, सुरक्षा और सम्मान की भावना बढ़ी है। पहले गांव के लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों को पानी लाने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था। वे कुएं, नाले और हैंडपंप पर निर्भर रहते थे, जिससे रोज कई घंटे मेहनत करनी पड़ती थी। इससे उनका समय और ऊर्जा दोनों खर्च होते थे और पढ़ाई, कामकाज और सेहत पर भी असर पड़ता था। अब हर घर में नल से पानी मिलने से यह परेशानी खत्म हो गई है। महिलाओं का समय बच रहा है, जिसे वे अब घर, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी कामों में लगा पा रही हैं। साफ और सुरक्षित पानी मिलने से गांव में पानी से होने वाली बीमारियां भी कम हुई हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिल रहा है। इससे इलाज पर खर्च भी कम हुआ है और लोगों का जीवन पहले से बेहतर हुआ है। ग्राम कन्हारी में यह योजना ग्राम पंचायत, जल समिति और ग्रामीणों के सहयोग से सफलतापूर्वक चल रही है। पानी की व्यवस्था और देखभाल भी गांव के लोग मिलकर कर रहे हैं, जिससे नियमित और सही मात्रा में पानी मिलता रहे। हर घर जल योजना ने ग्राम कन्हारी में सिर्फ पानी की सुविधा ही नहीं दी, बल्कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य, समय की बचत और सम्मान के साथ जीने का मौका भी दिया है। यह योजना जनजातीय क्षेत्रों में विकास का एक अच्छा उदाहरण बन गई है।

फतेहाबाद में 15 हजार पौधों के ‘हरित मॉडल’ से 4 डिग्री गिरा तापमान

फतेहाबाद. सिंचाई विभाग की खाली भूमि पर रोपे गए 15 हजार से अधिक पौधों से फतेहाबाद में विभागीय परिसरों का तापमान बाहर की तुलना में लगभग 4 डिग्री तक कम दर्ज हो रहा है। सघन हरियाली से विकसित यह क्षेत्र अब प्रदेश स्तर पर मॉडल बन गया है। विभाग ने निर्णय लिया है कि नहरों के किनारे और सिंचाई परिसरों की खाली पड़ी भूमि पर इसी तर्ज पर प्रदेशभर में वनीकरण किया जाएगा। इसके लिए मुख्यालय से सभी जिलों से उपलब्ध भूमि का विवरण मांगा गया है। इसके बाद खाली सरकारी भूमि पर ये ग्रीन कॉरिडोर बनेगा। इस मॉडल को समझने के लिए आपको बता दें कि फतेहाबाद के भूथनकलां, दरियापुर, चिम्मो, चांदपुरा और बलियावाला स्थित विश्राम गृहों, टोहाना नहर कॉलोनी तथा एसई आवास परिसर में पूर्व में बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया था। तब यहां रोपे गए आम, नीम, जामुन, अनार, किन्नू, अंजीर सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे अब विकसित वृक्ष बन चुके हैं। इसी का परिणाम है कि अब यहां हरियाली घनी होने से परिसर अपेक्षाकृत ठंडे रहते हैं और पक्षियों की संख्या में वृद्धि दर्ज हो रही है। पौधारोपण बनी परंपरा सिंचाई विभाग में पौधारोपण को नियमित गतिविधि का रूप दिया गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों के जन्मदिन तथा सेवानिवृत्ति जैसे अवसरों पर परिसर में पौधे लगाए जाते हैं। नहर किनारे खाली पड़ी सिंचाई विभाग की भूमि पर अब प्रदेशभर में चरणबद्ध वनीकरण लागू होगा। फतेहाबाद में विकसित हरित क्षेत्र अब प्रदेश स्तरीय मॉडल के रूप में अपनाया गया है, चलेगा अभियान। सघन वृक्षारोपण से विभागीय परिसर छायादार क्षेत्र में बदले और पक्षियों की संख्या में वृद्धि हुई। नहर पट्टियों पर योजनाबद्ध पौधारोपण को अतिक्रमण नियंत्रण रणनीति से भी जोड़ा गया है। यह प्रयोग अब पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है। सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने सभी जिलों से विभागीय भूमि की रिपोर्ट लेकर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। – ओपी बिश्नोई, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग, भिवानी ये मॉडल कितना अहम होगा इन तथ्यों से जानें अभी क्या है स्थिति न्यूनतम वन क्षेत्र वाला राज्य: भारत वन स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा का वन आवरण इसके कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का मात्र 1.60% है, जो देश में सबसे कम में से एक है। फतेहाबाद मॉडल जैसे प्रयास इस आंकड़े को सुधारने के लिए अनिवार्य हैं। वृक्षावरण: वन क्षेत्र के बाहर जो पेड़ों का समूह है, वह लगभग 1,425 वर्ग किलोमीटर (3.22%) हैं। नहरों के किनारे किया जा रहा पौधारोपण इसी श्रेणी को मजबूत करता है। क्या हासिल करेंगे 20% हरित लक्ष्य: हरियाणा सरकार ने अपने दीर्घकालिक लक्ष्य में राज्य के 20% हिस्से को हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया है। फतेहाबाद का ‘सिंचाई विभाग मॉडल’ इसी विजन का जमीनी क्रियान्वयन है। 75:25 का अनुपात: सरकार की हालिया नीतियों के अनुसार, सामुदायिक और सरकारी भूमि पर 75% छायादार और 25% फलदार/औषधीय पौधे लगाने पर जोर दिया जा रहा है, जैसा कि फतेहाबाद में किया गया (नीम, जामुन, किन्नू आदि)।

