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खाद्य सुरक्षा योजना में जुड़ेंगे नाम और शादी के बाद नहीं अटकेगा राशन

भरतपुर. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसए) के तहत चयनित परिवारों के राशन कार्ड में जो सदस्य अब तक जुड़ने से शेष रह गए थे, उनके नाम अब जोड़े जा सकेंगे। इसके लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू कर दी गई है। सरकार की ओर से यह प्रक्रिया पुन: शुरू किए जाने से हजारों परिवारों को राहत मिलेगी, जिनके यहां बच्चों का जन्म हुआ है या विवाह के बाद परिवार में नए सदस्य जुड़े हैं। जिला रसद अधिकारी पवन अग्रवाल ने बताया कि जारी निर्देशों के अनुसार परिवार का कोई भी सदस्य विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। शेष सदस्यों के नाम जनआधार एपीआई के माध्यम से राशन कार्ड में जोड़े जाएंगे। यदि जुड़ने वाले सदस्य के नाम पर एलपीजी गैस कनेक्शन है तो उसकी एलपीजी आईडी का विवरण भी आवेदन में दर्ज किया जा सकेगा। आवेदन जिला रसद अधिकारी, विकास अधिकारी अथवा अधिशासी अधिकारी के स्तर से अनुमोदित होने के बाद संबंधित सदस्य का नाम खाद्य सुरक्षा योजना में जोड़ा जाएगा। ई-केवाईसी कराना अनिवार्य इसके बाद 90 दिनों के भीतर सभी नए जुड़े सदस्यों की ई-केवाईसी कराना अनिवार्य होगा, ताकि उन्हें योजना का लाभ निर्बाध रूप से मिल सके। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, इसलिए पात्र लाभार्थियों को अनावश्यक रूप से ई-मित्र केंद्रों पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य आमजन को सुविधा देना और पारदर्शिता बढ़ाना है। साथ ही जिला रसद अधिकारियों को अपने अधीनस्थ प्रवर्तन स्टाफ को इस प्रक्रिया का प्रशिक्षण देने और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि काफी समय से यह सुविधा बंद थी, जिसे सरकार ने अब पुन: चालू कर दिया है। इससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र लाभार्थियों को समय पर पूरा अनाज और अन्य सामग्री प्राप्त करने में सुविधा होगी। यह बोले डीएसओ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत चयनित परिवारों के राशन कार्ड में शेष रह गए सदस्यों के नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जिन परिवारों में बच्चों का जन्म हुआ है या विवाह के बाद नए सदस्य जुड़े हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। पात्रता की जांच के बाद संबंधित सदस्यों को राशन कार्ड में जोड़ा जाएगा।

लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बनी जीत, बोले तारिक रहमान

ढाका बांग्लादेश चुनाव में मिली बंपर जीत के बाद पहली बार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) चीफ तारिक रहमान ने मीडिया के सामने देशवासियों का आभार जताया। उन्होंने इसे देश, लोकतंत्र और जनता की उम्मीदों की जीत करार दिया। बांग्ला संबोधन में रहमान ने कहा, "यह जीत बांग्लादेश की है, डेमोक्रेसी की है, और लोगों की उम्मीदों की है। मैं बांग्लादेश के लोगों को डेमोक्रेसी स्थापित करने में आई रुकावटों को पार करने के लिए बधाई देता हूं।" उन्होंने आगे कहा, "फासीवादी सरकार द्वारा संविधान और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की अनदेखी नाकाम हो गई है। हमारी सरकार अब पूरे देश में कानून और पक्की सुरक्षा व्यवस्था करेगी।" उन्होंने सत्ता की जवाबदेही का भरोसा दिलाया। बोले, "देश में डायरेक्ट वोटिंग के जरिए लोगों के प्रति जवाबदेह संसद और सरकार फिर से बनाई जा रही है। यह पक्का करने के लिए कि कोई भी बुरी ताकत देश में तानाशाही फिर से न ला सके और यह पक्का करने के लिए कि देश गुलाम देश न बन जाए, हमें एकजुट रहना होगा और लोगों की इच्छा का सम्मान करना होगा।" बीएनपी चेयरमैन तारिक रहमान ने आगे कहा, “बांग्लादेश के लोगों का बीएनपी पर दिखाया गया भरोसा दिखाता है कि नागरिकों का हम पर पूरा विश्वास है। इस भरोसे के जरिए, हम सभी बांग्लादेशियों के विकास और तरक्की के लिए अथक काम करेंगे। हमारे रास्ते और राय अलग हो सकते हैं, लेकिन देश हित में हमें एकजुट रहना होगा। मेरा पक्का मानना ​​है कि देश की एकता हमारी सामूहिक ताकत है।" तारिक रहमान ने विदेशी प्रेस से बात करते हुए अपनी मां और देश की पूर्व पीएम खालिदा जिया को भी याद किया। सभी पार्टियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि देश खालिदा जिया को बहुत याद कर रहा है। यह लोगों का जनादेश है और हम आप सभी को बधाई देते हैं। बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव हुए थे। कुल 297 सीटों के परिणाम घोषित किए गए। इनमें सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बीएनपी उभरी। जिसने 209 सीटें हासिल की। गठबंधन को कुल 212 सीटें मिलीं। नतीजतन एक बार फिर बांग्लादेश में बीएनपी सत्ता में वापसी कर रही है।

‘SP में गए नसीमुद्दीन से नहीं पड़ेगा असर’, प्रयागराज से बृजेश पाठक का दावा—2027 में BJP बनाएगी सरकार

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक प्रयागराज पहुंचे। जहां उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जमकर निशाना साधा। वहीं कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने की अटकलों पर यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने से बीजेपी पर कोई असर नहीं होगा। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दावा किया है कि 2027 में बीजेपी फिर से प्रचंड बहुमत से सत्ता में आएगी। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने वंदे मातरम् गीत पर आपत्ति जताने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् गीत को आजादी के दीवानों ने हंसते हुए गाया था, आजादी के दीवानों ने हंसते हुए वंदे मातरम् गीत गाकर फांसी के फंदे को चूम लिया था। ब्रजेश पाठक ने कहा आपत्ति करने वाले तुष्टिकरण की राजनीति कर रहें हैं, जबकि सच्चाई ये है कि हर भारतवासी वंदे मातरम् गीत को गाना चाहता है।  

सैकड़ों शिक्षकों को स्थाईकरण के लिए 6 महीने और करना होगा इंतजार!

बांसवाड़ा. अधिकारियों के आपसी सामंजस्य के अभाव के चलते जिले के सैकड़ों शिक्षकों की सांसें अटकी हुई हैं। शिक्षक भर्ती 2022 के तहत बांसवाड़ा में लगे तृतीय श्रेणी के लेवल-2 के 220 शिक्षकों के स्थाईकरण की फाइल चार माह से प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के दफ्तर में धूल फांक रही है। वहीं पड़ोसी जिले में यह काम परीविक्षा काल पूरा होते ही पूरा कर लिया गया है और शिक्षकों को समस्त परिलाभ मिलने भी शुरू हो गए हैं। जबकि बांसवाड़ा के शिक्षक वेतन वृद्धि, एरियर और अन्य सेवा लाभों से वंचित हो रहे हैं। शिक्षकों को डर सता रहा है कि यदि पंचायती राज चुनाव की आचार संहिता लग जाती है तो स्थाईकरण की फाइल कम से कम छह माह और अटक सकती है। यह है मामला शिक्षक भर्ती 2022 के तहत चयनित शिक्षक प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। उनका परीविक्षा काल अक्टूबर 2025 में पूर्ण होने के बाद प्रावधानों के अनुसार स्थाईकरण होना है, लेकिन चार माह बाद भी फाइल लंबित है। ये हो रहा है नुकसान स्थायीकरण में हो रही देरी का सीधा असर शिक्षकों की वेतन वृद्धि, एरियर और अन्य सेवा लाभों पर पड़ रहा है। समय पर स्वीकृति नहीं मिलने से शिक्षक आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। वहीं कई बार प्रकरण लंबित रहने पर बाद में विभाग को एरियर सहित एक साथ बड़ी राशि देनी पड़ती है। इससे विभाग का बजट भी प्रभावित होता है। 2 बार लेकर गई फाइल : डीईओ स्थायीकरण का काम हमारी तरफ से नवंबर में ही पूरा हो गया है। पहली बार 30 नवंबर और दूसरी बार 10 फरवरी को फाइल भेजी गई। पर दोनों बार कलक्ट्रेट में कहा गया कि डीईसी की बैठक होगी, तब बताएंगे। डीईओ कार्यालय ने पूरा काम कर दिया है। – शम्मे फरोजा बतुल अंजूम, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, बांसवाड़ा फाइल देंगे, तो बुला लेंगे मीटिंग : सीईओ हमारे पास स्थायीकरण की कोई फाइल नहीं आई है। फाइल आएगी तो तुरंत जिला स्थापना समिति की बैठक बुला लेंगे। फाइल मेरी टेबल पर देंगे, तो कार्रवाई करेंगे। – गोपाललाल स्वर्णकार, सीईओ, जिला परिषद, बांसवाड़ा