पैरा तैराक सतेंद्र लोहिया का कमाल, कुक स्ट्रेट पार कर बढ़ाया मध्य प्रदेश का मान

ग्वालियर मध्य प्रदेश के इंटरनेशनल पैरा स्विमर सतेंद्र सिंह लोहिया ने दुनिया के सबसे मुश्किल ओपन-वॉटर समुद्री चैनलों में से एक, न्यूजीलैंड के कुक स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार करके इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को उन्हें इस कामयाबी पर बधाई देते हुए कहा कि इस कामयाबी के साथ, पद्म श्री अवॉर्डी (2024) लोहिया कुक स्ट्रेट को पार करने वाले एशिया के पहले पैरा स्विमर बन गए हैं। अपनी खुशी जाहिर करते हुए, मुख्यमंत्री ने इस कामयाबी को देश और मध्य प्रदेश दोनों के लिए गर्व का पल बताया। यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पद्म श्री और तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्डी, मध्य प्रदेश के इंटरनेशनल पैरा स्विमर सतेंद्र सिंह लोहिया ने दुनिया के सबसे मुश्किल समुद्री चैनलों में से एक, न्यूजीलैंड के कुक स्ट्रेट को कामयाबी से पार करके इतिहास रच दिया है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं इस अनोखी कामयाबी के लिए उन्हें दिल से बधाई देता हूं। देश और मध्य प्रदेश के लिए यह गर्व का पल उनके जबरदस्त जज्बे और पक्के इरादे को दिखाता है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।” 38 साल के पैरा स्विमर, जिनके दोनों पैरों में चलने-फिरने की क्षमता कम है, ने अपने करियर में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उनमें से एक है मुंबई में 33 किलोमीटर का स्विम सर्किट 5 घंटे 42 मिनट में पूरा करना। मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल डिवीजन के भिंड जिले के गाटा गांव के रहने वाले लोहिया ने इससे पहले 2018 में एक टीम के साथ 36 किलोमीटर का इंग्लिश चैनल पार करके इतिहास रचा था। 2019 में, उन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स में कैटालिना चैनल पूरा किया। उन्होंने इंग्लिश चैनल की तैराकी 12 घंटे और 26 मिनट में पूरी की। अपनी उपलब्धियों के लिए, उन्हें 2020 में तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड मिला और उन्होंने कहा कि वह यह सम्मान पाने वाले पहले पैरा-एथलीट थे। लोहिया को 2014 में मध्य प्रदेश के सबसे बड़े राज्य-स्तरीय खेल सम्मान, विक्रम अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। 2021 में, उन्हें बेस्ट स्पोर्ट्सपर्सन का नेशनल अवॉर्ड मिला। खेलों में उनके योगदान के लिए, उन्हें 2024 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।  