दुबई में बड़ा विवाद: ‘100% रशियन महिला’ बयान पर हंगामा, टॉप अधिकारी ने छोड़ी कुर्सी

दुबई दुनिया के कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से कथित संबंधों को लेकर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच दुबई की एक प्रमुख बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स कंपनी के शीर्ष अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम उस वक्त उठाया गया, जब वैश्विक निवेशकों ने कंपनी में निवेश रोकने की चेतावनी दे दी थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस्तीफा देने वाले अधिकारी को दुबई के शासक का बेहद करीबी और उनका “राइट हैंड” माना जाता था। हाल ही में सार्वजनिक हुए एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में उनके नाम का उल्लेख सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े हो गए। इन दस्तावेजों में कथित तौर पर एपस्टीन के साथ कारोबारी अवसरों पर बातचीत, निजी मुलाकातों और महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक चर्चाओं का जिक्र है।रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इन बातचीतों में एक बार “100% रशियन महिला” का संदर्भ आया था, जिसने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दीं। इसके साथ ही एपस्टीन नेटवर्क से जुड़े कथित टॉर्चर वीडियो और महिलाओं के शोषण के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया।जैसे ही विवाद की आंच कंपनी तक पहुंची, कई अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और कारोबारी साझेदारों ने साफ कर दिया कि जब तक नेतृत्व स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती, वे निवेश पर पुनर्विचार करेंगे। इसके बाद कंपनी के बोर्ड ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शीर्ष अधिकारी का इस्तीफा स्वीकार किया और नए नेतृत्व की नियुक्ति का ऐलान किया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम सिर्फ एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि एपस्टीन कांड की गूंज अब वैश्विक कॉरपोरेट और राजनीतिक गलियारों में भी तेज़ी से सुनाई दे रही है। खाड़ी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कारोबारी संस्थाओं पर पारदर्शिता और जवाबदेही का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

रांची में वायु प्रदूषण रोकने एंटी स्माग गन और स्प्रिंकलर तथा मशीनों की होगी खरीदी

रांची. शहर की परिवेशी वायु गुणवत्ता को सुदृढ़ और नियंत्रित बनाए रखने के उद्देश्य से गठित सिटी लेवल इंप्लीमेंटेशन कमिटी की 11वीं बैठक शुक्रवार को रांची नगर निगम सभागार कक्ष में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रशासक सुर्शात गौरव ने की। इस दौरान एविएंट एयर क्वालिटी इंप्रूवमेंट के तहत अब तक किए गए कार्यों, व्यय और प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में रांची जैसे शहरी क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए गैप असेसमेंट कराने का निर्णय लिया गया। इसके आधार पर एंटी-स्माग गन, स्प्रिंकलर और मैकेनिकल स्विपिंग मशीन की खरीद के लिए नए प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया, ताकि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लक्ष्य को प्रभावी रूप से हासिल किया जा सके। निर्माण स्थलों से फैलने वाले धूल प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए सभी निर्माणाधीन भवनों और कंस्ट्रक्शन साइट्स को ग्रीन शॉट से ढकना अनिवार्य किया गया। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम की गाइडलाइंस के अनुरूप कार्य सुनिश्चित करने और उल्लंघन की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। हरित आवरण बढ़ाने पर जोर हरित आवरण बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए प्रशासक ने हार्टिकल्चर शाखा को निगम क्षेत्र में उपयुक्त स्थलों की पहचान कर अधिकतम वृक्षारोपण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही शहर के विभिन्न हिस्सों में वैज्ञानिक पद्धति से वायु गुणवत्ता की जांच के लिए रूट प्लान तैयार करने और एंबिएंट एयर क्वालिटी मानिटरिंग के लिए टीम गठन करने का निर्णय लिया गया। बैठक में ई-व्हीकल को प्रोत्साहन देने, स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित करने तथा उपलब्ध फंड्स का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की रणनीति तैयार करने पर भी बल दिया गया। वायु प्रदूषण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों, कालेजों और सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक आइईसी गतिविधियां आयोजित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में उप प्रशासक गौतम प्रसाद साहू, सहायक प्रशासक, नगर प्रबंधक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रांची वन प्रमंडल, बीआईटी मेसरा के प्रतिनिधि सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। रांची नगर निगम ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सामूहिक प्रयास करें, अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें और शहर को स्वच्छ, सुंदर एवं रमणीय बनाए रखने में सक्रिय सहयोग दें।

कैबिनेट का बड़ा फैसला: ‘अर्बन चैलेंज फंड’ से बदलेंगे शहरों के विकास की तस्वीर

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को भारतीय शहरों की सूरत बदलने के लिए 'अर्बन चैलेंज फंड' (UCF) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में ₹1 लाख करोड़ की सहायता राशि प्रदान करेगी। सरकार का लक्ष्य इस फंड के जरिए 2031 तक शहरी बुनियादी ढांचे में कुल ₹4 लाख करोड़ का निवेश जुटाना है। फंडिंग का बदला अंदाज यह योजना भारत के शहरी विकास में एक बड़े बदलाव का संकेत है। अब शहर केवल सरकारी Grants पर निर्भर नहीं रहेंगे। केंद्र सरकार किसी भी प्रोजेक्ट की लागत का केवल 25% हिस्सा देगी। शहरों को प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए कम से कम 50% रकम बाजार (बैंक लोन, म्युनिसिपल बॉन्ड या प्राइवेट निवेश) से जुटानी होगी। शेष 25% हिस्सा राज्य सरकार या नगर निगम को वहन करना होगा। शहरों के बीच होगी 'टक्कर' फंड के लिए शहरों का चयन 'चैलेंज मोड' के जरिए होगा। इसका मतलब है कि जिन शहरों के प्रोजेक्ट प्रस्ताव सबसे प्रभावी, सुधारवादी और परिणामोन्मुखी होंगे, उन्हें ही फंडिंग मिलेगी। यह फंड 2030-31 तक चालू रहेगा और भविष्य में इसे 2034 तक बढ़ाया जा सकता है। पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए विशेष कवच छोटे शहरों और पहाड़ी राज्यों (North-East) की मदद के लिए सरकार ने ₹5,000 करोड़ का एक विशेष कॉर्पस बनाया है। यह उन नगर निकायों के लिए 'क्रेडिट गारंटी' का काम करेगा जो पहली बार बाजार से कर्ज ले रहे हैं। इसका उद्देश्य इन निकायों को इतना मजबूत बनाना है कि वे खुद निवेश जुटाने में सक्षम हो सकें। किन कामों पर होगा खर्च? इस फंड का मुख्य फोकस तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा:     शहरों को आर्थिक विकास का हब बनाना।     पुराने शहरी केंद्रों और हेरिटेज साइट्स का पुनर्विकास।     जल आपूर्ति और स्वच्छता प्रणालियों में सुधार (जैसे सीवेज नेटवर्क, कचरा प्रबंधन और बेहतर परिवहन)।  