लव लाइफ में तनाव की वजह कहीं आपका बेडरूम तो नहीं? जानिए 5 वास्तु टिप्स

क्या आप जानते हैं कि आपके और आपके पार्टनर के बीच होने वाले छोटे-मोटे झगड़ों की वजह सिर्फ आपसी मतभेद नहीं, बल्कि आपके बेडरूम का वास्तु दोषभी हो सकता है? जी हां, वास्तु शास्त्र के अनुसार, बेडरूम की ऊर्जा हमारी लव लाइफ की क्वालिटी को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। अगर बेडरूम में नकारात्मकता है, तो बिना बात के तनाव और दूरियां बढ़ने लगती हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं 5 ऐसे आसान वास्तु टिप्स, जो आपके रिश्तों में फिर से वही पुरानी ताजगी और रोमांस वापस ला सकते हैं। रिश्तों को मजबूत बनाने के 5 वास्तु उपाय 1. सही दिशा में हो सिरहाना: वास्तु के अनुसार, सोते समय आपका सिर हमेशा दक्षिण (South) दिशा की ओर होना चाहिए। दक्षिण दिशा में सिर करके सोने से शरीर की चुंबकीय ऊर्जा संतुलित रहती है, जिससे गहरी नींद आती है और मन शांत रहता है। जब आप शांत रहते हैं, तो पार्टनर के साथ बातचीत भी मधुर होती है। 2. शीशे की सही जगह: बेडरूम में बेड के ठीक सामने कभी भी शीशा (Mirror) नहीं होना चाहिए। वास्तु शास्त्र का मानना है कि सोते हुए व्यक्ति का प्रतिबिंब शीशे में दिखना स्वास्थ्य और वैवाहिक संबंधों के लिए अशुभ होता है। इससे तीसरे व्यक्ति के हस्तक्षेप की संभावना बढ़ती है और कलह पैदा होती है। अगर शीशा हटाना संभव न हो, तो रात को उसे किसी कपड़े से ढक दें। 3. रंगों का चुनाव: बेडरूम की दीवारों पर कभी भी गहरे या डार्क रंगों (जैसे काला या गहरा भूरा) का इस्तेमाल न करें। बेडरूम के लिए हल्का गुलाबी, क्रीम या आसमानी नीला रंग सबसे अच्छा माना जाता है। ये रंग प्रेम और शांति के प्रतीक हैं और मानसिक तनाव को कम करते हैं। 4. इलेक्ट्रॉनिक सामान से दूरी: आजकल बेडरूम में टीवी, लैपटॉप और मोबाइल का दखल बहुत बढ़ गया है। वास्तु के अनुसार, ये चीजें कमरे में तनाव पैदा करती हैं। कोशिश करें कि सोते समय मोबाइल फोन अपने बेड से दूर रखें और बेडरूम में इलेक्ट्रॉनिक्स कम से कम हों, ताकि आप एक-दूसरे को पूरा समय दे सकें। 5. ताजगी और सजावट: अपने बेडरूम के दक्षिण-पश्चिम कोने में गुलाबी रंग के फूलों का गुलदस्ता या दो हंसों के जोड़े की तस्वीर लगाएं। यह रिश्तों में वफादारी और जुड़ाव को बढ़ाता है। साथ ही, बेड के नीचे कबाड़ या जूते-चप्पल कभी न रखें, यह सकारात्मक ऊर्जा  के प्रवाह को रोकता है।  