पत्रकारों को रेल यात्रा की रियायतें पुनः बहाल हों: सांसद नीरज डांगी

आबूरोड/सिरोही. सांसद नीरज डांगी ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान देश के लोकतांत्रिक ढांचे के चौथे स्तंभ-पत्रकारिता से संबंधित, संवेदनशील एवं जनहित से सीधे जुड़े विषय की ओर ध्यान आकर्षित किया। सांसद डांगी ने बताया कि कोविड-19 महामारी से पूर्व भारतीय रेल की ओर से पत्रकारों को दी जा रही यात्रा रियायतें महामारी के दौरान स्थगित की गई थीं। सांसद डांगी ने बताया कि महामारी के दौरान स्थगित करना उस समय की परिस्थितियों में एक अस्थायी एवं व्यावहारिक निर्णय था, लेकिन खेद का विषय है कि देश में सामान्य स्थिति बहाल होने, सभी आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियां सुचारू रूप से प्रारंभ होने तथा अन्य श्रेणियों को दी गई रियायतें फिर लागू होने के बावजूद पत्रकारों की यह महत्वपूर्ण सुविधा आज तक बहाल नहीं की गई है। सांसद डांगी ने कहा कि पत्रकार केवल समाचार संकलन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे देश के दूर-दराज़, दुर्गम एवं संवेदनशील क्षेत्रों में जाकर आम नागरिकों की समस्याओं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, आपदाओं, सामाजिक असमानताओं तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। कई बार उन्हें सीमित संसाधनों, जोखिमपूर्ण परिस्थितियों और समयबद्ध दबावों में कार्य करना पड़ता है। ऐसे में भारतीय रेल की ओर से दी जाने वाली यात्रा रियायतें किसी प्रकार का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि उनके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायक एक आवश्यक सुविधा रही हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना के अनुरूप नहीं सांसद डांगी ने कहा कि पत्रकारों को यात्रा रियायतों से वंचित रखना अप्रत्यक्ष रूप से उनकी कार्यक्षमता को सीमित करता है और यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना के अनुरूप नहीं कही जा सकती। विशेष रूप से छोटे एवं स्वतंत्र पत्रकार, ग्रामीण एवं क्षेत्रीय मीडिया से जुड़े संवाददाता इस निर्णय से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। लोकतंत्र सशक्त, जीवंत और उत्तरदायी लोकतंत्र तब ही रह सकता है जब उसकी आवाज़ निर्भय, स्वतंत्र और निर्बाध हो। सांसद डांगी ने सरकार से मांग की है कि कोविड-19 महामारी से पूर्व भारतीय रेल की ओर से पत्रकारों को प्रदान की जा रही सभी यात्रा रियायतों को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए। मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी एवं स्थायी नीति का निर्माण किया जाए, जिससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में उनके अधिकारों एवं सुविधाओं की अनावश्यक समाप्ति ना हो। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस नीति का लाभ वास्तविक एवं सक्रिय पत्रकारों तक सरल प्रक्रिया के माध्यम से पहुंचे।

BNP की बड़ी जीत के बाद भारत को संदेश—PM मोदी का आभार जताते हुए कहा, अब संबंध होंगे और मजबूत