जिला स्तरीय सरगुजा ओलंपिक के समापन समारोह में शामिल हुए आदिम जाति विकास मंत्री

रायपुर. आदिवासी अंचल की प्रतिभाओं को सरगुजा ओलंपिक से मिल रहा सशक्त मंच :  रामविचार नेताम आदिम जाति विकास तथा कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री  रामविचार नेताम के मुख्य आतिथ्य में बलरामपुर में जिला स्तरीय सरगुजा ओलंपिक का समापन हुआ। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा बलरामपुर के स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम विद्यालय के खेल मैदान में 10 फरवरी से 12 फरवरी तक इसका आयोजन किया गया था। इस तीन दिवसीय आयोजन में खेल प्रतिभाओं के उत्साह, कौशल और ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। राज्य में पहली बार आयोजित सरगुजा ओलंपिक ग्रामीण और शहरी खिलाड़ियों को अपनी क्षमता  और खेल कौशल प्रदर्शित करने का अच्छा मंच प्रदान कर रहा है। इसके जिला स्तरीय आयोजन के समापन में बलरामपुर पहुंचे आदिम जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने खिलाड़ियों के बीच पहुंचकर उनका उत्साहवर्धन किया। वे शंकरगढ़ और बलरामपुर की टीमों के बीच हो रहे बालिका रस्साकसी प्रतियोगिता स्थल पर पहुंचे और प्रतिभागियों से परिचय प्राप्त कर उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने तीरंदाजी प्रतियोगिता भी देखा और स्वयं तीरंदाजी में हाथ आजमाकर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने विजेता प्रतिभागियों को शील्ड और मेडल प्रदान किए। सरगुजा ओलंपिक के जिला स्तरीय आयोजन के समापन के अवसर पर  नेताम ने अपने संबोधन में कहा कि विकासखंड से लेकर जिला स्तर तक सरगुजा ओलंपिक का सुनियोजित एवं व्यवस्थित आयोजन सराहनीय है। सरगुजा ओलंपिक खेल प्रतिभाओं को निखारने का सशक्त मंच बन रहा है। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी अंचल के युवाओं को मिल रहे इस अवसर की महत्ता रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और आगे बढ़ने की दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने प्रतिभागी खिलाड़ियों को निरंतर अभ्यास कर संभाग एवं राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया। समापन समारोह में बलरामपुर के कलेक्टर  राजेंद्र कटारा, पुलिस अधीक्षक  वैभव बैंकर, जिला पंचायत की सीईओ मती नयनतारा सिंह तोमर, वनमंडलाधिकारी  आलोक वाजपेयी, पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य  कृष्णा गुप्ता, रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष  ओमप्रकाश जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष  लोधीराम एक्का, उपाध्यक्ष  दिलीप सोनी, जिला शिक्षा अधिकारी  एम.आर. यादव और जिला खेल अधिकारी  मारकूस कुजूर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी और खेलप्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद थे। इन खेलों में दिखा रहे कौशल सरगुजा ओलंपिक में सरगुजा संभाग के सभी 32 विकासखंडों के खिलाड़ी 12 खेलों में अपने खेल कौशल का प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें 5 व्यक्तिगत स्पर्धाएं और 7 दलीय खेल हैं। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में एथलेटिक्स (100, 200, 400 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो, 400 मीटर रिले), तीरंदाजी (इंडियन राउंड), बैडमिंटन, कुश्ती और कराटे शामिल रहे। वहीं दलीय खेलों में फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, रस्साकसी और बास्केटबॉल शामिल हैं। सभी प्रतियोगिताएं जूनियर वर्ग (14 से 17 वर्ष, बालक/बालिका) तथा सीनियर वर्ग (18 वर्ष से अधिक, महिला/पुरुष) में आयोजित की जा रही हैं।