ढाका बांग्लादेश में संसदीय चुनाव में शानदार जीत के बाद Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के बधाई संदेश के लिए सार्वजनिक रूप से आभार जताया है। पार्टी ने इसे भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। BNP ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पार्टी प्रमुख Tarique Rahman के नेतृत्व को मिली मान्यता का वह स्वागत करती है। पार्टी ने कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता के भरोसे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास को दर्शाती है। BNP ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि वह लोकतांत्रिक शासन, समावेशिता और राष्ट्रीय विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पार्टी ने संकेत दिया कि आने वाले समय में नई सरकार भारत के साथ रचनात्मक और सहयोगपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाना चाहती है। BNP ने कहा कि वह भारत के साथ पारस्परिक सम्मान, एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता और क्षेत्रीय शांति, स्थिरता एवं समृद्धि के साझा लक्ष्य के आधार पर काम करने को तैयार है।   इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को उनकी पार्टी की निर्णायक जीत पर बधाई दी थी और कहा था कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में हमेशा खड़ा रहेगा। 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक माने जा रहे हैं। यह चुनाव 2024 के जन आंदोलनों के बाद पहला था, जिनके चलते लंबे समय से सत्ता में रहीं Sheikh Hasina को पद छोड़ना पड़ा था। चुनाव में BNP ने 300 सीटों वाली संसद में बहुमत हासिल कर सत्ता में वापसी की है, जबकि जमात-ए-इस्लामी गठबंधन मुख्य विपक्ष के रूप में उभरा है।  

पटना मेडिकल कॉलेज में अब हफ्ते में सिर्फ 3 दिन होगी खून की जांच

पटना. बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) में कई महत्वपूर्ण ब्लड जांच अब सप्ताह में केवल तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को ही की जाएंगी। इस संबंध में राजेंद्र सर्जिकल वार्ड स्थित पैथोलाजी विभाग में सूचना चस्पा कर मरीजों और उनके स्वजन को अवगत कराया गया है। हालांकि, पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने मामले से अन्यभिज्ञता जताई है। उन्होंने कहा कि शनिवार को समीक्षा करेंगे। सभी बिन्दुओं पर कार्रवाई कर सभी तरह की उपयोगी जांच को हर दिन सैंपल की जांच सुनिश्चित कराई जाएगी। सूचना के अनुसार एफटी3, एफटी4, टी3, टी4, टीएसएच, विटामिन-डी, विटामिन-बी12, एंटी-सीसीपी, प्रोलैक्टिन तथा पीएसए (फ्री व टोटल) जैसी जरूरी जांच अब निर्धारित तीन दिनों में ही होंगी। पहले ये जांच अधिक दिनों में की जाती थीं। अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं और चिकित्सकों द्वारा इन जांचों की सलाह भी काफी मरीजों को दी जाती है। ऐसे में तय दिनों के अलावा आने वाले मरीजों को अगली तिथि तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। बताया जाता है कि पैथलाजी विभाग में डॉक्टरों की कमी है, फैकेल्टी की कमी है। मामले से विभाग को भी अवगत कराया जाएगा। दूर-दराज से आने वालों पर अतिरिक्त बोझ मरीजों और परिजनों का कहना है कि सीमित दिनों में जांच होने से लंबी कतारें लग रही हैं। खासकर ग्रामीण व दूर-दराज जिलों से आने वाले मरीजों को दोबारा अस्पताल आना पड़ रहा है, जिससे समय और आर्थिक खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। कई मामलों में जांच रिपोर्ट में देरी से उपचार शुरू होने में भी विलंब हो रहा है। संसाधनों पर दबाव बनी वजह अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मरीजों की बढ़ती संख्या और उपलब्ध संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण जांच की समय-सारिणी सीमित करनी पड़ी है। पीएमसीएच में पुनर्निर्माण के बाद बेड क्षमता और सुविधाओं में विस्तार की प्रक्रिया जारी है, लेकिन मानव संसाधन की कमी अभी भी चुनौती बनी हुई है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है और कई मामले अभी उनकी संज्ञान में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जांच व्यवस्था को लेकर मिली जानकारी के आधार पर स्थिति की समीक्षा की जाएगी और समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि कई विभागों में मानव संसाधन की कमी है, जिसे दूर करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद सुधार की मरीजों को उम्मीद है कि जांच सेवाएं जल्द सामान्य होंगी, ताकि आवश्यक परीक्षण समय पर हो सकें और उपचार में देरी न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सरकारी अस्पतालों में संसाधन और मानवबल के संतुलन के बिना गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना कठिन होता है।