कोंडागांव एवं फरसगांव में एक दिवसीय अग्नि सुरक्षा कार्यशाला आयोजित

रायपुर. कोंडागांव एवं फरसगांव में एक दिवसीय अग्नि सुरक्षा कार्यशाला आयोजित वन विकास निगम, जगदलपुर द्वारा 11 फरवरी को कोंडागांव एवं फरसगांव क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय अग्नि सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में क्षेत्रीय कर्मचारियों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।      कार्यशाला का उद्देश्य वन अग्नि से बचाव, सुरक्षा उपायों की जानकारी तथा आग लगने की स्थिति में त्वरित और सही कार्रवाई के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। अधिकारियों ने बताया कि वन में आग लगने के प्रमुख कारणों में जलती हुई बीड़ी-सिगरेट को लापरवाही से फेंक देना, तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान वृक्षों के नीचे आग लगाकर छोड़ देना तथा अन्य मानवीय असावधानियां शामिल हैं। इन घटनाओं को रोकने के प्रभावी उपायों की भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान कंट्रोल्ड बर्निंग (नियंत्रित आग) का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। साथ ही ब्लोअर मशीन के माध्यम से फायर लाइन कटाई का अभ्यास भी कराया गया, ताकि कर्मचारी आपात स्थिति में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें। अधिकारियों ने कहा कि समय रहते उचित कदम उठाने से बड़ी वन अग्नि घटनाओं को रोका जा सकता है। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम गांवों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। वन विकास निगम के अधिकारियों ने भविष्य में भी इस प्रकार के जनजागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने की बात कही।

ज्यादा गरम चाय-कॉफी से हो सकता है फूड पाइप को नुकसान, विशेषज्ञों ने बढ़ते कैंसर रिस्क पर किया अलर्ट

क्या आपके दिन की शुरुआत भी कप से निकलती हुई 'गरमा-गरम' भाप वाली चाय या कॉफी के साथ होती है? अगर हां, तो जरा ठहरिए, क्योंकि जिसे आप सुकून का पल समझते हैं, वह असल में आपकी सेहत के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। जी हां, न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि कैसे आपकी गरमागरम चीजें पीने की आदत आपको भविष्य में कैंसर के खतरे तक ले जा सकती है। चाय या कॉफी नहीं, तापमान है समस्या अक्सर लोगों को लगता है कि कुछ खास चीजों से ही कैंसर का रिस्क बढ़ता है, लेकिन लीमा महाजन का साफ कहना है कि समस्या चाय, कॉफी या खाने में नहीं, बल्कि उनके तापमान में है। जी हां, बहुत ज्यादा गरम चीजें पीना या खाना ही असली खतरा है। क्या होता है शरीर पर असर? जब हम बहुत ज्यादा गर्म खाना खाते हैं या खौलती हुई चाय पीते हैं, तो इससे हमारा फूड पाइप डैमेज होता है। अगर यह लगातार होता रहे, तो इससे 'इसोफेजस स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा' नामक बीमारी हो सकती है, जो एक टाइप का कैंसर है। क्या कहती है रिसर्च? न्यूट्रिशनिस्ट की मानें, तो 'इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर' (IARC) ने इसे स्पष्ट रूप से ग्रुप 2A कार्सिनोजेनिक की श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि बहुत ज्यादा गरम चीजों का सेवन कैंसर पैदा करने वाले कारणों में शामिल है। भविष्य के लिए चेतावनी यह बीमारी रातों-रात नहीं होती। ऐसा नहीं है कि आज आपने गरम चाय पी और कल आपको कैंसर हो जाएगा, लेकिन अगर आप अपनी इस आदत को नहीं बदलते हैं और लगातार बहुत गरम चीजों का सेवन करते रहते हैं, तो भविष्य में इसके होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए, लीमा महाजन का कहना है कि अपनी चाय को थोड़ा ठंडा होने दें और तभी उसका मजा लें।  

‘धुरंधर’ फिल्म पर बैन के बावजूद पाकिस्तान में धड़ल्ले से हो रही है पायरेटेड बिक्री

इस्लामाबाद   रणवीर सिंह की स्पाई थ्रिलर फिल्म धुरंधर पाकिस्तान में थिएट्रिकल रिलीज के दौरान बैन कर दी गई. हालांकि, लोगों ने फिल्म के ओटीटी पर आते ही बता दिया कि इस फिल्म का वो कितना इंतजार कर रहे थे. फिल्म नेटफ्लिक्स रिलीज हुई और पाकिस्टान में टॉप ट्रेंड करने लगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलीज के 12 दिनों के अंदर ही पाकिस्तान में इस फिल्म को 20 लाख से ज्यादा बार अवैध रूप से डाउनलोड किया गया. अब फिल्म को लेकर एक और खबर आ रही है. कराची की गलियों में आदित्य धर की इस फिल्म की पायरेटेड सीडी धड़ल्ले से बिक रही है. धुरंधर को भले ही पाकिस्तान और कुछ गल्फ देशों में सिनेमाघरों में रिलीज की इजाजत नहीं मिली, लेकिन फिल्म का क्रेज सीमाओं में बंधा नहीं. ओटीटी पर रिलीज के बाद यह स्पाई थ्रिलर अब पाकिस्तान के पायरेटेड बाजारों तक पहुंच चुकी है, जहां इसकी कॉपियां खुलेआम बेची जा रही हैं. न्यूजीलैंड के यूट्यूबर कार्ल रॉक ने कराची के रेनबो सेंटर का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें दुकानदार खुलेआम इस फिल्म की पायरेटेड डीवीडी बेचते नजर आ रहे हैं. कराची के बाजार में ‘धुरंधर’ का जलवा यूट्यूबर कार्ल रॉक ने जो वीडियो शेयर किया है उस वीडियो में वह एक दुकानदार से बात करते नजर आ रहे हैं. वह कहते हैं- ‘पाकिस्तान में इंडियन फिल्म्स बैन हैं, लेकिन देखिए क्या मिला, ये नई फिल्म है हिंदुस्तान से.’ दुकानदार से उन्होंने बात की और उसने कहा कि ये सबसे नई फिल्म है. 16 रुपए में बिक रही पायरेटेड CD कार्ल ने रणवीर सिंह का जिक्र करते हुए बताया कि वे सिंधी हैं और उनके दादा-परदादा विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए थे. फिर उन्होंने दुकानदार से पूछा, ‘ये फिल्म कितने की है?’ दुकानदार ने जवाब दिया, ‘सिर्फ 50 पाकिस्तानी रुपये’, यानी भारतीय मुद्रा में करीब 16 रुपये.’ कार्ल ने हैरानी जताते हुए कहा, ‘बहुत सस्ता है!’ वायरल हो रहा ये वीडियो, लोग कर रहे ऐसी बात अब यह वीडियो वायरल हो रहा है और सोशल मीडिया पर लोगों ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पर टिप्पणियां की हैं. एक यूजर ने लिखा, ‘दोनों देशों के बीच इतनी नफरत क्यों?’, जबकि दूसरे ने कहा, ‘पाकिस्तान में ये फिल्म भारत से ज्यादा हिट रही लगती है’. कुछ ने लिखा कि सियासी तनाव के बावजूद आम लोगों के बीच फिल्मों का प्यार खत्म नहीं हुआ है. बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर का रिकॉर्ड आदित्य धर के निर्देशन में बनी ‘धुरंधर’ 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई थी. इस फिल्म ने दुनियाभर में 1340 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन कर इतिहास रच दिया. महज 250-300 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का तमगा हासिल किया. रणवीर सिंह, संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर माधवन और अर्जुन रामपाल जैसे सितारों से सजी इस फिल्म ने ‘पुष्पा 2’ को भी पीछे छोड़ दिया है. अब ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की तैयारी फिल्म के सीक्वल ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की रिलीज डेट 19 मार्च 2026 तय की गई है. यह फिल्म यश की पैन-इंडिया फिल्म ‘टॉक्सिक’ से सीधी टक्कर लेगी. ट्रेड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दोनों फिल्मों के बीच जबरदस्त क्लैश होने वाला है. बुक माय शो के आंकड़ों के मुताबिक, ‘धुरंधर 2’ में 1.02 लाख से ज्यादा लोग इंट्रेस्टेड हैं, जबकि ‘टॉक्सिक’ में यह आंकड़ा 3.61 लाख है . पाकिस्तान और गल्फ देशों में क्यों नहीं हुई रिलीज बता दें कि ‘धुरंधर’ को पाकिस्तान और गल्फ देशों में थिएट्रिकल रिलीज के वक्त बैन कर दिया गया था. वजह थी फिल्म में पाकिस्तान के ल्यारी इलाके की सियासत, कंधार हाईजैक, 2001 संसद हमले और 26/11 मुंबई आतंकी हमलों जैसी संवेदनशील घटनाओं को दिखाया गया है.